पश्चिम बंगाल की सीएम की अपील को मिला समर्थन, बड़ी बजट वाली पूजा समितियों ने छोड़ा सरकारी अनुदान

कोलकाता। कोलकाता की कई बड़े बजट वाली सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने समितियों से राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को स्वेच्छा से लेने से इनकार करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को इस वर्ष के लिए प्रत्येक सामुदायिक दुर्गा पूजा समिति को राज्य सरकार द्वारा 1,00,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा की थी। उन्होंने उन बड़े बजट वाली पूजा समितियों से भी अपील की, जो राज्य सरकार की सहायता के बिना भी अपने आयोजनों को सफलतापूर्वक चलाने में सक्षम हैं, वे स्वेच्छा से राज्य सरकार का अनुदान स्वीकार करने से इनकार कर दें। इस मामले में मध्य कोलकाता की संतोष मित्रा स्क्वायर समिति के प्रमुख संरक्षक और भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष ने कहा, “हमने हमेशा सरकारी सहायता लेने से इनकार किया है और सैद्धांतिक रूप से ऐसे उपायों का विरोध किया है, लेकिन इस बार अगर इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद और योग्य लोगों तक पहुंच रहा है, तो यह निश्चित रूप से एक स्वागत योग्य कदम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जानकर अच्छा लगता है कि हमें वैचारिक मतभेदों के कारण उपयोगी पहल का विरोध नहीं करना पड़ रहा है। जब सही लोगों को लाभ मिलता है, तो हमें राजनीति से परे, इस अच्छे काम की सराहना करनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में भाजपा की राज्य प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह तर्क बिल्कुल सही है कि राज्य सरकार का पूजा अनुदान कम बजट वाली पूजाओं के लिए होना चाहिए, जिनके लिए यह दान बहुत मायने रखता है। कीया घोष दक्षिण कोलकाता के कस्बा में राजडांगा नबा उदय संघ पूजा से समिति के अध्यक्ष के रूप में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री का छोटे-बड़े सभी पूजा-पाठों के प्रति समर्थन दिखाने के लिए तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं। पूजा समितियों के बिजली बिल पर शत प्रतिशत छूट देना निसंदेह एक स्वागत योग्य कदम है। राजडांगा नबा उदय संघ में हमने इस बार कुछ अलग सोचा है। हम यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे।” कुछ अन्य मेगा-बजट पूजा समितियों ने भी मुख्यमंत्री की अपील का जवाब देते हुए स्वेच्छा से राज्य सरकार का अनुदान लेने से इनकार कर दिया, जिनमें उत्तरी कोलकाता के ताला प्रत्यय क्लब और फूलबागान सर्वजनिन और दक्षिणी कोलकाता के संतोषपुर लेक पल्ली क्लब शामिल हैं।

बिहार : रविशंकर प्रसाद ने सम्राट चौधरी से जमींदारी बांधों की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने की मांग की

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पुनपुन और दरधा नदियों से जुड़े पुराने जमींदारी बांधों की तत्काल मरम्मत और उनकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से इन बांधों की समुचित मरम्मत नहीं होने के कारण वे कमजोर हो गए हैं और बाढ़ के दौरान कई जगहों पर टूटने से गांवों में पानी फैल रहा है। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि गंगा, दरधा और अन्य सहयोगी नदियों में आई बाढ़ के कारण वह पिछले कई दिनों से अपने क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान लोगों की समस्याओं को समझने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्परता से काम कर रहा है और उसका पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने पत्र में कहा कि क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पुनपुन नदी के पुराने जमींदारी बांधों की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। ये बांध काफी कमजोर हो गए हैं और उनकी ऊंचाई भी कम है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में वृद्धि के दौरान इन बांधों पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। कई स्थानों पर बांध टूटने से आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी फैल जाता है। भाजपा सांसद ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए फतुहा और पुनपुन नदी से जुड़े क्षेत्रों में पुराने जमींदारी बांधों की मरम्मत कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बांधों की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत भी बताई। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी पत्र लिखा है। इसके अलावा उन्होंने गौरीचक से अलावलपुर और जमुनापुर जाने वाले मार्ग की समस्या भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाई। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान यह रास्ता डूब जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। उन्होंने इस सड़क की ऊंचाई बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि बाढ़ की स्थिति में भी लोगों का आवागमन सुचारू रूप से जारी रह सके।

मौलाना तौकीर की जमानत याचिका खारिज होने पर भाजपा ने कहा-देशविरोधी मानसिकता वालों के लिए कोई जगह नहीं

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज किए जाने, सहारनपुर मस्जिद विध्वंस विवाद, 2027 के यूपी चुनावों पर राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज किए जाने पर मंत्री नरेंद्र कश्यप ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “तन से सिर जुदा करने वाले बयान देने वाले अपराधी की जमानत याचिका खारिज कर हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि इस तरह की अपराधिक प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सपा सांसद इकरा हसन द्वारा सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर एकतरफा बताए जाने पर कश्यप ने कहा, “कानून प्रक्रिया के अनुसार मस्जिद पर कार्रवाई की गई है। मस्जिद के नीचे कुआं मिला है। इसका साफ मतलब है कि मस्जिद को अवैध रूप से बनाया गया था। इस कार्रवाई से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून अपना काम करेगा।” मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “किसी भी जनसभा या पीडीए की बैठक से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता 2012-17 की सरकार के दौरान राज्य में हुई उथल-पुथल को भूली नहीं है। लोग मुज्जफरनगर दंगे, रामपुर की घटनाएं और हिंदुओं पर हुए हमले, उनकी अनदेखी और अपमान को नहीं भूले हैं। जनता सड़कों पर महिलाओं और लड़कियों के साथ बदसलूकी की घटनाओं, या किसानों और आम लोगों को घर से निकलने में हुई दिक्कतों को भी नहीं भूली है।” केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ ने देश भर में पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि पर नरेंद्र कश्यप ने कहा, “यह निश्चित रूप से गर्व की बात है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लोकसभा क्षेत्र और अटल बिहारी वाजपेयी के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ को योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में स्वच्छता के मामले में नंबर एक स्थान पाने का अवसर मिला है।” सहारनपुर में मस्जिद के नीचे कुआं मिलने पर मंत्री अनिल राजभर ने कहा, “कोर्ट के आदेश पर मस्जिद का ध्वस्तीकरण किया गया है। अगर समावादी पार्टी को सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति है, तो कोर्ट में अपील करना चाहिए, ढोंग नहीं करना चाहिए। अखिलेश यादव बेवजह जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज करने पर अनिल राजभर ने कहा, “देश विरोधी नारों और आतंकवादी मानिसकता का देश में कोई जगह नहीं है। कोर्ट के आदेश को देश और प्रदेश को आदर करना चाहिए। जो भी देश तोड़ने की कोशिश करेगा, उसके लिए भारत में कोई जगह नहीं है। हम कोर्ट के आदेश का आदर और सम्मान करते हैं।

आयुष विभाग के छात्रों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

लखनऊ। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आयुष छात्रों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के घर के बाहर पहुंचकर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की। उनका कहना है कि 2011 से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है और उन्हें एमबीबीएस व बीडीएस डॉक्टरों के बराबर स्टाइपेंड मिले। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की छात्रा मारिया ने कहा, “हम अपना स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हम लोग सरकार का विरोध करने नहीं, बल्कि आग्रह करने आए हैं। हम लोग मरीजों की उतनी ही देखभाल करते हैं, जितना एलोपैथ के डॉक्टर करते हैं। ऐसे में अगर हम बराबर काम कर रहे हैं तो पेमेंट भी समान मिलना चाहिए। हमारी सरकार से मांग है कि स्टाइपेंड में बढ़ोत्तरी करे।” जलज कुमार यादव ने कहा, “पिछले 15 सालों से हमारी स्टाइपेंड नहीं बढ़ाई गई है। अभी भी स्टाइपेंड 7500 रुपये मिलते हैं। 2011 में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष के छात्रों की स्टाइपेंड समान थी। इसके बाद एमबीबीएस और बीडीएस के छात्रों की स्टाइपेंड दो बार बढ़ चुकी है लेकिन आयुष छात्रों पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टाइपेंड बढ़ाने के नाम पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। निवेदिका सिंह ने कहा, “हमारी मांग है कि स्टाइपेंड 7500 से बढ़ाकर 25 हजार की जाए। कई साल से हमें स्टाइपेंड सिर्फ 7500 रुपये मिल रहे हैं जबकि अन्य कोर्स में स्टाइपेंड बढ़ाए जा रहे हैं। हमारी मांग है कि उत्तर प्रदेश सरकार अन्य कोर्सों के छात्रों के बराबर स्टाइपेंड दे। इस तरह की मांग पहले भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है। उपमुख्यमंत्री से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते हैं।” लव प्रभात ने कहा, “पिछले 15 सालों से हमारे स्टाइपेंड में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। इन 15 वर्षों में बीडीएस और एमबीबीएस छात्रों के स्टाइपेंड में 2 बार वृद्धि हो चुकी है। हम लोग भी ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में अन्य विभाग के छात्रों के बराबर काम करते हैं। इसलिए हमारी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़े। इसी मांग को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिलने पहुंचे हैं।

बिहार: राजनीति करने के बजाय विपक्ष बाढ़ से निपटने के लिए सुझाव दे

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकार की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों का बचाव करते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि कई इलाकों में जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है और सरकार राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तरह जुटी हुई है। संजय सरावगी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। वह राहत शिविरों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और अधिकारियों को राहत कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश दे रहे हैं। बिहार में आने वाली बाढ़ के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी हैं और इसे पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद सरकार प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम कर रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा प्रधानमंत्री को बाढ़ की स्थिति को लेकर पत्र लिखे जाने पर सरावगी ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सरकार को सुझाव देने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव बाढ़ और बिहार की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं हैं। तेजस्वी अपने निर्वाचन क्षेत्र में केवल फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं और इसके बाद वहां नहीं रहते। बाढ़ की स्थिति को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में राहत कार्यों के साथ-साथ इसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल में महाअष्टमी के दिन शराब की दुकानें बंद रखने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री का सही कदम बताते हुए कहा कि दुर्गा पूजा बंगाल की आत्मा है और त्योहार की गरिमा शराब और शोर-शराबे से नहीं बढ़ती। उन्होंने यह भी कहा कि पूजा समितियों को आर्थिक सहायता देने, बिजली बिल में राहत देने जैसे फैसले स्वागत योग्य हैं। सरावगी के मुताबिक, दुर्गा पूजा में बंगाल के साथ-साथ देशभर से लोग पहुंचते हैं, इसलिए त्योहार की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखना जरूरी है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है और कई क्षेत्रों में जलस्तर कम हो रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि प्रभावित लोगों को अभी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार, जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग, खाद्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न एजेंसियां मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। तटबंधों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रजक ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बाढ़ के कारण किसी की जान न जाए। प्रभावित क्षेत्रों में कम्युनिटी किचन, मेडिकल कैंप और पशुओं के लिए शेल्टर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मुश्किल समय है, लेकिन सरकार पूरी तरह तैयार है और मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

‘अग्निपथ’ से ‘डॉन’ तक, बॉलीवुड की इन फिल्मों में दिखा गणेश चतुर्थी का खास अंदाज

मुंबई। गणपति बप्पा के आने का इंतजार हर किसी को रहता है। बप्पा घर आते हैं तो घर का माहौल ही बदल जाता है। सुबह-शाम आरती, प्रसाद और बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है। गणेश चतुर्थी का रंग फिल्मों में भी कई बार बड़े प्यार से दिखाया गया है। इस गणेश चतुर्थी अगर आप घर पर परिवार के साथ कुछ फिल्में देखने का सोच रहे हैं, तो ये फिल्में बप्पा के उत्सव का रंग और भी खास बना देंगी। ‘माय फ्रेंड गणेशा’- गणेश चतुर्थी के मौके पर देखने के लिए ‘माय फ्रेंड गणेशा’ सबसे प्यारी फिल्मों में से एक है। साल 2007 में आई राजीव एस. रुइया की यह फिल्म एक छोटे बच्चे आशु की कहानी है, जो अपने माता-पिता की व्यस्त जिंदगी के बीच खुद को अकेला महसूस करता है। उसके जीवन में भगवान गणेश एक दोस्त के रूप में आते हैं। फिल्म में गणेश उत्सव कहानी को आगे बढ़ाने वाला अहम हिस्सा है। गणेश जी के घर आने के बाद आशु और उसके परिवार की जिंदगी में बदलाव आने लगते हैं। अहसास चन्ना, किरण जंजानी और शीतल शाह जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म बच्चों के साथ देखने के लिए शानदार है। ‘अग्निपथ’- ऋतिक रोशन की फिल्म ‘अग्निपथ’ भी गणेश उत्सव की वजह से खूब याद की जाती है। फिल्म की कहानी विजय नाम के एक ऐसे युवक की है, जिसकी जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से भरी रही। वह अपने पिता के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए बड़ा होकर अपराध की दुनिया तक पहुंच जाता है। फिल्म में ऋतिक रोशन के साथ प्रियंका चोपड़ा, संजय दत्त और ऋषि कपूर भी नजर आए थे। फिल्म में ‘देवा श्री गणेशा’ गाने के जरिए गणपति बप्पा का बड़ा उत्सव दिखाया गया है। हालांकि पूरी फिल्म गंभीर और बदले की कहानी है, लेकिन गणेश उत्सव वाले सीन में लोगों की आस्था और बप्पा के प्रति प्यार साफ झलकता है। यह फिल्म उन लोगों के लिए है, जिन्हें भक्ति के साथ एक दमदार कहानी भी देखनी हो। ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’- अजय देवगन की फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’ का रंग बिल्कुल अलग है। यह एक पारिवारिक फिल्म है, जिसमें परेश रावल एक ऐसे मेहमान बनकर आते हैं, जो घर में आते तो कुछ दिनों के लिए हैं, लेकिन जाने का नाम ही नहीं लेते। अजय देवगन और कोंकणा सेन शर्मा पति-पत्नी के किरदार में हैं, जिनकी जिंदगी इस मेहमान की वजह से बदल जाती है। फिल्म के आखिर में गणपति विसर्जन का सीन आता है। बप्पा की विदाई का यह समय फिल्म की कहानी के साथ भी जुड़ जाता है। गणेश चतुर्थी पर परिवार के साथ बैठकर देखने के लिए यह फिल्म अच्छी पसंद है। ‘शोर इन द सिटी’- फिल्म की कहानी एक नहीं, बल्कि कई लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है। हर किरदार अपनी परेशानी, अपने सपने और अपनी मुश्किलों में उलझा हुआ है। फिल्म में तुषार कपूर और राधिका आप्टे समेत कई कलाकार हैं। पूरी कहानी गणेश उत्सव के दिनों में आगे बढ़ती है। बाहर सड़कों पर लोग बप्पा के नाम पर नाच रहे होते हैं, ढोल बज रहे होते हैं और जयकारे लग रहे होते हैं, लेकिन उसी भीड़ के बीच कई लोगों की अपनी जिंदगी की लड़ाई भी चल रही होती है। गणेश उत्सव सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनकर दिखाई देता है। ‘डॉन’- फरहान अख्तर की 2006 की इस फिल्म में गणेश चतुर्थी का रंग एकदम अलग-अंदाज में दिखाई देता है। इसमें शाहरुख खान दोहरी भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में ‘मोरया मोरया’ गाने के जरिए गणपति उत्सव की भीड़ और मुंबई की सड़कों का जोश दिखाई देता है। ढोल बजाते हुए शाहरुख का अंदाज और चारों तरफ दिखाई देती गणपति की भक्ति इस सीन को यादगार बना देती है। प्रियंका चोपड़ा, करीना कपूर खान और बोमन ईरानी भी फिल्म का हिस्सा थे। आज भी गणेश उत्सव के दौरान ‘मोरया मोरया’ सुनते ही इस फिल्म का सीन याद आ जाता है।

सहारनपुर में कुआं मिलने पर बोले अवधेश प्रसाद, खुदाई में पुरानी चीजें निकलना कोई नई बात नहीं

अयोध्या। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सहारनपुर में कुआं मिलने, सपा के नए ड्रेस कोड और बाबा बागेश्वर की बंगाल के लोगों से मांस-मछली न खाने की अपील पर आईएएनएस से बातचीत की। आईएएनएस से बातचीत करते हुए सहारनपुर में कुआं मिलने को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा, “ये पुरानी चीजें हैं और खुदाई से क्या-क्या निकलता है, इसमें देखना क्या है। हम लोगों के यहां भी कुआं था। शुरुआती दिनों में हम लोग भी कुएं का पानी पीते थे, नहाते थे और चरखी लगाते थे। कुएं का पानी बड़ा ठंडा रहता था। आज कहीं भी कुआं नहीं है। उसका स्थान हैंडपंप ने ले लिया है। प्रधानमंत्री ने हैंडपंप को नकार दिया है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत बड़ी-बड़ी टंकियां पूरे देश में लगाई गई हैं। जो भ्रष्टाचार का केंद्र हैं।” अवधेश प्रसाद ने आगे कहा, “किसी भी गांव में जन जीवन मिशन के अंतर्गत घर-घर जल कहीं नहीं है। सड़कें खोद दी गई हैं, सड़ी-गली पाइप डाली गई है। बड़े पैमाने पर कमीशन खोरी की गई है। केंद्र में हमारी सरकार आएगी तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” अवधेश प्रसाद ने कहा कि हमारे समाज की जो परंपराएं और मान्यताएं हैं, उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। मान्यताओं और परंपराओं का आदर करना चाहिए। सीएम योगी के अयोध्या दौरे को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि महीने में चार बार मुख्यमंत्री अयोध्या आते हैं, लेकिन आज ऐसे वक्त पर आ रहे हैं जब भगवान श्री राम के चढ़ावे में चोरी की गई है। इस देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है। महंगाई चरम सीमा पर है, चीनी का दाम 70 रुपए प्रति किलो है। वे ऐसे समय अयोध्या आ रहे हैं जब गोशालाओं में गो माता की स्थिति खराब है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यूपी में आज एक नई परिपाटी हो गई है। एसडीएम कोर्ट आदेश करेगा और पुलिस डंडा लेकर खाली कराने पर जुट जाती है। कभी आर्य समाज तो कभी हिंदू परिषद की बात की जाती है। सनातन हमेशा न्यायप्रिय होता है। आर्य समाज हमेशा न्यायप्रिय है। आर्य समाज न तो अन्याय सहता है और न तो अपने पड़ोसियों पर अन्याय करने देता है।

एसएससी-सीएचएसएल भर्ती 2026: लोअर डिविजनल क्लर्क सहित 2,536 पदों पर 7 अक्टूबर तक करें आवेदन

नई दिल्ली। आज भी देश में लाखों युवा सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। इसके लिए वे तैयारी करने के साथ-साथ वैकेंसी निकलने के इंतजार में रहते हैं। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए एक शानदार मौका सामने आया है। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (सीएचएसएल) परीक्षा 2026 के तहत भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों/विभागों/ऑफिसों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं/कानूनी संस्थाओं/ट्रिब्यूनल आदि के लिए ग्रुप-सी के कुल 2,536 पदों पर रिक्तियों की घोषणा एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। एसएससी की ओर से जारी कुल 2,536 रिक्तियों में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी)/जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (जेएसए), डेटा एंट्री ऑपरेटर (डीईओ) और डेटा एंट्री ऑपरेटर, ग्रेड ‘ए’ के पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 सितंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि की रात 11 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। वहीं, आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर की रात 11 बजे तक तय की गई है। इसी के साथ, जिन अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र भरते समय कुछ गलती हो जाएगी, उनके लिए एप्लीकेशन फॉर्म में सुधार के लिए विंडो और सुधार शुल्क के ऑनलाइन भुगतान की तारीख 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर की रात 11 बजे तक तय की गई है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं कक्षा या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (टियर-I), कंप्यूटर आधारित परीक्षा (टियर-II), कौशल परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन (डीवी) के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पद के अनुसार 19,900 से 92,300 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस (पुरुष) के लिए 100 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पूर्व सैनिक/विकलांग व्यक्ति और महिलाओं को रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान से छूट दी गई है।

‘यह बहुत अच्छा कदम’, सीए के बीबीएल में निजी निवेशक लाने की मंजूरी को कमिंस और मोलिनेक्स का समर्थन

नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने बिग बैश लीग (बीबीएल) में निजी निवेश को मंजूरी दे दी है। ऑस्ट्रेलिया के वनडे और टेस्ट कप्तान पैट कमिंस और ऑस्ट्रेलिया महिला टी20 टीम की कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने सीए के इस कदम का समर्थन किया है। कमिंस ने कहा, “अगर निजीकरण अच्छे से किया जाए, तो यह खेल के लिए बहुत अच्छी बात हो सकती है। बिग बैश लीग के लिए बहुत सारे फायदे हैं, लेकिन एक ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के तौर पर भी, टेस्ट क्रिकेट मेरे लिए बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि यह हमें भविष्य के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार करता है।” हालांकि, कमिंस ने इस बात को खारिज कर दिया कि न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड का निजीकरण का विरोध ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में फूट को सामने लाएगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि किसी भी चीज पर 100 प्रतिशत समर्थन मिलना बहुत मुश्किल है। मैं यह कप्तान के तौर पर जानता हूं। कभी-कभी आपको फैसला लेना पड़ता है। ऐसा लगता है कि हर क्लब का फैसला उनके अपने हाथ में है। सीए ने एक ऐसा स्ट्रक्चर बना लिया है, जहां वे उन फैसलों को अपने पास रख पाएंगे। एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के तौर पर, मुझे लगता है कि अगर इसे अच्छे से किया जाए तो यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए अच्छा है।” विमेंस बीबीएल में रेनेगेड्स की कप्तान मोलिनेक्स ने कहा, “इससे कुछ नए क्षेत्र खुल सकते हैं जिनमें हम विमेंस बिग बैश में जा सकते हैं। नए निवेशक, गेम में कुछ नया करने और उसे आगे बढ़ाने के नए मौके लाएंगे। क्वालिटी के हिसाब से, विमेंस बिग बैश अभी भी दुनिया का सबसे अच्छा कॉम्पिटिशन है। निजीकरण के साथ आने वाले इन सभी नए मौकों से उम्मीद है कि लीग और बेहतर हो जाएगी। इसका हिस्सा बनना वाकई बहुत अच्छी बात है।” मोलिनेक्स ने कहा कि रेनेगेड्स की होने वाली बिक्री 2026/27 सीजन के बाद भी कुछ नए फैन लाने का एक मौका है। सीए ने मंगलवार को घोषणा की कि वह रेनेगेड्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए निजी मालिकों से बोलियां मंगाएगा, ताकि क्लब 2027-28 विमेंस बीबीएल और बीबीएल सीजन नए मालिकाना हक में खेल सके। बिक्री प्रक्रिया से आने वाले विमेंस बीबीएल और बीबीएल सीजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रेनेगेड्स को सीए केयरटेकर मोड में चलाएगा। होबार्ट हरिकेन्स, मेलबर्न स्टार्स और पर्थ स्कॉर्चर्स दूसरे क्लब हैं जो कथित तौर पर निजी निवेश लाने के लिए उत्सुक हैं। इस बीच, क्रिकेट न्यू साउथ वेल्स की सिडनी की दो टीमें – सिक्सर्स और थंडर – साथ ही ब्रिस्बेन हीट और एडिलेड स्ट्राइकर्स इस स्टेज पर निजी निवेश के साथ आगे बढ़ने में हिचकिचा रही हैं।

मुझे नहीं पता बागेश्वर बाबा कौन हैं, उन्हें बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं : सौगत रॉय

कोलकाता। नवरात्रि के दौरान मांसाहार न करने के बाबा बागेश्वर के बयान समेत कई मामलों पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि बागेश्वर बाबा कहां से आए हैं या वे कौन हैं। उन्हें बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। जहां तक बंगालियों की बात है, स्वामी विवेकानंद खुद मांस खाते थे। विवेकानंद से बड़ा शायद ही कोई बंगाली संत हुआ हो। इसलिए मैं बागेश्वर बाबा की टिप्पणियों की निंदा करता हूं।” सौगत रॉय ने कहा, “हम पार्टी के अंदर इस पर चर्चा कर रहे हैं। चुनाव चिह्न को लेकर एक मुद्दा है, क्योंकि चुनाव आयोग ने अभी तक कोई चिह्न आवंटित नहीं किया है। मुझे विश्वास है कि यह मुद्दा सुलझ जाएगा।” कालीघाट मंदिर को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि कालीघाट मंदिर के अध्यक्ष जिला जज हैं। इस बारे में उनको सिद्धांत देना चाहिए। अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सौगत रॉय ने कहा, “मैं हाईकोर्ट की राय की तारीफ करता हूं। राज्य सरकार की ओर से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रतिदिन एफआईआर दर्ज की जा रही है। यह अन्याय है। इसको लेकर हाईकोर्ट की ओर से साफ-साफ निर्देश दिए जाने पर मैं खुश हूं। दुर्गा पूजा को लेकर मुख्यमंत्री की बैठक पर सौगत रॉय ने कहा, “ममता बनर्जी हर साल ऐसा करती थीं, इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने पूजा कमेटियों को दी जाने वाली ग्रांट कम करने का फैसला किया है। छोटी पूजाओं के लिए एक लाख दिए जाएंगे और बड़ी पूजा के लिए कोई ग्रांट नहीं दी जाएगी। बंगाली लोग इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। ममता बनर्जी की भले निंदा करें, लेकिन वे भी ममता के रास्ते पर चले हैं। डीजे और शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मेरा समर्थन है।