पंजाब में ड्रग्स संकट पर अमित मालवीय का हमला, बोले- सवाल उठाने वालों को डराती है सरकार

चंडीगढ़। भाजपा नेता अमित मालवीय ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। यह आलोचना संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के बाद शुरू हुए राजनीतिक हंगामे के बीच की गई है। इस व्यक्ति ने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने सार्वजनिक रूप से हेरोइन की आसानी से उपलब्धता का मुद्दा उठाया था। इस घटना ने एक बार फिर ड्रग्स के संकट को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी पार्टियां मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के बहुत ज्यादा प्रचारित ड्रग विरोधी अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही हैं। संगरूर जिले के रहने वाले गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था। उन्होंने दावा किया था कि अपने गांव में चिट्टा (एक तरह का नशीला पदार्थ) के प्रसार को लेकर चीमा से सार्वजनिक रूप से सवाल पूछने के बाद उन पर दबाव डाला गया था। उनकी मौत ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्ष सरकार पर ड्रग की लत से प्रभावित परिवारों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि इस घटना ने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ सफल लड़ाई लड़ने के सरकार के दावों के पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। उन्होंने मान सरकार पर युवाओं के बीच नशीले पदार्थों को फैलाने के लिए जिम्मेदार सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से निपटने के बजाय प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। हालांकि, आप सरकार का कहना है कि उसके ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के कारण ड्रग तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है और ड्रग नेटवर्क को तोड़ा गया है। आप सरकार ने केंद्र पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की सीमा-पार तस्करी को रोकने में विफल रहने का भी बार-बार आरोप लगाया है। मालवीय ने एक्स पर लिखा कि दिर्बा निर्वाचन क्षेत्र के टूर बंजारा गांव के निवासी गुलजार सिंह ने आप मंत्री हरपाल सिंह चीमा से उनके दौरे के दौरान ‘चिट्टा’ की बेरोकटोक बिक्री के बारे में सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि उनका अपना बेटा नशे की लत से जूझ रहा है और उसने परिवार का सामान बेच दिया है। इसके बाद आप से जुड़े स्थानीय नेताओं ने उन पर दबाव डाला और उन्हें परेशान किया। उन्होंने मांग की कि गुलजार सिंह मंत्री से सवाल पूछने के लिए माफी मांगें। उन्होंने इनकार कर दिया। जहर खाने से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में गुलजार सिंह ने अपनी दुर्दशा के लिए चार लोगों को जिम्मेदार ठहराया, जिनमें हरपाल चीमा और स्थानीय गांव के नेता शामिल थे। बाद में इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई। मालवीय ने दावा किया कि यह बेहद परेशान करने वाला है। जो सरकार ड्रग्स की समस्या पर सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकती और सवाल उठाने वाले नागरिक को डराती-धमकाती है, उसे जवाब देना होगा। पंजाब जवाबदेही का हकदार है, डराने-धमकाने का नहीं। इस बीच, संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने एक सरपंच और दो अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और परेशान करने का मामला दर्ज किया है। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (पटियाला रेंज) कुलदीप सिंह चहल ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा, हालांकि पुलिस ने परेशान करने के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं।
‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में लखनऊ नंबर-1, सुरेश खन्ना बोले-यह संयुक्त प्रयासों का प्रभाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लखनऊ ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में मध्य प्रदेश के इंदौर को भी पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे साफ हवा वाले शहर का दर्जा हासिल किया है। यह लखनऊ के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि लंबे समय तक वायु प्रदूषण की समस्या से जूझने वाले शहरों की सूची में शामिल रहने के बाद अब राजधानी ने खुद को शीर्ष पर स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में राज्य ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं और साफ हवा के मामले में देश में नंबर एक स्थान पाकर लखनऊ ने एक और नई उपलब्धि हासिल की है। मैं सभी को बधाई देता हूं। यह संयुक्त प्रयासों का प्रभाव है कि लखनऊ को आज स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में एक नंबर का स्थान मिला है।” उन्होंने कहा कि यह सफलता सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि प्रशासन, नगर निगम और आम जनता के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिसका असर अब दिखने लगा है। वहीं, लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने भी इस उपलब्धि का श्रेय शहर के नागरिकों और सफाई कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा, “इसका श्रेय लखनऊ के लोगों, नगर निगम और सफाई कर्मचारियों को जाता है। इस कोशिश में सभी ने योगदान दिया है। हम कदम-दर-कदम काम कर रहे हैं, जिसमें अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर स्टेशन बनाना भी शामिल है।” उन्होंने बताया, “अगले छह महीनों में सभी ट्रांसफर स्टेशन बनकर तैयार हो जाएंगे। हमारी सड़क सफाई करने वाली गाड़ियां न सिर्फ धूल को नियंत्रित करती हैं, बल्कि हवा में धूल को फैलने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी करती हैं। सभी के सहयोग से ऐसे कई उपाय किए जा रहे हैं।
एशियन गेम्स के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम जापान रवाना हुई

बेंगलुरु। भारतीय महिला हॉकी टीम जापान के आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए रवाना हो गई है। कप्तान सलीमा टेटे और कोच शोर्ड मारिन नेतृत्व में भारतीय टीम मंगलवार को बेंगलुरु से रवाना हुई। एफआईएच के लॉस एंजिल्स 2028 क्वालिफिकेशन सिस्टम के तहत, 2026 एशियन गेम्स में महिला हॉकी कॉम्पिटिशन में सबसे ऊपर रहने वाली टीम लॉस एंजिल्स 2028 के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करेगी, बशर्ते उसने पहले किसी दूसरे रास्ते से क्वालीफाई नहीं किया हो। भारतीय टीम का मुख्य लक्ष्य स्वर्ण पदक हासिल करना और लॉस एंजिल्स में 2028 में होने वाले ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना होगा। एशियन गेम्स, मारिन के अंडर भारतीय महिलाओं के लिए एक शानदार बदलाव का नया अध्याय होगा। मारिन को जनवरी 2026 में आधिकारिक कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। भारत ने अपने 2026 कैंपेन की शुरुआत हैदराबाद में एफआईएच हॉकी विमेंस वर्ल्ड कप क्वालिफायर में रजत पदक जीतकर की और इटली पर सेमीफाइनल में 1-0 की जीत के साथ वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन पक्का किया। इसके बाद टीम ने ऑकलैंड में एफआईएच हॉकी विमेंस नेशंस कप में एक भी मैच नहीं गंवाया। इंडिया ने पूल स्टेज में यूएसए, जापान और उरुग्वे को हराया, सेमी-फाइनल में चिली को 6-0 से हराया और फिर फाइनल में मेजबान न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर खिताब जीता। इस जीत से इंडिया को अगले सीजन के लिए एफआईएच हॉकी विमेंस प्रो लीग में प्रमोशन भी मिला। यह मोमेंटम वर्ल्ड कप में भी जारी रहा, जहां इंडिया ने दशकों में अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। टीम पांचवें नंबर पर रही। 1974 में पहले संस्करण के बाद से महिला टीम का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी था। विश्व कप में भारतीय टीम ने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ खेला, जबकि दक्षिण अफ्रीका पर 6-1 और जर्मनी पर 3-1 से जीत हासिल की। एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम को पूल बी में जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान के साथ रखा गया है। टीम अपना कैंपेन 20 सितंबर को उज्बेकिस्तान के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 21 सितंबर को इंडोनेशिया, 23 सितंबर को थाईलैंड, 25 सितंबर को जापान और 27 सितंबर को सिंगापुर के खिलाफ मैच खेला जाएगा। नॉकआउट फेज 30 सितंबर को शुरू होगा। उसी दिन सेमीफाइनल होंगे। 2 अक्टूबर को फाइनल होगा। कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, “हम एशियन गेम्स में बहुत आत्मविश्वास के साथ जा रहे हैं। हम जानते हैं कि हर टूर्नामेंट एक नई चुनौती लेकर आता है। नेशंस कप और वर्ल्ड कप ने हमें भरोसा दिलाया है कि हम मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं, और अब हमारा फोकस इसे एक कदम और आगे ले जाने पर है। हमारा लक्ष्य बहुत साफ है — हम गोल्ड मेडल के लिए लड़ना चाहते हैं और लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल करना चाहते हैं।” एशियन गेम्स के लिए 20 सदस्यीय भारतीय महिला हॉकी टीम: गोलकीपर- सविता, बिचू देवी खारीबम डिफेंडर- इशिका चौधरी, सुशीला चानू पुखरामबम, लालथंतलुआंगी, ज्योति, शिल्पी डबास मिडफील्डर- निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनीता टोप्पो, सलीमा टेटे (कप्तान), नेहा, दीपिका सोरेंग फॉरवर्ड- लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसल, नवनीत कौर, दीपिका, इशिका, बलजीत कौर, ब्यूटी डुंगडुंग
यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचे, नौ में से छह कारोबारी सत्रों में दर्ज की गई गिरावट

मुंबई। देश की प्रमुख बीयर निर्माता कंपनी यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के शेयरों में मंगलवार को लगातार दबाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयर 3.1 प्रतिशत तक टूटकर 52 हफ्ते के निचले स्तर 1,251.60 रुपए पर पहुंच गए। हालिया गिरावट के साथ शेयर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और यह पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख उपभोक्ता शेयरों में शामिल हो गया है। मंगलवार की गिरावट जनवरी 2026 के बाद कंपनी के शेयर में दर्ज सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में से एक रही। इससे पहले 20 जनवरी 2026 को शेयर में 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि 19 मई 2026 को इसमें 3.02 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई थी। हाल के कारोबार पर नजर डालें तो यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयर पिछले लगातार 9 कारोबारी सत्रों में से 6 सत्रों में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कंपनी अपने कारोबार में प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने और उत्पादन क्षमता विस्तार पर जोर दे रही है। यूनाइटेड ब्रुअरीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विवेक गुप्ता ने हाल ही में कहा था कि वित्त वर्ष 2030 तक कंपनी की कुल बिक्री में प्रीमियम बीयर श्रेणी का योगदान 18 से 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। फिलहाल यह हिस्सा करीब 11 प्रतिशत के आसपास है। गुप्ता के अनुसार, प्रीमियम बीयर श्रेणी सालाना 20 से 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और यह लाभप्रदता में महत्वपूर्ण योगदान देने लगी है। इसी रणनीति के तहत कंपनी अपने प्रीमियम ब्रांड पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। हाल ही में यूनाइटेड ब्रुअरीज ने अपने लोकप्रिय प्रीमियम ब्रांड हाइनेकन सिल्वर की उपलब्धता का विस्तार केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में किया है। कंपनी का मानना है कि उपभोक्ताओं के बीच प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग भविष्य में उसके राजस्व और मार्जिन को मजबूत कर सकती है। विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए भी कंपनी निवेश कर रही है। इस महीने की शुरुआत में यूनाइटेड ब्रुअरीज ने स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी थी कि वह महाराष्ट्र स्थित अपनी एलोरा ब्रेवरी में नई कैनिंग लाइन स्थापित करने के लिए 110 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। नया संयंत्र नियामकीय मंजूरियों के अधीन सितंबर 2026 में चालू होने की उम्मीद है। यह एलोरा इकाई की पहली कैनिंग लाइन होगी और इसकी उत्पादन क्षमता 40,000 कैन प्रति घंटा होगी। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब यूनाइटेड ब्रुअरीज अपनी उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और डिब्बाबंद बीयर की बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश कर रही है। कंपनी का प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान और उत्पादन क्षमता का विस्तार उसकी विकास रणनीति का मुख्य आधार बन रहने की उम्मीद है, भले ही शेयर को निकट भविष्य में बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ रहा हो।
जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, 15 सितंबर तक मांगा जवाब

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मंगलवार को आकाश गौरव सहित 99 कर्मियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई भी 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। प्रार्थियों की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता श्रेय मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के परिणाम के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी है। राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 18 अगस्त की देर रात कई नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर बड़े फैसले की घोषणा की थी। सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही थी, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका सामने आई थी। साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी। सरकार की घोषणा के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इससे संबंधित अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना में विभिन्न परीक्षाओं के संबंध में अलग-अलग कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा भी इसी विवाद के केंद्र में है। परीक्षा प्रक्रिया और नियुक्तियों को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों तथा सरकार के बीच विवाद रहा है। अब नियुक्त कर्मियों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद अदालत के आदेश से उन्हें तत्काल राहत मिली है। हालांकि, नियुक्तियों की वैधता और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अंतिम स्थिति अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और सरकार तथा जेएसएससी के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।
पाकिस्तान में बढ़ा असंतोष, सेना और नेताओं के बीच बन रही टकराव की स्थिति

नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन समस्याओं का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में राजनीतिक वर्ग के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है और अब नेता सेना की ओर से लिए जा रहे फैसलों पर सवाल उठाने लगे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान राजनीतिक वर्ग और सेना के बीच बड़े टकराव की स्थिति बन रही है। हालांकि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सख्त नियंत्रण के जरिए हालात पर काबू बनाए रखा है, लेकिन अब राजनीतिक वर्ग का धैर्य जवाब देता दिख रहा है। राजनीतिक नेताओं को जनता का सामना करना पड़ता है। वे बलूचिस्तान, पीओके और केपी जैसे इलाकों में हो रही हिंसा की संतोषजनक व्याख्या नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक वर्ग का कहना है कि देश के सामने आंतरिक चुनौतियां और समस्याएं हैं, जबकि सेना ज्यादातर इन हालात के लिए बाहरी खतरों को जिम्मेदार ठहराती है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को आक्रामक पक्ष बताने वाला नैरेटिव अब पहले की तरह प्रभावी नहीं रह गया है। पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन इसका एक उदाहरण हैं। अधिकारी के अनुसार, पीओके के लोग अपने क्षेत्र की तुलना सीधे जम्मू-कश्मीर से कर रहे हैं। खास तौर पर बुनियादी ढांचे और विकास के मामले में वे पाकिस्तानी प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि दोनों क्षेत्रों के बीच इतना अंतर क्यों है। हाल ही में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के बयान भी पाकिस्तान के मौजूदा हालात को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या देश के भीतर मौजूद आतंकवाद और आंतरिक चुनौतियां हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक वर्ग सेना की ओर से नियंत्रित किए जा रहे नैरेटिव से साफ तौर पर परेशान हो चुका है। सेना का ऐसा प्रभाव पहले भी रहा है, लेकिन आसिम मुनीर के कार्यकाल में यह और ज्यादा बढ़ गया है। उनके अनुसार, सेना अब तक विरोध की आवाजों को दबाने में सफल रही है, लेकिन अब यह तरीका पहले जैसा असरदार नहीं दिख रहा। सेना के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि राजनीतिक वर्ग और आम लोग अब हर मुद्दे पर उसकी लाइन का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं। पाकिस्तान पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जिससे खुला टकराव होने की संभावना भी पैदा हो सकती है। मरियम नवाज ने बेहतर समन्वय, नई तकनीक के इस्तेमाल और लोगों की समस्याओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बलूचिस्तान, केपी और पीओके की समस्याओं को हल करने के लिए लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना होगा। दूसरी ओर, लेख में दावा किया गया है कि सेना इन क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों को दबाने के लिए सशस्त्र समूहों का गठन कर रही है और उन्हें वित्तीय सहायता दे रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की सोच में काफी अंतर है। अधिकारी के अनुसार, सेना अपनी ओर से नैरेटिव को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर सकती है, लेकिन असहमति की आवाजें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आशंका है कि अगर हालात नहीं बदले, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है और राजनीतिक वर्ग तथा सेना के बीच खुला टकराव देखने को मिल सकता है।
फॉकलैंड द्वीप विवाद: अर्जेंटीना इजरायली ऊर्जा कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करेगा

ब्यूनस आयर्स। दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ महीनों से कई द्वीप चर्चा में बने हुए हैं। इनमें चागोस द्वीप, ईरान का खार्ग द्वीप, बांग्लादेश का सेंट मार्टिन द्वीप शामिल हैं। इस बीच एक और द्वीप सुर्खियां बटोर रहा है और ये फॉकलैंड द्वीप समूह है। जिसे लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच पुराना विवाद उभर आया है। अर्जेंटीना सरकार ने सोमवार को ब्रिटिश नियंत्रण वाले फॉकलैंड द्वीप समूह में तेल परियोजना संचालित करने वाली इजरायली कंपनी ‘नाविटास पेट्रोलियम’ और उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति जेवियर मिलेई की ओर से शुक्रवार (4 सितंबर) को एक बयान जारी किया गया था। उनका आरोप है कि नाविटास और उससे जुड़ी कंपनियां उत्तरी फॉकलैंड बेसिन में हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन के लिए ब्रिटिश लाइसेंस का इस्तेमाल कर रही हैं, जो अर्जेंटीना के कानून का उल्लंघन है। विदेश मंत्री पाब्लो क्विरनो ने इस मामले को गंभीरता से उठाने का फैसला किया है। विवाद के केंद्र में ‘सी लायन’ नाम की बड़ी अपतटीय तेल परियोजना है। इसे इजरायली कंपनी नाविटास संचालित कर रही है, जिसकी परियोजना में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ब्रिटेन की रॉकहॉपर एक्सप्लोरेशन भी इसमें भागीदार है। परियोजना से 2028 में तेल उत्पादन शुरू करने की योजना है। अर्जेंटीना का कहना है, “फॉकलैंड द्वीपों के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का अधिकार हमारे (अर्जेंटीना) पास है और हमारी अनुमति बिना वहां तेल गतिविधियां चलाना गैरकानूनी है।” सरकार ने कंपनियों के अलावा उनके निदेशकों और संबंधित साझेदारों को भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाने की बात कही है। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट ‘द गार्डियन’ के मुताबिक नाविटास और रॉकहॉपर का कहना है कि उनकी परियोजना फॉकलैंड द्वीप सरकार द्वारा कानूनी रूप से जारी किए गए पेट्रोलियम लाइसेंस के तहत संचालित हो रही है और उसे ब्रिटिश सरकार का समर्थन प्राप्त है। राष्ट्रपति मिलेई ने हाल के दिनों में फॉकलैंड द्वीपों पर अर्जेंटीना के दावे को पहले से कहीं अधिक आक्रामक अंदाज में उठाया है। उन्होंने तेल परियोजनाओं को अर्जेंटीना के राष्ट्रीय हित और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। मिलेई का यह रुख ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अपनी मौजूदा नीति की समीक्षा कर सकता है। मिलेई ने इन टिप्पणियों को अर्जेंटीना के पक्ष में बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के संकेत के तौर पर पेश किया है। हालांकि, अमेरिका आधिकारिक तौर पर इस संप्रभुता विवाद पर तटस्थ रुख रखता है, जबकि व्यवहार में वह ब्रिटिश प्रशासन को मान्यता देता है। ब्रिटिश सरकार ने मिलेई के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि फॉकलैंड द्वीप ब्रिटिश रहेंगे और वहां के लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा। 1982 में अर्जेंटीना के द्वीपों पर कब्जे के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें ब्रिटेन ने द्वीपों पर फिर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इस तरह तेल और गैस की दौड़ ने दशकों पुराने फॉकलैंड विवाद को एक बार फिर आर्थिक और भू-राजनीतिक संघर्ष में बदल दिया है। अर्जेंटीना जहां तेल परियोजना को अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम मान रहा है, वहीं परियोजना संचालक इसे फॉकलैंड सरकार द्वारा दिए गए वैध लाइसेंस के तहत चलने वाला व्यावसायिक उपक्रम बता रहे हैं।
पीएम मोदी ने वडोदरा में 35 हजार करोड़ की परियोजनाओं का किया शिलान्यास और लोकार्पण

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में करीब 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा, “महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान, अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सब कुछ एक साथ हो रहा है।” प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में गुजरात के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।” पीएम मोदी ने वडोदरा के लोगों की तारीफ करते हुए कहा, “इस विकास पर्व में आप सभी ने जिस सेवाभाव से पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वडोदरा के हर एक नागरिक को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उनकी सराहना करता हूं।” उन्होंने कहा, “जिस तरह से आपने ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान चलाया है, उसके लिए भी मैं आपको बधाई देता हूं।” पीएम मोदी ने कहा कि हर परिवार में स्वच्छता का वातावरण बन गया है। उन्होंने कहा, “इस बार जब गणेश जी पधारेंगे तो सारे आशीर्वाद बरसेंगे।” उन्होंने कहा, “इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो।” वडोदरा को गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर बताते हुए पीएम ने कहा, “आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2,800 किमी से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।” इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।
वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी को संदेश, बोले- देश का हर नौजवान ‘सच की हुंकार’ के साथ

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को 21वीं सदी के भारत की जीवनरेखा बताया और कहा कि बीते 12 साल में देश के काम करने की संस्कृति बदली है। पीएम मोदी ने कहा, “ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। 2006 में इस काम को करने के लिए एक विशेष कंपनी बनाई गई और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रही। दुर्भाग्य देखिए कि इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ। फाइलें अटकती थी, लटकती थी, भटकती थी।” उन्होंने कहा, “2014 के बाद जब आपके आशीर्वाद से मैं दिल्ली पहुंचा और वहां पहुंचते ही हमने इसको गति देने का काम शुरू किया। 2,800 किमी के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया है। आज ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।” पीएम मोदी ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवनरेखा है और इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। उन्होंने कहा, “पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानी ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमे थे लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर प्रतिदिन 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं। पहले जो मालगाड़ी 6.30 घंटे में 100 किमी का सफर तय करती थी, अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किमी का सफर तय कर लेती है।” उन्होंने बताया कि ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में जेएनपीटी पोर्ट मुंबई से वडोदरा तक डबल स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का संचालन किया गया है। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वडोदरा आ गया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “अब ये जो नाराज फूफाजी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा, ट्रक कहा जाएंगे, उनका क्या होगा? अब इन फूफा जी को काम मिल गया है।” पीएम मोदी ने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वे भी इस परियोजना के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में 1-2 ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी सालभर ढोल पीटे जाते थे। आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेनें शुरू हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का रेल बजट पौने 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है, जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। यानी रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च हजारों-हजार नए रोजगार बना रहा है। प्रधानमंत्री ने वडोदरा की मैन्युफैक्चरिंग ताकत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्त धाराओं का विजन रखा है, उसमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है और वडोदरा शहर इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्कील और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, वडोदरा 150 सालों से इसका प्रतिबिंब है।” पीएम मोदी ने कहा, “अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। सी-295 की पहली फ्लाइट यहां का आसमान देख चुका है। मैं वडोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।” उन्होंने याद किया कि जब वे सीएम बने थे तो अक्सर मैन्युफैक्चरिंग की मांगों के साथ प्रतिनिधिमंडल आते थे। आज शहर बदल गया है। यह अब भारत के पहले मेड-इन-इंडिया सैन्य परिवहन विमान के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में भारत रेल कोच, मेट्रो कोच और रेल इंजन बनाने का भी बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक भारत ने करीब 50 हजार आधुनिक रेल कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकी थी। पीएम मोदी ने अप्रत्यक्ष रूप से राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “झूठ की गूंज से भरमाने वाले हर चौराहे पर मिल जाएंगे। भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर पर सरकार कितने फोकस से काम कर रही है।” उन्होंने कहा कि पहले सौर परियोजनाएं आयात पर निर्भरता के कारण महंगी थीं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में घरेलू विनिर्माण ने जोर पकड़ा है। अधिक आत्मनिर्भरता के साथ, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तेजी से बढ़ रही है। आज 55 लाख परिवारों ने अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाए हैं, जिनमें गुजरात के 11 लाख परिवार भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है। ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। इसलिए हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है।
महाराष्ट्र: पुणे में अंतरराज्यीय ट्रांसफार्मर चोरी गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

पुणे। पुणे क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ट्रांसफॉर्मर और कॉपर के तार चुराने में शामिल था। पुलिस ने इस गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 12.73 लाख रुपए की रकम भी बरामद की। पुलिस के मुताबिक, कांस्टेबल विनायक साल्वे को इस बारे में सूचना मिलने के बाद यूनिट 7 की ओर से तलाशी अभियान शुरू किया गया। दरअसल, कांस्टेबल को यह जानकारी मिली थी कि जो लोग ट्रांसफॉर्मर चोरी में संलिप्त हैं, वो बहुत जल्द ही हवेली तालुका का वाडेगांव क्षेत्र में पहुंचने वाले हैं। इस सूचना के बाद पुलिस इंस्पेक्टर वाहिद पठान ने पुलिस सब इंस्पेक्टर (पीएसआई) राहुल कोलपे को आदेश दिया कि वह इस सूचना की सत्यता की जांच करके कानूनी कार्रवाई करे। इसके बाद वाडेगांव में इस गिरोह में शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। यहां पुलिस ने माल से भरा हुआ वाहन रविवार को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस ने गिरोह में शामिल तीन लोगों को पकड़कर उनसे पूछताछ शुरू की। इनकी पहचान मोहम्मद साहेबजान मंगरेखान (30), आदर्श चंद्रप्रकाश पांडे (22) और चंद्रसेन शिवरतन धारिया (28) के रूप में हुई है। यह सभी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और मौजूदा समय में पुणे में रह रहे हैं। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने इस बात को कबूल किया कि पिछले छह महीने में इन लोगों ने आठ कॉपर ट्रांसफॉर्मर चुराई थी। चोरी की इस वारदात को लोनीकंद पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार में आने वाले वाडेगांव, अष्टपुर, सांगवी संदास, न्हावी संदास और हिंगनगांव क्षेत्र में अंजाम दिया गया था पुलिस के मुताबिक, इस गिरफ्तारी की वजह से लोनिकंद पुलिस स्टेशन में दर्ज भारतीय न्याय संहिता की धारा 324(4) और भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 136 के तहत दर्ज आठ मामलों का भी निपटारा हो गया। इस गिरोह में शामिल तीसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया और अब मामले की जांच जारी है। जिसके तहत यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह में कितने लोग शामिल थे। जांच के तहत यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कॉपर को कहां बेचा गया था? इससे पहले 27 मई को पिंपरी-चिंचवड पुलिस इस गिरोह में शामिल तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। यह सभी आरोपी पुणे जिले में इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसफॉर्मर चोरी से जुड़े 48 मामलों में शामिल थे। चाकन नॉर्थ पुलिस ने खेड़ तालुका के बिरदवाड़ी गांव में स्थित नेक्सस हेल्थकेयर में लगे ट्रांसफार्मर से तांबे के तारों की चोरी की जांच करते हुए इस मामले को सुलझाया। बताया जाता है कि चोरी की घटना 15 और 16 मई के बीच हुई थी।