राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर सपा सांसदों का संसद में प्रदर्शन, अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग

नई दिल्ली।समाजवादी पार्टी के सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाहर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किया। सपा सांसदों का आरोप है कि सरकार सदन में चर्चा नहीं कर रही है और इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में सदन में जवाब दें। इसके साथ ही सपा सांसदों ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन, प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ सहित कई मुद्दों पर बात की। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड देश का एक महत्वपूर्ण राज्य है और पूरा विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली पांच सदस्यीय समिति राज्य सरकार से मिलने वाली है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से क्या जवाब और आश्वासन दिया जाता है, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सपा सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की अवधारणा को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लखनऊ में छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा की जयंती मनाई गई, जो इस बात का प्रतीक है कि पार्टी सभी वर्गों का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पीडीए में दबे-कुचले, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, महिलाएं, समाजवादी विचारधारा से जुड़े सवर्ण और आदिवासी सभी शामिल हैं। प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने को लेकर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि छात्र कहीं भी अपनी आवाज उठाएं या किसी कार्यक्रम का आयोजन करें। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी छात्रों के मुद्दों पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहती है लेकिन अब छात्र और विपक्ष दोनों इन मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2024 का लोकसभा चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अपनी उपलब्धि बताकर लड़ा था। ऐसे में यदि वही कानून सरकार का अपना है, तो अब नए विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले भी इस प्रस्ताव के पीछे की मंशा पर सवाल उठा चुका है और आज भी सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि किसी भी ब्राह्मण परिवार से बात की जाए तो वह बताएगा कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक नुकसान ब्राह्मण समाज को हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करने में विफल रही है। संसद की कार्यवाही को लेकर सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन केवल एक दिन ही ठीक से चल पाया है और सदन को सुचारु रूप से चलाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से वादा किया गया था कि पुलिस की कथित बर्बरता और अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी, सरकार जवाब देगी और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। इकरा हसन ने पीडीए की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह केवल पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाएं, आदिवासी, सवर्ण समाज के वंचित वर्ग, पंडित और वे सभी लोग शामिल हैं जो सरकार की विचारधारा से असहमत हैं या स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं। उनके अनुसार पीडीए एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मंच है। सपा सांसद अक्षय यादव ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी परिसीमन के वर्तमान प्रस्ताव का विरोध करती है। उनका आरोप था कि यदि महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी विरोधी कोई पार्टी है तो वह भाजपा है। उन्होंने छात्राओं के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता को लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलनी चाहिए और प्रशासन का दायित्व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। वहीं, सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रयागराज में कांग्रेस के कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर सरकार को तानाशाही मानसिकता वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और उसकी कोशिश है कि कोई भी सरकार के खिलाफ अपनी बात न रख सके।
नीट पेपर लीक केस : सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर मांगा जवाब

नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की सुनवाई को लेकर राउज एवेन्यू की फास्ट ट्रैक कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इस मुद्दे पर अहम टिप्पणियां कीं। राऊज एवेन्यू कोर्ट के फास्ट ट्रैक जज अजय गुप्ता ने सुनवाई के दौरान कहा, “इस केस में हर एक मिनट बहुत कीमती है। मेरी चिंताओं को समझिए।” उन्होंने सभी वकीलों से अपील की कि वे सुबह 10 बजे तक कोर्ट में पहुंच जाएं। साथ ही, जज ने निर्देश दिया कि न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपियों को भी समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश किया जाए ताकि सुनवाई में देरी न हो। वहीं नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, “हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।” याचिकाओं में परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को बदला जाए या उसकी जगह एक नई संस्था बनाई जाए।उनकी मांग है कि नई संस्था तकनीकी रूप से मजबूत हो, ज्यादा सुरक्षित हो और स्वतंत्र तरीके से काम कर सके ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। सरकार के मुताबिक 2026 में बने नए कानून के तहत अब पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है। यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा सिस्टम में सुधार के सुझाव देगी।
लोकसभा में गतिरोध जारी, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में गतिरोध लगातार जारी है। गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्पीकर ओम बिरला के बार-बार शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद विपक्ष के नारेबाजी और प्रदर्शन नहीं रुके, जिसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान की मांग कर रहे हैं। साथ ही राम मंदिर चढ़ावा मामले के आरोप का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। हंगामे के कारण प्रश्नकाल एक भी दिन ठीक से नहीं चल पाया है। इस वजह से सत्र शुरू होने से अब तक जरूरी सरकारी कामकाज ठप पड़ा है। स्पीकर ओम बिरला ने कई बार विपक्ष से सदन चलाने देने की अपील की, लेकिन उन्हें कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। बुधवार को हंगामे के बीच ही लोकसभा ने एक अहम बिल पास किया था। इस बिल के जरिए अब अदालतों में बैंक से जुड़े डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को भी सबूत के तौर पर माना जाएगा। ध्वनिमत से पास हुए इस कानून का मकसद बैंकिंग से जुड़े साक्ष्यों के कानून को नए जमाने के डिजिटल लेनदेन के हिसाब से अपडेट करना है। हंगामे के कारण इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, सीपीआई और समाजवादी पार्टी लगातार भगवान राम का विरोध करती आई हैं। किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में विपक्ष द्वारा राम मंदिर चढ़ावा को लेकर किए गए प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा था कि इससे देशभर के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर संसद को चलने नहीं दे रहा। उन्होंने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम लेते हुए कहा था, “वेणुगोपाल अच्छे इंसान हैं, लेकिन वे अपने साथियों को शालीनता नहीं सिखा पा रहे। सरकार चर्चा के लिए तैयार है।
पटना : खत्म हुई नगर निगम के सफाईकर्मियों की हड़ताल, सरकार से वार्ता के बाद बनी सहमति

पटना। राजधानी पटना समेत राज्य के नगर निकायों में पिछले आठ दिनों से जारी सफाईकर्मियों की हड़ताल गुरुवार को समाप्त हो गई। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा के साथ सफाईकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल की हुई वार्ता में प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस लेने और कर्मचारियों के काम पर लौटने की घोषणा की। इससे राजधानी सहित अन्य नगर निकायों में सफाई व्यवस्था के जल्द सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। हड़ताल के कारण पटना शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। सड़कों, बाजारों, मोहल्लों और रिहायशी इलाकों में कूड़े का अंबार लग गया था। लगातार हो रही बारिश के बीच गीला कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही थी और कई इलाकों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ने लगा था। शहरवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिसके बाद सरकार ने मामले में सक्रिय हस्तक्षेप किया। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत की। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वार्ता के दौरान कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई और अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई, जबकि अन्य मांगों पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा, ”सभी कर्मचारियों का धन्यवाद, जिन्होंने हम पर विश्वास किया। जो हमारे शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनके लिए जो भी आवश्यक निर्णय लेने होंगे, हम करेंगे। कई मांगों पर सहमति बन गई है। कुछ मामलों के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जबकि कुछ निर्णय ऐसे हैं, जिनके लिए मंत्रिपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होगी।” सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को हर हाल में हड़ताल समाप्त कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे वार्ता का रास्ता आसान हुआ और दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकी। इससे पहले पटना नगर निगम में महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में सशक्त स्थायी समिति की विशेष बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सफाईकर्मियों की अधिकांश मांगें नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। ऐसे में इन मांगों से संबंधित प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, ताकि राज्य सरकार स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। महापौर सीता साहू ने कहा कि पटना नगर निगम हमेशा से सफाईकर्मियों के हितों और उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति से सफाई व्यवस्था शीघ्र पूरी तरह बहाल हो जाएगी।
भूटान की वादियों में फैमिली संग छुट्टियां मना रहीं सोनाक्षी सिन्हा, खूबसूरत तस्वीरों ने जीता फैंस का दिल

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा इन दिनों अपने परिवार के साथ भूटान की खूबसूरत वादियों में छुट्टियों का आनंद ले रही हैं। पहाड़ों, नदियों और हरियाली के बीच बिताए गए इन खास पलों की झलक उनकी ननंद ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। तस्वीरों में सोनाक्षी और उनके पति जहीर इकबाल अपने परिवार के साथ सुकून भरे पल बिताते नजर आ रहे हैं। इस फैमिली ट्रिप की तस्वीरें सोनाक्षी की ननद और फैशन डिजाइनर सनम रतनसी की पोस्ट से हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें साझा करते हुए कैप्शन लिखा, “पीक फैमिली टाइम” और इसके साथ पहाड़ और भूटान के झंडे की इमोजी भी लगाई। बाद में सोनाक्षी के पति जहीर इकबाल ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस वेकेशन की कई झलकियां साझा कीं। तस्वीरों में पूरा परिवार भूटान की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेता दिखाई दे रहा है। कहीं ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं, कहीं बहती हुई नदी, तो कहीं बादलों से घिरी हरी-भरी घाटियां। एक तस्वीर में सोनाक्षी, सनम और एक छोटी बच्ची विक्ट्री साइन बनाते हुए मुस्कुराती नजर आ रही हैं। वहीं जहीर द्वारा साझा की गई तस्वीरों में परिवार सुकून के पल बिताता दिख रहा है। एक सेल्फी में सोनाक्षी कैमरे की ओर मुस्कुराती नजर आ रही हैं, जबकि पीछे जहीर खूबसूरत नजारों का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। एक पारिवारिक तस्वीर में सोनाक्षी, जहीर और उनके माता-पिता भूटान की शांत और मनमोहक वादियों के बीच कैमरे के लिए पोज देते नजर आए। फैंस इन तस्वीरों पर जमकर प्यार लुटा रहे हैं और दोनों की जोड़ी की तारीफ कर रहे हैं। सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ने 23 जून 2024 को शादी की थी। करीब सात साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को शादी का नाम दिया। दोनों ने मुंबई स्थित सोनाक्षी के घर पर परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में रजिस्टर्ड मैरिज की थी। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों की मौजूदगी में एक शानदार रिसेप्शन का आयोजन किया गया था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। वहीं, अपनी बेहतरीन एक्टिंग के अलावा सोनाक्षी हाल के दिनों में अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर भी चर्चा में रही हैं। उन्होंने हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान खुलकर अपनी राय रखी थी। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जेन-जी और छात्र प्रदर्शनकारियों की सराहना करते हुए एक वीडियो साझा किया था। हालांकि, इस वीडियो के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उनकी प्रतिक्रिया की आलोचना की, जबकि कुछ ने उनका समर्थन भी किया। इसी दौरान अभिनेत्री कंगना रनौत ने बिना नाम लिए एक सोशल मीडिया पोस्ट में अभिनेत्री की ड्रेसिंग और व्यवहार पर टिप्पणी की थी। कंगना ने लिखा, “आजकल कई फेक न्यूज चल रही हैं, मेरे बारे में भी ऐसी ही एक फेक बात फैली है। मैं कभी किसी के शरीर या लुक का मजाक नहीं उड़ाती, लेकिन मैंने एक ऐसी एक्ट्रेस को देखा है जो आजकल जेबकतरे की तरह कपड़े पहनती और बात करती है। वह हाफ पैंट और उल्टी कैप पहनती है और प्रोटेस्ट करने वालों के घटिया व्यवहार को बढ़ावा देती है। मुझे हमेशा लगता है कि आप रिश्ते में कैसे कपड़े पहनते हैं, यह सीधे तौर पर आपकी भावनाओं को दिखाता है। प्यारी साथी एक्ट्रेस, अगर तुम्हारा पार्टनर तुम्हें जेबकतरे जैसा महसूस करा रहा है, तो मुझे अफसोस है। तुम पहले कितने अच्छे से कपड़े पहनती और बात करती थीं, अब तुम्हें क्या हो गया है? राय तुम्हारी अपनी है, लेकिन तुम अपनी स्टाइलिंग को बेहतर बना सकती हो। अगर तुम्हें किसी मदद की जरूरत हो, तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।
ऑफिस में घंटों बैठते हैं? रोज करें पादहस्तासन, तनाव और अकड़न से मिलेगा छुटकारा

नई दिल्ली। ऑफिस में लंबे समय तक डेस्क पर बैठे रहने से कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्या शरीर को जकड़ने लगती हैं। ऐसी स्थिति में रोजाना समयानुसार, नियमित आहार और योगासन शरीर को इन समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार है, योग के इन्हीं आसनों में पादहस्तासन श्रेष्ठ बताया गया है, जिसके अभ्यास से शरीर को धीरे-धीरे आराम मिलने लगता है। पादहस्तासन एक ऐसा योगासन है जो तीन शब्दों से मिलकर बना है, पाद + हस्त + आसन। इस आसन में पांव (पाद) को हाथों (हस्त) से पकडते हैं इसलिए इसे पादहस्तासन या हस्त पादासन कहते हैं। आधुनिक जीवनशैली में हम जहां ज्यादातर समय मोबाइल या कंप्यूटर के सामने झुके रहते हैं, ऐसे में यह आसन रीढ़ को राहत देता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को लेकर सुझाव दिए हैं। उनके अनुसार, इस आसन के नियमिस अभ्यास से तनाव, अकड़न, खराब पाचन और कम ऊर्जा जैसी समस्याएं शरीर में धीरे-धीरे जमा होती रहती हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए पादहस्तासन एक ऐसा आसान है, जिसके नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, मन शांत रहता है और आगे की ओर गहरे खिंचाव से शारीरिक तनाव दूर होता है। इस आसन को करने से सिर की तरफ खून का प्रवाह बढ़ता है, जिससे दिमाग और आंखों को फायदा होता है। साथ ही, यह मन को शांत करता है और तनाव को कम करने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले खड़े होकर दोनों पैरों को जोड़ें, सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें और हाथों को पैरों के पास जमीन पर रखने की कोशिश करें। शुरुआती दिनों में घुटनों को थोड़ा मोड़ सकते हैं। कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौटें। रोजाना 3 से 5 बार इस आसन का अभ्यास किया जा सकता है। शुरुआती अभ्यासकर्ता इस आसन को करने के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें और योगासन करते समय हमेशा अपनी क्षमता पर ध्यान दें। जबरदस्ती या जरूरत से ज्यादा खिंचाव शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ ही गंभीर बीमारी और हालिया हुई सर्जरी और गर्भवती महिलाओं को इसको करने से पहले योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
होर्मुज नहीं खुला तो ईरान पर होगी कड़ी कार्रवाई : राष्ट्रपति ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बहुत जल्द नहीं खोला गया तो ईरान के ऊपर बड़ी कार्रवाई होगी। ट्रंप ने कहा, “हम ईरान से बहुत अच्छी बातचीत कर रहे हैं।” वहीं, तेहरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।” ओवल ऑफिस में ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान को आखिरी मौका दे रहे हैं। होर्मुज को खोलने की बात हो रही है। ट्रंप ने कहा, “वे जल्दी फैसला लेंगे, चाहे जिस तरह से हो। यह कोई बहुत जटिल बात नहीं है। हम होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की बात कर रहे हैं।” लेकिन ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही। तेहरान में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, “फिलहाल हम अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची इराक की यात्रा पर हैं। बाकी सभी वार्ताकार ईरान में ही हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, “ईरानी नेतृत्व बेहद दोहरा है। पहले वे बैठक के लिए गिड़गिड़ाते हैं और फिर खुलेआम कहते हैं कि कोई चर्चा नहीं हो रही।” इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान होर्मुज के सामने स्थित ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यह अस्थायी इंतजाम है जिसका मकसद इस रणनीतिक जलमार्ग में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस्माइल बकाई ने कहा कि मस्कट-तेहरान वार्ता में कोई तीसरा देश शामिल नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान हमले की खबरों से घबरा गया है। उन्होंने कहा यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और सबसे कड़ा होगा। हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बात करना चाहते हैं।
अभिनेता प्रदीप रावत को याद कर भावुक हुए अनूप सिंह, लिखा-मैं हमेशा आपकी यादों और सीखों को संजोकर रखूंगा

मुंबई। दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया। अभिनेता को याद करते हुए अभिनेता अनूप सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें याद कर खास नोट लिखा। अनूप ठाकुर ने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेता के साथ तस्वीरें शेयर की। अपनी इस पोस्ट के जरिए अभिनेता ने बताया कि ऑफ कैमरा वह सिर्फ जिंदगी की लड़ाइयों से लड़ने के लिए एक प्रेरणा रहे हैं। अभिनेता ने लिखा, “प्रदीप रावत सर, मुझे आप जैसे बेहतरीन कलाकार के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूं। 1990 में एक बच्चे के रूप में आपको अश्वत्थामा का रोल करते देखने से लेकर, बड़े होकर आपको गजनी के रूप में, अचारी अमेरिका यात्रा में आपके बेटे या धर्मरक्षक छत्रपति संभाजी महाराज में आपके दुश्मन का रोल करने तक। कैमरे के बाहर आप सिर्फ एक गाइडिंग लाइट और जिंदगी की लड़ाइयों से लड़ने के लिए एक इंस्पिरेशन रहे हैं। जो लोग आपको जानते हैं वे जानते हैं कि आपका सफर कैसा रहा है और मैं हमेशा आपकी यादों और सीखों को संजोकर रखूंगा।” उन्होंने लिखा, “आपने अपनी जिंदगी को एक शेर की तरह जिया है, अब शांति से आराम करें। दुनिया को मनोरंजित करने के लिए आपका धन्यवाद। ओम शांति।” अभिनेता प्रदीप के घर में पत्नी और बेटा विक्रमादित्य हैं। अभिनेता के निधन की खबर उनके पुराने साथी और अभिनेता यशपाल शर्मा ने दी। यशपाल, जो ‘लगान’ फिल्म में भी प्रदीप के साथ थे, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए प्रदीप रावत को श्रद्धांजलि दी। पोस्ट में लिखा, “प्रदीप रावत, हमारे लगान के गजनी देवा। उनकी आत्मा को शांति मिले।” लगान और गजनी समेत कई फिल्मों और धारावाहिकों में काम करने वाले अभिनेता ने तीन दशक से ज्यादा समय में हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में काम किया था। उन्हें आखिरी बार हिंदी फिल्म ‘छावा’ में देखा गया था, जो मराठा साम्राज्य के दूसरे शासक संभाजी के जीवन पर आधारित एक ऐतिहासिक एक्शन फिल्म थी। यह शिवाजी सावंत के मराठी नॉवेल ‘छावा’ का अडैप्टेशन है। इसमें अक्षय खन्ना और रश्मिका मंदाना भी हैं।
राहुल गांधी दूसरों को उपदेश देने के बजाय पहले अपनी पार्टी पर दें ध्यान : गिरिराज सिंह

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी पर दिए गए बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने कहा था कि “छात्रों को माफ करने के बजाय छात्रों से माफी मांगे।” इस पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को दूसरों को उपदेश देने के बजाय पहले अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “ग्रामीण बिहार में एक कहावत है: ‘अपना ब्याह नहीं, सूरदास के बरतूहारी’। राहुल गांधी को दूसरों को उपदेश देने के बजाय पहले अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कहा कि देश को भविष्य में कभी भी विपक्ष का ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण नेता न मिले। उन्होंने कहा, “भारत ने विपक्ष के कई बेहतरीन नेता देखे हैं, लेकिन इनके जैसा नेता नहीं देखा। मेरी सलाह है कि वे उनसे सीखें। आप समाज में अपनी रेटिंग कर सकते हैं। इस छात्र आंदोलन में आपकी सद्भावना शून्य थी।” वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा श्रीनगर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ से पहले किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी गिरिराज सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “महबूबा मुफ्ती आतंकवादी समर्थक हैं। उन्होंने इतने दिनों तक आतंकवादियों का समर्थन किया। वह कुछ दिनों के लिए हमारे साथ रहीं। हमने सुधारने की कोशिश की। नहीं सुधरे तो हमने छोड़ दिया।” गिरिराज सिंह ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने को ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा, “जिस तरह से हम 15 अगस्त और 26 जनवरी को भारत के इतिहास का जश्न मनाते हैं, यह भी एक महान दिन है। सरदार पटेल के सपने, भारत के अनगिनत लोगों के सपने, वे सपने जो हम कहते थे कि ‘एक देश, दो झंडे, दो राष्ट्रपति, नहीं चलेगा’। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, 5 अगस्त 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन संवैधानिक प्रावधानों को हटा दिया।” उन्होंने आगे कहा, “अब ‘एक देश, एक निशान, एक प्रधान, एक विधान’ है। अब इसे नष्ट करने के लिए कोई पैदा नहीं हुआ है।
ब्राजील ने राजदूत के खिलाफ अमेरिकी वीजा कार्रवाई की निंदा की रियो डी

जनेरियो। अमेरिका द्वारा ब्राजील की राजदूत का वीजा रद्द करने पर ब्राजील सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई। ब्राजील ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इस फैसले को गलत और आधारहीन बताया। मामला ब्राजील की वाशिंगटन में तैनात राजदूत मारिया लुइजा रिबेरो वियोटी के वीजा से जुड़ा है। अमेरिकी सरकार ने पिछले महीने ब्राजील द्वारा दो अमेरिकी अधिकारियों को वीजा न देने और ट्रंप प्रशासन के नए राजदूत की नियुक्ति में देरी करने के जवाब में यह कदम उठाया। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि जिन दो अमेरिकी अधिकारियों को वीजा देने से मना किया गया था, वे ब्राजील के चुनावी सिस्टम की जांच करने आना चाहते थे। ब्राजील ने इसे देश के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य दखल करार दिया। नए अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति पर भी ब्राजील ने सफाई देते हुए कहा कि अमेरिका ने डेनियल पेरेज का नाम सार्वजनिक रूप से घोषित कर दिया था जबकि औपचारिक मंजूरी के लिए अनुरोध बाद में भेजा गया। ब्राजील के मुताबिक यह वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 4 का उल्लंघन है। बयान में कहा गया, “वियना कन्वेंशन में कहीं यह नहीं लिखा कि मंजूरी कितने दिन में देनी है। अमेरिका का प्रस्ताव अभी हमारी समीक्षा में है।” ब्राजील ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने पहले ही ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जजों और वरिष्ठ अधिकारियों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इन अधिकारियों के अमेरिकी वीजा भी रद्द किए जा चुके हैं। आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक उत्पीड़न किया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि राजदूत का वीजा तभी बहाल होगा जब स्थिति सुलझ जाएगी। जून की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनियल पेरेज को ब्राजील में अगला राजदूत नामित किया था। अमेरिकी सीनेट ने अभी उनकी नियुक्ति की पुष्टि नहीं की है और ब्राजील की मंजूरी के बिना वे पदभार नहीं संभाल सकते। रिपोर्ट के मुताबिक, जब वीजा रद्द करने की सूचना आई तब राजदूत वियोटी ब्राजील में ही थीं। ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि स्थानीय चैनल ग्लोबोन्यूज से की। पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका ब्राजील के अधिकारियों पर नए वीजा प्रतिबंध लगा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के बड़े मामलों पर दिए फैसलों की आलोचना भी कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।