अनुष्का यादव ने हैमर थ्रो मीट रिकॉर्ड बेहतर किया; इलांगोवन ने पोल वॉल्ट में जीता गोल्ड

नई दिल्ली। 65वीं नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शनिवार को 18 वर्षीय हैमर थ्रोअर अनुष्का यादव ने मीट रिकॉर्ड तोड़ा। अनुष्का ने लोहे की गेंद को 66.53 मीटर की दूरी तक फेंकते हुए मंजू बाला के पांच साल पुराने रिकॉर्ड (64.42) को तोड़ दिया। अनुष्का यादव ने 62.21 मीटर, 65.75 मीटर, 66.47 मीटर, फाउल, 66.53 मीटर, 65.25 मीटर दूर थ्रो कीं। उनका पर्सनल बेस्ट 67.02 मीटर है और वह एशियन गेम्स 2026 में चौथे स्थान पर रही थीं। वहीं, महिलाओं के पोल वॉल्ट में एशियन गेम्स 2026 की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बारानिका इलांगोवन (रेलवे) ने शनिवार को आसानी से जीत हासिल की। उनकी बेस्ट जंप 4.10 मीटर थी। तीसरा दिन का परिणाम: मेंस: 5,000 मीटर दौड़: सुनील डावर (मध्य प्रदेश) 14:01.64 सेकंड, शिवाजी एम (रेलवे) 14:02.81, अजय बिंद (रेलवे) 14:03.86 ऊंची कूद: रोहित (रेलवे) 2.19 मीटर, जेसी संदेश (रेलवे) 2.16 मीटर, आदित्य रघुवंशी (मध्य प्रदेश) 2.16 मीटर गोला फेंक: करणवीर सिंह (पंजाब) 19.63 मीटर, संयम (रेलवे) 18.32 मीटर, अनुराग कलेर (रेलवे) 18.32 मीटर 4×100 मीटर रिले: एसएससीबी 39.76 सेकेंड, रेलवे 40.75 सेकेंड, हरियाणा 41.37 सेकेंड विमेंस: 10,000 मीटर: शंपा गेन (पश्चिम बंगाल) 35:33.90, सोनिया (उत्तराखंड) 35:35.36, ममता (अखिल भारतीय पुलिस) 35:38.25 लंबी कूद: मुबस्सिना मोहम्मद (ओएनजीसी) 6.38 मीटर, शैली सिंह (उत्तर प्रदेश) 6.37 मीटर, निधि (उत्तर प्रदेश) 6.28 मीटर पोल वॉल्ट: बरानिका एलंगोवन (रेलवे) 4.10 मीटर, मारिया जैसन (रेलवे) 3.90 मीटर, सिंधुश्री जी (कर्नाटक) 3.80 मीटर हैमर थ्रो: अनुष्का यादव (ओएनजीसी) 66.53 मीटर (रिकॉर्ड पूरा), हकीकत ग्रेवाल (पंजाब) 56.14 मीटर, कुलविंदर (रेलवे) 55.22 मीटर भाला फेंक: राम्याश्री जैन (रेलवे) 56.63 मीटर, संजना चौधरी (राजस्थान) 56.12 मीटर, दीपिका (हरियाणा) 54.07 मीटर 4×100 मीटर रिले: रेलवे 45.56 सेकंड, ओडिशा 45.57 सेकंड, तमिलनाडु 46.03 सेकंड मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले: रेलवे 3:21.60 सेकंड, हरियाणा 3:22.43 सेकंड, राजस्थान 3:25.54 सेकंड ।
वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में सांस्कृतिक कूटनीति की शाम, कई देशों के राजदूतों ने लिया हिस्सा

वडोदरा। गुजरात के वडोदरा स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति के संगम का एक खास आयोजन हुआ। इस मौके पर दुनिया भर के देशों के हेड्स ऑफ मिशन एक साथ नजर आए। इस पहल का मकसद भारतीय कला और वैश्विक संवाद को एक मंच पर लाना था। अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “गुजरात के वडोदरा में ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में राजदूत के दौरे के दौरान दुनिया भर के सहयोगी मिशन प्रमुखों के साथ। इस शानदार पहल के लिए राजदूत मोनिका कपिल और सिद्धांत मोहता का आभारी हूं।” वहीं भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने भी इस शाम का अनुभव साझा किया और एक्स पर लिखा, “गुजरात के वडोदरा में भव्य लक्ष्मी विलास पैलेस में कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति की एक शाम, दुनिया भर के साथी मिशन प्रमुखों की मौजूदगी में।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम में राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध कृतियों की नाटकीय प्रस्तुति की गई, जहां भारतीय विषयों और यूरोपीय यथार्थवाद का मंच पर सुंदर संगम देखने को मिला। यह प्रस्तुति ऐक्यम 2026 की थीम ‘रस और यथार्थवाद’ का सजीव प्रतिबिंब थी। तिस्साफी ने इस पहल के लिए एंबेसडर सिद्धांत मोहता और उनकी टीम के साथ-साथ महारानी राधिकराजे गायकवाड़ और महाराजा समरजीत सिंह गायकवाड़ का गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद किया। बता दें कि लक्ष्मी विलास पैलेस भारत के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है और इंडो-सरसेनिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। गायकवाड़ राजवंश का यह पैलेस वडोदरा की सांस्कृतिक पहचान है। यहां विदेशी राजनयिकों का दौरा भारतीय सॉफ्ट पावर और विरासत कूटनीति को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में मौजूद राजदूतों की तस्वीर में पैलेस की रोशनी से जगमगाती भव्यता साफ दिखाई दे रही है, जिसके सामने सभी राजदूत एक साथ पोज देते नजर आए। ‘ऐक्यम 2026’ पहल के तहत इस तरह के आयोजन भारत की कला परंपरा को वैश्विक मंच पर पेश करने और भारत-विश्व के बीच सांस्कृतिक समझ को गहरा करने का काम कर रहे हैं। राजा रवि वर्मा, जिन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को पश्चिमी चित्रकला तकनीक से जोड़ा था, उनकी कृतियों पर आधारित यह प्रस्तुति इसी सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक बनी।
गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रदर्शन को लेकर एचएस फूलका ने जताई साजिश की आशंका, आप पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। भाजपा नेता एचएस फुल्का ने 10 अक्टूबर को गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में हुए कथित विरोध प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम अचानक नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर जांच हो जाए तो गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में घुसे प्रदर्शनकारी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता निकलेंगे। एचएस फुल्का ने कहा कि लंबे समय से जंतर-मंतर, बोट क्लब और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोग गुरुद्वारा बंगला साहिब में ठहरते रहे हैं, जहां उन्हें शरण और लंगर जैसी सुविधाएं मिलती रही हैं लेकिन इस बार स्थिति अलग रही और कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा परिसर के भीतर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ लोग बैनर लेकर बैठे दिखाई दे रहे हैं और परिसर के भीतर भाषण दिए जा रहे हैं। फुल्का के अनुसार, सेवादारों द्वारा रोकने के बावजूद उनकी बात नहीं मानी गई और गुरुद्वारे के अंदर प्रदर्शन जारी रखा गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके तहत पुलिस को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया जाए और बाद में यह प्रचार किया जाए कि पुलिस गुरुद्वारे के अंदर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एचएस फुल्का ने दावा किया कि इस घटनाक्रम के पीछे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका हो सकती है, हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया और जांच की मांग की। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से भी आग्रह किया कि गुरुद्वारे की मर्यादा के उल्लंघन के मामले में उचित कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, सेवादारों के मना करने के बावजूद परिसर में राजनीतिक भाषण देना और पोस्टर प्रदर्शित करना धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ है। एचएस फुल्का ने कहा कि इस मामले से जुड़े वीडियो उपलब्ध हैं और पुलिस को संबंधित लोगों की पहचान कर पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले हुए सीजेपी के आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा परिसर में गए थे, लेकिन उस समय इस प्रकार की गतिविधियां देखने को नहीं मिली थीं। भाजपा नेता ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश: सपा के बबुआ अभी से बौखला गए हैं: सीएम योगी

बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या से नामांकन करें, वह भी वहीं से चुनाव मैदान में उतरेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘लड़ाई चेलों से क्यों? लड़ाई तो आमने-सामने होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अयोध्या उनकी आस्था की स्थली है और वहां हो रहे विकास कार्यों की निगरानी के लिए वह लगातार जाते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि अब अयोध्या में चुनावी मुकाबला भी आमने-सामने हो जाए। मुख्यमंत्री बलरामपुर के रेहरा बाजार विकासखंड के बिलरिया गांव में 803 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने सपा अध्यक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सपा के बबुआ अभी से बौखला गए हैं। अभी तो विकास की शुरुआत हुई है, आगे बहुत कुछ होना बाकी है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में अयोध्या को तीन-चार घंटे बिजली मिलती थी। विकास में बाधाएं खड़ी की जाती थीं। आज वही अयोध्या रामराज्य के नए उदाहरण के रूप में त्रेतायुग का स्मरण करा रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में 80 प्रतिशत सीटों पर भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए जीतेगा। विपक्ष के हिस्से अधिकतम 20 प्रतिशत सीटें ही आएंगी। मुख्यमंत्री योगी ने सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करी और अवैध गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां किसी छांगुर जैसे व्यक्ति को पनपने नहीं दिया जाएगा। किसी को डेमोग्राफी बदलने की छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकार में यह क्षेत्र तस्करी और अपराधियों की गतिविधियों का केंद्र बन गया था। अब वही क्षेत्र विकास की नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में माफिया और अपराधियों को संरक्षण मिलता था। अपराधियों के हौसले बुलंद थे और आम नागरिक भय के माहौल में रहते थे। अब प्रदेश में कानून का राज है। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। किसी माफिया को कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जाएगी। बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा तीसरा रास्ता नहीं है। सपा पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उसका पीडीए वास्तव में ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है। इसका दूसरा अर्थ ‘प्रदेश डुबाऊ अलायंस’ भी है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने दलितों, पिछड़ों और अन्य वर्गों की उपेक्षा की। एक सीट परिवार के सदस्य को दी गई, जबकि दूसरी धनबल के आधार पर बांटी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के एजेंडे में परिवार के बाहर किसी के लिए स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर ये दल इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, जबकि हारने पर ईवीएम को दोष देते हैं। चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हैं और न्यायालय पर टिप्पणी करते हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भ्रष्टाचार, दंगों और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए। कहा कि प्रदेश में अब कोई दंगा नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि अथवा पशुहानि होने पर भी अगले 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में बलरामपुर के लिए दस हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की धनराशि भेजी गई है। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय का सत्र शुरू हो चुका है। भवन तैयार होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। रिंग रोड, चीनी मिल विस्तार, थारू संग्रहालय और मथुरा घाट पुल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बलरामपुर को विकास के मामले में पिछड़ने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने विभागीय प्रदर्शनियां देखीं और छात्रा के विज्ञान मॉडल की सराहना की। एक बच्चे का अन्नप्राशन कराया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में विकास यादव और मोहम्मद शादाब को लैपटॉप दिए। किरण वर्मा और हिमांश यादव को कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता से संबंधित चाबियां सौंपीं। अजय कुमार पाल, हसन रजा और गुफरान अंसारी को युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत पांच-पांच लाख रुपये के चेक दिए। किसना देवी और ननका देवी को आवास स्वीकृति पत्र तथा गुड़िया वर्मा और पिंकी को आजीविका मिशन के तहत 45 लाख रुपये का चेक दिया। बलरामपुर विधायक पल्टूराम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश विकास के रास्ते पर है। उन्होंने 2027 में सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत का दावा करते हुए लोगों से योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने का आह्वान किया। उतरौला विधायक रामप्रताप वर्मा ने कहा कि 2017 से पहले व्यापारी और महिलाएं भय के माहौल में रहते थे। योगी सरकार ने अपराधियों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर प्रदेश में शिक्षा और विकास को गति दी है।
रिग्ड’ चुनाव का आरोप लोकतांत्रिक भरोसे को पहुंचाता है चोट, पूर्व नौकरशाहों का खुला पत्र

नई दिल्ली। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व राजदूतों और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों सहित पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने भारत की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का बचाव करते हुए संयुक्त खुला पत्र जारी किया है। पत्र में चुनावों में धांधली के आरोपों को बिना सबूत लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए नागरिकों से चुनावी व्यवस्था में स्थापित बहुदलीय सुरक्षा उपायों पर भरोसा करने, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान करने और मतदाता सूची की जांच करने की अपील की गई है। पत्र में कहा गया है कि चुनावों को ‘रिग्ड’ यानी धांधली से प्रभावित बताने के लिए बिना सबूत इस शब्द का बार-बार इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के भरोसे को नुकसान पहुंचाता है। पत्र लिखने वाले अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में भारत के चुनावों का संचालन किया है या उनका अध्ययन किया है। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, मतदान कर्मियों को प्रशिक्षित करने, स्ट्रॉन्ग रूम सील करने और मतगणना की निगरानी जैसे कार्य किए हैं। पत्र के मुताबिक, इन अधिकारियों का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और वे अपने अनुभव के आधार पर चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था को सामने रखना चाहते हैं। पूर्व अधिकारियों ने पुराने चुनावों में बूथों पर हथियारबंद लोगों की मौजूदगी, बाहुबलियों के समर्थकों की गतिविधियों, मतपेटियों में अवैध तरीके से मतपत्र डालने, मतपेटियां चुराने और मतदाताओं को मतदान से रोकने जैसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बूथ कैप्चरिंग की समस्या इतनी गंभीर थी कि संसद ने 1989 में इसे अपराध घोषित किया। पत्र में दावा किया गया कि कभी बूथ कैप्चरिंग के लिए पहचाने जाने वाले बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव बिना किसी पुनर्मतदान के संपन्न हुआ, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ। इसमें यह भी कहा गया कि 1951 के बाद बिहार में सबसे अधिक मतदान हुआ और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया। पत्र में कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम हैं। प्रत्येक उम्मीदवार का एजेंट मतदान केंद्र पर मौजूद रह सकता है और मतदान में पड़े मतों की हस्ताक्षरित गणना प्रति अपने साथ ले जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को एजेंटों के हस्ताक्षर के साथ सील किया जाता है और स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है, जहां उम्मीदवारों के एजेंट निगरानी कर सकते हैं। मशीनों की गिनती और कागजी पर्चियों के मिलान की व्यवस्था भी सुरक्षा उपायों का हिस्सा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बरकरार रखा था। पूर्व अधिकारियों ने तर्क दिया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली करने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के अधीन काम करने वाले हजारों अधिकारियों और हारने वाले दलों के एजेंटों की मिलीभगत जरूरी होगी। पत्र में कहा गया कि ऐसी किसी साजिश को अब तक साबित नहीं किया गया है। पत्र में चुनाव आयोग की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि आयोग को बहुसदस्यीय निकाय बनाया गया था, ताकि चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की शक्ति किसी एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में इस व्यवस्था को बरकरार रखा था। पत्र के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्त विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हैं। पूर्व अधिकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने माना कि इस तरह की बड़ी प्रक्रिया में कुछ असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन इसे राजनीतिक संबद्धता के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। पत्र में कहा गया कि इसी चुनाव आयोग के कार्यकाल में केंद्र में सत्तारूढ़ दल हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हार चुका है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उसे अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। पत्र के अनुसार, जीत के समय चुनावी व्यवस्था को निष्पक्ष और हार के बाद धांधलीपूर्ण बताना उचित नहीं है। पत्र में कहा गया कि बिहार की मतदाता सूची का पिछला गहन पुनरीक्षण 2003 में हुआ था। वर्ष 2025 के पुनरीक्षण के दौरान लगभग 22 लाख मृत मतदाताओं, सात लाख दोहराव वाली प्रविष्टियों और स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लाखों लोगों के नाम सामने आए। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में ऐसे नाम बने रहने से फर्जी मतदान की आशंका पैदा होती है। उनके अनुसार, मतदाता सूची को दुरुस्त करने का उद्देश्य मतदाताओं को बाहर करना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना है। पत्र में स्पष्ट किया गया कि मसौदा मतदाता सूची अस्थायी होती है और उसमें किसी नाम का नहीं होना अपने आप में उस नाम को अंतिम रूप से हटाया जाना नहीं है। किसी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता। इसके बाद अपील के दो स्तर भी उपलब्ध हैं। प्रत्येक राजनीतिक दल बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ अपने एजेंट तैनात कर सकता है। पत्र के मुताबिक, पुनरीक्षण के दौरान मृत और दोहराव वाले नाम हटाए जाने के साथ लगभग 21.5 लाख नए मतदाताओं को भी जोड़ा गया। पत्र में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का भी जिक्र किया गया। पूर्व अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन इसके प्रत्येक चरण की निगरानी की। अदालत ने मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखे गए सभी 65 लाख लोगों के नाम और उन्हें बाहर रखने के कारण प्रकाशित करने का निर्देश दिया। पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन दावे दाखिल करने की अनुमति दी, पहचान के प्रमाण के रूप में आधार को स्वीकार करने का निर्देश दिया और कहा कि यदि किसी भी चरण में अवैधता पाई जाती है तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है। अपील के लिए मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था भी की गई। पत्र के अनुसार, 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा और गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़े। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए, लेकिन एसआईआर की वैधता को लेकर अदालत के फैसले का सम्मान करना
अदाणी डिफेंस को निर्यात प्रदर्शन के लिए मिला ‘एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026

नई दिल्ली। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने शनिवार को बताया कि उसे यहां सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के आठवें वार्षिक सत्र में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में निर्यात प्रदर्शन के लिए एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026 मिला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु की मौजूदगी में यह पुरस्कार प्रदान किया। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी विकास, उत्पाद नवाचार, डिजाइन, आयात प्रतिस्थापन, विनिर्माण उत्कृष्टता और निर्यात के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए 15 पुरस्कार दिए गए। कंपनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित उसके विनिर्माण परिसर की सालाना उत्पादन क्षमता 30 करोड़ राउंड है। यहां नाटो मानकों के अनुरूप गोला-बारूद का उत्पादन किया जाता है, जिससे सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को समर्थन मिलता है। सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, अनुसंधान एवं विकास में बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षमता के विस्तार का आह्वान किया। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा, “हमें गर्व है कि भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने के हमारे प्रयासों को मान्यता मिली है। हमारा ध्यान भारत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और उन्हें वैश्विक बाजारों में ग्राहकों तक पहुंचाने पर है।” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र के ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और स्वदेशी विनिर्माण में निवेश जारी रखेगी। हालांकि, यह सम्मान अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के कानपुर एम्युनिशन कॉम्प्लेक्स को वर्ष 2025 में डिजाइन, विनिर्माण और परीक्षण में उत्कृष्टता के लिए दिए गए अलग एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड के बाद मिला है। कंपनी के अनुसार, कानपुर स्थित इस इकाई में स्वचालित विनिर्माण, एआई आधारित गुणवत्ता निरीक्षण, रियल टाइम डेटा विश्लेषण और उत्पादन प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी डिजिटल उत्पादन प्रणाली खतरनाक सामग्रियों को हाथ से संभालने की जरूरत खत्म करती है। कंपनी के मुताबिक, इस इकाई में डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की मदद से विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में 100 प्रतिशत डिजिटल ट्रेसेबिलिटी यानी उत्पादों और प्रक्रियाओं का पता लगाने की सुविधा भी है। इसके अलावा, इस परिसर में एक बैलिस्टिक परीक्षण रेंज है, जो इलेक्ट्रॉनिक प्रेशर, वेलोसिटी एंड एक्शन टाइम प्रणाली से लैस है। यह परीक्षण रेंज भारत की शीर्ष मान्यता संस्था, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त है। वहीं, भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, सरकार ने वर्ष 2029 तक सालाना रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, रिहाई नहीं होने पर अनशन की चेतावनी

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। वांगचुक ने कहा कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे। वांगचुक ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में एकजुटता और शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने शुक्रवार को एक संदेश पोस्ट किया था, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि प्रदर्शन के दौरान इतनी बड़ी संख्या में नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “भारत अघोषित आपातकाल की स्थिति में है। कल जब मैंने आज के प्रदर्शन में एकता और शांति की अपील करते हुए संदेश पोस्ट किया था, तब मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अघोषित आपातकाल की स्थिति में होगा।” वांगचुक ने कहा कि उन्हें खुशी थी कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए कई नेता मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें जानकारी मिली है कि उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द रिहा किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यदि रविवार तक प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो उन्हें अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करना पड़ेगा। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने शनिवार को प्रदर्शन के दौरान करीब 3,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी थी। वहीं, पुलिस के एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे करीब 3,500 लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई कदम उठाए। इसी बीच, भारतीय रेलवे ने नई दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया और कुछ के समय में बदलाव किया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सुरक्षा कारणों से 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए। पुलिस ने शुक्रवार को कहा था कि सीजेपी के प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस के अनुसार, आयोजकों ने पिछले प्रदर्शन के दौरान दिए गए आश्वासनों और कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। शनिवार को सीजेपी के नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया। तीनों नेता एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे। इसके अलावा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। सीजेपी के एक्स अकाउंट पर किए गए पोस्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब आठ बजे सादे कपड़ों में लगभग 50 पुलिसकर्मी ध्रुव राठी के आवास पर पहुंचे और उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया।
राहुल गांधी ने युवाओं से विरोध प्रदर्शन जारी रखने का किया आह्वान, बोले- हम पीछे हटने वाले नहीं

चेन्नई। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को युवा प्रदर्शनकारियों के समर्थन का भरोसा देते हुए कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा और उस पर हमला करने वालों को हराने के लिए अपना अभियान जारी रखेगा। चेन्नई दौरे के दौरान आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि अगर सरकार चाहे तो विपक्षी नेताओं और युवाओं को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई। राहुल गांधी ने इस सरकार को डरपोक बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वह एनडीए सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं और उनकी कार्यशैली को अच्छी तरह समझते हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि इन लोगों के लिए राजनीतिक और वैचारिक जगह लगातार कम हो रही है क्योंकि उनके विरोधी अपनी लड़ाई तेज कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, “आप जितनी पुलिस तैनात करना चाहते हैं करिए, जितने नेताओं, युवाओं या विपक्षी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करना चाहते हैं करिए, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जरूरी जानकारी मौजूद है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। राहुल गांधी ने जनता की आवाज की रक्षा करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में देश के साथ जो हुआ, उसे दोहराने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने देश के युवाओं पर गर्व जताते हुए उनसे प्रदर्शन जारी रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि विपक्ष हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। इस संबंध में राहुल गांधी ने अपने संबोधन का एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन का आह्वान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा एहतियाती कार्रवाई के तहत 600 से अधिक ऐसे लोगों को भी हिरासत में लिया गया, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और नई दिल्ली क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू थी। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को संदेश देते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्ष उनके साथ खड़ा रहेगा।
‘जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं’, राहुल गांधी का केंद्र पर हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और चुनाव आयोग को लेकर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि वह पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ लड़ रहे हैं और उनके तौर-तरीकों को अच्छी तरह समझते हैं। राहुल गांधी ने कहा, “मैं नरेंद्र मोदी, आरएसएस और इनसे जुड़े लोगों के खिलाफ एक दशक से भी ज्यादा समय से लड़ रहा हूं। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूं, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूं, इनकी हर चाल से वाकिफ हूं।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विरोधियों की सबसे बड़ी पहचान ‘कायरता’ है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लेते हुए कहा कि अब धीरे-धीरे उनके चारों तरफ का दायरा सिमट रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों के इस्तेमाल से विपक्ष की आवाज नहीं दबाई जा सकती। उन्होंने कहा, “जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए। सारे नेताओं को गिरफ्तार कर लीजिए, सारे युवाओं को गिरफ्तार कर लीजिए, हम सबको गिरफ्तार कर लीजिए। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।” राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास जरूरी जानकारी मौजूद है और उनकी लड़ाई संविधान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने युवाओं से विरोध जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन की आलोचना की है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी को ‘किले’ में बदल दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोका जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश देश के हितों के खिलाफ हैं और सरकार आलोचनाओं से घबराई हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था यह दिखाती है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों से परेशान है। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं, छात्रों और मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
सीजेपी के आंदोलन पर रामदास आठवले बोले, ये प्रदर्शन बाबा साहब के संविधान के खिलाफ

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने राहुल गांधी और अभिजीत दिपके पर निशाना साधा। आठवले ने कहा कि यह आंदोलन संविधान के खिलाफ है और अराजकता को निमंत्रण दे रहा है, पुलिस का एक्शन सही है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा, “ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने का इनको अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने जो संविधान दिया है, उस संविधान के मुताबिक वो चीफ कमिश्नर बने हैं और चीफ कमिश्नर का सरकार से कोई संबंध नहीं होता है, उनको स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार होता है। चुनाव की लिस्ट ठीक से बनाना, चुनाव में जो गलत नाम हैं, उनको हटाना और हर एक को वोटिंग करने का अधिकार देना चुनाव आयोग का काम होता है।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि 13 करोड़ लोगों के वोट काटे गए हैं। उनसे मेरा कहना है कि जहां आपके लोग हार गए हैं, वहां आप हम पर आरोप लगाते हैं कि हमारा वोट चोरी हो गया है, हमारा वोट आप लोगों ने चुरा लिया है। तो मुझे लगता है कि जब आप जहां चुन कर आते हैं तो चुनाव ठीक है, लेकिन जहां हमको सत्ता मिलती है तो आप आरोप लगाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी से मेरा एक सवाल है कि जिस तरह आपने विरोध किया, आप राष्ट्रपति को भी जाकर मिले। राष्ट्रपति ने भी कहा कि वोट चोरी के जो साक्ष्य हैं, वो हमें दे दीजिए। तो मतलब वोट की चोरी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और चुनाव आयोग को लिस्ट ठीक से बनाने की आवश्यकता है और इसलिए जो 13 करोड़ वोट काटे गए थे, उनमें से 6 करोड़ लोग ऐसे हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं। एक जगह से दूसरी जगह चले गए हैं, वहां उनका घर है, वहां उनकी नौकरी है, वहां उनका धंधा-पानी है तो ऐसे 6 करोड़ लोगों के नाम काट दिए गए। जहां वो रहते हैं, वहां तो उनका नाम है ही, वहां वो वोटिंग करते हैं। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ लोग लापता हैं, मतलब उनके नाम तो वहां हैं, लेकिन उन्होंने कभी वोटिंग ही नहीं की, इसका मतलब वो गलत तरीके से नाम उस लिस्ट में हैं, वो नाम हटाए गए हैं। दो करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके वोट काटे गए हैं और एक करोड़ लोग ऐसे हैं जो गांव से शहर में आ गए हैं और शहर में भी उनका नाम है और गांव में भी नाम है। आठवले ने कहा कि वो एक करोड़ लोगों को काटा है तो इसलिए मुझे लगता है कि इस आरोप में तथ्य नहीं है। आप आंदोलन करके अराजकता को निमंत्रण दे रहे हैं, हिंसा को निमंत्रण दे रहे हैं। रोज हंगामा करके लोगों को तकलीफ दे रहे हैं। जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, हमें भी हिरासत में लिया जाता था, हमारे लोगों को पकड़ते थे, जेल में डालते थे, दस-पंद्रह दिन हम जेल में रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इसलिए आंदोलन शांति से करना चाहिए, लेकिन गलत मुद्दे पर आंदोलन करना बिल्कुल ठीक नहीं है। संविधान के विरोध में आंदोलन करना बिल्कुल ठीक नहीं है। यह आंदोलन, राहुल गांधी का और अभिजीत दिपके का आंदोलन जो है। यह बाबा साहब के संविधान के खिलाफ है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा आप मांग रहे हैं, क्यों मांग रहे हैं इस्तीफा। केंद्रीय मंत्री आठवले ने कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि जब हमारी सत्ता आती है तो इनको लगता है कि हमने वोट चोरी किया है। हम कैसे वोट चोरी कर सकते हैं, वहां लोग जाकर मतदान केंद्र पर अपना-अपना मतदान करते हैं। इसलिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे सामने विकास का एजेंडा है, हम विकास करते रहेंगे, आपको जो करना है आप करते रहें, लेकिन हमारी भूमिका यह है कि देश में अस्थिरता नहीं होनी चाहिए, देश में स्थिरता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी को किसी को तकलीफ बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और उसके लिए पुलिस अपना एक्शन ले रही है और इसलिए आज जो सीजेपी का आंदोलन है, वो मतलब फेल हो चुका है, पुलिस ने उनको कई जगह रोक लिया है। मुझे लगता है कि सीजेपी नीट एग्जाम के पेपर लीक के मामले में स्थापित हुई थी, अभी हर विषय पर इस्तीफा मांग रही है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही है। पीएम के बारे में अभिजीत दिपके उल्टी-सीधी बातें करते हैं, तो यह अच्छी बात नहीं है।