पीओके चुनाव: यूके चाइल्ड ग्रूमिंग गैंग का आरोपी जीता चुनाव, शहबाज की पार्टी से मिला था टिकट

लंदन। पाकिस्तान का पूर्व राज्यमंत्री रुखसार अहमद, जिसे जुलाई 2024 में ब्रिटेन ने चाइल्ड ग्रूमिंग गैंग का आरोपी माना था पीओके चुनाव में जीत हासिल की है। अहमद को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। मामला 1990 के दशक में मैनचेस्टर में नाबालिग लड़कियों से कथित दुष्कर्म और चाइल्ड ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा था। ये शख्स पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तथाकथित विधानसभा के लिए विधायक चुना गया है। यह जानकारी ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 62 वर्षीय रुखसार अहमद पांच वर्ष बाद फिर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचा। यह चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब वह ब्रिटेन में पुलिस जांच के दायरे में है और जमानत पर रिहा है। बताया गया है कि अहमद को पिछले महीने मैनचेस्टर के एक पुलिस स्टेशन में जमानत की शर्तों के तहत पेश होना था, लेकिन उसने यह कहते हुए हाजिर होने से इनकार कर दिया कि वह “हवाई यात्रा करने में सक्षम नहीं है, उसकी सेहत इजाजत नहीं दे रही है।” हालांकि, इसी दौरान सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में अहमद को के मीरपुर क्षेत्र में चुनावी सभाओं और प्रचार अभियान में सक्रिय देखा गया। रुखसार अहमद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के उम्मीदवार के रूप में तथाकथित पीओके विधानसभा के लिए निर्वाचित हुआ है। द गार्जियन के मुताबिक, ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (जीएमपी) ने अदालत से अहमद के विदेश यात्रा पर रोक लगाने वाली जमानत शर्तें लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन जुलाई 2024 में अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। 18 जुलाई 2024 को अहमद को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। उस पर मैनचेस्टर के रशोल्म इलाके में रहने के दौरान बच्चों के यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे। जांच के दौरान दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि 1990 के दशक में, जब वे नाबालिग थीं, तब अहमद ने उनके साथ दुष्कर्म किया और उन्हें यौन शोषण के लिए तस्करी का शिकार बनाया। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को अहमद के पाकिस्तान की राजनीति से जुड़े होने की भी जानकारी मिली। मामला उन कई महिलाओं के आरोपों पर आधारित है, जिनका कहना है कि 1990 के शुरुआती वर्षों में, जब अहमद करीब 20 वर्ष की उम्र के थे, उन्होंने आश्रम में रह रही बच्चियों का यौन शोषण किया। रिपोर्ट के अनुसार, अहमद को अगले छह सप्ताह के भीतर फिर से पुलिस के समक्ष जमानत की शर्तों के तहत पेश होना है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस उनकी गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर सकती है, जिससे ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक विवाद भी खड़ा हो सकता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में पाकिस्तान ने ब्रिटेन के उस अनुरोध को ठुकरा दिया था, जिसमें रोचडेल चाइल्ड ग्रूमिंग गैंग के दोषी शबीर अहमद को पाकिस्तान निर्वासित करने की मांग की गई थी। पिछले महीने ब्रिटेन के कई राजनीतिक दलों ने लेबर सरकार से पाकिस्तान को दी जाने वाली विदेशी सहायता रोकने और वीजा प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि जब तक पाकिस्तान रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दोषी शबीर अहमद को वापस स्वीकार नहीं करता, तब तक उस पर दबाव बनाया जाना चाहिए। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार, शबीर अहमद 30 बाल यौन शोषण मामलों में दोषी ठहराया गया था। उसे 22 साल की सजा हुई जिसमें से 14 वर्ष जेल में काटकर हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटिश सरकार उसे उसके जन्मस्थान पाकिस्तान भेजना चाहती है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तरुण तेजपाल को रेप और अन्य धाराओं में सजा का दोषी माना। जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांदेकर की पीठ ने गोवा सरकार की अपील पर यह फैसला सुनाया। गोवा सरकार ने 2021 में मापुसा की सत्र अदालत द्वारा तेजपाल को सभी आरोपों से बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट दोपहर 2:30 बजे सजा की अवधि तय करेगा। विस्तृत फैसला बाद में जारी किया जाएगा। यह मामला नवंबर 2013 का है। तरुण तेजपाल की एक जूनियर सहयोगी ने आरोप लगाया था कि गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान एक लग्जरी होटल की लिफ्ट के अंदर तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया। शिकायत के बाद गोवा पुलिस ने तरुण तेजपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और नवंबर 2013 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्थानीय कोर्ट ने खारिज कर दी थी। जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी। मई 2021 में मापुसा की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने तेजपाल को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सबूत ‘संदेह से परे’ साबित नहीं कर पाया। जज ने जांच में खामियों जैसे सीसीटीवी फुटेज पेश न करने का भी जिक्र किया था। गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि निचली अदालत ने सबूतों को ठीक से नहीं समझा। सरकार ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक अहम ईमेल को नजरअंदाज किया। आरोप है कि आरोप लगने के बाद तरुण तेजपाल ने तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर को माफी वाला ईमेल भेजा था। फैसला सुनाने के बाद तरुण तेजपाल के वकील ने सजा पर रोक लगाने की मांग की, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट जा सकें। उन्होंने कहा कि यह बरी होने के बाद दोषी ठहराने का फैसला है और तेजपाल के खिलाफ कोई और आपराधिक केस नहीं है। खुद तरुण तेजपाल ने कोर्ट से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे खुद को पीड़ित मानते हैं और कोर्ट दया का रुख अपनाए। वहीं केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यौन हिंसा के मामलों में कड़ा संदेश जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब कोई लड़की ‘ना’ कहे तो इसका मतलब ‘ना’ ही होता है।” इस मामले की जांच अधिकारी और गोवा पुलिस की सुनीता सावंत ने मीडिया से कहा, “अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया है। दोपहर 2:30 बजे सजा तय होगी। यह एक ऐसी लड़की का मामला है जिसने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। इस लिहाज से यह फैसला बहुत जरूरी है।” 13 साल से इस केस से जुड़ी होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम पुलिस प्रोफेशनल हैं। इसमें कोई भावना नहीं जुड़ी है। यह फैसला उन सभी महिलाओं के लिए जरूरी है जो किसी भी सेक्टर में काम कर रही हैं।

दक्षिणी फिलीपींस में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया, 10 किमी की गहराई पर हिली धरती

मनीला। दक्षिणी फिलीपींस के डावाओ ऑक्सिडेंटल प्रांत में गुरुवार सुबह भूकंप के झटकों से अफरातफरी का माहौल बन गया रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोलकेनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी ने कहा कि टेक्टोनिक भूकंप स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 5:41 बजे 10 किमी की गहराई पर आया, जिसका केंद्र बालुत आइलैंड के तट से 99 किमी दक्षिण-पश्चिम में था। मनीला स्टैंडर्ड के अनुसार, भूकंप की हलचल तेज थी, लेकिन इतनी नहीं कि सुनामी की चेतावनी दी जा सके, हालांकि कुछ प्रभावित प्रांतों और इलाकों ने सरकारी ऑफिसों में क्लास और काम के साथ-साथ दूसरी सार्वजनिक गतिविधियों को रोकने की घोषणा की। भूकंप का झटका कोटाबाटो ट्रेंच के पास था, जिसके झटके सारंगनी प्रांत, जनरल सैंटोस सिटी और साउथ कोटाबाटो के कुछ हिस्सों में महसूस किए गए। फिवोल्क्स ने दावाओ डेल सुर, कोटाबाटो और सुल्तान कुदरत में भी तीव्रता की रिपोर्ट दी। सारंगनी आइलैंड के रेस्क्यूअर हार्ली साउरो ने एजेंस फ्रांस प्रेस को बताया कि भूकंप तब आया, जब बड़ी संख्या में लोग सरकारी सब्सिडी लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। उन्होंने कहा, “झटके काफी तेज थे। मैंने लोगों को घबराया हुआ देखा। वे भाग रहे थे और चिल्ला रहे थे। भूकंप तब आया जब लोकल सरकार फाइनेंशियल सब्सिडी दे रही थी, इसलिए कोर्ट में बहुत सारे लोग थे, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। हमारे अंदाजे और अनुभव के आधार पर हमें नहीं लगता कि कोई हताहत या नुकसान हुआ होगा।” बुधवार के बाद यह दूसरा ऐसा भूकंप है। इससे पहले बुधवार को फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी ने बताया था कि डावाओ ऑक्सिडेंटल प्रांत में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था। संस्था ने कहा कि टेक्टोनिक भूकंप स्थानीय समय के हिसाब से दोपहर 12:14 बजे 13 किमी की गहराई पर आया। उसने कहा कि भूकंप से फिलीपींस को सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इस बीच, जर्मन भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र जीएफजेड के अनुसार, बुधवार को सुबह 04:14:09 जीएमटी पर फिलीपींस के मिंडानाओ क्षेत्र में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र शुरू में 5.37 डिग्री उत्तरी अक्षांस और 125.45 डिग्री पूर्वी देशांतर पर तय किया गया था। भूकंप की गहराई 10.0 किमी थी। फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया का एक आइलैंड वाला देश है। यह अक्सर भूकंप, ज्वालामुखी फटने और सुनामी से प्रभावित होता है क्योंकि यह पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के किनारे पर है। रिंग ऑफ फायर पैसिफिक ओशन के चारों ओर बहुत ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखी की हलचल वाला एक बड़ा, घोड़े की नाल के आकार का जोन है। इन हालिया भूकंपों से पहले 8 जून को एक विनाशकारी भूकंप आया था, जिससे इमारतें ढह गईं, भूस्खलन हुआ और मिंडानाओ के पास वाले द्वीप पर कम से कम 76 लोगों की मौत हो गई। उस भूकंप के कारण कोटाबाटो ट्रेंच खिसक गई और समुद्र तल 2 मीटर यानी 6.6 फीट तक ऊपर उठ गया। इससे कोरल रीफ्स को नुकसान पहुंचा और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुआ।

नीदरलैंड के लिम्बर्ग में भीषण जंगल की आग काबू में, राहत और निगरानी अभियान जारी

द हेग। नीदरलैंड के उत्तरी लिम्बर्ग स्थित जंगल में लगी आग पर काबू पाने के बाद अब प्रभावित इलाके में सफाई और निगरानी का काम जारी है। दमकलकर्मी लगातार क्षेत्र पर नजर रख रहे हैं, ताकि आग दोबारा भड़कने की किसी भी घटना को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह आग सोमवार को लगी थी। इस भीषण आग से प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्र के कम से कम 100 हेक्टेयर हिस्से प्रभावित हुए हैं। आग बुझाने के लिए करीब 300 दमकलकर्मियों को तैनात किया गया, जिन्हें नीदरलैंड के रक्षा विभाग के हेलीकॉप्टरों का भी सहयोग मिला। उत्तरी लिम्बर्ग सुरक्षा क्षेत्र ने इस आग को बेहद बड़ी बताया है। आग काफी बड़े क्षेत्र में फैल गई थी, हालांकि प्रभावित कुल क्षेत्रफल का अभी सटीक आकलन नहीं हो पाया है। इस घटना में किसी के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं मिली है। आग लगने के कारणों का भी अब तक पता नहीं चल सका है। प्रवक्ता के अनुसार, आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग ने बड़ी संख्या में दमकलकर्मियों और वाहनों को मौके पर तैनात किया। आग की गंभीरता और लंबे समय तक चलने वाले राहत कार्यों को देखते हुए अतिरिक्त दमकल इकाइयों को भी बुलाया गया। विभिन्न टीमों को रोटेशन के आधार पर तैनात किया गया है और अधिकारियों का मानना है कि अभियान अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है। इस बीच, रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान (केएनएमआई) ने सोमवार शाम लिम्बर्ग क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तूफान और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की थी। वहीं, पूरे प्रांत सहित देश के अन्य हिस्सों में भी उच्च तापमान को लेकर ‘कोड यलो’ चेतावनी प्रभावी है। दमकल विभाग कई फायर इंजनों और सहायता वाहनों से लैस विशेष अग्निशमन इकाई के साथ आग बुझाने के अभियान में जुटा हुआ है। राहत कार्यों में सहयोग के लिए सेना के तीन हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने दोहराया है कि इस आग से अब तक किसी के घायल होने या किसी संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है, जबकि आग लगने के कारणों की जांच जारी है।

हूतियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले का किया दावा, हमले के बाद वापस लौटा जहाज

सना। यमन के हूती समूह ने दावा किया कि उसने अदन की खाड़ी में एक सऊदी तेल टैंकर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया। इससे कुछ घंटे पहले हूती विद्रोहियों ने उत्तरी लाल सागर में एक और सऊदी टैंकर पर अलग से मिसाइल हमले का दावा किया था। बुधवार (स्थानीय समय) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सरेआ ने कहा कि टैंकर, जिसकी पहचान डेजी के तौर पर हुई है, एक बैलिस्टिक मिसाइल से टकराया और वापस लौटने पर मजबूर हो गया। सरेआ ने कहा कि यह हमला समूह की सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकाबंदी का हिस्सा था, जो “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी” नीति के तहत थी। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने कहा कि हूती लड़ाके सऊदी तेल टैंकरों पर करीब से नजर रख रही है और जब तक यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों पर लगी रोक नहीं हटाई जाती, तब तक वे दक्षिणी और उत्तरी लाल सागर से उनके रास्ते को रोक देंगे। इस बीच, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने कहा कि बुधवार को यमन के दक्षिणी तट पर अदन की खाड़ी में एक टैंकर के जाने के दौरान पास में एक जोरदार धमाका सुनाई दिया और बताया कि सभी क्रू सुरक्षित हैं। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने बुधवार (स्थानीय समय) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह घटना अदन से लगभग 95 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में हुई। इसमें कहा गया, “एक टैंकर के मास्टर ने बताया कि उन्होंने जहाज के पास एक जोरदार धमाका सुना और बताया कि सभी क्रू सुरक्षित हैं।” यमन के सेंट्रल अल-बायदा प्रांत में हूती-नियंत्रित इलाके मुकायरस के लोगों ने न्यूज एजेंसी सिन्हुआ को बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि हूती ने इलाके से अदन की खाड़ी की ओर एक मिसाइल लॉन्च की है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि दोनों घटनाएं जुड़ी हुई थीं या नहीं। वहीं, हूती ने अब तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। यह घटना हूती और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है।

अब स्नैपचैट पर भी विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशन की गतिविधियों से यूजर्स होंगे रूबरू

नई दिल्ली। भारत का विदेश मंत्रालय (एमईए) अब एक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। लाखों की तादाद में फॉलोअर्स अहम और सटीक जानकारी एक और प्लेटफॉर्म पर हासिल कर पाएंगे। गुरुवार को एमईए ने ‘स्नैपचैट’ पर कदम रखने का ऐलान किया। मंत्रालय ने यूजर्स से अपने आधिकारिक स्नैपचैट अकाउंट से जुड़ने की अपील की है। एमईए ने एक वीडियो क्लिप विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। फॉलोअर्स से जुड़ने की अपील करते हुए दावा किया कि यहां उन्हें “एक्सक्लूसिव स्टोरीज, अपडेट, रोचक कंटेंट और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।” फेसबुक, वॉट्सऐप, एक्स, लिंकडइन, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे विभिन्न सोशल मीडिया/मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए काफी समय से एमईए विभिन्न देशों के मिशन (दूतावास/ उच्चायोग) से जुड़ी जरूरी जानकारी साझा करता रहा है। स्नैपचैट एक लोकप्रिय मल्टीमीडिया और सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप है जो नई पीढ़ी (जेन-जी) के बीच काफी लोकप्रिय है। इसमें भेजे गए फोटो और छोटे वीडियो को स्नैप कहा जाता है जिनकी विशेषता ये है कि देखने के कुछ सेकंड के बाद ये अपने आप गायब हो जाते हैं। वहीं इनमें साझा की गई फोटो और वीडियो 24 घंटे तक यूजर के प्रोफाइल पर दिखती है। विदेश मंत्रालय पहले भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा है और समय-समय पर लोगों को फर्जी खातों और विदेश नीति से जुड़ी सशुल्क सलाह देने वाले स्कैमर्स से सावधान रहने की चेतावनी जारी करता रहा है। मंत्रालय अकसर अपने कूटनीतिक संवाद, उच्चस्तरीय बैठकों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को दर्शाने वाले वीडियो और तस्वीरें भी साझा करता रहा है, जिससे आम नागरिकों को भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों की झलक मिलती रहे। जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में विदेश मंत्रालय ने इंस्टाग्राम पर अपना आधिकारिक फैक्ट चेक अकाउंट भी लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी फर्जी खबरों, अफवाहों और भ्रामक दावों का तेजी से खंडन करना है।

चीनी खतरे के बीच ताइवान का युद्धाभ्यास, बख्तरबंद वाहन से राष्ट्रपति को ले जाया गया कमांड सेंटर

ताइपे। चीन के साथ ताइवान के रिश्ते सामान्य नहीं है। हाल फिलहाल में खतरा और बढ़ा है। इस सबके बीच ताइवान ने अपने वार्षिक ‘हान कुआंग’ सैन्य अभ्यास के दौरान गुरुवार तड़के एक महत्वपूर्ण युद्धकालीन अभ्यास किया। इस दौरान राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को बख्तरबंद सैन्य वाहन में सुरक्षित रूप से एक गुप्त कमांड सेंटर तक पहुंचाया गया, जहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन संचालन और सरकारी कामकाज की समीक्षा की। राष्ट्रपति लाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वो कमांड सेंटर पहुंचे और सालाना हान कुआंग ऑपरेशन को बारीकी से देखा। विभिन्न ड्रिल्स का जिक्र करते हुए उन्होंने अंत में कहा हम शांति स्थापित करने के अपने इरादे पर अडिग हैं। इससे पहले राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कुछ तस्वीरें जारी की गई थीं। जिसमें लाई बुलेटप्रूफ जैकेट और सैन्य हेलमेट पहने नजर आए। यह अभ्यास ऐसे परिदृश्य पर आधारित था, जिसमें युद्ध की स्थिति में शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर सरकार और सेना की कमान निर्बाध रूप से जारी रखी जाती है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य कमांड संरचना, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की क्षमता का परीक्षण करना है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में सरकार प्रभावी ढंग से काम करती रहे। ताइवान लंबे समय से आशंका जताता रहा है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में चीन शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की तथाकथित “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” (नेतृत्व को निष्क्रिय करने वाला हमला) करने की की कोशिश कर सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के अभ्यास में नेतृत्व की सुरक्षित आवाजाही और वैकल्पिक कमांड व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। 10 दिनों तक चलने वाले इस वर्ष के हान कुआंग अभ्यास में 20,000 से अधिक रिजर्व सैनिक भाग ले रहे हैं। इसमें युद्धकालीन संचार व्यवस्था, नागरिक प्रशासन, हथियारों के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने, साइबर व्यवधान और संभावित चीनी हमले जैसी परिस्थितियों का भी अभ्यास किया जा रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात दोहराता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान की सरकार इन दावों को खारिज करते हुए कहती है कि द्वीप का भविष्य केवल वहां की जनता ही तय कर सकती है।

कंगना रनौत ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर कहा – हमारे ‘जेन-जी’ सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले जेन जी प्रदर्शनकारियों को ‘गटर जेनरेशन’ कहने वाली भाजपा सांसद कंगना रनौत ने गुरुवार को रांची में चल रहे छात्र आंदोलन पर अपनी राय रखी। कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हमारे ‘जेन-जी’ सच में हर तरह की तकलीफ झेल रहे हैं और ये मामला दशकों से चला आ रहा है। हम लोगों ने भी इस तरह की समस्याओं को देखा हुआ है, चाहे पेपर लीक हों या मेरिट-बेस पेपर समेत कई समस्याएं, लेकिन इन सभी के बीच मैं ये कहना चाहती हूं कि कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद में इतने तमाशे किए थे। अब जब झारखंड में ऐसी स्थिति बन रही है, वहां के हालात खराब हो रहे हैं। झारखंड में बच्चों को हर तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बच्चों की विवशता को समझाते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कई वीडियो देखे हैं कि बच्चों को त्रिपाल लगाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। खाने की ठीक स्थिति नहीं है, बच्चों ने दो-तीन दिन से कपड़े नहीं बदले हैं। हालात यहां तक गंभीर हैं कि बच्चों के पास ऑनलाइन फूड नहीं जा पा रहा है। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी वहां नहीं पहुंच रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कि जब हुड़दंग मचाना था, लोगों को उकसाना था, बच्चों को उकसाकर देश की सिक्योरिटी के साथ खतरा मोल लेना हो, तब राहुल गांधी देश के लिए खतरा बनकर निकलते हैं।” हाल ही में मेटा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया था, जिसके बाद काफी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देखिए, मैं भी उसी कमेटी से ताल्लुक रखती हूं और हमारे चेयरमैन निशिकांत दुबे ने बहुत कड़ा रुख अपनाया और माफी की मांग भी की। हमने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि कैसे एंटी-नेशनल कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है। हमें खुशी है कि उन्होंने अपनी गलतियां मान ली हैं। हमें उम्मीद है कि जिस तरह से ये आतंकवादी ताकतें हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बन रही हैं, उससे हमें राहत मिलने की अपेक्षा करते हैं।

झारखंड : जेपीएससी को लेकर प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी, छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को बदतर बताया

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 13वें दिन जारी है। इस आंदोलन को राज्य भर के कई छात्र संगठनों से समर्थन मिल रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन को लगातार लोगों का समर्थन मिल रहा है क्योंकि कई छात्र समूहों विरोध स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी उम्मीदवारों के साथ एकजुटता दिखा रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की उनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं। मुख्य रूप से जेपीएससी परीक्षा के उम्मीदवारों के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन पिछले दो हफ्तों में और तेज हो गया है। लगातार रात भर बारिश होने के बाद भी प्रदर्शनकारी स्थल पर डटे रहे और आंदोलन समाप्त करने से इनकार करते हुए दोहराया कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती। छात्र नेता देवेंद्र महतो ने भी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी, जबकि अन्य प्रदर्शनकारी प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद पूरी रात प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे। छात्रों ने कहा कि बारिश उनके संकल्प को कमजोर नहीं करेगी और उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ तब तक आवाज उठाते रहेंगे जब तक कि कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की जाती। आईएएनएस से बात करते हुए, विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक ने आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा और भर्ती प्रणाली में भ्रष्टाचार गहराई से जड़ जमा चुका है। छात्र ने कहा, “सभी जानते हैं कि यहां की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार से घिरी हुई है। यह आज से शुरू नहीं हुआ है, यह लंबे समय से चल रहा है। यह भगवान बिरसा मुंडा की भूमि है, जिनका हम आदर करते हैं और उन्हें नमन करते हैं। दुर्भाग्य से, इस पवित्र भूमि पर ऐसा भ्रष्टाचार हो रहा है। इसमें शामिल लोग झारखंड के ही हैं, और कई लोग कथित तौर पर घर बनवाने, कार खरीदने और धन जमा करने के लिए रिश्वत ले रहे हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में रिश्वतखोरी आम बात हो गई है। उन्होंने आगे कहा, “हर पद के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, और तभी पद मिलता है। सीजीएल की सीट 25 लाख रुपये में बेची जा रही थी। यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है।” विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले एक अन्य छात्र ने आईएएनएस को बताया कि इस आंदोलन का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राज्य की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना है। छात्र ने कहा, “हमने इस विरोध प्रदर्शन में इसलिए हिस्सा लिया है क्योंकि शिक्षा व्यवस्था बेहद दयनीय स्थिति में है। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द सुधार लागू किए जाएं, हमारी मांगें पूरी हों और हमारी चिंताओं को झारखंड सरकार तक पहुंचाया जाए। हम यह भी चाहते हैं कि झारखंड में आयोजित सभी परीक्षाएं पेपर लीक से मुक्त हों।” उन्होंने कहा कि हम समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं; सरकारी नौकरी एक विकल्प है। ऐसे में अगर यहां भी अनियमितताएं हैं, तो नौकरी करने का कोई मतलब नहीं है। आंदोलन में शामिल एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर बनी अनिश्चितता उन हजारों युवाओं को प्रभावित कर रही है जिन्होंने सरकारी नौकरियों की तैयारी में वर्षों बिताए हैं। एक दूसरे छात्र ने कहा, “हम कहना चाहते हैं कि झारखंड पुलिस, वार्डर और अन्य भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हम सभी छात्र भविष्य में सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में अथक परिश्रम कर रहे हैं। हममें से कई आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, और हमारे माता-पिता हमारी शिक्षा और तैयारी के लिए बहुत त्याग करते हैं।” विरोध प्रदर्शन के बीच, छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को गुरुवार को झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए समय दिया गया है।

कर्नाटक में पोर्टफोलियो बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर तंज, डीके शिवकुमार को बताया ‘रबर स्टैम्प सीएम’

बेंगलुरु। कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में देरी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान के रिमोट कंट्रोल से चल रही है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने गुरुवार को कहा कि नए मंत्रियों के शपथ लेने के तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें विभाग नहीं दिए गए हैं। आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तंज कसते हुए पूछा, “क्या आप विभागों के बंटवारे के लिए कांग्रेस हाईकमान के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? या फिर ‘तय भुगतान’ अभी खाते में नहीं आया है इसलिए देरी हो रही है?” उन्होंने कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला पर भी निशाना साधा। आर. अशोक ने कहा कि सुरजेवाला नाराज विधायकों को मनाने के लिए उनके घर-घर जा रहे हैं और ‘पैचवर्क’ कर सरकार को बचाने में लगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या अब सुरजेवाला को हर सरकारी फाइल पास कराने के लिए बेंगलुरु आना पड़ेगा? क्या विधानसौध में उनके लिए कमरा बुक कर दिया गया है? क्या अब सारी फाइलें स्पीड पोस्ट से दिल्ली भेजी जाएंगी?” इसी के साथ उन्होंने शिवकुमार को ‘रबर स्टांप मुख्यमंत्री’ कहा। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही। दिल्ली से रिमोट के जरिए राज्य चलाया जा रहा है। आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक की जनता समझ चुकी है कि असली सरकार बेंगलुरु में नहीं बल्कि दिल्ली में बैठकर चलाई जा रही है। कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस सरकार एक और मोर्चे पर घिरी है। ‘नवेद्दु निल्लादिद्दारे, कर्नाटक’ बैनर तले 30 महिला संगठनों और नारीवादी समूहों ने बुधवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुला पत्र लिखा। पत्र में नए मंत्रिमंडल में किसी भी महिला को जगह न देने की कड़ी निंदा की गई। संगठनों ने मांग की कि तुरंत महिला मंत्रियों को शामिल कर इस गलती को सुधारा जाए। वहीं, कांग्रेस ने नाराजगी को शांत करने की कोशिश तेज कर दी है। सीएम शिवकुमार और रणदीप सुरजेवाला खुद नाराज विधायकों से बात कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत में सीएम शिवकुमार ने पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और नाराज नेताओं से सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है।