जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 45वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली

कोलकाता। जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे ने बुधवार को कोर्ट परिसर में आयोजित एक औपचारिक समारोह में कलकत्ता हाई कोर्ट के 45वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस और राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में न्यायमूर्ति घुगे को पद की शपथ दिलाई। विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व और वर्तमान न्यायाधीश भी शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित थे। इस नियुक्ति से पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवग्ननम के रिटायर होने के बाद खाली हुई स्थायी जगह भर गई है। इस दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती ने हाई कोर्ट के न्यायिक कामकाज संभाल रहे थे। इस दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट के लिए एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की जा रही थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने इस संबंध में सिफारिशें कीं। सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 6 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय के स्थायी मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति की सिफारिश की और सरकार ने 5 सितंबर को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पोस्ट में बताया कि राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से सलाह-मशविरे के बाद भारतीय संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जस्टिस घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। जस्टिस घुगे ने 1990 में एक वकील के तौर पर अपना कानूनी करियर शुरू किया था। उन्होंने 2,000 से अधिक मामलों में पैरवी की है, जिनमें से ज्यादातर में उन्होंने लेबर यूनियनों का प्रतिनिधित्व किया। इतने सालों में उन्होंने कई औद्योगिक संगठनों और मल्टीनेशनल कंपनियों का भी प्रतिनिधित्व किया है। जस्टिस घुगे ने 2005 से 2008 तक डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी (बीएएमयू) में पीजी एलएलएम कोर्स के लिए कॉन्ट्रिब्यूटरी प्रोफेसर के तौर पर भी काम किया। जस्टिस घुगे ने औरंगाबाद में ‘बार एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रियल लॉयर्स’ के सेक्रेटरी के तौर पर पांच साल और जुलाई 2010 से दिसंबर 2011 तक इसके प्रेसिडेंट के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

तेजस्वी ने सीएम सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, पीडीएस विक्रेताओं की आठ सूत्री मांगों के समाधान की मांग

पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर राज्य के जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) विक्रेताओं की आर्थिक एवं प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीडीएस विक्रेता कठिन परिस्थितियों में लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। तेजस्वी यादव ने पत्र में कहा कि रिकॉर्डतोड़ महंगाई, बढ़ती प्रशासनिक कठिनाइयों, कमीशन के भुगतान में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण पीडीएस विक्रेताओं के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। उन्होंने सरकार से उनकी आठ सूत्री मांगों पर तत्काल और समयबद्ध निर्णय लेने का आग्रह किया है। नेता प्रतिपक्ष ने गुजरात की तर्ज पर पीडीएस विक्रेताओं को न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय देने की मांग की है। साथ ही झारखंड की तर्ज पर अनुकंपा नियुक्ति की समय-सीमा समाप्त कर पात्र आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का प्रावधान लागू करने की मांग की। उन्होंने पिछले छह माह से एक वर्ष तक लंबित कमीशन का तत्काल भुगतान कराने की मांग करते हुए कहा कि कमीशन लंबित रहने से हजारों पीडीएस विक्रेताओं और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले पीडीएस विक्रेताओं के कमीशन में 47 रुपये की वृद्धि की घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि बढ़ी हुई राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है तो उसे तत्काल प्रभाव से लागू कर बकाया राशि का भुगतान कराया जाए। उन्होंने बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदामों में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितता और घटतौली की शिकायतों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही माप-तौल, घटतौली, ई-पॉस मशीन, सर्वर और अन्य तकनीकी समस्याओं का रियल टाइम समाधान सुनिश्चित करने को कहा, ताकि इसका खामियाजा विक्रेताओं और लाभुकों को न भुगतना पड़े। नेता प्रतिपक्ष ने पीडीएस विक्रेताओं पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई रोकने तथा जिला एवं प्रखंड स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने सरकार, विभागीय अधिकारियों और फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच नियमित त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने का भी सुझाव दिया। तेजस्वी यादव ने उम्मीद जताई कि बिहार सरकार पीडीएस विक्रेताओं की मांगों पर संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र ठोस निर्णय लेगी। उन्होंने पत्र की कॉपी सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर भी पोस्ट की है।

‘सोशल मीडिया एल्गोरिदम प्लान’ से नाराज व्हाइट हाउस ने ऑस्ट्रेलिया को दी चेतावनी

वाशिंगटन। अमेरिकी सरकार ऑस्ट्रेलिया के ‘सोशल मीडिया एल्गोरिदम प्लान’ से नाराज है। ट्रंप प्रशासन ने ऐतराज जताते हुए बयान जारी किया जिसमें स्पष्ट किया गया कि व्हाइट हाउस अमेरिका के प्रमुख टेक्नोलॉजी सेक्टर पर जबरन वसूली संबंधी मसौदे के खिलाफ है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने मंगलवार को अपने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा जारी किया। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बच्चों को खाने से जुड़े विकारों, स्त्री-विरोधी सामग्री, अपराध के महिमामंडन, दुर्व्यवहार और साइबरबुलिंग जैसी हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए कदम उठाने होंगे। वयस्कों और बच्चों दोनों को अवैध सामग्री से भी सुरक्षा प्रदान करनी होगी। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की घोषणा के 24 घंटे से भी कम समय में व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी किया। प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन “व्यापारिक साझेदारों” के सामने अपनी चिंताएं रखेगा। देसाई ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापारिक साझेदारों को अमेरिका के प्रमुख टेक्नोलॉजी सेक्टर पर डिजिटल सर्विस टैक्स, जुर्माना और जबरन वसूली के अन्य तरीके लागू करने के खिलाफ साफ तौर पर चेतावनी दी है।” उन्होंने कहा, “प्रशासन अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ इन मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।” वहीं, ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिकेशन मिनिस्टर अनिका वेल्स ने इस बयान को “सामान्य” बताते हुए ज्यादा तवज्जो नहीं दी और ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टर न्यूज24 को बताया कि उन्हें अमेरिकी प्रतिनिधि से सीधे तौर पर ऐसी कोई चेतावनी नहीं मिली है। वेल्स ने कहा, “हम एक संप्रभु देश हैं। हमें ऑस्ट्रेलियाई माता-पिता और बच्चों की रक्षा करने का अधिकार है और हम ऐसा करेंगे।” मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत में प्रस्तावित ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर कानून’ की घोषणा की। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 16 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर्स को एल्गोरिदम आधारित फीड से बाहर निकलने का विकल्प देना होगा। अल्बनीज ने कहा कि इसका मकसद ऑनलाइन दुनिया में लोगों को ज्यादा नियंत्रण और विकल्प देना है। विधेयक में नए नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 10 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 7.21 करोड़ अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। वेल्स के अनुसार, “16 वर्ष से अधिक उम्र के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक आसानी से एल्गोरिदम को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेंगे। जब यूजर कोई सोशल मीडिया ऐप खोलेगा, तो प्लेटफॉर्म को उसे यह विकल्प देना होगा कि वह किस तरह की फीड देखना चाहता है और यूजर की पसंद का सम्मान करना होगा।

राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की मुलाकात, पीएम मोदी की ओर से दीं शुभकामनाएं

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से कोलंबो में मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग तथा क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और समृद्धि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ उनकी बातचीत बेहद उपयोगी और सार्थक रही। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से श्रीलंका के राष्ट्रपति को शुभकामनाएं दीं और उनकी सरकार के दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने पर उन्हें बधाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और श्रीलंका सभ्यतागत रूप से जुड़े हुए देश, करीबी पड़ोसी और महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार हैं। दोनों देशों ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि की कि वे अपने-अपने देशों के विकास और दोनों देशों की जनता के कल्याण के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए भी मिलकर योगदान देते रहेंगे। दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को भी विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उन्हें समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 9 सितंबर को कोलंबो में हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने माना कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों के साथ-साथ वर्तमान समय में रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपने पड़ोसी देशों के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे समय में राजनाथ सिंह की यह श्रीलंका यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। श्रीलंका भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण साझेदार भी है। बैठक में दोनों नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के व्यापक विकास, जनता के कल्याण और पूरे क्षेत्र में स्थिरता एवं समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है। राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति दिसानायके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं देते हुए भारत की ओर से श्रीलंका के साथ मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी जारी रखने का संदेश दिया। वहीं, दोनों नेताओं ने भविष्य में भी आपसी सहयोग को और व्यापक तथा मजबूत बनाने पर सहमति जताई।

पीएम मोदी के 25 साल के जनसेवा कार्यकाल पर ‘सेवा संकल्प अभियान’, वडनगर से वाराणसी तक निकलेगी सेवा यात्रा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने देशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने का ऐलान किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर अभियान की रूपरेखा बताई। उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर वडनगर से वाराणसी के बीच सेवा यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा देश के 17 राज्यों से होकर गुजरेगी। अलग-अलग स्थानों पर युवाओं की टोलियां बनाई जाएंगी और प्रत्येक टोली में 50 युवा शामिल होंगे। इन यात्राओं और कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का जन्म गुजरात के वडनगर में हुआ था और वह वर्तमान में वाराणसी से लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने कहा कि वडनगर से वाराणसी तक की यह यात्रा प्रधानमंत्री की राजनीतिक और जनसेवा यात्रा को जोड़ने का भी प्रतीक होगी। उन्होंने यह भी बताया कि 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ आयोजित की जाएगी। इसके तहत देशभर में बाइक रैलियां और पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के दौरान लोगों से विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की जाएगी। नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभाली, तब देश में निराशा और अंधकार का माहौल था और इसे ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ का दौर कहा जाता था। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था को ‘फ्रैजाइल फाइव’ में गिना जाता था। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश ने अपनी अलग पहचान बनाई है और भारत की विश्वसनीयता तथा सम्मान में लगातार वृद्धि हुई है। भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि आज हर भारतीय सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके प्रभाव को समाप्त करने की दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ है। उनके अनुसार, पहले नक्सलवाद से प्रभावित 200 से अधिक जिले अब नक्सलमुक्त होकर सामान्य जनजीवन की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी ने सोच में बदलाव किया। पहले इन गांवों को देश का ‘आखिरी गांव’ कहा जाता था, लेकिन सरकार ने उन्हें ‘भारत का प्रथम गांव’ कहकर नई पहचान देने का काम किया। इससे इन क्षेत्रों के विकास के साथ वहां रहने वाले लोगों के प्रति देश की सोच में भी बदलाव आया है। नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सफर एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ और आज वह देश के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह यात्रा स्पष्ट विजन, दृढ़ संकल्प और सामाजिक जीवन में लगातार गुणात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ गरीब परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने की सफलता प्रधानमंत्री के नेतृत्व और विजन का परिणाम है। सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री की सोच से गरीबों के जीवन में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्ष की जनसेवा यात्रा के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ आम लोगों को सेवा और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भाजपा का दायित्व है कि प्रधानमंत्री के जनसेवा और समर्पण के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।

तमिलनाडु : स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में त्रिची ने हासिल किया शीर्ष स्थान

तिरुचि। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में त्रिची तमिलनाडु का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शहर बनकर उभरा है, जिसने इस वर्ष दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर 12वां स्थान हासिल किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में त्रिची को 200 में से 183 अंक मिले हैं। यह शहर उसी श्रेणी में मूल्यांकित किए गए तमिलनाडु के चेन्नई और मदुरै से आगे रहा। चेन्नई 147.7 अंकों के साथ 35वें स्थान पर रहा जबकि मदुरै 132.1 अंकों के साथ 39वें स्थान पर रहा। राष्ट्रीय स्तर पर लखनऊ ने 198 अंकों के साथ इस श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया, उसके बाद इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जबलपुर ने 195 अंक प्राप्त करके तीसरा स्थान हासिल किया। त्रिची की नवीनतम स्थिति पिछले वर्ष के मूल्यांकन में प्राप्त नौवें स्थान से नीचे है। सर्वेक्षण में थूथुकुडी को भी शामिल किया गया था। 300,000 से कम जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में इसे 142.2 अंक प्राप्त हुए और इसने 35वां स्थान हासिल किया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले 131 शहरों में यह सर्वेक्षण किया। यह अभ्यास शहरी प्रशासनों द्वारा वायु प्रदूषण के स्रोतों से निपटने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में हुई प्रगति का आकलन करता है। शहरों का मूल्यांकन कई मापदंडों पर किया गया, जिनमें कण पदार्थ, विशेष रूप से पीएम10 में कमी, सड़क की धूल को नियंत्रित करने के उपाय, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और वायु गुणवत्ता निगरानी बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल हैं। सार्वजनिक जागरूकता पहलों और स्वच्छ वायु कार्यक्रमों को लागू करने के लिए स्थानीय अधिकारियों की संस्थागत क्षमता को भी ध्यान में रखा गया। अधिकारियों ने त्रिची के शानदार प्रदर्शन का श्रेय कई सतत नागरिक हस्तक्षेपों को दिया। इनमें स्रोत पर ही कचरे का बेहतर पृथक्करण, घर-घर जाकर कचरा संग्रहण में सुधार और सड़कों की सफाई और धूल जमा होने को कम करने के लिए मशीनीकृत उपकरणों का बढ़ता उपयोग शामिल था। शहर प्रशासन ने कचरे को खुले में जलाने के खिलाफ प्रवर्तन को भी मजबूत किया है, जो हानिकारक उत्सर्जन और पड़ोस की वायु गुणवत्ता में गिरावट में योगदान देता है। हरित क्षेत्रों का विस्तार करने और पर्यावरण कार्यक्रमों में लोगों को अधिक सक्रिय रूप से शामिल करने के प्रयासों ने शहर के स्वच्छ वायु अभियान को और अधिक समर्थन प्रदान किया। इन उपायों का प्रभाव तिरुची में पीएम10 के स्तर में लगातार कमी के रूप में परिलक्षित होता है। यह स्तर 2017-18 में 88 से गिरकर 2025-26 के दौरान 53 हो गया, जो इस अवधि में उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है। इस परिणाम से तिरुची तमिलनाडु के शहरी स्वच्छ वायु प्रयासों में अग्रणी स्थान पर पहुंच गया है। इस गति को बनाए रखना, कण प्रदूषण को और कम करना तथा भविष्य के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में अपनी स्थिति में सुधार करना अब शहर के लिए प्रमुख चुनौतियां होंगी।

सलमान से जैकलीन तक, इन सितारों के घर धूमधाम से मनाया जाता है गणेश उत्सव

मुंबई। गणेश चतुर्थी आते ही मुंबई की गलियों से लेकर फिल्मी सितारों के घरों तक ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज सुनाई देने लगती है। आम लोगों की तरह बॉलीवुड के कई सितारों के लिए भी गणेश उत्सव का त्योहार बेहद खास होता है। कई सितारों के घर का बप्पा सेलिब्रेशन हर साल सुर्खियों में रहता है। आइए जानते हैं उन फिल्मी सितारों के बारे में, जिनके गणेश उत्सव में आस्था के साथ परिवार और त्योहार की रौनक भी साफ दिखाई देती है। सलमान खान- खान परिवार का गणपति उत्सव लंबे समय से लोगों का ध्यान खींचता रहा है। सलमान कई मौकों पर अपनी बहन अर्पिता खान शर्मा के घर होने वाले गणपति उत्सव में शामिल होते हैं। 2025 में भी अर्पिता के मुंबई स्थित घर पर बप्पा की स्थापना हुई थी, जहां सलमान अपने माता-पिता सलीम खान और सलमा खान के साथ आरती करते दिखाई दिए। इस दौरान परिवार के दूसरे सदस्य और करीबी दोस्त भी मौजूद थे। बाद में विसर्जन के मौके पर सलमान को बहन अर्पिता और सोनाक्षी सिन्हा के साथ डांस करते हुए भी देखा गया। सोनाली बेंद्रे- सोनाली बेंद्रे को गणेश चतुर्थी का त्योहार काफी पसंद है। वह हर साल घर पर बप्पा का स्वागत करती रही हैं। एक वक्त ऐसा भी आया जब वह इलाज के सिलसिले में न्यूयॉर्क में थीं और घर से दूर होने की वजह से गणपति की आरती में फेसटाइम के जरिए शामिल हुई थीं। इसके अगले साल वह अपने परिवार के साथ घर पर गणपति उत्सव मनाकर बेहद खुश नजर आई। उन्होंने तब पर्यावरण का ध्यान रखते हुए ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा रखने और घर पर ही विसर्जन करने की बात कही थी। 2025 में भी सोनाली ने घर पर गणेश चतुर्थी मनाई और साड़ी में बप्पा के साथ अपनी तस्वीर साझा की। सोनू सूद- सोनू सूद हर साल बप्पा को अपने घर लाने की परंपरा निभाते हैं और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। 2024 में नए घर ‘गंगोत्री निवास’ में पहली बार गणपति का स्वागत उनके लिए खास था। पत्नी सोनाली और दोनों बेटों अयान और ईशांत के साथ उन्होंने आरती की थी। उस वक्त सोनू ने कहा था कि जिस जगह से उनके संघर्ष की शुरुआत हुई, उसी इलाके में अब उनके नए घर में पहली बार बप्पा का आना उनके लिए भावुक पल है। 2025 में भी उन्होंने गणपति उत्सव मनाया और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए ईको-फ्रेंडली प्रतिमा के साथ घर पर ही विसर्जन किया। उनके यहां यह उत्सव पांच दिनों तक मनाया गया और पूजा-पाठ के साथ परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी रही। कार्तिक आर्यन- गणपति उत्सव को पूरे मन से मनाने वाले सितारों में कार्तिक आर्यन भी शामिल हैं। 2025 में उन्होंने अपने मुंबई वाले घर पर परिवार के साथ गणेश उत्सव मनाया। कार्तिक ने सोशल मीडिया पर बप्पा की पूजा और घर के उत्सव की झलकियां साझा कीं थी। इस दौरान उनकी मां माला तिवारी और उनका पेट डॉग भी उनके साथ नजर आया। कार्तिक ने विसर्जन के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीका अपनाया और घर पर ही विसर्जन किया। बाद में उनके घर हुए गणपति विसर्जन की तस्वीरों में श्रीलीला और उनके परिवार के लोग भी नजर आए थे। जैकलीन फर्नांडीज- जैकलीन फर्नांडीज के लिए 2025 की गणेश चतुर्थी खास रही। दरअसल, उन्होंने पहली बार अपने घर पर बप्पा का स्वागत किया था। अभिनेत्री ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि वह पहली बार गणपति को अपने घर ला रही हैं। लाइट ग्रीन कलर की साड़ी में जैकलीन बप्पा के सामने आरती करती नजर आईं। घर में सजे गणपति की प्रतिमा के सामने उन्होंने फूल चढ़ाए और पूजा की। उन्होंने इस मौके को नई शुरुआत, प्यार और आशीर्वाद से जोड़ा।

मणिपुरी संगीतकार की हत्या पर किरेन रिजिजू बोले-‘नॉर्थ ईस्ट के लोग भी भारतीय, इसमें राजनीति नहीं,

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या के मामले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से बताया, “ये बहुत दुखद घटना है। विक्रम सिंह जो मणिपुर से हैं, एक संगीतकार हैं, उन्हें दक्षिणी दिल्ली के कुछ डिलीवरी बॉयज और ढाबा कर्मचारियों से रात को झगड़ा हुआ, मारपीट हुई और बाद में उनकी मौत हो गई।” उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में साउथ दिल्ली रेंज के आईजीपी और दिल्ली में स्पेशल पुलिस सेल के डीसीपी और ज्वाइंट कमिश्नर से बात की है। जो आठ लोग इसमें शामिल हैं, आठों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मणिपुर के निवासी विक्रम सिंह के परिवार के लोगों से भी पुलिस ने मुलाकात की है। बुधवार को उनके शव को मणिपुर ले जाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुलिस से बात करने के बाद पता चला है कि 8 लोगों का बैकग्राउंड साफ है और ये ढाबे में काम करने वाले लोग हैं। रात में शोर-शराबे को लेकर यह घटना हुई। पुलिस ने बताया है कि 2 हफ्तों के अंदर कठोर चार्जशीट दायर की जाएगी और कठोर सजा होनी चाहिए। ये 8 लोग अलग-अलग राज्यों से हैं। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मणिपुरी संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मौत पर तेजी से जांच कर न्याय की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि जब भी कोई हत्या या मौत होती है तो यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस राज्य का है। उन्होंने कहा, “जब भी कोई हत्या होती है, मौत होती है या कोई पीड़ित होता है, तो यह क्यों देखना चाहिए कि वह किस राज्य से है? वे सभी भारतीय हैं। वे भारत के नागरिक हैं। हमारे नॉर्थ ईस्ट के लोग भी भारतीय हैं। यह राजनीति करने का विषय नहीं है। निर्णायक कार्रवाई होगी।” उन्होंने कहा, “ढाबे में काम करने वाले लोग और खाना डिलीवर करने वाले डिलीवरी वर्कर अलग-अलग राज्यों से आए थे। रात में झगड़ा कैसे हुआ, जो भी हुआ, एक जान चली गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की गई। ये लोग भाग गए थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और बहुत कम समय में उन्हें पकड़ लिया।” उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि लगभग 8-10 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट दायर हो जाएगी ताकि जल्दी सजा दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत कठोर सजा दिलानी जरूरी है और इस घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “मैं चोंगथम विक्रम सिंह के परिवार के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और अपनी सहानुभूति देता हूं। साथ ही मैं आश्वासन भी देता हूं कि जो भी कार्रवाई होगी बहुत तेजी से होगी और बहुत कड़ी कार्रवाई होगी। यह कोई राजनीति का विषय नहीं है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल ढुलाई होगी तेज, किसानों और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा: पीएम मोदी

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशभर में समर्पित माल गलियारा (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर-डीएफसी) नेटवर्क के पूरा होने को भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना माल ढुलाई का समय घटाने, परिवहन लागत कम करने और किसानों को अपने उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगी। गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के अंतिम महत्वपूर्ण खंडों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे समर्पित माल गलियारे का निर्माण 21वीं सदी के भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम तीन खंडों की कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इनके विकास पर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। इन खंडों के चालू होने के साथ ही पूर्वी और पश्चिमी दोनों समर्पित माल गलियारे पूरी लंबाई में परिचालित हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा है।” उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने देश के परिवहन क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को एक ही रेल पटरी का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब अलग फ्रेट कॉरिडोर होने से मालगाड़ियां बिना बाधा अपने निर्धारित मार्गों पर चल सकेंगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर प्रतिदिन 430 से अधिक मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि जहां पहले मालगाड़ी को 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग साढ़े छह घंटे लगते थे, वहीं अब वही दूरी आधे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। उन्होंने सड़क परिवहन से तुलना करते हुए कहा कि जो माल ढुलाई ट्रकों के जरिए लगभग 30 घंटे में पूरी होती थी, वही अब फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से 10 से 12 घंटे में संभव हो सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस परियोजना के फायदे केवल समय बचाने तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ईंधन की बचत हो रही है, माल ढुलाई की लागत घटी है, समय बचा है और पर्यावरण को भी लाभ मिला है। रेलवे ट्रैक में किया गया एक निवेश कई प्रकार के फायदे दे रहा है।” सरकार का मानना है कि तेज और सस्ती माल ढुलाई से भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात-आयात गतिविधियां अधिक कुशल बनेंगी। नए चालू किए गए तीन खंड साणंद (नॉर्थ)-मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) को जोड़ते हैं, जिससे देश के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक जेएनपीए तक सीधी माल ढुलाई सुविधा उपलब्ध हो गई है। सरकार के अनुसार, इससे निर्यात-आयात (एक्जिम) कार्गो की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और मुंबई रेल नेटवर्क पर दबाव भी घटेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का बड़ा लाभ किसानों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसान अब अपने उत्पाद तेजी से बड़े बाजारों तक भेज सकेंगे। विशेष रूप से फल, सब्जियां और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद कम समय में उपभोक्ताओं तक पहुंच पाएंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने हाल ही में जेएनपीटी से वडोदरा के बीच संचालित डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस एक ट्रेन ने 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल एक साथ ढोया था। इससे माल ढुलाई की क्षमता में आए बड़े बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर जोबट-टांडा रोड रेलवे लाइन राष्ट्र को समर्पित की। यह लाइन छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना का हिस्सा है और मध्य प्रदेश के अलीराजपुर सहित दूरदराज एवं आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। कार्यक्रम के दौरान न्यू साणंद (नॉर्थ), न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और न्यू जेएनपीटी से नई मालगाड़ी सेवाओं की शुरुआत भी की गई। साथ ही वडोदरा और टांडा रोड के बीच नई यात्री ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देशभर में सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों और माल दोनों की आवाजाही को अधिक तेज, सस्ता और कुशल बनाना है।

राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका, ‘चौकीदार चोर है’ वाले मामले को रद्द करने से अदालत ने किया इनकार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित ‘चौकीदार चोर है’ की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। उनकी इस टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि केस रद्द करने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। इस मामले में राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उनकी ओर से कहा गया था कि कथित बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था और न ही किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को निशाना बनाया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने राहुल गांधी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए वह निश्चित रूप से एक पहचान योग्य संस्था है। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह दो दशक से भाजपा का सक्रिय सदस्य रहा है। पहली नजर में प्रधानमंत्री को, जो भाजपा के सदस्य हैं, ‘कमांडर-इन-थीफ’ बताने वाले बयान को सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, इस बयान का वास्तविक आशय क्या था और इसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, यह सवाल मुकदमे के दौरान विचार किया जाना है। राहुल गांधी के वकील सुदीप पासबोला ने हाईकोर्ट में दलील दी कि कथित ट्वीट में राहुल गांधी ने भाजपा या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को निशाना नहीं बनाया गया है। ऐसे में कोई स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति या समूह मौजूद नहीं है, इसलिए शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि का मामला चलाने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी विरोध किया गया। महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल की ओर से कहा गया कि कोर्ट को यह देखना होगा कि मानहानि के अपराध के लिए जरूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या टिप्पणी किसी निश्चित एवं पहचान योग्य समूह से संबंधित थी।