किसानों का पैसा हजम कर गए सपाई, उसी का श्राप ले डूबा : मुख्यमंत्री योगी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत वितरण को लेकर पिछली सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि किसानों का पैसा हजम करने वाले सपाइयों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। वर्ष 2014 में हुदहुद चक्रवात के दौरान केंद्र सरकार ने 3200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार किसानों को महज 800 करोड़ रुपये ही बांट सकी। शेष धनराशि किसानों तक नहीं पहुंची। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद इसकी पड़ताल कराई और अलग से धनराशि की व्यवस्था कर किसानों को बकाया मुआवजा दिलाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपाई जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे, लेकिन किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डकैती डालने से भी नहीं चूके। किसानों का पैसा हजम करने वालों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। सोमवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में मुख्यमंत्री योगी ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित प्रदेश के 9,18,091 किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान हस्तांतरित किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने महज आठ से दस दिन में किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया है। इस वर्ष बरसात के दौरान आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के शासन में 100 रुपये भेजे जाते थे तो लाभार्थी तक महज 15 रुपये पहुंचते थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इसे स्वीकार किया था। बाकी पैसा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग हजम कर जाते थे। अब जिस किसान को 25 हजार रुपये स्वीकृत होते हैं, उसके खाते में पूरे 25 हजार पहुंचते हैं। न कोई बिचौलिया सेंध लगा सकता है और न किसी प्रकार की कटौती होती है। उन्होंने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। आकाशीय बिजली समेत दुर्घटना के मामलों में पात्र किसान, बटाईदार और उनके परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त आवासों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से 1.20 लाख रुपये अलग से दिए जा रहे हैं। आंशिक मकान क्षति और पशुहानि पर भी सहायता मिलेगी। पूर्व में 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के लिए करीब 78 करोड़ रुपये तथा जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में 225.93 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से कटान रोकने के कार्य तत्काल शुरू करें। सिंचाई विभाग को पर्याप्त धनराशि दी गई है। पीडब्ल्यूडी, नगर विकास विभाग और विकास प्राधिकरण मौसम साफ होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत शुरू कराएं। आपदा राहत और आवागमन बहाल करने के लिए जितना धन चाहिए, सरकार उपलब्ध कराएगी। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम और वर्षा मापने के लिए रेन गेज लगाए गए हैं। नागरिकों को मोबाइल पर मौसम संबंधी अलर्ट भी भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में अतिवृष्टि हुई है, वहां 15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का के क्रय केंद्र खोले जाएंगे। अन्य जिलों में सोमवार से खरीद शुरू हो रही है। किसानों की उपज खरीदने की कोई सीमा नहीं होगी। भुगतान सीधे खाते में पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि सरकार 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ कर चुकी है। 16 लाख निजी नलकूपों की बिजली निशुल्क की गई है और 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में आपदा प्रभावित लाभार्थियों को सहायता राशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे। इनमें सदर क्षेत्र की रेशमा देवी, चंदन कुमार पासवान, इंद्रावती, सविता देवी, चुन्नी देवी और सीमा देवी, कैंपियरगंज के बहराइची, बेचन प्रसाद, जोकखन, संपत और परमहंस शामिल रहे। इसके अलावा सदर क्षेत्र के चंद्रप्रकाश द्विवेदी और धरणीधर तथा गोला क्षेत्र के गिरजापति त्रिपाठी, कमलेश, रामदरश, जनार्दन प्रसाद और राणा प्रताप सिंह को भी चेक प्रदान किए गए। सहायता राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को प्राथमिकता दी है। अब तक कृषि क्षेत्र में 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गन्ना मूल्य 280 से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से नौ वर्षों में 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। सांसद रवि किशन ने कहा कि पिछली सरकारों में किसान कर्ज और आर्थिक संकट से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने कर्जमाफी, गन्ना भुगतान और आपदा राहत को प्राथमिकता दी। अब किसानों को सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ता। संकट आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रहती है। मुख्यमंत्री योगी ने मिशन शक्ति के छठे चरण के अंतर्गत जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मियों और महिलाओं ने रैली में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन भी किया।

बीएलए ने पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड बोट्स पर हमले की जिम्मेदारी ली, 13 जवानों के मारे जाने का किया दावा

क्वेटा। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान स्थित ग्वादर जिले के तटीय इलाके जिवानी में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की दो नावों पर हमले की जिम्मेदारी ली है। हथियारबंद समूह ने दावा किया कि इस हमले में 13 पाकिस्तानी जवानों की हत्या की जिम्मेदारी ली है। स्थानीय मीडिया ने बीएलए प्रवक्ता जीयंद बलूच की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया कि ग्रुप की मैरीटाइम विंग, हम्माल मैरीटाइम डिफेंस फोर्स (एचएमडीएफ) ने एक साथ दो बड़ी कोस्ट गार्ड बोट पर कोऑर्डिनेटेड हमला किया, जिससे मौके पर ही 13 लोग मारे गए। ग्रुप के आधिकारिक मीडिया चैनल पर जारी दो मिनट के वीडियो में, हथियारबंद लोगों को एक बोट पर देखा जा सकता है। बीएलए ने उनकी पहचान अपनी मैरीटाइम यूनिट, एचएमडीएफ सदस्य के तौर पर की, और दावा किया कि उन्होंने जिवानी के पास पानी में पेट्रोलिंग कर रहे दो पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड वेसल पर हमला करने के लिए मॉडर्न हथियारों से लैस एक बोट का इस्तेमाल किया, द बलूचिस्तान पोस्ट ने रिपोर्ट किया। बयान के मुताबिक, एचएमडीएफ उन कोस्टलाइन की रक्षा करना चाहता है जिन्हें बीएलए ने कब्जा किया हुआ बताया है, साथ ही पाकिस्तानी फोर्स की मैरीटाइम मूवमेंट में रुकावट डालना चाहता है। एचएमडीएफ के बनने को बीएलए की बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताते हुए, जीयंद बलूच ने कहा कि ग्रुप ने बलूच इंडिपेंडेंस मूवमेंट को बढ़ाने और बलूचिस्तान के मैरीटाइम इलाके, कोस्टलाइन और रिसोर्स की रक्षा के लिए 13 अप्रैल, 2026 को ऑफिशियली यूनिट की घोषणा की थी। बीएलए ने कहा कि जिवानी ऑपरेशन पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड के खिलाफ एचएमडीएफ का दूसरा मिशन था। अप्रैल की शुरुआत में, ग्रुप ने दावा किया था कि ग्वादर के जिवानी इलाके में अपने पहले समुद्री ऑपरेशन में तीन पाकिस्तानी नेवी के लोग मारे गए, क्योंकि उसने एक नेवल विंग बनाने की घोषणा की थी। बीएलए के मीडिया विंग, हक्कल द्वारा जारी वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुआ और उसमें चार नकाबपोश लड़ाके एक स्पीडबोट पर चढ़ने से पहले समुद्र की ओर बढ़ते हुए दिखाई दिए। वीडियो में समुद्र में लड़ाके एक जहाज की ओर बढ़ते हुए दिखाई दिए, जिसे पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की नाव बताया गया और उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। हमले से पहले लड़ाकों ने कहा, “जब तक बलूच का एक भी बेटा इस जमीन पर रहेगा, हम तुम्हें इस समुद्र या इस जमीन पर नहीं रहने देंगे। हम आज तैयार हैं, हम कल भी तैयार थे, और हम भविष्य में भी तैयार रहेंगे… तुम हर जगह मारे जाओगे।” पाकिस्तानी सेना को चेतावनी देते हुए कि उसका मिलिट्री दायरा अब सिर्फ पहाड़ों और शहरों तक सीमित नहीं है, बीएलए ने कहा, “हमने अब गहरे समुद्र में दुश्मन को निशाना बनाने की पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें उसके नौसैनिक ठिकाने और संपत्तियां भी शामिल हैं। दुश्मन को नेस्तनाबूद और एक आजाद बलूच देश की बहाली तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

मानवाधिकार संस्थाओं को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो अपनी बात सबसे कम रख पाते हैं: सीजेआई सूर्यकांत

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि मानवाधिकार संस्था की असल पहचान सिर्फ उसके द्वारा निपटाए गए मामलों की संख्या से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि क्या वह उन लोगों की बात सुन पाती है जो अपनी बात रखने में सबसे कम सक्षम हैं। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई कांत ने कहा कि आयोग एक नए विचार से आगे बढ़कर न्याय चाहने वालों के लिए एक भरोसेमंद संस्था बन गया है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरिमा, समानता, आजादी और न्याय की संवैधानिक गारंटी को रोजमर्रा की हकीकत में बदलना जरूरी है। सीजेआई ने कहा, “संस्थाओं को भी लोगों की तरह उनके जन्मदिन पर ही सबसे बेहतर समझा जा सकता है। हम पीछे मुड़कर देखते हैं कि उन्होंने कहां से शुरुआत की थी, हम आसपास देखते हैं कि वे अभी कहां खड़ी हैं और हम आगे देखते हैं कि जिन लोगों की वे सेवा करती हैं, उनके प्रति उनकी क्या जिम्मेदारियां हैं।” एनएचआरसी के पिछले 33 सालों के सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि आयोग ने 24 लाख से अधिक मामले दर्ज किए और 23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया, जिसकी निपटारा दर 98 प्रतिशत से अधिक रही। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “ये आंकड़े सिर्फ संस्था के काम को नहीं दिखाते, बल्कि उन कई मामलों को भी दर्शाते हैं जिनमें गंभीर उल्लंघन को लोगों के सामने लाया गया है।” उन्होंने कहा कि एनएचआरसी की भूमिका उन लोगों के लिए बहुत अहम है जो दूर-दराज के जिलों में रहते हैं और जिनके लिए अदालत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने आयोग को उन संस्थाओं में से एक बताया जो यह सुनिश्चित करती है कि संविधान में किए गए वादे उन लोगों तक पहुंचें जिन्हें उनकी सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने कहा, “अगर संविधान एक वादा है, तो आयोग उसके रखवालों में से एक है। यह उन लोगों की बात सुनता है जो आसानी से अपनी बात नहीं कह पाते और यह बिना किसी के कहे खुद भी कार्रवाई कर सकता है।” सीजेआई ने कहा कि मानवाधिकारों की सुरक्षा का दायरा सिर्फ उल्लंघनों की पहचान करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें जवाबदेही तय करना, प्रभावित लोगों को सार्थक राहत देना और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए बदलाव करना भी शामिल होना चाहिए। हिरासत में यातना और मौत, बंधुआ मजदूरी, सिलिकोसिस जैसी औद्योगिक बीमारियों और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवाधिकारों की शीर्ष संस्था के दखल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे काम उल्लंघनों और सिस्टम की कमियों को दूर करने में संस्थागत दखल की अहमियत को दिखाते हैं। समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर देते हुए सीजेआई ने कहा कि जो अधिकार ताकतवर लोगों के काम तो आता है लेकिन कमजोर लोगों के लिए बेकार साबित होता है, उसे सही मायनों में अधिकार नहीं माना जा सकता। यह बेहतर ब्रांडिंग वाली एक सुविधा है। उन्होंने ऐसे लोगों का जिक्र किया जिनके अधिकारों पर संस्थागत स्तर पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जैसे कि ऐसे विचाराधीन कैदी जो कभी अपने वकीलों से नहीं मिले, बिना दस्तावेजों वाले प्रवासी मजदूर, परिवारों द्वारा छोड़े गए बुज़ुर्ग, मुश्किलों का सामना कर रहे दिव्यांग लोग और ऐसी महिलाएं जिनकी परेशानियां उन्हें सुरक्षा देने वाले सिस्टम की नजर में नहीं आ पातीं। सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित समुदायों के करीब होने के कारण, स्थानीय स्तर पर अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को सुलझाने में राज्य मानवाधिकार आयोगों की भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश में अधिकारों का अनुभव अक्सर राजधानी में नहीं, बल्कि किसी दूरदराज के गांव, किसी खास इलाके या यहां तक कि घर के भीतर होता है।” सीजेआई ने कहा कि जहां राष्ट्रीय आयोग मानक तय कर सकता है और बड़े स्तर के पैटर्न की ओर ध्यान दिला सकता है, वहीं राज्य आयोग अक्सर स्थानीय भाषाओं में शिकायतें सुनने, प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और उन हालात को समझने के लिए बेहतर स्थिति में होते हैं जिनमें अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। सीजेआई कांत ने मानवाधिकारों की सुरक्षा में अलग-अलग संस्थाओं की एक-दूसरे की पूरक जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो तो अदालतों को दखल देना चाहिए, जबकि मानवाधिकार आयोगों को शिकायतों की जांच करनी चाहिए, सिस्टम की कमियों की पहचान करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन चिंताओं पर आम तौर पर ध्यान नहीं दिया जाता, उन पर संस्थागत स्तर पर ध्यान दिया जाए। एनएचआआरसी ने “पानी जीवन का अमृत: पानी के अधिकार के जरिए मानवीय गरिमा को बढ़ावा देना” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। इस सम्मेलन में जल निकायों के संरक्षण और बहाली, तथा सभी के लिए पानी तक सुरक्षित और टिकाऊ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पीने के पानी के स्रोतों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। पानी पर राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ स्थापना दिवस मनाने के लिए एनएचआरसी की सराहना करते हुए सीजेआई ने कहा कि मानवाधिकार केवल अमूर्त सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “वे उतने ही ठोस हैं जितना किसी बच्चे के हाथ में साफ पानी का गिलास और उतने ही जरूरी हैं जितनी उस बच्चे को लगने वाली प्यास।” स्थापना दिवस समारोह में एनएचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन, सदस्य जस्टिस (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी, विजया भारती सयानी और प्रियंक कानूनगो, महासचिव पीयूष गोयल, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य शामिल हुए।

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले की भारत ने की न‍िंदा, दो भारतीय लापता

नई द‍िल्‍ली। होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर हमले की भारत ने कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर सवार 11 में से 9 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जबकि दो लापता हैं। ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार सभी 11 भारतीय सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर इस घटना की जानकारी साझा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में दो जहाजों पर हमला बेहद निंदनीय है। उन्होंने बताया क‍ि इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले तुरंत बंद होने चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से समुद्री व्यापार का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने बताया कि जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर उस समय 11 भारतीय नाविक सवार थे, जब जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। इनमें से 9 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन दो नाविक अब भी लापता हैं। वहीं, ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार 11 भारतीय सुरक्षित हैं। जहाज को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार) से निशाना बनाया गया था, लेकिन सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। इससे पहले से ही तनावपूर्ण हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से व्यापार का सुरक्षित व बिना किसी रुकावट के जारी रहना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

समाज को नहीं शासन को है खतरा, जंतर-मंतर पर धारा 163 लगाने पर भड़के कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 लागू करने और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने पूछा कि समाज के किसी वर्ग ने कोई शिकायत नहीं की, फिर खतरा किसे था? सिब्बल ने आरोप लगाया कि लोगों को गुप्त जगहों पर ले जाकर बेरहमी से पीटा जा रहा है। सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “एक सवाल उठता है कि धारा 144 या बीएनएसएस की धारा 163 किसलिए लगाई जाती है। यह इसलिए लगाई जाती है ताकि समाज में कोई ऐसी घटना न हो जाए जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ जाए, मतलब सामाजिक व्यवस्था में इतनी गिरावट आ जाए कि लोगों की जान को खतरा हो। पुलिस को जानकारी होती है कि अगर ऐसा हुआ तो हिंसा होगी, हिंसा होगी तो हमें धारा 144 या 163 लगानी पड़ेगी और बात भी सही है, लगानी भी चाहिए।” उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि कई दिनों से ऐलान हुआ था कि हम 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध करेंगे, तो मुझे नहीं पता कि किसको खतरा था। अगर कोई भी व्यक्ति या समाज के लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहते हैं तो खतरा किसको है, समाज को तो नहीं है। लगता है शासन को खतरा है। उनके खतरे के लिए तो धारा 163 नहीं लगती है। सांसद ने कहा कि समाज के किसी वर्ग ने या किसी ने यह रिपोर्ट की हो कि भैया आप इनको मत आने दो, हमें खतरा है। किसी ने तो कुछ नहीं कहा। यह जम्मू-कश्मीर तो है नहीं कि वहां बाहर से लोग आ जाएंगे और समाज को खतरा हो जाएगा। धारा 144 या 163 लगाकर यह तो कह रहे हैं कि आप विरोध नहीं करेंगे। कपिल सिब्बल ने कहा कि दूसरी बात मैं पूछना चाहता हूं कि अगर कोई जंतर-मंतर आ भी गया तो आपने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब यह भी पता नहीं कि किस धारा के तहत गिरफ्तार किया कि धारा 144 या 163 का उल्लंघन हुआ है। आप उसे ऐसी जगह ले जाते हैं, जो किसी को पता ही नहीं है। कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून में तो ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। आप किसी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करो, आप ले जाओ, कोई बात नहीं, बता दीजिए कि कहां ले जा रहे हो। मुझे ऐसा लगता है कि यह सरकार समझती है कि हमें बड़ा खतरा है कि हिंदुस्तान की हर जगह से लोग आएंगे और फिर वह नारे लगाएंगे, चाहे वह शांतिपूर्ण नारे ही क्यों न हों। उन्होंने आगे कहा कि सारे देश के लोग देखेंगे कि जनता यहां इकट्ठा हो गई है तो हमें और खतरा होगा। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा और उसके बाद पता नहीं किसी और को इस्तीफा देना पड़े तो ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए ही नहीं, सरकार की अपनी सुरक्षा के लिए यह सब हो रहा है, यह अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आप धारा 163 कैसे लगा सकते हैं? धारा 163 कहां से लगती है, यह बताइए मुझे। वहां तो धारा 163 लगा दी। अभिजीत दिपके हवाई जहाज में आ रहा था, आशुतोष राणा उनके साथ हैं, हवाई जहाज में जब आ रहे हैं तो उनको हवाई जहाज के अंदर जाकर गिरफ्तार कर लिया, वहां क्या खतरा है? वहां तो धारा 163 नहीं है, क्योंकि ये शांतिपूर्ण विरोध करना चाहते हैं। सांसद ने कहा कि आपको इसके लिए 28 बटालियन चाहिए, सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस चाहिए आपके लिए, हजारों-हजारों पुलिसकर्मी चाहिए। जिस तरह से बेरहमी से मारा जा रहा है और साथ ही उनको ले जाकर जहां भी हिरासत में रखा गया है, वहां भी पीटा जा रहा है, बेरहमी से पीटा जा रहा है। इनकी जो भी थोड़ी-बहुत इज्जत बची हुई है, वो भी खो देंगे।

मैं तैयार, आप भी अयोध्या से लड़िए चुनाव’, सीएम योगी को अखिलेश यादव का चैलेंज स्वीकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बलरामपुर में विकास परियोजनाओं के बहाने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि वह भी वहां से चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले प्रदेश के इस क्षेत्र में पहचान का संकट, तस्करी और अपराधियों की अराजकता थी, जबकि अब विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। सीएम योगी ने बलरामपुर में 803 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 78 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एक वोट ने क्षेत्र की तस्वीर बदलने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जो वोट पहले पहचान के संकट और तस्करी से जोड़कर देखा जाता था, वहीं आज क्षेत्र की तरक्की और बदलाव का आधार बन रहा है। उनके मुताबिक, बलरामपुर जैसे आकांक्षात्मक जनपद को संभावनाओं वाले जिले के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव की ओर से अयोध्या को लेकर की गई राजनीतिक टिप्पणियों का जवाब दिया। सीएम योगी ने कहा, “मुझसे कहते हैं कि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दें। अरे अखिलेश! अयोध्या हमारा पावन धाम है। मैं वहां इसलिए जाता हूं, ताकि अयोध्या के विकास में कोई कोताही न हो और उत्तर प्रदेश की पहचान पर कोई कलंक न लगे।” उन्होंने पिछली सपा सरकार पर अयोध्या में बिजली और स्वच्छता की स्थिति को लेकर भी आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस अयोध्या में पहले कुछ घंटे ही बिजली मिलने का दावा किया जाता था और जहां गंदगी का अंबार था, वहीं आज रामराज्य की अवधारणा का उदाहरण बनकर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है। सीएम योगी ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “मैं आपको ऑफर करता हूं, आप भी अयोध्या से नामांकन करिए, मैं भी करता हूं। चलिए, एक बार किस्मत आजमा लिया जाए।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुकाबला सीधे होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि लड़ाई चेलों से क्यों हो, मुकाबला सामने होना चाहिए। उन्होंने सपा नेताओं पर माफिया के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जनता पहले भी ऐसे लोगों को जवाब दे चुकी है। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश में अराजकता का माहौल था। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर माफिया पैर रख देता था, उस पर कब्जा हो जाता था। व्यापारियों को फोन करके धमकाया जाता था और उनकी संपत्तियों पर कब्जे किए जाते थे। सीएम योगी ने कहा कि उस समय बलरामपुर की सड़कें भी बेहद खराब थीं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में कानून-व्यवस्था और विकास को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में हो रहे बदलाव को विकास परियोजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से देखा जा सकता है। विकास परियोजनाओं के जरिए बदलाव का दावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाकर उन जिलों को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें पहले पिछड़ेपन और सीमित सुविधाओं के कारण जाना जाता था। उन्होंने बलरामपुर में 78 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया। सीएम योगी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास को गांवों और आम लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने क्षेत्र में बदलाव का श्रेय जनता के समर्थन और सरकार की नीतियों को देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब अपराध और अराजकता के बजाय विकास तथा संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर लगाया ‘अपहरण’ का आरोप, थाने में धरने पर बैठीं

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके साथ मौजूद चार सांसदों को हिरासत में लेकर दो घंटे तक जेल वैन में घुमाया गया। ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि वह शनिवार रात कोलकाता नहीं लौटेंगी और विरोधस्वरूप सोमवार को विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के मार्च में शामिल होंगी। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हमारे चार सांसदों के साथ हमने द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन में धरना शुरू कर दिया है, जहां हमें लाया गया है। हमारा अपहरण किया गया और दो घंटे तक जेल वैन में घुमाया गया।” उन्होंने कहा कि वह आज रात कोलकाता नहीं लौटेंगी। उन्होंने युवाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के विरोध में सोमवार को आईएनडीआईए के मार्च में शामिल होने की घोषणा की। इससे पहले टीएमसी की ओर से जानकारी दी गई थी कि ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ ने हिरासत में लिया है। वह मुंह पर बैंड-ऐड लगाकर विरोध-प्रदर्शन कर रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, मुंह पर बैंड-ऐड लगाना उनकी आवाज दबाए जाने के खिलाफ सांकेतिक विरोध था। प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी के बस में मौजूद होने के वीडियो भी सामने आए। बस के अंदर वह महिषासुर मर्दिनी का पाठ करती नजर आईं। उन्होंने ‘जागो दुर्गा, जागो दशप्रहरणधारिणी’ और ‘अभया शक्ति बलप्रदायिनी’ जैसी पंक्तियां गाईं। यह स्तोत्र बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान शक्ति और न्याय के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 254 सांसदों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें कथित तौर पर अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया, जिससे उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी की घेराबंदी कर दी गई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और शहर के सभी रास्तों पर पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने दावा किया कि ट्रेनें और मेट्रो रोकी गईं, इंटरनेट बंद किया गया और जगह-जगह चेक पोस्ट बनाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवैधानिक अधिकार के तहत प्रदर्शन कर रहे युवक-युवतियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि यदि यह सब इस बात का सबूत नहीं है कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनावों में धांधली की गई और सरकार अपनी वैधता पर उठ रहे सवालों तथा जवाबदेही की मांग से डरी हुई है, तो फिर क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब लोकतंत्र नहीं रह गया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में तानाशाही चल रही है। प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने में सरकार के साथ सहयोग करने वाले सभी लोग राष्ट्र के खिलाफ देशद्रोह कर रहे हैं। इससे पहले शनिवार सुबह कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रवक्ता सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। ये तीनों प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: सात में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहा

नई दिल्ली। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) ने बताया है कि लगभग हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) की समस्या से जूझ रहा है। डब्लूएचओ ने एक्स पोस्ट में कहा, “जिन लोगों को खुद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव रहा है, वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को हर स्तर पर बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, चाहे वह सेवाओं को डिज़ाइन करना हो, उन्हें लोगों तक पहुंचाना हो या उनमें सुधार करना हो। साथ मिलकर काम करके, अनुभव रखने वाले लोग और मानसिक स्वास्थ्य सिस्टम, पॉलिसी और रिसर्च में काम करने वाले विशेषज्ञ ऐसी देखभाल व्यवस्था बना सकते हैं जो व्यक्ति-केंद्रित हो, अधिकारों पर आधारित हो और जिसमें सम्मान को प्राथमिकता दी जाए। समुदाय-आधारित सेवाओं को मजबूत बनाएं, देखभाल की निरंतरता को बनाए रखें और हर बातचीत को सार्थक बनाएं।” वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे से पहले वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने एक नई गाइड जारी की है। इसका मकसद देशों की मदद करना है ताकि वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के ऐसे मॉडल से हट सकें जिनमें मरीज़ों को लंबे समय तक मनोरोग अस्पतालों में रखा जाता है, और इसके बजाय समुदाय में ऐसी देखभाल अपना सकें जो लोगों के अधिकारों और पसंद का सम्मान करती हो। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कई लोग अभी बड़े मनोरोग अस्पतालों और सोशल केयर संस्थानों में रह रहे हैं। इनमें से लगभग आधे लोगों को महीनों, सालों या दशकों तक बिना उनकी मर्जी के इन जगहों पर रखा जाता है, जिससे वे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। इस प्रक्रिया को ‘डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन’ (डीआई) कहा जाता है। इसमें उन लोगों की मदद की जाती है जिन्होंने मनोरोग अस्पतालों में लंबा समय (छह महीने या उससे ज़्यादा) बिताया है, ताकि वे अपने समुदाय में वापस लौट सकें और अच्छी जिंदगी जीने के लिए ज़रूरी देखभाल, मदद और मौके पा सकें। डब्लूएचओ के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा, “लगातार मानसिक स्वास्थ्य सहायता पाने के लिए लोगों को अपनी आजादी, सम्मान या समुदाय में अपनी जगह नहीं छोड़नी चाहिए। देशों को लंबे समय तक चलने वाली संस्थागत देखभाल पर निर्भरता कम करनी चाहिए और संस्थानों से निवेश हटाकर समुदाय में अधिकारों पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सहायता की ओर तेज़ी से बढ़ना चाहिए।” कई देश समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन प्रगति एक जैसी नहीं है। डब्लूएचओ के ‘मेंटल हेल्थ एटलस’ से पता चला है कि रिपोर्ट करने वाले देशों में से केवल 9 फीसदी ही पूरी तरह से समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर बढ़े हैं, जबकि आधे से ज्यादा (53 फीसदी) देश अभी भी सुधार के शुरुआती चरण में हैं। मनोरोग अस्पतालों में भर्ती होने वाले चार में से एक से ज़्यादा (28 फीसदी) लोग छह महीने से अधिक समय तक वहां रहे। स्वतंत्र ‘लिव्ड एक्सपीरियंस कंसल्टेंट’ और एडवोकेट ग्रेस गटेरा ने कहा, “कम्युनिटी-बेस्ड मेंटल हेल्थ केयर की ओर बढ़ने का काम उन लोगों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए जो जानते हैं कि इंस्टीट्यूशनल केयर से गुजरने का क्या मतलब होता है, न कि सिर्फ उनके लिए। उनकी विशेषज्ञता, दूसरों की विशेषज्ञता के साथ मिलकर, ऐसी सेवाएं बनाने के लिए जरूरी है जो पसंद, रिकवरी और कम्युनिटी लाइफ में भागीदारी को बढ़ावा दें।” वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर डब्ल्यूएचओ सरकारों और सेवा प्रदाताओं से अपील की है कि वे इंस्टीट्यूशनल केयर से कम्युनिटी-बेस्ड मेंटल हेल्थ केयर की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करें और मेंटल हेल्थ सिस्टम को उन लोगों के साथ मिलकर बनाएं जिन्हें इसका निजी अनुभव है, न कि सिर्फ उनके लिए।

कांगो में इबोला पर आंशिक नियंत्रण, लेकिन खतरा अभी बरकरार: डब्ल्यूएचओ प्रमुख

जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने शनिवार को कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के खिलाफ लड़ाई में मजबूत प्रगति हुई है, और इसिरो के एक उपचार केंद्र से 25 ठीक हुए मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ क्षेत्रों में महामारी धीमी हो रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह अभी भी बढ़ रही है। टेड्रोस ने एक्स पर कहा कि डीआरसी में इबोला के खिलाफ लड़ाई में लगातार मजबूत प्रगति हो रही है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि बुंडीबुग्यो वायरस रोग (बीवीडी) से ठीक हुए 25 मरीज (13 महिलाएं और 12 पुरुष) को शुक्रवार को हौत-उएले प्रांत की राजधानी इसिरो में डब्ल्यूएचओ समर्थित इबोला उपचार केंद्र में उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से और मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) के साथ मिलकर उद्घाटन किए गए इस केंद्र में 10 बेड का विस्तार किया गया है, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 50 बेड हो गई है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र मरीजों की देखभाल को मजबूत करता है, साथ ही इसिरो जनरल रेफरल अस्पताल को अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते रहने में सक्षम बनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसिरो अस्पताल को एक टन से अधिक चिकित्सा सामग्री भी प्रदान की, जिसमें ऑक्सीजन सामग्री, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दस्ताने और मास्क, साथ ही बिस्तर और गद्दे शामिल हैं। टेड्रोस ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में स्थित अपने नैदानिक ​​प्रशिक्षण केंद्र में अब तक 211 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया है और जल्द ही उत्तरी किवू में एक नया केंद्र खोलेगा। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कल ही, दक्षिण कैरोलिना सरकार के नेतृत्व वाले टीकाकरण कार्यक्रम के तहत, हौत-उएले प्रांत के पहले 100 अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को एर्वेबो का टीका लगाया गया, जो इबोला जैरे स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करने में सिद्ध हो चुका है, और वर्तमान प्रकोप का कारण बन रहे बुंडीबुग्यो वायरस रोग (बीवीडी) के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता का अध्ययन भी किया जा रहा है। इस प्रयास के तहत अब तक 9000 से अधिक अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को एर्वेबो का टीका लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एमएसएफ और उसके साझेदारों ने बुंडीबुग्यो से होने वाली गंभीर बीमारी और मृत्यु को रोकने पर इसके प्रभाव का आकलन करने वाले ‘ब्रावो’ अध्ययन के हिस्से के रूप में कम से कम 870 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को एर्वेबो का टीका लगाया है, जबकि डब्ल्यूएचओ एर्वेबो और बीवीडी-विशिष्ट टीकों दोनों के लिए एक वैक्सीन प्रभावकारिता मंच परीक्षण का समर्थन कर रहा है, जिसके आने वाले हफ्तों में शुरू होने की उम्मीद है। टेड्रोस ने कहा कि हालांकि कुछ क्षेत्रों में महामारी की रफ्तार धीमी होने के स्पष्ट संकेत हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में यह अभी भी बढ़ रही है। इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि राहत कार्य को और बढ़ाया जाए और उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए जहाँ प्रकोप पहले से मौजूद है और जहाँ यह आगे बढ़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ डीआरसी सरकार और सभी साझेदारों को प्रकोप को यथाशीघ्र नियंत्रण में लाने के लिए सहयोग दे रहा है, साथ ही भविष्य में क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है ताकि समुदायों को भविष्य में होने वाले प्रकोपों ​​के खतरे से बचाया जा सके।

विजय एंटनी की ‘अप्पा कुट्टी’ 6 नवंबर को होगी रिलीज

चेन्नई। एक्टर, कंपोजर, एडिटर और फिल्ममेकर विजय एंटनी की अगली इमोशनल और कंटेंट-बेस्ड फिल्म ‘अप्पा कुट्टी’ दीपावली के मौके पर 6 नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म के मेकर्स ने शनिवार को यह घोषणा की। मु. मारन द्वारा निर्देशित फिल्म पहले 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी। रिलीज की तारीख का पोस्टर शेयर करते हुए एक्टर विजय एंटनी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दीपावली पक्की हो गई है। ‘अप्पा कुट्टी’ 6 नवंबर से दुनियाभर के सिनेमाघरों में आ रही है। फिल्म की टीम से जुड़े सूत्रों ने पहले आईएएनएस को बताया था कि यह फिल्म एक एक्शन-फैमिली ड्रामा होगी, जिसमें इमोशन्स, रिश्तों और जबरदस्त पलों का बेहतरीन तालमेल होगा और साथ ही पिता और बेटी के गहरे रिश्ते को दिखाया जाएगा। विजय एंटनी ने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर फिल्म का पहला पोस्टर शेयर किया था, तब उन्होंने कहा था कि एक जख्मी चेहरा, एक सुरक्षित कंधा, कभी-कभी प्यार ऐसा ही दिखता है। पेश है ‘अप्पा कुट्टी’ का पहला लुक। सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर मु. मारन ने ‘अप्पा कुट्टी’ को एक जबरदस्त एंटरटेनर के तौर पर बनाया है। इसमें एक्शन, इमोशन्स, पारिवारिक भावनाएं और दमदार ड्रामैटिक पल हैं जो दर्शकों को बहुत पसंद आएंगे। उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों के दिलों को छुएगी और साथ ही पूरी कहानी में रोमांचक और दिलचस्प सिनेमैटिक पल भी दिखाएगी। मेकर्स शुरू में इस फिल्म को इसी साल अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बना रहे थे। हालांकि उन्होंने पहले रिलीज की तारीख बढ़ाकर 16 अक्टूबर कर दी। अब उन्होंने फिल्म को 6 नवंबर को दिवाली पर रिलीज करने का फैसला किया है। विजय एंटनी के अलावा फिल्म में प्रीति असरानी, ​​लिथान्या, बागावती पेरुमल (बक्स), हरिप्रिया इसाई, अरुवी मधन, चित्रा लक्ष्मणन, श्रीजा रवि, वेट्टई मुथुकुमार, जेन्सन दिवाकर, मुरुगनाथम, मुन्नर रमेश, लिसी एंटनी, कुमार नटराजन, विजयन, प्रवीणा, हरिता और हरिप्रिया सहित कई मजबूत कलाकार नजर आएंगे। फिल्म के लिए संगीत अभिनेता विजय एंटनी ने दिया है, जिन्होंने फिल्म के संपादन का काम भी अपने ऊपर लिया है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी राजीव राजेंद्रन की है, जबकि प्रोडक्शन डिजाइन ए. राजा का है।