बिहार : मुकेश श्रीवास्तव हत्याकांड के विरोध में चित्रांश समाज का कैंडल मार्च

‎पटना। बिहार के सिवान जिले के आंदर थाना क्षेत्र के खड़िया गांव निवासी मुकेश श्रीवास्तव की हत्या के विरोध में पटना में चित्रांश समाज के युवाओं ने कैंडल मार्च निकाला। पटना के गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक पर आयोजित कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में चित्रांश समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने हत्याकांड के मुख्य आरोपितों की अविलंब गिरफ्तारी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। ‎‎शुक्रवार की देर शाम निकाले गए इस कैंडल मार्च का नेतृत्व चित्रांश समाज के नेता सीतेश रमण ने किया। उन्होंने कहा कि मुकेश श्रीवास्तव की हत्या से चित्रांश समाज के साथ-साथ हर वर्ग के लोगों में दुख और आक्रोश है। उन्होंने कहा कि समाज को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उम्मीद है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देखते हुए आरोपितों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। ‎ सीतेश रमण ने कहा कि पुलिस की ओर से की गई छापेमारी के दौरान आरोपितों के घर से सात लाख रुपए नकद, दो नोट गिनने वाली मशीन, शराब और गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद हत्याकांड के मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपितों को गिरफ्तार करने की मांग की और कहा कि मुकेश श्रीवास्तव की हत्या से चित्रांश (कायस्थ) समाज में भारी आक्रोश है। समाज के युवाओं में न्याय की मांग को लेकर रोष व्याप्त है। सरकार और पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि हत्याकांड में शामिल सभी दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। ‎ ‎ सीतेश रमण ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही मृतक की पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण तथा उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। ‎‎उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्य आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो चित्रांश समाज का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा और मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग करेगा। ‎ ‎ कैंडल मार्च में सीतेश रमण, मनीष आनंद, पूजा कुमारी, अनितेश कुमार, अभिषेक कुमार, चंदन कुमार, संतोष कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। ‎

ईरान अमेरिका से बातचीत के पक्ष में, लेकिन सरेंडर नहीं करेंगे: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत जारी रखने के देश के वादे को फिर से दोहराया है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेहरान को सरेंडर करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। पेजेश्कियन ने यह बात शुक्रवार (स्थानीय समय) को अपने ऑफिस की वेबसाइट पर पब्लिश एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने ईरान सरकार के अमेरिका के साथ बातचीत करने और युद्ध खत्म करने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर करने के फैसले का बचाव किया। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि जब तक अमेरिका एमओयू के तहत अपने वादे पूरे करता है, ईरान अपनी जिम्मेदारियों के लिए प्रतिबद्ध है। जहां भी वे अपना वादा पूरा करने में फेल होते हैं तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है कि हम काम जारी रखें।” इस हफ्ते की शुरुआत में पेजेश्कियन ने इस बात से इनकार किया कि वह पद छोड़ रहे हैं और कहा कि वह पूरी तरह से अपना काम जारी रखेंगे। यह बात एमओयू को लेकर ईरानी नेतृत्व में मतभेद की अफवाहों के बीच आई। ईरान और अमेरिका ने जून में ज्ञापन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों पक्षों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि दोनों के बीच नए तनाव ने बातचीत का नतीजा अनिश्चित कर दिया है। इस बीच, ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात ईरान के होर्मोजगान प्रांत के दक्षिणी केश्म द्वीप पर दो धमाके सुने गए। एजेंसी ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रवेश द्वार पर “शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों” से ईरानी सशस्त्र बलों की भिड़ंत के कारण ये धमाके हुए। तस्त्रीम ने सूत्रों के हवाले से बताया कि धमाकों की आवाज स्थानीय समय के हिसाब से रात करीब 9:40 बजे सुनी गई और कहा कि ईरानी नौसेना को इस संघर्ष में मिली कामयाबियों की घोषणा आने वाले घंटों में की जाएगी। इसमें हॉर्मोजगान प्रांत के राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक मामलों के उप-गवर्नर अहमद नफीसी के हवाले से कहा गया है कि केशम आइलैंड और प्रांतीय राजधानी बंदर अब्बास में किसी भी हमले या घटना की सूचना नहीं मिली है। विस्फोटों के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारी आवश्यक जांच कर रहे हैं। इससे पहले सऊदी के अल हदथ न्यूज चैनल और अल अरबिया न्यूज चैनल ने गुरुवार को उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने के समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि इस समझौते को अभी भी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से मंजूरी मिलनी बाकी है और कुछ ही दिनों में इसकी घोषणा हो सकती है। इसका मकसद पानी के रास्ते में नेविगेशन फिर से शुरू करना है।

टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाएं हो रद्द, आश्वासन से नहीं चलेगा काम : देवेंद्रनाथ महतो

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन शनिवार को 15वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों छात्र धरने पर बैठे हैं। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य और प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि शुक्रवार को सरकार के साथ पहली औपचारिक वार्ता हुई, लेकिन उससे कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। शनिवार को भी 8 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए गया है। मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा। देवेंद्र नाथ महतो ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार से शुक्रवार शाम पहली औपचारिक वार्ता हुई थी, लेकिन उसमें केवल आश्वासन दिए गए। उन्होंने कहा, “वार्ता हो रही है लेकिन सिर्फ दावा दिया जा रहा है। हमने संकल्प लिया है कि जो तत्काल मांगें हैं उन्हें तुरंत पूरा किया जाए और जिन मांगों को पूरा करने में समय लग सकता है, उन्हें तीन महीने के अंदर पूरा किया जाए। जो मांगे तत्काल पूरी होने हैं, उनके पूरे होने तक मेरा अनशन जारी रहेगा।” उन्होंने बताया कि मुख्य मांग है कि टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) एजेंसी द्वारा आयोजित की गई सभी परीक्षाएं रद्द की जाएं और मामले की निष्पक्ष जांच हो। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड के गठन के बाद से ही छात्र पीड़ित हैं। यह कोई एक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं है। जेपीएससी और जेएसएससी जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी करके नौकरी ली जा रही है। इससे सभी परेशान हैं। आज लंबे समय बाद छात्र एकजुट हुए हैं और देशभर के लोग इसका समर्थन कर रहे हैं। धरने में शामिल एक अन्य छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा कि वे देवेंद्रनाथ की लीडरशिप में आगे बढ़ना चाहते हैं और मुख्यमंत्री से सीधी बात करना चाहते हैं। उनकी मांग है कि बातचीत खुले मंच पर, खुले ग्राउंड में हो ताकि पारदर्शिता बनी रहे। प्रेम नायक ने कहा, “एक छात्र 10×10 के कमरे में रहकर पढ़ता है, घर से चावल-दाल लाकर गुजारा करता है। अगर उसकी नौकरी 1 करोड़ रुपये या 80 लाख रुपये में बिक जाएगी तो गरीब छात्र कहां जाएगा? इसलिए इस आवाज को जोरदार तरीके से उठाना जरूरी है। यहीं से अर्थव्यवस्था गिरने लगती है। अगर कोई अधिकारी पैसे देकर और रिश्वत देकर नौकरी पाता है तो वह भ्रष्टाचार क्यों नहीं करेगा?”

राहुल गांधी को महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए : रिजिजू

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और भागीदारी पर बयान दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जब तक महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक कोई भी देश पूरी तरक्की नहीं कर सकता। राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि कांग्रेस को अब संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर में अपनी बात रखी। गुरुवार को भी ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं सोच रहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा फंसी हुई है, उसे व्यक्त करने की इजाजत नहीं है, कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे लिए कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को व्यक्त न कर सकें।” वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की आवाज दबने से देश की तरक्की पर असर पड़ता है। मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा यही है कि लोग समझें कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा है। राहुल गांधी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ बिजनेस या राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि महिलाएं बिजनेस या राजनीति में अच्छा करें, बल्कि यह भी है कि वे अपने घरों में, परिवार में और सार्वजनिक जगहों पर खुलकर बोल सकें और सड़कों पर आराम से चल सकें। उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे दूसरों से अलग राय रख सकें, अपने माता-पिता, पति, भाई-बहन से सवाल कर सकें। भारत को सच में विकसित होना है तो पितृसत्ता और पुरुषों के कड़े नियंत्रण से महिलाओं को थोड़ी आजादी मिलनी ही चाहिए।” राहुल गांधी के इस वीडियो बयान पर किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कांग्रेस के नजरिए में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। यह कांग्रेस पार्टी का सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी के दिल में महिलाओं को लेकर बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी। महिला आरक्षण विधेयक, जिसे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। फिलहाल महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है और सभी की नजर संसद के अगले कदम पर है।

राघव चड्ढा ने पीएम मोदी को भेंट की भगवान गणेश की मूर्ति, बोले-एक सुबह जो हमेशा याद रहेगी

नई दिल्ली। भाजपा राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को यादगार बताया है। सांसद ने पीएम मोदी से मुलाकात की तस्वीर ‘एक्स’ पर शेयर की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में उन्होंने लिखा, “एक सुबह जो हमेशा याद रहेगी रखूंगा। पीएम मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला। विस्तृत और समृद्ध बातचीत हुई। उनके बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन से सीखने का अवसर देने के लिए हृदय से आभारी हूं।” एक्स पर शेयर की गई तस्वीर में राघव चड्ढा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान गणेश की मूर्ति भेंट करते नजर आए। 6 अगस्त को राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा ने संसद में कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ‘कट मनी’ या रेफरल कमीशन के चलन पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस अनौपचारिक व्यवस्था का आर्थिक बोझ आखिरकार मरीजों को ही उठाना पड़ता है। शून्यकाल के दौरान राज्यसभा में राघव चड्डा ने कहा था कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ऐसा तंत्र विकसित हो गया है, जिसमें मरीजों को जांच के लिए भेजने के बदले डॉक्टरों को तय कमीशन दिया जाता है। उन्होंने कहा था, “यह एक अनौपचारिक व्यवस्था बन चुकी है। मरीज का इलाज करने के लिए नहीं, बल्कि उसे रेफर करने के लिए डॉक्टर को 3,000 रुपए तक दिए जाते हैं। इसके लिए तय कमीशन रेट, एजेंट और समानांतर इंसेंटिव इकोनॉमी काम कर रही है।” चड्डा ने आरोप लगाया था कि डायग्नोस्टिक सेंटर अपने खातों में इन भुगतानों को ‘मार्केटिंग एक्सपेंस’ बताते हैं, जबकि डॉक्टर इसे ‘रेफरल कमीशन’ के रूप में दर्ज करते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि इसकी पूरी कीमत मरीज के बिल में जोड़ दी जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने हिमाचल के चंबा में बस दुर्घटना में सात लोगों की मौत पर जताया दुख

नई दिल्ली/शिमला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जनपद में हुई बस दुर्घटना में सात लोगों की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “हिमाचल प्रदेश के चंबा में हुए हादसे में लोगों की जान जाना बेहद दुखद है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों।” हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “चंबा जिला के तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास हुए बस हादसे में 7 लोगों के निधन और अन्य 11 के घायल होने का समाचार अत्यंत दुखद है। इस दुखद हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत जनों की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजन को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।” मुख्यमंत्री सुक्खू ने जिला प्रशासन को भी सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराकर उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, सीएम सुक्खू ने सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। भाजपा के सांसद सुरेश कश्यप ने लिखा, “जिला चंबा के बैरागढ़ क्षेत्र में चलूंज मोड़ के समीप चंबा–बैरागढ़ मार्ग पर शर्मा बस के दुर्घटनाग्रस्त होने का समाचार अत्यंत दुखद है। इस भीषण सड़क हादसे में कई लोगों के असामयिक निधन की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।” यह दुर्घटना उस समय हुई, जब एक प्राइवेट बस सुबह करीब 6:30 बजे बैरागढ़ से चंबा जा रही थी। तीसा-बैरागढ़ मुख्य मार्ग पर देवीकोठी के पास चालुज मोड़ पर बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी। बस में कुल 18 लोग सवार थे। हादसे के बाद कुछ लोग बस के नीचे दब गए। बाद में चंबा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 7 लोगों की मौत और 11 लोगों के घायल होने की पुष्टि की। हादसे के कारणों और मृतकों व घायलों की पहचान की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

आकाश चोपड़ा ने बताया, क्यों श्रीलंका टेस्ट सीरीज में सारांश जैन को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल

नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 13 अगस्त होने जा रहा है। सारांश जैन को इस सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टीम में चुना गया है। हालांकि, भारत के पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि सारांश को इस सीरीज में प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। आकाश चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किए गए वीडियो में बताया क्यों श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सारांश को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना मुश्किल है। उन्होंने बताया, “मुझे अभी भी लग रहा है कि सारांश को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिलेगा। श्रीलंका की टीम का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मुझे लगता है कि जब टीम का ऐलान होगा भी तब भी उसमें शायद एक ही बाएं हाथ का बल्लेबाज होगा। भारत के पास चार स्पिनर मौजूद हैं।” पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, “मानव सुथार पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे। वहीं, रवींद्र जडेजा वापसी कर रहे हैं और उन्हें वैसे ही एक ही फॉर्मेट में पूरी तरह से खेलने का मौका मिलता है। फिर आपके पास कुलदीप यादव भी हैं। सामने वाली टीम में दाएं हाथ के ज्यादा बल्लेबाज होंगे और इसे देखते हुए सारांश को मेरे हिसाब से मौका नहीं मिलेगा।” आकाश ने अभिमन्यु ईश्वरन का उदाहरण देते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके आने वाले खिलाड़ियों को शायद प्राप्त मौके नहीं मिलते हैं। हालांकि, आकाश ने कहा कि सारांश के लिहाज से अच्छी बात यह है कि उनका टीम में सिलेक्शन हुआ है। पूर्व क्रिकेटर के अनुसार, अगर वॉशिंगटन सुंदर फिट होते, तो सारांश को टीम में जगह नहीं मिलती। आकाश ने कहा कि श्रीलंका वाली सीरीज में सारांश का टेस्ट डेब्यू होना उन्हें काफी मुश्किल लग रहा है। भारतीय टीम का रिकॉर्ड टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ शानदार रहा है। दोनों टीमों के बीच कुल 46 टेस्ट मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें से भारत को 22 में जीत मिली है, जबकि श्रीलंका ने सिर्फ मुकाबलों में जीत दर्ज की है।

टीवीके सरकार ने पेश किया पहला कृषि बजटः मिट्टी की सेहत, उत्पादकता बढ़ाने और एआई-आधारित सेवाओं को विस्तार करने की घोषणा

चेन्नई। तमिलनाडु के कृषि और किसान कल्याण मंत्री आर. विनोथ ने गुरुवार को विधानसभा में तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार का पहला कृषि बजट पेश किया। इसमें खेती की उत्पादकता बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता की रक्षा करने और किसानों के लिए टेक्नोलॉजी पर आधारित सेवाओं का विस्तार करने के मकसद से कई पहल की घोषणा की गई। 2026-27 के लिए कृषि बजट पेश करते हुए विनोद ने कहा कि सरकार मौजूदा कृषि योजनाओं को जारी रखेगी और साथ ही खेती की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रम भी शुरू करेगी। मंत्री ने कहा कि यह बजट किसानों और कृषि निर्यातकों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया था और इसमें संबंधित लोगों से मिले सुझावों को भी शामिल किया गया था। ये प्रस्ताव राज्य में कृषि के विकास के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की दूरदर्शी सोच के अनुसार तैयार किए गए थे। तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था में खेती के महत्व पर जोर देते हुए विनोद ने कहा कि कृषि इसकी रीढ़ है और इस सेक्टर को मजबूत किए बिना लगातार आर्थिक विकास हासिल नहीं किया जा सकता। प्रमुख घोषणाओं में ‘तमिलनाडु मृदा संरक्षण मिशन’ शामिल है, जिसके लिए सरकार ने 122.51 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह कार्यक्रम राज्य भर में मिट्टी की उर्वरता की रक्षा और सुधार करने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा। सरकार ने गुणवत्तापूर्ण धान के बीजों के उत्पादन और किसानों को उनके वितरण के लिए सब्सिडी प्रदान करने के लिए एक विशेष राज्य योजना के तहत 34.72 करोड़ रुपये भी निर्धारित किए हैं। विनोथ ने घोषणा की कि किसानों को व्यक्तिगत डिजिटल सेवाएं और जानकारी प्रदान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित एप्लिकेशन विकसित किया जाएगा। इस पहल के लिए 2026-27 के दौरान 2 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। दालों और तिलहन फसलों के लिए ‘आत्मनिर्भरता मिशन’ के लिए 203.64 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दालों और तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और राज्य के बाहर से आपूर्ति और आयात पर निर्भरता को कम करना है। सरकार 63.81 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘तमिलनाडु मिलेट मिशन’ भी लागू करेगी। इस पहल का मकसद मोटे अनाज (मिलेट) की खेती का दायरा बढ़ाना और साथ ही इसके उत्पादन और उत्पादकता में सुधार करना है। इसे “प्राचीन तमिल भोजन, लंबे समय तक स्वस्थ जीवन” थीम के तहत बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें पारंपरिक फसलों के पोषण संबंधी महत्व पर जो दिया जाएगा। यह कृषि बजट, टीवीके सरकार द्वारा 2026-27 के लिए संशोधित बजट अनुमान पेश करने के एक दिन बाद आया है। कृषि बजट पेश किए जाने से पहले विरोध जताने के लिए विपक्षी डीएमके विधायक काली शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे।

गौरव मेरा कंफर्ट जोन नहीं, डॉग वाले बयान पर आकांक्षा चमोला ने तोड़ी चुप्पी

मुंबई। टेलीविजन अभिनेत्री और ‘लॉकअप-2’ कंटेस्टेंट रही आकांक्षा चमोला ने पति गौरव खन्ना को लेकर दिए गए विवादित बयान पर चुप्पी तोड़ी। अभिनेत्री ने बताया कि जिस तरह से उनके बयानों को तोड़कर दिखाया गया है, वैसा कुछ भी नहीं था। आकांक्षा चमोला ने शो से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा, “मैं चाहती थी कि शो के अंदर विजिटर के तौर पर मुझसे वो लोग मिलने आए, जिनके साथ मैं अपना कंफर्ट महसूस करती हूं जैसे कि मेरे माता-पिता या फिर डॉग आते तो मुझे अच्छा लगता, क्योंकि इनके साथ मैं अपना कंफर्ट महसूस करती हूं। गौरव भले ही मेरा पति हैं और अब हम डिवॉर्स लेने जा रहे हैं, लेकिन वो मेरा कंफर्ट जोन नहीं हैं। वो पता नहीं क्यों आया, शायद अपनी मर्जी से आया होगा।” दरअसल, शो के दौरान आकांक्षा चपोला के पति गौरव खन्ना उनसे मिलने के लिए आए थे, जिसके कुछ एपिसोड बाद अभिनेत्री ने बताया था कि शो के दौरान गौरव खन्ना की जगह कोई ऐसा मिलने आता, जिसके साथ वो अपनापन महसूस करती, भले उनका डॉग मिलने आता। शो में एंट्री लेने से पहले आकांक्षा चमोला ने अपना सीक्रेट रिवील करते हुए बताया था कि वह और गौरव खन्ना एक साल से अलग रह रहे हैं और तलाक लेने जा रहे हैं। इसके बाद श्रेया कालरा ने उनका दूसरा सीक्रेट रिवील कर दिया था कि वे बायसेक्सुअल हैं, जिसके बाद आकांक्षा चमोला ने ये बात स्वीकारी भी थी। साथ ही ये भी बताया था कि पति गौरव खन्ना को भी उनकी सेक्सुअलिटी के बारे में पता था। रितेश देशमुख और फराह खान द्वारा होस्ट किए गए इस शो में शिल्पा शिंदे, श्रेया कालरा, आकांक्षा चौधरी, योगेश रावत, सुनीता आहूजा, राम कपूर, शिवांगी जोशी, हर्षद चोपड़ा, सूफी मोतीवाला, धीरज धूपर, माधुरी जैन ग्रोवर, रियाज अली और वरुण यादव उर्फ ​​लैला जैसे पॉपुलर नाम थे, हालांकि कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने टॉप 3 की रेस में शिवांगी जोशी और योगेश रावत को हराकर इस सीजन की ट्रॉफी अपने नाम कर 1 करोड़ का इनाम भी अपने नाम किया।

खुदरा महंगाई दर जुलाई में 4.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद, खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का जोखिम: रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारत में खुदरा महंगाई दर जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की अधिक कीमतों के कारण इसके ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, जरूरी चीजों (जैसे प्याज, खाने का तेल, चावल और दाल) की कीमतों में महंगाई का असर व्यापक बना हुआ है, हालांकि मुख्य सब्जियों की बेहतर आवक और सामान्य मानसून से कुछ राहत मिली है। मुख्य महंगाई (जिसमें खाने-पीने की चीजें और ईंधन शामिल नहीं हैं) के 4–4.1 प्रतिशत के आसपास सीमित रहने की उम्मीद है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी से मदद मिलेगी। हालांकि, आगे चलकर इनपुट लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। बैंक ने बताया कि उसका ‘एसेंशियल कमोडिटीज इंडेक्स’ (बीओबी ईसीआई) जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत बढ़ा, जो इस पूरी सीरीज में सबसे तेज बढ़ोतरी थी। अगस्त 2026 में (शुरुआती 5 दिनों में) यह बढ़ोतरी और भी अधिक, यानी 5.4 प्रतिशत रही। बैंक ने बताया कि सब्जियों में टीओपी (टमाटर, प्याज और आलू) की आवक के आंकड़े राहत देने वाले रहे हैं, भले ही प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 3.7 प्रतिशत की और गिरावट आई है, जिससे पर्सनल केयर और मुख्य महंगाई के असर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई भी फिलहाल कम रहने की संभावना है। साथ ही, रिपोर्ट मानसून की प्रगति को अनुकूल बताया गया है, जिसमें 63 प्रतिशत राज्यों में सामान्य बारिश हुई है। 31 जुलाई, 2026 तक प्रमुख खरीफ फसलों (तिलहन और गन्ने को छोड़कर) के तहत बोया गया रकबा (सामान्य रकबे के प्रतिशत के रूप में) पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अधिक रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य कीमतों, खासकर खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी आई है।