मध्य प्रदेश के मंडला में रतनजोत के बीज खाने से 7 मासूम बीमार, जिला अस्पताल इलाज जारी

मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के सेमीकोल गांव में 3 से 6 साल की उम्र के सात मासूम बच्चे जहरीले रतनजोत के बीज खाने से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को आनन-फानन में मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। फिलहाल, सभी बच्चों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरव कुमार मरकाम ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि रविवार शाम करीब 5.30 बजे सात बच्चों को अस्पताल लाया गया था। ये सभी बच्चे ग्राम पंचायत सेमीकोल के रहने वाले हैं। परिजनों ने बताया कि बच्चों ने खेलते-खेलते रतनजोत के बीज खा लिए थे। हमने सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया है। सभी को जरूरी ट्रीटमेंट दिया गया है और फिलहाल सभी बच्चे स्टेबल हैं, उनकी स्थिति स्थिर है।” घटना के बारे में बच्चों की मां सुनीता यादव ने बताया कि उनके दो बच्चे – एक लड़का और एक लड़की – और पड़ोस के पांच बच्चे रविवार को छुट्टी होने के कारण गांव में बजरंगबली मंदिर के सामने खेल रहे थे। वहीं पास में ही रतनजोत का पेड़ लगा हुआ है। खेलने के बाद बच्चे घर आए और पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत करने लगे। सुनीता ने बताया, “बच्चे घर आकर कहने लगे कि पेट में दर्द हो रहा है। वे लगातार उल्टी कर रहे थे और दस्त भी शुरू हो गई थी। जब हमने देखा तो तुरंत समझ गए कि उन्होंने पेड़ के पास से कुछ खा लिया है। हम तुरंत सभी बच्चों को लेकर जिला अस्पताल आ गए। यहां डॉक्टरों ने बोतल चढ़ाई है और इलाज शुरू कर दिया है। डॉक्टरों ने कहा है कि बच्चे अब ठीक हैं।” वहीं, मनोज कुमार ने कहा कि रविवार को छुट्टी होने से बच्चे घर पर ही खेल रहे थे। वह खुद खेती-बाड़ी के काम से खेत में गए हुए थे, जहां धान की कटाई चल रही है। उन्हें सूचना मिली कि बच्चे उल्टी-दस्त कर रहे हैं तो वह काम छोड़कर घर पहुंचे। मनोज ने बताया, “जब बच्चे उल्टी कर रहे थे तो उल्टी में बीज के टुकड़े निकले, तब हमें पता चला कि उन्होंने रतनजोत के बीज खाए हैं। गांव में सात बच्चे एक साथ खेल रहे थे और सातों ने ही बीज खा लिए थे।
कच्छ में दुर्लभ सांपों का जोड़ा मिला, वन विभाग ने कहा-दोनों प्रजातियां बहुत कम देखी गईं

कच्छ। वन विभाग के अनुसार, सितंबर में गुजरात के कच्छ जिले में काला डूंगर इलाके में गश्त के दौरान सांपों की दो ऐसी प्रजातियां एक साथ देखी गईं जो बहुत कम दिखाई देती हैं। इनमें से ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ का दिखना राज्य में इस प्रजाति के देखे जाने का शायद दूसरा या तीसरा दर्ज मामला हो सकता है। ये सांप खावड़ा राउंड में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और स्थानीय फॉरेस्ट स्टाफ की शाम की गश्त के दौरान देखे गए। वन विभाग ने बताया कि ये दोनों प्रजातियां कच्छ में बहुत कम देखी गई हैं और कई सालों बाद एक ही जगह पर एक साथ देखी गई हैं। इनमें से एक सांप ‘ब्लैक-हेडेड रॉयल स्नेक’ (‘स्पैलेरोसोफिस एट्रिसेप्स’) था, जो जहरीला नहीं होता है। दूसरा ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ (‘सैममोफिस शोकारी’) था, जिसे विभाग ने हल्का जहरीला बताया है। इसका जहर इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता है। सैंड स्नेक लगभग 70 सेंटीमीटर लंबा था। गुजरात में एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक का पाया जाना बहुत दुर्लभ माना जाता है।विभाग ने सांपों के जानकार अजय देसाई की किताब ‘सर्प संदर्भ’ का जिक्र किया, जिसमें कच्छ के लोदाई में इस प्रजाति के पहले फोटोग्राफिक रिकॉर्ड का जिक्र है। हाल ही में देखा गया यह सांप गुजरात में दर्ज किया गया दूसरा या तीसरा मामला हो सकता है। हालांकि विभाग ने पक्के रिकॉर्ड की कुल संख्या नहीं बताई। 462 मीटर की ऊंचाई पर स्थित काला डूंगर, कच्छ की सबसे ऊंची चोटी है। विभाग ने इस इलाके में दुर्लभ वन्यजीवों के पाए जाने का कारण जिले के अनोखे इकोसिस्टम और शुष्क जलवायु को बताया है। यह घटना फॉरेस्ट डिवीजन द्वारा सांपों और उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बीच हुई है। कच्छ ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन हर साल 19 सितंबर को ‘विश्व सांप के काटने से जुड़ी जागरूकता दिवस’ के तौर पर मनाता है। इन गतिविधियों में जागरूकता साइनबोर्ड, वन्यजीव जागरूकता कार्यक्रम, प्रकृति शिक्षा शिविर और स्थानीय निवासियों के लिए अन्य पहल शामिल हैं। वन विभाग ने इस इलाके में आने वाले निवासियों और पर्यटकों से दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करने और सांपों को नुकसान न पहुंचाने या उनके प्राकृतिक आवास को परेशान न करने की अपील की है। विभाग ने कहा कि इलाके की जैव-विविधता के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
गुजरात: थाने में हंगामे को लेकर कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

गांधीनगर। गुजरात पुलिस ने सोमवार को बताया कि गांधीनगर नगर निगम (जीएमसी) चुनाव के प्रचार के दौरान एक पुलिस इंस्पेक्टर के काम में बाधा डालने, पेथापुर पुलिस स्टेशन के अंदर हंगामा करने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश करने के आरोप में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला रविवार रात को दर्ज किया गया, जिस दिन नगर निकाय चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। पेथापुर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर (पीएसओ) के अनुसार, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एफआईआर के अनुसार, यह घटना 8 अक्टूबर को हुई थी। उस दिन वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने और उनके साथियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रचारक को धमकी दी थी। पेथापुर पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई की शिकायत में कहा गया है कि 8 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे पेथापुर के संजारी पार्क में परमार और उनके साथियों ने कथित तौर पर भाजपा प्रचारक भावेश भावसार को धमकी दी थी। उन्होंने कथित तौर पर भावसार को उस इलाके में प्रचार न करने या न आने की चेतावनी दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। एफआईआर में कहा गया है कि इसके बाद परमार और अज्ञात साथियों के खिलाफ पेथापुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। देसाई का आरोप है कि जब वे अपनी ड्यूटी के तहत शिकायत के सिलसिले में परमार से पूछताछ कर रहे थे, तो मेवाणी और अन्य आरोपियों ने गैर-कानूनी भीड़ बनाई और पुलिस स्टेशन में पूछताछ वाले कमरे में घुस गए। आरोप है कि उन्होंने इंस्पेक्टर को ड्यूटी करने से रोका, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, हंगामा किया और जबरदस्ती परमार का बयान दर्ज होने से रोक दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में मेवाणी और अन्य आरोपी समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन के बाहर बैठ गए और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए। देसाई के अनुसार, उनकी इन हरकतों का मकसद लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काना, पुलिस बल को बदनाम करना, शांति भंग करना और समुदायों के बीच तनाव पैदा करना था। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने या उसे बढ़ावा देने के इरादे से सोशल मीडिया पर फुटेज शेयर किया। इसमें यह भी कहा गया है कि उनकी हरकतों ने गांधीनगर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिफिकेशन का उल्लंघन किया। मेवाणी और सात अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 189(2) और 191(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, उन पर धारा 221, 351(2) और 352 भी लगाई गई हैं, जो सरकारी कर्मचारी को उसके काम में बाधा डालने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करने से जुड़ी हैं। गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लागू की गई है। यह मामला तब दर्ज किया गया जब रविवार को गांधीनगर नगर निगम के 11 वार्डों में मतदान हो रहा था।
भाजपा ने पूछा-क्या रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था छात्रों का प्रदर्शन

मुंबई। भाजपा ने सोमवार को एमपीएससी छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या यह आंदोलन सचमुच छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए था या फिर एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था। भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने एमपीएससी की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने छात्रों की चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनने और समाधान खोजने के लिए चौथी बार छात्र प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने रोहित पवार को चुनौती दी कि वे स्पष्ट करें कि छात्रों को इन विरोध प्रदर्शनों से आखिरकार क्या हासिल हुआ और किसे राजनीतिक फायदा हुआ। पचपुते ने कहा कि हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने 30 सितंबर को छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली थीं लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग सीधे तौर पर राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी। अगर मुख्यमंत्री के पास अध्यक्ष को हटाने का सीधा अधिकार होता, तो वे बहुत पहले ही उचित कार्रवाई कर चुके होते। संवैधानिक सीमाएं होने के बावजूद, रोहित पवार ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने मुख्य मांगें पूरी होने के बाद भी आंदोलन जारी रखने के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि आखिरकार आंदोलन में शामिल असली छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया। कानूनी और संस्थागत पहलुओं का जिक्र करते हुए पचपुते ने समझाया कि राज्य सरकारों के पास एमपीएससी जैसे संवैधानिक निकाय के अध्यक्ष को हटाने की सीधी शक्ति नहीं होती है, क्योंकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एक विशिष्ट प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संवैधानिक तरीका अपनाया। न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष छुट्टी पर चले गए। अगर 30 सितंबर को ही जांच प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया गया होता, तो बाद के टकराव से बचा जा सकता था और इतने बड़े हंगामे की जरूरत ही नहीं पड़ती। पचपुते ने कुछ राजनीतिक हस्तियों पर विरोध प्रदर्शन के मंच पर विभिन्न राजनेताओं, प्रभावशाली लोगों और कलाकारों को बुलाकर इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ध्यान छात्रों की समस्याओं को हल करने से हटकर व्यक्तिगत प्रचार और राजनीतिक लाभ हासिल करने पर केंद्रित हो गया। गलत प्राथमिकताओं के बारे में अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए पचपुते ने छात्रों को एक चेतावनीपूर्ण उदाहरण दिया और उन्हें सलाह दी कि वे अपने करियर और पढ़ाई की कीमत पर राजनीतिक एजेंडे से गुमराह न हों। उन्होंने कहा कि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अधिकारी बनने के लिए तैयारी और संघर्ष करते हैं, न कि राजनीतिक नेताओं के लिए सीढ़ी बनने के लिए। उन्होंने पूछा कि रोहित पवार को अब साफ-साफ जवाब देना चाहिए कि इस विरोध-प्रदर्शन से छात्रों को असल में क्या मिला और इसका राजनीतिक फायदा किसे हुआ। पचपुते की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब पुणे में एमपीएससी के लिए तैयारी कर रहे छात्रों ने अपना 11 दिन का विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया। उन्होंने पेपर लीक के मामले में एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग की थी। राज्य सरकार ने एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक कमियों की जांच करने और दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमिटी बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद, सोमवार को सुबह 1.24 बजे एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने एक्स पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर जा रहे हैं। रोहित पवार ने कहा कि भले ही इसमें देरी हुई लेकिन सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं। हमारी मुख्य मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन को रोकने का फैसला किया। यह जीत छात्रों की एकता की जीत है। रोहित पवार ने माना कि सरकार ने तुरंत इस्तीफा तो नहीं लिया, बल्कि चेयरमैन विवेक भीमन्वार को छुट्टी पर भेज दिया। छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए वे काफी हद तक पीछे हटे। छात्र एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी। उन्होंने पुणे में तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा दिखाई गई अभूतपूर्व एकजुटता की तारीफ की, साथ ही प्रमोद पाटिल जैसे नेताओं और समर्थकों की भी सराहना की, जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुधार लागू करने के लिए एक सख्त समय-सीमा दी गई है और चेतावनी दी कि जवाबदेही प्राथमिकता बनी रहेगी।
नोएडा के सेक्टर-95 अंडरपास में चार से पांच फीट पानी में फंसी कार, शीशा तोड़कर बाहर निकले लोग

नोएडा। शहर में बारिश के बाद अंडरपास में जलभराव की समस्या एक बार फिर सामने आई है। सोमवार, 12 अक्टूबर को सेक्टर-95 स्थित अंडरपास में चार से पांच फीट तक पानी भर जाने के कारण एक रेनॉल्ट ट्राइबर कार उसमें फंस गई। कार में सवार लोग पानी के बीच फंस गए। स्थिति गंभीर होने पर कार सवारों ने शीशा तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। गनीमत रही कि इस घटना में सभी लोग सुरक्षित बच गए और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद कार को भी रस्सी की मदद से पानी से बाहर निकाला गया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार को थाना फेस-1 क्षेत्र के अंतर्गत डायल-112 के माध्यम से सूचना मिली कि सेक्टर-95 के पास स्थित अंडरपास में बारिश का पानी अधिक भरने के कारण एक कार फंस गई है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस यूनिट को मौके पर भेजा गया। जब दोनों टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, तब तक कार में सवार सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। पुलिस और फायर विभाग की टीम ने इसके बाद बचाव अभियान चलाते हुए कार को भी पानी से बाहर निकलवाया। बताया गया कि कार में सवार लोग गुरुग्राम से बुलंदशहर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सेक्टर-95 अंडरपास में पानी भरा होने के कारण उनकी कार बीच में फंस गई। पानी की गहराई अधिक होने के चलते वाहन को निकालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद कार को रस्सी से बांधकर बाहर निकाला गया। सेक्टर-95 अंडरपास में बारिश के बाद जलभराव की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। पूर्व में भी यहां पानी भरने के कारण कई वाहन फंस चुके हैं। इसके बावजूद बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा होने की समस्या वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। इस बार भी कार के पानी में फंसने से बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई थी। अंडरपास में चार से पांच फीट तक पानी भरने की स्थिति में वाहन चालकों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे में पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन लेकर आगे बढ़ना खतरनाक साबित हो सकता है। इस घटना में कार सवारों की सूझबूझ और समय रहते बाहर निकलने के कारण सभी की जान बच गई। सेक्टर-95 अंडरपास में बार-बार जलभराव होने की घटनाओं के बाद नोएडा प्राधिकरण की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा होने से वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ सकता है। ऐसे में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
जेएनयू यौन उत्पीड़न मामला: एफआईआर में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम शामिल

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आने के कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार (11 अक्टूबर) को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में कांग्रेस सांसद और बर्खास्त जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम का नाम शामिल है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में कम से कम 11 महिला छात्रों ने अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि उन्होंने छात्रों को बैठकों या समारोहों के बहाने अपने कैंपस आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां की। बताया गया है कि आरोपों और शिकायतों की जांच विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें बर्खास्त करने के फैसले से पहले की गई थी। इससे पहले रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए कांग्रेस, विशेष रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सवाल किया था और पूछा था कि क्या एलओपी की ‘पितृसत्ता को नष्ट करो’ वाली टिप्पणी एक महज राजनीतिक बयानबाजी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि जब हम मां शैलपुत्री की पूजा कर रहे हैं, मैं आपके सामने इस देश की बेटियों से संबंधित एक बहुत ही गंभीर मुद्दा ला रही हूं। यौन दुर्व्यवहार के आरोप में जेएनयू ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 2024 में, एक या दो नहीं बल्कि 11 छात्रों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी। जेएनयू ने पॉश अधिनियम के तहत एक आंतरिक समिति का गठन किया, जिसने विस्तृत जांच के बाद अकोइजाम को तुरंत बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस सांसद के खिलाफ आरोपों का हवाला देते हुए बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की पिछली ‘पितृसत्ता को तोड़ो’ टिप्पणी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि क्या ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ आपके लिए केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है? ऐसा लगता है कि यह घटना कांग्रेस के पाखंड को दर्शा रही है। उनके लिए, नारीवाद एक हैशटैग से शुरू होता है और जब जवाबदेही की बात आती है तो समाप्त हो जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस आलाकमान-चाहे वह राहुल गांधी हों, प्रियंका गांधी हों, मल्लिकार्जुन खड़गे हों या सोनिया गांधी हों, उन्होंने इस पर एक भी शब्द नहीं बोला है। इस घटना पर चुप रहने का मतलब है कि वे कहीं न कहीं कथित यौन शिकारी के आचरण का समर्थन कर रहे हैं। विपक्ष के नेता से सवाल करते हुए भाजपा सांसद ने पूछा कि क्या महिलाओं का सम्मान सिर्फ एक नारा होने तक ही सीमित है और यह कांग्रेस पार्टी की नीति नहीं है।
कई चुनावों में हुई वोट चोरी; ज्ञानेश कुमार को जितना बचाएगी सरकार, उतने बड़े होंगे सवाल : राहुल गांधी

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, क्योंकि जिन संस्थाओं पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे अपना कर्तव्य नहीं निभा रही हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडी गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च’ से पहले पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और लोकसभा चुनावों में वोटों की चोरी हुई है। उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने, प्रदर्शनकारियों को राजधानी पहुंचने से रोकने और पुलिस बल की भारी तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भाग लेना उनका काम है, न कि उस व्यवस्था की रक्षा करना। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, मैं यहां जो कर रहा हूं, वह मेरा काम नहीं है। मेरा काम लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिस्सा लेना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। यह भारत की संस्थाओं का काम है लेकिन वे ऐसा नहीं कर रही हैं। इसलिए मुझे यह करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि भारत में एक के बाद एक राज्य विधानसभाओं और लोकसभा चुनावों में वोटों की चोरी हुई है। उनकी ओर से इस मामले में विस्तृत प्रस्तुति तैयार की जा रही है, जिसे पूरा होने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। प्रस्तुति सामने आने के बाद लोगों को चुनावों में अनियमितताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी। राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ पिछले चार-पांच दिनों से दिल्ली में जन-आंदोलन का माहौल बन रहा है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर पिछले 10 से 13 वर्षों से विरोध जारी है लेकिन अब यह आंदोलन ठोस रूप ले रहा है। उन्होंने सवाल किया कि देश की राजधानी दिल्ली को किले में क्यों तब्दील कर दिया गया है और लोगों को वहां पहुंचने से क्यों रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को ट्रेनों और बसों से उतारा जा रहा है तथा उन्हें दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है। राजधानी में जगह-जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 20,000 से 30,000 जवान सड़कों पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इसे शक्ति प्रदर्शन समझ सकती है लेकिन विपक्ष की रणनीति अलग है। विपक्ष चाहता है कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात रहें, ताकि देश के सामने यह सवाल उठे कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से इतना डर क्यों है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करके बड़ी राजनीतिक गलती कर रही है, क्योंकि इससे विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग को लेकर अपने सवाल देश के सामने रखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को जितनी अधिक सुरक्षा दी जाएगी, विपक्ष के लिए उनके पीछे मौजूद राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही के सवालों को उठाना उतना ही आसान होगा। उनका उद्देश्य इस मामले को जनता के सामने लाना और कथित वोट चोरी को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मियों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि युवाओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के निर्देश क्यों दिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सख्ती बरती जा रही है जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्यों को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कुछ लोग महिलाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कई जवानों से उन्हें समर्थन मिलने की जानकारी मिली है। करीब 50 प्रतिशत पुलिसकर्मी उनके आंदोलन को सही बता रहे हैं और इसे जारी रखने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और देश की जनता एक तरफ हैं जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कुछ सदस्य हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और मैंने सीजेआई को पत्र लिखकर लोकतंत्र की हत्या और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई। सीजेआई ने हमें जवाब दिया और याचिका दायर करने का निर्देश दिया। इंडी गठबंधन के नेता और मैं साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और यह याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि लगता है कि कुछ भ्रम है जिसे शायद सरकार समझ नहीं पा रही है। यह कहा गया था कि सीजेआई विपक्ष के नेताओं से नहीं मिलेंगे। यह बात मायने नहीं रखती। सीजेआई ने जवाब दिया है और हमें याचिका दायर करने का निर्देश दिया है, साथ ही कहा है कि हम अपनी चिंताएं सुप्रीम कोर्ट के सामने रखें और कानूनी प्रक्रिया शुरू करें। सरकार का रुख चाहे जो भी हो, मैं आपको बताना चाहता हूं कि करोड़ों युवा लोकतंत्र और संविधान को बचाना चाहते हैं।
हम सीजेआई से मिलना चाहते थे, उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया: संजय राउत

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। राउत ने कहा कि अगर दरवाजे खुले हैं तो इंडिया ब्लॉक के नेताओं से मिलने से इनकार क्यों किया। एसआईआर और अन्य मुद्दों को लेकर सोमवार को इंडिया ब्लॉक के मार्च पर राउत ने कहा कि इंडी गठबंधन सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा। हम पैदल मार्च करेंगे और गठबंधन की सभी सहयोगी पार्टियां और नेता इसमें शामिल होंगे। हमने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का अनुरोध किया था। मुझे बताया गया था कि आज शाम करीब 4 या 5 बजे बैठक तय की गई थी, लेकिन उसे अचानक रद्द कर दिया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें विपक्ष के नेता या राजनीतिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अधिकार नहीं है। इस बात ने देश के लोगों को हैरान कर दिया है। हमने यह भी देखा है कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां जज पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्री हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के स्वागत में डिनर आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र, संविधान खतरे में है, जनता सड़क पर उतर रही है और लगातार वोट चोरी, इलेक्शन चोरी का मुद्दा उठा रही है। जब हमारे सामने सुनवाई के सारे दरवाजे बंद हो गए तो हम सीजेआई के दरबार में आना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने तो अपना दरवाजा ही बंद कर लिया है। इतिहास हमेशा याद किया जाएगा जब देश संकट में था, तो सुप्रीम कोर्ट ने जनता के लिए दरवाजा बंद कर लिया था। सीजेआई को हमारी बात सुननी चाहिए, हम तो 24 घंटे भी नहीं मांग रहे हैं, मुलाकात के लिए 24 मिनट ही दे दीजिए। आईएएनएस से बातचीत में राउत ने कहा कि हम लोगों ने सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। देश में जिस प्रकार से संविधान खत्म किया जा रहा है, लोकतंत्र की हत्या हो रही है, और वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम हटाए जा रहे हैं, पूरा देश इस चीज से अवगत है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए काम कर रहे हैं। इसीलिए हम सीजेआई से मिलना चाहते हैं, लेकिन, वे मिलना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई के शिवाजी पार्क में भी आंदोलन शुरू हो रहा है, इसे रोक कर दिखाएं।
बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में बांग्लादेश की भागीदारी तय

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की बैठक इस सप्ताह होने जा रही है। बैठक में नेपाल की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुंग शामिल होने की खबर है, जबकि बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ सचिव मंजूर मोर्शेद चौधरी करेंगे। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, गुरुंग तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। सत्ता संभालने के बाद उनकी ये पहली विदेश यात्रा है। नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक वो 12 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे और विभिन्न मंत्री स्तरीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे। मीटिंग से जुड़े एक अधिकारी ने दैनिक को बताया कि बैठक में सदस्य देशों के बीच कई क्रॉस-कटिंग सिक्योरिटी मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि इन मुद्दों की सिफारिश बिम्सटेक के गृह सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अलग-अलग तारीखों पर हुई बैठकों में की गई थी। सिक्योरिटी कोऑपरेशन बिम्सटेक के रीजनल एजेंडा का एक जरूरी हिस्सा रहा है। अगस्त 2018 में काठमांडू में हुए चौथे शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने लॉ एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का अपना इरादा जाहिर किया था। नेताओं ने काउंटरटेररिज्म और ट्रांसनेशनल क्राइम पर सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक जारी रखने का भी फैसला किया। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, मंत्रियों की बैठक से पहले बिम्सटेक गृह सचिव की बैठक होगी। बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) की बैठक 13 अक्टूबर को भारत में आयोजित की जा रही है। सात सदस्यों वाले क्षेत्रीय समूह के गृह मंत्रियों की यह पहली बैठक है। गृह मंत्रियों की मीटिंग 1997 में रीजनल ग्रुप बनने के बाद पहली बार हो रही है, और इसका आयोजन राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में किया गया है। वहीं, बांग्लादेश की ओर से मंजूर मोर्शेद चौधरी तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी यूएनबी ने इसकी जानकारी दी। बैठक में सदस्य देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबले और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, संपर्क और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
समान वेतन और स्थायी नौकरी की मांग को लेकर एएनएम कर्मचारियों ने ब्रजेश पाठक के घर का किया घेराव

लखनऊ। एएनएम महिला कर्मचारियों ने सोमवार को उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। एएनएम कर्मचारियों की ओर से समान काम के लिए समान वेतन और पक्की नौकरी की मांग की गई। उनका आरोप है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में 10 हजार रुपए प्रति महीने की सैलरी पर काम कर रही हैं। आईएएनएस से बातचीत करते हुए एएनएम आरती वर्मा ने कहा, “इको गार्डन में जब हमारी आवाज नहीं सुनी गई तो हम लोग अपनी मांगें लेकर उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर आए हैं। हम लोगों की दो ही मांगें (समान कार्य, समान वेचन और स्थाई नौकरी) हैं। हम लोगों की ओर से धरना देते आज 22 दिन हो गए हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हम लोगों को मजबूर होकर घेराव के लिए यहां आना पड़ा है।” एएनएम आरती वर्मा ने कहा, “हम लोगों को 10 हजार रुपए प्रति महीना वेतन मिलता है। कोई बताए कि 10 हजार रुपए में क्या घर का खर्च चल सकता है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि 10 हजार में कुछ होने वाला नहीं है। हम लोगों की मांग हैं कि जितना वेतन परमानेंट वालों का है, उतना ही हमारा कर दें। परमानेंट वालों के बराबर ही हम लोग भी काम करते हैं। हम लोग अपनी जायज मांगों को लेकर यहां आए हैं। हमारी कोई सुन ही नहीं रहा है।” उन्होंने कहा, “सूबे के 75 जिलों से एएनएम कर्मचारी आई हैं। कुछ महिलाएं तो 15-20 वर्षों से काम कर रही हैं, अभी भी वे संविदा पर ही हैं। क्या उनको परमानेंट नहीं कर देना चाहिए था? एएनएम कर्मचारी मंजिला गौतम ने कहा, “हम लोगों को प्रदर्शन इसलिए करना पड़ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री पहचानते ही नहीं। एएनएम को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी बताया जाता है और उन्हीं को कह रहे हैं कि हम जानते नहीं। अगर वे स्वास्थ्य विभाग के मंत्री होकर नहीं जान रहे हैं तो हम लोगों को कौन जानेगा? हम लोगों की मांग समान काम समान वेतन और नियमितीकरण है। हम लोगों की ओर से बीते 22 दिनों से प्रदर्शन किया जा रहा है, वहां कोई मंत्री नहीं पहुंचा। हमारी आवाज उन तक पहुंचे इसलिए हम लोगों की ओर से उनके आवास का घेराव किया गया है।” एएनएम कर्मचारी रंजना राय ने कहा, “हम लोगों को समान काम का समान वेतन चाहिए और हम लोगों को स्थायी किया जाए।