बोलीविया की ओर भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और आवश्यक दवाइयों की खेप भेजी

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को बताया कि भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और आवश्यक दवाइयों की खेप भेजी है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “ग्लोबल साउथ के एक साझेदार देश की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता को समर्थन देने के लिए आठ मीट्रिक टन जीवनरक्षक और जरूरी दवाइयों की खेप भेजी है। भारत हमेशा एकजुटता और साझा प्रगति के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार रहता है।” बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो इस साल फरवरी में भारत आए थे। नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की थी। बैठक के बाद उपराष्ट्रपति कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। यह मुलाकात इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हुई।” पोस्ट में आगे कहा गया, “दोनों नेताओं ने भारत और बोलीविया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, बहुपक्षीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करने के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया।” बैठक में दोनों पक्षों ने सौर ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटलीकरण, उच्च शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के उपायों पर विशेष रूप से चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने पिछले वर्ष जुलाई में भी दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया को तीन लाख खुराक एमआर (खसरा और रूबेला) वैक्सीन दान की थीं। इनके साथ टीकाकरण के लिए जरूरी अन्य चिकित्सा सामग्री भी भेजी गई थी। बोलीविया में भारत के राजदूत रोहित वाधवाना ने बोलीविया की प्रशासनिक राजधानी ला पाज के एल आल्टो हवाई अड्डे पर आयोजित एक समारोह में इस खेप को औपचारिक रूप से सौंपा था। इस अवसर पर बोलीविया की विदेश मंत्री सेलिंडा सोसा लुंडा, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री मारिया रेने कास्त्रो क्विसिकैंकी और उपमंत्री मैक्स एनरिकेज नावा भी मौजूद थे।
एकता कपूर की चमक कम नहीं हुई, वह समय के साथ बदलना जानती हैं : तेजस्वी प्रकाश

मुंबई। टीवी की दुनिया में अब डेली सोप्स के मुकाबले रियलिटी शोज, गेमिंग शोज और अलग तरह के कंटेंट को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। ऐसे समय में मशहूर प्रोड्यूसर और ‘टेलीविजन की क्वीन’ कही जाने वाली एकता कपूर ने खुद को सिर्फ टीवी सीरियल्स तक सीमित नहीं रखा और रियलिटी शो के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। इस कड़ी में एकता कपूर की तारीफ करते हुए अभिनेत्री तेजस्वी प्रकाश ने कहा कि वह समय के साथ खुद को बदलना जानती हैं। दरअसल, तेजस्वी प्रकाश इन दिनों गेमिंग रियलिटी शो ‘प्लेग्राउंड’ के पांचवें सीजन को लेकर चर्चा में हैं। आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा, ”एकता कपूर हमेशा से टेलीविजन की क्वीन रही हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ टीवी की निर्माता के तौर पर देखना सही नहीं होगा। वह एक बेहतरीन रणनीतिकार होने के साथ-साथ बहुत समझदार बिजनेसवुमन भी हैं। उन्हें पता है कि इस समय दर्शकों के बीच क्या चल रहा है और किस तरह का कंटेंट लोगों को पसंद आ रहा है। इसलिए वह अपने काम को समय की मांग के हिसाब से बदलती रहती हैं।” तेजस्वी ने कहा, ”एकता ने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा है, जो अपने काम करने के तरीके में बदलाव नहीं करना चाहते। ऐसे लोग चाहे उनका तरीका काम करे या न करे, उसी रास्ते पर चलते रहते हैं। इसकी वजह से वे आगे नहीं बढ़ पाते और एक जगह पर ही रुक जाते हैं। समय के साथ खुद में बदलाव करना बेहद जरूरी है और उन्होंने अपने जीवन में इस बात को महसूस किया है।” तेजस्वी ने कहा, “एकता कपूर ने अपनी गलतियों को समझा है और उन गलतियों से सीखने के बाद अपने काम करने के तरीके में जरूरी बदलाव किए हैं। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह समझना जरूरी है कि कब अपने तरीके को बदलने की जरूरत है।” तेजस्वी का एकता कपूर के साथ काम करने का अनुभव भी रहा है। वह एकता कपूर के चर्चित शो ‘नागिन 6’ में नजर आई थीं। रियलिटी शो ‘लॉक अप’ को लेकर भी तेजस्वी ने एकता कपूर की टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा, ”शो के दूसरे सीजन की सफलता से मैं बेहद खुश और गर्व महसूस कर रही हूं। मैं खुद भी ‘लॉक अप’ का हिस्सा रह चुकी हूं। भले ही मेरा जुड़ाव शो से छोटे स्तर पर रहा हो, लेकिन उस शो का हिस्सा बनना और उसके मंच पर मौजूद रहना मेरे लिए बेहद मजेदार अनुभव था।” तेजस्वी ने आखिर में कहा, ”एकता कपूर की पहचान सिर्फ टेलीविजन तक सीमित नहीं है। वह फिल्ममेकर भी हैं और फिल्मों के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं। उनके पास आने वाले समय के लिए कुछ नए और शानदार प्रोजेक्ट्स हैं। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि एकता कपूर की चमक कम हो रही है।
ममता बनर्जी के काफिले पर पथराव, पूर्व सीएम का आरोप-पुलिस के सामने हुआ सब कुछ

बैरकपुर। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोककर उनकी गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके। ममता बनर्जी ने दावा किया कि पुलिस की मौजूदगी में यह सब हुआ है। ममता बनर्जी एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान हलीशहर में पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोक दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने उनकी गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के खिलाफ नारेबाजी भी की। घटना के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि असामाजिक तत्वों ने पुलिस के सामने ही मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। गाड़ी पर हमला इतना जबरदस्त था कि अगर खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा सिर फट जाता। हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। यह क्या हो रहा है? उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पुलिस भाजपा को सुरक्षा दे रही है। ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी, जिस टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं, उसकी शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसी मामले को लेकर इलाके में पहले से तनाव का माहौल था। पूर्व सीएम का काफिला जैसे ही हलीशहर पहुंचा, वहां मौजूद गुस्साई भीड़ ने वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी की गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके। ममता बनर्जी का आरोप है कि इसी दौरान पत्थर और ईंटें भी फेंकी गईं। गौर करने वाली बात यह है कि जब से बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब से टीएमसी नेताओं को निशान बनाया जा रहा है। टीएमसी सांसदों और विधायकों के बाद अब टीएमसी प्रमुख को निशाना बनाया गया है, जिस दौरान यह हमला हुआ, ममता बनर्जी के साथ पार्टी के अन्य सांसद भी मौजूद थे।
दोनों प्रधानमंत्री आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे भारत-बांग्लादेश के कई मसले: दिनेश त्रिवेदी

ढाका। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को पूरा विश्वास है कि पीएम तारिक रहमान और भारत के प्रधानमंत्री मिलकर दोनों देशों के विभिन्न मसलों का हल सुगमता से निकाल लेंगे। त्रिवेदी ने इसकी वजह भी बताई। उन्होंने कहा दोनों ही पीएम जनता के प्रिय हैं। उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ढाका में पत्रकारों से बातचीत में भारत के उच्चायुक्त ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, “मैंने पीएम तारिख रहमान को कई बार भाषण देते सुना है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही वो भी जनता के पीएम है। जब दो नेता मिलते हैं तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है। इसको लेकर नकारात्मकता नहीं, सकारात्मकता का होना जरूरी है।” दैनिक द ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, त्रिवेदी ने ये बातें रविवार को इंडियन वीजा एप्लिकेशन सेंटर (आईवीएसी) के चिल्ड्रेन प्लेइंग एरिया के उद्घाटन समारोह के दौरान कही। उनक यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और बांग्लादेश दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-बांग्लादेश के बीच लंबित मुद्दों, खासकर तीस्ता जल बंटवारा और गंगा जल संधि के नवीनीकरण चर्चा में हैं। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। उन्हें यह निमंत्रण ‘बिम्सटेक’ (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में दिया गया है। ‘बिम्सटेक’ बंगाल की खाड़ी के आसपास और उससे जुड़े क्षेत्रों के सात सदस्य देशों का एक समूह है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके पांच सदस्य दक्षिण एशिया के बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका से हैं। वहीं, दो सदस्य दक्षिण-पूर्व एशिया के म्यांमार और थाईलैंड से हैं। नई दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद ही तारिक रहमान को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भेज दिया गया था। जायसवाल ने कहा, “बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को फरवरी 2026 में पद संभालने के बाद भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया था। जहां तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सवाल है, भारत ने उन्हें बिम्सटेक के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए अलग से आमंत्रित किया है। यह सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह निमंत्रण ब्रिक्स की आउटरीच बैठकों की सामान्य परंपरा के तहत दिया गया है। इसी तरह अन्य क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है।\
सीडब्ल्यूजी 2026: उपलब्धि के बाद पीएम मोदी से मिलने का इंतजार, खिलाड़ियों में उत्साह

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार शाम 4 बजे ‘कॉमनवेल्थ गेम्स 2026’ में देश का मान बढ़ाने वाले भारतीय एथलीट्स से मुलाकात करेंगे, जिसे लेकर खिलाड़ियों में काफी उत्साह नजर आ रहा है। पैरा-एथलीट और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मेंस शॉट पुट एफ57 के सिल्वर मेडलिस्ट शुभम जुयाल ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “जब कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मेरा चयन हुआ, तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे भरोसा था कि भारत को दो मेडल मिलेंगे—एक सोमण राणा को और एक मुझे। कॉमनवेल्थ गेम्स का अनुभव भी मेरे लिए बहुत अच्छा रहा, क्योंकि यह मेरा पहला बड़ा इवेंट था। मैंने इस अनुभव से बहुत कुछ सीखा। मुझे यकीन है कि जो मैंने इस बार सीखा है, वह भविष्य की प्रतियोगिताओं में मेरी मदद करेगा।” उन्होंने कहा, “अनुशासन, निरंतरता और सही इरादा आपको हमेशा मदद करता है। मुझे लगता है कि हमें सरकार से काफी मदद और समर्थन मिला है। अगर आप इस साल टूटे नेशनल रिकॉर्ड्स की संख्या को देखें, तो यह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर शुभम जुयाल कहते हैं, “कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद हमारा शेड्यूल काफी व्यस्त था, और अब मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला है। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा अवसर है, क्योंकि बहुत कम लोगों को अपने देश के प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिलता है। ऐसी उपलब्धि के बाद, यह मुलाकात और भी खास हो जाती है। प्रधानमंत्री को खेलों में भी बहुत दिलचस्पी है।” 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में विमेंस डिस्कस थ्रो की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा कालीरमन ने कहा, “प्रत्येक एथलीट का सपना होता है कि उसे ऐसा अनुभव मिले। हमारे प्रधानमंत्री हर तरह से एथलीट्स का समर्थन करते हैं और हर मामले में हमारा हौसला बढ़ाते हैं। वह समय-समय पर हमारा हाल-चाल भी पूछते रहते हैं। जैसे ही हमने मेडल जीता, उन्होंने हमें बधाई भी दी। उनका तहेदिल से धन्यवाद। पीएम मोदी बहुत विनीत स्वभाव के हैं।” ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में मेंस शॉट पुट एफ57 में गोल्ड मेडल जीतने वाले पैरा-एथलीट सोमन राणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर कहा, “मैं सेना से हूं। आज प्रधानमंत्री से मिलने का मौका पाकर बहुत खुश हूं। कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत के बाद उनसे मिलना और उनका आशीर्वाद पाना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक और उत्साह बढ़ाने वाला रहा है। मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। पीएम हमारा हौसला बढ़ाते रहें। हम देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाह फैला रहीं देशविरोधी ताकतें : सीएम योगी

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आपसी फूट, षडयंत्र के कारण गुलाम हुआ था। क्षेत्र, जाति व भाषा के नाम पर भारत को कमजोर करने वाली ताकतें आज भी फूट डाल रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म षड्यंत्र का माध्यम हो गया है। देशविरोधी ताकतें इसका दुरुपयोग कर भारत के खिलाफ अफवाहें फैला रही हैं। षड्यंत्र के तहत समाज को गुमराह करने करने का प्रयास हो रहा है। सीएम योगी ने रविवार को काकोरी ट्रेन एक्शन के 101वें वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में काकोरी शहीद स्मारक पर आयोजित शताब्दी समारोह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं तिथि है। भारत माता के महान सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाकर चुनौती दी थी कि भारत की धरती गुलामी को हरगिज नहीं बर्दाश्त करेगी। इन क्रांतिकारियों ने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से लेकर 1942 के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन तक संघर्ष की लंबी श्रृंखला खड़ी की थी। अंग्रेज भारत के लोगों की गाढ़ी कमाई लूटकर ब्रिटेन ले जाना चाहते थे, लेकिन इसी स्थान पर 9 अगस्त 1925 को पं. राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों ने खजाने को अपने कब्जे में लेकर आजादी की लड़ाई को नई ऊंचाइयां प्रदान की थीं। मुख्यमंत्री ने क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे काशी में पैदा हुए थे। उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली। अंग्रेजों ने उनकी जागीर को जब्त कर लिया था। शचींद्र नाथ सान्याल भी काशी में पैदा हुए और उन्होंने अंतिम सांस गोरखपुर में ली। पं. रामप्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई। चंद्रशेखर आजाद ने कहा था कि आजाद हमेशा आजाद रहेगा, अंतिम दम तक अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते वह प्रयागराज की धरती पर शहीद हुए। इन क्रांतिकारियों का उद्देश्य भारत मां की आजादी के साथ ही गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर अंग्रेजों को भारत से भगाना और देश को आजाद कराना था। सीएम योगी ने कहा कि महान क्रांतिकारी शचींद्र नाथ बख्शी व मन्मथ नाथ गुप्ता को आजादी के बाद जो सम्मान मिलना चाहिए था, नहीं मिला। इन्हें सजा कराने का पाप वकालत करने वाले तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं ने किया था। जिन लोगों ने आमजन को अपने नायकों, क्रांतिकारियों से दूर रखा, उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी से अन्याय किया। नायकों पर गौरव की अनुभूति का अवसर न देना नौजवान पीढ़ी को आदर्श, गौरव और प्रेरणा से विमुख करने जैसा है। आजादी के बाद जिन लोगों ने सत्ता संभाली, उन लोगों ने क्रांतिकारियों को अपमानित करने का पाप किया। काकोरी के शहीदों के अलावा चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना उदा देवी पासी, अवंती बाई, झलकारी बाई के नाम पर कोई स्मारक न बने, लोग इनका नाम भी न जानने पाएं, इसलिए इन क्रांतिकारियों के नाम पर संस्थाओं का नाम नहीं रखा गया। आजादी के बाद भी इसके लिए लगातार साजिशें की गईं। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने आजादी के नायकों को सम्मान दिया। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां के स्मारक को बढ़ाया गया। काकोरी की घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन नाम देकर क्रांतिकारियों को सम्मान दिया। इन क्रांतिकारियों के नाम पर अब डाक टिकट जारी हो रहे और संस्थाओं के नाम रखे जा रहे हैं। वरना आजादी के बाद एक ही परिवार/खानदान के नाम पर सभी योजनाओं का नामकरण होता था। मुख्यमंत्री ने आमजन का आह्वान किया कि हम सभी क्रांतिकारियों को खोजें। हमारे गांव, क्षेत्र, जनपद आदि में अनेक गुमनाम नायक होंगे, जिन्होंने ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें’ के भाव के साथ आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित किया। आजादी के बाद सत्तालोलुप लोगों ने अपने वैभव को देखा। क्रांतिकारियों को भुला दिया गया, उन्हें पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं दिया गया। देश, समाज के खिलाफ खूब षड्यंत्र हुआ और फिर से बांटने की साजिश प्रारंभ कर दी गई। सीएम ने अपील की कि क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र करें। उनसे जुड़े स्मारकों की मरम्मत-सौंदर्यीकरण से जुड़ें और पुष्पांजलि देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें। क्रांतिकारियों के लिए देश की आजादी की लड़ाई सर्वोपरि थी। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए काकोरी में शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया। एक वर्ष में क्रांतिकारियों की स्मृतियों में अनेक कार्यक्रम किए गए। काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी सम्मान दिया गया है।
यह छात्रों की गूंज नहीं, सत्ता के लिए रैली कर रहे राहुल गांधी’, प्रयागराज के कार्यक्रम पर बिहार के नेताओं का कटाक्ष

पटना। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर बिहार एनडीए के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्र आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। राहुल गांधी छात्रों की रैली में नहीं जा रहे हैं। वह सत्ता पाने के लिए रैली में जा रहे हैं। बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “राहुल गांधी उत्तर प्रदेश घूमने जा रहे हैं, जबकि छात्र झारखंड में धरने पर बैठे हैं। उन्हें झारखंड के मुख्यमंत्री से कहना चाहिए कि जेपीएससी भर्ती परीक्षा को लेकर सीबीआई की जांच कराएं।” उन्होंने निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस छात्र आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। प्रयागराज में भी कांग्रेस राजनीति के लिए यात्रा कर रही है। एम्स से लेकर अनेक पेपर लीक हुए। कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में कभी पेपर लीक पर कानून नहीं बनाया था। यह कानून भाजपा की सरकार ने बनाया है।” बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, “राहुल गांधी छात्रों की रैली में नहीं जा रहे हैं। वह सत्ता पाने के लिए रैली में जा रहे हैं। उनका ध्यान इस बात पर है कि सत्ता कैसे वापस पाई जाए। कांग्रेस पार्टी खुद ही बेरोजगार हो गई है। चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं, इसलिए यह कांग्रेस पार्टी की ओर से आयोजित रैली है।” उन्होंने आगे कहा, “जहां तक छात्रों की चिंताओं की बात है, हमारी सरकारें उनकी बात सुन रही हैं, चाहे वह योगी सरकार हो या मोदी सरकार। गूंज के हिसाब से सरकार काम कर रही है। छात्रों की समस्याओं का निदान किया जा रहा है। साथ ही, छात्रों-युवाओं की भावनाओं की कद्र की जा रही है। उन्हें हर तरीके की मदद के लिए भी सरकार तैयार है।” इसी बीच, राम कृपाल यादव ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन का जिक्र किया और कहा, “झारखंड के छात्रों का आंदोलन गंभीर है और यह छात्रों में असंतोष की भावना को दिखाता है, लेकिन राज्य सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है और उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मेरा मानना है कि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया है। सरकार कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद समेत अन्य पार्टियों के समर्थन से चल रही है। उन्हें इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और छात्रों की समस्याओं को हल करने की दिशा में काम करना चाहिए।” जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा कि कांग्रेस शुरू से युवाओं के खिलाफ रही है। पंजाब में नौजवानों का आंदोलन हो या छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का आंदोलन, कांग्रेस ने उन्हें कुचलने की कोशिश की। अब वह कांग्रेस का चेहरा बदलना चाहते हैं, तो उन्हें प्रायश्चित के साथ-साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि देश का युवा कांग्रेस पर भरोसा करने वाला नहीं है। हाल ही में युवाओं ने वर्तमान के मुद्दों को लेकर आंदोलन किया था और सरकार ने भी समाधान की दिशा में पहल की है, लेकिन कांग्रेस से उम्मीद नहीं की जा सकती है।
रांची छात्र आंदोलन को रैपर सूरज टायलन का समर्थन, सीएम से बोले-हम आपको वोट देंगे, आप सही भविष्य दें

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पेपर लीक और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। रैपर सूरज टायलन भी छात्रों के समर्थन के लिए रांची पहुंचे। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षाओं के मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “झारखंड में जो प्रोटेस्ट चल रहा है। हमारे छात्र जो मांग कर रहे हैं, जैसे कि जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना चाहिए, एग्जाम-रिजल्ट में ट्रांसपेरेंसी आनी चाहिए। छात्रों की इन सभी मांगों को लेकर मैं यहां पर आया हूं। बाकी मेरी पढ़ाई के समय पेपर लीक हो जाते थे। हालांकि उस समय हमारे अंदर इतनी समझ और आत्मविश्वास नहीं था कि ये सब समझ सकें।” रैपर सूरज टायलन ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें इस प्रोटेस्ट के बारे में पता चला था। उन्होंने कहा, “इस प्रोटेस्ट को नेता देवेंद्र नाथ महतो की शुरुआत की थी। बाद में प्रेमनायक ने इसे आगे बढ़ाया, चूंकि जब मुझे इस आंदोलन के बारे में पता चला, तब मैं वाराणसी में था, यह देखकर मुझे लगा कि अब मुझे यहां पर समर्थन के लिए जाना चाहिए। मुझे लगा कि अगर मैं अब नहीं गया, तो मेरा भाई सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है, तो उसके साथ मैं अन्याय करूंगा और मेरा सहयोग ऐसी चीजों में होना बेहद जरूरी है, जिससे मेरे भाई का भविष्य खराब न हो।” सूरज टायलन ने आगे झारखंड को लेकर रैप गाकर सुनाया। उन्होंने कहा, “क्या लगता है, झारखंड में सब ठीक हो रहा है, एजुकेशन सिस्टम चीप हो रहा है और नेता क्रिप हो रहा है। ढंग से एक्जाम देकर घर भी नहीं पहुंचे और देखा कि पेपर लीक हो रहा है।” उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री से बस यही आग्रह है कि सर आप हमारे अपने हो। अगर आप हमारे बारे में नहीं सोचेंगे तो कौन सोचेगा। झारखंड हमारी माटी, आप हमारे अपने हैं। हम युवा आपके भविष्य हैं और आपके हाथों में हमारा भविष्य है। हम आपको वोट देंगे, आप हमको सही भविष्य दें। जो लोग नौकरियां बेच रहे हैं, आप सभी को उनके खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाही करें और छात्रों की मांग को पूरा करें।
हनुमानासन : पैरों, कूल्हों और जांघों की जकड़न करता है दूर, पेल्विक मसल्स के लिए भी खास फायदेमंद

नई दिल्ली। दफ्तर में लगातार डेस्क पर बैठे रहने से कमर में दर्द और पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। योग के अनेक आसनों में से एक हनुमानासन प्रभावी माना जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर का निचला भाग मजबूत और लचीला बनता है। यह आसन हठयोग का अत्यंत प्रभावी और उन्नत श्रेणी का आसन हैं। ऐसी मान्यता है कि इस आसन का नाम भगवान हनुमान के उस विशाल छलांग से लिया गया, जो उन्होंने सीता माता की खोज में लंका जाने के लिए लगाई थी। आयुष मंत्रालय के अनुसार, हनुमानासन (स्प्लिट्स पोज) शरीर के लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने वाला एक उन्नत आसन है। यह आसन शरीर की लचक बढ़ाने में मदद करता है और खासकर पेल्विक मसल्स को ताकत देता है। यह आसन पैरों, कूल्हों और जांघों की जकड़न को खोलता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक शक्ति बढ़ती है, बल्कि मन में एकाग्रता और धैर्य भी आता है। आइए जानते हैं हनुमानासन करने की सही विधि, फायदे और सावधानियां। इस आसन को करने से शरीर में रक्त प्रवाह का संचार होता है, जिन लोगों के शरीर में रक्त प्रवाह सही से नहीं होता, वे इसका रोजाना अभ्यास कर सकते हैं। साथ ही, यह पेट की मांसपेशियों को टाइट बनाता है, अतिरिक्त चर्बी को घटाता है, नितंबों और जांघों की चर्बी को कम करने में यह आसन बहुत फायदेमंद है। हनुमानासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। दाएं पैर को आगे की ओर बढ़ाएं और सीधा रखें, हाथों का सहारा लेकर धीरे-धीरे दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं। अब शरीर के वजन को हाथों से संभालते हुए कूल्हों को नीचे जमीन की तरफ लाएं। दोनों पैर जमीन पर पूरी तरह सीधे और एक सीध में होने चाहिए। संतुलन बनने पर हथेलियों को छाती के आगे जोड़ लें। सबसे पहले जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं। रीढ़ सीधी रखें। दाएं पैर को आगे की ओर सीधा बढ़ाएं। हाथों को जमीन पर टिकाकर सहारा लें। धीरे-धीरे दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं। शरीर का वजन हाथों पर रखें। अब कूल्हों को धीरे-धीरे नीचे जमीन की तरफ ले जाएं। दोनों पैर जमीन पर पूरी तरह सीधे और एक सीध में हों। जब संतुलन बन जाए तो हाथों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें। 10-15 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। जांघ या घुटने में चोट होने पर इसे न करें। जबरदस्ती या झटके के साथ पैर फैलाने से बचें। शुरुआती लोग अभ्यास के लिए योगा ब्लॉक या तकिए का सहारा लें।
ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों को तेल कंपनियों ने किया खारिज, कहा- जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

नई दिल्ली। देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शुक्रवार को ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि देश भर में की गई व्यापक जांच में ईंधन में नमी या क्लोराइड सम्मिश्रण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीएमएस) यानी ई20 की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के भीतर है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड की मात्रा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पूरे आपूर्ति तंत्र (सप्लाई चेन) में अतिरिक्त और गहन परीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के नतीजों में कहीं भी ईंधन के दूषित होने का प्रमाण नहीं मिला और सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। कंपनियों ने कहा कि ईंधन की गुणवत्ता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। अगर किसी ऐसी समस्या की आशंका होती है जो वाहनों के प्रदर्शन या उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है, तो उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाते हैं। कंपनियों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के लिए क्लोराइड की मात्रा को लेकर कड़े मानक निर्धारित किए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी आपूर्ति शृंखला में उच्च स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। कंपनियों ने आगे बताया कि क्लोराइड का परीक्षण देश भर में विभिन्न स्तरों पर किया जाता है, जिसमें रिफाइनरी, डिस्टिलरी, डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप शामिल हैं। इस बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की गुणवत्ता हर स्तर पर तय मानकों के अनुरूप बनी रहे। इसके अलावा ईंधन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 8 से 12 बार पानी की मिलावट और घनत्व की जांच की जाती है। कई स्थानों पर मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब भी तैनात की गई हैं। साथ ही ईंधन के नमूनों की स्वतंत्र परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी जांच कराई जाती है। तेल कंपनियों ने कहा कि सप्लाई चेन के प्रत्येक स्तर पर लागू इस मजबूत और बहुस्तरीय परीक्षण प्रणाली ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप है। तेल विपणन कंपनियों ने यह भी बताया कि देशभर की रिफाइनरियों से यादृच्छिक रूप से चुने गए 100 से अधिक अतिरिक्त पेट्रोल नमूनों की क्लोराइड जांच कराई गई। परीक्षण में सभी नमूनों में क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) या उससे कम पाया गया, जो निर्धारित सीमा के भीतर है। कंपनियों के अनुसार, यह परिणाम दर्शाते हैं कि भारत की रिफाइनिंग और ईंधन वितरण प्रणाली में लागू गुणवत्ता नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं और ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सामने आई आशंकाओं का कोई आधार नहीं है। तेल कंपनियों ने भरोसा जताया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही है।