बिहार : पूर्वी चंपारण में कथित भूमाफिया के ठिकाने पर छापेमारी, 27 लाख नकद और हथियार बरामद

मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस ने भूमाफिया और आपराधिक गतिविधियों में कथित रूप से संलिप्त राकेश शर्मा के ठिकाने पर सोमवार की देर रात छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकदी, हथियार, कारतूस, शराब और जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में करीब 27 लाख रुपये नकद, दो राइफल, दो पिस्टल और लगभग 100 कारतूस जब्त किए गए हैं। मौके से राकेश शर्मा के बेटे साहिल शर्मा को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्वी चंपारण जिले के छतौनी थाना क्षेत्र में की गई। छापेमारी के लिए तीन पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) के नेतृत्व में पांच थानों की पुलिस टीम गठित की गई थी। टीम ने देर रात राकेश शर्मा के घर पर पहुंचकर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कई आपत्तिजनक सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो राइफल और दो पिस्टल के अलावा करीब 100 कारतूस जब्त किए। इसके साथ ही छह बोतल ब्रांडेड शराब भी बरामद की गई है। पुलिस को तलाशी के दौरान जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित 65 से अधिक दस्तावेज भी मिले हैं। इन दस्तावेजों से जुड़ी जमीन का अनुमानित मूल्य 15 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्री और अन्य संबंधित मामलों की जानकारी जुटाई जा सके। कार्रवाई के दौरान राकेश शर्मा का बेटा साहिल शर्मा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, राकेश शर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियारों और कारतूसों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया जाता था तथा जमीन से जुड़े दस्तावेज किन संपत्तियों से संबंधित हैं। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद नकदी, हथियारों, शराब और जमीन के दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
2024 से अब तक हुए चुनावों को रद्द करने के साथ ही पीएम मोदी को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए: पप्पू यादव

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन, चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका और राहुल गांधी द्वारा पर चाय पर विपक्षी नेताओं को बुलाए जाने पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और शिवसेना यूबीटी के संजय राउत ने टिप्पणी की। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “देश में अब चुनाव आयोग का ही मुद्दा नहीं बचा है। 2024 से अब तक जितने चुनाव हुए, उसको रद्द किया जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी बिना जनता के वोट के प्रधानमंत्री बने हैं, इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। देश की जनता के लिए अब लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था नहीं बची है। खान-पान पर 8 फीसदी महंगाई बढ़ गई है। देश की सारी संस्था कैद हैं, इसलिए हमारे पास सिर्फ सुप्रीम कोर्ट उम्मीद की किरण है। अगर सुप्रीम कोर्ट ही 140 करोड़ की जनता की बात न सुने और कहे कि नियम से अपनी बात रखिए। वहीं, जब चंद्रचूर्ण भारत के मुख्य न्यायाधीश थे, तब प्रधानमंत्री उनके घर जाते थे। देश की 65 फीसदी जनता की आवाज विपक्ष है।” पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा, “हालात और कल राहुल गांधी की अपील को देखते हुए ‘जेन जी’ के साथ पूरा देश सड़कों पर उतर आया था। मैं कांग्रेस की बात नहीं कर रहा, सड़कों पर ‘जेन जी’ के लोग भरे हुए थे। कांग्रेस कार्यकर्ता शायद ही कहीं दिखे, और जो दिखे भी, वे अकेले-अकेले ही नजर आए। असली कांग्रेसी कार्यकर्ता तो घरों में ही रहे। जो चीज साफ दिखी, वह थी विपक्ष की एकता, लेकिन वहां सिर्फ विपक्ष के नेता ही नहीं थे। आम लोग भी मौजूद थे और यह राहुल गांधी के संघर्ष का ही नतीजा है। कल पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सामने नहीं आए, लेकिन लोग इस मकसद को पूरा करने के लिए आगे आए, यहां तक कि अपने बच्चों और परिवार वालों को भी साथ लेकर आए।” शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, “राहुल गांधी ने हम सबको बुलाया है, सबसे पहले बात होगी, चाय पर बुलाया है, आगे की दिशा क्या है, वो तय होगी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर संजय राउत ने कहा, “रात के अंधेरे में हमको जाना पड़ा, इतनी भीड़ थी, पांच घंटे हम सड़क पर थे। उसमें कुछ खामियां होंगी, तो दुरुस्त हो जाएंगी। इसमें भाजपा को इतनी नाचने की जरूरत नहीं है। हम भी याचिकाकर्ता हैं और भी लोग हैं। सुप्रिया सुले, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव सहित बहुत याचिकाकर्ता हैं।
सुप्रीम कोर्ट भर्ती 2026: सीनियर पर्सनल असिस्टेंट के 65 पदों पर निकली वैकेंसी, 20 अक्टूबर से शुरू होंगे आवेदन

नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (एससीआई) में नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सीधी भर्ती अभियान के तहत सीनियर पर्सनल असिस्टेंट (ग्रुप ‘बी’ नॉन-गजेटेड पद) की कुल 65 संभावित रिक्तियों को भरने के लिए उम्मीदवारों से आवेदन एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आमंत्रित किए हैं। सीनियर पर्सनल असिस्टेंट के 65 पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 20 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इस पोस्ट पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि की रात 11.55 बजे तक अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से डिग्री के साथ 110 शब्द प्रति मिनट की गति के साथ शॉर्टहैंड (अंग्रेजी) में दक्षता और 40 शब्द प्रति मिनट की टाइपिंग गति के साथ कंप्यूटर चलाने का ज्ञान होना चाहिए। आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले अभ्यर्थियों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट, शॉर्टहैंड (अंग्रेजी) टेस्ट, कंप्यूटर पर टाइपिंग स्पीड टेस्ट, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 47,600 से 1,51,100 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वहीं, ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट 7 दिसंबर 2026 को आयोजित होने की संभावना है। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो सामान्य/अनारक्षित के लिए 1,500 रुपए और बैंक शुल्क एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर)/भूतपूर्व सैनिक/दिव्यांग के लिए 750 और बैंक शुल्क तय किया गया है।
राजनाथ सिंह ने की चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री से मुलाकात, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री कारेल हावलीचेक के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। कारेल चेक गणराज्य के उद्योग एवं व्यापार मंत्री भी हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ उनकी यह महत्वपूर्ण वार्ता मंगलवार को नई दिल्ली में हुई। इस उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा उद्योग के क्षेत्र में जारी सहयोग की समीक्षा की। समीक्षा के साथ-साथ रक्षा उद्योग में सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई गई है। इस दौरान भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग के सभी प्रमुख पहलुओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग और विभिन्न संयुक्त उद्यमों की सफल स्थापना का स्वागत किया है। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को नई गति देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति के माध्यम से भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस पहल का उद्देश्य भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण को प्रोत्साहित करना और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। बैठक में क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता स्वीकार की। उन्होंने कहा कि भारत और चेक गणराज्य के संबंध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ-साथ आपसी विश्वास और सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भी दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने माना कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर प्रयास करना जरूरी है। गौरतलब है कि चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री कारेल हावलीचेक चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान वह विभिन्न मंत्रालयों, व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी यात्रा के कार्यक्रम में बेंगलुरु और मुंबई के विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा भी शामिल है। इस यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति भारत और चेक गणराज्य के बीच औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
राहुल गांधी और उनके समर्थकों को विरोध प्रदर्शन के दौरान खाने का अपमान नहीं करना चाहिए : कुलजीत चहल

नई दिल्ली। मंडी हाउस के पास बाराखंबा रोड पर इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शनकारियों द्वारा खाने का कचरा छोड़ने के बाद, एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने मंगलवार को सफाई अभियान चलाया। उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी और उनके समर्थकों को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘रोटी’ और उसे उगाने वाले किसानों का अपमान नहीं करना चाहिए। सड़क साफ करते हुए एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा, “यह कांग्रेस द्वारा फैलाया गया कचरा है। उन्हें समझना चाहिए कि विरोध प्रदर्शन करते समय सफाई भी करनी चाहिए। उन्होंने नेपाल दूतावास और ईरान दूतावास के बाहर गंदगी फैलाई है।” इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च के बाद मंगलवार को नई दिल्ली नगर परिषद के अध्यक्ष ने मंडी हाउस के पास एक सफाई अभियान शुरू किया, जहां उन्हें एनडीएमसी कर्मचारियों के साथ झाडू से सड़क साफ करते और कचरे के ढेर इकट्ठा करते देखा गया। उन्होंने कूड़े में फेंकी हुई रोटी का एक टुकड़ा दिखाते हुए आरोप लगाया, “उन्होंने रोटी के पैकेट फेंक दिए हैं। उन्होंने उन खाद्य पैकेटों का अपमान किया है जिनसे किसी का पेट भर सकता था। इलाके की सफाई करते समय मुझे कूड़े में हजारों रोटियां पड़ी मिलीं। यह अनाज उगाने वाले किसान और रोटी बनाने वाले व्यक्ति दोनों का अपमान है।” उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति इसे बेलता है, दूसरा इसे पकाता है, और तीसरा व्यक्ति गरीबों के खाने के साथ खेलता है। वह तीसरा व्यक्ति राहुल गांधी हैं, जो गरीबों के खाने के साथ खेल रहे हैं।” चहल ने आगे कहा कि बाराखंबा रोड पर आने वाले सभी लोग इस व्यवहार से परेशान थे, जिनमें जगह की सफाई करने वाले लोग, विदेशी प्रतिनिधि और पास के स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चों के माता-पिता शामिल थे। चहल ने कहा, “आम आदमी पार्टी, राहुल गांधी और मुख्य न्यायाधीश ने नई दिल्ली के लोगों को परेशान करना और असुविधा पैदा करना अपना दैनिक एजेंडा बना लिया है। यह वोट चोरी का मामला नहीं है। जनता ने इन लोगों को नकार दिया है। वे अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “जब वे तमिलनाडु या तेलंगाना में चुनाव जीतते हैं, तो वे एसआईआर का मुद्दा नहीं उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “लेकिन जब वे चुनाव हार जाते हैं और जनता उन्हें नकार देती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे और एक विकसित भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करने का विकल्प चुनती है, तो वे सड़कों पर उतर आते हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक हथकंडों के कारण सभी लोग परेशान हो रहे हैं।
कोयला आपूर्ति में सुधार से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, 18 मिलियन टन से अधिक स्टॉक उपलब्ध

नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश के कोयला आधारित बिजलीघरों में कोयला भंडार 29 सितंबर 2026 से लगातार 18 मिलियन टन से ऊपर बना हुआ है। मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर में कोयला आपूर्ति मजबूत होने से भंडार में कमी आने की रफ्तार भी काफी धीमी पड़ गई है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, 29 सितंबर 2026 को बिजलीघरों में कोयले का भंडार 18.932 मिलियन टन था, जो 10 अक्टूबर 2026 को 18.205 मिलियन टन दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि बिजलीघरों की दैनिक खपत के मुकाबले कोयला आपूर्ति लगभग बराबर बनी हुई है। मंत्रालय ने कहा कि जिन बिजलीघरों का कोयला स्टॉक संवेदनशील स्तर पर है, उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता के अनुसार विभिन्न संयंत्रों के बीच कोयले का पुनर्वितरण भी किया जा रहा है ताकि बिजली उत्पादन बिना बाधा जारी रहे। अक्टूबर में दो अवसर ऐसे भी रहे जब कोयला भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2 अक्टूबर को स्टॉक में 0.024 मिलियन टन और 10 अक्टूबर को 0.017 मिलियन टन की वृद्धि हुई। सरकार के अनुसार, सितंबर की तुलना में अक्टूबर में भंडार घटने की गति काफी कम हुई है। सितंबर 2026 में पूरे महीने के दौरान कोयला भंडार लगभग 7.28 मिलियन टन घटा था, यानी औसतन 0.24 मिलियन टन प्रतिदिन की कमी आई थी। इसके मुकाबले अक्टूबर के पहले 10 दिनों में कुल मिलाकर केवल 0.56 मिलियन टन की कमी हुई, जो औसतन 0.06 मिलियन टन प्रतिदिन है। इस सुधार का प्रमुख कारण कोयला ढुलाई में तेजी रही है। 1 से 10 अक्टूबर 2026 के दौरान बिजली क्षेत्र के लिए औसतन 469 रेक प्रतिदिन लोड किए गए, जबकि सितंबर में यह औसत 426 रेक प्रतिदिन था। यानी इसमें लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अक्टूबर में दैनिक रेक लोडिंग 447 से 482 रेक के बीच रही। इसके परिणामस्वरूप बिजली क्षेत्र को वास्तविक कोयला आपूर्ति बढ़कर 2.49 मिलियन टन प्रतिदिन हो गई, जबकि सितंबर में यह 2.21 मिलियन टन प्रतिदिन थी। मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर के अधिकांश दिनों में वास्तविक आपूर्ति तय लक्ष्य से अधिक रही और 10 में से 9 दिनों में आपूर्ति योजना से ज्यादा कोयला पहुंचाया गया। कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), एससीसीएल, रेल मंत्रालय और बिजली क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है ताकि कोयले की ढुलाई और आपूर्ति सुचारू बनी रहे तथा ताप बिजलीघरों में पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहे। मंत्रालय ने कोयले के परिवहन में सहयोग के लिए भारतीय रेलवे के प्रयासों और पेशेवर प्रतिबद्धता की भी सराहना की है।
ऑस्ट्रेलिया: सिडनी में सामान्य से 10 डिग्री ज्यादा रहेगा तापमान, आग को लेकर अलर्ट

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया गया। जंगलों में आग लगने के बढ़ते खतरे को देखते हुए पूर्ण अग्नि प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को सिडनी के पश्चिमी हिस्सों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। गर्म और शुष्क मौसम के साथ गरज-चमक वाले तूफानों की आशंका ने आग का खतरा और बढ़ा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के ग्रामीण अग्निशमन विभाग ने ग्रेटर सिडनी और ग्रेटर हंटर क्षेत्रों में पूर्ण अग्नि प्रतिबंध लागू किया है। इस दौरान खुले में आग जलाने, ठोस ईंधन से चलने वाले बारबेक्यू और ग्राइंडिंग तथा वेल्डिंग जैसी कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। मौसम विभाग के अनुसार यह कई महीनों में सबसे गर्म दिनों में से एक हो सकता है। यदि तापमान 37 डिग्री तक पहुंचता है, तो यह अक्टूबर के इस समय के औसत तापमान से 10 से 11 डिग्री अधिक होगा। सिडनी में इससे पहले फरवरी में इतना अधिक तापमान दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूकैसल के उत्तर से वोलोंगोंग तक के इलाकों में तापमान 34 से 36 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। दोपहर बाद मौसम में बदलाव के साथ तेज और नुकसान पहुंचाने वाली हवाएं चल सकती हैं। न्यू साउथ वेल्स ग्रामीण अग्निशमन सेवा के आयुक्त ट्रेंट कर्टिन ने चेतावनी दी कि राज्य के बड़े हिस्से में गंभीर गरज-चमक वाले तूफान आ सकते हैं, लेकिन इनसे पर्याप्त बारिश होने की संभावना नहीं है। ऐसे में ‘ड्राई लाइटनिंग’ (सूखी आकाशीय बिजली) गिरने से आग लगने का खतरा बना हुआ है। सूखी बिजली उस स्थिति को कहा जाता है जब गरज-चमक वाले बादलों से बिजली गिरती है, लेकिन बारिश जमीन तक नहीं पहुंच पाती है या इतनी कम होती है कि आग बुझाने में मदद नहीं कर पाती। ऐसी परिस्थितियों में बिजली गिरने से जंगलों और घास के मैदानों में आग भड़क सकती है। कर्टिन ने लोगों से खुले स्थानों पर आग या ज्वाला पैदा करने वाली गतिविधियों से बचने की अपील की। उन्होंने बताया कि अनुकूल परिस्थितियों के कारण इस साल अग्निशमन विभाग जंगलों में आग का खतरा कम करने के लिए पहले के वर्षों की तुलना में अधिक नियंत्रित आग प्रबंधन गतिविधियां कर पाया है। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया की संघीय आपातकालीन प्रबंधन मंत्री क्रिस्टी मैकबेन ने ऑसअलर्ट आपातकालीन चेतावनी प्रणाली के विस्तार पर जोर दिया। इस प्रणाली के तहत आपात स्थिति में प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद संगत मोबाइल फोन पर अलार्म बजता है और संदेश भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल विक्टोरिया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया ने इस प्रणाली को अपनाया है। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में सितंबर के रिकॉर्ड गर्म महीनों में से एक रहने के बाद सामने आया है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में देश के सभी राज्यों का औसत तापमान अपने पांच सबसे गर्म सितंबर महीनों में शामिल रहा।
हर मिनट 4 महिलाओं को हो रहा ब्रेस्ट कैंसर, बचाव के लिए रोजमर्रा की इन आदतों में करें सुधार

नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर आज दुनियाभर में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक बड़ी चिंता बन चुका है। हर मिनट 4 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है जबकि हर मिनट एक महिला की इस बीमारी से मौत हो जाती है। इस बीमारी के मामले लगातार लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यही वजह है कि अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के जोखिम, बचाव और समय पर पहचान के महत्व के बारे में बताया जा सके। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें स्तन की असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। इसकी शुरुआत आमतौर पर दूध बनाने वाले लोब्यूल्स या दूध की नलिकाओं से होती है। अगर समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज न हो, तो कैंसर आसपास के ऊतकों, लिम्फ नोड्स और शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकता है। ऐसी स्थिति में बीमारी गंभीर और जानलेवा हो सकती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अगर ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो इलाज के बेहतर नतीजे मिलने और मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में अनुमानित 24 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला और करीब 6 लाख 94 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के लगभग हर देश में महिलाओं को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करने के लिए कुछ जरूरी आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी है। सबसे पहले धूम्रपान से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। धूम्रपान सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदायक है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए सिगरेट, बीड़ी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाना बेहतर है। इसके साथ ही शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। रोजाना टहलना, योग करना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। स्तन में नई गांठ, स्तन के आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या निप्पल से असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच कराना जरूरी है। किसी भी उम्र में ऐसे बदलावों को अनदेखा न करें।
बिहार: थाने में होमगार्ड जवान की गोली लगने से मौत, जांच में जुटी पुलिस

आरा। बिहार के भोजपुर जिले में संदेश थाना परिसर में रविवार रात गोली लगने से 25 वर्षीय होमगार्ड जवान की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, गोली सहकर्मी की सर्विस राइफल से चली थी। पुलिस ने राइफल बरामद कर ली है और घटना को लेकर हादसा तथा हत्या, दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है। मृतक की पहचान सहार थाना क्षेत्र के गुलजारपुर गांव निवासी मोनल कुमार राय के रूप में हुई है। बताया गया कि रविवार रात करीब 10 बजे संदेश थाना परिसर में गोली चलने की घटना हुई। गोली लगने के बाद जवान को इलाज के लिए ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने बताया कि जवान की मौत गोली लगने से हुई है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और एफएसएल की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराई गई और उसकी वीडियोग्राफी भी की गई है। एसपी ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गोली गलती से चली थी या जानबूझकर फायर किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आएगी। उन्होंने कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, जिस जवान की सर्विस राइफल से गोली चली थी, उसकी राइफल बरामद कर ली गई है। घटना के बाद वह जवान कुछ देर तक थाना परिसर में मौजूद था, लेकिन बाद में वहां से चला गया। पुलिस उसके परिजनों के संपर्क में है और उसके सामने आने के बाद उसका पक्ष भी लिया जाएगा। परिजनों की ओर से घटना को हत्या बताए जाने के सवाल पर एसपी ने कहा कि यह जांच का विषय है कि मामला हत्या का है या दुर्घटनावश गोली चलने का। एसपी ने कहा कि मृतक के परिवार को होमगार्ड के प्रावधानों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। तत्काल सहायता योजना के तहत राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा आश्रितों को दो वर्ष तक दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। ऑन-ड्यूटी मृत्यु पर मिलने वाले अन्य मुआवजे और सुविधाओं का लाभ भी नियमानुसार परिजनों को दिया जाएगा।
अराजकता से बाज आए कांग्रेस, वरना जो बचा है वह भी गंवा देगी : सीएम योगी

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। सोमवार को मीडिया से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी। मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।