राहुल गांधी के दिल्ली मार्च में गुंडागर्दी और अहंकार का खुला प्रदर्शन: विजयेंद्र

बेंगलुरु। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने इस दौरान अहंकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनादर का प्रदर्शन किया। विजयेंद्र ने कहा कि इस घटनाक्रम ने संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति कांग्रेस के सम्मान पर सवाल खड़े किए हैं। विजयेंद्र ने एक बयान में विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का कुर्ता पकड़कर उन्हें पीछे भीड़ में धकेल दिया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को कोहनी मारने और एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने की खबरों का भी जिक्र किया। भाजपा नेता ने इस घटनाक्रम को “गुंडागर्दी, अहंकार और चाटुकारिता का खुला प्रदर्शन” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सामने आए दृश्यों से राहुल गांधी की असहिष्णुता और विशेषाधिकार की भावना जाहिर होती है। विजयेंद्र ने कहा कि राहुल गांधी के व्यवहार में पार्टी नेताओं की गरिमा, निर्वाचित मुख्यमंत्री के पद और पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति कोई खास सम्मान दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा, “यह वही सत्तावादी मानसिकता है, जिसे भारत ने पांच दशक पहले आपातकाल के दौरान देखा था। उस समय उनकी दादी की सरकार ने लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं को कुचल दिया था और संस्थाओं को अपने अधीन करने की कोशिश की थी।” विजयेंद्र ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए राहुल गांधी के व्यवहार की तुलना उस दौर से की। भाजपा नेता ने संवैधानिक संस्थाओं के प्रति कांग्रेस के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक निराशा को न्यायपालिका पर दबाव बनाने के प्रयास में बदलने की कोशिश कर रही है। विजयेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से कथित तौर पर मुलाकात से इनकार किए जाने के बावजूद कांग्रेस नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की भी आलोचना की। उन्होंने इस कवायद के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस मामले से संबंधित सौंपे गए याचिका-पत्र को कथित तौर पर 14 खामियों के साथ वापस कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक नाटकबाजी का मंच नहीं है और संविधान को किसी एक विशेषाधिकार प्राप्त राजनीतिक परिवार की चुनावी निराशा के सामने बंधक नहीं बनाया जा सकता।” विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व संवैधानिक संस्थाओं को पार्टी के विस्तार के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता या परिवार संविधान और कानून से ऊपर नहीं है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का लोकतंत्र किसी एक राजनीतिक परिवार की महत्वाकांक्षाओं से कहीं बड़ा है। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सत्तावादी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं और उनकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी की याचिका पर मंगलवार को नहीं होगी सुनवाई, सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल नहीं

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 11 नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 13 अक्टूबर के लिए जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट में राहुल गांधी की याचिका शामिल नहीं हुई है। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 कमियां पाई हैं। इन कमियों को दूर करने के बाद ही यह मामला सुनवाई के लिए लिस्ट हो सकेगा। रजिस्ट्री के अनुसार, याचिका में कई तकनीकी और दस्तावेजी खामियां हैं। इनमें लोगों को नाम से प्रतिवादी बनाना, पुराने फैसले की कॉपी न लगाना और 9 याचिकाकर्ताओं का वकालतनामा न होना शामिल है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की धुंधली कॉपी दी गई है और कोर्ट को 220 रुपए कोर्ट फीस कम मिली है। रजिस्ट्री ने साफ कहा है कि धुंधले दस्तावेज और बाकी कमियों को ठीक करने के बाद ही केस को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी की कानूनी टीम ने भारतीय चुनाव आयोग की अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल की थी। याचिका को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज कर लिया गया था। यह याचिका 12 अक्टूबर को शाम 4:37 बजे फाइल की गई थी। यह याचिका अकेले राहुल गांधी की नहीं, बल्कि विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी की जिम्मेदारी अधिवक्ता प्रसन्ना एस. की थी। याचिका में कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया था। इनमें पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई), जबकि अन्य तीन प्रतिवादी चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी थे। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने कल यानी मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को अपने आवास पर चाय के लिए बुलाया है। कल दोपहर इंडिया गठबंधन के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसके बाद चाय का कार्यक्रम रखा गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईसीसीसी का किया निरीक्षण

नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रदूषण की निगरानी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और वायु गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ पांच सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों की शुरुआत की। इसके अलावा, 13 नए कंटीन्यूअस एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों का उद्घाटन भी किया गया। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों की सटीकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सहयोग से दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ लगातार काम कर रही है। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दिल्ली अब इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदूषण से संबंधित परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में एक अहम उपलब्धि बताया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की एक बैठक में दिल्ली सरकार की ओर से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को निर्धारित समय-सीमा से पहले इस केंद्र को शुरू करने के लिए बधाई दी। यादव ने कहा कि दिल्ली और पूरे एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए सबसे पहली आवश्यकता वायु गुणवत्ता सूचकांक की सटीक जानकारी हासिल करना है। इसके लिए एनसीआर के अधिकारियों को पांच किलोमीटर के अंतराल पर वायु गुणवत्ता सूचकांक मॉनिटरिंग उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि वायु गुणवत्ता की अधिक सटीक जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए सभी लोगों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। सरकार ने इस दिशा में अभियान शुरू किया है और नागरिकों से सहयोग की अपील की है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग व्यापक दिशानिर्देशों के तहत इसे संचालित करता है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से गलत नाम हटाने की मांग की थी, लेकिन अब सूची में सुधार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताना उचित नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली की जनता को ऐसी सरकार चुनने के लिए धन्यवाद दिया, जो उनके अनुसार, पहले दिन से ही राजधानी के विकास के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें प्रदूषण के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर आरोप लगाती रही थीं। मल्होत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने जलभराव और प्रदूषण जैसी समस्याओं पर काम शुरू किया है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का संचालन इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

नवरात्र : पश्चिम बंगाल में हैं सर्वाधिक शक्तिपीठ, तांत्रिक साधना के लिए भी माना जाता है प्रमुख केंद्र

कोलकाता। देशभर में धूमधाम से नवरात्र का पर्व मनाया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के मंदिरों में जाकर उनके दर्शन कर पूजन-अर्चन करते हैं। पश्चिम बंगाल में माता के सबसे अधिक शक्तिपीठ हैं, जहां बड़ी श्रद्धा के साथ श्रद्धालु मां के दर्शन करने जाते हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक में देवी कपालिनी का मंदिर है। यहां माता सती की बायीं एड़ी गिरी थी। यहां मां को भीमरूपा (वर्गा भीमा) के रूप में पूजा जाता है। यहां भगवान शिव ‘सर्वानंद’ रूप में विराजमान हैं। ‘कपालिनी’ का अर्थ मुंड है कि वह जो मुंड या कपाल (खप्पर) धारण करती हैं। मां कपालिनी की उपासना से भक्तों को साहस, शक्ति, और सभी प्रकार के भय, संकट तथा नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। हुगली जिले के रत्नावली शक्तिपीठ में मां देवी कुमारी का मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता सती का दायां कंधा गिरा था। यहां मां को ‘कुमारी’ या ‘आनंदमयी’ नाम से पूजा जाता है। यहां भगवान शिव ‘भैरव’ के रूप में विराजमान हैं। मुर्शीदाबाद जिले के किरीटकोण ग्राम में किरीटेश्वरी शक्तिपीठ है, यहां मां विमला देवी का मंदिर है। यहां देवी सती का मुकुट गिरा था। इस शक्तिपीठ के साथ भगवान शिव का संभर्ध्व (संर्त) या काल भैरव रूप जुड़ा हुआ माना जाता है। विमला देवी का बीज मंत्र ‘ॐ ह्रीं विमलायै नमः’ है। जलपाईगुड़ी जिले के बोडा मंडल में सालबाढ़ी गांव में मां भ्रामरी देवी का मंदिर है। यहां देवी सती का बायां पैर गिरा था। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी ‘भ्रामरी’ और उनके साथ भैरव ‘ईश्वर’ स्वरूप में विराजमान हैं। तीस्ता नदी के घने जंगलों के बीच मां भ्रामरी का शांत मंदिर है। मां भ्रामरी को कालिका या भद्रकाली का ही उग्र एवं करुणामय स्वरूप माना गया है, जो काले रंग की भ्रमरों (मधुमक्खियों) से घिरी रहती हैं। वर्धमान जिले के केतुग्राम इलाके में बहुला देवी शक्तिपीठ है। यहां माता सती का बायां हाथ गिरा था। इस शक्तिपीठ में माता सती की पूजा ‘मां बहुला’ के रूप में और भगवान शिव की पूजा उनके ‘भीरुक’ (सर्वसिद्धिदायक) भैरव रूप में की जाती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें असीम शांति व समृद्धि मिलती है। वर्धमान जिले के उजानी गांव में मंगल चंद्रिका माता शक्तिपीठ है। यहां देवी सती का दाहिनी कलाई (या हाथ का हिस्सा) गिरी थी। इस शक्ति पीठ में मां दुर्गा के स्वरूप देवी ‘मंगल चंडी’ की पूजा की जाती है, और यहां के भैरव (शिव) को ‘कपिलांबर’ कहा जाता है। मान्यता है कि देवी मंगल चंद्रिका की आराधना से घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, उन्नति और सभी प्रकार के संकटों से रक्षा होती है। यहां तांत्रिक साधना और विशेष अनुष्ठान भी किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पापहर नदी के तट पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक वक्रेश्वर शक्तिपीठ है। यहां देवी सती का भ्रूमध्य यानी भौंहों के बीच का भाग या उनका ‘मन’ गिरा था। यहां मां को ‘महिषासुरमर्दिनी’ और भगवान शिव को ‘वक्रनाथ’ के रूप में पूजा जाता है। बीरभूम के नलहाटी में स्थित नलहाटी शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती का कंठ (गला) या उदर नली गिरी थी। यहां मां को ‘कालिका’ और भैरव की ‘योगीश’ रूप में पूजा की जाती है। मन्दिर के गर्भगृह में माता के मुख के ठीक नीचे कंठ (नाला) का स्थान है। यहां एक अनोखी मान्यता है कि माता के गले में कितना भी जल अर्पित किया जाए, वह न तो कभी भरता है और न ही सूखता है, बल्कि जल निगलने जैसी आवाज सुनाई देती है। बीरभूम जिले के लाभपुर के पास फुल्लारा देवी शक्तिपीठ है। 51 शक्तिपीठों में से एक इस शक्तिपीठ को अट्टहास शक्तिपीठ भी कहा जाता है। यहां माता सती का निचला होठ गिरा था। यहां माता को ‘फुल्लरा’ और भगवान शिव ‘विश्वेश’ के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर में मूर्ति के स्थान पर लगभग 15 से 18 फीट लंबी एक विशाल प्राकृतिक शिला (पत्थर) की पूजा की जाती है, जिसे माता का स्वरूप माना जाता है। वीरभूम जिले में सैंथिया शहर में स्थित नंदीपुर शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी सती का कंठहार (गले का हार) गिरा था। इस मंदिर में माता सती को ‘नंदिनी’ और भगवान शिव को ‘नंदिकेश्वर’ (भैरव) के रूप में पूजा जाता है। यहां मां की मूर्ति एक बड़े वटवृक्ष के नीचे कछुए के आकार की सिंदूर लेपित चट्टान के रूप में विद्यमान है, जिस पर चांदी का मुकुट और सोने की तीन आंखें सुशोभित हैं। वर्धमान जिले के क्षीरग्राम में युगाधा शक्तिपीठ स्थित है। यहां देवी सती का दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। यहां की अधिष्ठात्री (मुख्य) देवी को ‘युगाद्या’ (भूतधात्री) और भगवान शिव (भैरव) को ‘क्षीर कंठक’ (क्षीरखंडक) के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि देवी की असली प्रतिमा मंदिर के पास स्थित ‘क्षीरडिघी’ नामक पवित्र तालाब के जल में निवास करती है। कोलकाता में स्थित कालीघाट शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध धाम है। यहां माता सती के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था। यहां देवी को ‘कालिका’ और भैरव को ‘नकुशील’ (नकुलेश्वर) के रूप में पूजा जाता है। यहां मां कालिका की अनूठी प्रतिमा स्थापित है, जिसके तीन विशाल नेत्र, चार हाथ और सोने से मढ़ी हुई लंबी प्रस्फुटन यानी जीभ हैं। माता के हाथों में खड्ग (तलवार) और असुर का कटा हुआ सिर सुशोभित है। यह स्थान आम भक्तों की आस्था के साथ-साथ तांत्रिक साधना के लिए भी बहुत शक्तिशाली केंद्र माना जाता है। बीरभूम जिले में बोलपुर के पास कोपई नदी के तट पर स्थित कांची देवगर्भ शक्तिपीठ (कंकालिता मंदिर) 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी की कमर या कंकाल गिरा था। यहां देवी को ‘देवगर्भा’ और भगवान शिव (भैरव) को ‘रुरु’ कहा जाता है। यह शक्तिपीठ तंत्र-मंत्र और साधना के लिए भी बहुत प्रसिद्ध माना जाता है। मंदिर के पास ही श्मशान घाट है जहां कई साधकों और तांत्रिकों ने सिद्धि प्राप्त की है।

भारत ने भूटान को सौंपे 290 करोड़, 13वीं पंचवर्षीय योजना की परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

थिम्पू। भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत चल रही कई विकास परियोजनाओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत 290 करोड़ रुपए (आईएनआर/नू. 2.90 अरब) की राशि भूटान के वित्त मंत्रालय को सौंपी है। इसकी जानकारी मंगलवार को थिम्फू स्थित भारतीय दूतावास ने दी। भारत और भूटान के बीच भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 19वीं मासिक समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत की मदद से भूटान में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने भूटान के वित्त मंत्रालय को 290 करोड़ रुपए के चेक सौंपे। यह राशि 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए भारत सरकार की वित्तीय सहायता का हिस्सा है। भारतीय दूतावास के अनुसार, बैठक में भारतीय मिशन और भूटान की शाही सरकार (आरजीओबी) के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। भारत ने भूटान के साथ अपने सहयोग और समन्वय को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस सहायता से जिन परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा, उनमें रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान (आरयूबी) के कॉलेजों में आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे का विकास, मानव संसाधन विकास और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण एवं विनिमय कार्यक्रम तथा फसलों की सुरक्षा के लिए चेन-लिंक फेंसिंग के दूसरे चरण के काम शामिल हैं। इसके अलावा, फुएंटशोलिंग स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान के पुनर्विकास, थिम्फू में राष्ट्रीय मौसम एवं बाढ़ चेतावनी केंद्र और वैज्ञानिक सुविधाओं की स्थापना तथा आरयूबी के आठ कॉलेजों में पढ़ाई के लिए डिजिटल तकनीक शुरू करने जैसी परियोजनाओं को भी सहायता दी जाएगी। फंडिंग के तहत डिजिटल स्किलिंग प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है। इसके लिए 8.83 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे देशभर के सभी गेवोग (स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्रों) में लगभग 10 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सहायता राशि का उपयोग थिम्फू स्थित रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के बुनियादी ढांचे के विकास, थिम्फू जिला न्यायालय के निर्माण और गेलेफू जनरल अस्पताल के नवीनीकरण के लिए भी किया जाएगा। बैठक में 30 जुलाई को दोनों देशों के विदेश सचिवों के नेतृत्व में हुई पांचवीं योजना वार्ता और 16-17 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान हुई बैठकों का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारत की सहायता और चल रही परियोजनाओं की प्रगति की सराहना की। साथ ही विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा भी की गई। समीक्षा की गई परियोजनाओं में प्रमुख राजमार्ग पुलों का पुनर्निर्माण, 11 नए पुलों का निर्माण, 37 केंद्रीय और क्लस्टर स्कूलों का उन्नयन, सरकारी उपयोग के लिए 100 इलेक्ट्रिक कारों और सार्वजनिक परिवहन के लिए 45 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद तथा थिम्फू में दो स्थानों पर सभी मंत्रालयों के लिए नए सरकारी कार्यालयों का निर्माण शामिल है। बैठक में भारत की सहायता से चल रही सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का भी आकलन किया गया। इसके अलावा, मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (एमडीएसएसएच) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस परियोजना में 200 बिस्तरों वाला कैंसर अस्पताल और 430 बिस्तरों वाली इनडोर-आउटडोर चिकित्सा सुविधा शामिल है, जिसे जिग्मे दोर्जी वांगचुक नेशनल रेफरल हॉस्पिटल और थिम्फू जनरल हॉस्पिटल से जोड़ा गया है।

फ्लाइट में खटमलों का आतंक, ऑस्ट्रेलियाई कंपनी क्वांटस ने विमान को किया ग्राउंड

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की विमानन कंपनी क्वांटस को अपने एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को रोम में अस्थायी रूप से सेवा से बाहर करना पड़ा। इसका कारण वो खटमल थे जिन्होंने यात्रियों को परेशान कर दिया था। विमान की गहन सफाई कराई गई। इस वजह से रोम से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ जाने वाली उड़ान रद्द करनी पड़ी और यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों से भेजने की व्यवस्था करनी पड़ी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 9 अक्टूबर को पर्थ से रोम जा रही क्वांटस की उड़ान क्यूएफ5 के इकोनॉमी क्लास के आगे वाले हिस्से में ‘बेडबग’ यानी खटमल पाए गए। ये छोटे परजीवी कीड़े इंसानों समेत कुछ स्तनधारियों का खून चूसते हैं। इन्हें पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होता है, क्योंकि ये सीटों, कपड़ों और दूसरी जगहों में छिप सकते हैं। यात्री इससे काफी परेशान हो गए थे। यही वजह है कि विमान के रोम पहुंचने के बाद उसे सफाई के लिए सेवा से हटाना पड़ा। इसके चलते 10 अक्टूबर को रोम से पर्थ जाने वाली वापसी उड़ान रद्द कर दी गई। कंपनी ने एक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। बताया कि इकोनॉमी क्लास की कुछ सीटों में समस्या सामने आने के बाद इंजीनियरों और रखरखाव दल ने विमान की गहन सफाई की। कंपनी ने उड़ान रद्द होने से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी। क्वांटस के मुताबिक, प्रभावित यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई और उन्हें उनकी निर्धारित उड़ान के समय से 48 घंटे के भीतर दूसरी उड़ानों में जगह दी गई। कंपनी ने कहा कि उसके विमानों के केबिन की नियमित रूप से सफाई की जाती है और उन्हें उच्च मानकों के अनुरूप स्वच्छ रखा जाता है। एहतियाती उपाय के तौर पर हर 50 दिन में विमानों में कीटाणुनाशक का इस्तेमाल भी किया जाता है। कहा जा रहा है कि खटमल किसी यात्री के सामान या कपड़ों के जरिए विमान में पहुंचे होंगे। ये कीड़े अंधेरी जगहों में छिपना पसंद करते हैं और कपड़ों की गंध से आकर्षित होकर सामान में पहुंच सकते हैं। होटल या अन्य यात्रा स्थलों से भी इनके फैलने की आशंका रहती है। खटमल आमतौर पर खतरनाक नहीं होते, लेकिन इनके काटने से खुजली और त्वचा में जलन हो सकती है। इन्हें खत्म करना कठिन है, क्योंकि ये बिस्तर की चादरों, सीटों की दरारों और अन्य छिपी हुई जगहों में लंबे समय तक रह सकते हैं। भोजन के बिना भी ये काफी समय तक जीवित रह सकते हैं। खटमलों की समस्या केवल किसी एक आर्थिक वर्ग तक सीमित नहीं है। अक्सर यात्रा करने वाले लोग अनजाने में इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सकते हैं। वहीं, सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों के लिए कीटनाशक और अन्य प्रभावी उपायों का खर्च उठाना अधिक मुश्किल हो सकता है। खटमल छोटे, बिना पंख वाले परजीवी होते हैं जो कपड़ों, फर्नीचर और बिस्तर में रह सकते हैं। इनके काटने से खुजली हो सकती है, लेकिन आमतौर पर इनसे सेहत से जुड़ी कोई गंभीर समस्या नहीं होती।

पंजाब में 2.01 करोड़ वोटर्स के साथ फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित : सीईओ अनिंदिता

चंडीगढ़। पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के पूरा होने और फाइनल इलेक्टोरल रोल के प्रकाशन की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट छप कर प्रकाशित हो चुकी है और इसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों के साथ सीईओ स्तर और जिला स्तर पर यह सूची साझा कर दी गई है। आईएएनएस से बात करते हुए सीईओ अनिंदिता मित्रा ने कहा कि फाइनल इलेक्टोरल रोल का प्रकाशन हो चुका है। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट रोल 13 अगस्त को प्रकाशित किया गया था, जिसमें करीब 1 करोड़ 94 लाख मतदाता पंजीकृत थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 1,93,94,000 के आसपास थी। ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद मतदाताओं से दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं। इसके लिए लोगों से अपील की गई थी कि अगर किसी का नाम इस सूची में रहने से छूट गया है या किसी को नया वोट बनवाना है तो वह संपर्क कर फॉर्म नंबर 6 भर सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 8 लाख नए वोटर सूची से जुड़े हैं। इसके बाद फाइनल इलेक्टोरल रोल 2 करोड़ 1 लाख मतदाताओं के साथ प्रकाशित हुआ है। यह ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 3.64 प्रतिशत अधिक है। अनिंदिता मित्रा ने बताया कि एसआईआर शुरू होने से पहले यानी प्री-एसआईआर के समय पंजाब में 2 करोड़ 14 लाख वोटर रजिस्टर्ड थे। जब घर-घर जाकर सत्यापन किया गया तो 20 लाख 66 हजार मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म वापस नहीं आए। इसके पीछे कई कारण थे। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ा कारण मृत्यु है। करीब साढ़े पांच लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए स्वाभाविक रूप से उनका नाम सूची से हटाया जाना था। इसके अलावा 1 लाख 19 हजार ऐसे मामले थे जहां एक ही मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में दो बार दर्ज था। यह क्लेरिकल एरर के कारण हुआ था, इसलिए एक एंट्री को हटाया गया है, किसी की वोट काटी नहीं गई है। इसी तरह करीब 9 लाख लोग ऐसे थे जो परमानेंटली शिफ्ट हो गए थे। आमतौर पर जिन लोगों की ट्रांसफरेबल नौकरी होती है, वे स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाते हैं और वहां उनका नया वोट बन जाता है, लेकिन पुरानी जगह पर भी उनका नाम रह जाता है। कई मामलों में तो पूरी की पूरी कॉलोनी खाली हो गई थी। ऐसे 9 लाख लोगों की गिनती की गई। सीईओ ने बताया कि इन सभी मामलों में मतदाताओं से अनुरोध किया गया था कि अगर किसी का नाम गलती से हटा दिया गया है तो वह दावे और आपत्ति के चरण में आकर फॉर्म नंबर 6 भरकर अपना नाम फाइनल रोल में जुड़वा सकता है। कुल 8 लाख नए नाम जुड़े हैं, जिनमें से करीब 3 लाख ऐसे युवा हैं जो पहली बार 18 साल के हुए हैं। इसका मतलब है कि करीब 5 लाख ऐसे लोग हैं जिनका पहले वोट नहीं बना था या लिस्ट में नाम न होने के कारण उन्होंने नया फॉर्म भरा था। राजनीतिक दलों की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में अनिंदिता मित्रा ने कहा कि पंजाब में एसआईआर के दौरान सभी राजनीतिक दलों की भूमिका बहुत सकारात्मक रही है। पहले दिन से ही उनसे अनुरोध किया गया था कि वे बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करें ताकि वे वोटर्स से संपर्क करने में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मदद कर सकें। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों द्वारा 90 हजार से ज्यादा बीएलए नियुक्त किए गए। पंजाब में कोई भी ऐसा बूथ नहीं था जहां एक भी बीएलए न हो। हर बूथ पर किसी न किसी पार्टी के कम से कम एक या दो बीएलए जरूर मौजूद थे। जब भी किसी वोटर से बीएलओ का संपर्क नहीं हो पाता था तो तुरंत उन सभी नामों को बीएलए के साथ साझा कर दिया जाता था। कई जगहों पर बीएलए ने वोटर्स से संपर्क स्थापित करवाने में मदद की। इसी वजह से जो डिलीशन किए गए हैं, वे पूरी तरह जेनुइन हैं। मृत्यु के मामलों में उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट कलेक्ट किया गया है। जहां डबल वोट का मामला था, वहां दूसरी एंट्री का वोटर आईडी कार्ड तक चेक किया गया है। जो लोग परमानेंटली शिफ्ट हो गए हैं, उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई है कि वे कहां ट्रांसफर होकर गए हैं, चाहे वह देश के किसी और हिस्से में ही क्यों न गए हों। विभागीय प्रमुखों से भी इसे सर्टिफाई करवाया गया है *पारदर्शिता से संतुष्ट हैं सभी दल, लगेंगे स्पेशल कैंप* अनिंदिता मित्रा ने बताया कि राजनीतिक दलों ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि वे पंजाब में एसआईआर की प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्हें नहीं लगता कि किसी जेनुइन वोटर का नाम हटाया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि पूरी सावधानी बरती गई है, लेकिन यह एक बहुत बड़ी एक्सरसाइज है। अगर फिर भी कोई मतदाता छूट गया है तो उसके लिए स्पेशल कैंप का आयोजन किया जाएगा। इन कैंपों की तारीख और समय मीडिया, आम लोगों और राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जाएगा। इन कैंपों में सबसे पहले बीएलओ लोगों को वोटर लिस्ट चेक करवाएंगे। हालांकि वोटर लिस्ट ऑनलाइन डाल दी गई है, लेकिन कई लोगों को ऑनलाइन चेक करने में सहूलियत नहीं होती। इसलिए उनकी सुविधा के लिए गांव-गांव में जहां बूथ बने हुए हैं, वहां बीएलओ बैठेंगे और लोगों को लिस्ट चेक करवाएंगे। अगर किसी को लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसका नाम रह गया है तो वह वहीं पर फॉर्म नंबर 6 भर सकता है और उसका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा।

पटना में आईसा के लोक भवन मार्च के दौरान हंगामा, छात्रों ने बैरिकेड तोड़ा

पटना। बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) सहित अन्य संगठनों के लोक भवन मार्च के दौरान जमकर हंगामा हुआ। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों ने जेपी गोलंबर पर पुलिस बैरिकेड तोड़ दिया और आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, आईसा से जुड़े छात्र मंगलवार को पटना के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर 10 पर एकत्र हुए थे। यहां से उन्हें लोक भवन की ओर मार्च करना था। हालांकि, प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। छात्रों को काफी देर तक आगे बढ़ने से रोका गया। इसके बाद राम गुलाम चौक से जेपी गोलंबर जाने वाली सड़क पर भी आवागमन बंद कर दिया गया और गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर दी गई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस की रोक के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने बैरिकेड गिरा दिया और डाकबंगला की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की और प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेला। पूरे घटनाक्रम के दौरान सड़क पर अफरातफरी की स्थिति बनी रही। छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर ज्ञानेश कुमार और सरकार के विरोध में नारे लिखे गए थे। प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। मार्च को लोक भवन तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। इस बीच, पटना जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए थे। जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग स्थित निर्धारित स्थल का ही उपयोग किया जाए। प्रशासन के मुताबिक, बिना पूर्व सूचना या अनुमति के अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने यह भी कहा था कि ऐसे प्रदर्शनों से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और न्यायालय सहित महत्वपूर्ण संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ता है। बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। जिला प्रशासन ने सभी संगठनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए निर्धारित धरना स्थल का इस्तेमाल करने की अपील की थी। साथ ही, निर्देशों का उल्लंघन कर अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

बिमोल अकोइजम संसद में रहने लायक नहीं’, जेएनयू कांड को लेकर राष्ट्रपति से मिलेंगी भाजपा की महिला सांसद

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से बर्खास्त प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने वाला है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी तथ्यों के आधार पर बात कर रही है। उन्होंने कहा कि जेएनयू की आंतरिक समिति की जांच के बाद कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया और यूनिवर्सिटी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। लेकिन इस गंभीर मामले पर राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी है। बांसुरी स्वराज ने कहा, “ऐसा लगता है कि कांग्रेस नेतृत्व अकोइजम को बचाने की कोशिश कर रही है क्योंकि वे राहुल गांधी के करीबी हैं।” भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि यूनिवर्सिटी की शिकायत समिति ने अंगोमचा बिमोल अकोइजम को दोषी पाया है और कहा है कि उन्होंने 11 छात्राओं का यौन उत्पीड़न किया था। रेखा शर्मा ने मांग की कि उन्हें संसद से हटाया जाना चाहिए, क्योंकि वे संसद सदस्य बने रहने के लायक नहीं हैं। भाजपा सांसद महिमा देवी ने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने कल एक रैली भी निकाली थी। उन्होंने कहा कि जेएनयू में कांग्रेस सांसद ने 11 युवतियों का यौन उत्पीड़न किया जो शर्मनाक है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ की बात करते हैं, लेकिन आज वे कहां हैं? वे इस मामले पर चुप क्यों हैं? भाजपा सांसद फांगनोन कोन्याक ने कहा कि वे राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं क्योंकि यह एक ऐसा मुद्दा है जो बहुत गंभीर है। यह उन युवा लड़कियों और छात्राओं से जुड़ा मामला है जिन्होंने सामने आकर आरोप लगाया है कि उनके साथ बदसलूकी हुई है। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है और इसमें राष्ट्रपति के दखल की भी जरूरत है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा सांसद अलका गुर्जर ने कहा कि कांग्रेस अपने नारों और बयानों में महिलाओं के सम्मान की बात करती है, जिसमें ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ भी शामिल है। लेकिन जब जमीनी हकीकत की बात आती है, तो उनकी पार्टी के एक सांसद का ऐसा व्यवहार चिंताजनक और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि अकोइजम एक समिति द्वारा दोषी पाए गए हैं और साथ ही एक जन-प्रतिनिधि और शिक्षक भी हैं, इसलिए उनके ऐसे व्यवहार की कड़ी आलोचना होनी चाहिए। वहीं, भाजपा विधायक शिखा राय ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अगर संसद का कोई सदस्य, जो जेएनयू में प्रोफेसर भी रहा हो, युवा लड़कियों से अच्छे नंबरों के बदले यौन संबंध बनाने की मांग करे तो यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि नाबालिग लड़कियों से जुड़े मामलों में सांसद अकोइजम पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि भाजपा महिला मोर्चा लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के सांसद पर लगे इतने गंभीर आरोपों पर चुप्पी साधे हुए है।

नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है सरकार : सीएम योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की तृतीया पर मां चंद्रघंटा के स्वरूप की आराधना की। इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा कि डबल इंजन सरकार की हर पहल नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है। मुख्यमंत्री ने लिखा कि नारी शक्ति के तेज, गरिमा और अदम्य साहस के प्रतीक के रूप में मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि नारी की सुरक्षा, सम्मान व स्वाभिमान ही सशक्त और समृद्ध समाज का आधार है। इसी भावना को आत्मसात कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार सुशासन के माध्यम से नारी सशक्तीकरण के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में फैले अराजकता के तांडव ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर ग्रहण लगा रखा था। उस समय माताओं-बहनों के सशक्तीकरण के बजाय सत्ताधीशों के परिवारों का सशक्तीकरण ही मुख्य उद्देश्य हुआ करता था। अब ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ से बेटियों के अस्तित्व की रक्षा, शिक्षा के प्रति जागरूकता, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से उनके उज्ज्वल भविष्य को संबल, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से विवाह को गरिमापूर्ण आधार, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मातृत्व को सहारा, उज्ज्वला से धुएं से मुक्ति, इज्जत घर से गरिमा की रक्षा, घरौनी से संपत्ति का अधिकार, 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए आजीवन निःशुल्क बस यात्रा और वृद्धावस्था पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा तक, डबल इंजन सरकार की हर पहल नारी के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमापूर्ण जीवन के लिए समर्पित है। इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने नवरात्र के दौरान मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने मंदिर परिसरों में सुगम दर्शन, साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा है। योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से पर्व के दौरान स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।