‘तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं अखिलेश’, यूसीसी के विरोध पर एनडीए नेताओं ने किया पलटवार

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत एनडीए के नेताओं ने यूसीसी को ‘अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वे तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं, इसके लिए शब्द नहीं, इन शब्दों के पीछे उनकी सोच दिखती है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आईएएनएस से कहा, “अखिलेश यादव को हम क्या कहें। वे मुसलमान भाई को लेकर और मुसलमान भाई अखिलेश यादव को लेकर परेशान हैं। दोनों लोगों में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। यूसीसी से पहले अखिलेश यादव को तो ये ऐलान कर देना चाहिए कि अगर सपा सरकार बनेगी तो मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाएंगे।” राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव बहुत हमदर्द हैं मुसलमानों के लिए, क्योंकि चार बार मुसलमानों ने वोट दे करके यादव जी को मुख्यमंत्री बनाया। अब उनका कर्तव्य बनता है कि एक बार उनको भी मौका दें, ताकि उनको भी ये कहने का अवसर ना मिले कि हमारा वोट लेकर खाली लोग सरकार बनाते हैं। ज्यादा वोट तो अखिलेश यादव पाते हैं, हम लोग तो एनडीए गठबंधन वाले हैं, थोड़ा कम मिलता है।” उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “समाजवादी पार्टी के लोग आजकल परिभाषा गढ़ने में बड़ी चतुराई के साथ काम कर रहे हैं। गृहमंत्री की घोषणा की प्रशंसा होनी चाहिए थी कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में यूसीसी लागू करके प्रदेश में समान आचार संहिता लागू करने का फैसला लिया। उसके विरुद्ध समाजवादी पार्टी के लोगों ने यूसीसी परिभाषा को बदल के कहीं न कहीं, मैं समझता हूं कि अपने अहंकार भाव को दिखाया है और यही अहंकार भाव समाजवादी पार्टी को 2027 में खत्म करने का काम करेगा।” यूसीसी के विरोध पर संजय निषाद ने कहा, “उनके (अखिलेश यादव) पास जैसे सलाहकार हैं, उसी वजह से वे आज सत्ता से बाहर हैं। संविधान हमेशा सामाजिक न्याय की बात करता है। सामाजिक न्याय तभी मिलेगा जब समान नागरिक संहिता और समान अधिकार होंगे। अधिकार कानूनों, एक्ट और नोटिफिकेशन के जरिए दिए जाते हैं।” उन्होंने सवाल किया कि क्या मुस्लिम महिलाएं मतदाता नहीं हैं? क्या वह इस देश की महिलाएं नहीं हैं? उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म की जगह नहीं है। धर्म जीने का आधार है, लेकिन समानता, सम्मान, सुरक्षा समृद्धि, स्वाभिलंबन पाने का अधिकार सबको है। जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। निषाद ने कहा कि यूसीसी उत्तराखंड, असम और गुजरात में लागू हुआ। वहां सब लोग खुश हैं। इसलिए हमें लगता है कि यह अन्य जगहों पर भी होना चाहिए। हम सभी को उसका स्वागत करना चाहिए। यूसीसी का विरोध करना गलत है। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के विधायक राम कदम ने कहा, “अखिलेश यादव आजकल साहित्यकार हो गए हैं। वे खुद की अपनी एक नई डिक्शनरी बनाने का प्रयास करते हैं, उनको शुभकामनाएं, पर क्या शब्द बदलने से शब्दों के पीछे की सोच इंसान की नहीं बदलती।” उन्होंने कहा, “यह देश इसके पहले तुष्टिकरण की राजनीति पर चलता था। क्या एक ही देश में एक को एक कानून, दूसरे को दूसरा कानून, ये असमानता क्या संविधान के के तहत मंजूर हो सकती है? सबका साथ और सबका विकास इस मूल मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है, तो सबके लिए समान कानून है, पर इसकी मिर्ची अखिलेश यादव को इस कारण लगती हैं कि वे तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहते हैं, इसके लिए शब्द नहीं, इन शब्दों के पीछे उनकी सोच दिखती है।” भाजपा की झारखंड इकाई के नेता प्रतुल शाहदेव ने कहा, “उन्हें ‘मुल्ला अखिलेश यादव’ ऐसे ही नहीं कहा जाता, क्योंकि वे हमेशा मुसलमानों के समर्थन में खड़े रहते हैं। वे उसी पार्टी से आते हैं जिसकी सरकार ने कार सेवकों पर गोली चलवाई थी। कहा जाता है कि पूरी सरयू नदी कार सेवकों के खून से लाल हो गई थी। इसलिए, उनके हाथ पहले से ही खून से सने हैं। वे देश में फिर से दंगे भड़काना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “कौन कहता है कि भाजपा सांप्रदायिक एजेंडा चला रही है? हम मुसलमानों के भले के लिए यूसीसी ला रहे हैं। किसी मुस्लिम पुरुष को चार शादियां करने की इजाजत क्यों होनी चाहिए? बेटियों का क्या कसूर है? तलाक देने का हक सिर्फ पुरुषों को क्यों होना चाहिए? क्या महिलाओं को यह हक नहीं मिलना चाहिए? इन विसंगतियों को दूर किया जाएगा। अखिलेश या राहुल चाहे कुछ भी करें, यूसीसी लागू होकर रहेगा।” भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा, “अखिलेश यादव को जानकारी की कमी है। उनको संविधान पढ़ना चाहिए। आप संविधान के नाम पर राजनीति करते हैं, संविधान के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन संविधान में जो चीजें लिखी हुई हैं, जो संविधान की प्रस्तावना में हैं और कानून के समक्ष समानता है, अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 44 पढ़कर आएं। वे एक वर्ग को अपीज करने के लिए इस प्रकार की बातें कर रहे हैं, इसका कोई अर्थ नहीं है।
मेरा शरीर अब साथ नहीं दे रहा, बिगड़ती सेहत के बीच जरांगे पाटिल ने मुंबई मार्च रद्द करने का दिया संकेत

पटोडा/बीड। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के बीड जिले के पटोडा में रात 2:00 बजे एक बड़ी सभा को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक शारीरिक थकान के कारण उन्हें मुंबई की ओर अपनी आगे की यात्रा रद्द करनी पड़ सकती है। अपनी भूख हड़ताल के 18वें दिन जरांगे पाटिल ने कहा कि अगर समर्थक उनके पीछे गाड़ियों का काफिला लेकर चलते रहे, तो वह अपनी यात्रा रोक देंगे और या तो स्थानीय स्तर पर धरना शुरू करेंगे या अंतरवाली सराटी लौट जाएंगे। रात करीब 1:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बावजूद मराठा समुदाय के हजारों लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, उनकी बात सुनने के लिए पूरी रात इंतजार करते रहे। भीड़ को संबोधित करते हुए शारीरिक रूप से काफी कमजोर दिख रहे जरांगे पाटिल ने कहा कि 12 सितंबर को आईवी फ्लूइड (नसों के जरिए दी जाने वाली दवा/तरल पदार्थ) लेना बंद करने के बाद से वह बमुश्किल अपने हाथ-पैर हिला पा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “अपने समुदाय के बच्चों के लिए लड़ने का असर मेरे शरीर पर पड़ा है, लेकिन मैंने आप लोगों के लिए सरकार से टक्कर ली है। सरकार चाहती है कि मैं घुटने टेक दूं, लेकिन क्या मुझे अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए? मेरा समुदाय किसी भी सरकार से बड़ा है – यह मेरे पिता के समान है। मेरे समुदाय में किसी भी सरकार को गिराने और नई सरकार बनाने की ताकत है।” जरांगे पाटिल ने आंदोलन की प्रगति के बारे में बताया कि 58 लाख पुराने रिकॉर्ड (नोंदी) मिल गए हैं, जिससे लगभग 2.5 करोड़ समुदाय के लोगों के लिए आरक्षण का लाभ पाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी मुख्य मकसद सरकारी गजट हासिल करना है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सीधा हमला किया और दावा किया कि उन्होंने हर कदम पर राजनीतिक चालों का मुकाबला किया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज पेन ड्राइव में सुरक्षित रख लिए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस पर “उनकी जान लेने की साजिश रचने” का आरोप भी लगाया। पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बागों के मालिकों से जुड़े तर्क का जवाब देते हुए उन्होंने सवाल किया, “सरकार का कहना है कि पश्चिमी महाराष्ट्र में फलों के बाग है लेकिन क्या ओबीसी समुदायों के पास बाग नहीं हैं? फिर उन्हें आरक्षण क्यों मिलता है?” जरांगे पाटिल ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान रैली या दौरा करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे पटोडा से उनकी गाड़ी के पीछे न आएं बल्कि सीधे खोपोली में मिलें, वरना वे या तो अंतरवाली लौट जाएंगे या बीड जिले के पटोडा में ही अपनी भूख हड़ताल फिर से शुरू कर देंगे। अपने परिवार के लिए एक संदेश में जरांगे पाटिल ने कहा, “मैंने अपने परिवार से आत्मसम्मान के साथ जीने को कहा है। मैंने अपने बेटे से कहा है कि अगर मैं समाज के लिए अपनी जान दे दूं, तो वह हिम्मत के साथ आगे आए। भले ही इस मकसद के लिए एक जान चली जाए, लेकिन हमारी जाति की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए।” पुलिस से सीधे बात करने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी शारीरिक हालत ठीक रही, तो वे पटोडा से सीधे मुंबई जाना पसंद करेंगे, न कि लोगों के बड़े हुजूम के साथ।
योगी कैबिनेट का बड़ा कदम: इंफ्रास्ट्रक्चर, नौकरी, शिक्षा और कल्याण से जुड़े 23 प्रस्तावों को मंज़ूरी

लखनऊ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, रोज़गार, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, औद्योगिक विकास और जन कल्याण को मज़बूत करने के मकसद से 23 अहम प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई।राज्य के वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इन फैसलों के बारे में मीडिया को जानकारी दी।एक बड़ा फैसला 15.172 किलोमीटर लंबे चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए संशोधित प्रस्ताव को मंज़ूरी देना था। यह छह-लेन वाला, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जिसे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड में लगभग 1,008.67 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा।इसका पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी और निर्माण एजेंसी चुनने के लिए ग्लोबल टेंडर (वैश्विक बोली) आमंत्रित किया जाएगा।स प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड से चित्रकूट धाम तक कनेक्टिविटी बेहतर होने और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी, जिसका मकसद शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना और छात्रों को आधुनिक सीखने की सुविधाएँ देना है।मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत, छोटे और सीमांत किसान उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से छह प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर 6 लाख रुपये तक के लॉन्ग-टर्म लोन के लिए पात्र होंगे।उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने एनफोर्समेंट कॉन्स्टेबल (परिवहन) और जेल वार्डन के पदों पर सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन और उम्र में छूट को मंज़ूरी दी।चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को उनकी संबंधित कैटेगरी के तहत यह रिज़र्वेशन मिलेगा। अधिकतम उम्र तय करने के लिए उनकी चार साल की सेवा को गिना जाएगा, साथ ही तीन साल तक की अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी। कुल रिज़र्वेशन की सीमा 50 प्रतिशत के भीतर ही रहेगी।उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए इसी तरह के 20 प्रतिशत रिज़र्वेशन को मंज़ूरी दी थी।जेल वार्डन के तौर पर पूर्व अग्निवीरों की भर्ती से जेल की सुरक्षा मज़बूत होने की उम्मीद है, खासकर उन जेलों में जहाँ आतंकवादी और कुख्यात अपराधी रखे जाते हैं, क्योंकि उनकी ट्रेनिंग, अनुशासन और ऑपरेशनल अनुभव का लाभ उठाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) के लिए कैशलेस मेडिकल इलाज को मंज़ूरी दी। इस स्कीम में ‘मुख्यमंत्री PRD कैशलेस मेडिकल स्कीम’ के तहत प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के वॉलंटियर्स और उन पर निर्भर परिवार के सदस्यों को शामिल किया जाएगा। कैबिनेट ने PRD ड्यूटी अलाउंस की दरों में बढ़ोतरी को भी मंज़ूरी दी।मैन्युफैक्चरिंग और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश खिलौना निर्माण प्रोत्साहन नीति-2025’ को मंज़ूरी दी गई। अन्य औद्योगिक फैसलों में मथुरा की छाता शुगर कंपनी लिमिटेड में कंसेशन-कम-लीज़ के ज़रिए 120 KLPD का इथेनॉल प्लांट लगाना और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ‘वर्ल्डफिश’ प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए राज्य सरकार, मत्स्य विभाग और ‘वर्ल्डफिश’ के बीच MoU को मंज़ूरी देना शामिल है।राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, अयोध्या की मिल्कीपुर तहसील के पूरे लाल खान गाँव में लगभग 65 एकड़ बंजर ज़मीन NSG रीजनल सेंटर के लिए केंद्र सरकार को मुफ़्त में दी जाएगी।उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के लिए ज़्यादा वित्तीय अधिकार, 10 साल तक की लीज़ डीड पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से छूट, गाड़ियों की फिटनेस के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों से जुड़ी नीति में संशोधन, और राशन की दुकानों (फेयर-प्राइस शॉप) के डीलरों को बांटे गए अनाज के आधार पर प्रति क्विंटल 25 रुपये अतिरिक्त मार्जिन मनी देने को भी मंज़ूरी दी।शहरी विकास के तहत, ‘मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना’ के अंतर्गत लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली के विकास के लिए फंड मंज़ूर किया गया। इसके अलावा, लखनऊ में मंज़ूर किए गए हाई-टेक टाउनशिप प्रोजेक्ट को पूरा करने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी गई।
पहले दिन लालबागचा राजा के चरणों में चढ़ाया गया 48 लाख 50 हजार का दान

मुंबई। पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है। पहले दिन लालबागचा राजा के चरणों में 48 लाख 50 हजार रुपए का दान श्रद्धालुओं ने किया। इसमें स्टेज बॉक्स में 27,50,00 रुपए का दान, जबकि कलर बॉक्स में 21 लाख रुपए का दान किया गया है। पिछले वर्ष गणेश उत्सव के पहले दिन 46 लाख रुपए का दान चढ़ाया गया था। दूसरी ओर, ग्रेटर मुंबई के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मुंबई में अलग-अलग गणेश मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता वर्कशॉप आयोजित कीं। इस दौरान कुल 5 वर्कशॉप अलग-अलग जगहों पर आयोजित की गईं, जिनमें गणेश मंडलों के कुल 320 पदाधिकारियों और अन्य संबंधित संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया। बीएमसी के साथ मिलकर एफडीए ने 110 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए ‘मोदक की मिठास, खाद्य सुरक्षा का भरोसा’ नाम से एक वर्कशॉप आयोजित की। यह सत्र मोदक बनाने के काम में लगभग 110 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के प्रतिनिधियों के लिए आयोजित किया गया था। इस दौरान आयुक्त (खाद्य) और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के ‘शेड्यूल 4’ के बारे में जानकारी दी और ‘अच्छी स्वच्छता प्रथाओं’ (जीएचपी) एवं ‘अच्छी निर्माण प्रथाओं’ (जीएमपी) पर विशेष जोर दिया गया। इसी के साथ महाप्रसाद बांटने वाले मंडलों के लिए भी निर्देश जारी किए गए, जहां सभी गणेश मंडलों को निर्देश दिया गया कि वे भंडारा, महाप्रसाद और खाने की दूसरी चीजें बांटने के लिए संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म/अपेंडिक्स-सी भरकर ऑफिस में जमा करें। इसके साथ ही खाने की चीजें सिर्फ लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन वाली जगहों से ही खरीदें और उनका सही बिल वगैरह भी लें। वहां मौजूद लोगों को खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई के बारे में जरूरी सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। इस वर्कशॉप/मीटिंग का मुख्य मकसद यह पक्का करना था कि गणेशोत्सव के दौरान भक्तों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का खाना मिले। ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ का मुख्य मकसद लोगों को पौष्टिक, बिना मिलावट वाला और सुरक्षित खाना उपलब्ध कराना है और महाराष्ट्र राज्य का ‘फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।
मोदी सरकार से 80 प्रतिशत मलयालियों को फायदा हुआ : केरल भाजपा

तिरुवनंतपुरम। केरल भाजपा ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी सरकार की अलग-अलग योजनाओं से लगभग 80 प्रतिशत मलयाली लोगों को फायदा हुआ है। इसी के साथ, पार्टी ने मोदी की 25 साल की जन-सेवा के उपलक्ष्य में केरल में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने तक चलने वाले बड़े ‘सेवा संकल्प अभियान’ की घोषणा की है। राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि इस कैंपेन का मकसद सेवा-भाव वाली राजनीति का संदेश सीधे लोगों तक पहुंचाना है। पार्टी की योजना है कि इस महीने भर चलने वाले प्रोग्राम के दौरान केरल में कम से कम 50 लाख लोगों तक पहुंचा जाए। भाजपा के राज्य महासचिव एस. सुरेश ने कहा कि केरल में मोदी सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं की पहुंच बहुत ज़्यादा है; लगभग 80 प्रतिशत मलयाली लोगों को सरकार की एक या उससे ज्यादा योजनाओं का फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहुंच का अंदाजा कल्याण, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और कोविड वैक्सीनेशन जैसी योजनाओं से लगाया जा सकता है। भाजपा राज्य भर में लगभग 20,000 बूथों पर प्रोग्राम आयोजित करेगी। पार्टी के लगभग 2,000 प्रतिनिधि वार्ड-स्तर पर ऑडिट करेंगे ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान की जा सके और योजनाओं की पहुंच का आकलन किया जा सके। ऐसे योग्य लोगों की पहचान करने के लिए स्पेशल कैंप भी लगाए जाएंगे जिन्हें योजनाओं का फायदा नहीं मिला है, और उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने में मदद की जाएगी। यह कैंपेन 7 अक्टूबर, 2001 को मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। भाजपा के अनुसार, गुजरात में उनके कार्यकाल ने संकट को अवसर में बदलने और शासन के केंद्र में विकास को रखने का नजरिया दिखाया। पार्टी उन बातों को भी उजागर करेगी जिन्हें वह 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की बड़ी प्रगति बताती है। कैंपेन के हिस्से के तौर पर, केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थी ‘विकास के लिए दीपम’ में हिस्सा लेंगे और पीएम मोदी के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए अपने घरों में दीये जलाएंगे। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक स्कूली छात्रों के लिए ‘स्वप्न भारत’ पर ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जबकि 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगनवाड़ी उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक रक्तदान और मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएंगे। एक साल पहले शुरू किए गए बीजेपी के हेल्प डेस्क इन गतिविधियों का समन्वय करेंगे। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन, पलक्कड़ और त्रिप्पुनिथुरा नगर पालिकाओं और भाजपा शासित पंचायतों में आधिकारिक तौर पर ‘सेवा समर्पण माह’ मनाया जाएगा। 7 अक्टूबर को केरल में भाजपा के 30 संगठनात्मक जिला केंद्रों से ‘विकास ज्योति यात्राएं’ निकाली जाएंगी। इन यात्राओं का समापन जनसभाओं के साथ होगा, जिनमें पार्टी कार्यकर्ता और केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थी शामिल होंगे। चंद्रशेखर ने कहा कि इस अभियान का मकसद यह संदेश देना है कि जनसेवा ही राजनीति का आधार होनी चाहिए और लोगों के साथ मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के सफर को साझा करना है।
बेंगलुरु: त्रैमासिक सम्मेलन में ईडी के अधिकारियों ने प्रौद्योगिकी के उपयोग और त्वरित सुनवाई पर जोर दिया

बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां आयोजित दो दिवसीय 36वें क्षेत्रीय अधिकारियों के त्रैमासिक सम्मेलन में प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं के व्यापक उपयोग, सुनवाई और दोषसिद्धि में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट कार्यसूची को अंतिम रूप दिया। बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में आयोजित यह सम्मेलन मंगलवार को समाप्त हुआ, जिसमें ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कानूनों के निष्पक्ष प्रवर्तन और भारत की वित्तीय प्रणाली की अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में ईडी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14-15 सितंबर को बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में क्षेत्रीय अधिकारियों का अपना 36वां त्रैमासिक सम्मेलन (क्यूसीजेडओ) सफलतापूर्वक आयोजित किया, इससे पहले 13 सितंबर को आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों द्वारा एक प्रबंधन और नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया था। बयान में आगे कहा गया कि सम्मेलन आगामी तिमाही के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ समाप्त हुआ, जिसमें कैडर पुनर्गठन का समयबद्ध कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं का पूर्ण उपयोग, मुकदमों और सजाओं में तेजी लाना और आर्थिक अपराध के पीड़ितों को निरंतर मुआवजा दिलाना शामिल है। एक बयान में कहा गया कि कार्यशाला के सत्रों का संचालन आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इनमें भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के संदर्भ में वित्तीय जांच का भविष्य, आर्थिक अपराध जांच में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग, डीपफेक और एआई-सक्षम धोखाधड़ी से जुड़े जोखिम, साइबर खतरे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया। बयान में आगे कहा गया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से संबद्ध संघीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक विशेष एजेंट के इनपुट ने चर्चाओं को और अधिक मूल्यवान बनाया। बयान में यह भी कहा गया कि विश्व बैंक समूह की चोरी की संपत्ति वसूली पहल के माध्यम से ज्ञान साझा करते हुए संपत्ति का पता लगाने और उसकी वसूली जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। बयान में कहा गया कि सभी सत्रों में बार-बार सामने आने वाला विषय जांच के लिए मामले-केंद्रित दृष्टिकोण से पारिस्थितिकी तंत्र-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने, प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग करने के साथ-साथ उनसे जुड़े जोखिमों के प्रति सचेत रहने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता थी।
बांसवाड़ा में महिला को पीटकर अर्धनग्न घुमाने के मामले में एनएचआरसी सख्त, राजस्थान के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक महिला के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला पर आरोप था कि वह किसी दूसरे पुरुष के साथ घर से चली गई थी, जिसके बाद उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने जबरदस्ती उसके बाल काट दिए, उसे डंडों से पीटा और अर्धनग्न हालत में घुमाया। एनएचआरसी ने माना है कि अगर मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो इससे पीड़ित के जीवन और सम्मान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। इसलिए, एनएचआरसी ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और बांसवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उम्मीद है कि इस रिपोर्ट में जांच की स्थिति और पीड़ित को दिए गए मुआवजे (अगर कोई हो) की जानकारी भी शामिल होगी। 4 सितंबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कथित तौर पर 1 सितंबर को हुई थी। यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो वायरल हुआ। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था ने कहा कि महिला के साथ उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने सबके सामने क्रूरता और अमानवीय व्यवहार किया था। ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति भारत की चिंता को दर्शाती है। इसका मुख्य काम मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। मानवाधिकारों का अर्थ है व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से जुड़े अधिकार, जिनकी गारंटी संविधान देता है या जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल हैं और जिन्हें भारत की अदालतों में लागू किया जा सकता है। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था के पास यह अधिकार है कि वह मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत मिले बिना भी मीडिया रिपोर्ट, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान ले सके।
राज पंचायत चुनाव: रिजर्वेशन लॉटरी टली, प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई तारीखें तय होंगी

जयपुर। राजस्थान पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज चुनावों के लिए रिजर्वेशन लॉटरी को टाल दिया है, जो 17 और 18 सितंबर को होनी थी। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया (जिसमें चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव भी शामिल है) पूरी होने के बाद नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने राज्य चुनाव आयोग को बताया कि 17 और 18 सितंबर को होने वाली लॉटरी पहले बताई गई तारीखों पर नहीं होगी। इसकी वजह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी चल रही प्रक्रिया है। जिला कलेक्टर और दूसरे सीनियर अधिकारी अभी चुनाव से जुड़े कामों में लगे हैं, इसलिए पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया एक साथ करना मुश्किल हो रहा है। पुराने शेड्यूल के मुताबिक, जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी 17 सितंबर को होनी थी। अगले दिन, यानी 18 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी होनी थी। यह लॉटरी बहुत जरूरी है क्योंकि इससे अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों और पदों के आरक्षण का स्टेटस तय होगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और लागू होने वाली दूसरी श्रेणियों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं। लॉटरी टलने की वजह से संभावित उम्मीदवारों को यह जानने के लिए और इंतजार करना होगा कि उनकी सीट खुली रहेगी या आरक्षित श्रेणी में आएगी। राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए संदेश के अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरक्षण लॉटरी का नया शेड्यूल तय किया जाएगा। इसका मतलब है कि पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब राज्य शहरी निकाय चुनावों के बाकी चरण पूरे कर लेगा। इसलिए, यह देरी मुख्य रूप से एक प्रशासनिक फैसला है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि जिला-स्तर के अधिकारी अगली बड़ी चुनावी प्रक्रिया शुरू करने से पहले चुनाव से जुड़ी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां पूरी कर सकें। पंचायती राज चुनावों से पहले आरक्षण लॉटरी सबसे अहम पड़ावों में से एक है। जब तक लॉटरी पूरी नहीं हो जाती, तब तक जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों जैसे पदों के लिए आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होगी। नतीजतन, इस देरी की वजह से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों और स्थानीय नेताओं को अपनी चुनावी योजनाएं तय करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद उम्मीद है कि संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियां तेज कर देंगी, उम्मीदवारों की पहचान करेंगी और स्थानीय स्तर पर प्रचार शुरू कर देंगी। राजस्थान का चुनावी कैलेंडर अब स्थानीय निकाय के एक बड़े चुनाव से दूसरे चुनाव की ओर बढ़ रहा है। अभी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पूरे किए जा रहे हैं, और उम्मीद है कि शहरी निकाय चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद पंचायती राज चुनावों की तैयारियां तेज हो जाएंगी। हालांकि, अभी के लिए राजनीतिक कैलेंडर में आरक्षण लॉटरी अगली अहम तारीख बन गई है। नई तारीखों से यह तय होगा कि चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार कब जान पाएंगे कि उनकी स्थिति क्या है और राजस्थान की अगली बड़ी जमीनी चुनावी लड़ाई कब पूरी तरह से प्रचार के दौर में प्रवेश कर पाएगी।
‘ऐसे हथकंडे और धोखेबाजी कोई नई बात नहीं’, जैश प्रमुख मसूद अजहर पर पाकिस्तान के फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान के उस कदम की कड़ी आलोचना की, जिसमें उसने ग्लोबल आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के चीफ मसूद अजहर की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की रकम बढ़ाई है। भारत ने इस ‘झूठी घोषणा’ को सिर्फ एक ‘चाल’ बताया और कहा कि ऐसे ‘खोखले’ बयान पहले भी दिए जा चुके हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान से कहा कि वह ऐसे ‘झूठे ऐलान’ करने के बजाय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करे। मैं बस इतना ही कहूंगा कि पाकिस्तान की ऐसी चालें और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कोई नई बात नहीं हैं। हमने पहले भी ऐसी चालें देखी हैं। हम सब जानते हैं कि इसमें कोई दम नहीं है। उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए, न कि ऐसे झूठे ऐलान करने चाहिए, जिनका कोई मतलब नहीं है।” पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए का नया इनाम घोषित किया है। एजेंसी का दावा है कि आतंकवादी अफगानिस्तान में छिपा हुआ है, जबकि इंटेलिजेंस एजेंसियों और दुनियाभर के जानकारों का मानना है कि यह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की नजर से बचने की एक कोशिश है। भारत में कई आतंकी हमलों, खासकर पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर के पाकिस्तान में छिपे होने की बात कही जाती रही है, लेकिन इस्लामाबाद ने हमेशा इससे इनकार किया है। अजहर के अलावा, एफआईए की नई ‘रेड बुक’ में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 अन्य आतंकवादियों के नाम भी शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब पाकिस्तान पर टेरर फंडिंग और आतंकी समूहों के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर नजर रखी जा रही है। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों और पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का मानना है कि इनाम की राशि बढ़ाने का मकसद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा करना है, जबकि उसकी असल जगह को अंतरराष्ट्रीय जांच से दूर रखना है। इनाम बढ़ाने की घोषणा करते हुए एफआईए ने कहा कि अजहर अफगानिस्तान में है, पाकिस्तान में नहीं। इस दावे को अफगान तालिबान कई बार खारिज कर चुका है। भारतीय इंटेलिजेंस अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि अजहर पाकिस्तान में ही है। जानकारों का कहना है कि इनाम की राशि बढ़ाना सिर्फ एफएटीएफ को गुमराह करने के लिए है। पाकिस्तान का यह दावा गलत है कि अजहर अफगानिस्तान में है, और आईएसआई उसे वहां रखने का जोखिम नहीं उठाएगी, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब एफआईए ने अजहर पर इनाम घोषित किया है। 2021 में, एफआईए ने 50 लाख पाकिस्तानी रुपए के इनाम का ऐलान किया था। उस समय भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि वह उसकी जमीन पर नहीं है। 2021 में इनाम की घोषणा के बाद भी जैश और अजहर के मामले में ज्यादा कुछ नहीं बदला। अजहर की देखरेख में जेईएम ने जम्मू-कश्मीर में नए तरीके अपनाए हैं, जैसे कि हाइब्रिड वॉरफेयर की तरफ बढ़ना और प्रॉक्सी फ्रंट बनाना। एफएटीएफ की नजर से बचने के लिए, जैश ने ‘पीपल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट’ (पीएएफएफ) जैसे प्रॉक्सी आतंकी संगठनों के जरिए काम किया। इस संगठन ने पुंछ और राजौरी के घने जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए जानलेवा हमलों की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का अभी मुख्य मकसद अजहर को सुरक्षित रखना और उसे एफएटीएफ की नजर से दूर रखना है।
सागर शराब कांड में सात पीड़ितों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है: प्रियांक कानूनगो

सागर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मंगलवार को कहा कि मध्य प्रदेश के सागर में नकली शराब कांड में सात लोगों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने घटना में हुई मौतों के बारे में स्पष्टता की मांग की। कानूनगो ने सागर जिले का दौरा किया और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। बाद में उन्होंने घटना, जांच और राहत उपायों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के साथ बैठक भी की। कानूनगो ने घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से इस त्रासदी का राजनीतिकरण न करने की अपील की ताकि प्रभावित परिवारों को सहायता मिल सके और दोषियों को सजा मिल सके। कानूनगो ने कहा कि सागर जिला प्रशासन ने बताया है कि डॉक्टरों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि इन सात लोगों की मौत शराब के सेवन से हुई है या नहीं। उन्होंने बताया कि मृतकों के सातों परिवारों को सरकार की ओर से 2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। सागर में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य कानूनगो ने कहा कि जिन लोगों की मृत्यु का स्पष्ट संबंध नकली शराब के सेवन से है, उनके परिवारों को 4 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी प्रशासन से आग्रह करेगा कि स्वीकृत मुआवजा अगले दो दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों तक पहुंच जाए। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि लोग चल रही जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। कानूनगो ने कहा कि परिवारों ने शिकायत की है कि बड़े शराब माफिया से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के नाम उनके बयानों में शामिल नहीं किए गए हैं और कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हमने पुलिस से ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है। एनएचआरसी सदस्य ने कहा कि कुछ परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न गांवों में शराब बेचने में शामिल कई एजेंट मामले में गिरफ्तारी के बावजूद अभी भी फरार हैं। यह घटना इस महीने की शुरुआत में तब सामने आई जब सागर जिले के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र के गांवों में नकली शराब के संदिग्ध सेवन से कई लोग बीमार पड़ गए। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में कुछ लोगों की मौत भी हुई। मृतकों की संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है, जांच के दौरान अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। पुलिस ने अब तक इस मामले में 33 आरोपियों की पहचान की है और उनमें से 18 को गिरफ्तार कर लिया है। जांच अवैध शराब की आपूर्ति और वितरण में शामिल संदिग्ध नेटवर्क पर केंद्रित है।