नवरात्रि के चौथे दिन कालकाजी मंदिर में उमड़ी भीड़, मां कूष्मांडा के दर्शन को पहुंचे हजारों भक्त

नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आज के दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है, जिसके लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर के बाहर लगी रहीं। इस अवसर पर कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आईएएनएस से बातचीत में मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त लगातार मां के दर्शन के लिए आते हैं, और इस पावन अवसर पर भगवती की विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। महंत ने बताया, “नवरात्रि पर मध्यरात्रि में मां की आरती और पूजा की जाती है। इसके बाद भक्तों के लिए मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं। आज भी करीब दो बजे मां की आरती हुई और ढाई बजे के आसपास दर्शन के लिए पट खोल दिए गए। तब से लगातार भक्त मां के दर्शन कर रहे हैं।” महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि इस बार नवरात्रि में भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए तीन अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं। पहला मार्ग मां के पुराने स्थान की तरफ से, दूसरा कमल मंदिर की तरफ से रखा गया है जबकि तीसरा मार्ग वीआईपी पास धारकों के लिए आरक्षित किया गया है। इसके लिए अलग लाइन की व्यवस्था की गई है ताकि सभी भक्त आसानी से मां के दर्शन कर सकें। मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। महंत ने बताया कि नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर के अंदर ही एक अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई है। यहां अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी तैनात रहते हैं। इसके अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाओं के वालंटियर्स भी भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराने में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार निकास के लिए भी दो द्वार बनाए गए हैं, ताकि भक्तों को बाहर निकलने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और भीड़ का दबाव कम रहे।

बिहार नाव हादसे पर भाजपा नेताओं ने जताया दुख, बोले-सरकार करेगी हरसंभव मदद

नई दिल्ली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी पार करने के दौरान नाव पलटने से हुए हादसे में 13 मासूम बच्चों की मौत हो गई। मरने वाले सभी बच्चे 15 साल से कम उम्र के बताए जा रहे हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है और बीजेपी नेताओं ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। रायपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे इस घटना के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएं सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं अक्सर हाजीपुर जाता रहा हूं, और यह खबर सुनकर मन बहुत व्यथित है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देगी। वहीं, पटना में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी इस हादसे को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने कहा, “यह एक बेहद दुखद घटना है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है।” संजय सरावगी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने भी इस घटना पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से राहत राशि की घोषणा कर दी गई है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि रात के समय नाव का संचालन क्यों किया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी लोग इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी मुद्दे पर बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने विपक्ष के नेता पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राघोपुर विपक्ष के नेता का निर्वाचन क्षेत्र है। यह एक दुखद घटना है और उन्हें अपने क्षेत्र में जाकर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए क्योंकि वे उनके प्रतिनिधि हैं।

सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत पर राहुल गांधी बोले-‘युवाओं को जेल भेजना कायरता’

नई दिल्ली। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को जेल भेजना कायरता का काम है। यह बयान तब आया जब सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “शांतिपूर्ण विरोध में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। छात्र, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक, अलग-अलग बैनर के एक ही कारण है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।” तीन सीजेपी सदस्यों को जंतर-मंतर में अतिक्रमण के लिए निवारक गिरफ्तारी के तहत पकड़ा गया था, जिसे अब निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। उन पर अतिक्रमण, बॉन्ड उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को बुधवार सुबह नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर के विरोध से जुड़े मामले में 50,000 रुपए का बॉन्ड भरने और इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग के किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बार सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण और बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देखा जा रहा है। तीनों सीजेपी नेताओं को मंगलवार सुबह पुलिस बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए हिरासत में लिया गया था, जिसे निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किया जा चुका है। वे चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची की एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर विरोध करने जा रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद तीनों को हिरासत में ले लिया गया। 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर को ‘निर्धारित’ विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह फैसला गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था। दिल्ली में विरोध के लिए तीन नई जगहें (रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड) तय की गई हैं।

दिसंबर में पीएम मोदी का कनाडा दौरा द्विपक्षीय संबंधों की तरफ बढ़ा अगला ‘तार्किक कदम’ होगा: उच्चायुक्त पटनायक

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा कि भारतीय समुदाय भी पीएम मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों को मजबूती देने की दिशा में अगला तार्किक कदम होगा। आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में पटनायक ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। राजनीतिक संपर्क बढ़ने के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृषि, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है। पढ़िए पूरा साक्षात्कार: आईएएनएस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा दौरा दिसंबर में प्रस्तावित है। ये भारत-कनाडा संबंधों की दृष्टि से कितना अहम है? दिनेश के पटनायक: पिछले वर्ष से, हम अपने संबंधों को उच्च स्तर पर बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्हें प्रधान मंत्री मार्क कार्नी द्वारा आमंत्रित किया गया था। दोनों नेताओं ने फैसला किया कि दोनों देशों के उच्चायुक्तों को अपने-अपने पद पर लौट जाना चाहिए। दोनों उच्चायुक्तों ने पिछले साल सितंबर में अपना कार्यभार फिर से शुरू किया। तब से, हमने एक वर्ष पूरा कर लिया है, और बहुत कुछ हुआ है। प्रधानमंत्री कार्नी ने इस वर्ष फरवरी-मार्च में भारत का दौरा किया, और दोनों विदेश मंत्री पिछले वर्ष में 12 से अधिक बार मिल चुके हैं। हमने कई बार रक्षा मंत्रियों, व्यापार मंत्रियों, ऊर्जा मंत्री, प्राकृतिक संसाधन मंत्री, कनाडा, शिक्षा प्रतिनिधिमंडलों और हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भारत यात्रा देखी है। इन सभी चीजों को मिलाकर, ये घटनाक्रम हमें एक ऐसे चरण पर ले आए हैं जहां प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा अगला तार्किक कदम है। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था, इसलिए काफी समय हो गया है। हम व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत की प्रक्रिया में हैं और चौथे दौर की बातचीत समाप्त हो गई है। बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है। जब पिछले साल नवंबर में दोनों प्रधानमंत्रियों की जोहान्सबर्ग में मुलाकात हुई, तो उन्होंने एक साल के भीतर वार्ता समाप्त करने पर सहमति जताई थी। मुझे विश्वास है कि हम नवंबर तक इन्हें पूरा कर लेंगे। हमें उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा जाएंगे तो हम सीईपीए पर हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे। संक्षेप में कहूं, भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने के लिए जरूरी प्रमुख क्षेत्रों में अब काम आगे बढ़ रहा है। इनमें सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, निवेश, व्यापार, रक्षा संवाद, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं। मैं इसके लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और सबसे बढ़कर दोनों प्रधानमंत्रियों का आभार जताना चाहता हूं जिनकी अगुवाई में ये संभव हो पाया है। आईएएनएस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व ने समय के साथ भारत-कनाडा संबंधों को किस तरह आकार दिया है? दिनेश के पटनायक: बिल्कुल, मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और नेतृत्व के बिना, कुछ भी नहीं हो पाता। मैं इसका पूरा श्रेय दोनों प्रधानमंत्रियों को दूंगा। प्रधानमंत्री कार्नी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जबकि मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया। जब दोनों देशों के उच्चायुक्तों ने अपने-अपने पद संभाले, तब उन्हें सरकारों के शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले थे कि द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत बनाना है और उन्हें पहले से बेहतर स्तर पर ले जाना है। मेरा विचार है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के सक्रिय समर्थन और मार्गदर्शन के बिना यह प्रगति संभव नहीं होती। आईएएनएस: कनाडा में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा के दौरान उनके स्वागत के लिए यह समुदाय कैसी तैयारी कर रहा है? दिनेश के पटनायक: प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था। ऐसे में करीब 11 साल बाद उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में काफी उत्साह है। कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, यहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 30 लाख है। भारतीय समुदाय के अलग-अलग वर्गों के लोगों से लगातार यह पूछने के लिए संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी वहां कब आएंगे और वो उनसे मिलने की इच्छा रखते हैं। इस समुदाय में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख सहित विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोग हैं। इसके अलावा छात्र, शोधकर्ता, शिक्षाविद, कारोबारी और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भी प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं। लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोगों वाले इस समुदाय के हर व्यक्ति से प्रधानमंत्री की मुलाकात संभव नहीं होगी, लेकिन यह प्रयास किया जाएगा कि उनकी यात्रा से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिले। आईएएनएस: भारत और कनाडा अंतरराष्ट्रीय अपराध, आतंकवाद और प्रत्यर्पण के मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आतंकवाद से निपटने में यह कितना अहम है? दिनेश के पटनायक: हम इन मुद्दों से पार पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जब मैं पिछले साल 18 सितंबर को भारत आया था, तो कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी उसी हफ्ते भारत के दौरे पर थीं ताकि अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ बातचीत कर सकें। इसी तरह, एनएसए अजीत डोभाल ने फरवरी में कनाडा का दौरा किया था। तब से दोनों देश सीमापार अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए काम कर रहे हैं। पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों में यह साझा समझ विकसित हुई है कि कनाडा में सामने आने वाली कुछ सुरक्षा चुनौतियां भारत के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं और इसी तरह इनका असर कनाडा पर भी पड़ता है।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 14वें आरोपी सूर्यवंशी के खिलाफ दाखिल किया पूरक आरोपपत्र

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। यह पूरक आरोपपत्र मामले में आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी के खिलाफ दाखिल किया गया है। कोर्ट 22 अक्टूबर को इस पर सुनवाई करेगा। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक पेश हुए। पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने उसे रिकॉर्ड पर लिया। साथ ही, कोर्ट ने आरोपी को इस आरोपपत्र की कॉपी देने का आदेश दिया। शेषराव बजरंग सूर्यवंशी को 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जो नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में 14वां आरोपी है। बाकी 13 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। कोर्ट ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल उस आरोपपत्र पर भी संज्ञान लिया था। अन्य 13 आरोपियों में मनीषा मंधारे, मनीषा संजय हवलदार, मनीषा वाघमारे, प्रहलाद कुलकर्णी, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल शामिल हैं। शेषराव बजरंग सूर्यवंशी महाराष्ट्र के पुणे का रहने वाला बताया जाता है। आरोप है कि उसने कथित तौर पर परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को नीट-यूजी का पेपर उपलब्ध कराया था। सीबीआई के अनुसार, आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार का सहयोगी था। शुभम खैरनार एक करियर काउंसलर है, जिसे 12 मई को नासिक से गिरफ्तार किया गया था। उस पर सोशल मीडिया के जरिए प्रश्नपत्र फैलाने का आरोप है। आरोप है कि 3 मई की परीक्षा से पहले एनटीए के विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अन्य लोगों के नेटवर्क के जरिए गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पीवी कुलकर्णी ने कथित तौर पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्न और उनके उत्तर विकल्प छोटे-छोटे कागजों पर लिख लिए और उन्हें छिपाकर गोपनीय सेक्शन से बाहर ले गए। सीबीआई ने कहा कि एनटीए के गोपनीय विभाग में प्रवेश या बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की जांच या तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी। एजेंसी का आरोप है कि एक अन्य आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने एनसीईआरटी की किताबों की अपनी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए होटल लौटने के बाद प्रश्नों को दोबारा तैयार किया। वहीं, मनीषा संजय हवालदार ने कथित तौर पर अपने ठहरने के स्थान पर लौटने के बाद भौतिक विज्ञान के प्रश्नों को संक्षिप्त रूप में नोट कर लिया था। बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में विशेष रूप से गठित इस फास्ट ट्रैक अदालत को सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाया गया है।

डीआरडीओ का प्लेटफार्म, हथियारों के परीक्षण से जुड़ी अहम सूचनाओं को मिलेगी सुरक्षा

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सुरक्षित संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संगठन ने क्वांटम की (कुंजी) डिस्ट्रिब्यूशन (क्यूकेडी) प्लेटफार्म को सफलतापूर्वक स्थापित कर उसका परीक्षण किया है। इस तकनीक से तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारियों और आंकड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। दरअसल, क्वांटम कुंजी वितरण ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग संचार के दौरान सूचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से संदेशों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक गोपनीय कुंजियों का आदान-प्रदान किया जाता है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति संचार के दौरान इन कुंजियों की जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है, तो उसकी गतिविधि का पता लगाया जा सकता है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टैब्लिशमेंट (पीएक्सई) परीक्षण क्षेत्र के लाइव संचार नेटवर्क में किया गया। इस परीक्षण ने रियल टाइम में महत्वपूर्ण सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक की उपयोगिता प्रदर्शित की है। तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण तथा उनके मूल्यांकन के दौरान विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारियां और आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इनमें परीक्षण से जुड़े अवलोकन और उपकरणों से मिलने वाले तकनीकी आंकड़े भी शामिल होते हैं। इन सूचनाओं की सुरक्षा परीक्षण प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। डीआरडीओ का यह सफल परीक्षण ऐसे आंकड़ों व सूचनाओं को सुरक्षित रखने में इस तकनीक की भूमिका को दर्शाता है। डीआरडीओ के अनुसार, प्लेटफार्म को इस तरह विकसित किया गया है कि यह महत्वपूर्ण सैन्य संचार को सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही साथ इस संचार में किसी की ओर से सेंध लगाने या सूचनाएं चुराने की कोशिश का पता लगाने में भी सक्षम है। इससे हथियारों के परीक्षण से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है। डीआरडीओ ने निजी क्षेत्र के सहयोग से इसे विकसित किया है। क्वांटम कुंजी वितरण प्लेटफार्म को डीआरडीओ के सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और साइबर सुरक्षा समूह के अंतर्गत विकसित किया गया है। इसके विकास में तैकबिट लैब्स ने उत्पादन भागीदार के रूप में सहयोग किया है। यह क्वांटम आधारित सुरक्षित संचार तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है, जहां हथियारों के परीक्षण और मूल्यांकन के दौरान जुटाई गई संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।

कोलकाता: रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच होगा मुकाबला

कोलकाता। फुटबॉल के दीवाने शहर कोलकाता के फैंस को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। 25 नवंबर को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच एक मुकाबला होने वाला है। इसकी घोषणा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में करेंगे। दुनिया के दो सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों के पुराने खिलाड़ियों के बीच प्रस्तावित इस मैच को लेकर कोलकाता के फुटबॉल फैंस के बीच रोमांच है। दोनों टीमों की कोलकाता में बड़ी फैन फॉलोइंग है। जानकारी के मुताबिक, इस मैच में लुइस फिगो, स्पेन के पुराने गोलकीपर इकर कैसिलास और बार्सिलोना के महान खिलाड़ी कार्ल्स पुयोल के शामिल होने की उम्मीद है। फिलहाल इस मैच से जुड़े खिलाड़ियों और अन्य पहलुओं की जानकारी नहीं दी गई है। ब्राजील और उरुग्वे के साथ भारतीय फुटबॉल टीम के मैच हाल ही में देखने वाले कोलकाता के फुटबॉल फैंस के लिए रियल मैड्रिड और बार्सिलोना के लीजेंड्स के बीच का मैच देखना किसी सपने के सच होने जैसा है। यह मुकाबला इस खेल के सबसे कड़े मुकाबलों में से एक की पुरानी यादों और रोमांच के इर्द-गिर्द बना होगा। भारत ने पिछली बार 6 अप्रैल, 2025 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में लीजेंड्स के एल क्लासिको की मेजबानी की थी। रियल मैड्रिड लीजेंड्स ने 2-0 से जीत हासिल की, जिसमें फर्नांडो मोरिएंटेस और डेविड बैरल ने गोल किए। इस मुकाबले में मैड्रिड के लिए फिगो, माइकल ओवेन और पेपे जैसे कई जाने-माने नाम शामिल थे, जबकि बार्सिलोना के लिए जावी हर्नांडेज़, रिवाल्डो और पुयोल ने गोल किए। टिकटों की बिक्री, किक-ऑफ का समय और ब्रॉडकास्ट की व्यवस्था के बारे में जानकारी बाद में मिलने की उम्मीद है। कोलकाता के फुटबॉल फैंस के लिए साल्ट लेक स्टेडियम में पुराने जमाने के स्टार्स को देखने की उम्मीद 25 नवंबर को होने वाले मैच ने बढ़ा दी है।

एनपीसीआई का बड़ा ऐलान, दीपावली के बाद लागू होगा यूपीआई एमडीआर;तारीख अभी तय नहीं

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने मंगलवार को ऐलान किया कि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को दीपावली के बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए तारीख का ऐलान किया जाना बाकी है। एनपीसीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया, “यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने आज फैसला किया कि त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर को दीपावाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।” यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब व्यापारी संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने एनपीसीआई से यूपीआई फ्रेमवर्क के लागू होने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। उन्होंने त्योहारों के दौरान होने वाली अधिक बिक्री पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। पिछले महीने, यूपीआई स्टीयरिंग कमिटी ने 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई एमडीआर को 0.4 प्रतिशत या 40 बेसिस पॉइंट्स तय किया था। एमडीआर वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए व्यापारियों से ली जाती है। 0.4 प्रतिशत फीस का मतलब है कि हर 2,000 रुपए के खर्च पर 8 रुपए या यूपीआई से किए गए हर 10,000 रुपए के पेमेंट पर 40 रुपए का अतिरिक्त खर्च। सरकार की ओर से साफ किया जा चुका है कि यह यूपीआई एमडीआर केवल व्यापारियों से लिया जाएगा और व्यापारी इसे ग्राहकों को किसी भी तरीके से पास नहीं कर सकते हैं। इससे पहले, विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने कहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति देना एक अधिकार प्रदान करने वाला नियम होगा। हालांकि, भुगतान क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण इससे शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होने की आशंका कम है। मिश्रा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इससे बड़े पैमाने पर शुल्क में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि यह एक मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाजार है। ऐसी कंपनियां भी थीं, जो एमडीआर शुल्क नहीं ले पाने के बावजूद अपना कारोबार चलाने में सक्षम रहीं और बाजार में बनी रहीं।

‘हनुमान अंश’ के बाद अब गोलू देवता की कहानी पर बनी फिल्म, क्या ‘बाला गोरिया’ रचेगी बॉक्स ऑफिस पर इतिहास?

मुंबई। धार्मिक आस्था और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्मों की चर्चा के बीच अब उत्तराखंड के गोलू देवता की कहानी बड़े पर्दे पर आने वाली है। फिल्म का नाम ‘बाला गोरिया’ है, जो कुमाऊं क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। गोलू देवता की लोकगाथा पर आधारित ये फिल्म ऐसे समय में आ रही है, जब नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। इसकी शुरुआत भले ही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही हो, लेकिन बाद में फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। अब ‘बाला गोरिया’ को लेकर भी मेकर्स ऐसी ही उम्मीद लगाए बैठे हैं। ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की कहानी है, जिनके बारे में देश और विदेश में बड़ी संख्या में लोग जानते हैं। इसके मुकाबले गोलू देवता की पहचान खास तौर पर उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र में ज्यादा है। इसलिए ‘बाला गोरिया’ के मेकर्स को दूसरे राज्यों के दर्शकों तक अपनी कहानी पहुंचाने के लिए हाई प्रमोशन की जरूरत होगी। शुरुआती रिपोर्ट्स की मानें, तो यह फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कमाई को देखते हुए इसे टाल दी गई। अब फिल्म के नवंबर में रिलीज होने की संभावना है। ‘बाला गोरिया’ की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लोकदेवता गोलू देवता से जुड़ी है। उन्हें गोल्ज्यू महाराज और न्याय के देवता के नाम से भी जाना जाता है। अल्मोड़ा के चितई, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, गोलू देवता के दरबार में लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें चिट्ठियों में लिखकर अर्पित करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में घंटियां चढ़ाकर आभार जताते हैं। लोककथा के मुताबिक, गोलू देवता का जन्म राजपरिवार में हुआ था। बताया जाता है कि परिवार के भीतर हुई साजिशों के बावजूद वह जीवित बच गए और आगे चलकर न्यायप्रियता के लिए पहचाने गए। इसी वजह से लोगों के बीच उनकी छवि ऐसे देवता की बनी, जिनसे अन्याय के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई जाती है।

तंग गलियों और आस-पास संवेदनशील इमारतों की वजह से जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त नहीं था: किरण बेदी

नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल किरण बेदी ने मंगलवार को कहा कि संकरी गलियों, संवेदनशील इमारतों और सरकारी दफ्तरों के पास में होने की वजह से जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर ठीक नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब रामलीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत दी जाए, तो वहां सुरक्षा और कामकाज का साफ-सुथरा प्लान होना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए किरण बेदी ने याद किया कि कैसे दशकों में दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें बदलती रहीं। उन्होंने कहा, “दिल्ली शहर में पुलिसिंग के अपने कार्यकाल के दौरान, मैंने विरोध-प्रदर्शन की जगहों को बदलते देखा है। प्रधानमंत्री आवास, तीन मूर्ति मार्ग (तब श्रीमती गांधी का आवास) से लेकर 1970 के दशक की शुरुआत में लुटियंस दिल्ली की सड़कों तक, 1980 के दशक में इंडिया गेट, बोट क्लब और फिर जंतर-मंतर तक।” बेदी ने कहा, “हर शहर को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति (जिसे हम विरोध-प्रदर्शन भी कहते हैं) के लिए एक खुली जगह की जरूरत होती है, लेकिन अक्सर इसकी व्यवस्था करना भूल जाते हैं। शहर के योजनाकार कृपया ध्यान दें; तंग गलियों और संवेदनशील इमारतों व दफ्तरों के पास होने के कारण जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर सबसे कम उपयुक्त था।” उन्होंने कहा, “कनॉट प्लेस कॉम्प्लेक्स जैसे मशहूर कमर्शियल इलाके के अलावा, मुझे लगता है कि उस समय प्रशासन ने वह फैसला लेने में गलती की और इतने समय तक उसे सुधारा नहीं। इसके नतीजे सबके सामने हैं। गृह मंत्रालय ने रामलीला मैदान और दूसरी जगहों की पहचान की है। शायद इस बदलाव के लिए अदालती दखल की जरूरत थी। अब हमें रामलीला मैदान के लिए एक साफ सुरक्षा और कामकाज की योजना चाहिए, जिसे मंजूरी देते समय बताया जाए।” किरण बेदी की ओर से ये बातें दिल्ली पुलिस की ओर से सोमवार को जारी एक आदेश के बाद सामने आईं, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया और प्रदर्शनों के लिए तीन वैकल्पिक जगहों की पहचान की गई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विरोध-प्रदर्शन के लिए नई जगहें घोषित किया है। जंतर-मंतर सेंट्रल दिल्ली में है, जो संसद भवन से मुश्किल से एक किलोमीटर दूर है। उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी ग्राउंड लगभग 23 किलोमीटर दूर है, जबकि शाहदरा में सीबीडी ग्राउंड लगभग 12 किलोमीटर दूर है। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर दूर है। सरकार के इस फैसले की विपक्षी पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से आलोचना की गई है।