बेंगलुरु: त्रैमासिक सम्मेलन में ईडी के अधिकारियों ने प्रौद्योगिकी के उपयोग और त्वरित सुनवाई पर जोर दिया

बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां आयोजित दो दिवसीय 36वें क्षेत्रीय अधिकारियों के त्रैमासिक सम्मेलन में प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं के व्यापक उपयोग, सुनवाई और दोषसिद्धि में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट कार्यसूची को अंतिम रूप दिया। बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में आयोजित यह सम्मेलन मंगलवार को समाप्त हुआ, जिसमें ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कानूनों के निष्पक्ष प्रवर्तन और भारत की वित्तीय प्रणाली की अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में ईडी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14-15 सितंबर को बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में क्षेत्रीय अधिकारियों का अपना 36वां त्रैमासिक सम्मेलन (क्यूसीजेडओ) सफलतापूर्वक आयोजित किया, इससे पहले 13 सितंबर को आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों द्वारा एक प्रबंधन और नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया था। बयान में आगे कहा गया कि सम्मेलन आगामी तिमाही के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ समाप्त हुआ, जिसमें कैडर पुनर्गठन का समयबद्ध कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं का पूर्ण उपयोग, मुकदमों और सजाओं में तेजी लाना और आर्थिक अपराध के पीड़ितों को निरंतर मुआवजा दिलाना शामिल है। एक बयान में कहा गया कि कार्यशाला के सत्रों का संचालन आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इनमें भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के संदर्भ में वित्तीय जांच का भविष्य, आर्थिक अपराध जांच में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग, डीपफेक और एआई-सक्षम धोखाधड़ी से जुड़े जोखिम, साइबर खतरे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया। बयान में आगे कहा गया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से संबद्ध संघीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक विशेष एजेंट के इनपुट ने चर्चाओं को और अधिक मूल्यवान बनाया। बयान में यह भी कहा गया कि विश्व बैंक समूह की चोरी की संपत्ति वसूली पहल के माध्यम से ज्ञान साझा करते हुए संपत्ति का पता लगाने और उसकी वसूली जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। बयान में कहा गया कि सभी सत्रों में बार-बार सामने आने वाला विषय जांच के लिए मामले-केंद्रित दृष्टिकोण से पारिस्थितिकी तंत्र-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने, प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग करने के साथ-साथ उनसे जुड़े जोखिमों के प्रति सचेत रहने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता थी।
बांसवाड़ा में महिला को पीटकर अर्धनग्न घुमाने के मामले में एनएचआरसी सख्त, राजस्थान के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक महिला के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिला पर आरोप था कि वह किसी दूसरे पुरुष के साथ घर से चली गई थी, जिसके बाद उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने जबरदस्ती उसके बाल काट दिए, उसे डंडों से पीटा और अर्धनग्न हालत में घुमाया। एनएचआरसी ने माना है कि अगर मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो इससे पीड़ित के जीवन और सम्मान के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। इसलिए, एनएचआरसी ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव और बांसवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उम्मीद है कि इस रिपोर्ट में जांच की स्थिति और पीड़ित को दिए गए मुआवजे (अगर कोई हो) की जानकारी भी शामिल होगी। 4 सितंबर को आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना कथित तौर पर 1 सितंबर को हुई थी। यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो वायरल हुआ। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था ने कहा कि महिला के साथ उसके पति और अन्य रिश्तेदारों ने सबके सामने क्रूरता और अमानवीय व्यवहार किया था। ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति भारत की चिंता को दर्शाती है। इसका मुख्य काम मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। मानवाधिकारों का अर्थ है व्यक्तियों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से जुड़े अधिकार, जिनकी गारंटी संविधान देता है या जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल हैं और जिन्हें भारत की अदालतों में लागू किया जा सकता है। मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली इस शीर्ष संस्था के पास यह अधिकार है कि वह मानवाधिकार उल्लंघन की औपचारिक शिकायत मिले बिना भी मीडिया रिपोर्ट, सार्वजनिक जानकारी या अन्य स्रोतों के आधार पर स्वतः संज्ञान ले सके।
राज पंचायत चुनाव: रिजर्वेशन लॉटरी टली, प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई तारीखें तय होंगी

जयपुर। राजस्थान पंचायती राज विभाग ने पंचायती राज चुनावों के लिए रिजर्वेशन लॉटरी को टाल दिया है, जो 17 और 18 सितंबर को होनी थी। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया (जिसमें चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन का चुनाव भी शामिल है) पूरी होने के बाद नई तारीखों का ऐलान किया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने राज्य चुनाव आयोग को बताया कि 17 और 18 सितंबर को होने वाली लॉटरी पहले बताई गई तारीखों पर नहीं होगी। इसकी वजह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़ी चल रही प्रक्रिया है। जिला कलेक्टर और दूसरे सीनियर अधिकारी अभी चुनाव से जुड़े कामों में लगे हैं, इसलिए पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण की प्रक्रिया एक साथ करना मुश्किल हो रहा है। पुराने शेड्यूल के मुताबिक, जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी 17 सितंबर को होनी थी। अगले दिन, यानी 18 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच के पदों के लिए आरक्षण लॉटरी होनी थी। यह लॉटरी बहुत जरूरी है क्योंकि इससे अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों और पदों के आरक्षण का स्टेटस तय होगा, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और लागू होने वाली दूसरी श्रेणियों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं। लॉटरी टलने की वजह से संभावित उम्मीदवारों को यह जानने के लिए और इंतजार करना होगा कि उनकी सीट खुली रहेगी या आरक्षित श्रेणी में आएगी। राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए संदेश के अनुसार, शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरक्षण लॉटरी का नया शेड्यूल तय किया जाएगा। इसका मतलब है कि पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब राज्य शहरी निकाय चुनावों के बाकी चरण पूरे कर लेगा। इसलिए, यह देरी मुख्य रूप से एक प्रशासनिक फैसला है। इसका मकसद यह पक्का करना है कि जिला-स्तर के अधिकारी अगली बड़ी चुनावी प्रक्रिया शुरू करने से पहले चुनाव से जुड़ी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां पूरी कर सकें। पंचायती राज चुनावों से पहले आरक्षण लॉटरी सबसे अहम पड़ावों में से एक है। जब तक लॉटरी पूरी नहीं हो जाती, तब तक जिला परिषद सदस्यों, प्रधानों, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों जैसे पदों के लिए आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होगी। नतीजतन, इस देरी की वजह से चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों और स्थानीय नेताओं को अपनी चुनावी योजनाएं तय करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद उम्मीद है कि संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियां तेज कर देंगी, उम्मीदवारों की पहचान करेंगी और स्थानीय स्तर पर प्रचार शुरू कर देंगी। राजस्थान का चुनावी कैलेंडर अब स्थानीय निकाय के एक बड़े चुनाव से दूसरे चुनाव की ओर बढ़ रहा है। अभी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पूरे किए जा रहे हैं, और उम्मीद है कि शहरी निकाय चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद पंचायती राज चुनावों की तैयारियां तेज हो जाएंगी। हालांकि, अभी के लिए राजनीतिक कैलेंडर में आरक्षण लॉटरी अगली अहम तारीख बन गई है। नई तारीखों से यह तय होगा कि चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार कब जान पाएंगे कि उनकी स्थिति क्या है और राजस्थान की अगली बड़ी जमीनी चुनावी लड़ाई कब पूरी तरह से प्रचार के दौर में प्रवेश कर पाएगी।
‘ऐसे हथकंडे और धोखेबाजी कोई नई बात नहीं’, जैश प्रमुख मसूद अजहर पर पाकिस्तान के फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान के उस कदम की कड़ी आलोचना की, जिसमें उसने ग्लोबल आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के चीफ मसूद अजहर की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की रकम बढ़ाई है। भारत ने इस ‘झूठी घोषणा’ को सिर्फ एक ‘चाल’ बताया और कहा कि ऐसे ‘खोखले’ बयान पहले भी दिए जा चुके हैं। मंगलवार को नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान से कहा कि वह ऐसे ‘झूठे ऐलान’ करने के बजाय आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करे। मैं बस इतना ही कहूंगा कि पाकिस्तान की ऐसी चालें और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कोई नई बात नहीं हैं। हमने पहले भी ऐसी चालें देखी हैं। हम सब जानते हैं कि इसमें कोई दम नहीं है। उन्हें कार्रवाई करनी चाहिए, न कि ऐसे झूठे ऐलान करने चाहिए, जिनका कोई मतलब नहीं है।” पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए का नया इनाम घोषित किया है। एजेंसी का दावा है कि आतंकवादी अफगानिस्तान में छिपा हुआ है, जबकि इंटेलिजेंस एजेंसियों और दुनियाभर के जानकारों का मानना है कि यह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की नजर से बचने की एक कोशिश है। भारत में कई आतंकी हमलों, खासकर पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर के पाकिस्तान में छिपे होने की बात कही जाती रही है, लेकिन इस्लामाबाद ने हमेशा इससे इनकार किया है। अजहर के अलावा, एफआईए की नई ‘रेड बुक’ में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 अन्य आतंकवादियों के नाम भी शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब पाकिस्तान पर टेरर फंडिंग और आतंकी समूहों के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर नजर रखी जा रही है। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों और पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का मानना है कि इनाम की राशि बढ़ाने का मकसद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा करना है, जबकि उसकी असल जगह को अंतरराष्ट्रीय जांच से दूर रखना है। इनाम बढ़ाने की घोषणा करते हुए एफआईए ने कहा कि अजहर अफगानिस्तान में है, पाकिस्तान में नहीं। इस दावे को अफगान तालिबान कई बार खारिज कर चुका है। भारतीय इंटेलिजेंस अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि अजहर पाकिस्तान में ही है। जानकारों का कहना है कि इनाम की राशि बढ़ाना सिर्फ एफएटीएफ को गुमराह करने के लिए है। पाकिस्तान का यह दावा गलत है कि अजहर अफगानिस्तान में है, और आईएसआई उसे वहां रखने का जोखिम नहीं उठाएगी, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब एफआईए ने अजहर पर इनाम घोषित किया है। 2021 में, एफआईए ने 50 लाख पाकिस्तानी रुपए के इनाम का ऐलान किया था। उस समय भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि वह उसकी जमीन पर नहीं है। 2021 में इनाम की घोषणा के बाद भी जैश और अजहर के मामले में ज्यादा कुछ नहीं बदला। अजहर की देखरेख में जेईएम ने जम्मू-कश्मीर में नए तरीके अपनाए हैं, जैसे कि हाइब्रिड वॉरफेयर की तरफ बढ़ना और प्रॉक्सी फ्रंट बनाना। एफएटीएफ की नजर से बचने के लिए, जैश ने ‘पीपल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट’ (पीएएफएफ) जैसे प्रॉक्सी आतंकी संगठनों के जरिए काम किया। इस संगठन ने पुंछ और राजौरी के घने जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए जानलेवा हमलों की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का अभी मुख्य मकसद अजहर को सुरक्षित रखना और उसे एफएटीएफ की नजर से दूर रखना है।
सागर शराब कांड में सात पीड़ितों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है: प्रियांक कानूनगो

सागर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मंगलवार को कहा कि मध्य प्रदेश के सागर में नकली शराब कांड में सात लोगों की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने घटना में हुई मौतों के बारे में स्पष्टता की मांग की। कानूनगो ने सागर जिले का दौरा किया और पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। बाद में उन्होंने घटना, जांच और राहत उपायों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के साथ बैठक भी की। कानूनगो ने घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से इस त्रासदी का राजनीतिकरण न करने की अपील की ताकि प्रभावित परिवारों को सहायता मिल सके और दोषियों को सजा मिल सके। कानूनगो ने कहा कि सागर जिला प्रशासन ने बताया है कि डॉक्टरों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि इन सात लोगों की मौत शराब के सेवन से हुई है या नहीं। उन्होंने बताया कि मृतकों के सातों परिवारों को सरकार की ओर से 2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। सागर में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य कानूनगो ने कहा कि जिन लोगों की मृत्यु का स्पष्ट संबंध नकली शराब के सेवन से है, उनके परिवारों को 4 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी प्रशासन से आग्रह करेगा कि स्वीकृत मुआवजा अगले दो दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों तक पहुंच जाए। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि लोग चल रही जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। कानूनगो ने कहा कि परिवारों ने शिकायत की है कि बड़े शराब माफिया से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के नाम उनके बयानों में शामिल नहीं किए गए हैं और कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हमने पुलिस से ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है। एनएचआरसी सदस्य ने कहा कि कुछ परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न गांवों में शराब बेचने में शामिल कई एजेंट मामले में गिरफ्तारी के बावजूद अभी भी फरार हैं। यह घटना इस महीने की शुरुआत में तब सामने आई जब सागर जिले के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र के गांवों में नकली शराब के संदिग्ध सेवन से कई लोग बीमार पड़ गए। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में कुछ लोगों की मौत भी हुई। मृतकों की संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है, जांच के दौरान अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। पुलिस ने अब तक इस मामले में 33 आरोपियों की पहचान की है और उनमें से 18 को गिरफ्तार कर लिया है। जांच अवैध शराब की आपूर्ति और वितरण में शामिल संदिग्ध नेटवर्क पर केंद्रित है।
‘सहयोग की लिस्ट लंबी करना चाहते हैं, भारत से संबंध बेहतर बनाना लक्ष्य’, ब्रिक्स समिट के बाद चीन का बड़ा बयान

नई दिल्ली। नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने का बड़ा संकेत दिया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि चीन, दोनों नेताओं के बीच बनी सहमतियों को लागू करने और सहयोग की लिस्ट को और लंबा करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह तीन साल में उनकी तीसरी मुलाकात थी, जो कजान में द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से शुरू करने से लेकर तियानजिन में और सुधार करने तक के मार्गदर्शन के बाद चीन-भारत संबंधों के विकास की दोनों नेताओं की पुष्टि को दर्शाती है। सबसे महत्वपूर्ण सहमति यह बनी कि चीन और भारत को साझेदार होना चाहिए।” चीनी राजदूत ने आगे कहा कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के तौर पर, चीन और भारत को विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो सबसे बड़ा साझा बिंदु है, मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को मजबूत करना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों के बारे में जनता की धारणा में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को संतुलित तरीके से एक-दूसरे की आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को दूर करना चाहिए और आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के स्वस्थ और स्थिर विकास को बढ़ावा देना चाहिए। दोनों पक्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करने, ग्लोबल साउथ में सहयोग को बढ़ावा देने, बहुध्रुवीय दुनिया के निर्माण में मदद करने और अस्थिर दुनिया में प्रगति और स्थिरता की ताकत के रूप में काम करने पर सहमत हुए। साथ ही, दोनों नेता सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए चीन और भारत के बीच विवादों और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर सहमत हुए। शू फेइहोंग ने कहा कि चीन दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमतियों को लागू करने, सहयोग की सूची को और लंबा करने, लोगों के बीच आदान-प्रदान को गहरा करने, बहुपक्षीय मंचों पर और अधिक निकट सहयोग करने, हमारे संबंधों को बेहतर बनाने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने और एक-दूसरे के विकास और पुनरुत्थान का दृढ़ता से समर्थन करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि हम क्षेत्र और उससे परे शांति और समृद्धि में योगदान दे सकें।
पायलट के नेतृत्व में पंजाब कांग्रेस नेतृत्व ने चंडीगढ़ में वित्त मंत्री चीमा के खिलाफ प्रदर्शन किया

चंडीगढ़। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नव नियुक्त महासचिव और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी के पूरे शीर्ष नेतृत्व ने लंबे समय बाद अपने मतभेदों को भुलाकर हजारों कार्यकर्ताओं के साथ मंगलवार को पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा के आवास की ओर मार्च किया। चीमा पर दलित गुलजार सिंह की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है और उन्होंने चीमा के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को चीमा के आवास तक पहुंचने से रोक दिया। इसके अलावा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। वाटर कैनन की तेज बौछार से वरिष्ठ नेता कुलजीत नागरा समेत कई पार्टी कार्यकर्ता घायल हो गए। इस अवसर पर बोलते हुए पायलट ने कहा कि कांग्रेस का वित्त मंत्री के खिलाफ कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। लेकिन उन्होंने पूछा, क्या कानून के तहत यह अनिवार्य नहीं है कि जब कोई व्यक्ति अपने मृत्यु पूर्व बयान में मंत्री का नाम लेता है, तो उसके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए और उसके बाद विस्तृत जांच की जाए? पायलट ने कहा कि गुलजार सिंह की आत्महत्या पंजाब में हो रही घटनाओं का प्रतिबिंब है, जो आम आदमी पार्टी के दावों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी है कि एक गरीब दलित को सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि उसने उन नशीले पदार्थों की मुफ्त उपलब्धता पर सवाल उठाया था, जिनका शिकार उसका बेटा हुआ था। उन्होंने आम आदमी पार्टी को याद दिलाया कि उसने एक दलित उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति की घोषणा की थी। दलित उपमुख्यमंत्री की बात तो छोड़िए, गुलजार सिंह जैसे दलित आम आदमी पार्टी के शासन में आत्महत्या करने को मजबूर हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को चुनाव से पहले किए गए उनके उस दावे की याद दिलाते हुए कि सरकार बनने के तीन महीने के भीतर नशीले पदार्थों का सफाया कर दिया जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी के लगभग पांच साल के शासन के बाद, अब ‘चिट्टा’ (नशीली दवा) इतनी आसानी से उपलब्ध है कि इसकी ‘होम डिलीवरी’ भी हो रही है। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में एकजुट होने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए पायलट ने उनमें से प्रत्येक को आश्वासन दिया कि कांग्रेस हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के उच्च कमान के प्रतिनिधि के रूप में वे न्याय दिलाने के लिए हर लड़ाई और संघर्ष में सबसे आगे रहेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता की गरिमा और सम्मान को बहाल करने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
आरएसएस की सेवा की सदी भारत की सेवा परंपरा को दर्शाती है: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को नई दिल्ली के उपराष्ट्रपति भवन में तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदर्यराजन द्वारा लिखित पुस्तक ‘ए सेंचुरी ऑफ सर्विस – द आरएसएस इन 100 एक्ट्स ऑफ सेवा’ का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह किताब आरएसएस की सौ साल की सेवा, उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र-निर्माण में उसके योगदान को दर्ज करती है। यह मानते हुए कि ‘आज की खबर कल का इतिहास बन जाती है,’ सीपी राधाकृष्णन ने अच्छे कार्यों को दर्ज करने के महत्व पर जोर दिया, अन्यथा वे लोगों की यादों से मिट सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह किताब दर्शाती है कि कैसे सेवा की भावना लगातार सामाजिक सेवा में बदल गई है। ‘सेवा ही धर्म है, यह एक कर्तव्य है’, को एक बुनियादी आदर्श बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस की सेवा पहल समाज के गरीब, हाशिए पर रहने वाले और अलग-अलग वर्गों, जिनमें मजदूर, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, तक पहुंची है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भोजन, दवाइयां और जरूरी मदद पहुंचाने में आरएसएस स्वयंसेवकों की भूमिका को याद किया। किताब में ‘चरित्र-निर्माण के जरिए राष्ट्र-निर्माण’ के विषय का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए देशभक्ति, अनुशासन, सामाजिक ज़िम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि यह किताब न केवल आरएसएस की सौ साल की सेवा का रिकार्ड होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सेवा की परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को दिखाने वाला एक दस्तावेज भी होगी। उपराष्ट्रपति ने डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन और इस प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इतिहास को दर्ज करने की ऐसी और भी कोशिशें होंगी। सूचना और प्रसारण तथा संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, पुडुचेरी के गृह मंत्री ए. नमासिवयम और डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन इस मौके पर मौजूद थे।
यूसीसी को लेकर अमित शाह के बयान पर घमासान, मोहसिन रजा बोले- ये जनहित और देशहित का कानून

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन मोहसिन रजा ने यूसीसी का समर्थन करते हुए इसे सभी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बताया। वहीं, बिहार में एनडीए के घटक दलों ने कहा है कि वे यूसीसी के विस्तृत प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद अपना रुख स्पष्ट करेंगे। लखनऊ में मोहसिन रजा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भाजपा ने यूसीसी को अपने संकल्प के तौर पर रखा है और केंद्र सरकार इसी संकल्प के तहत आगे बढ़ रही है। उन्होंने विपक्ष पर अच्छे कार्यों का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूसीसी जनहित और देशहित में लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित करना है, ताकि किसी के अधिकारों का हनन न हो। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि अगर यूसीसी आम जनता के हित में है तो उसे लेकर आपत्ति क्यों है। जनता चाहती है कि देश में समान नागरिक संहिता लागू हो और विपक्ष का विरोध राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। पटना में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने यूसीसी को लेकर कहा कि अभी सरकार की ओर से विस्तृत प्रस्ताव सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए। प्रस्ताव आने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और पार्टी के भीतर विचार-विमर्श करके ही रुख स्पष्ट किया जाएगा। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा द्वारा इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से बात करने की बात कहे जाने पर कुशवाहा ने कहा कि हर पार्टी अपने स्तर पर राय तय करेगी। उनकी पार्टी प्रस्ताव को देखने के बाद ही अपनी स्थिति बताएगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने आने पर कुशवाहा ने केंद्र और राज्य सरकार की तैयारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बाढ़ की स्थिति को लेकर संवेदनशील हैं और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के बाद केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक पहल की जाएगी। प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है। वहीं, बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर नेता विपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि विपक्ष को जो कहना है, वह कहने दिया जाना चाहिए।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने मनाया ‘स्वच्छता पखवाड़ा,’ कार्यालयों से लेकर एनआईपीईआर और जन औषधि केंद्रों तक चला सफाई अभियान

नई दिल्ली। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 1 से 15 सितंबर, 2026 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ का आयोजन किया। यह पखवाड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” के विजन के अनुरूप मनाया गया, जिसमें विभाग, एनआईपीईआर और पीएसयू के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभाग ने इस दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया कि साफ-सुथरा और स्वस्थ परिवेश बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है। स्वच्छता पखवाड़ा की शुरुआत 1 सितंबर, 2026 को हुई, जब फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। इसके बाद पूरे पखवाड़े के दौरान कई स्वच्छता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अधिकारियों ने अपने कार्यस्थलों और कार्यालय परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाए। इस पहल के तहत संयुक्त सचिव अमन शर्मा के नेतृत्व में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने नई दिल्ली के जनपथ भवन मार्केट में श्रमदान किया और आम लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। विभाग ने कार्यालयों में पड़े पुराने फर्नीचर, फिक्स्चर और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी बेकार हो चुकी चीजों की व्यापक समीक्षा की और उनकी मरम्मत, निपटान और व्यवस्थित प्रबंधन किया। साथ ही कार्यालयों में कीट-नियंत्रण अभियान भी चलाया गया ताकि कार्यस्थल स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बना रहे। सभी सात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) में भी ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। कैंपस में सफाई अभियान चलाए गए, जिनमें फैकल्टी सदस्यों, छात्रों और स्टाफ ने मिलकर अपने संस्थान के परिसर की साफ-सफाई की। कई कैंपस में स्वच्छता के साथ-साथ हरियाली बढ़ाने के लिए पेड़ लगाने का कार्य भी किया गया। विभाग के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में भी विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियां चलाई गईं, जिसमें कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) ने भी अपने ऑफिस परिसर में ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ मनाया और इस अभियान को देश भर के जन-औषधि केंद्रों तक विस्तार दिया। इससे यह संदेश मजबूत हुआ कि साफ-सुथरा माहौल जन-स्वास्थ्य और भलाई के लिए कितना जरूरी है। इस पखवाड़े ने अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को एक मंच पर लाकर स्वच्छता के लिए मिलकर काम करने की प्रेरणा दी। विभाग ने अंत में “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” की भावना को फिर से दोहराते हुए कहा कि साफ-सुथरे कार्यस्थलों और समुदायों के निर्माण के लिए लगातार भागीदारी और जिम्मेदार व्यवहार बेहद जरूरी है।