खड़गे बोले- ‘पहले वोट चोरी और फिर विरोध करने के अधिकार की चोरी, भाजपाई तानाशाही का प्रमाण’

नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पहले ‘वोट चोरी’ और फिर ‘विरोध करने के अधिकार की चोरी’ भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे अब कोई नहीं झुकेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “गृह मंत्री (अमित शाह) की ओर से एसआईआर में बाहर 13.3 करोड़ भारतीयों को ‘घुसपैठिया’ घोषित करना भारतीयता का अपमान है।” उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल से हटाकर, पहले ‘वोट चोरी’ फिर ‘विरोध करने के अधिकार की चोरी’ भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है। ज्ञानेश कुमार को बचाना बंद कीजिए। सत्ता से सवाल पूछने वालों को जेल, युवाओं को लाठी-डंडे, जबरन हिरासत, हमारी बेटियों से पुलिसिया बर्बरता और आरएसएस के गुंडों को खुलेआम छूट, मोदी-शाह की दमनकारी नीतियों के आगे अब कोई नहीं झुकेगा।” मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि देश आवाज उठा रहा है, भाजपा से एक-एक बात का हिसाब लेकर रहेगा। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एसआईआर का लगातार बचाव कर रहे केंद्रीय गृह मंत्री से तीन बेहद सरल और सीधे सवाल हैं। पहला- कितने घुसपैठियों की पहचान हुई?, दूसरा- कितने घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए? और कितने घुसपैठियों को देश से बाहर भेजा गया?” जयराम रमेश ने लिखा, “100 करोड़ भारतीयों को एसआईआर की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। उन्हें इसके नतीजे जानने का पूरा अधिकार है। हकीकत यह है कि ‘शाह इंस्टीगेट रिमूवल’ (एसआईआर) के सूत्रधार बार-बार घुसपैठियों का तर्क देकर असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि असलियत यह है कि पीएम-गृह मंत्री की हताश जोड़ी ने करीब 14 करोड़ भारतीयों से उनका वोट देने का संवैधानिक अधिकार छीन लिया है।” कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि क्या गृह मंत्री यह कहना चाहते हैं कि ये 14 करोड़ भारतीय घुसपैठिए हैं? क्या गृह मंत्री के तौर पर उनकी निगरानी में देश में घुसपैठियों की संख्या में इतनी भारी बढ़ोतरी हुई है?

बिहार : जर्जर नाव, मासूमों की मौत और मातम में डूबा गांव, दशहरा की खुशियां छीन ले गया वैशाली हादसा

हाजीपुर। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव दुर्घटना ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुए इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश बच्चे हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और मातम का माहौल है। जिन घरों से बच्चे भोज खाने के लिए निकले थे, वहां अब अपनों को खोने का असहनीय दर्द है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में हर तरफ गमगीन माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाव पर सवार होकर 20 से अधिक बच्चे और अन्य लोग भोज खाने जा रहे थे। इसी दौरान नाव क्षतिग्रस्त होने के कारण हादसा हो गया और उस पर सवार लोग नदी में डूबने लगे। घटना के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से डूबे लोगों की तलाश शुरू की गई। अब तक 13 शव निकाले जाने की सूचना है। हादसे में जान गंवाने वालों में बड़ी संख्या में बच्चों के शामिल होने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। बुधवार को फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश भी है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव सरकारी थी और लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी। नाव को बदलने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन दिए गए थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नाव बदल दी गई होती, तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और ग्रामीणों के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव कार्य के साथ स्थिति को संभालने की कोशिश की गई। एक ही गांव के कई बच्चों की मौत ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को भविष्य के सपनों के साथ बड़ा होते देखने की उम्मीद की थी, वे अब अपने जिगर के टुकड़ों को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है। इस त्रासदी ने एक बार फिर नदी पार करने के लिए सुरक्षित नावों, समय पर रखरखाव और प्रशासनिक जवाबदेही की जरूरत को सामने ला दिया है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि बाढ़ के दौरान राघोपुर में रात के समय नाव परिचालन को लेकर प्रतिबंध और सावधानियां जारी की गई थीं। ऐसे में हादसे की परिस्थितियों, रात में नाव के परिचालन और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच जरूरी है। लेकिन इस दुखद घड़ी में सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों का है, जिन्होंने एक साथ अपने बच्चों और प्रियजनों को खो दिया। लोगो का मानना है कि अब जरूरत है कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्धारण हो।

हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता के लिए भारत-आसियान सहयोग जरूरी : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक, सैन्य तालमेल और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत आसियान के साथ एक भरोसेमंद और समान भागीदार के रूप में काम करने के लिए तैयार है। समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना, नौसेनाओं और तटरक्षक बलों के बीच तालमेल बढ़ाना तथा पानी के भीतर होने वाली गतिविधियों की निगरानी में सहयोग करना क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अहम है। राजनाथ सिंह बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित आसियान-भारत डिफेंस थिंक टैंक्स फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान की शांति, स्थिरता, समृद्धि तथा खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रुचि है। भारत की हिंद-प्रशांत नीति में आसियान की केंद्रीय भूमिका है। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘सागर’ और ‘महासागर’ की परिकल्पना खुले और बहुध्रुवीय सहयोग को बढ़ावा देती हैं। इन प्रयासों को आसियान के नेतृत्व वाले मंचों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ समान भागीदारी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है। संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए। मतभेदों पर समय रहते और शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा होनी चाहिए, ताकि वे विवाद का रूप न लें। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी देश पर किसी एक पक्ष को चुनने का दबाव न हो और सभी देश मिलकर काम कर सकें। इसी वजह से भारत आसियान के नेतृत्व वाले मंचों, विशेष रूप से आसियान रक्षा मंत्रियों की विस्तारित बैठक (एडीएमएम-प्लस), को महत्वपूर्ण मानता है। भारत का दृष्टिकोण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर आसियान का दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। क्षेत्रीय मंचों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करने के बजाय सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए। राजनाथ सिंह ने समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने, दोनों पक्षों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा आपात स्थितियों में मिलकर कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और अन्य खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप संयुक्त प्रयास किए जाने चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष घोषित किया जाना साझा उद्देश्यों को ठोस कार्रवाई में बदलने का महत्वपूर्ण अवसर है। इसके तहत समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत को भी रक्षा संवाद का नियमित हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट आने से पहले ही दोनों पक्षों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना चाहिए, बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करनी चाहिए और आपसी तालमेल मजबूत करना चाहिए। इससे आपात स्थितियों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। राजनाथ सिंह ने भारत और आसियान के देशों के बीच रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, परीक्षण सुविधाओं को साझा करने, युवा शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान और नवाचार से जुड़ी योजनाओं पर मिलकर काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग में संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा, बौद्धिक संपदा के अधिकारों का सम्मान और तकनीक का जिम्मेदारी से आदान-प्रदान सुनिश्चित करना जरूरी है। इसका उद्देश्य उपयोगी रक्षा क्षमताओं का विकास करने के साथ-साथ भागीदार देशों के बीच विश्वास को मजबूत करना होना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा सहयोग को केवल हथियारों और उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसके बजाय संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन, रखरखाव, मरम्मत, तकनीकी सुधार, प्रशिक्षण और लंबे समय तक तकनीकी सहायता पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसे प्रयास स्थानीय कौशल विकसित करने, रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और आपूर्ति शृंखला को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का उद्देश्य देश की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आसियान के साझेदार देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार कई रक्षा क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए तैयार है। इनमें गश्ती जहाज, रडार, वायु रक्षा प्रणालियां, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है, जहां छोटे-बड़े सभी देशों को अपने निर्णय लेने, अपने हितों की रक्षा करने और शांतिपूर्ण तरीके से विकास करने की स्वतंत्रता हो। देशों की सुरक्षा तब और मजबूत होती है, जब वे मिलकर अपनी क्षमताओं का विकास करते हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हैं और संवाद के माध्यम से आपसी विश्वास बनाए रखते हैं।

पंजाब में ड्रग्स विरोधी एक्टिविस्ट की हत्या पर एनएचआरसी सख्त, प्रियांक कानूनगो बोले-यह कानून-व्यवस्था की विफलता

नई दिल्ली। पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह कानून-व्यवस्था के पूरी तरह से फेल होने का साफ उदाहरण है। प्रियांक कानूनगो ने कहा, “पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ काम करने वाले एक एक्टिविस्ट की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना बेहद गंभीर है और दिखाती है कि ड्रग्स बेचने वाले इतने बेखौफ हो गए हैं कि उन्हें कानून-व्यवस्था का कोई डर नहीं है। यह कानून-व्यवस्था न होने का एक साफ उदाहरण है।” उन्होंने बताया कि आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है और उनसे रिपोर्ट मांगी है। कानूनगो ने कहा कि एनएचआरसी की कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब सहित पूरे देश में नशे के खिलाफ काम करने वाले एक्टिविस्ट्स की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की हो। इसी मकसद से हम पूरे मामले की जांच करेंगे। प्रियांक कानूनगो ने पंजाब सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सरकार बर्दाश्त करना बंद कर देती है, तो ऐसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने इसके दो उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा, “एक बार मुख्यमंत्री से जब ड्रग्स के खिलाफ एक व्यक्ति ने बात की तो उसे पीटा गया। एक अन्य मामले में एक व्यक्ति ने वित्त मंत्री की बैठक में ड्रग्स के खिलाफ बात की और कथित तौर पर उसे इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने आत्महत्या कर ली।”कानूनगो ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से नशा बेचने वालों के हौसले बुलंद होते हैं। उन्हें लगता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा, “जब सरकार ड्रग्स के कारोबार में शामिल लोगों का साथ देती हुई दिखती है, तो यह एक गंभीर स्थिति होती है। यहां पर आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। सरकार को यह रणनीति बनानी होगी कि उसे नशा बेचने वालों पर प्रहार करना है, उनके साथ खड़ा नहीं दिखना है।

आजम खां की बढ़ीं मुश्किलें, जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नया मुकदमा दर्ज

रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजी गई जांच संबंधी जानकारी के आधार पर 13 अक्टूबर को दर्ज इस मुकदमे में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 13(1)(d) और 13(2) शामिल हैं। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जांच से संबंधित जानकारी साझा की थी। एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच करेगी। ईडी के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में इमारतों के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दर्शाया गया है। एजेंसी ने इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर होने का दावा किया है। जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी कार्यों के लिए जारी धनराशि और निर्माण सामग्री का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। ईडी ने अपनी शिकायत में करीब 55.8 करोड़ रुपये के ठेकेदारों से जुड़े निर्माण कार्यों, 23.41 करोड़ रुपये के सरकारी कार्यों और 6.60 करोड़ रुपये के विधायक एवं विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से संबंधित कार्यों का उल्लेख किया है। इन सभी मदों की कुल राशि करीब 85.81 करोड़ रुपये बताई गई है। ईडी ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी को आशंका है कि ठेकेदारों के माध्यम से कुछ रकम ट्रस्ट तक पहुंचाई गई और उसे दान के रूप में दर्शाया गया। जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन तथा निर्माण सामग्री के कथित इस्तेमाल की पड़ताल की गई। इस मामले में आजम खां, ट्रस्ट, संबंधित ठेकेदारों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच के विषय हैं।

इंदौर के हेड कॉन्स्टेबल के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी, 6.26 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

इंदौर। मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज (पीटीसी) में पदस्थ एक हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में इंदौर और देवास में 15 जगहों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में करीब 6.26 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला है। ड्राइवर के पद पर काम करने वाले फिरोज खान के खिलाफ यह कार्रवाई सुबह 6 बजे शुरू हुई। इंदौर और उज्जैन लोकायुक्त कार्यालयों की संयुक्त टीमों ने देवास में 11 और इंदौर में 4 जगहों पर तलाशी ली, जिनमें मकान, फ्लैट, कृषि भूमि और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने बताया कि खान की वेतन से आय लगभग 75 लाख रुपए आंकी गई है, जबकि अन्य स्रोतों सहित उसकी कुल आय लगभग 1.93 करोड़ रुपए आंकी गई है। राजेश सहाय ने संवाददाताओं से कहा, “प्रारंभिक जांच में लगभग 6.26 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति का पता चला है, जो उसकी अनुमानित आय से लगभग 223 प्रतिशत अधिक है।” शिकायत के अनुसार, खान पर आरोप है कि उसने पुलिस विभाग में अपने पद का इस्तेमाल देवास क्षेत्र में भूमि विवादों में हस्तक्षेप करने के लिए किया। उस पर बिचौलियों के माध्यम से संपत्तियों में निवेश करने, परिवार के सदस्यों और एक परिचित के नाम पर संपत्ति खरीदने, कई वाहन रखने और लकड़ी का व्यवसाय चलाने का भी आरोप है। जांच के दौरान लोकायुक्त को साहिल ट्रेडिंग कंपनी नाम की एक फर्म मिली, जो फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर पंजीकृत है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि फर्म के खाते के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। फिरोज खान की परिचित रोशनी वर्मा द्वारा संचालित एक अन्य फर्म रोशनी सेल्स एंड सर्विस भी जांच के दायरे में आई है। भूमि खरीद में कथित भूमिका के लिए वर्मा को मामले में आरोपी बनाया गया है। जांचकर्ता रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की एक रियल एस्टेट फर्म के माध्यम से खान के निवेश की भी जांच कर रहे हैं। जांच में इंदौर जिले की सांवेर तहसील के गुरन गांव में लगभग 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा एक सौदा भी शामिल है। जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे और उसके पिता के बीच विवाद चल रहा है। खान ने कथित तौर पर विवाद का इस्तेमाल वर्मा के नाम पर जमीन के लिए एक पंजीकृत समझौता कराने के लिए किया। लोकायुक्त जमीन के स्वामित्व और इसमें शामिल लोगों की कथित भूमिका को स्थापित करने के लिए दस्तावेजों की जांच कर रहा है। देवास में तलाशी में आदर्श नगर, पुष्पकुंज कॉलोनी, विजय नगर कॉलोनी, इंदिरा गांधी नगर और राधागंज सहित अन्य क्षेत्रों की संपत्तियां शामिल थीं। इंदौर में टीम ने बाणगंगा में वर्मा से जुड़े एक आवास और स्कीम नंबर 94 में मनोरमा अपार्टमेंट और श्रीनगर कॉलोनी में श्रीदेवी अपार्टमेंट में फ्लैटों की तलाशी ली। डीएसपी सुनील तलान और दीपक सेजवार देवास में तलाशी की निगरानी कर रहे हैं, जबकि डीएसपी आनंद चौहान और दिनेशचंद्र पटेल इंदौर में अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

एसआईआर को लेकर विपक्ष पर शायना एनसी का तंज, कहा-2029 की हार का बहाना अभी से तलाश रहे राहुल गांधी

मुंबई। शिवसेना नेता और प्रवक्ता शायना एनसी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करके अवैध रूप से रह रहे लोगों के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में संभावित हार के लिए अभी से बहाने तलाश रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा। शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि एसआईआर एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिसे कानून के अनुसार पूरा किया जा रहा है। यदि विपक्ष को इस प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध करके ऐसे मतदाताओं को बचाना चाहता है, जिनके नाम मतदाता सूची में कथित तौर पर अवैध रूप से शामिल हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका एजेंडा घुसपैठियों, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। चुनाव में हार का सामना करने पर विपक्ष एसआईआर, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री और यहां तक कि जनता को भी जिम्मेदार ठहरा सकता है। उन्होंने इन आरोपों को विपक्ष की बहानेबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आगामी चुनाव में लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष को अपनी राजनीतिक स्थिति और चुनावी रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि संवैधानिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर अपनी संभावित हार के लिए कारण तलाशने चाहिए। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर शायना एनसी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को कानून तोड़कर प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार एहतियाती कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आत्ममंथन करने और अपने उद्देश्य पर विचार करने की सलाह भी दी। आम जनता को परेशानी में डालने से कोई भी राजनीतिक दल कानून से ऊपर नहीं हो जाता। कर्नाटक कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर भी शायना एनसी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में केवल दो गुट नहीं बल्कि कई गुट हैं। कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं और पार्टी की अंदरूनी कलह सार्वजनिक हो रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान से जुड़ी और बातें सामने आ सकती हैं।

दिल्ली पुलिस का जवाब, ‘बार-बार कानून तोड़ने व दूसरों को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सौरभ दास और आशुतोष’

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर जवाब दिया है। पुलिस ने बुधवार को कहा कि सीजेपी के दोनों नेताओं को कानून के बार-बार उल्लंघन करने और दूसरे लोगों को उकसाने की आशंकाओं के मद्देनजर जेल भेजा गया है। दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने दोनों न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। साथ ही, सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे को रिहा कर दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि सीजेपी के अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपए के निजी बॉन्ड भरने और जमानत पर छह महीने तक ‘शांति और अच्छा व्यवहार’ बनाए रखने का आदेश दिया गया। पुलिस ने कहा, “13 अक्टूबर की सुबह, सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 11 अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है, और वे वहां एक निजी परिसर से होकर जबरन अंदर घुसे थे।” अधिकारियों के अनुसार, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें रोकने की कोशिश की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को उनके आधिकारिक काम करने से रोका। बयान में कहा गया, “सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।” इसमें आगे कहा गया कि कानून के अनुसार संबंधित मामलों में सभी लोगों को पाबंद किया गया। पुलिस ने आगे बताया कि बार-बार सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून तोड़ने की कोशिशों को देखते हुए, आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को कानून के संबंधित एहतियाती प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा, “सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को ऐसी ही गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने की उनकी कथित कोशिशों पर भी विचार किया गया। था। मामले पर विचार करने के बाद, एसईएम कोर्ट ने कलंद्रा (रिपोर्ट) के विवरण और कानून के बार-बार उल्लंघन को देखते हुए व इस गंभीर आशंका के आधार पर कि जमानत पर रिहा होने पर वे फिर से कानून तोड़ेंगे और दूसरों को भी कानून तोड़ने के लिए उकसाएंगे, सौरव दास और आशुतोष रंका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के नेताओं को ‘अराजक’ बताया, कहा-राहुल गांधी को सिर्फ अपनी चिंता

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को विपक्षी दलों और उनके नेताओं की आलोचना करते हुए उन्हें ‘अराजक’ बताया और आरोप लगाया कि वे जनता की चिंताओं को दूर करने के बजाय ध्यान खींचने और सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। रेखा गुप्ता ने सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया, “ये अराजक पार्टियां और अराजक नेता हैं। कभी वे (राहुल गांधी) गर्भवती पत्रकार पर हमला करते हैं, कभी पुलिस पर हमला करते हैं और कभी अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं की पिटाई कर देते हैं। उन्हें सिर्फ अपनी चिंता है। वे चाहते हैं कि सारा ध्यान उन पर हो, सिर्फ उनकी आवाज सुनी जाए और वे सत्ता में बने रहें।” ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्ष के विरोध पर सीएम गुप्ता ने कहा, “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन कई बार किया गया है और चुनाव आयोग ने हमेशा ये प्रक्रिया कराई है आयोजित किया है, चाहे राज्य या केंद्र स्तर पर कोई भी पार्टी सत्ता में रही हो। तब कोई आपत्ति क्यों नहीं थी? अब ऐसी आपत्तियां क्यों उठाई जा रही हैं?” दिल्ली का उदाहरण देते हुए गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में पिछली बार एसआईआर प्रक्रिया 2002 में हुई थी, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उन्होंने पार्टी के बाद के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या 2015 के बाद दिल्ली में उसने एक भी सीट जीती है। उन्होंने दावा किया, “क्या एसआईआर नहीं हुआ था? उसकी सीटें कहां गईं? लोगों ने कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया है और यही बात इन राजनीतिक दलों को परेशान कर रही है।” गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (आप) पर भी निशाना साधा और दिल्ली में चुनावी हार के बाद इस संशोधन प्रक्रिया का विरोध करने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब एसआईआर के बाद हुए चुनावों में पार्टी ने सरकार बनाई थी, तब उसने ऐसी कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी आप की आलोचना की, जहां पार्टी सत्ता में है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वहां बड़े पैमाने पर ड्रग रैकेट चल रहे हैं और जो लोग इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ता है। दिल्ली सरकार के हालिया कैबिनेट फैसले का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा, “कल, दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-सेवा और देश-सेवा के 25 साल पूरे होने पर सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। पूरी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री को बधाई दी और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने, देश की प्रगति को आगे बढ़ाने और राज्यों के विकास को बढ़ावा देने के लिए उनके लगातार किए गए कार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बिना रुके या बिना थके लगातार काम किया है। इसी तरह, उन्होंने हमेशा दिल्ली को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है और शहर की मदद के लिए लगातार आगे आए हैं। हम दिल्ली के 2 करोड़ लोगों की ओर से आभार व्यक्त करना चाहते हैं।” सरकार की हेल्थकेयर पहलों का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को अपनाया गया था। इस योजना के तहत केंद्र सरकार 5 लाख रुपये का हेल्थ कवरेज देती है, जबकि दिल्ली सरकार ने इसमें 5 लाख रुपये और जोड़े हैं। गुप्ता ने कहा, “मुझे खुशी है कि अब तक 9 लाख से अधिक लोग आयुष्मान भारत योजना के तहत रजिस्टर हो चुके हैं। हमने लगभग 65,000 क्लेम भी निपटाए हैं और 118 करोड़ रुपये का पेमेंट किया है। सरकार का लक्ष्य लगभग 1,100 आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाना है।” उन्होंने दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर भी ज़ोर दिया और कहा कि पिछले 12 सालों में केंद्र की मदद से 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं, चल रहे हैं या प्लानिंग के स्टेज में हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 12 सालों में केंद्र की मदद से दिल्ली में 1.25 लाख करोड़ रुपये के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट या तो पूरे हो चुके हैं, चल रहे हैं या प्लानिंग के स्टेज में हैं। यह एक बड़ा योगदान है। दिल्ली अब भीड़-भाड़ कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से ऐसा कर पा रहे हैं। केंद्र ने हमारे कई मुश्किल कामों की जिम्मेदारी ली है और प्रधानमंत्री इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए दिल्ली को मदद दे रहे हैं।

एयर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट को जयपुर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

नई दिल्ली। फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फ्लाइट में कथित हाईजैक खतरे से जुड़ा संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और विमान को दिल्ली के बजाय जयपुर डायवर्ट कर दिया गया। एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को एक सुरक्षा अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए एहतियाती कदम उठाए गए। विमान को जयपुर के राजस्थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां उसे सुरक्षा जांच के लिए अलग-थलग (आइसोलेशन बे) क्षेत्र में ले जाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल प्राप्त हुआ। इसके बाद करीब 9:10 बजे विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला लिया गया। विमान ने लगभग 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। लैंडिंग के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने विमान की गहन जांच शुरू की। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान से कथित तौर पर “स्क्वॉड 7500” सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका उपयोग पायलट किसी संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति की जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से देने के लिए करते हैं। इसी संकेत के मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं और विमान की प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान के सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया गया। किसी के घायल होने या किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद कुछ समय के लिए यात्रियों के बीच चिंता का माहौल जरूर बना, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान से हाईजैक अलर्ट क्यों प्रसारित हुआ। यह तकनीकी त्रुटि थी, गलत संकेत था या फिर किसी अन्य कारण से यह कोड सक्रिय हुआ, इसकी जांच की जा रही है। घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।