सुनीता विलियम्स : नासा के जरिए अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला

नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी और चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी। सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं, जो गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी हैं। सुनीता का पूरा नाम सुनीता लिन विलियम्स है। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। नासा में आने से पहले वह अमेरिकी नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट थीं और उन्होंने 30 से ज्यादा विभिन्न एयरक्राफ्ट में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। सुनीता को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना था। इससे पहले भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला थीं, जिन्होंने 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी थीं। कल्पना चावला के बाद सुनीता विलियम्स ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। सुनीता ने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को डिस्कवरी स्पेस शटल से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सपीडिशन 14 और 15 मिशन का हिस्सा रहीं। इस मिशन में उन्होंने 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो उस समय किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था। उन्होंने इस दौरान 4 बार स्पेसवॉक किया, जिसमें कुल 29 घंटे 17 मिनट तक वह अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर रहीं। दूसरी बार सुनीता 14 जुलाई 2012 को रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान से आईएसएस के लिए रवाना हुईं और एक्सपीडिशन 32/33 मिशन की कमांडर बनीं। इस मिशन में वह 127 दिन अंतरिक्ष में रहीं। सुनीता विलियम्स का तीसरा मिशन उनके करियर का सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण रहा। दरअसल, 5 जून 2024 को वह बोइंग के स्टारलाइनर क्रू फ्लाइट टेस्ट के तहत बैरी विल्मोर के साथ आईएसएस पर गईं। वैसे तो यह मिशन केवल 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में ही रुकना पड़ा। आखिरकार 18 मार्च 2025 को सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं। सुनीता के लिए सकुशल पृथ्वी पर वापस लौटना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद उनकी सुरक्षित वापसी हुई। अब तक सुनीता विलियम्स कुल 3 अंतरिक्ष मिशनों में 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं और 9 स्पेसवॉक किए, जिसका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट है। उन्हें भारत सरकार ने भी सम्मानित किया है। सुनीता ने अंतरिक्ष में भगवदगीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाने और अंतरिक्ष में समोसे का जिक्र कर भारत से अपना गहरा जुड़ाव दिखाया है।

शिवसेना के नाम-निशान पर बोले राजू वाघमारे- विरोधियों की दलीलें निराधार

नई दिल्ली। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और दिशा सालियान मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस को अपनी खोखली होती पार्टी पर ध्यान देने की नसीहत दी। शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कहा, “कोर्ट में हमारे चिन्ह और पार्टी के नाम को लेकर सुनवाई चल रही है। आज हमारे वकील ने उन सभी दलीलों को पूरी तरह से गलत बताया जो विरोधी पार्टी ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए दी थीं। उन्होंने दावा किया था कि इलेक्शन कमीशन सिंबल और पार्टी के बारे में कोई फैसला नहीं ले सकता, यह तर्क देते हुए कि अगर डिसक्वालिफिकेशन का मामला पेंडिंग है तो कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।” शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि हमारे वकीलों ने सफलतापूर्वक यह दिखा दिया कि कहीं भी, किसी भी एक्ट या कानून में यह नहीं लिखा है कि डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई चलने के दौरान इलेक्शन कमीशन को फैसला लेने से रोका गया है। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमें शिवसेना का नाम और निशान पूरी तरह से कानून और संविधान के दायरे में रहकर सौंपा है। आयोग ने संविधान, चुनाव आयोग के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। हमने न किसी की चोरी की है, न डाका डाला है। वाघमारे ने कहा कि यह फैसला बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए कानून के अनुसार ही दिया गया है। ऐसे में बचकाने पोस्ट करके राहुल गांधी क्या दिखाना चाहते हैं, समझ से परे है। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी पार्टी की तरफ देखना चाहिए। कांग्रेस अंदर से खोखली हो चुकी है और उनके नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। राहुल गांधी को शिवसेना पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए। शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने दिशा सालियान की मौत के मामले पर कहा, “दिशा सालियान के बुजुर्ग पिता, जिन्होंने अपनी बेटी को खो दिया है, के दुख को देखते हुए, उन्होंने अपने पास मौजूद सबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने एफआईआर में कई लोगों के नाम लिए हैं। आदित्य ठाकरे खुद कहते हैं कि वह दिशा सालियान से कभी मिले नहीं हैं और न ही उन्हें देखा है। जाहिर है कि अब जब एफआईआर में नाम आ गए हैं, तो लोग इस बारे में बात करेंगे।

राहुल गांधी गजनी हो गए हैं क्या? कांग्रेस भस्मासुर पार्टी है: प्रदीप भंडारी का तीखा पलटवार

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के एक्स पोस्ट को लेकर कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या वह गजनी हो गए हैं जो अपना इतिहास भूल गए। भाजपा नेता ने कांग्रेस को भस्मासुर पार्टी करार देते हुए कहा कि हर क्षेत्रीय दल तंग आकर ही बना है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “राहुल गांधी गजनी हो गए हैं क्या? कांग्रेस पार्टी ऐसी भस्मासुर पार्टी है जिसने हर क्षेत्रीय दल को तोड़ा और हर क्षेत्रीय दल इसलिए क्षेत्रीय बना क्योंकि वो कंग्रेस से तंग आ गया था। कांग्रेस को अपना इतिहास याद कराना चाहता हूं।” भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के इतिहास पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के तीन अलग-अलग चुनाव चिन्ह रहे हैं- 1952 से 1969 के बीच एक चिन्ह, 1971 से 1977 के बीच दूसरा, और 1977 के बाद से मौजूदा वाला चिन्ह। यह इस बात का सबूत है कि कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से कई बार टूटी है। उन्होंने कहा कि 1951 से अब तक कांग्रेस में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 70 विभाजन हो चुके हैं। चाहे शरद पवार का अलग पार्टी बनाना हो, ममता बनर्जी का अपनी पार्टी बनाना हो, या 1951 में जेबी कृपलानी का अलग होना हो, ये सभी घटनाएं बताती हैं कि कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा रही है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि आज लोकतंत्र की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सम्मान हुआ है। जब बंगाल की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को उखाड़ फेंका था, तो उनके पास न कार्यकर्ता बचे, न करीबी और न ही संगठन। ऐसे में नियम के मुताबिक कार्रवाई होना लाजिमी है। भंडारी ने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी लगाई, पहली कम्युनिस्ट सरकार को गिराया और जिसकी वजह से क्षेत्रीय दलों का जन्म हुआ, जिसके कई बार विभाजन के कारण चुनाव चिन्ह तक बदल गए, वही कांग्रेस आज संविधान को हाथ में लेकर घूमती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भारत के संविधान को कभी ठीक से पढ़ा ही नहीं है। इससे साफ होता है कि राहुल गांधी की कांग्रेस में हमेशा से ही कॉमन सेंस, लॉजिक और संविधान की हत्या होती रही है। इसलिए जब आज नियमों के तहत लोकतांत्रिक कार्रवाई हो रही है, तो राहुल गांधी बौखला रहे हैं। वह इसलिए बौखला रहे हैं क्योंकि देश का बच्चा-बच्चा उन्हें उनका इतिहास दिखा रहा है।

नंदीग्राम उपचुनाव पर कांग्रेस का वार, उदित राज बोले- भाजपा सहयोगियों को निगल जाती है

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता उदित राज ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार के नामांकन वापसी और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को जोड़ते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया, साथ ही भाजपा पर सहयोगी दलों को खत्म करने की रणनीति का आरोप लगाया। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “हमारी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी, वेणुगोपाल ने लिखा है कि जिस तरह से टीएमसी का चुनाव चिन्ह जब्त किया गया, वह बहुत ही अलोकतांत्रिक है। और यह ‘लिफाफा’ वाला मामला क्या है? नंदीग्राम की तरह ही, टीएमसी के उम्मीदवार पर दबाव, लालच या डर का इस्तेमाल किया गया होगा, जिससे वे पीछे हट गए। इससे पता चलता है कि देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है।” नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि इस घटना से यह बात पुष्ट हो जाती है कि टीएमसी उम्मीदवार पीछे हट गए। इसका मतलब है कि जो पीछे नहीं हटा, उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अगर कांग्रेस उम्मीदवार भी बाहर बैठने या चुनाव लड़ने से मना कर देता, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता। इसलिए, टीएमसी उम्मीदवार को जरूर डराया, धमकाया या रिश्वत दी गई होगी। यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा भी एक समय में क्षेत्रीय पार्टी थी। अगर कांग्रेस ऐसा करती तो भाजपा कभी अस्तित्व में नहीं आती। भाजपा ने शिवसेना से समझौता किया। शिवसेना और जनता दल यूनाइटेड बड़ी पार्टी थी और भाजपा छोटी थी। अब भाजपा बड़ी हो गई, शिवसेना खत्म हो गई। ऐसा उदाहरण कांग्रेस में नहीं है। उन्होंने अकाली दल और बीजद के साथ भी यही किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा जिसके साथ गई, उनकी बड़ी पार्टी को खत्म करके छोटा बना दिया और कांग्रेस जिसके साथ भी गई, चाहे राजद, सपा या कोई दूसरा दल हो, हमेशा छोटी ही रही। उदित राज ने कहा कि पंजाब की हालात बहुत खराब हैं। कानून नाम की कोई चीज नहीं है। पंजाब की सरकार दिल्ली वाले चला रहे हैं। राज्य नशे में डूबा हुआ है और कानून व्यवस्था की हालत दयनीय है।

हम भारत के खाते में एक और गोल्ड जोड़ना चाहते हैं, हमारी तैयारी बहुत अच्छी है: सुनील कुमार

नई दिल्ली। भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के कप्तान सुनील कुमार का मानना ​​है कि टीम आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए पूरी तरह तैयार है। लंबे समय तक चले ट्रेनिंग प्रोग्राम से खिलाड़ियों को कॉम्बिनेशन बनाने, रणनीति पर काम करने और अपनी व्यक्तिगत स्किल्स को बेहतर करने में मदद मिली है। 27 वर्षीय राइट डिफेंडर सुनील कुमार भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे। सुनील पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। इस बार वह अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं से सजी टीम की अगुवाई करेंगे। मौजूदा 12 सदस्यीय टीम में हांग्जो में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के चार खिलाड़ी शामिल हैं, जो सुनील, अर्जुन देशवाल, असलम इनामदार और पवन सहरावत हैं। टीम में प्रो कबड्डी लीग के जाने-माने खिलाड़ी जैसे आशु मलिक, जयदीप दहिया, देवांक दलाल और राहुल सेठपाल भी हैं, जबकि अयान लोहचब युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुनील ने कहा कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और कबड्डी फेडरेशन ने टीम का कैंप छह से आठ महीने पहले ही शुरू कर दिया था, जिससे खिलाड़ियों को अपने कॉम्बिनेशन और रणनीति पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिला। सुनील ने साई मीडिया से कहा, “तैयारी बहुत अच्छी रही है क्योंकि हमारे फेडरेशन और साई ने छह से आठ महीने पहले ही कैंप शुरू कर दिया था। हमने टीम के कॉम्बिनेशन और रणनीति की अच्छी योजना बनाई है। हमने पहले साई बेंगलुरु में प्रैक्टिस की, फिर ट्रेनिंग के लिए बेल्लारी गए, और फिर हमारा कैंप साई गांधीनगर में रहा।” लंबे समय तक चली तैयारी से खिलाड़ियों को अपनी भूमिकाओं को समझने और टीम की रणनीतिक सोच के बारे में बेहतर समझ बनाने में भी मदद मिली है। भारत कबड्डी में अपने शानदार रिकॉर्ड को आगे बढ़ाते हुए एशियन गेम्स में उतरेगा। पुरुष टीम ने पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, और सुनील, अर्जुन, असलम और पवन उस अभियान का हिस्सा थे। सुनील ने कहा, “हमारे सीनियर खिलाड़ियों ने टीम को एक अलग पहचान दी और भारत के लिए कई गोल्ड मेडल जीते। हम उस विरासत को बनाए रखना चाहते हैं, भारत के खाते में एक और गोल्ड मेडल जोड़ना चाहते हैं और उस रास्ते पर चलना चाहते हैं जो हमारे दिग्गजों ने बनाया है।” कप्तान ने टीम के तौर पर मिलकर खेलने की अहमियत पर भी जोर दिया, क्योंकि भारत के पास रेडिंग और डिफेंस दोनों में मजबूती है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक खिलाड़ी की कोशिश से जीत नहीं मिल सकती। इस बार, हमारी रेडिंग और डिफेंस दोनों ही टीमें काफी मजबूत हैं। हमारी टीम में कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी हैं, चाहे रेडर्स हों या डिफेंडर्स।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पूरी तैयारी कर ली है। हमने अपनी रणनीति, टीम कॉम्बिनेशन, फिटनेस और व्यक्तिगत स्किल्स पर काम किया है। अब प्रतियोगिता के दौरान हमें इन सभी चीजों को सही ढंग से लागू करना होगा। सिर्फ एक खिलाड़ी की कोशिश काफी नहीं होगी। सभी को योगदान देना होगा। हमारे रेडर्स, डिफेंडर्स और ऑलराउंडर्स को एक टीम के तौर पर मिलकर काम करना होगा।” कबड्डी प्रतियोगिता आइची प्रीफेक्चर के टोकाई शहर में टोकाई सिटिजन जिम्नेजियम में होगी। भारत का अभियान 21 सितंबर से शुरू होगा और फाइनल 26 सितंबर को खेला जाना है।

उत्कल यूनिवर्सिटी में प्रश्नपत्र लीक के आरोप पर बीजेडी ने सरकार को घेरा

भुवनेश्वर। ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने शुक्रवार को उत्कल यूनिवर्सिटी की प्लस थ्री सेकेंड सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के मामले में राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। बीजेडी ने इसे डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में छात्रों और ओडिशा के युवाओं के लिए एक और गंभीर झटका बताया। बीजेडी ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के केवल दो साल के कार्यकाल में राज्य के छात्रों और नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं को परीक्षा से जुड़ी 25 समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इनमें परीक्षाओं का रद्द होना, स्थगित होना, प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताएं शामिल हैं। पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “उत्कल यूनिवर्सिटी की ताजा घटना ने एक बार फिर निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से परीक्षाएं कराने की सरकार की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।” बीजेडी ने कहा कि छात्र परीक्षाओं की तैयारी में कई महीने लगाते हैं, जबकि उनके परिवार उनकी पढ़ाई और करियर के लिए आर्थिक और व्यक्तिगत रूप से काफी त्याग करते हैं। पार्टी के मुताबिक, हर बार परीक्षा रद्द या स्थगित होने, प्रश्नपत्र में गलती या कथित पेपर लीक की घटना से हजारों छात्रों के सामने अनिश्चितता पैदा होती है। इससे उनकी पढ़ाई की योजना प्रभावित होने के साथ उन पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक दबाव भी पड़ता है। बीजेडी ने कहा कि उत्कल यूनिवर्सिटी में सामने आई कथित घटना कोई अकेला मामला नहीं है। पार्टी ने दावा किया कि इस अवधि के दौरान परीक्षा से जुड़ी 25 नाकामियां और अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। बीजेडी प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि प्रशासन और परीक्षा प्रबंधन की नाकामियों की कीमत छात्रों और युवाओं को बार-बार नहीं चुकानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को परीक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा के साथ आयोजित हों। मोहंती ने मांग की कि परीक्षा से जुड़ी हर गंभीर अनियमितता की तय समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से जांच की जाए। जहां भी लापरवाही या प्रक्रिया में खामी सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, परीक्षा केंद्रों का सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित करने और निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने की मांग भी की। बीजेडी प्रवक्ता ने विश्वविद्यालयों, भर्ती बोर्डों और अन्य परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की मौजूदा परीक्षा प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा करने की भी मांग की। बीजेडी ने कहा कि ओडिशा के छात्रों और युवाओं के भविष्य को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सरकार को केवल नारे लगाने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए और पूरे राज्य में निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

यूथ वनडे: यशवर्धन चौहान का शानदार प्रदर्शन, भारतीय अंडर-19 टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 7 रनों से हराया

राजकोट। निरंजन शाह स्टेडियम में शुक्रवार को बारिश से प्रभावित पहले यूथ वनडे मैच में ऑलराउंडर यशवर्धन चौहान के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय अंडर-19 टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 7 रनों से हराया। बारिश के कारण 20-20 ओवर के इस मैच में, पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 6 विकेट खोकर स्कोरबोर्ड पर 182 रन लगाए। यशवर्धन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 34 गेंदों में 54 रन बनाए। उन्होंने अपनी इस पारी में 5 चौके और 2 छक्के लगाए। इस मैच में भारत के दिग्गज क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग के बेटे अन्वय द्रविड़ और आर्यवीर सहवाग भी खेले। स्टेडियम में अपने पिता के आक्रामक अंदाज में ओपनिंग करते हुए आर्यवीर ने 5 चौकों की मदद से 26 गेंदों में 28 रन बनाए। इसके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 18 गेंदों में 211 के स्ट्राइक रेट से 38 रन बनाए। उन्होंने अपनी इस पारी में 2 चौके और 3 छक्के लगाए। द्रविड़ और चौहान ने पांचवें विकेट के लिए 69 रनों की अहम साझेदारी की, जिसने 12वें ओवर में 88/4 के स्कोर पर मुश्किल में फंसी भारतीय टीम को उबारा। ऑस्ट्रेलिया के लिए ऑफ-स्पिनर एली ब्रेन सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने अपने चार ओवरों में 29 रन देकर 2 विकेट लिए। 183 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई अंडर-19 ने अपने टॉप ऑर्डर के शानदार योगदान के दम पर जोरदार टक्कर दी। कप्तान जैक जोस्नेक ने 27 गेंदों में 55 रनों की तूफानी पारी खेलकर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। उन्होंने अपनी इस पारी में 6 चौके और 3 छक्के लगाए। ऑस्ट्रेलिया को जब 11 गेंदों में 24 रनों की जरूरत थी, तब जोस्नेक ने लगातार तीन चौके जड़े। दूसरे चौके के साथ उन्होंने 25 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की, लेकिन ठीक अगली ही गेंद पर वह आउट हो गए। आखिरी ओवर में ऑस्ट्रेलिया को 11 रन की जरूरत थी, तब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहित उल्वा ने संयम बनाए रखा और सिर्फ तीन रन देकर भारत को रोमांचक जीत दिलाई। चौहान ने अपनी फिफ्टी के बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया और 28 रन देकर 2 विकेट चटकाए। उन्होंने 21 गेंदों पर 45 रन बनाने वाले नील पटेल और हेडन बारबुलोविच (24 गेंदों पर 40 रन) को पवेलियन भेजा।

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासी भूचाल, कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी ने भाजपा पर साधा निशाना

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और इसे बदले की राजनीति बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को हमारा समर्थन देने के कुछ ही देर बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलान प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के समय पर गंभीर सवाल उठते हैं और यह भाजपा का पुराना फॉर्मूला है कि किसी पुराने मामले को खोदकर निकालना। लेकिन अभी ही क्यों? ठीक, हमारी कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा के बाद। भाजपा की बदले की भावना और ज्यादती की राजनीति एक साफ पैटर्न दिखाती है। हेर-फेर, वोट की लूट और डराने-धमकाने के जरिए चुनाव एजेंसी और भाजपा की साझेदारी हर दिन लोकतंत्र की हत्या कर रही है।” दरअसल, तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलान प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था। इस ऐलान के कुछ ही देर बाद खबर आई कि कांग्रेस उम्मीदवार को किसी पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर ममता बनर्जी ने सवाल खड़े किए हैं। ममता बनर्जी का आरोप है कि भाजपा पुराने मामलों को चुनाव के समय निकालकर विपक्षी नेताओं को परेशान करती है। उन्होंने इसे भाजपा का ‘पुराना फॉर्मूला’ बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी एजेंसियों और भाजपा के बीच साठगांठ है, जो मिलकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रही है। नंदीग्राम का चुनावी इतिहास हमेशा से ही हाई-प्रोफाइल रहा है। यह वही सीट है, जहां से ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। ऐसे में इस उपचुनाव को भी काफी अहम माना जा रहा है। टीएमसी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देना भी एक बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा था, जिसे विपक्षी एकजुटता के तौर पर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने आयोजन स्थल और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उठाया

इंदौर। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी के इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के आयोजन में पार्टी को आ रही दिक्कतों पर सवाल उठाए। इंदौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खेड़ा ने गांधी के दौरे से पहले जारी किए गए सुरक्षा संबंधी नोट पर हुए विवाद का जिक्र किया और आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित करने में कांग्रेस को बाधाओं का सामना करना पड़ा है। खेड़ा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान भोपाल में काम करने का जिक्र किया और कहा कि उस दौरान कांग्रेस ने राजनीतिक विरोधियों को भी समायोजित किया था। उन्होंने कहा, “मैंने इस राज्य में दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए काम किया है। मैंने 1995 से 1998 तक मध्य प्रदेश के भोपाल में काम किया। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। दिग्विजय सिंह ने स्वयं उस बैठक का स्वागत किया था और भोजन की व्यवस्था भी की थी। मैं आपको कांग्रेस की इस परंपरा के बारे में बता रहा हूं।” कांग्रेस ने गांधी के कार्यक्रम स्थल के प्रबंधन पर भी आपत्ति जताई है। कार्यक्रम पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किया जाना था, लेकिन स्टेडियम उपलब्ध न होने के कारण इसे क्षेत्रीय पार्क के पास एक मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। पार्टी ने बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण से अस्थायी भूमि आवंटन प्राप्त किया। मैदान के उपयोग के लिए नागरिक प्राधिकरण द्वारा कांग्रेस से अतिरिक्त भुगतान की मांग के बाद यह मुद्दा विवादित बना रहा। खेड़ा ने कहा कि छात्र संपर्क कार्यक्रम युवाओं से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि अगर आप नाम बदल देंगे, तो क्या उनकी किस्मत बदल जाएगी? क्या उनकी स्थिति बदल जाएगी? क्या पेपर लीक बंद हो जाएगा? क्या लोगों को नौकरियां मिलनी शुरू हो जाएंगी? मैं बुनियादी सवालों से अपना ध्यान भटकाना नहीं चाहता।

राहुल गांधी को इतिहास पढ़ना चाहिए, कांग्रेस सहयोगियों को खत्म करती है : किरेन रिजिजू

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद भस्मासुर है जो टूट-फूट से बनी पार्टी है। राहुल गांधी को भाजपा-एनडीए पर उंगली उठाने की जरूरत नहीं है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी भारतीय जनता पार्टी पर ऐसी बातें मढ़ रहे हैं जो असल में उन पर लागू होनी चाहिए। किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी भस्मासुर की तरह है, जो भी पार्टी इसके संपर्क में आती है, वह खत्म हो जाती है, फिर भी वे हम पर आरोप लगाते हैं। कांग्रेस पार्टी को यह समझना चाहिए कि तृणमूल कांग्रेस खुद कांग्रेस से ही अलग हुई थी। जो लोग एनसीपी की बात करते हैं, वे भी कांग्रेस से ही अलग हुए थे। इसीलिए, कांग्रेस हम पर आरोप लगाती है, लेकिन वे खुद टूट-फूट से बने थे और वे फिर से टूट जाते हैं। दूसरी पार्टियों को तोड़ना और खत्म करना ही कांग्रेस पार्टी का काम है। कांग्रेस ने इसी तरह अपने बड़े नेताओं को बाहर निकाला है, कई नेता तो कांग्रेस छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री भी बने, जबकि पहले वे कांग्रेस के प्रमुख नेता थे। हर कोई कांग्रेस का इतिहास जानता है और यह भी कि वह अपने सहयोगियों को कैसे तोड़ती है। रिजिजू ने इस दौरान कुछ पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अशोक मेहता और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बारे में सभी जानते होंगे। 1963 में कैसे कांग्रेस पार्टी ने अशोक मेहता को योजना आयोग का उपाध्यक्ष पद देकर उन्हें कांग्रेस में विलय करने के लिए पार्टी को तोड़ दिया था। उसके बाद प्रोफेसर एनजी रंगा के बारे में सब जानते हैं। कांग्रेस ने प्रोफेसर रंगा के साथ क्या किया? और कैसे रंगा और राजगोपालाचारी ने 1959 में कांग्रेस पार्टी से अलग होकर एक समाजवादी समूह बनाया। 1971 के चुनावों के बाद उन्होंने पार्टी को कैसे तोड़ा, यह सब जानते हैं। राहुल गांधी ने आज जो कहा है, उस पर ममता बनर्जी और शरद पवार से पूछिए कि वे कांग्रेस पार्टी से कैसे बाहर आए और कांग्रेस पार्टी ने कैसे क्षेत्रीय पार्टी को तोड़कर उसे कांग्रेस पार्टी में शामिल किया। उन्होंने कहा कि टीडीपी के एन. टी. रामा राव को कैसे परेशान किया गया, कांग्रेस ने कैसे आर्टिकल 356 और राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य सरकारों को खत्म किया। वे तो सरकारों को पूरी तरह से खत्म ही कर देते थे। कांग्रेस पार्टी जो कह रही है, उस पर मैं हंसकर कहूं या दुख के साथ, लेकिन किसी ने राहुल गांधी को यह बात समझाई नहीं है। राहुल गांधी ने भाजपा पर शिवसेना, टीएमसी और एनसीपी को तोड़ने का आरोप लगाया। किसी को राहुल गांधी को यह समझाना चाहिए कि एनसीपी और टीएमसी के लोग असल में कांग्रेस से ही अलग हुए थे और जैसा कि मैंने यह कहानी बताई है, किसी को राहुल गांधी को यह समझाना चाहिए कि कांग्रेस खुद एक ‘भस्मासुर’ है। जो भी इसके साथ रहता है, यह उसे तोड़ देती है और बर्बाद कर देती है। भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यह परिवार के किसी एक सदस्य की पार्टी नहीं है। सबसे सफल नेता, सबसे ताकतवर और दूरदर्शी सोच वाले लोग ही पार्टी के नेता बनते हैं। रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का विस्तार हुआ है। किसी ने पार्टी को नहीं तोड़ा है। हमने कोई गंदी चालें चलकर बड़ी पार्टी नहीं बनाई है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक-एक करके, कड़ी मेहनत और पसीने से भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाया है। इसलिए राहुल गांधी का आरोप उन्हीं पर लागू होता है। तीसरे मोर्चे का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 1997-98 में क्या किया था। उस समय जनता दल (यूनाइटेड) की स्थिति क्या थी-पहले देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने, फिर कांग्रेस पार्टी ने आई.के. गुजराल का समर्थन किया और फिर कुछ ही महीनों के भीतर कांग्रेस पार्टी ने सरकार गिरा दी। उसके बाद, 1977 में क्या हुआ, यह भी सभी जानते हैं, मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार चल रही थी, और कैसे उन्होंने चरण सिंह को समर्थन देने का दिखावा किया, जिससे चरण सिंह के लिए संसद में बहुमत साबित करना असंभव हो गया। कांग्रेस पार्टी ने तुरंत समर्थन वापस ले लिया। इसी तरह, जब शरद पवार की बात आती है, तो शरद पवार कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता थे। उन्होंने सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर सवाल उठाए और बाद में कांग्रेस छोड़ दी। उनके जाने के बाद सभी जानते हैं कि शरद पवार को तोड़ने की कोशिश में सुरेश कलमाडी का कैसे इस्तेमाल किया गया। वह कहानी सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि 1989 की घटना के बारे में सभी जानते हैं। वी.पी. सिंह कांग्रेस से अलग होकर प्रधानमंत्री बने थे। कांग्रेस पार्टी ने चंद्र शेखर का समर्थन करने का दिखावा करने की साजिश रची, वी. पी. सिंह की सरकार गिरा दी और फिर कुछ ही महीनों में अपना समर्थन वापस लेकर चंद्र शेखर की सरकार भी गिरा दी।