सारा दिन बैठे-बैठे अकड़ जाती है पीठ? पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन से मिलेगा आराम

नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां घंटों बैठकर काम करते हैं, वहां हमारी हैमस्ट्रिंग, पीठ और कंधे सबसे ज्यादा अकड़ जाते हैं। ऐसे में ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ एक ऐसा अभ्यास है, जो न सिर्फ शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है बल्कि मन को शांत कर तनाव को दूर करने में भी बेहद मददगार है। ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ आगे की ओर झुकने वाला योगासन है, जो पश्चिमोत्तानासन के लाभों के अलावा पैरों के भीतरी भाग, कंधों के नीचे और बीच की मांसपेशियों को भी व्यापक खिंचाव प्रदान करता है। पाद प्रसार पश्चिमोत्तानासन नाम संस्कृत शब्दों ‘पाद’ (जिसका अर्थ है ‘पैर’), ‘प्रसार’ (जिसका अर्थ है ‘फैलाना’), ‘पश्चिम’ (जिसका अर्थ है ‘पश्चिम’ या ‘शरीर का पिछला भाग’), ‘उत्तान’ (जिसका अर्थ है ‘ऊपर उठाया हुआ’ या ‘विस्तारित’) और ‘आसन’ (जिसका अर्थ है ‘मुद्रा’) से लिया गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, ‘पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन’ (या पाद प्रसार पश्चिमोत्तानासन) बैठकर किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है। यह सामान्य पश्चिमोत्तानासन (जिसमें पैर आपस में जुड़े होते हैं) का एक उन्नत रूप है, जिसमें पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुका जाता है। पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन करते वक्त पैर फैलाकर आगे झुकते हैं तो जांघ के पीछे की हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों पर सबसे ज्यादा खिंचाव आता है। रोजाना अभ्यास से इसकी टाइटनेस दूर होती है और पैरों में हल्कापन महसूस होता है। पाद-प्रसार पश्चिमोत्तानासन करते वक्त दोनों पैरों को अपनी क्षमता के अनुसार चौड़ा करके आगे की ओर झुकाते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रोइन और अंदरूनी जांघों पर पड़ता है। दरअसल हमारी अंदरूनी जांघों में एडक्टर मांसपेशियों का एक समूह होता है, जो ग्रोइन से जुड़ा होता है। लगातार बैठे रहने, गलत पोस्चर या व्यायाम न करने से ये मांसपेशियां बहुत टाइट और छोटी हो जाती हैं। जिन लोगों को चलने, सीढ़ियां चढ़ने या जमीन पर बैठने में अंदरूनी जांघों में खिंचाव महसूस होता है, उनके लिए ये आसन बहुत फायदेमंद है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो रनिंग, साइकिलिंग या जिम करते हैं। इस आसन को करने के दौरान शरीर को जबरदस्ती नीचे न झुकाएं, शुरुआत में जितना संभव हो उतना ही झुकें। यदि किसी भी व्यक्ति को स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द हो, तो इस आसन को करने से बचें।

उत्तराखंड का झंकार सैम मंदिर, जहां देवताओं के गुरु की होती है पूजा, जानिए इसकी पौराणिक मान्यता

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड के हरे-भरे पहाड़, वन और असीम वादियां में लोकदेवताओं की कहानी कहते हैं। ऐसा ही एक पवित्र और रहस्यमयी धाम है सैम देवता मंदिर (सैमज्यू)। मान्यता है कि सैम देवता सभी देवी-देवताओं के गुरु और मामा हैं, जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। ‘सैम’ शब्द का अर्थ स्वयंभू होता है। इन्हें न्यायकारी और कल्याणकारी देवता माना जाता है जो भक्तों की रक्षा करते हैं और बुराई का नाश करते हैं। शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर जोर देते हुए सभी से मंदिर दर्शन करने की अपील की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “अल्मोड़ा जिले में स्थित झंकार सैम देवता मंदिर आस्था और पौराणिक मान्यताओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस पवित्र जगह पर तपस्या की थी। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे इस मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। अल्मोड़ा आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।” अल्मोड़ा से लगभग 40 किलोमीटर दूर, जागेश्वर धाम से 4 किलोमीटर की दूरी पर दारुक वन में देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव के अंशावतार सैम देवता को समर्पित है। स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान इस मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं और लोक-गाथाओं से जुड़ा है, जहां आज भी एक चमत्कारी देवदार के पेड़ में गणेश जी की आकृति और कभी दूध निकलने की कथा प्रचलित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गांव में जब भी कोई अनुष्ठान या भंडारा (बेसी) होता है, तो सबसे पहला भोग इन्हें ही लगाया जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सैम देवता (सैम ज्यू) को भगवान शिव का ही एक अंशावतार और प्रमुख लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। लोककथाओं के अनुसार इनका उद्गम नेपाल के डोटी क्षेत्र से माना जाता है। एक समय पर देवदार के पेड़ से दूध निकलना और अपनी शक्ति से भक्तों के कष्ट दूर करना जैसी कई चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं।

एशियन गेम्स: क्विम्सी डिसूजा टेकबॉल सेमीफाइनल में हारीं, कांस्य पदक के लिए युइना सकामोटो से भिड़ेंगी

नागोया। भारत की क्विम्सी जोआकिम डिसूजा को एशियन गेम्स 2026 में टेकबॉल के सेमीफाइनल में शनिवार को नागोया सिटी हिगाशी स्पोर्ट्स सेंटर में महिला एकल सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की इमा सुमाया से 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। हार के साथ ही उनका स्वर्ण जीतने का सपना टूट गया। एशियन गेम्स में डेब्यू कर रही 24 साल की भारतीय खिलाड़ी ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की और आराम से पहला सेट 12-7 से जीत लिया। हालांकि, सुमाया ने दूसरे सेट में जबरदस्त वापसी की, शुरुआती कमी को दूर करते हुए बढ़त बनाई और आखिर में इसे 12-9 से जीतकर मुकाबला निर्णायक बना दिया। क्विम्सी ने तीसरे सेट की शुरुआत शानदार तरीके से की और 3-0 की बढ़त बनाई, फिर इसे 4-1 कर दिया। लेकिन सुमाया ने जबरदस्त वापसी करते हुए, डिसाइडर पर कब्जा कर लिया और उसे 12-7 से जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। हार का मतलब है कि क्विमसी अब रविवार को वर्ल्ड नंबर 7 युइना सकामोटो के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल मैच में हिस्सा लेंगी। वहां जीत से भारत को एशियन गेम्स में अपना पहला टेकबॉल मेडल मिल जाएगा। क्विमसी ने इससे पहले कॉन्टिनेंटल शोपीस में अपने डेब्यू में ग्रुप ए में दो जीत के साथ टॉप पर रहकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी। उन्होंने अपने कैंपेन की शुरुआत टॉप सीडेड जापान की युइना सकामोटो पर 2-1 की शानदार जीत के साथ की। क्विमसी पहला सेट 10-12 से हार गई, लेकिन वापसी करते हुए दूसरा सेट 12-11 से जीता और फिर डिसाइडिंग सेट 13-11 से अपने नाम कर लिया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने अपने दूसरे ग्रुप मैच में भी इसी मोमेंटम को बनाए रखा, जहां उन्होंने कंबोडिया की कोएमियन डीवाई को सीधे सेटों में 12-9, 12-7 से हराया। इस नतीजे में वह ग्रुप ए में टॉप पर रहीं और क्वार्टर फाइनल से बचते हुए सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं। क्विम्सी ने मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ मिक्स्ड डबल्स में भी हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय जोड़ी ने अपने ग्रुप ए के पहले मैच में फिलीपींस की जोआना अबुलेंसिया और प्रिंस अगस्टिन को हराया। हंगरी में बना टेकबॉल, फुटबॉल के एलिमेंट्स को एक घुमावदार टेबल के साथ मिलाता है और फ्रीस्टाइल फुटबॉल और सेपक टकराव का मिश्रण जैसा दिखता है।

समिक भट्टाचार्य ने मनोहर लाल को लिखा पत्र, दक्षिण बंगाल में आरआरटीएस नेटवर्क की मांग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नेटवर्क की मांग तेज हो गई है। राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर दक्षिण बंगाल में आरआरटीएस शुरू करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। राज्यसभा सदस्य ने पत्र में कोलकाता को कल्याणी-कृष्णानगर-मायापुर, दुर्गापुर-आसनसोल, डायमंड हार्बर-हल्दिया और खड़गपुर-मेदिनीपुर से जोड़ने वाले आरआरटीएस नेटवर्क का प्रस्ताव रखा है। पत्र में समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पश्चिम बंगाल का शहरी विकास अभी भी कोलकाता पर बहुत अधिक केंद्रित है, जबकि दुर्गापुर, आसनसोल, खड़गपुर, कृष्णानगर और हल्दिया जैसे दूसरे शहर बड़े औद्योगिक, शैक्षिक, बंदरगाह और पर्यटन केंद्र बन गए हैं। इन शहरों के बीच आवाजाही अब भी पारंपरिक रेल और सड़क मार्ग पर निर्भर है, जो भीड़भाड़ के कारण रोजाना सुगम और तेज आवागमन के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीआरटीसी के नमो भारत कॉरिडोर की तर्ज पर आरआरटीएस नेटवर्क इस कमी को पूरा कर सकता है और मेट्रो जैसी हाई-स्पीड क्षेत्रीय कनेक्टिविटी दे सकता है। समिक भट्टाचार्य ने पत्र के साथ ट्रांजिट रिसर्चर सौरदीप सरकार और आर्द्रि रॉय चौधरी द्वारा तैयार की गई एक प्रारंभिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी भेजी है। इस रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल आरआरटीएस का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में कोलकाता के मैदान को केंद्रीय हब बनाते हुए चार कॉरिडोर का प्रस्ताव है। पहला कल्याणी, कृष्णानगर और मायापुर तक 135 किमी, दूसरा बर्दवान, दुर्गापुर और आसनसोल तक 232 किमी जिसमें आसनसोल मेट्रो शामिल है, तीसरा फल्टा, डायमंड हार्बर और हल्दिया तक 102 किमी जिसमें मैदान से बज बज तक मेट्रो है और चौथा संतरागाछी, कोलाघाट, खड़गपुर और मेदिनीपुर तक 135 किमी का है। इसके साथ ही दुर्गापुर और आसनसोल के लिए अलग मेट्रो सिस्टम का भी प्रस्ताव है। प्रस्ताव को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जमीन अधिग्रहण कम से कम हो, इसके लिए कॉरिडोर को मौजूदा हाईवे और रेलवे लाइन के साथ जोड़ा जाएगा। रिपोर्ट में एनसीआरटीसी की तर्ज पर पश्चिम बंगाल रैपिड ट्रांजिट कॉर्पोरेशन (डब्ल्यूबीआरटीसी) नाम से एक स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाने की भी सिफारिश की गई है, जिसका स्वामित्व केंद्र और राज्य सरकार के पास संयुक्त रूप से होगा। राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इस प्रस्ताव की जांच की जाए और अगर उपयुक्त पाया जाए तो इंजीनियरिंग, मांग पूर्वानुमान और वित्तीय विश्लेषण को कवर करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर विस्तृत फिजिबिलिटी स्टडी का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह रिपोर्ट के लेखकों के साथ बैठक कराने में भी मदद करेंगे।

‘महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले पर बोलीं प्रियंका

नई दिल्ली। दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया।” उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया। देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। महिलाओं के विकास की सिर्फ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं और हिंसा होती है, मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं। एफआईआर दर्ज तक नहीं होते। साथ ही, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं। इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की घटना को लेकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती। दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।” कांग्रेस सांसद ने लिखा, “अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं। दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सजा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।” यह मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास एक बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का। जांच में पीड़िता की पहचान की गई। बाद में पता चला कि इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आरोपियों ने बाद में लड़की के शव को खुले इलाके में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार, पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया।

पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू से की मुलाकात

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को आगे बढ़ाने के संबंध में एक सार्थक बैठक की। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता को दोहराया है जिसके तहत सीईपीए वार्ताओं को तेजी से पूरा कर जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इससे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित कई क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत-कनाडा सीईपीए का शीघ्र निष्कर्ष दोनों देशों के साझा लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को आपसी लाभ के लिए और मजबूत किया जा सकेगा। इस सप्ताह भारत और कनाडा ने प्रस्तावित सीईपीए के लिए नई दिल्ली में चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों देशों का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देना है। पांच दिनों तक चली इन वार्ताओं में वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और तकनीकी व्यापार बाधाएं जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। इससे पहले तीसरा दौर जुलाई में कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसी वर्ष मार्च में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सीईपीए वार्ताओं को वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंचा। कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में दवा उत्पाद, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरणों के पुर्जे, लोहे और इस्पात से बने उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कार्बनिक रसायन, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, परिधान एवं वस्त्र, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का पल्प, रत्न एवं कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहा और एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी उद्योग कनाडा को सेवाओं के निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। सीईपीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा एक ग्राम का सोने का छल्ला

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर को सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए ‘थायमामन थंगा मोथिरम’ योजना की शुरुआत करेंगे। योजना के तहत 22 जून 2026 से सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को एक ग्राम वजन का सोने का छल्ला दिया जाएगा। योजना के शुभारंभ और क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। तमिलनाडु सरकार के अनुसार, राज्य में मातृ एवं शिशु कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता, मुफ्त प्रसव और नवजात देखभाल, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, पोषण, प्रसव योजना और प्रेग्नेंसी एंड चाइल्ड ट्रैकिंग इवैल्यूएशन सॉफ्टवेयर जैसी कई योजनाएं लागू की गई हैं। सरकार ने बताया कि तमिल संस्कृति और परंपरा में ‘थायमामन सीर’ की परंपरा को ध्यान में रखते हुए तथा सरकारी चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का विश्वास और मजबूत करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की जा रही है। इसके लिए 23 जून 2026 को शासनादेश जारी किया गया था। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में हर साल करीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है। इनमें 99.9 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते हैं। करीब 4.20 लाख यानी 53 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को एक ग्राम वजन का सोने का छल्ला दिया जाएगा। प्रत्येक छल्ले पर यूनिक सीरियल नंबर होगा और इन्हें छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में रखा जाएगा। योजना के लिए पहले चरण में 1,28,000 सोने के छल्ले खरीदे जा चुके हैं। इस योजना का लाभ तमिलनाडु की स्थायी निवासी माताओं को मिलेगा। इसके लिए उनका पीआईसीएमई में पंजीकरण और आरसीएच आईडी प्राप्त होना अनिवार्य होगा। सरकार के मुताबिक, 22 जून 2026 से 28 सितंबर 2026 तक सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए 28 सितंबर से 107 हब के माध्यम से प्रतिदिन 100 बच्चों को सोने के छल्ले वितरित करने की व्यवस्था की गई है। योजना के शुभारंभ के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को अस्पताल से छुट्टी के समय ही सोने का छल्ला दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस योजना से सरकारी चिकित्सा सेवाओं में लोगों का विश्वास बढ़ने के साथ सुरक्षित संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन मिलेगा और मातृ एवं शिशु सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। समीक्षा बैठक में चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अरुणराज, मुख्य सचिव डॉ. एम. साईकुमार, डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. थारेस अहमद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. अनीश शेखर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पश्चिम बंगाल: सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के खिलाफ पीआईएल वापस, हाई कोर्ट ने किया खारिज

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश आरवी घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता पेशे से वकील हैं और उन्होंने सार्वजनिक स्थानों एवं संरचनाओं को भगवा रंगने पर सरकारी धन खर्च किए जाने पर सवाल उठाया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस काम पर बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के सरकारी धन खर्च किया जा रहा है और यह जनता के पैसे का अनावश्यक खर्च है। याचिका में उदाहरण के तौर पर कोलकाता के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों का जिक्र किया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इसकी दीवारों को भगवा रंग से रंगा गया है। इसके अलावा एक मीडिया संस्थान के गेट को भी कथित तौर पर भगवा रंगने का मुद्दा अदालत के सामने उठाया गया। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई मामला पेश नहीं कर सके, जिसमें अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। इससे दो दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के मध्य कोलकाता स्थित कैमक स्ट्रीट कार्यालय को लेकर पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग की ओर से जारी बेदखली नोटिस को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया था कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस को कार्यालय के निरीक्षण की तारीख की जानकारी देते हुए नोटिस जारी करे। अदालत ने यह भी कहा था कि अग्निशमन विभाग कार्यालय में आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों के बारे में पार्टी को जानकारी दे। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस को निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार सुरक्षा से जुड़े जरूरी कदम उठाने होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अगर इसके बाद भी जरूरी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो अग्निशमन विभाग कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है। अभिषेक बनर्जी का कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय पिछले महीने उस समय विवाद में आया था, जब कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिस ने इमारत की छत पर लगे एक कथित अवैध होर्डिंग को हटा दिया था।

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026: जेपी नड्डा ने सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य सेवा का दिया मंत्र, मध्य प्रदेश के पीपीपी मॉडल को सराहा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एबीवीआईएमएस और डॉ. आरएमएल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में ‘विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026’ की झलकियां; इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना दिखी, जिसमें स्वच्छता, साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव को रोगी की सुरक्षा के लिए जरूरी माना गया। ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए, आइए देखभाल के हर काम से सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा संस्थानों और हर मरीज की सम्मानजनक देखभाल के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत करें।” इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मरीज की सुरक्षा ही स्वास्थ्य सेवा की नींव है। अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और गुणवत्तापूर्ण इलाज को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा है और इसी सोच के साथ सभी स्वास्थ्य संस्थानों को काम करना होगा। इससे पहले एक पोस्ट में मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की जानकारी दी गई। पोस्ट में लिखा, “जेपी नड्डा ने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पीपीपी मॉडल की सराहना की। मध्य प्रदेश ने मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 6,120 हुई। राज्य ने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए नए पीपीपी मॉडल को अपनाया। केंद्र और राज्य ने स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण व किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।” मंत्रालय के अनुसार, मध्य प्रदेश ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। राज्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या अब बढ़कर 6,120 हो गई है। इससे प्रदेश के युवाओं को डॉक्टर बनने के ज्यादा मौके मिलेंगे और राज्य में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।

नशा मुक्त पंजाब यात्रा को नितिन नवीन के साथ राघव चड्ढा ने भी दिखाई हरी झंडी

पठानकोट। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा शुक्रवार को पठानकोट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ में शामिल हुए और यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस अभियान का उद्देश्य पंजाब में नशे की समस्या और उससे प्रभावित परिवारों की परेशानियों को सामने लाना है। राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने नशे के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की कहानियां नशे की समस्या से होने वाले नुकसान की दर्दनाक तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने कहा, “नशा सिर्फ जिंदगी बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।” सांसद ने आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशे की समस्या को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन वह इसे पूरा करने में नाकाम रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। खासकर ‘चिट्टे’ की सप्लाई बढ़ी है और यह राज्य में आसानी से उपलब्ध हो रहा है। राघव चड्ढा ने कहा कि नशे की ओवरडोज से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है और नशीले पदार्थों की खपत में भी इजाफा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अब बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की होम डिलीवरी तक हो रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नौकरियां, अवसर और बेहतर भविष्य देने का वादा किया गया था, लेकिन नशे की समस्या के कारण आज भी परिवारों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पठानकोट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई गई। इस अभियान का उद्देश्य राज्य में नशे की समस्या की गंभीरता को सामने लाना और इसके खिलाफ लोगों को जागरूक एवं एकजुट करना है। चड्ढा के इस यात्रा में शामिल होने और उनके बयानों के बाद पंजाब सरकार के नशा विरोधी कदमों को लेकर जारी राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ आने वाले दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजरेगी। इस दौरान नशे से प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने की भी योजना है।