संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से ज्यादा की कटौती : ट्रंप प्रशासन

वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि उसने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के बजट में 1 अरब डॉलर से ज्यादा की कटौती सुनिश्चित की। इसके साथ ही मुख्यालय के स्टाफ और शांति सैनिकों की संख्या में भी कमी की गई। यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले हफ्ते महासभा को संबोधित करने से पहले आया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यालय के 3,000 पदों में कटौती की जा रही है और दुनिया भर में 25 प्रतिशत से अधिक शांति सैनिकों को वापस भेजा जा रहा है। प्रशासन ने इन कटौतियों को संयुक्त राष्ट्र के काम को सीमित करने और उसके संसाधनों को शांति और सुरक्षा पर केंद्रित करने के प्रयास के रूप में पेश किया। ब्रीफिंग में बचत, प्रभावित पदों या शांति अभियानों का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया। अधिकारी ने कहा, “अब संयुक्त राष्ट्र के बजट में एक अरब डॉलर से अधिक की कटौती की गई है।” अधिकारी ने इन कटौतियों को संगठन के 80 साल के इतिहास में पहली बार बताया और इसका श्रेय ट्रंप और विदेश मंत्री को दिया। इस ऐतिहासिक दावे के साथ ब्रीफिंग के दौरान कोई आंकड़े नहीं दिए गए। अधिकारी ने कहा, “हम इसे संयुक्त राष्ट्र को डाइट पर रखना कहते हैं।” प्रशासन का तर्क है कि संगठन ने बहुत सारी जिम्मेदारियां ले ली हैं और उसे संघर्षों को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। अधिकारी ने कहा कि बजट पर सहमति हासिल करने के लिए आम सहमति और व्यापक कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत थी। अधिकारी को उम्मीद है कि ट्रंप अपने महासभा संबोधन में सुधारों पर चर्चा करेंगे, हालांकि भाषण की अंतिम सामग्री की घोषणा नहीं की गई थी। अधिकारी ने प्रशासन के इस कदम को संस्था को फिर से जीवित करने का अभियान बताया। उन्होंने कहा, “हमने इसे मिलकर ‘मुंगा’, यानी ‘मेक द यूएन ग्रेट अगेन’ के रूप में रीब्रांड करने पर काम किया है।” उन्होंने वार्षिक बैठक के कूटनीतिक महत्व का भी बचाव किया। मैनहट्टन में राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, विदेश मंत्रियों, व्यापारिक नेताओं और राजनयिकों के जमावड़े से ऐसे अवसर पैदा होते हैं जिन्हें कहीं और दोहराना मुश्किल है। अधिकारी ने पिछले साल की बैठक का जिक्र किया, जब ट्रंप ने खाड़ी देशों और पाकिस्तान, तुर्की और इंडोनेशिया सहित मुस्लिम बहुल देशों को एक साथ लाया था। उन्होंने उन चर्चाओं को बाद में हुए शर्म अल-शेख शांति समझौतों और ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस साल की बैठक का उपयोग मौजूदा समझौतों और अनसुलझे कूटनीतिक प्रयासों दोनों को आगे बढ़ाने के लिए करने की उम्मीद करता है। ट्रंप सोमवार दोपहर न्यूयॉर्क पहुंचेंगे और उस शाम ट्रंप टॉवर में राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वह मंगलवार सुबह महासभा को संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम में ब्रिटिश और जापानी प्रधानमंत्रियों के साथ बैठकें और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के नेताओं के साथ एक बहुपक्षीय सत्र शामिल है। वह विश्व नेताओं के लिए एक स्वागत समारोह की मेजबानी भी करेंगे और वाशिंगटन लौटने से पहले वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति से मिलेंगे। उनका भाषण शांति समझौतों, चल रही बातचीत और उन समस्याओं पर प्रकाश डालेगा जिन्हें प्रशासन का मानना है कि पिछली सरकारों ने टाल दिया था। ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं और गाजा योजना पर प्रगति भी इसमें शामिल होगी। राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अलावा, अधिकारियों ने एआई गवर्नेंस, समुद्र के नीचे केबल, समुद्र तल के खनिज और सहायता के बजाय व्यापार पर जोर देने वाली पहल सहित व्यापक अमेरिकी कूटनीतिक एजेंडे की रूपरेखा भी बताई।

शिपिंग को ‘भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनना चाहिए’: भारत

संयुक्त राष्ट्र। भारत की ओर से सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपनी मांग दोहराई गई है और कहा गया है कि कमर्शियल समुद्री आवाजाही ‘भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बननी चाहिए’। भारत के जहाजों और नागरिकों को होर्मुज जलडमरूमध्य के टकराव की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में कहा, “नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने दखल का असर नहीं पड़ना चाहिए।” उन्होंने कहा, “भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं जो आजाद, खुला, सुरक्षित और नियमों पर आधारित हो।” हरीश ने बहरीन की ओर से बुलाई गई परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में बात की। यह बैठक ‘आरिया-फॉर्मूला’ के तहत समुद्री सुरक्षा माहौल पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए ऐसी बैठकों की शुरुआत की थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के ब्लॉक होने से भारत को आर्थिक नुकसान भी हुआ है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की कीमतों में भारी उछाल आया। हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई रुकावटों का “ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में दुनिया भर के क्षेत्रों पर असर पड़ता है।” उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों का नाम नहीं लिया, जिनमें ईरान और अमेरिका के साथ-साथ अन्य खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान भारत को भी नुकसान उठाना पड़ा। भारत ने अपने नाविकों की मौत को लेकर ईरान और अमेरिका के सामने विरोध दर्ज कराया है, और तेहरान के सामने भारतीय-पंजीकृत जहाज पर हुए हमले का भी विरोध किया है। अप्रैल में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया था। भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने इन दोनों घटनाओं का विरोध किया। जून में, भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी’अफेयर्स (कार्यवाहक प्रमुख) को बुलाकर तीन भारतीय नाविकों की मौत पर विरोध दर्ज कराया, जब अमेरिका ने उनके पलाऊ-पंजीकृत जहाज पर हमला किया था। हरीश ने कहा कि भारत अपनी नौसेना को तैनात करके इस क्षेत्र के अशांत समुद्री इलाकों में समुद्री सुरक्षा में योगदान दे रहा है। हरीश के अनुसार, सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों की मदद से 449 से ज्यादा कमर्शियल जहाज (जिनमें लगभग 20.3 मिलियन टन कार्गो या 8.4 बिलियन डॉलर से ज्यादा मूल्य का तेल था) अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरे। लाल सागर में ये रुकावटें हूथी मिलिशिया द्वारा पैदा की जा रही हैं, जो ईरान से जुड़ा यमन का एक विद्रोही समूह है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ शुरू किया था। संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फंसे हुए हैं। उनके पक्ष में बात करते हुए हरीश ने कहा, “नाविक हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में होने चाहिए। उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू में बदलाव और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।” हरीश ने तकनीक के विकास से पैदा होने वाले नए खतरों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली “उभरते खतरों से निपटने के बढ़ते महत्व को पहचानती है, जिसमें बिना चालक दल वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन व संचार में बाधा डालना शामिल है।” उन्होंने आगे कहा, “इन चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का जिम्मेदार उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

मानसून के आगमन के साथ ही तमिलनाडु में डेंगू के मामलों में तेजी

चेन्नई। मानसून के आगमन के साथ ही तमिलनाडु में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं और राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य भर में परीक्षण किए गए 1,320 लोगों में से 244 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। रोजाना करीब 200 मामले सामने आ रहे हैं। 15 सितंबर तक तमिलनाडु में डेंगू के 16,577 मामले दर्ज किए गए और नौ मौतें हुईं। चेन्नई सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बना हुआ है। शहर में एक ही दिन में बुखार से पीड़ित 156 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 87 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई। चेंगलपट्टू, कोयंबटूर, तिरुवनमलाई, कृष्णागिरी, सलेम, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, तंजावुर और विलुपुरम में भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। सरकार ने मच्छर नियंत्रण और रोग निगरानी अभियानों को तेज कर दिया है और तमिलनाडु भर में 25,000 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया है। ये टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में संक्रमण के स्रोतों को खत्म करने, स्वच्छता कार्य करने और बुखार के मामलों की निगरानी करने में लगी हुई हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों को भी निवारक उपायों को मजबूत करने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज ने चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले सात दिनों में डेंगू के मामलों में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन उन्होंने लोगों से घबराहट न करने का आग्रह किया। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घरों के अंदर और आसपास पानी जमा होने से रोकें और लगातार बुखार होने पर चिकित्सा सहायता लें। नाम तमिलर काची के मुख्य समन्वयक सीमान ने इस वृद्धि के लिए टीवीके सरकार की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मांग की कि जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, वहां युद्धस्तर पर नीलावेम्बु काढ़ा और कबासुरा कुडीनीर वितरित किया जाए। इसी बीच, अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र हरीश कुमार का गुरुवार को लगातार बुखार से पीड़ित रहने के बाद निधन हो गया। उनकी मृत्यु से चार दिन पहले ही मृदुला और जयश्री की भी मृत्यु हो चुकी है, जिससे परिसर में चिंता का माहौल छा गया है। हालांकि, जन स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट किया कि हरीश कुमार को डेंगू नहीं था और उनकी मृत्यु स्क्रब टाइफस से हुई थी। इस महामारी के बीच, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जापान की ताकेडा फार्मास्युटिकल के साथ मिलकर अगले साल की पहली छमाही में क्यूडेंगा नामक डेंगू वैक्सीन को भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जिसे भारत का पहला डेंगू टीका बताया जा रहा है। यह टीका, जो चार से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए है और तीन महीने के अंतराल पर दो खुराक में दिया जाता है, डेंगू वायरस के सभी चार प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

बद्रीनाथ में आज से देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव, लोकनृत्य से सेना की प्रदर्शनी तक होंगे आकर्षण

बद्रीनाथ। बद्रीनाथ स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में शनिवार से दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026 का आयोजन कर रहा है। 19 और 20 सितंबर को होने वाले इस महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सीमांत क्षेत्रों के जीवन की झलक देखने को मिलेगी। गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत, विद्यालय एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्थानीय हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कला और संस्कृति को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। महोत्सव में भारतीय सेना की ओर से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सीमाओं की सुरक्षा और आपदा राहत कार्यों में सेना की भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा समाज के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और सीमांत क्षेत्रों के साथ उसके जुड़ाव को भी प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा। आयोजन स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिला समूहों व युवाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। महोत्सव के दौरान सीमांत गांवों की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक महत्व को भी प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इसके माध्यम से देशभर से बद्रीनाथ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीमांत क्षेत्रों की जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा। आयोजन को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से जोड़ते हुए सीमांत क्षेत्रों के पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों, कारीगरों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों को अपनी प्रतिभा तथा उत्पादों को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। महोत्सव को लेकर प्रशासन की ओर से आगंतुकों की सुविधा के लिए सुरक्षा, चिकित्सा, पार्किंग, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन समेत आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भारतीय सेना और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों, स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, कलाकारों और मीडिया प्रतिनिधियों से महोत्सव में सहभागिता की अपील की है।

डोनाल्ड ट्रंप ने 100,000 डॉलर की एच-1बी फीस फिर से लागू की, छंटनी पर निशाना साधा

वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट और एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर की फीस को फिर से लागू कर दिया है और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाले नियोक्ताओं की कड़ी जांच के आदेश दिए हैं। इन उपायों में फीस रिन्यूअल के साथ-साथ स्पॉन्सर करने वाले एम्प्लॉयर के रोजगार से जुड़े तौर-तरीकों की नई जांच भी शामिल है। स्किल्ड-वर्कर वीजा प्रोग्राम के तहत आवेदनों की समीक्षा करते समय एजेंसियों को हाल ही में हुई और भविष्य में होने वाली छंटनी पर विचार करना होगा। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में स्टेट, लेबर और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी को यह देखने का निर्देश दिया गया है कि क्या एम्प्लॉयर ने पिछले साल सीधे या परोक्ष रूप से छंटनी की थी, या क्या वे भविष्य में ऐसी कटौती की योजना बना रहे हैं जिससे उसी तरह की स्थिति वाले अमेरिकी वर्कर प्रभावित होंगे। यह जरूरत लेबर कंडीशन एप्लीकेशन, याचिकाओं, वीजा और अमेरिका में प्रवेश पर लागू होती है। ऑर्डर में केवल इसलिए आवेदन को अपने-आप अस्वीकार करने की बात नहीं कही गई है कि एम्प्लॉयर ने छंटनी की घोषणा की है। ट्रंप ने ऑर्डर में कहा, “मैंने तय किया है कि अमेरिकी वर्कफोर्स की सुरक्षा और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।” व्हाइट हाउस ने कहा कि एक अलग घोषणापत्र के जरिए 19 सितंबर, 2025 को पहली बार लागू की गई 100,000 डॉलर की फीस की जरूरत को रिन्यू किया गया। इसकी फैक्ट शीट में बताया गया कि यह शुल्क कुछ एच-1बी आवेदनों पर लागू होता है। इसमें रिन्यूअल की अवधि या छूट के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया। ऑर्डर में लेबर सेक्रेटरी के लिए 30 दिन की समय-सीमा भी तय की गई है, जिससे वे वेज एंड आवर डिवीजन के जरिए पहले जमा किए गए लेबर कंडीशन एप्लीकेशन के डेटा की समीक्षा शुरू कर सकें। समीक्षा से यह तय होगा कि क्या स्पॉन्सर करने वाले एम्प्लॉयर के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई जरूरी है। एच-1बी मामलों की प्रोसेसिंग करते समय स्टेट, लेबर और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों को कॉमर्स और एजुकेशन विभागों तथा स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से सलाह लेनी होगी। ये एजेंसियां ​​कानूनी जरूरतों के पालन का आकलन करने में मदद के लिए वेतन, रोजगार, शैक्षणिक, औद्योगिक और अन्य आर्थिक जानकारी उपलब्ध कराएंगी। प्रशासन ने इन उपायों को अमेरिकी वर्करों की कथित विस्थापन और कुछ एम्प्लॉयर तथा आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा प्रोग्राम के दुरुपयोग के जवाब के तौर पर पेश किया। ऑर्डर में आरोप लगाया गया कि टेक्नोलॉजी एम्प्लॉयर ने सामूहिक रूप से लाखों वर्करों के लिए एच-1बी वीजा की मांग की, जबकि 2022 से 2026 के बीच 800,000 से 1.3 मिलियन अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ एम्प्लॉयर ने नौकरी की जिम्मेदारियों, काम की स्थितियों या आवेदकों की योग्यताओं के बारे में गलत जानकारी दी। न तो ऑर्डर और न ही फैक्ट शीट में इन आरोपों पर एम्प्लॉयर या आउटसोर्सिंग फर्मों की प्रतिक्रिया शामिल थी। व्हाइट हाउस ने कहा कि 2025 के घोषणापत्र के लागू होने के बाद से सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा जमा किए गए रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसमें कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के अनुरोधों में लगभग 97 प्रतिशत की गिरावट की भी जानकारी दी गई। ये नए उपाय व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में बताए गए बदलावों के तहत किए गए हैं। इनमें दिसंबर 2025 का डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का वह नियम भी शामिल है, जिसके तहत रैंडम सिलेक्शन (यादृच्छिक चयन) की जगह वेतन-स्तर के आधार पर वेटेज देने वाली प्रणाली लागू की गई। फैक्ट शीट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2027 में इसका पहली बार इस्तेमाल किया गया और रजिस्ट्रेशन में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई।

लखनऊ में डिवाइडर से टकराने के बाद रोडवेज बस में लगी आग, ड्राइवर-कंडक्टर ने कूदकर बचाई जान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना पारा क्षेत्रान्तर्गत भूहर पुल के पास जनरथ बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और आग लग गई। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया। फिलहाल कोई जनहानि नहीं हुई है। दमकल विभाग के अनुसार, शनिवार को थाना पारा क्षेत्रान्तर्गत बुद्धेश्वर-दुबग्गा मुख्य मार्ग पर भूहर पुल के पास एक रोडवेज जनरथ बस के दुर्घटनाग्रस्त होकर आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर थाना पारा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। मौके पर जांच से ज्ञात हुआ कि पारा की ओर से दुबग्गा की तरफ जा जनरथ बस भूहर पुल के प्रारम्भ में पहुंचने पर अचानक अनियंत्रित होकर पुल के बाईं ओर बने डिवाइडर से टकरा गई। बस के डिवाइडर से टकराने के लगभग 2-3 मिनट बाद उसमें आग लग गई, जिससे बस में भीषण आग फैल गई। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के समय बस में चालक एवं परिचालक मौजूद थे, जो बस से उतरकर सुरक्षित बाहर निकल गए। बस में आग लगने की सूचना तत्काल फायर सर्विस को दी गई, जिस पर फायर सर्विस की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और फायर सर्विस कर्मियों द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए आग को पूर्ण रूप से बुझा दिया गया। आग बुझने के बाद पुलिस द्वारा बस के अंदर जाकर गहनता से निरीक्षण किया गया, जिसमें बस के अंदर कोई व्यक्ति अथवा अन्य वस्तु मौजूद नहीं पाई गई। दुर्घटना एवं आग लगने की घटना में किसी प्रकार की जनहानि अथवा अन्य जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। आग लगने के कारण बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में आवश्यक जांच एवं अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में मौके पर शांति एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है तथा यातायात सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

सुनील जाखड़ बोले- ‘पंजाब में गैंगस्टरों से डर रहे पुलिसकर्मी, सरकार ने एडवाइजरी में अकेले यात्रा न करने को कहा’

चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के नेता सुनील जाखड़ ने अमृतसर में एक एएसआई की हत्या के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि पंजाब सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पुलिसकर्मियों से अकेले यात्रा न करने और आते-जाते समय यूनिफॉर्म न पहनने की सलाह दी गई है। भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पंजाब किस ओर जा रहा है? आजकल पंजाब में अपराधियों को पुलिस का डर नहीं रहा, बल्कि पुलिस ही गैंगस्टरों और गुंडों से डर रही है। अपराधियों के हाथों कई पुलिस अधिकारियों की हत्या के बाद माना जा रहा है कि पंजाब सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की असल तस्वीर दिखाती है।” उन्होंने पोस्ट में लिखा, “इस एडवाइजरी में पुलिसकर्मियों से कहा गया है कि वे अकेले यात्रा न करें, आते-जाते समय यूनिफॉर्म न पहनें, दो-पहिया वाहनों का इस्तेमाल न करें और हो सके तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करें। सोचने वाली बात है कि क्या यह वही पंजाब पुलिस है, जिसने राज्य से आतंकवाद का सफाया किया था?” भाजपा की पंजाब इकाई ने शनिवार सुबह एक पोस्ट में लिखा, “पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। अमृतसर में एक एएसआई की सरेआम हत्या यह दिखाती है कि राज्य में अपराधी कितने बेखौफ हो गए हैं। जब लोगों की सुरक्षा करने वाली पुलिस ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार के ‘रंगला पंजाब’ के दावों की असलियत यह है कि यहां हर दिन गुंडागर्दी और खून-खराबे की घटनाएं हो रही हैं।” बता दें कि अमृतसर में 18-19 सितंबर की दरमियानी रात ड्यूटी के दौरान एएसआई हरजीत सिंह की मोटरसाइकिल सवार दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 3 बजे हुई, जब हमलावर अधिकारी के पास पहुंचे और बहुत करीब से उन पर कई गोलियां चलाईं। हमले के बाद हरजीत सिंह को पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वह तरनतारन जिले के रहने वाले थे।

अनुपम श्याम बर्थ एनिवर्सरी: ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ बनकर अमर हुए अभिनेता, यूं तय किया था प्रतापगढ़ से मुंबई तक का सफर

मुंबई। अभिनेता अनुपम श्याम ओझा आज भी ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में निभाए गए किरदार ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ को लेकर लोगों के बीच मशहूर हैं। उन्होंने छोटे पर्दे से लेकर फिल्मों तक दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अलग अंदाज की वजह से खास पहचान बनाई थी। अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई प्रतापगढ़ में पूरी की। इसके बाद अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की और फिर लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी में थिएटर की पढ़ाई की। यहां उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। वह प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और रंगमंच पर लगातार काम किया। उन्होंने थिएटर में अनुभव लेने के बाद सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया। मुंबई पहुंचने के बाद उनका सफर आसान नहीं था। शुरुआत में उनको छोटे-छोटे किरदार मिले। दिलचस्प बात यह है कि उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद उन्होंने शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में काम किया। इसके बाद उन्होंने आगे चलकर ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी कई फिल्मों में दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। उन्हें अक्सर खलनायक या दबंग किरदार निभाने का मौका मिलता था। फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्हें असली पहचान साल 2009 में लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इस सीरियल में उन्होंने ठाकुर सज्जन सिंह का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और ‘ठाकुर सज्जन सिंह’ से ज्यादा पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’, ‘डोली अरमानों की’ समेत कई अन्य टीवी सीरियल्स में भी अभिनय किया। जिंदगी का आखिरी दौर उनके लिए काफी मुश्किलों भरा रहा। वह लंबे समय तक किडनी की गंभीर बीमारी से जूझते रहे और उन्हें नियमित डायलिसिस कराना पड़ता था। इलाज का खर्च बढ़ने से आर्थिक परेशानी भी सामने आई। उस समय उनके भाई ने लोगों से मदद की अपील की थी। बाद में एक इंटरव्यू में खुद अनुपम श्याम ने बताया था कि जब उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिली, तो उन्होंने इलाज के लिए 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भिजवाई। इसी मदद से उनका इलाज आगे बढ़ सका। उन्होंने बताया था कि सीएम योगी आदित्यनाथ उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे और उनके काम की सराहना करते थे। इलाज के दौरान कुछ समय के लिए उनकी तबीयत में सुधार भी आया और वे दोबारा काम पर लौटे। उन्होंने ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग भी शुरू कर दी थी, लेकिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही। अभिनेता अनुपम श्याम का 8 अगस्त 2021 को मुंबई के लाइफलाइन अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से टीवी और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी।

ऑस्कर में ‘गोंधल’ की एंट्री पर डायरेक्टर संतोष दावखर बोले, पता नहीं था लोगों को पसंद आएगी या नहीं

मुंबई। फिल्ममेकर संतोष दावखर की ‘गोंधल’ को 2027 के ऑस्कर अवॉर्ड्स की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है। फिल्ममेकर ने बताया कि फिल्म बनाते वक्त उनका मुख्य मकसद भारतीय संस्कृति और विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने सिनेमाई अंदाज में पेश करना था। महाराष्ट्र के ग्रामीण परिवेश पर आधारित थ्रिलर फिल्म गोंधल नवविवाहित महिला सुमन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी शादी से खुश नहीं है। संतोष दावखर ने आईएएनएस के साथ बातचीत में फिल्म को लेकर अपने नजरिए पर बात की और बताया कि शुरुआत में उन्हें इस बात को लेकर यकीन नहीं था कि दर्शक इसे कैसे लेंगे। मेरी पहली प्रायोरिटी यह थी कि मुझे यह फिल्म इंटरनेशनल लेवल पर बनानी है।” मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को कान्स समेत कई फिल्म फेस्टिवल में चुना जा चुका है। फिल्ममेकर का कहना है कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के बारे में एक ऐसी सोच देखी जो अक्सर गरीबी और जातिवाद जैसे थीम पर फोकस करती थी। उन्होंने कहा, “जब मैं कान्स और दूसरे इंटरनेशनल फेस्टिवल्स में था, तब मुझे इंडियन फिल्मों के रिप्रजेंटेशन के बारे में पता चला और लोग कैसे सोचते हैं कि यहां की फिल्में गरीबी और जातिवाद के बारे में होती हैं और भारत में यह जरूरी मुद्दा है। इसके अलावा भारत की एक रिच विरासत है, गर्व करने वाला कल्चर भी है और मैं उस कल्चर को सिनेमैटिक तरीके से दिखाना चाहता था।” उन्होंने बताया कि फिल्म बनाते समय उन्होंने इंटरनेशनल सिनेमा और स्क्रीनराइटिंग की बहुत स्टडी की थी। उन्होंने कहा, “जब मैं कान्स में था, तो मैं दिन में तीन-चार फिल्में देखता था। 15 दिनों में, मैंने 40 से ज्यादा फिल्में देखी हैं और अगर आप एक इंटरनेशनल फिल्म बनाना चाहते हैं तो आपकी मेकिंग भी उसी के हिसाब से होनी चाहिए।” संतोष दावखर ने आगे बताया कि स्क्रीनप्ले पर भी काफी रिसर्च की गई, जिसका मकसद एक थ्रिलर मिस्ट्री को आसान और आसान तरीके से पेश करना था। उन्होंने कहा, “मैंने इस पर बहुत रिसर्च की, स्क्रीनप्ले पर भी बहुत रिसर्च की है और मैंने लोगों को बहुत ही आसान तरीके से एक थ्रिलर मिस्ट्री दी है। इसके साथ ही, मैंने रीति-रिवाजों की रिचनेस भी दी है।” फिल्म गोंधल में मिस्ट्री और थ्रिलर एलिमेंट्स को इंडियन रीति-रिवाजों और कल्चरल ट्रेडिशन की रिचनेस के साथ मिलाया गया है। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर, अनुज प्रभु, सुरेश विश्वकर्मा और विट्ठल काले हैं।

भारत बन रहा ग्लोबल चिप हब, आईएसएम 2.0 से उभरीं 200 नई डिजाइन कंपनियां: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (आईएसएम 2.0) के तहत अब तक करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियां उभरकर सामने आई हैं, जो देश में स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी प्राप्त हुई है। पिछले चार वर्षों में देश में करीब 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को तैयार करना है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए उच्च गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धा दोनों जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि आईएसएम 1.0 के तहत स्वीकृत 12 सेमीकंडक्टर इकाइयों में से पांच संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत को एक विश्वसनीय देश के रूप में मान्यता मिल रही है और बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की सुरक्षा के मामले में देश का रिकॉर्ड मजबूत है। केंद्रीय मंत्री ने ‘सेमिकॉन इंडिया 2026’ को मिले देशी और विदेशी समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि कार्यक्रम के दौरान व्यापक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकों का आयोजन हुआ और दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्थाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान आयोजित विभिन्न कंट्री राउंडटेबल्स में वैश्विक कंपनियों ने भारत के साथ अपने सहयोग और निवेश को बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई। वहीं, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि मजबूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के निर्माण के लिए वैश्विक साझेदारियां आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वसनीयता, भरोसे, प्रोत्साहन और मूल्य सृजन को सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया। साथ ही आत्मनिर्भरता के लिए घरेलू क्षमताओं और वैश्विक विशेषज्ञता के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। भारत-सिंगापुर राउंडटेबल में 142 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें सिंगापुर की विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग और सप्लाई चेन विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े बाजार और विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के साथ जोड़ने पर चर्चा हुई। भारत-यूरोप राउंडटेबल में 139 प्रतिभागियों ने भाग लिया। बैठक में निवेश, सप्लाई चेन स्थानीयकरण, उपकरण एवं सामग्री, विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा, भारत-दक्षिण कोरिया राउंडटेबल में 115 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जहां विनिर्माण, तकनीक, सामग्री, एडवांस पैकेजिंग, निवेश और सप्लाई चेन समेत पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई। इसमें दक्षिण कोरिया की स्थापित सेमीकंडक्टर विशेषज्ञता और भारत की इंजीनियरिंग क्षमता तथा बढ़ते विनिर्माण इकोसिस्टम को जोड़ने पर जोर दिया गया।