नंदीग्राम कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर भड़के संजय राउत, बोले- डर गए, इसलिए पुराने केस में किया गिरफ्तार

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत और दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने पर भाजपा पर निशाना साधा। नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत पर संजय राउत ने कहा, “भाजपा क्या कहती है, इससे क्या फर्क पड़ता है? जिस तरह से नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार को गिरफ्तार किया गया है, यह कैसा न्याय है? आप डर गए, है ना? आप नंदीग्राम में डरे हुए हैं। इसीलिए आपने हमारे उम्मीदवार को 6-10 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया।” बता दें कि 19 सितंबर को नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पुलिस ने शनिवार को रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार शफीउल इस्लाम को भी एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं, दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने (जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार का नाम भी शामिल है) पर भी संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “जहां बड़ी पार्टियों के चुनाव चिह्न चोरी हो जाते हैं और पूरी की पूरी पार्टियां चोरी हो जाती हैं, वहां अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। यह तो होना ही है। केजरीवाल जी का नाम गायब है। महाराष्ट्र और पूरे देश में हजारों, लाखों और करोड़ों लोगों के नाम गायब हो जाते हैं। यह सरकार कुछ भी कर सकती है। वे दिखाना चाहते हैं कि केवल वही वोट करेंगे जिन्हें वे चाहते हैं, और जिन्हें वे नहीं चाहते, वे वोट नहीं करेंगे। यह सरकार की नीति है।” संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकार वोटर लिस्ट से नाम हटाकर चुनिंदा लोगों को ही वोट देने देना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव चिह्न और पार्टियां ही चोरी हो सकती हैं तो वोटर लिस्ट से नाम गायब होना कोई नई बात नहीं है।
भारतीय लड़ाकू विमान तेजस में सवार हुए भारत व जापान के एयरफोर्स चीफ

नई दिल्ली। जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी है। रविवार को दोनों देशों के वायुसेना प्रमुख तेजस विमान में सवार हुए। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस में अकेले उड़ान भरी। वहीं, जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भी जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन से तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। यह उड़ान दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और हवाई सहयोग की एक खास तस्वीर पेश करती है। दरअसल इन दिनों भारत व जापान की वायुसेनाएं संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ को अंजाम दे रही हैं। इस के तहत युद्ध जैसी परिस्थितियों में दोनों वायुसेनाएं अपनी हवाई युद्धक क्षमताओं को परख रही हैं। यह अभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े कई अभियानों का अभ्यास किया है। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों द्वारा भारतीय के तेजस लड़ाकू विमान को उड़ाना भारत व जापान के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। यह मौका इसलिए भी खास रहा क्योंकि ‘वीर गार्जियन 2026’ में पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत में इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास का हिस्सा बने हैं। अभ्यास में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस के अलावा सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों शामिल हैं । वहीं जापानी वायुसेना ने अपने एफ-2ए लड़ाकू विमान के साथ शिरकत की है। 9 सितंबर से 22 सितंबर तक जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास में दोनों वायुसेनाएं विभिन्न हवाई अभियानों और युद्धक गतिविधियों का अभ्यास कर रही हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त अभियानों के दौरान समन्वय को मजबूत करना है। जोधपुर के आसमान में तेजस की उड़ान ने इस संयुक्त अभ्यास में भारत की स्वदेशी हवाई शक्ति को खास तौर पर सामने रखा। अभी तक हुए इस अभ्यास में दोनों देशों के वायु योद्धा अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों को पूरा कर चुके हैं। दोनों देशों के वायुसेना अधिकारियों ने एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को भी समझा है। संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करना भी अभ्यास का अहम हिस्सा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ के जरिए दोनों देशों की वायुसेनाओं को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं को परखने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला है। वहीं दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की उपस्थिति ने इसके महत्व को रेखांकित किया है।
अमेरिका को दोबारा बातचीत शुरू करने से पहले माननी होंगी शर्तें, दूसरा कोई रास्ता नहीं: मोहसिन रेजाई

तेहरान। ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव मोहसिन रेजाई अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि अमेरिका को ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने से पहले इन शर्तों को मानना अनिवार्य है। मोहसिन रेजाई ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ”ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। तेहरान का संदेश साफ है कि अगर वॉशिंगटन अपने ही पैदा किए हुए मुश्किल हालात से बाहर निकलना चाहता है और इस मामले में और ज्यादा फंसने से बचना चाहता है, तो उसके पास ईरान के अधिकारों और उसकी शर्तों को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।” ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने शनिवार को विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के मकसद से दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें मध्यस्थों तक पहुंचा दी हैं। रेजाई ने कहा, “ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का आकलन और उनकी गणना गलत थी और यह युद्ध नेतन्याहू ने शुरू करवाया। युद्ध खत्म करने के लिए हमारी शर्तें मानना वॉशिंगटन के हित में है। ट्रंप की धमकियों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।” मेहर समाचार एजेंसी अल जजीरा के हवाले से बताया, रेजाई ने कहा कि हमें अमेरिकी सेना की कमजोरियों की जानकारी है और अब हम उसके हवाई हमलों का मुकाबला करने के लिए पहले से कहीं बेहतर तरीके से तैयार हैं। वॉशिंगटन के समझौते से पीछे हटने के बाद हमने यह नतीजा निकाला कि हमें अमेरिका को लेकर अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है। मेहर न्यूज के अनुसार, रेजाई ने कहा कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है और हमने दोबारा वार्ता शुरू करने के लिए अपनी शर्तें उन्हें बता दी हैं। हम कतर के मध्यस्थ के संपर्क में हैं। उन्होंने युद्ध रोकने के लिए हमारी शर्तें एक बार फिर वॉशिंगटन को भेजी हैं और अब हमें राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार है। हमारी शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, हमारी फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल है।
उत्तर कोरिया ने दागी संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल: जापान अलर्ट, प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी किया बयान

सोल। उत्तर कोरिया ने रविवार को एक बार फिर ईस्ट सी की ओर ‘संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल’ दागी। दक्षिण कोरिया और जापान ने इसकी पुष्टि की है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलर्ट जारी करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया ने संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की है और इससे जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है। जापान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मिसाइल समुद्र में गिर गई। जापानी मीडिया ने बताया कि इसका संभावित गिरने का स्थान जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के बाहर था। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने भी कहा कि उत्तर कोरिया ने पूर्वी समुद्र की ओर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा। शुरुआती तौर पर मिसाइल की सटीक दूरी, ऊंचाई और उड़ान पथ की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रक्षेपण के बाद एक बयान जारी किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे साझा किया गया। बयान के अनुसार, अधिकारियों से उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित अतिरिक्त प्रक्षेपणों के लिए तैयार रहने को कहा गया। संबंधित अधिकारियों को सूचना जुटाने और उसका विश्लेषण करने के साथ-साथ विमान और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने आपात स्थिति के लिए तैयार रहने और जनता को समय पर उचित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बाद की रिपोर्टों में दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बताया और कहा कि प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के पूर्वी तट के वॉनसान क्षेत्र से हुआ था। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव को लेकर उत्तर कोरिया लगातार अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की सैन्य गतिविधियों की आलोचना कर रहा है। इससे पहले 12 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने पूर्वी समुद्र की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। उस समय उत्तर कोरिया ने इसे विभिन्न हथियारों से जुड़े संयुक्त अग्निशक्ति अभ्यास का हिस्सा बताया था। उत्तर कोरिया ने हाल में अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य अभ्यासों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। अगस्त के अंत से सितंबर की शुरुआत तक अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने गुआम के पास पांच दिवसीय सैन्य अभ्यास किया था। प्योंगयांग ने इस तरह की सैन्य गतिविधियों को अपने खिलाफ खतरे के तौर पर पेश किया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने भी हाल में अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी थी और परमाणु हथियारों की क्षमता मजबूत करने की नीति में बदलाव से इनकार किया था। उत्तर कोरिया का हालिया मिसाइल प्रक्षेपण अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था आईएईए की उस कार्रवाई के तुरंत बाद हुआ है, जिसे प्योंगयांग ने खारिज कर दिया है। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना को अस्वीकार करते हुए कहा है कि आईएईए का प्रस्ताव उसके परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र होने के रुख को प्रभावित नहीं करता। उत्तर कोरिया के इस नए प्रक्षेपण से क्षेत्र में मिसाइल और परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रविवार को दागी गई मिसाइल का अंतिम उद्देश्य क्या था और उत्तर कोरिया ने इस प्रक्षेपण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है या नहीं।
ट्रंप का मीडिया पर बैन ‘फर्स्ट अमेंडमेंट’ का उल्लंघन : डब्ल्यूएचसीए

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (डब्ल्यूएचसीए) ने ट्रंप प्रशासन से सीएनएन, पॉलिटिको और एएम नाऊ के पत्रकारों की पहुंच तुरंत बहाल करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि इन पत्रकारों को व्हाइट हाउस से रोकने का फैसला पहले संशोधन का उल्लंघन है। डब्ल्यूएचसीए की अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने एक बयान में कहा, “आज सीएनएन, पॉलिटिको और एमएस नाऊ के पत्रकारों की पहुंच को रद्द करने की कार्रवाई पहले संशोधन का उल्लंघन करती है।” यह बयान तब आया जब इन तीन संगठनों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोक दिया गया। सीएनएन की सीनियर व्हाइट हाउस रिपोर्टर बेट्सी क्लेन और एमएस नाऊ की संवाददाता अकायला गार्डनर को उनके प्रेस बैज डीएक्टिवेट होने के बाद एंट्री नहीं दी गई। पॉलिटिको की व्हाइट हाउस रिपोर्टर शेयेन हैसलेट को भी प्रवेश से वंचित कर दिया गया और समाचार संगठनों के अनुसार उनका क्रेडेंशियल जब्त कर लिया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तीन संगठनों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की घोषणा के एक दिन बाद हुई है। ट्रंप ने उन पर ‘फर्जी खबरें’ दिखाने का आरोप लगाया था। बाद में अपने फैसले के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि इसके पीछे कोई एक घटना नहीं है और इसे ‘पिछले कुछ वर्षों की कई खबरों का नतीजा’ बताया। हेनरिक ने कहा कि इस फैसले का असर सिर्फ इन तीन संगठनों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “इसके निहितार्थ इन संगठनों से आगे तक जाते हैं। एक न्यूज आउटलेट को उसकी कवरेज के कारण बाहर करने के लिए इस्तेमाल किया गया मानक भविष्य में किसी भी आउटलेट पर लागू किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, “अमेरिकी लोगों को एक स्वतंत्र प्रेस के माध्यम से सत्ता में चुने गए लोगों की जांच करने में सक्षम होना चाहिए, चाहे सरकारी अधिकारी इसे अनुकूल रूप से देखें या नहीं।” हेनरिक ने कहा कि स्थापित कानूनी मिसाल सरकार की पहुंच वापस लेने की क्षमता पर सीमा लगाती है, जब एक बार पहुंच दे दी गई हो। उन्होंने कहा, “इसीलिए अदालतों ने बार-बार माना है कि एक बार व्हाइट हाउस पत्रकारों को पहुंच प्रदान करता है, तो वह मनमाने ढंग से या उनकी रिपोर्टिंग की सामग्री के आधार पर उस पहुंच से इनकार नहीं कर सकता। डब्ल्यूएचसीए प्रशासन से हमारे सहयोगियों की पहुंच तुरंत बहाल करने का आह्वान करता है।” तीनों समाचार संगठनों ने कहा है कि वे अपनी रिपोर्टिंग जारी रखेंगे और अपने पहले संशोधन के अधिकारों की रक्षा करेंगे। पॉलिटिको के ग्लोबल एडिटर-इन-चीफ जोनाथन ग्रीनबर्गर ने कहा कि संगठन “अपने पहले संशोधन अधिकारों की पुरजोर रक्षा करेगा।” एमएस नाऊ ने कहा कि वह अपने अधिकारों और स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का इरादा रखता है। सीएनएन ने इस प्रतिबंध को अपने संवैधानिक अधिकारों पर एक अवैध हमला बताया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भागीदारी हमारा कानूनी अधिकार, किसी का एहसान नहीं : ईरान

तेहरान। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में अपने देश की नुमांइदगी को कानूनी अधिकार बताया है। ये सत्र न्यूयॉर्क में आयोजित किया जा रहा है। आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में बाघेई ने कहा, “न्यूयॉर्क जाने में ईरान के प्रतिनिधियों की कोई दिलचस्पी नहीं है। हालांकि, यह एक ऐसा अहम स्थान है जिसे छोड़ा नहीं जा सकता। यूएनजीए के सेशन में ईरान की भागीदारी उसका कानूनी अधिकार है, न कि किसी की तरफ से दिया गया कोई एहसान। ईरान यूएन के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक है।” सिंहुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “ईरान के प्रतिनिधियों के तौर पर हमारा यह कर्तव्य है कि हम इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल हों और दुनिया को ईरान का पक्ष सुनाएं।” उन्होंने “दूसरे पक्ष” पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की “रुकावटें और नकारात्मक प्रचार” ईरान को सेशन में भाग लेने और अपना पक्ष रखने के उसके जायज अधिकार से कभी पीछे नहीं हटा पाएंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के गुरुवार के बयान के अनुसार, अमेरिका ने कहा है कि वह यूएनजीए के लिए ईरान के “मुख्य प्रतिनिधिमंडल” को “मेजबान देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों के तहत” वीजा जारी करेगा। बयान में कहा गया, “प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा है।” इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में अपनी कूटनीति के केंद्र में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रखेंगे। खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत की योजना है और अमेरिकी अधिकारी तेहरान के साथ व्यापार करने वाली संस्थाओं को और नतीजों की चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप मंगलवार को न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा को वो संबोधित करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि ईरान चर्चा का मुख्य विषय होगा, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि राष्ट्रपति या अन्य अमेरिकी प्रतिनिधि ईरानी अधिकारियों से मिलेंगे या नहीं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि ट्रंप का भाषण इस बात पर बल देगा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए। उन्होंने कहा कि यह मांग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बार-बार पारित प्रस्तावों में भी दिखाई दी है। वाल्ट्ज ने यहां पत्रकारों को बताया कि भाषण में राजनयिक समझौतों और अनसुलझे विवादों के साथ-साथ ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना पर हुई प्रगति को भी शामिल किया जाएगा। अमेरिका-ईरान के बीच संभावित मुलाकातों के बारे में पूछे जाने पर, अधिकारी ने राष्ट्रपति या विदेश मंत्री के अंतिम कार्यक्रम से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
सेंटकॉम के दावे झूठे और हास्यास्पद, ईरान के नियंत्रण में है होर्मुज स्ट्रेट: ब्रिगेडियर जनरल शेखरची

तेहरान। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के दावों को झूठा और हास्यास्पद बताते हुए अमेरिका की आलोचना की। ईरान ने स्पष्ट किया कि इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान का पूरी तरह से नियंत्रण है। ईरान की इजाजत के बिना यहां से एक भी जहाज नहीं गुजर सकता। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेखरची ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के उन दावों को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सेनाओं ने सिर्फ पिछले दो महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से एक अरब बैरल से ज्यादा तेल ले जाने में मदद की है। शेखरची ने कहा कि इस अहम समुद्री रास्ते पर पहल और नियंत्रण अब भी पूरी तरह ईरान के हाथ में है। जनरल शेखरची ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर ने पिछले दो महीनों में होर्मुज स्ट्रेट से एक अरब बैरल तेल बाहर ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा देने को लेकर जो हालिया दावे किए हैं, वे ‘झूठे’ और ‘हास्यास्पद’ हैं। आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि सेंटकॉम कमांडर के ये दावे हकीकत बताने के बजाय एक नाकाम मनोवैज्ञानिक अभियान ज्यादा लगते हैं। इस तरह के बयानों का मकसद इलाके में मौजूद अमेरिकी सेना के ‘थके और कमजोर पड़ चुके’ जवानों का हौसला बढ़ाना और वहां अमेरिका को हो रहे भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान को सही ठहराना है। शेखरची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में नियंत्रण अब भी ईरान की ताकतवर सशस्त्र सेनाओं के हाथ में है। इससे पहले सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोसट में लिखा था, ”अमेरिकी सेनाओं ने सिर्फ पिछले दो महीनों में होर्मुज स्ट्रेट से एक अरब बैरल से ज्यादा तेल ले जाने में मदद की है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने दो हजार से ज्यादा कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा दी है।” कूपर ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट के मुख्य समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं, जिससे हजारों जहाजों के लिए इस समुद्री रास्ते से गुजरना संभव हो पाया है।
जर्मनी के दो राज्यों में चुनाव, दांव पर चांसलर मर्ज का राजनीतिक भविष्य!

बर्लिन। जर्मनी में रविवार को बर्लिन और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में रविवार को हो रहे राज्य चुनावों पर देश ही नहीं पूरी दुनिया की नजर है। इन चुनावों को चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक अग्निपरीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में सैक्सोनी-आनहाल्ट में दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की रिकॉर्ड जीत के बाद मर्ज पर दबाव और बढ़ गया है। मर्ज को चांसलर बने अभी करीब 16 महीने ही हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था, महंगाई, सामाजिक कल्याण सुधारों और प्रवासन जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच एएफडी का बढ़ता जनसमर्थन जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। करीब 25 लाख मतदाता स्थानीय समयानुसार सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक (सीईएसटी) अपने मत का प्रयोग करेंगे। इस महीने की शुरुआत में सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में एएफडी को करीब 44 फीसदी वोट मिले थे। यह किसी जर्मन राज्य चुनाव में पार्टी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन था। सीडीयू करीब 17 फीसदी वोट के साथ काफी पीछे रह गई। इस नतीजे ने मर्ज की पार्टी के भीतर भी चिंता बढ़ा दी। मर्ज ने एक बयान में कहा था कि परिणाम ने सीडीयू को उसकी बुनियाद तक हिला दिया है, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए सरकार की नीतियों पर काम जारी रखने की बात कही। अब बर्लिन और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया के चुनाव उस राजनीतिक माहौल में हो रहे हैं, जिसमें एएफडी को पूर्वी जर्मनी में खास तौर पर मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी और केंद्र-वाम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री मनुएला श्वेसिग की एसपीडी ने चुनाव अभियान के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू सीडीयू की स्थिति भी है। पार्टी के लिए चिंता सिर्फ एएफडी की बढ़त नहीं है, बल्कि यह भी है कि उसके खराब प्रदर्शन की स्थिति में मर्ज के नेतृत्व को लेकर सीडीयू के भीतर सवाल और तेज हो सकते हैं। रॉयटर्स के अनुसार, पार्टी के भीतर मर्ज की नेतृत्व क्षमता को लेकर पहले से चर्चा चल रही है। बर्लिन की तस्वीर कुछ अलग है। यहां मुकाबला सीडीयू, वामपंथी डाई लिंके और एएफडी के बीच कड़ा बना हुआ है। राजधानी में चुनाव अभियान का एक बड़ा मुद्दा आवास और बढ़ता किराया है। बर्लिन में 2014 के बाद से किराए में भारी वृद्धि हुई है और शहर को आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नए घरों की जरूरत बताई जा रही है। इन चुनावों का असर केवल राज्य सरकारों तक सीमित नहीं माना जा रहा। जर्मनी में राज्य चुनावों का इस्तेमाल अक्सर संघीय सरकार के प्रति जनता के रुझान को समझने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में यदि सीडीयू को दोनों राज्यों में कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ता है, तो मर्ज के लिए पार्टी के भीतर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजे अपने आप संघीय चांसलर को पद से नहीं हटाते। मर्ज़ की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि उनकी सरकार में शामिल एसपीडी और सीडीयू के बीच कुछ आर्थिक और सामाजिक नीतियों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। सरकार सामाजिक कल्याण व्यवस्था, पेंशन और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधारों की दिशा में कदम उठाना चाहती है, लेकिन इन सुधारों की राजनीतिक कीमत को लेकर गठबंधन के भीतर भी चिंता है। दूसरी ओर एएफडी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ जर्मनी की पारंपरिक पार्टियों की वर्षों पुरानी रणनीति भी चर्चा में है। मुख्यधारा की पार्टियां अब तक एएफडी के साथ औपचारिक गठबंधन या सत्ता में साझेदारी से दूरी बनाए रखने की नीति अपनाती रही हैं। इसे राजनीतिक तौर पर ‘फायरवॉल’ रणनीति कहा जाता है। हाल के चुनावी परिणामों ने इस रणनीति की प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज कर दी है। एएफडी की बढ़त के पीछे प्रवासन के साथ-साथ आर्थिक असंतोष भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन रहा है। पूर्वी जर्मनी के कई इलाकों में उद्योग, रोजगार और जनसंख्या से जुड़े सवालों ने राजनीतिक असंतोष को बढ़ाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी जर्मनी में एएफडी के बढ़ते समर्थन को लेकर प्रवासी समुदायों में भी चिंता बढ़ रही है। मर्ज ने हालांकि संकेत दिया है कि वह दबाव के बावजूद अपनी सरकार और सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। उनका तर्क है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना ही सरकार के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों से निपटने का रास्ता है। साथ ही वह यूरोप की सुरक्षा और यूक्रेन के मुद्दे पर अपनी मौजूदा विदेश नीति जारी रखने पर भी जोर देते रहे हैं। रविवार के चुनाव इसलिए जर्मनी की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इनके नतीजे यह बताएंगे कि सैक्सोनी-आनहाल्ट में एएफडी की सफलता एक राज्य तक सीमित रही या पूर्वी जर्मनी के अन्य हिस्सों में भी उसका प्रभाव और मजबूत हुआ। साथ ही सीडीयू के प्रदर्शन से यह संकेत मिलेगा कि मर्ज की पार्टी अपने पारंपरिक मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने में किस स्थिति में है।
जम्मू-कश्मीरः आग लगने से कटरा हेलीपैड टर्मिनल को आंशिक नुकसान पहुंचा

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कटरा में पहाड़ी पर स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर तक तीर्थयात्रियों को ले जाने वाले हेलीपैड टर्मिनल में रविवार तड़के आग लगने से उसे आंशिक नुकसान पहुंचा। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आग का पता रविवार सुबह 3:15 बजे चला। मौके पर मौजूद लोगों ने फायर और इमरजेंसी सर्विस की मदद से जल्द ही आग पर काबू पा लिया। घटना के समय हेलिपैड टर्मिनल बंद था। यह टर्मिनल त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक अहम ट्रांजिट पॉइंट है। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। आग लगने की सही वजह का पता लगाने के लिए जांच चल रही है, हालांकि शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। जून में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तय लैंडिंग से कुछ मिनट पहले अयोध्या के राम कथा पार्क में हेलीपैड के पास आग लग गई थी। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आग लगने की वजह का पता लगाने और यह जानने के लिए जांच शुरू की थी कि मुख्यमंत्री के आने के लिए तय हेलीपैड के पास आग कैसे लगी। खबरों के अनुसार, आग हेलीपैड के पास शुरू हुई और तेजी से पास के सरयू गेस्ट हाउस की ओर फैल गई। मुख्यमंत्री के उतरने से पहले आग पर काबू पाने से पहले इसने लगभग 15 मीटर के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था। मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पहले आग बुझाने की कोशिश की, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की टीमें आईं और आग पर काबू पाया। वहीं, राजस्थान के जयपुर में त्रिपोलिया बाज़ार स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स मनिहारी कटला (जिसे पुरोहित जी का कटला भी कहा जाता है) में गुरुवार सुबह भीषण आग लग गई। खबरों के मुताबिक, आग से 20 से अधिक दुकानें और गोदाम प्रभावित हुए, जिनमें कपड़ों के गोदाम, प्लास्टिक के सामान की दुकानें और चूड़ियों की दुकानें शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग दूसरी मंजिल पर कपड़ों की दुकान के बाहर कार्टन में रखे सामान से शुरू हुई थी।
उत्तराखंड के सीएम धामी बद्रीनाथ धाम पहुंचे, मंदिर समिति ने किया जोरदार स्वागत

बद्रीनाथ। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को बद्रीनाथ धाम पहुंचे। बद्रीनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा फूल मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे बद्रीनाथ धाम में पुलिस और प्रशासन की टीम तैनात की गई है। इस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। धाम पहुंचकर मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का हाथ जोड़कर अभिवादन किया और उनका कुशलक्षेम जाना। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बद्रीनाथ धाम में आयोजित होने वाले देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल और कथा महोत्सव में शामिल होंगे। इस फेस्टिवल में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। बता दें कि देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल और कथा महोत्सव शनिवार से शुरू हो गया है, जिसमें गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत, विद्यालय एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्थानीय हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन महोत्सव के प्रमुख आकर्षण होंगे। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कला और संस्कृति को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। महोत्सव में भारतीय सेना की ओर से विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सीमाओं की सुरक्षा और आपदा राहत कार्यों में सेना की भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा समाज के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और सीमांत क्षेत्रों के साथ उसके जुड़ाव को भी प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा। आयोजन स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और महिला समूहों व युवाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। महोत्सव के दौरान सीमांत गांवों की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक महत्व को भी प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इसके माध्यम से देशभर से बद्रीनाथ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीमांत क्षेत्रों की जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा। आयोजन को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से जोड़ते हुए सीमांत क्षेत्रों के पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों, कारीगरों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों को अपनी प्रतिभा तथा उत्पादों को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।