यह सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं, गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रहा है: कांग्रेस सांसद

नई दिल्ली। एनएसयूआई के विरोध प्रदर्शन के दौरान लड़कियों और युवाओं पर हुए कथित पुलिस उत्पीड़न को लेकर कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, बल्कि अमित शाह के निर्देश पर हो रहा है और पुलिस सुरक्षा कवच की तरह काम करने के बजाय युवाओं पर अटैक कर रही है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “लड़कियों को चोटें आई हैं, वो बच्चियां हैं। महिलाओं और युवाओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। ये सिर्फ दिल्ली पुलिस का फैसला नहीं है, अमित शाह के निर्देश पर ये हो रहा है। जो गुजरात में बहुत साल पहले हुआ था, वो अब यहां दिल्ली में किया जा रहा है। वह बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहे हैं, लेकिन हमें युवा और लड़कियों पर गर्व है, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं और लड़ाई लड़ रही हैं।” उन्होंने कहा कि पुलिस को एक सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए था, लेकिन यहां पर वो अटैक कर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी एक भाई और देवदूत की तरह हैं, जो इनकी सुरक्षा के लिए आए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि किसी पुलिसकर्मी में फिर से इतनी हिम्मत ना हो कि वो इस तरह की बर्बरता करें। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “भाजपा के पास सिर्फ ध्यान भटकाने की तरकीबें हैं। सब जानते हैं कि राहुल गांधी कौन हैं और वह किस बात के लिए खड़े हैं। भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है और वह ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। जो युवा सड़कों पर आए हैं, क्या वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं?” उन्होंने कहा कि ये युवा देश को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं, इसलिए भाजपा की इस तरह की रणनीति चलती रहेगी। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। राहुल गांधी इस लड़ाई को लड़ना जारी रखेंगे। 2029 में भाजपा की जीत के दावे पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में देश में ऐसे हालात बने हुए हैं, और ये 2029 में जीत की बात कर रहे हैं। चुनाव पर कब्जा करके ये जीत का दावा करते हैं। भाजपा डरी और घबराई हुई है। हम राहुल गांधी के नेतृत्व में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इसके अलावा, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि इस देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है। पुलिस गुंडागर्दी पर उतर आई है। उनका काम आम लोगों और स्टूडेंट्स की आवाज उठाना, उनकी रक्षा करना और उनका साथ देना है, लेकिन अब यह उनकी प्राथमिकता नहीं रही। उनकी एकमात्र चिंता यह है कि ज्ञानेश कुमार की रक्षा कैसे की जाए और सरकार के खिलाफ किसी भी प्रोटेस्ट को कैसे रोका जाए।

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