एमसीडी नियमों को ताक पर रखकर तदर्थ समिति का चुनाव कराने पर भाजपा के खिलाफ आप” का हल्ला बोल

नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी ने नियम विरुद्ध एमसीडी के तदर्थ समिति का चुनाव कराने पर भाजपा के खिलाफ सिविक सेंटर में जमकर प्रदर्शन किया। गुरुवार को अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति का चुनाव अपराह्न 3 बजे होना निर्धारित था, लेकिन भाजपा शासित एमसीडी ने नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए चुनाव 2:50 बजे ही करा दिया। साथ ही, समिति में अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने के लिए नियम विरुद्ध जाकर दलित सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर 21 कर दी। इसके खिलाफ “आप” पार्षदों ने मेयर कार्यालय का घेराव किया और चुनाव को तत्काल रद्द करने की मांग की।इस बाबत एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि सिविक सेंटर में गुरुवार को आयोजित तदर्थ समिति चुनाव में भाजपा शासित एमसीडी ने एक बार फिर अपना दलित विरोधी रवैया उजागर किया। अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति का चुनाव अपराह्न 3 बजे होना निर्धारित था, लेकिन भाजपा शासित एमसीडी ने नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए चुनाव 2:50 बजे ही करा दिया।उन्होंने कहा कि भाजपा के इसी दलित विरोधी और अलोकतांत्रिक रवैये के खिलाफ आम आदमी पार्टी के निगम पार्षदों ने भाजपा महापौर कार्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी की मांग है कि इस चुनाव को तत्काल रद्द किया जाए और अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति में सदस्यों की संख्या 21 से बढ़ाकर पुनः 35 की जाए, ताकि समिति का गठन निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से हो सके।अंकुश नारंग ने कहा कि तदर्थ समिति चुनाव के दौरान भाजपा शासित एमसीडी ने अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति में अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने के उद्देश्य से समिति में दलित सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर मात्र 21 कर दी। भाजपा के इस कदम के विरोध में आम आदमी पार्टी ने दलित समाज के प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि सदस्यों की संख्या कम करने के खिलाफ उन्होंने एमसीडी को पत्र भी लिखा था और इस चुनाव को टालने का आग्रह किया था। उन्होंने मांग की थी कि दलित सदस्यों की संख्या पुनः 21 से बढ़ाकर 35 किया जाए, इसके बाद चुनाव कराया जाए। लेकिन भाजपा ने मनमानी करते हुए चुनाव करा दिया।अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा की चार इंजन सरकार की दलित विरोधी मानसिकता आज एक बार फिर पूरी दिल्ली के सामने आ गई। भाजपा महापौर प्रवेश वाही ने दलित पार्षदों और दिल्ली के दलित समाज के अधिकारों को कुचलते हुए चुनाव कराया। दलित पार्षद अपने हक और अधिकारों की लड़ाई के लिए भाजपा महापौर के सामने डटे रहे। दिल्ली के दलितों के अधिकारों के लिए वे हर संघर्ष करने को तैयार हैं। दलितों का हक छीनने वाली भाजपा की इस तानाशाही के खिलाफ आम आदमी पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी।अंकुश नारंग ने कहा कि सूत्रों के अनुसार, आज जब दलित पार्षद अपने अधिकारों और हकों की आवाज़ उठाने के लिए महापौर कार्यालय पहुंचे, तो उनकी बात सुनने और न्याय करने के बजाय दलित पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। भाजपा की चार इंजन सरकार और भाजपा महापौर प्रवेश वाही की यह कार्यशैली साफ़ तौर पर दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। दलितों के अधिकारों की आवाज़ दबाने की हर कोशिश के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।उधर, एमसीडी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि एससी-एसटी समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन होना था, लेकिन भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता ने एक बार फिर दलित समाज और दलित पार्षदों को धोखा दिया है। जिस समिति में 35 सदस्य हुआ करते थे, उसे बदलकर 21 सदस्यों का कर दिया गया क्योंकि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी। भाजपा के पास सिर्फ 11 दलित पार्षद थे, जबकि आम आदमी पार्टी के पास 29 थे (जिनमें से दो के भाजपा में जाने के बाद उनका आंकड़ा 13 और हमारा 27 रह गया)। भाजपा अच्छी तरह जानती थी कि बहुमत आम आदमी पार्टी के पास है और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष उसी का बनेगा। इसी वजह से अपनी गंदी मानसिकता दिखाते हुए उन्होंने 14 दलित पार्षदों को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जो समिति में शामिल होकर अपने समाज के मुद्दे उठा सकते थे।प्रीति डोगरा ने कहा कि भाजपा की मानसिकता हमेशा से दलित विरोधी रही है। जो चुनाव दोपहर 3 बजे होना था, वह आधे घंटे पहले ही करा लिया गया, जिससे आम आदमी पार्टी के सदस्यों को शामिल होने का मौका तक नहीं मिला। यह भाजपा की मनुवादी और दलित विरोधी सोच को उजागर करता है। आज वाल्मीकि, जाटव, खटीक सहित सभी दलित समाजों के साथ भाजपा ने धोखा किया है, जिसे दलित समाज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। हमारी मांग है कि मेयर जल्द से जल्द इस समिति को निलंबित कर भंग करें और दोबारा 35 सदस्यों के साथ इसका गठन करें। भाजपा यह कान खोलकर सुन ले कि हमारे दलित पार्षद उनकी मनुवादी सोच के सामने झुकने वाले नहीं हैं।वहीं, निगम पार्षद सारिका चौधरी ने कहा कि भाजपा ने आज फिर घटिया राजनीति की है। जब उन्हें लगा कि आम आदमी पार्टी के पार्षदों की तादाद ज्यादा है और चेयरमैन उनका बन जाएगा, तो उन्होंने 35 की जगह 21 सदस्यों की समिति कर दी और चुनाव आधा घंटा पहले ही करवा लिया। एससी समुदाय के पार्षद सुरक्षित सीटों से जीतकर आते हैं और अपने क्षेत्रों में दलितों, महिलाओं और सफाई कर्मचारियों पर होने वाले अत्याचारों और समस्याओं की आवाज इस समिति में उठाते हैं। आज भाजपा ने उस आवाज को दबाने का काम किया है और आम आदमी पार्टी के पार्षदों के नाम काट दिए गए।सारिका चौधरी ने कहा कि भाजपा हमेशा वोटों के लिए दलित समाज की बात करती है, लेकिन जब हकों की बात आती है तो दलितों को पीछे धकेल कर उन पर अत्याचार करती है। आज दिल्ली के अलग-अलग कोनों से आए सभी दलित पार्षदों के दिलों को ठेस पहुंची है। हमारी मांग है कि गलत तरीके से बनाई गई इस अवैध समिति को भंग किया जाए और 35 सदस्यों के साथ इसका दोबारा गठन हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम भाजपा के खिलाफ कोर्ट तक जाएंगे उधर, निगम पार्षद मोहिनी जिनवाल ने कहा कि चुनाव का समय दोपहर 3 बजे था, लेकिन भाजपा ने इसे 2:30 बजे ही करवा लिया। हमारे पार्षद सभागृह में पहुंचे भी नहीं थे और इन्होंने अपना चेयरमैन और उपाध्यक्ष चुन लिया। एमसीडी एक्ट के अनुसार हमेशा से 35 लोगों की समिति बनती आ रही है, लेकिन भाजपा ने बेईमानी करते हुए इसे 21 लोगों का कर दिया, क्योंकि वे जानते थे कि आम आदमी पार्टी के पास बहुमत है।मोहिनी जिनवाल ने कहा कि हम अपने 14 दलित पार्षदों का हक क्यों मरने दें? कल को वे हमसे पूछेंगे कि हमने सदन में उनके लिए आवाज क्यों नहीं उठाई? भाजपा हमेशा से दलितों की आवाज दबाती आई है। यह केवल नाम के लिए हमें हिंदू मानती है और बाबा साहब के संविधान से नहीं, बल्कि अपनी मनुवादी सोच से चलती है। मेयर ने पूरी रणनीति बनाकर समय से पहले बेईमानी से चुनाव करा लिया। हम 27 दलित पार्षदों की यह मांग है कि इस चुनाव को रद्द किया जाए और 35 सदस्यों वाली समिति दोबारा बनाई जाए। हम इस समिति को रद्द करवाने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

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