दिल्ली Q2 2026 में भारत के टॉप चार क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट मार्केट्स में शामिल

नई दिल्ली। दिल्ली ने 2026 की दूसरी तिमाही में भारत की कुल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वैल्यू में 7.38% का योगदान दिया और कॉइनस्विच की २०२६ की दूसरी तिमाही की रिपोर्ट भारत का क्रिप्टो पोर्टफोलियो: भारत कैसे निवेश करता है में शामिल राज्यों में चौथे नंबर पर रही। राज्य स्तर की रैंकिंग में दिल्ली से आगे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक रहे।भारत की कुल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वैल्यू में दिल्ली की हिस्सेदारी 7.38% रही। इससे आगे कर्नाटक रहा, जिसकी देश की कुल क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वैल्यू में 8.10% हिस्सेदारी थी। दिल्ली के बाद हरियाणा की हिस्सेदारी 5.89%, राजस्थान की 5.87%, पश्चिम बंगाल की 5.25%, आंध्र प्रदेश की 4.95%, तमिलनाडु की 4.95% और बिहार की 4.29% रही।इन आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली रिपोर्ट में राज्य स्तर पर सबसे ज्यादा योगदान देने वाले चार राज्यों में शामिल है। उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 12.89% रही, जिसके बाद महाराष्ट्र 12.39% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। कर्नाटक 8.10% की हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर रहा, जबकि दिल्ली 7.38% के साथ चौथे नंबर पर रही। इन चारों राज्यों ने मिलकर रिपोर्ट में दर्ज देश की कुल इन्वेस्टमेंट वैल्यू का 40.76% हिस्सा बनाया।२०२६ की दूसरी तिमाही के डेटा में दिल्ली के अंदर किसी खास शहर, जिले या इलाके को सबसे ज्यादा योगदान देने वाला नहीं बताया गया है। इसलिए रिपोर्ट में दिल्ली की इन्वेस्टमेंट वैल्यू को नेशनल कैपिटल टेरिटरी के किसी खास इलाके से जोड़कर नहीं देखा गया है। राज्य स्तर का यह आंकड़ा दिल्ली की कुल इन्वेस्टमेंट वैल्यू को दिखाता है।लिंग के हिसाब से देखें तो दिल्ली की कुल इन्वेस्टमेंट वैल्यू में पुरुष इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी 79.69% रही। महिला इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी 20.31% रही। ये आंकड़े रिपोर्टिंग पीरियड के दौरान दिल्ली में पुरुष और महिला इन्वेस्टर्स के बीच दर्ज कुल इन्वेस्टमेंट वैल्यू का बंटवारा दिखाते हैं।२०२६ की दूसरी तिमाही में दिल्ली के इन्वेस्टर्स के बीच बीटीसी सबसे ज्यादा रखा जाने वाला कॉइन रहा।कॉइनस्विच के सह-संस्थापक आशीष सिंघल ने कहा, “हर मार्केट साइकिल अपने साथ नए इन्वेस्टर्स लेकर आती है, लेकिन समय के साथ हम देखते हैं कि इन्वेस्टर्स ज्यादा जानकारी के साथ और सोच-समझकर मार्केट में हिस्सा लेते हैं। भारत में हम देख रहे हैं कि क्रिप्टो को केवल एक नए एसेट क्लास के तौर पर देखने के बजाय इन्वेस्टर्स अब यह बेहतर तरीके से समझ रहे हैं कि वे इसमें किस तरह और कितनी हिस्सेदारी रखना चाहते हैं। क्रिप्टो को अपनाने के अगले दौर में ज्यादा लोगों को मार्केट से जोड़ने के साथ-साथ मौजूदा इन्वेस्टर्स के बीच भरोसा, जागरूकता और समझ बढ़ाना भी अहम होगा। जैसे-जैसे क्रिप्टो भारत के निवेश के माहौल में अपनी जगह बना रहा है, यह बदलाव आगे काफी अहम रहेगा।यह रिपोर्ट पूरी तरह से 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान कॉइनस्विच प्लेटफॉर्म पर हुई गतिविधियों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दूसरे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर मौजूद यूज़र्स का डेटा शामिल नहीं है।

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