नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू हुए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति और आगे की रणनीति पर पूसा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता के अनुरूप यह काफ़ी महत्वपूर्ण कार्य है जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना दालों में आत्मनिर्भरता लाना और खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल व पारदर्शी बनाकर खेतों तक वास्तविक असर पहुँचाना है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री पियूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ग्रेबियल डेन्वांग बागसू, नागालैंड के मंत्री महात यंथन और केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चन्द्रा समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है कि योजनाओं का असर सिर्फ रिपोर्टों में नहीं बल्कि खेतों में और किसानों की जेब में दिखेय उन्होंने राज्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप करेंगे तो जरूर होगा और कहा कि जिन जगहों पर गंभीरता और कौशल से काम हुआ है वहाँ लक्ष्यों को 100 प्रतिशत से ऊपर हासिल किया गया जबकि जहाँ कोशिश कम रही वहां परिणाम पीछे रहे इसलिए उन्होंने राज्यों से पूरी जिम्मेदारी और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा रखी। उन्होंने फार्मर आईडी के महत्व पर विशेष जोर दिया और बताया कि फार्मर आईडी बनने के बाद भुगतान सीधे किसान के खाते में जा रहे हैं जिससे भुगतान तेज़ और पारदर्शी हुआ हैय महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि समय पर भुगतान से बड़े पैमाने पर लाभ देखा गया और केंद्र ने फार्मर आईडी बनवाने और शिविर चलाने के लिए फंड भी उपलब्ध करवाया हैए इतना ही नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से एक महीने के भीतर आईडी बनना संभव है पर यह तभी होगा जब शिविर ईमानदारी और सही तरीके से चलें और पैसा कार्यक्रम के नाम पर बर्बाद न हो।