दलेर मेहंदी स्टेज शो केस: सीएम धामी ने सिंगर मीका सिंह से फोन पर की बात, बोले- ‘देवभूमि में सभी कलाकारों का सम्मान’

देहरादून। उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान मशहूर गायक दलेर मेहंदी के साथ कथित बदसलूकी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में गायक मीका सिंह ने खुलकर दलेर मेहंदी का समर्थन किया था, जिसके बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी कि उन्होंने इस मामले में मीका सिंह से फोन पर बात की है। सीएम धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज प्रसिद्ध गायक मीका सिंह से दूरभाष पर बातचीत की। उन्होंने दलेर मेहंदी से जुड़े विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को आपसी संवाद और सौहार्द से दूर किया जाना चाहिए। देवभूमि उत्तराखंड ‘अतिथि देवो भवः’ की हमारी महान परंपरा का संवाहक है। यहां सभी कलाकारों का सदैव हृदय से स्वागत और सम्मान है।” दरअसल, यह पूरा विवाद उत्तराखंड में हुए एक सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि मंच पर राज्य के एक मंत्री ने दलेर मेहंदी से रूडली बात की थी। इससे पहले मीका सिंह ने ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर नाराजगी जताई थी। मीका ने लिखा था, “आजकल स्कूलों में भी बच्चों को डांटने-फटकारने को लेकर इतनी सावधानी बरती जाती है, लेकिन उत्तराखंड में आपके मंत्री ने दलेर मेहंदी को मंच पर बुलाकर जिस तरह इतनी रूडली बात की, क्या यह सही है? यह कहां का इंसाफ है?” मीका सिंह ने सीएम धामी को टैग करते हुए आगे लिखा, “सीएम धामी, हम सब आपकी इज्जत करते हैं और उत्तराखंड से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन किसी कलाकार के साथ इस तरह का व्यवहार बिल्कुल सही नहीं है। दलेर अपनी कमिटमेंट निभाने आए थे और उन्होंने पूरे 1 घंटा 30 मिनट परफॉर्म किया।” मीका ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि जहां तक उन्हें जानकारी है, इस कार्यक्रम के लिए गायिका सुनंदा शर्मा को भी बुक किया गया था, लेकिन वह किसी वजह से नहीं आ पाईं। ऐसे में दलेर मेहंदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए डेढ़ घंटे तक दर्शकों का मनोरंजन किया। उन्होंने लिखा, “कलाकार भी इंसान होते हैं। उनकी भी इज्जत और सम्मान होना चाहिए। अगर कोई शिकायत थी तो उसे सम्मानपूर्वक भी रखा जा सकता था। धामी साहब, आप मेरे भाई जैसे हैं और समझदार इंसान हैं। मुझे उम्मीद है कि आप इस मामले को समझेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी कलाकार के सम्मान को ठेस न पहुंचे।
राजस्थान की उद्यमशीलता और गुजरात का नवाचार तंत्र युवाओं के लिए अपार अवसर पैदा कर सकता है: मंत्री बावलिया

जयपुर। गुजरात सरकार ने गुरुवार को जयपुर में आयोजित रोड शो के दौरान राजस्थान के कारोबारी समुदाय को राज्य में निवेश के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया। यह रोड शो 10 से 12 जनवरी 2027 तक गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित होने वाले वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से पहले आयोजित किया गया। इस रोड शो में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से उद्योगपतियों, व्यापारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच निवेश के अवसरों और संभावित साझेदारियों पर विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना था। गुजरात के प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी कीं। इस दौरान राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों, बुनियादी ढांचे, औद्योगिक तंत्र और निवेशकों को मिलने वाले सरकारी सहयोग की जानकारी दी गई। गुजरात सरकार में श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार तथा ग्रामीण विकास विभागों के राज्य मंत्री कुंवरजीभाई बावलिया ने आईएएनएस के साथ एक ई-साक्षात्कार में दोनों राज्यों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से बात की। सवाल: राजस्थान और गुजरात के संबंधों को आप किस तरह देखते हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: राजस्थान और गुजरात के संबंध नए नहीं हैं। दोनों राज्यों के बीच लंबी साझा सीमा, सदियों से चले आ रहे व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने इन संबंधों की नींव रखी है। नाथद्वारा के श्रीनाथजी और द्वारकाधीश के प्रति आस्था का यह संबंध हर साल दोनों राज्यों के हजारों श्रद्धालुओं को जोड़ता है। सवाल: व्यापार और उद्यम के क्षेत्र में दोनों राज्यों ने किस तरह मिलकर काम किया है? कुंवरजीभाई बावलिया: कई पीढ़ियों से गुजराती और मारवाड़ी उद्यमियों ने मिलकर व्यापार, विनिर्माण, वित्त और निर्यात के क्षेत्रों में सफल उद्यम खड़े किए हैं। सवाल: आपने राजस्थान का अभिवादन ‘खम्मा घणी’ कहकर किया। इसके पीछे क्या भावना है? कुंवरजीभाई बावलिया: मेरे लिए ‘खम्मा घणी’ केवल अभिवादन नहीं है। यह गुजरात की ओर से राजस्थान के लिए मित्रता का संदेश है। सवाल: आज आप राजस्थान और जयपुर को किस रूप में देखते हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: राजस्थान आज देश के सबसे गतिशील विकास केंद्रों में से एक है। जयपुर अपनी विरासत को संरक्षित रखते हुए व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है। सवाल: गुजरात के साथ काम करने से राजस्थान के उद्योगों को क्या ठोस लाभ मिल सकता है? कुंवरजीभाई बावलिया: गुजरात भारत का निर्यात प्रवेश द्वार है। यहां के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं राजस्थान की विनिर्माण क्षमता को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का स्वाभाविक मार्ग प्रदान करती हैं। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा दोनों राज्यों से होकर गुजरता है। यह एक साझा आर्थिक गलियारा है, जो विनिर्माण केंद्रों, लॉजिस्टिक्स पार्कों और निर्यात केंद्रों को जोड़ता है। सवाल: गुजरात भविष्य के किन उद्योगों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है? कुंवरजीभाई बावलिया: गुजरात केवल आज के उद्योगों का निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य के उद्योगों को भी विकसित कर रहा है। विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026 के तहत हमारा ध्यान सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उन्नत विनिर्माण पर है। सवाल: सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में गुजरात की स्थिति क्या है और इससे राजस्थान को क्या अवसर मिल सकते हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से छह गुजरात में हैं। यह केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एक संपूर्ण औद्योगिक तंत्र विकसित हो रहा है, जिसमें राजस्थान के उद्यमों के लिए भी अवसर मौजूद हैं। सवाल: गुजरात की विकास यात्रा में धोलेरा और खावड़ा की क्या भूमिका है? कुंवरजीभाई बावलिया: धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र उच्च प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों के प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है। वहीं, खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना रहा है। सवाल: रत्न एवं आभूषण और कपड़ा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में दोनों राज्य किस तरह साथ आ सकते हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: जयपुर का विश्व प्रसिद्ध रत्न उद्योग सूरत के हीरा प्रसंस्करण और प्रयोगशाला में विकसित हीरों के उद्योग का पूरक है। इसी तरह, ऊन, बुनाई और परिधान के क्षेत्र में राजस्थान की ताकत तथा फाइबर, कपड़े और तकनीकी वस्त्रों में गुजरात के नेतृत्व को मिलाकर वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाई जा सकती है। सवाल: नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी की कितनी संभावनाएं हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान का नेतृत्व और गुजरात का खावड़ा ऊर्जा तंत्र मिलकर स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकते हैं। सवाल: सिरेमिक और पर्यटन के क्षेत्रों में सहयोग कैसे बढ़ सकता है? कुंवरजीभाई बावलिया: राजस्थान की खनिज संपदा मोरबी के सिरेमिक उद्योग समूह की जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकती है। वहीं, दोनों राज्यों की साझा विरासत को जोड़कर एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किए जा सकते हैं। सवाल: बड़े निवेश से छोटे कारोबारियों और आम लोगों को क्या लाभ होगा? कुंवरजीभाई बावलिया: बड़े निवेश से आपूर्तिकर्ताओं का नेटवर्क बनता है। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा होते हैं। एमएसएमई रोजगार और समावेशी विकास के इंजन बनते हैं। सवाल: श्रम और कौशल मंत्री के रूप में आप निवेश और कौशल के बीच संबंध को किस तरह देखते हैं? कुंवरजीभाई बावलिया: मेरा मानना है कि किसी भी अर्थव्यवस्था की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता उतनी ही प्रतिभा और कौशल पर निर्भर करती है, जितनी निवेश पर। सवाल: गुजरात अपने युवाओं को भविष्य के लिए कैसे तैयार कर रहा है? कुंवरजीभाई बावलिया: गुजरात का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरियों के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि भविष्य के उद्योगों में नेतृत्व करने योग्य बनाना है। इसके लिए हम कौशल विकास, अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग में लगातार निवेश कर रहे हैं। सवाल: दोनों राज्यों के बीच यह साझेदारी युवाओं के लिए क्या संभावनाएं लेकर आएगी? कुंवरजीभाई बावलिया: राजस्थान की उद्यमशीलता और गुजरात का नवाचार तंत्र मिलकर देश के युवाओं के लिए अपार अवसर पैदा कर सकते हैं। यह साझेदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रोजगार पैदा करना, नवाचार को बढ़ावा देना, एमएसएमई को मजबूत करना और विश्वस्तरीय मूल्य शृंखलाओं का निर्माण करना है।
पंजाबी कलाकारों और नेताओं का अपमान कर रही है भाजपा : आप विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के पंजाब से विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार पंजाब और पंजाबियों के प्रति नफरत दिखा रही है। इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के अपमान, दिल्ली में दिलजीत दोसांझ के शो की अनुमति रद्द किए जाने और दिल्ली हवाई अड्डे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ हुए बर्ताव का जिक्र किया। धालीवाल ने कहा कि केंद्र में सरकार का नेतृत्व करने के बावजूद भाजपा ने बार-बार पंजाबियों और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया दिखाया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख पंजाबी हस्तियों के साथ व्यवहार भाजपा की संकीर्ण और विभाजनकारी सोच को दर्शाता है और निंदा का पात्र है। धालीवाल ने उत्तराखंड में एक कार्यक्रम में दलेर मेहंदी से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से उत्तराखंड के एक मंत्री और एक भाजपा नेता ने प्रसिद्ध पंजाबी गायक का अपमान किया, वह बहुत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी ने दुनियाभर में अपार प्यार और पहचान अर्जित की है और उनके जैसे कद के कलाकार का अपमान करना पंजाब के लोगों और संस्कृति के प्रति भाजपा के रवैये को उजागर करता है। धालीवाल ने दिल्ली में दिलजीत दोसांझ के निर्धारित शो का मुद्दा भी उठाया, जो पहले 1 नवंबर के लिए निर्धारित था। उन्होंने कहा कि गायक ने कार्यक्रम के लिए अनुमति ले ली थी, लेकिन बाद में दिल्ली में एक नवंबर से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के कारण उनसे तारीख बदलने के लिए कहा गया। धालीवाल ने सवाल किया कि क्या दिलजीत दोसांझ के साथ उनकी सिख पहचान और पंजाबी पृष्ठभूमि के कारण गलत व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गायक ने इस तरह के प्रतिबंधों का सामना किए बिना दुनियाभर के दर्शकों के सामने प्रदर्शन किया है, जिससे दिल्ली का घटनाक्रम विशेष रूप से परेशान करने वाला है। आप विधायक ने फ्रांस से लौटने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री मान के साथ किए गए व्यवहार की भी निंदा की।उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सामान के बहाने जानबूझकर मुख्यमंत्री को अपमानित किया गया। धालीवाल ने कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान के वजन की जांच आमतौर पर प्रस्थान बिंदु पर की जाती है और किसी भी अतिरिक्त सामान का ध्यान फ्रांस में ही रखा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री के साथ व्यवहार किया गया, उससे पंजाब और उसके लोगों के लिए लगातार बोलने वाले नेता के प्रति केंद्र के रवैये पर चिंता पैदा होती है।
डार्क वेब पर एसबीआई ग्राहकों के डेटा लीक की खबरों पर सीपीआई-एम सांसद ने उठाए सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

तिरुवनंतपुरम। सीपीआई-एम के राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने डार्क वेब पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्राहकों का डेटा लीक होने की खबरों की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पास मौजूद ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ए.ए. रहीम ने वित्त मंत्रालय से आग्रह किया कि वे संदिग्ध डेटा लीक के स्रोत और इसके दायरे का पता लगाएं। यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित ग्राहकों को सीधे सूचित किया जाए और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में साइबर सुरक्षा उपायों को मजबूत करें। यह कदम उन रिपोर्टों के बीच उठाया गया है, जिनमें कहा गया है कि एसबीआई ने डार्क वेब पर मौजूद डेटा में 3,897 ऐसे ग्राहकों के रिकॉर्ड की पहचान की है, जिनमें उनकी निजी पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल है। बैंक को 16 अक्टूबर को अपने ‘थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर’, ‘डिफेंस साइबर एजेंसी’ और ‘इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम’ (सीईआरटी-इन) से इस संदिग्ध डेटा लीक के बारे में अलर्ट मिले थे। इस घटना की जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को काम पर लगाया गया है। वहीं, जिन जानकारियों के लीक होने की बात सामने आई है, उनमें ग्राहकों के नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्म तिथि, ईमेल और घर का पता, ब्रांच की जानकारी, कस्टमर इंफॉर्मेशन फाइल (सीआईएफ) आइडेंटिफायर और लोन व लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा शामिल है। राज्यसभा सदस्य ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी जानकारी गलत हाथों में चली जाती है, तो आम ग्राहकों को ‘आइडेंटिटी थेफ्ट’, टारगेटेड फिशिंग, किसी और का रूप धरने और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेंशनभोगी, मजदूर, छोटे व्यापारी और अन्य कमजोर वर्ग के लोग विशेष रूप से खतरे में आ सकते हैं। सीपीआईएम के सांसद ने तर्क दिया कि बैंकिंग सेवाओं में कोई रुकावट न आने का मतलब यह नहीं है कि निजी जानकारी लीक होने का मामला गंभीर नहीं है। एसबीआई का कहना है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज या बिजनेस की निरंतरता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। ए.ए. रहीम ने जांच के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की और बैंक से कहा कि वह ग्राहकों के लिए ऐसे आसान माध्यम बनाए, जहां वे संदिग्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट कर सकें और मदद ले सकें। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के नतीजों और उठाए गए सुधारात्मक कदमों के बारे में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। इस मुद्दे को केवल एसबीआई तक सीमित न रखते हुए सांसद ने वित्त मंत्रालय से कहा कि वह सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में साइबर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करे, रियल-टाइम में खतरों का पता लगाने की क्षमता और डेटा-एक्सेस कंट्रोल को मजबूत करे और जहां भी लापरवाही या सुरक्षा में चूक पाई जाए, वहां जवाबदेही तय करे। यह पत्र इस बात पर जोर देता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की यह जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा करें, भले ही उनके मुख्य बैंकिंग सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हों। इस संदिग्ध डेटा लीक का पूरा दायरा और स्रोत अभी भी जांच के दायरे में है।
मांड्या औद्योगिक परियोजनाओं में भूमि आवंटन में 10 महीने की देरी पर कुमारस्वामी नाराज, सीएम सिद्धारमैया को लिखा पत्र

बेंगलुरु। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखा। उन्होंने मांड्या जिले में दो प्रस्तावित परीक्षण केंद्रों, ‘निर्माण और बुनियादी ढांचा उपकरण (सीआईई) परीक्षण केंद्र’ और ‘इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) परीक्षण केंद्र’ के लिए जमीन आवंटित करने में हो रही देरी पर चिंता जताई है। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी मांड्या लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) द्वारा प्रस्तावित ये दो सुविधाएं भारत के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करेंगी, तकनीकी विकास को बढ़ावा देंगी और इस क्षेत्र में औद्योगिक और रोजगार के अवसर पैदा करेंगी। मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने प्रस्तावित परियोजनाओं से जुड़ी बैठकों, राज्य और केंद्र सरकारों के बीच हुए आधिकारिक संवाद, बैठकों के विवरण (मिनट्स) और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत ब्योरा दिया। इसके बाद उन्होंने इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया, ताकि जमीन आवंटन में हुई उस देरी को उजागर किया जा सके, जिसे उन्होंने ‘अस्वीकार्य’ बताया है। केंद्रीय मंत्री ने उन अखबारों की रिपोर्ट भी संलग्न कीं, जिनमें मांड्या में प्रस्तावित एआरएआई सुविधा के संबंध में मुख्यमंत्री के अपने बयान छपे थे। कुमारस्वामी के प्रतिनिधियों ने यह पत्र विधान सौधा में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ को सौंपा। पत्र सौंपने के बाद केंद्रीय मंत्री ने इस मामले पर तुषार गिरिनाथ से बातचीत भी की। अपने पत्र में कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि एआरएआई द्वारा प्रस्तावित दो सुविधाओं के लिए जमीन आवंटित करने में लगभग 10 महीने की देरी हो चुकी है। एआरएआई, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली एक प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान और विकास संस्था है। उन्होंने बताया कि बार-बार चर्चा, साइट का निरीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और संबंधित विभागों के साथ बैठकें होने के बावजूद, मांड्या जिला प्रशासन और कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (एआईएडीबी) ने अभी तक जमीन आवंटन को अंतिम रूप नहीं दिया है। कुमारस्वामी ने उन कदमों का भी जिक्र किया जो एआरएआई और संबंधित अधिकारियों ने इन प्रस्तावित सुविधाओं के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने के लिए उठाए हैं। 16 मार्च 2026 को एआरएआई की एक टीम ने मांड्या जिले में बसरालू, मांड्या शुगर फैक्ट्री, और के.आर. पेट औद्योगिक क्षेत्र की साइटों का दौरा किया। इसके बाद टीम ने मांड्या के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के साथ जमीन की उपलब्धता को लेकर विस्तृत चर्चा की। 17 मार्च को कर्नाटक सरकार की एक प्रमुख प्रशासनिक इमारत विकास सौधा में वाणिज्य और उद्योग विभाग के प्रधान सचिव के साथ भी एक बैठक हुई। 20 मार्च को एआरएआई ने प्रस्तावित सुविधाओं के लिए तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी जिला प्रशासन को सौंपी। कुमारस्वामी ने बताया कि उन्होंने 13 अप्रैल को विधान सौधा में कर्नाटक के उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल से मुलाकात की थी, जिसमें परियोजना के दायरे और भूमि की आवश्यकताओं पर चर्चा की गई। 6 मई को मांड्या जिला प्रशासन ने तकनीकी मूल्यांकन के लिए बसरालू और हेग्गेदाहल्ली में चिन्हित की गई जगहों का विवरण एआरएआई को उपलब्ध कराया। इसके बाद 18 मई को एआरएआई की एक तकनीकी टीम ने इन चिन्हित जगहों का निरीक्षण किया, जिसमें येलेचाकानाहल्ली गांव की एक जगह भी शामिल थी। 16 सितंबर 2026 को विकास सौधा में वाणिज्य और उद्योग विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में एआरएआई, मांड्या जिला प्रशासन और एआईएडीबी के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान, बसरालू और येलेचाकानाहल्ली में मौजूद जगहों की उपयुक्तता की विस्तार से जांच की गई। कुमारस्वामी के पत्र के अनुसार, बसरालू में लगभग 100 एकड़ जमीन को सीआईई टेस्टिंग सेंटर के लिए संभावित रूप से उपयुक्त माना गया, बशर्ते वहां सड़क संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार किया जाए। ईवी टेस्टिंग सेंटर के लिए 60 एकड़ अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होगी। येलेचाकानाहल्ली को भी एक वैकल्पिक जगह के रूप में देखा गया, जहां दोनों सुविधाओं को एक साथ स्थापित किया जा सकता है। यहां एक लंबा टेस्टिंग ट्रैक और उससे सटा एक औद्योगिक केंद्र बनाने की भी गुंजाइश है। हालांकि, इस वैकल्पिक जगह के साथ कुछ चुनौतियां भी थीं, जैसे निजी जमीन का अधिग्रहण करना, मैसूरु-बेंगलुरु हाईवे तक कनेक्टिविटी में सुधार करना और एक रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करना। समीक्षा के बाद, 17 सितंबर को एआरएआई ने प्रधान सचिव और मांड्या के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) को पत्र लिखकर क्रमशः येलेचाकानाहल्ली और बसरालू में जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया। बैठक का विवरण 25 सितंबर को उपलब्ध हुआ। 28 सितंबर को एआरएआई ने जिला प्रशासन को एक संशोधित प्रस्ताव सौंपा, जिसमें बसरालू में सीआईई सुविधा के लिए लगभग 100 एकड़ और ईवी टेस्टिंग सेंटर के लिए 60 एकड़ अतिरिक्त जमीन की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि ईवी टेस्टिंग सेंटर के लिए जमीन, पहली जमीन (सीआईई सुविधा वाली जगह) से सटी हुई हो तो बेहतर होगा। कुमारस्वामी ने संशोधित प्रस्ताव को एक व्यावहारिक कदम बताया, जिससे ईवी टेस्टिंग सेंटर के लिए जरूरी अतिरिक्त जमीन का मसला सुलझने के दौरान सीआईई सुविधा पर काम आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों और एक व्यावहारिक विकल्प की पहचान के बावजूद, जमीन आवंटन का मामला अभी भी लंबित है। अपने पत्र के अंत में कुमारस्वामी ने डीके शिवकुमार से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि एआरएआई सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन जल्द से जल्द आवंटित की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये परियोजनाएं मांड्या के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत कर सकती हैं, तकनीक-आधारित निवेश को आकर्षित कर सकती हैं, और कर्नाटक के युवाओं के लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा कर सकती हैं। कुमारस्वामी ने कहा, “इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैं इस पत्र के माध्यम से आपसे एक बार फिर अनुरोध करता हूं कि मांड्या जिले में एआरएआई सेंटर के लिए जरूरी जमीन तुरंत आवंटित करें। यह औद्योगिक क्षेत्र के विकास और हमारे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बहुत जरूरी है। अखबारों और मीडिया में सिर्फ आश्वासन देने के बजाय, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरी कदम उठाए जाएं।” केंद्रीय मंत्री ने संबंधित पत्राचार, बैठक के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज मीडिया के सामने रखे। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के
उत्तरी असम के मरीजों को बड़ी सौगात, तेजपुर में बनेगा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को घोषणा की कि तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 208 करोड़ रुपए का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने से उत्तरी असम के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उनके करीब मिल सकेंगी। इससे परिवारों को विशेष इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि प्रस्तावित सुविधा में सात विशेष विभाग होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “परिवारों को इलाज के लिए दूर जाने के बोझ के बिना मरीज के पूरी तरह से ठीक होने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलना चाहिए।” उन्होंने क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मौजूदा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे सोनितपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को विशेष चिकित्सा सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। यह पहल उत्तरी असम के मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वहां, बीमारी की गंभीरता और जरूरी इलाज के आधार पर मरीजों को अक्सर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए गुवाहाटी जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक जाना पड़ता है। इन विशेष विभागों के जुड़ने से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं का दायरा बढ़ेगा, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक और यात्रा संबंधी बोझ कम हो सकता है। हालांकि इन सात विभागों, निर्माण की समय-सीमा, प्रस्तावित बेड की संख्या और इसके शुरू होने की संभावित तारीख के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब असम मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और विशेष उपचार सुविधाओं का विस्तार करके अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने गुवाहाटी के बाहर भी मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क फैलाया है। इस तरह के निवेश का उद्देश्य यह है कि बेहतर इलाज की सुविधाएं केवल कुछ शहरी केंद्रों तक ही सीमित न रहें, बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर हो सके। तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, सोनितपुर और आसपास के इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। प्रस्तावित सुपर-स्पेशियलिटी सुविधा से इसकी क्षमता और बढ़ेगी, जिससे उन मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा जिन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है।
अमित शाह ने नक्सलवाद खत्म किया, अब नशा मुक्त होगा देश: भाजपा सांसद नरेश बंसल

नई दिल्ली। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने, राहुल गांधी के विदेश दौरे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नशा मुक्त भारत के संकल्प, उत्तर प्रदेश में चुनावी गड़बड़ी को लेकर अखिलेस यादव के आरोपों और दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट की अनुमति नहीं मिलने के मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में संबंधित संस्थानों के नियमों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भाजपा की चुनावी जीत को कार्यकर्ताओं के परिश्रम और नेतृत्व की कुशलता का परिणाम बताया। रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने के मामले पर नरेश बंसल ने कहा कि बीकानेर हाउस की अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और नियम हो सकते हैं। प्रदर्शनी में कितनी तस्वीरें लगाई जा सकती हैं और किस तरह की तस्वीरों की अनुमति होगी, इसके लिए संस्थान के अपने दिशा-निर्देश होंगे। किसी भी प्रदर्शनी का आयोजन करते समय संबंधित संस्थान के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर दिए गए बयान पर बंसल ने कहा कि राहुल गांधी बिना बताए विदेश चले जाते हैं, जबकि उनकी सुरक्षा पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश जाने और वहां किन लोगों से मुलाकात करने को लेकर जानकारी सामने नहीं आने से संदेह पैदा होता है। बंसल ने राहुल गांधी के विदेशों में दिए गए कुछ बयानों की भी आलोचना की और कहा कि देश के खिलाफ दिए जाने वाले ऐसे बयानों पर सवाल उठते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जन्मदिन की बधाई देते हुए नरेश बंसल ने कहा कि वे अपने संकल्प के पक्के हैं और लंबे समय तक देश का मार्गदर्शन करें। अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था और यह लक्ष्य हासिल किया गया। बंसल ने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 तक पंजाब सहित पूरे देश को नशा मुक्त बनाने का अमित शाह का संकल्प भी पूरा होगा। गृह मंत्री के दृढ़ निश्चय को देखते हुए उन्हें भरोसा है कि देश को नशे की समस्या से मुक्त करने की दिशा में सफलता मिलेगी। उत्तर प्रदेश में चुनावी गड़बड़ी को लेकर अखिलेश यादव के दावों पर भाजपा सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी राजनीतिक शुचिता में विश्वास रखती है। उन्होंने भाजपा की जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं के परिश्रम और नेतृत्व की कुशलता को दिया। बंसल ने पुराने चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पहले बूथों पर कब्जे होते थे और अपराधियों को जेलों से रिहा किया जाता था। लेकिन, अब चुनाव निष्पक्ष और ईमानदारी से होते हैं। लोकतंत्र की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण है और जनता का जनादेश ही सर्वोपरि होना चाहिए। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने लोकसभा चुनावों में भाजपा की अलग-अलग सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि चुनाव में गड़बड़ी होती, तो पार्टी को और अधिक सीटें मिल सकती थीं। 30 अक्टूबर को होने वाले दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट को दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के मामले पर बंसल ने कहा कि यह प्रशासन का विषय है। यदि किसी कार्यक्रम से कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या पैदा होने की आशंका हो, तो प्रशासन उसे अनुमति देने से इनकार कर सकता है। इस मामले को कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
आरबीआई एमपीसी मिनट्स: अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की जताई उम्मीद

नई दिल्ली। अर्थशास्त्रियों ने गुरुवार को लगातार दूसरी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी के अपने रुख को बरकरार रखा, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अक्टूबर बैठक के मिनट्स से केंद्रीय बैंक का रुख पहले की तुलना में अधिक सख्त (हॉकिश) दिखाई दिया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और रुपए पर बने दबाव को देखते हुए दिसंबर में भी रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। एसबीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में 50 बेसिस प्वाइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यह बढ़ोतरी या तो सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि के रूप में हो सकती है या फिर 25 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ाने और 25 बेसिस प्वाइंट के असमान समायोजन के जरिए लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) कॉरिडोर को चौड़ा किया जा सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि महंगाई का दबाव व्यापक होता जा रहा है और रुपए में कमजोरी भी बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई को स्थिति पर करीबी नजर रखने और संतुलित नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है, लेकिन वर्तमान स्तरों को देखते हुए आरबीआई की सतर्क निगरानी जरूरी है।” डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा कि अक्टूबर नीति बैठक के मिनट्स से यह स्पष्ट हुआ है कि आरबीआई ने सख्त रुख अपनाया है। बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया गया और नीति रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला गया। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों ने बढ़ते महंगाई दबाव और मजबूत आर्थिक वृद्धि को ब्याज दर बढ़ाने के प्रमुख कारणों के रूप में देखा। कुछ बाहरी सदस्यों ने महंगाई जोखिमों के विस्तार को रेखांकित करते हुए पहले से कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि कुछ अन्य सदस्य क्रमिक बढ़ोतरी के पक्ष में रहे और लंबे समय तक कड़ी मौद्रिक नीति के संकेत देने के खिलाफ दिखे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया कि महंगाई अब अधिक व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है। राधिका राव के अनुसार, यदि चालू कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में महंगाई 6 प्रतिशत के आसपास पहुंचती है, तो दिसंबर में एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना खुली रहेगी। बाजार की बात करें तो बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े नियामकीय उपायों के चलते रुपया मजबूत हुआ है। इन कदमों के प्रभाव से इस महीने रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम भावना अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में विदेशी निवेश प्रवाह ने भी रुपए को समर्थन दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल रुपया बाहरी घटनाक्रमों पर सीमित प्रतिक्रिया दिखा रहा है, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण बॉन्ड बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
मणिपुर चक्र को जागृत करती है रुद्र मुद्रा, जानें करने का सही तरीका

नई दिल्ली। योग और आयुर्वेद में मुद्राओं का विशेष महत्व बताया गया है। हाथों की उंगलियों से बनने वाली ये मुद्राएं शरीर में मौजूद पांच तत्वों को संतुलित करने का काम करती हैं। ऐसी ही एक शक्तिशाली और प्रभावशाली मुद्रा है, रुद्रा मुद्रा। मान्यता है कि इसके नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रुद्र मुद्रा योग विज्ञान की एक अत्यंत शक्तिशाली हस्त मुद्रा है, जो शरीर में ऊर्जा, मानसिक स्पष्टता और शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए जानी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मुद्रा शरीर के मणिपुर चक्र (मानव शरीर के सात मुख्य चक्रों में तीसरा चक्र) को सक्रिय करती है, जो हमारे शरीर में अग्नि और जीवन शक्ति का केंद्र है। रुद्र मुद्रा को आयुर्वेद में पाचन की अग्नि को ठीक करने वाली मुद्रा कहा गया है। इसके अभ्यास से पेट से जुड़ी एसिडिटी, पेट फूलना (गैस) और कब्ज जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है। भगवान शिव के एक रूप रुद्र के नाम पर रखी गई इस मुद्रा को अग्नि तत्व की मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा को बनाने के लिए हाथ की तर्जनी (इंडैक्स फिंगर) और अनामिका (रिंग फिंगर) के सिरों को अंगूठे के सिरों से मिलाया जाता है जबकि बीच की और छोटी उंगली सीधी रखी जाती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, रुद्र मुद्रा उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो निम्न रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे हैं क्योंकि यह रक्त परिसंचरण में सुधार करती है। दरअसल, हमारा ब्लड प्रेशर सीधे तौर पर रक्त परिसंचरण और अग्नि तत्व से जुड़ा होता है। जब शरीर में अग्नि तत्व कमजोर हो जाता है, तो दिल को पूरे शरीर तक खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और खून की गति धीमी पड़ जाती है, जिसे हम लो बीपी कहते हैं। अंगूठे से मिलने वाली अग्नि की गर्मी से खून की नलियों में सिकुड़न कम होती है और खून का बहाव तेज होता है। रुद्र मुद्रा एक पूरक प्राकृतिक चिकित्सा है। इसे गंभीर चिकित्सीय स्थितियों में आधुनिक दवाओं के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: दो महिलाओं को पैसे देकर भेजा मुंबई, 20 दिन तक शहर में रहकर रेकी करता रहा आरोपी

मुंबई। मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान नए खुलासे हुए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपी कुणाल ने हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए राधा और बबीता नाम की दो महिलाओं को पैसे दिए थे। दोनों को काम के सिलसिले में मुंबई घूमने का लालच भी दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, हथियार पहुंचाने के बाद दोनों महिलाओं के मुंबई में कुछ जगहों पर घूमने की जानकारी सामने आई है। अब क्राइम ब्रांच इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल आरोपियों के मोबाइल फोन से डेटा रिकवर करने में जुटी है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए अपने मोबाइल फोन फेंक दिए थे। अब इन फोन का डेटा वापस हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी निकाले जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि वे किन लोगों के संपर्क में थे और वारदात से पहले और बाद में किससे उनकी बातचीत हुई थी। इस मामले में दिल्ली और सोनीपत से गिरफ्तार चार आरोपियों को मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल की ओर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हथियारों की सप्लाई और फायरिंग की तैयारी से जुड़ी कड़ियां जोड़ रही है। जांच में सोनीपत से गिरफ्तार अंकित राजेश खटक की भूमिका भी सामने आई है। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अंकित करीब 20 दिनों तक मुंबई में रुका था। पूछताछ में सामने आया कि इस दौरान उसने शूटरों के साथ मिलकर फायरिंग वाली जगह और उसके आसपास के इलाकों की रेकी की थी। उसने इलाके की निगरानी करने के साथ हमले की तैयारी में भी भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि अंकित इस नेटवर्क से जुड़े बड़े स्तर के लोगों के भी लगातार संपर्क में था। पुलिस अब उसकी गतिविधियों, शूटरों के साथ उसके संपर्क और कथित साजिश में उसकी भूमिका की जांच कर रही है। बता दें कि 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। अभिनेता फुटबॉल खेलने के बाद पुष्पा नरसी ग्राउंड से अपनी कार में जा रहे थे। इसी दौरान बाइक से आए हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं। घटना में टाइगर बाल-बाल बचे लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस गोली लगने से घायल हो गए। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों रेहान, फूल सिंह और ऋतिक कुमार को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया था। बाद में हथियारों की सप्लाई से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करते हुए दिल्ली और सोनीपत से भी गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग में इस्तेमाल हथियार को मुंबई तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों की मदद ली गई थी।