पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान सीपीआईएम का एक और बुक स्टॉल तोड़ा, भाजपा नेता गिरफ्तार

कोलकाता। उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर में दुर्गा पूजा के दौरान सीपीआईएम द्वारा लगाए गए एक और बुक स्टॉल पर हमला किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान एक पुलिस अधिकारी घायल हो गया। इस घटना के सिलसिले में एक स्थानीय भाजपा नेता को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सीपीआईएम ने एक बार फिर भाजपा पर नवमी की रात (मंगलवार) को अपने बुक स्टॉलों पर हमला करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सीपीआईएम के बुक स्टॉलों से पोस्टर और फ्लेक्स फाड़ दिए। आरोप यह भी है कि स्टॉलों पर हमला करने के अलावा पश्चिम बंगाल में सीपीआईएम के मुखपत्र ‘गणशक्ति’ अखबार के बोर्ड और पार्टी के पोस्टर लगाने के लिए बनाए गए स्थायी बोर्ड को भी तोड़ दिया गया। इस घटना को लेकर बहस शुरू हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। मौके पर पहुंचे अशोकनगर पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर आशीष रॉय ने जब झड़प को रोकने की कोशिश की, तो उन पर हमला कर दिया गया। उनके चेहरे पर कट लग गया, जिससे काफी खून बहने लगा। उन्हें वहां से सुरक्षित निकालकर अशोकनगर स्टेट जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस मामले में पुलिस ने अशोकनगर के एरिया नंबर 5 में रहने वाले भाजपा नेता बिस्वजीत नाग (45) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस झड़प और पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मंगलवार की घटना के बारे में सीपीआईएम नेता और अशोकनगर के पूर्व विधायक सत्यसेबी कर ने कहा, “किताबें लोगों को सही और गलत के बीच का फर्क समझना सिखाती हैं। वे लोगों की आंखें खोलती हैं। वे उन्हें सही को सही और गलत को गलत के रूप में पहचानना सिखाती हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के एक समूह ने बुक स्टॉल पर तोड़फोड़ की और पोस्टर तथा फ्लेक्स फाड़ दिए। उन्होंने यह भी कहा, “अगर कोई वैचारिक मतभेद है, तो उन्हें भी हमारा मुकाबला करने और अपने विचार रखने के लिए एक बुक स्टॉल लगाना चाहिए।” स्थानीय सीपीआईएम नेता श्यामला बोस ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, “जो लोग बुक स्टॉल पर हमला कर रहे हैं, वे किताबों और ज्ञान के खिलाफ हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ उपद्रवी लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इस घटना और भाजपा नेता की गिरफ्तारी पर अभी तक भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले भी कोलकाता और नदिया सहित कई जगहों पर सीपीआईएम के बुक स्टॉलों पर हमले हो चुके हैं।

सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक एबेट पालोह को जनरल धीरज सेठ ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। भारतीय सेना के थलसेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी रैंक ने लांस नायक एबेट पालोह को श्रद्धांजलि अर्पित की है। लांस नायक एबेट पालोह ने ड्यूटी के दौरान देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। भारतीय सेना ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और शोकसंतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। लांस नायक एबेट पालोह सेना की गजराज कोर में थे। भारतीय सेना की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि गजराज कोर के लांस नायक एबेट पालोह ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। थलसेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी रैंक ने वीर जवान के बलिदान को नमन किया। भारतीय सेना ने शोक की इस घड़ी में दिवंगत जवान के परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कही है। सेना ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उनके साथ एकजुटता जताई है। जनरल धीरज सेठ, थलसेनाध्यक्ष तथा भारतीय सेना के सभी पदों ने वीरयोद्धा लांस नायक एबेट पालोह को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय सेना शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। सेना का कहना है कि वह इस कठिन घड़ी में परिवार के साथ दृढ़ता से खड़ी है। गौरतलब है कि बीते दिनों अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम दिबांग क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय सेना के तीन अग्निवीरों ने भी कर्तव्य की राह में सर्वोच्च बलिदान दिया था। अग्निवीर आदित्य कुमार, अग्निवीर कुंदन कुमार और अग्निवीर विनोद यादव के निधन से सेना में शोक की लहर थी। पूर्वी सेना कमान के सेना कमांडर और सभी सैन्य रैंकों ने तीनों जवानों के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की थी। सेना के मुताबिक तीनों अग्निवीरों ने कर्तव्य निभाते हुए वीरतापूर्वक सर्वोच्च बलिदान दिया। अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वैली में 14 अगस्त को आई बाढ़ के दौरान लापता हुए औरैया के मूल निवासी अग्निवीर विनोद यादव, बिहार के कुंदन कुमार व अग्निवीर आदित्य कुमार लापता हो गए थे। हादसे के कई दिन बाद बीते दिनों डीएनए जांच के जरिए इनकी पहचान हुई। इसके बाद सेना के जवानों के अस्थि कलश उनके गांव पहुंचे। विनोद यादव उन जवानों में शामिल थे, जो अरुणाचल प्रदेश के बेहद दुर्गम क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात थे। प्राकृतिक आपदा के बीच उनका लापता होना परिवार के लिए लंबे इंतजार और अनिश्चितता का कारण बना रहा। डीएनए जांच से पहचान होने के बाद परिवार को उनके अंतिम अवशेष सौंपे गए थे।

उधमपुर हादसा : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उधमपुर में हुए हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने हादसे में घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। एलजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उधमपुर के रामनगर में एक दुखद बस हादसे में लोगों की मौत की खबर से आहत हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। मैंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करें और दुर्घटना में घायल हुए लोगों के लिए बेहतरीन इलाज सुनिश्चित करें। उधमपुर जिले में बुधवार सुबह एक बस हादसे का शिकार हो गई। इस घटना में करीब 10 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए रामनगर के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया है। घटना के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने भी उधमपुर के डीसी अनंत द्विवेदी से बात की और पीड़ितों को हरसंभव मदद मुहैया करने को कहा है। जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “बसंतगढ़-रामनगर सड़क पर बस दुर्घटना की खबर मिलने के बाद मैंने उधमपुर के डीसी अनंत द्विवेदी से बात की। स्थानीय लोगों की समय पर मदद से सभी यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया। इस बीच, बचाव दल मौके पर पहुंच गया। उ10 घायल यात्रियों को रामनगर के उप-जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है। अभी तक किसी की मौत की खबर नहीं है। हरसंभव मदद दी जा रही है। मेरा कार्यालय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। उन्होंने दूसरे पोस्ट में लिखा कि दुर्भाग्य से दो लोगों की मौत की खबर है। 10 घायल एसडीएच रामनगर पहुंच चुके हैं। इनमें से 3 लोगों को जीएमसी उधमपुर ले जाया गया है। इस बीच, मैंने दिल्ली में बीआरओ अधिकारियों के साथ रामनगर से बसंतगढ़ तक सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया है।

रेलवे में भर्ती का सुनहरा मौका: स्टेशन मास्टर के 1250 पदों पर निकली वैकेंसी, 27 अक्टूबर को खुलेगा आवेदन पोर्टल

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के लिए नौकरी करना हजारों-लाखों युवाओं का सपना होता है, जिसके लिए वे तैयारी करने के साथ-साथ रिक्तियों के जारी होने के इंतजार में रहते हैं। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, भारत सरकार के रेल मंत्रालय के तहत रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने देश भर में पूर्णकालिक आधार पर स्टेशन मास्टर के कुल 1,250 पदों पर पात्र और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके बंपर रिक्तियों की घोषणा की है। आरआरबी की ओर से स्टेशन मास्टर पोस्ट के लिए जारी 1,250 रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 27 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 25 नवंबर तक तय की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार संबंधित पद पर नियुक्त होने की इच्छा रखते हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय कैंडिडेट्स का आधार सत्यापन आवश्यक है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। वहीं, कैंडिडेट्स की आयु की गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी), दस्तावेज सत्यापन, चिकित्सा मानक, आदि के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 7वां सीपीसी (केंद्रीय वेतन आयोग) के तहत लेवल-6 होगी। कैंडिडेट्स ध्यान दें कि स्टेशन मास्टर पोस्ट के लिए योग्यता, चयन प्रक्रिया, आयु सीमा, सैलरी आदि जानकारी का विस्तृत नोटिफिकेशन आरआरबी द्वारा जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले जारी किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए अभ्यर्थियों को समय-दर-समय ऑफिशियल पोर्टल को चेक करते रहने की सलाह दी जाती है।

सौरव दास और आशुतोष रांका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- ‘आप जेन-जी नहीं’, सीजेपी नेताओं ने वापस ली याचिका

नई दिल्ली। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को बुधवार को वापस ले लिया। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की कोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सौरभ और आशुतोष दिल्ली हाईकोर्ट गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान सौरभ दास और आशुतोष रांका की उम्र का जिक्र हुआ। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रंका 31 साल के हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो ये जेन-जी नहीं हैं।” जज ने यह भी पूछा कि ‘मिलेनियल्स’ और ‘जेन-जी’ की उम्र का दायरा क्या है? सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका होती है, तो आप कौन हैं, क्या करते हैं और आपकी मंशा क्या है, ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं। विरोध करने का अधिकार है, इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन जब मजिस्ट्रेट शांति भंग होने की आशंका पर विचार करता है, तो ये सभी सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे और छात्र शामिल थे। अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है। लोग वही हैं, लेकिन उनकी मांग और प्रदर्शन का उद्देश्य बदल गया है। इसलिए यह सवाल भी अहम हो जाता है कि आप असल में कौन हैं और आपकी पहचान क्या है? आपका संगठन क्या है? उसका असली मकसद क्या है? कोर्ट ने आगे कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका हो, तो इन सभी सवालों का महत्व बढ़ जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी ग्रुप के लोग बार-बार अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनके प्रदर्शन का उद्देश्य क्या है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वो इन मुद्दों पर अभी सुनवाई नहीं कर रहा है। अभी अदालत के सामने सीमित सवाल यह है कि बॉन्ड देने की शर्त लागू करने की मांग उचित है या नहीं। इसके बाद कोर्ट में सौरभ दास और आशुतोष रांका के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने वकील को याचिका वापस लेने की इजाजत दी। इसी के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका ने एसईएम कोर्ट के न्यायिक हिरासत के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को दास और रंका को हिरासत में लिया था। आरोप है कि वे जंतर-मंतर पर लगे बैरिकेड्स के गेट फांदकर अंदर घुस गए थे। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। 19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि दो और दिनों के लिए बढ़ा दी गई।

एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता से घबराए विपक्षी नेता, कर रहे गलत बयानबाजी : शायना एनसी

मुंबई। शिवसेना नेता शायना एनसी ने गुलाबराव पाटिल के बयान, टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटना और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत की प्रधानमंत्री को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि उनका नेता मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बने। वहीं, संजय राउत पर निशाना साधते हुए उन्होंने उनके बयानों और राजनीतिक भविष्यवाणियों पर सवाल उठाए। शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री गुलाबराव पाटिल के बयान पर शायना एनसी ने कहा कि किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके संदर्भ को समझना जरूरी है। गुलाबराव पाटिल ने वही बात कही है, जो आमतौर पर कोई भी कार्यकर्ता अपने नेता के लिए कहता है। हर कार्यकर्ता की इच्छा होती है कि उसका नेता मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी तरह के कयास लगाने की जरूरत नहीं है। इस बयान से एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता और शिवसेना कार्यकर्ताओं के उत्साह का पता चलता है। शायना एनसी ने कहा कि शिवसेना ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से 60 सीटों पर जीत हासिल की। इस सफलता का श्रेय एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता और जमीनी स्तर पर उनके प्रति लोगों के आकर्षण है। शिवसेना संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। यदि कोई नेता अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के हित में योजनाएं लाता है, तो जनता उन्हें स्वीकार करती है। बता दें कि शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा था कि मैंने माता जगदंबा के चरण छुए हैं और प्रार्थना की है कि आने वाले दिनों में एकनाथ शिंदे फिर से इस राज्य के मुख्यमंत्री बनें और हमारे किसानों के जीवन में खुशहाली लाएं। शिंदे के नेतृत्व, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजनीतिक रणनीति की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को पूरा भरोसा है कि वे फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शायना एनसी ने कहा कि अभिनेता किसी विवाद में शामिल नहीं हैं और उनकी ओर से कभी कोई विवादित बयान नहीं आया है। इस घटना को सलमान खान से जोड़ना उचित नहीं है। केवल इसलिए कि टाइगर श्रॉफ सलमान खान के करीबी हैं, यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि उन पर इसी वजह से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि सलमान खान के कई अन्य करीबी भी हैं लेकिन उनके साथ ऐसी घटनाएं नहीं हुई हैं। इसलिए इस मामले में सलमान खान का नाम बेवजह नहीं घसीटना चाहिए। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की प्रधानमंत्री को लेकर की गई टिप्पणियों पर शायना एनसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगने से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए राउत पर तंज कसा और कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के बारे में टिप्पणी करने के बजाय अपनी राजनीतिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राम मंदिर को लेकर राउत की भविष्यवाणी का भी उल्लेख किया। शायना एनसी ने कहा कि मंदिर आज भी खड़ा है जबकि उनकी पार्टी में टूट हुई है। उन्होंने एकनाथ शिंदे के 40 विधायकों के साथ अलग होने और शिवसेना के 60 विधायकों तक पहुंचने का जिक्र करते हुए पार्टी की राजनीतिक ताकत पर जोर दिया।