राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा पर खंडेलवाल ने उठाए सवाल, मांगा विदेशी दौरों का पूरा ब्योरा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत पर निशाना साधा है। उन्होंने संजय राउत के बयानों की आलोचना करते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का विफल नेता बताया। वहीं, राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने आईएएनएस से बात करते हुए संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भारतीय राजनीति में एक विफल नेता बन चुके हैं और उनकी राजनीति में कोई खास जगह नहीं रह गई है। राउत विवादित बयान देने के लिए जाने जाते हैं और उनकी सोच ही उन्हें इस तरह के बयान देने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि संजय राउत यह भूल जाते हैं कि देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां कानून का शासन चलता है। जो भी कानून के खिलाफ जाने की कोशिश करेगा, उसे उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। कानून अपना काम करेगा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर भी प्रवीण खंडेलवाल ने सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना ज्यादातर समय विदेश यात्राओं में बिताते हैं। राहुल गांधी भारत आते हैं, किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा करते हैं और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं। खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के उद्देश्य और वहां उनकी मुलाकातों के बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान की गई विदेश यात्राओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी इन यात्राओं के दौरान किन लोगों से मिलते हैं और उनके खर्च का भुगतान कौन करता है। भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और एक सार्वजनिक हस्ती हैं। ऐसे में जनता को उनकी विदेश यात्राओं के उद्देश्य और खर्च के बारे में जानकारी मिलने का अधिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि खड़गे ने आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के इतिहास पर पर्याप्त नजर नहीं डाली है। खड़गे जिन कामों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, कांग्रेस खुद अपने शासनकाल में ऐसे काम कर चुकी है। खंडेलवाल ने कहा कि आजादी के समय से लेकर सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस के कार्यकाल का इतिहास देखना चाहिए। उन्होंने खड़गे को अपने सलाहकारों से सावधान रहने की सलाह देते हुए आरोप लगाया कि उनके सलाहकार उन्हें गलत जानकारी दे रहे हैं, जिसके कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। प्रवीण खंडेलवाल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को देश के व्यापारिक समुदाय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दशहरे का बड़ा तोहफा बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामानों पर शून्य प्रतिशत शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि इस समझौते से देश के व्यापारियों, उद्योगों और छोटे कारीगरों को निर्यात के नए अवसर मिलेंगे। भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा का मौका मिलने से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने देश के करीब नौ करोड़ व्यापारियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।

हर साल क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस? जानें पूरा इतिहास

नई दिल्ली। पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को उन पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने देश की सुरक्षा और सेवा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। यह दिन लद्दाख के ‘हॉट स्प्रिंग्स’ में चीन के साथ लगी हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद दस पुलिसकर्मियों के बलिदान की याद दिलाता है। 20 अक्टूबर 1959 को उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स से तीन टोही दल भेजे गए थे। इनमें से दो दलों के सदस्य तो उसी दिन दोपहर तक हॉट स्प्रिंग्स वापस आ गए, लेकिन तीसरा दल वापस नहीं लौटा, जिसमें दो पुलिस कांस्टेबल और एक पोर्टर (सामान ढोने वाला) थे। लापता लोगों की तलाश के लिए अगली सुबह 21 अक्टूबर को 1959 को डीसीआईओ करम सिंह के नेतृत्व में सभी उपलब्ध जवानों को भेजा गया। दोपहर के आसपास एक पहाड़ी पर चीनी सेना के जवान दिखाई दिए, जिन्होंने करम सिंह के नेतृत्व वाले दल पर गोलियां चलाईं और ग्रेनेड फेंके। इस हमले में दस बहादुर पुलिसकर्मी शहीद हो गए और सात अन्य घायल हो गए। चीनी सेना ने सात घायल पुलिसकर्मी को बंदी बना लिया, जबकि बाकी लोग वहां से निकलने में कामयाब रहे। घटना के तीन सप्ताह बाद 13 नवंबर 1959 को चीनी सेना ने इन दस पुलिसकर्मी के पार्थिव शरीर वापस सौंपे। हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ शहीदों का अंतिम संस्कार किया गया। जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों (आईजीपी) के वार्षिक सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि अब से 21 अक्टूबर को ‘स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। साथ ही हॉट स्प्रिंग्स में एक स्मारक बनाने का भी फैसला लिया गया। हर साल, देश भर से पुलिस बल के जवान इन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हॉट स्प्रिंग्स जाते हैं। हर जिले के पुलिस मुख्यालय में ‘स्मृति दिवस परेड’ आयोजित की जाती है। इस औपचारिक परेड के दौरान, हथियारों को उल्टा (शोक शस्त्र) रखा जाता है और दिवंगत आत्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा जाता है। राज्यों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीद पुलिसकर्मियों के नाम पढ़कर सुनाए जाते हैं, ताकि उनके सर्वोच्च बलिदान को गर्व के साथ याद किया जा सके। शहीदों के सम्मान में तीन बार गोलियां चलाई जाती हैं। नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में एक राष्ट्रीय पुलिस स्मारक बनाया गया है, जो कर्तव्य पालन के दौरान अनगिनत पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए बलिदानों का प्रमाण है। यह स्मारक पुलिस बलों को राष्ट्रीय पहचान, गौरव, उद्देश्य की एकता, साझा इतिहास और नियति का बोध कराता है। ‘वीरता की दीवार’ पुलिस स्मारक पर 30 फीट ऊंची ग्रेनाइट की यह प्रतिमा खड़ी है, जिस पर कर्तव्य निभाते हुए प्राणों की आहुति देने वाले 35,000 से अधिक शहीदों के नाम अंकित हैं और यह उनकी वीरता और गौरव की याद दिलाती है।

तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी, गरीबी और कुशासन को बताया बिहार का ‘दशानन’, दशहरा पर इसके दहन का किया आह्वान

पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विजयादशमी और दशहरा के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बेरोजगारी, अशिक्षा, गरीबी, पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार और कुशासन को बिहार का दशानन बताया। उन्होंने लोगों से इन समस्याओं को समाप्त करने का संकल्प लेने और पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई, सुनवाई एवं कार्रवाई वाली व्यवस्था की नींव रखने का आह्वान किया। तेजस्वी यादव ने अपने संदेश में कहा कि विजयादशमी बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस अवसर पर सभी को बिहार के विकास और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, अशिक्षा, गरीबी, पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार, अफसरशाही, बाढ़, सुखाड़ और कुशासन रूपी दशानन बिहार को अंदर से खोखला कर रहा है। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य बना हुआ है। प्रदेश का एक बड़ा वर्ग आज भी अच्छे स्कूल, सड़क और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में लोगों के दूसरे राज्यों में पलायन करने का मुद्दा भी उठाया। तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग चार करोड़ बिहारवासी हर साल काम की तलाश में पलायन करते हैं। उन्होंने पोषण की कमी का जिक्र करते हुए दावा किया कि बिहार की माताओं, बहनों और बेटियों में खून की कमी की समस्या गंभीर है। वहीं, प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे बौनेपन के शिकार हैं। उन्होंने इसे राज्य के सामने मौजूद गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जोड़ते हुए बेहतर व्यवस्था की जरूरत बताई। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सड़कों पर बेटियों के साथ हुई घटनाओं और राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को पूरे देश ने देखा है। उन्होंने अपराध पर नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। तेजस्वी यादव ने दशहरा के अवसर पर बिहारवासियों से एकजुट होकर प्रदेश की समस्याओं के खिलाफ संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए, जिसमें हर हाथ को काम मिले और हर घर खुशहाल बने। अंत में उन्होंने बिहार की जनता सहित सभी देशवासियों को विजयादशमी और दशहरा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विजयादशमी पर गुरु गोरखनाथ की आराधना में लीन हुए सीएम योगी, गोपूजन कर लोकमंगल की कामना की

गोरखपुर। विजयादशमी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में पीठ की पारंपरिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए उन्होंने चराचर जगत के कल्याण और प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। गोरक्षपीठ में विजयादशमी का विशेष पूजन-अनुष्ठान दो घंटे से अधिक समय तक चला। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, शंख, डमरू, घंट, तुरही और नाथपंथ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। विजयादशमी के विशेष अनुष्ठान का शुभारंभ गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में हुआ। यहां शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा से ही जगतजननी आदिशक्ति की आराधना के अनुष्ठान चल रहे थे। वेदी पूजन और लोकमंगल की प्रार्थना के बाद सीएम योगी मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, अन्य साधु-संतों, संस्कृत विद्यापीठ के आचार्यों और वेदपाठी छात्रों के साथ गुरु गोरखनाथ के मुख्य मंदिर पहुंचे। गर्भगृह में उन्होंने नाथपंथ की परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन किया। इस दौरान विविध पूजन सामग्रियों के साथ शक्तिपीठ की वेदी पर उगाए गए जौ का ज्वारा अर्पित किया गया। सीएम योगी ने आरती उतारी और हाथों से चंवर झलकर श्रद्धा एवं समर्पण भाव से सेवा की। गुरु गोरखनाथ की आराधना के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर में प्रतिष्ठित अखंड ज्योति, विभिन्न देव विग्रहों, नाथपंथ के मनीषियों के विग्रहों, अखंड धूना, यज्ञशाला और भीम सरोवर का भी विधिवत पूजन किया। उन्होंने करबद्ध होकर महायोगी गुरु गोरखनाथ और देव विग्रहों की परिक्रमा की। अनुष्ठान के क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज और योगिराज बाबा गंभीरनाथ महाराज सहित नाथपंथ के अन्य मनीषियों के समाधि स्थलों पर पहुंचे। उन्होंने संतों की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाया और विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में नाथपंथ के पारंपरिक वाद्य यंत्र नागफनी, शंख, ढोल, घंट, डमरू और तुरही के साथ बैंड-बाजे की ध्वनि गूंजती रही। पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विजयादशमी का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। विजयादशमी के विशेष पूजन के क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में गोपूजन भी किया। उन्होंने गोमाता को श्रद्धाभाव से गुड़ खिलाया और गोवंश को दुलारकर गोसेवा की। इसके बाद उन्होंने भीम सरोवर में रहने वाली मछलियों को लाई खिलाई। विजयादशमी के अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर ने प्रदेशवासियों के सुखमय, शांतिमय और समृद्ध जीवन की कामना की। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस पारंपरिक अनुष्ठान में नाथपंथ की धार्मिक परंपराओं, गुरु-शिष्य परंपरा और लोककल्याण की भावना का संगम देखने को मिला।

सरसंघचालक मोहन भागवत का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायी : पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण की तारीफ की। उन्होंने इस संबोधन को ‘अत्यंत प्रेरणादायी’ बताया। पीएम मोदी ने कहा कि उनका भाषण राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता, चरित्र निर्माण और ‘पंच परिवर्तन’ पहलों पर केंद्रित था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायी है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के सशक्तीकरण सहित कई विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे हैं।” पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “सेवा और राष्ट्र निर्माण पर उन्होंने पूरा बल दिया है, जो संघ के सभी स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने पंच परिवर्तन का भी उल्लेख किया है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।” आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संगठन के स्थापना दिवस पर वार्षिक विजयादशमी रैली को संबोधित किया था। उन्होंने आत्म-जागरूकता, स्वदेशी, सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर प्रकाश डाला। भागवत ने कहा कि संगठन ने अपनी शताब्दी समारोह के तहत पिछले एक साल में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए हैं और विजयादशमी समारोह साल भर की गतिविधियों का समापन है। आरएसएस प्रमुख ने ‘पंच परिवर्तन’ को सकारात्मक सामाजिक नवीनीकरण, राष्ट्रीय प्रगति और व्यक्तिगत व्यवहार परिवर्तन के लिए एक ‘महत्वपूर्ण खाका’ बताया। इसमें पांच बातें (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण चेतना, स्व-बोध और स्वदेशी, और नागरिक अनुशासन) शामिल हैं। मोहन भागवत ने कहा, “पंच परिवर्तन हर जगह स्वीकार किए जाते हैं, क्योंकि जिन परिस्थितियों के समाधान के रूप में ये काम करते हैं, उन्हें हर कोई अनुभव कर रहा है। विशेष रूप से, पारिवारिक जागरूकता, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण- इन्हें दुनिया भर के लोग तुरंत समझ लेते हैं। इनकी जरूरत दुनिया के अन्य देशों में भी महसूस की गई है।” उन्होंने कहा, “हालांकि, यह एक साल का कार्यक्रम नहीं है, न ही इसे इस तरह से सोचा गया है। स्वयंसेवकों को ध्यान में रखना चाहिए, और नागरिकों को भी समझना चाहिए कि हमारे आचरण में परिवर्तन लाने के लिए जीवन जीने के तरीके के रूप में, इसे प्रत्यक्ष कार्रवाई के माध्यम से आदत बना लेना चाहिए।

गुजरात समिट के अंतर्गत उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने टोक्यो में ‘निप्पॉन स्टील’ के अध्यक्ष के साथ उच्च स्तरीय बैठक की

गांधीनगर। आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अंतर्गत वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जापान दौरे पर गए गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने मंगलवार को टोक्यो में विश्व की अग्रणी स्टील उत्पादक कंपनी ‘निप्पॉन स्टील कॉर्पोरेशन’ का दौरा किया। निप्पॉन स्टील के मुख्यालय में उप मुख्यमंत्री ने कंपनी के अध्यक्ष ईजी हाशिमोतो के साथ शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद कंपनी के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हिदेकी ओगावा सहित उच्च अधिकारियों के साथ आयोजित वन टू वन बैठक में गुजरात में स्टील उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को लेकर विस्तृत एवं फलदायी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने गुजरात में उपलब्ध विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट कनेक्टिविटी और उद्योग-अनुकूल वातावरण की जानकारी देते हुए निप्पॉन स्टील को गुजरात के साथ अपनी साझेदारी और अधिक मजबूत बनाने तथा आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। बता दें कि गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोमवार को जापानी उद्योगपतियों और निवेशकों को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया। ओसाका में आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में हर्ष संघवी ने जापानी उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ रणनीतिक साझेदारी और नए निवेश अवसरों पर चर्चा की। यह बैठक आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट से पहले गुजरात और जापान के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। संघवी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “जापान उगते सूरज की धरती है और गुजरात उभरते अवसरों की धरती है।” उन्होंने भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का उल्लेख करते हुए व्यापार, प्रौद्योगिकी और उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पारस्परिक विश्वास, सम्मान, साझा मूल्यों और सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी आधारित हैं। संघवी ने दोनों देशों के संबंधों को पुरानी और मजबूत मित्रता बताते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने गुजरात की आर्थिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य देश की कुल आबादी का लगभग पांच प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उसका योगदान आठ प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने बताया कि गुजरात देश के कुल औद्योगिक उत्पादन का लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि भारत के करीब एक-तिहाई निर्यात की उत्पत्ति भी इसी राज्य से होती है।

तेलंगाना के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विजयादशमी पर लोगों को बधाई दी, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की

हैदराबाद। तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को विजयादशमी पर लोगों को बधाई दी। राज्यपाल ने तेलंगाना के लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी और सभी के लिए शांति, समृद्धि, खुशी और सफलता की कामना की। उन्होंने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह त्योहार लोगों के बीच साहस, धर्म के प्रति निष्ठा, अच्छे आचरण और सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा। राज्यपाल शुक्ला ने प्रार्थना की कि देवी दुर्गा के आशीर्वाद से तेलंगाना राज्य शांति और समृद्धि के साथ आगे बढ़े, और यहां के सभी नागरिकों का जीवन खुशी, आनंद और सफलता से भरा रहे। उन्होंने सभी से अपील की कि वे एकता, आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ एक प्रगतिशील तेलंगाना के निर्माण में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विजयादशमी के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दी। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना की संस्कृति और परंपराओं में दशहरा का विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि यह त्योहार साहस, धर्म, सत्य, एकता और आत्मविश्वास जैसे महान मूल्य सिखाता है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का त्योहार हमें अहंकार, ईर्ष्या, नफरत और अन्याय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर, प्रेम, करुणा, भाईचारे और मानवता पर आधारित समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी कामना है कि यह विजयादशमी हर घर में खुशियां लाए, हर परिवार को समृद्धि से भर दे और सभी को अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपदा और सफलता प्रदान करे। यह शुभ दिन हमें देवी की उस शक्ति की याद दिलाता है, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। साथ ही, यह भगवान राम की रावण पर जीत का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने तेलंगाना की एक अनूठी परंपरा का भी जिक्र किया, जिसमें ‘जम्मी वृक्ष’ की पूजा की जाती है और इसके पत्तों को, जिन्हें ‘सोना’ माना जाता है, बड़ों को देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परंपरा हमें प्रकृति का सम्मान करने और अपने से बड़ों के प्रति आदर भाव रखने की याद दिलाती है।

15 सालों में ‘नम्मा मेट्रो’ नेटवर्क 6.7 किमी से बढ़कर 96.1 किमी तक पहुंचा : सीएम शिवकुमार

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि नम्मा मेट्रो बेंगलुरु के रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। उन्होंने कहा कि यह लाखों लोगों को उनके काम पर पहुंचाने और उनके सपनों को पूरा करने में मदद कर रही है। शहर के मेट्रो नेटवर्क के 15 साल पूरे होने पर सीएम ने यह बात कही। इस खास मौके पर जारी बयान में सीएम शिवकुमार ने नम्मा मेट्रो के सफर पर गर्व जताया। उन्होंने बताया कि 2011 में 6.7 किलोमीटर से शुरू हुआ नेटवर्क आज 96.1 किलोमीटर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “जो एक नए सफर के रूप में शुरू हुआ था, वह आज बेंगलुरु की रोजमर्रा की जिंदगी का अटूट हिस्सा बन गया है।” उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों के जीवन में मेट्रो का बड़ा महत्व है। हर दिन लाखों लोग नम्मा मेट्रो से सफर कर काम पर जाते हैं, अपने सपनों को पूरा करते हैं और अपने रोजमर्रा के काम निपटाते हैं। उनकी ये यात्राएं ही बेंगलुरु की कहानी कहती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि अब तक जो प्रगति हुई है, उसे आगे बढ़ाया जाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और अधिक सुलभ बनाना, रोज के सफर को आसान करना और पूरे शहर में कनेक्टिविटी बेहतर करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेंगलुरु बेहतर तरीके से जुड़ा रहे, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। 15वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री ने उन लाखों यात्रियों को शुभकामनाएं दीं, जिनकी रोज की यात्राओं से शहर चलता है। बता दें कि नम्मा मेट्रो 20 अक्टूबर को 15 साल पूरे कर रहा है। इसका पहला हिस्सा 20 अक्टूबर 2011 को शुरू हुआ था, जो बयप्पनहल्ली से एमजी रोड तक था। तब यह सिर्फ 6.7 किलोमीटर था, जो अब 83 स्टेशनों के साथ 96.1 किलोमीटर तक फैल चुका है। फिलहाल सरकार का फोकस फेज 2 के बाकी हिस्सों को पूरा करने पर है, जो शहर के बड़े रोजगार केंद्रों को जोड़ता है। येलो लाइन (आरवी रोड से बोम्मासंद्रा वाया इलेक्ट्रॉनिक सिटी) अगस्त 2025 में पूरी तरह से चालू हो चुकी है। बेंगलुरु मेट्रो का तेजी से विस्तार हो रहा है। फेज 2, फेज 3 और नए प्रस्तावित विस्तारों पर काम चल रहा है। मौजूदा 96.1 किलोमीटर का नेटवर्क 2026 के अंत तक 137.11 किलोमीटर और 2027 के अंत तक 175.55 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है।

आरएसएस प्रमुख ने विजयादशमी पर आत्म-जागरूकता, स्वदेशी और सामाजिक समरसता के महत्व पर जोर दिया

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर में विजयादशमी पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए आत्म-जागरूकता, स्वदेशी, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया। भागवत ने कहा कि संगठन ने पिछले साल अपने सौ साल पूरे होने के मौके पर कई प्रोग्राम किए थे और विजयादशमी की सभा साल भर के कार्यक्रमों के समापन का प्रतीक है। उन्होंने संत शिरोमणि के नाम से मशहूर संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर भी रोशनी डाली और कहा कि लोगों को संत के जीवन और शिक्षाओं से परिचित कराने के लिए देश भर में प्रोग्राम किए जा रहे हैं। समाज में उनके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आरएसएस की ब्रांचों में भी इवेंट किए जा रहे हैं। बड़े आध्यात्मिक नेताओं के योगदान को याद करते हुए, भागवत ने कहा कि उनके जीवन ने सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने और समाज को मजबूत करने की प्रेरणा दी। अपने जीवन के उदाहरण से, उन्होंने उस समय समाज को आराम और हिम्मत दी, उनकी हिम्मत बढ़ाई और उनके मूल्यों को बनाए रखा। भागवत ने आर्य समाज के तपस्वी, शिक्षाविद, शुद्धि आंदोलन के नेता और स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद के बारे में भी बात की और कहा कि उनकी शहादत को 100 साल हो गए हैं। उन्होंने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को भी याद किया, जिन्होंने ओडिशा में आदिवासी समुदायों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था और जिनकी जन्म शताब्दी मनाई जा रही है। भागवत के अनुसार, इन हस्तियों को याद करना खास तौर पर इसलिए जरूरी था क्योंकि आरएसएस ने पिछली सदी में लोगों में आत्म-जागरूकता जगाने और भारत की पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए काम किया था। उन्हें याद करना इसलिए भी सही है क्योंकि संघ पिछले 100 सालों से जो काम कर रहा है, उसका मकसद ठीक यही आत्म-जागरूकता जगाना है। इसी आत्म-जागरूकता, पहचान और मूल्यों की बुनियाद पर यह भारत को एकजुट और मजबूत बनाने की कोशिश करता है। जैसा कि हमारे प्रांत संघचालक ने पंच परिवर्तन के बारे में अपनी शुरुआती बातों में बताया था। इसका एक खास पहलू आत्म-जागरूकता अपनाना और स्वदेशी अपनाना है। यह आत्म-जागरूकता हमारे संविधान की प्रस्तावना में दिखती है, जहां हम खुद को ‘हम, भारत के लोग’ कहते हैं। भागवत ने कहा कि भारत की परंपराओं से जुड़े मूल्य लोगों के व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी में दिखने चाहिए। भारत की आजादी की लड़ाई के आस-पास के हालात को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि उस समय के नेताओं और समाज ने बहुत ज्यादा लगन और दृढ़ता दिखाई थी। हमें मिलते-जुलते गुणों को अपनाना चाहिए और उन्हें अपने व्यवहार और रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाना चाहिए। हमारे देश की आजादी की लड़ाई के समय, जैसा कि हमारे चीफ गेस्ट ने बताया, जब संघ की स्थापना हुई थी, तो एक अलग माहौल था। उस माहौल में, हमारी आजादी के लिए लड़ने वाले महान नेताओं ने, उस समय के समाज के साथ मिलकर, बहुत ज्यादा तपस्या और लगन से, वह कर दिखाया जिसकी जरूरत थी। आज, हमारे मौजूदा हालात में, हमें अपने लक्ष्यों को पाने के लिए उस लगन से कई गुना ज्यादा की जरूरत है। जब हम आज के हालात को देखते हैं, तो यह साफ हो जाता है। अस्तित्व के बारे में भारत की पारंपरिक समझ को समझाते हुए, भागवत ने कहा कि विविधता स्वाभाविक थी और लगातार बदल रही थी, लेकिन सभी अस्तित्व की अंदरूनी एकता हमेशा बनी रही। हमारी परंपरा हमें बताती है कि दुनिया में अलग-अलग तरह की चीजें होती हैं, जो पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। यह प्राकृतिक होने के साथ-साथ हमेशा बदलती भी रहती हैं। जैसे यह प्राकृतिक और गतिशील है, वैसे ही सभी चीजों की सबसे बड़ी एकता का सत्य पक्का, अटल और हमेशा रहने वाला है। भगवान ने इंसानों को बुद्धि और विवेक का तोहफा दिया है। अपने विचारों को शुद्ध करके, अगर कोई इंसान अपने अंदर इस सच को समझ ले और इसे दुनिया में दिखाई देता हुआ देखे, और इसके हिसाब से अपनी जिंदगी जिए, तो सिर्फ इसी से उसे हमेशा रहने वाली खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि खुशी की यह तलाश इंसानियत की हमेशा की तलाश है और इंसानी तरक्की इसी कोशिश से आगे बढ़ती है। इंसान अपने विचारों को शुद्ध करके, इस बुनियादी एकता को पहचानकर और अपनी जिंदगी को इसके साथ जोड़कर हमेशा रहने वाली खुशी पा सकता है। भागवत ने खुशी की तलाश को इंसानी खोज बताया, जो तरक्की को आगे बढ़ाती है। संघ के सौ साल पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे आउटरीच प्रोग्राम की शुरुआती जानकारी शेयर करते हुए, भागवत ने कहा कि संगठन ने देश भर के गांवों, शहरी बस्तियों और घरों तक पहुंचने के लिए एक बड़ा कैंपेन चलाया है। आउटरीच की कोशिश में 461,527 गांव और 41,076 शहरी बस्तियां शामिल हुईं, जिन्हें संगठन की भाषा में ‘बस्तियां’ कहा जाता है। उनके बताए आंकड़ों के मुताबिक, यह कैंपेन 101,988,511 घरों और परिवारों तक पहुंचा। जिलों में जाने-माने और समझदार नागरिकों के लिए चर्चाएं और सिम्पोजिया आयोजित किए गए थे। कुल 1,117 ऐसे प्रोग्राम हुए, जिनमें 426,497 पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, भागवत ने साफ किया कि फाइनल ऑफिशियल रिपोर्ट संगठन की एग्जीक्यूटिव कमिटी की मीटिंग में पेश की जाएगी और आंकड़े बढ़ सकते हैं। सामाजिक एकता पर चर्चा करते हुए, भागवत ने कहा कि भारत के सभ्यतागत नजरिए ने ऐतिहासिक रूप से अलग-अलग भाषाओं, जातियों, संप्रदायों और समुदायों के लोगों को काबिल बनाया है, ताकि सामुदायिक पहचानें बनी रहें और साथ ही एक व्यापक जुड़ाव की भावना भी कायम रहे। जब भावनात्मक एकता और भारतीय राष्ट्रीयता सर्वोपरि रही, तब समाज अपनी शक्ति और एकजुटता बनाए रखने में सक्षम रहा। हालांकि, इस साझा पहचान को भुला देने से समाज में विभाजन पैदा हुआ और सामूहिक आत्मविश्वास कमजोर हुआ। भागवत के अनुसार, डर और असुरक्षा की भावना लोगों को संकीर्ण पहचानों की ओर धकेल सकती है, जिससे वे खुद को दूसरों से अलग करने वाली दीवारें खड़ी कर लेते हैं। उन्होंने एकता और जुड़ाव की एक व्यापक भावना को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पीएमके अध्यक्ष का तमिलनाडु सरकार पर निशाना, बोले- पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाना चौंकाने वाली बात

तमिलनाडु। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास की ओर से तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधा गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के पट्टिनापक्कम में हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर नया सचिवालय बनाने का अपना फैसला छोड़ दिया है। इसके बजाय सरकार ने इसे अन्ना सलाई स्थित ‘पल्लवन इल्लम’ की जगह पर बनाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि एक हफ्ते के भीतर इसकी आधिकारिक घोषणा भी हो सकती है, जो कि बेहद चौंकाने वाली बात है। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाने को लेकर मीडिया में आ रही खबरें सच हैं या नहीं। अगर ये खबरें सही हैं तो पट्टिनापक्कम में सचिवालय न बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। इसे पल्लवन इल्लम में बनाने का फैसला कहीं ज्यादा गलत और अनुचित होगा।” डॉ. अंबुमणि रामदास ने कहा, “पट्टिनापक्कम में नया सचिवालय न बनाने के कई कारण और तर्क हैं। वहीं, पल्लवन इल्लम में इसे न बनाने के तो उससे कहीं ज्यादा ठोस कारण मौजूद हैं। अगर चेन्नई में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम वाले इलाकों की सूची बनाई जाए तो पल्लवन इल्लम के आसपास का इलाका टॉप 3 में शामिल होगा। चेन्नई की मुख्य सड़कों में से एक, अन्ना सलाई, पर पहले से ही भारी ट्रैफिक जाम की समस्या है। अगर नया सचिवालय पल्लवन इल्लम में बनाया जाता है तो अन्ना सलाई पर ट्रैफिक को नियंत्रित करना लगभग असंभव हो जाएगा।” डॉ. अंबुमणि रामदास ने कहा, “पल्लवन इल्लम, जहां नया सचिवालय बनाने का प्रस्ताव है, कूवम नदी के किनारे स्थित है। वहां 20 लाख वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र (बिल्ट-अप एरिया) वाला सचिवालय बनाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, पल्लवन इल्लम के दक्षिण में अन्ना सलाई, पूर्व में पल्लवन सलाई, पश्चिम में कूवम नदी, और उत्तर में सेंट मैरी वॉर सिमेट्री (युद्ध कब्रिस्तान) तथा बॉडीगार्ड मुनीश्वरर मंदिर स्थित हैं। चारों तरफ इन सीमाओं के होने के कारण, भविष्य में सचिवालय का विस्तार करना भी लगभग असंभव होगा।” उन्होंने कहा, “पट्टली मक्कल काची (पीएमके) फिर से यह कहना चाहती है कि तमिलनाडु को 25 वर्षों से भी अधिक समय से एक नए सचिवालय की आवश्यकता है। इस पुरानी मांग को पूरा करने के लिए इसका निर्माण जल्द से जल्द शुरू होकर पूरा हो जाना चाहिए। इस संबंध में, पीएमके नए सचिवालय के निर्माण का पूरा समर्थन करती है। हालांकि, इसे एक बड़ी जगह पर बनाया जाना चाहिए, जिसमें सभी जरूरी सुविधाएं हों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक दूरदर्शी सोच के साथ इसका निर्माण किया जाए।” उन्होंने आगे कहा, “विधानसभा में नए सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा था कि इस नए परिसर को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह अगले 100 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सके। मुख्यमंत्री की इस सोच को हकीकत में बदलने के लिए, न तो पट्टिनापक्कम और न ही पल्लवन इल्लम, कोई भी जगह उपयुक्त नहीं है। यही कारण है कि पीएमके लगातार यह मांग कर रही है कि चेन्नई के बाहर कम से कम 500 से 1,000 एकड़ की जगह पर एक एकीकृत प्रशासनिक शहर विकसित किया जाए, जिसमें सचिवालय भी शामिल हो। इस दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाने के बजाय, तमिलनाडु सरकार एक के बाद एक गलतियां करती दिख रही है; पहले उसने पट्टिनापक्कम का प्रस्ताव रखा, और जब उस पर विरोध हुआ, तो अब वह पल्लवन इल्लम पर विचार कर रही है।” डॉ. अंबुमणि रामदास ने कहा, “तमिलनाडु सरकार को नए सचिवालय के निर्माण के मुद्दे पर खुले दिमाग और दूरदर्शी सोच के साथ काम करना चाहिए। मेरी सरकार से अपील है कि वह पीएमके के प्रस्ताव के अनुसार, चेन्नई के बाहर ही नए सचिवालय का निर्माण कराए।