भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से सभी निर्यात को मिली ड्यूटी-फ्री पहुंच, व्यापार और निवेश संबंधों को मिलेगी नई गति: पीयूष गोयल

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों के लिए अवसरों के एक नए अध्याय की शुरुआत है। समझौते के लागू होने के साथ ही न्यूजीलैंड में जाने वाले सभी भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त (ड्यूटी-फ्री) पहुंच मिल गई है, जिससे व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि अब भारतीय निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क छूट का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, “भारतीय वस्तुएं अब न्यूजीलैंड में सभी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) के साथ प्रवेश कर सकेंगी।” मंत्री ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को सुगम बनाएगा, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा। साथ ही गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा, “लेकिन हमने अपने किसानों के हितों की रक्षा की है। डेयरी, प्रमुख कृषि उत्पादों और पशु-आधारित उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। किसानों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” इस बीच, अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी इस समझौते के लागू होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता का प्रमाण है और ‘लोकल टू ग्लोबल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन को मजबूत करेगा। खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कृषि उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसे भारतीय क्षेत्रों के लिए बड़े निर्यात अवसर पैदा करेगा। कैट ने कहा कि न्यूजीलैंड के बाजार में मिलने वाली जीरो-ड्यूटी पहुंच भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी और इससे एमएसएमई, कारीगरों, किसानों, निर्माताओं, महिला उद्यमियों और निर्यातकों को लाभ मिलेगा। यह समझौता न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारतीय पेशेवरों और युवाओं के लिए नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा। भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। उद्योग जगत का मानना है कि यह एफटीए निर्यात, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को मजबूत गति प्रदान करेगा। खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापार-केंद्रित कूटनीति भारतीय कारोबारों के लिए नए वैश्विक बाजार खोल रही है, जबकि घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के हित भी सुरक्षित रखे जा रहे हैं। उन्होंने व्यापारियों, निर्माताओं और एमएसएमई से ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया।
संजय राउत का दावा-‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ जैसी व्यवस्था फिर से लागू करने की कोशिश

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि एक बार फिर देश में ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ जैसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश हो रही है। संजय राउत ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मैंने जो अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अराजकता फैलेगी, मैं फिर कह रहा हूं—हां, अराजकता फैलेगी। अगर यह सरकार सत्ता में बनी रहती है तो अराजकता फैलना तय है। मैंने इसी बात की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। हमने सुप्रीम कोर्ट में अपना भरोसा जताया है, क्योंकि हमें लगता है कि यही एकमात्र संस्था है जो देश को बचा सकती है। देश की केंद्र सरकार तिरंगा फहराने का भी विरोध करती है तो इसका क्या मतलब है? यह सरकार, राष्ट्रवादियों या देशभक्तों की नहीं है और ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ जैसी व्यवस्था फिर से लागू करने की कोशिश हो रही है। महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस भी यही कर रहे हैं। अगर हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं फहरा सकते तो फिर हमें क्या करने की इजाजत है? हमें किसका झंडा फहराना चाहिए? केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ड्रग्स वाले बयान पर राउत राउत ने तंज कसते हुए कहा कि यह एक बड़ा मजाक है कि जिनके शासनकाल में ड्रग तस्करी सबसे ज्यादा बढ़ी है, वे ही इस तरह का बयान दे रहे हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर संजय राउत ने कहा कि अभी एक ऐसा आंदोलन चल रहा है, जिसका मकसद समाधान खोजना है। हम बिल्कुल वही कर रहे हैं जो आपके मन में है। आप भी देश में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। आप भी मानते हैं कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार बेहतर थी और हमने गलत लोगों को सत्ता में बिठा दिया है। हमें आपके मन की बात अच्छे से पता है। आप भी चाहते हैं कि सरकार बदलनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है, इसलिए हम जिस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, वह देश और समाज के हित में है।