रात को नींद नहीं आती? रोज करें मकरासन, अनिद्रा और चिंता से मिलेगा छुटकारा

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग बहुत जरूरी हो गया है। यह हमें तनाव से राहत देता है और सेहतमंद बनाता है। योग के कई आसनों में से एक आसन है मकरासन। ये सिर्फ एक आरामदायक मुद्रा नहीं, बल्कि तनाव, थकान और कमर दर्द से राहत पाने का एक बेहतरीन उपाय है। ‘मकरासन’ संस्कृत का शब्द है, जो ‘मकर’ और ‘आसन’ इन दो शब्दों से मिलकर बना है। यहां ‘मकर’ का अर्थ मगरमच्छ और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा से है। इस आसन को करने से पीठ और कमर का दर्द कम होता है और शरीर को आराम मिलता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मकरासन करने से शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है। खासतौर से यह पीठ, कमर और कंधों की जकड़न को दूर करता है। यह श्वसन प्रणाली के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह योगासन मानसिक संतुलन और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। यह रीढ़ की हड्डी के लिए बेहद लाभकारी योगासन है। मकरासन रीढ़ की हड्डी की संरचना को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है और उसमें लचीलापन बढ़ाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पीठ दर्द, स्लिप डिस्क या ‘स्पाइनल टेंशन’ से जूझ रहे हैं। इसका नियमित अभ्यास रीढ़ की हड्डी को मजबूत और स्वस्थ बनाता है। मकरासन को ‘रिलैक्सिंग पोज’ भी कहा जाता है और इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे नर्वस सिस्टम पर दिखता है। दरअसल, मकरासन करने के दौरान जब हम पेट के बल लेटकर गहरी और धीमी सांसें लेते हैं तो हमारा पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। इसे शरीर का ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ सिस्टम भी कहते हैं। इससे शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल का लेवल कम होता है और मन शांत होता है। तंत्रिका तंत्र के शांत होने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और नींद न आने की समस्या दूर होती है। तनाव कम होने से हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। गंभीर चोट, हालिया हुई सर्जरी और गर्भावस्था के दौरान इस आसन को करने से बचना चाहिए।

मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर डीएमके पार्षद समेत दो के खिलाफ केस दर्ज

चेन्नई। पुलिस ने द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (डीएमके) की दो नेता पार्षद सुधा दीनदयालन और पार्टी की बैठक की आयोजक मुरलीधरन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर आरोप है कि चेन्नई में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) पदाधिकारी उदयकुमार द्वारा भाषण को लेकर शिकायत दर्ज कराने के बाद 7 अक्टूबर की बैठक आयोजित करने वाली सुधा और मुरलीधरन के खिलाफ बी-2 एस्प्लेनेड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। यह विवाद उन टिप्पणियों को लेकर है, जिनमें सुधा ने कथित तौर पर विजय की सरकार के खिलाफ अशब्द का इस्तेमाल किया। इस भाषण के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गए हैं, जिसके चलते टीवीके सदस्यों ने विरोध जताया है और सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दल डीएमके के बीच तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। अपनी शिकायत में उदयकुमार ने आरोप लगाया कि पार्षद ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में मुरलीधरन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। टीवीके सदस्यों ने बैठक में शामिल हुए डीएमके के वरिष्ठ नेताओं की भी आलोचना की है। उनका आरोप है कि जब सुधा ने ये टिप्पणियां कीं तो इन नेताओं ने उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की। पार्टी के अनुसार, मंच पर चेन्नई की मेयर प्रिया, सांसद कनिमोझी और पूर्व मंत्री पी.के. सेकरबाबू मौजूद थे। सत्ताधारी पार्टी का आरोप है कि इन नेताओं ने आपत्ति न जताकर, एक तरह से इस हमले को जारी रहने दिया। ये टिप्पणियां एक भाषण के दौरान की गईं, जिसमें विजय सरकार पर अपने वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया गया था। सुधा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखे हुए है। हालांकि, मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी भाषा विवाद का मुख्य केंद्र बन गई। टीवीके समर्थकों ने भाषण के कुछ हिस्से साझा किए और पुलिस कार्रवाई की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों और एस्प्लेनेड थाने में दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के बाद यह मामला दर्ज किया गया है। यह शिकायत कथित टिप्पणियों और कार्यक्रम के आयोजन में आयोजक की भूमिका, दोनों से संबंधित है। पुलिस ने नामजद दो व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि उनसे पूछताछ की गई है या उन्हें तलब किया गया है। मामले से जुड़ी जानकारी में इन आरोपों पर सुधा या मुरलीधरन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

वाराणसी के नमो घाट पर 22 से 25 अक्टूबर तक भव्य एयर शो का आयोजन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

वाराणसी। भारतीय वायुसेना दिवस की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में वाराणसी के नमो घाट पर भव्य मेगा एयर शो का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एयर शो का आयोजन 22, 24 और 25 अक्टूबर को किया जाएगा। भारतीय वायुसेना दिवस की 94वीं वर्षगांठ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वायुसेना ने नमो घाट परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया है। वहीं, पुलिस और जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इससे पहले 21 अक्टूबर को इसकी अंतिम रिहर्सल यानी फुल ड्रेस अभ्यास होगा। इस दौरान सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 20 से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर गंगा नदी के ऊपर आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे। इस अभ्यास के जरिए मुख्य आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। एयर शो और रिहर्सल को देखते हुए नमो घाट पर आम जनता का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जिला प्रशासन के अनुसार, घाट परिसर में केवल आमंत्रित अतिथियों के लिए वीआईपी दीर्घा बनाई गई है। सुरक्षा कारणों से आम लोगों को यहां प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, एयर शो देखने के इच्छुक लोगों के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। वाराणसी के लोग अस्सी घाट से राजघाट तक विभिन्न घाटों से विमानों के करतब देख सकेंगे। वहीं, पड़ोसी जिले चंदौली के लोग डोमरी से रामनगर के बीच स्थित मैदानी इलाकों और नदी तटों से एयर शो का आनंद ले सकेंगे। बता दें कि वाराणसी में पहली बार इस स्तर के मेगा एयर शो के आयोजन को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। प्रशासन का अनुमान है कि इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए काशी और आसपास के जिलों से 20 लाख से अधिक लोग विभिन्न घाटों पर पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यापक योजना तैयार की गई है। आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए वाराणसी के विभिन्न सरकारी विभागों के पांच हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। विकास भवन में पिछले तीन दिनों से लगातार ड्यूटी सूची तैयार करने का काम चल रहा है। वाराणसी के अलावा गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली के प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रिजीम चेंज से हालात नहीं बदलते, भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है : मोहन भागवत

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव का आयोजन नागपुर में हुआ। इस मौके पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने देश, समाज और दुनिया के मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन से हुई, जिसमें भागवत भी मौजूद रहे। संबोधन में मोहन भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र किया और रिजीम चेंज की राजनीति पर बयान दिया। मोहन भागवत ने कहा, “एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि भारत, हिंदू और संघ को तोड़ने के लिए आसुरी ताकतें योजना बनाकर काम कर रही हैं। उसी प्रकृति के कुछ लोग इसमें सहायता के लिए मिल जाते हैं। क्षुद्र सत्ता-स्वार्थ और विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं। भारत सहित सारे विश्व में जो भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक और मानवीय संस्कार हैं, उन्हें नष्ट करने की आसुरी प्रतिज्ञा लेकर पश्चिम से एक आंधी चली है, जिससे तथाकथित प्रगतिशील देश भी त्रस्त और असहाय हैं। भारत की विविधता पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि भारत माता का सर्वोच्च स्थान है। देश में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं, लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि हम जब भी बंटे, कमजोर हुए। भारत पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी इसी एकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने हिंदू भाव और हिंदू स्वभाव की व्याख्या करते हुए कहा कि हमारे राष्ट्र की चेतना यही सनातन दृष्टि है, जिसे आज हम भारत के लोगों सहित सारा विश्व हिंदू दृष्टि के नाम से जानता है। इसमें कोई विशिष्ट पूजा पद्धति, खान-पान, रहन-सहन या जाति-भाषा की अनिवार्यता नहीं है। सबसे ऊपर आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व ही सनातन दृष्टि का लक्षण है। सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “संगठित व बलसंपन्न हिंदू समाज की बात करना या उसके लिए कार्य करना सर्वपंथ-समादर की भावना अथवा राष्ट्र की भावनिक एकात्मता के विरुद्ध नहीं है। हिंदू समाज का विचार व स्वभाव समावेशक होने के नाते संघ कार्य हम सबकी भावनिक एकात्मता, सद्भावना व सदाचार का पोषक ही होगा। इसी संस्कार से प्रेरित होकर, कैप्टन स्मित मच्छार ने हाल ही में जो किया, वह स्वाभाविक था। ऐसी स्थिति में क्या करना है, इसके लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। बल्कि उस परीक्षा की घड़ी में उनके भीतर के संस्कार और मूल्य स्वतः ही सामने आ गए। यही हिंदू स्वभाव है। यह कार्य राष्ट्रीय एकता और वैश्विक सद्भाव के लिए एक रचनात्मक शक्ति का काम करता है और यह केवल बातों तक सीमित नहीं है। लोग संघ से इसलिए नहीं जुड़ते कि वे भाषण सुनें; बल्कि वे यहां आते हैं और अपने कार्यों के माध्यम से इन संस्कारों को अपने जीवन में उतारते हैं।” मोहन भागवत ने कहा कि हम सबका परस्पर नाता और भारत के साथ संबंध जीवंत है और हृदय का होने के कारण बिना शर्त है- ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें’। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी हिंदू भाव को जगाकर संपूर्ण समाज को एक सुसंगठित और बलसंपन्न समाज बनाने के लिए काम कर रहा है। इस साल को दो महान हस्तियों के स्मरण का वर्ष बताते हुए भागवत ने कहा कि यह आर्य समाज के तपस्वी, धर्म के रक्षक, शिक्षाविद, स्वतंत्रता सेनानी और शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने का वर्ष है। साथ ही यह ओडिशा के वनवासी समुदायों के बीच सेवा करने वाले और वहीं अपना जीवन देने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी महाराज की जन्म शताब्दी का वर्ष भी है। इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदू मेला’ के प्रेरक बंग भूमि के स्वर्गीय राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का भी उल्लेख किया, जिन्होंने स्वदेशी मेलों के जरिए समाज में स्व के बोध को जगाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों से संघ भी इसी स्व-बोध की नींव पर भारत को उसकी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत बनाने का काम कर रहा है। आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि व्यवस्था की कमियों के चलते आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए। वे राजनीति का साधन नहीं बनने चाहिए। भावनाएं तीव्र होने पर भी कानून और भद्र व्यवहार की मर्यादा में रहना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण शिक्षा में स्वयंसेवकों के प्रयासों का भी जिक्र किया और बताया कि 21 प्रांतों के 210 जिलों के 1296 विद्यालयों में जहां ग्रामीणों की सहभागिता और स्वयंसेवकों का साथ रहा, वहां छात्रों की उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार देखा गया।

‘स्वयंसेवकों ने राष्ट्र-प्रथम की भावना से किया है कार्य’, आरएसएस स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने राष्ट्र-प्रथम की भावना से समाज के उत्थान के लिए किया कार्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के विशेष अवसर पर सभी स्वयंसेवकों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। मैं उन सभी विभूतियों को भी नमन करता हूं, जिन्होंने अपने अथक परिश्रम और सेवाभाव से संघ को सींचा और संवारा है। पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक प्रतिबद्धता का गौरवशाली शताब्दी वर्ष पूर्ण किया है। अनगिनत स्वयंसेवकों ने अपने समर्पण, कर्तव्य-निष्ठा और राष्ट्र-प्रथम की भावना से सदैव समाज के उत्थान के लिए कार्य किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह भावना आने वाले समय में भी देश को और सशक्त व सुदृढ़ करेगी। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी एक्स पोस्ट के जरिए को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। ‘एक्स’ पोस्ट में सीएम फडणवीस ने लिखा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस पर राष्ट्र सेवा, मानवीय मूल्यों और विकसित भारत के दृढ़ संकल्प के साथ काम करने वाले सभी स्वयंसेवकों और सेविकाओं को हार्दिक शुभकामनाएं।” उन्होंने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना दिन के इस अवसर पर उन सभी स्वयंसेवकों को मनपूर्वक शुभकामनाएं जो राष्ट्रसेवा, मानवीय मूल्यों और विकसित भारत के संकल्प को लेकर काम कर रहे हैं। एक अन्य ‘एक्स’ पोस्ट में सीएम फडणवीस ने लिखा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना दिवस पर राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करने वाले सभी समर्पित स्वयंसेवकों और सेविकाओं को हार्दिक शुभकामनाएं।” बता दें कि इस साल आरएसएस अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और इस मौके पर नागपुर में मंगलवार को विजयादशमी उत्सव का भी आयोजन किया गया है।

खाने में नमक तो है, लेकिन क्या उसमें आयोडीन भी है? अनदेखी सेहत पर पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली। हमारे घरों में सुबह से लेकर रात तक बनने वाले लगभग हर खाने में नमक का इस्तेमाल होता है। दाल हो, सब्जी हो, या सलाद हो, नमक के बिना खाने का स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले नमक में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा है या नहीं? यह सवाल इसलिए जरूरी है, क्योंकि आयोडीन की कमी शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है। इसका असर थायरॉइड ग्रंथि से लेकर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास तक पर पड़ सकता है। इसी महत्व को समझाने और लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है, जिसकी शरीर को थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। यह थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया, शरीर के तापमान और सामान्य विकास को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता तो थायरॉइड ग्रंथि जरूरी मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। इससे हाइपोथायरायडिज्म जैसी समस्या हो सकती है। इसके कारण थकान, सुस्ती, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना और काम करने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आयोडीन की कमी का एक परिणाम घेंघा रोग भी है। इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है और गर्दन के सामने सूजन दिखाई दे सकती है। लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर शरीर के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की जरूरत विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र विकसित हो रहा होता है। इस समय गंभीर आयोडीन की कमी बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ मामलों में गर्भपात, समय से पहले प्रसव और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। शिशुओं और छोटे बच्चों में आयोडीन की कमी सीखने-समझने की क्षमता और विकास को प्रभावित कर सकती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा आयोडीन लेना भी नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना आयोडीन सप्लीमेंट लेना सही नहीं है। आयोडीन की कमी से बचने का एक आसान तरीका रोजाना आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है। नमक खरीदते समय पैकेट पर आयोडीन युक्त होने की जानकारी जरूर देखें। नमक को नमी और गर्मी से बचाकर बंद डिब्बे में रखना चाहिए, ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे। भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखें, क्योंकि आयोडीन की जरूरत पूरी करने के लिए ज्यादा नमक खाना सही नहीं है। अत्यधिक नमक का सेवन उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। दूध, दही, अंडे और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों में भी आयोडीन पाया जाता है। इसकी मात्रा खाद्य पदार्थ के प्रकार और उत्पादन के तरीके पर निर्भर करती है। संतुलित आहार और आयोडीन युक्त नमक का उचित इस्तेमाल शरीर की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है।

तमिलनाडु: कुलसेकरपट्टिनम में दशहरा उत्सव के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था, 3,700 पुलिसकर्मियों की तैनाती

थूथुकुडी। दशहरा उत्सव के मुख्य आकर्षण ‘सूरसमहारम’ समारोह के लिए तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम स्थित मुथरम्मन मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ‘सूरसमहारम’ में भक्तों की भीड़ को देखते हुए 3,700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। थूथुकुडी जिले में तिरुचेंदुर के पास स्थित तटीय कस्बे में इस समारोह के लिए लाखों भक्तों के जुटने की उम्मीद है। तीर्थयात्रियों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है और दूसरे जिलों से भी पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस त्योहार की शुरुआत 11 अक्टूबर को पारंपरिक ध्वजारोहण के साथ हुई थी। तब से, थूथुकुडी, तिरुनेलवेली और अन्य जगहों से भक्त इस तीर्थ स्थल पर पहुंच रहे हैं। इनमें से कई भक्तों ने उपवास और कठिन धार्मिक नियमों का पालन किया है और वे विशेष वेशभूषा पहने हुए हैं। एसपी शिवप्रसाद ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख चार पुलिस अधीक्षक करेंगे, जिनकी मदद के लिए 14 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 47 उप पुलिस अधीक्षक तैनात किए गए हैं। यह तैनाती सोमवार से मंगलवार तक, यानी त्योहार के मुख्य दिनों के लिए है, जब इस कस्बे में भारी संख्या में लोग आते हैं। सिविल ड्रेस में भी पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। निगरानी में मदद करने और आने वाले लोगों की सहायता के लिए दस वॉचटावर और लगभग 50 पुलिस सहायता केंद्र बनाए गए हैं। पूरे उत्सव क्षेत्र में सात मोबाइल सर्विलांस कैमरा वाहन और 300 से अधिक फिक्स्ड कैमरे भी लगाए गए हैं। तीन मुख्य सड़कों पर ‘ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन’ (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर की पहचान करने में मदद करेंगे। इससे पुलिस को कस्बे में आने वाले और वहां से गुजरने वाले वाहनों पर नजर रखने में आसानी होगी। कुलसेकरपट्टिनम पुलिस स्टेशन में एक मॉनिटरिंग स्क्रीन लगाई गई है, जिस पर निगरानी फीड आती है और पुलिसकर्मी 24 घंटे इस पर नजर रखते हैं। निगरानी के लिए पांच ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने के लिए पांच ‘फेशियल रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाले) कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि अपराधियों की 1,000 से अधिक तस्वीरें इस पहचान प्रणाली (रिकग्निशन सिस्टम) में अपलोड की गई हैं। अगर कोई ऐसा व्यक्ति, जिसकी तस्वीर डेटाबेस में मौजूद है, कैमरे की रेंज में आता है, तो पुलिस अधिकारी उसकी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और उचित कार्रवाई कर सकते हैं। कुलसेकरनपट्टिनम में भक्तों के लगातार आने के बीच, मंगलवार रात को होने वाले उत्सव के सबसे महत्वपूर्ण समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक तैनाती और निगरानी नेटवर्क मुख्य भूमिका निभाएंगे।

संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार का किया जिक्र, बोले- यही है हिंदू स्वभाव

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम भारतीय समाज में रचे-बसे मूल्यों और परंपराओं का प्रतीक है। नागपुर में संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि कठिन परिस्थिति में कैप्टन स्मित की प्रतिक्रिया किसी विशेष ट्रेनिंग का नतीजा नहीं, बल्कि उनके अंदर मौजूद स्वाभाविक मूल्यों की अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा, “इसी भाव से प्रेरित होकर कैप्टन स्मित मच्छार ने हाल ही में जो किया, वह स्वाभाविक था। ऐसी स्थिति में क्या करना है, इसकी कोई ट्रेनिंग नहीं थी, उनके अंदर की परंपरा और संस्कार ही परीक्षा की उस घड़ी में सामने आ गए।” मोहन भागवत ने इसे ही हिंदू स्वभाव बताया। उन्होंने कहा कि यही हिंदू स्वभाव है, जो विविधता की गरिमा और सुरक्षा का पोषण और संरक्षण करता है। यह कार्य राष्ट्रीय एकता और वैश्विक सद्भाव के लिए एक रचनात्मक शक्ति के रूप में काम करता है। संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस इन मूल्यों को केवल भाषणों में चर्चा करके नहीं, बल्कि व्यावहारिक कार्यों के जरिए स्थापित करना चाहता है। लोग संघ में भाषण सुनने नहीं आते, वे पहले आते हैं और अपने कार्यों के जरिए इस भाव का अभ्यास करते हैं। बता दें कि कैप्टन स्मित मच्छार दुबई से तेल अवीव जा रहे बोइंग 737 विमान का संचालन कर रहे थे, तभी फ्लाइट के दौरान उनके सह-पायलट ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे यात्रियों और क्रू को हमलावर पर काबू पाने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिली। इस घटना के कारण विमान तेजी से नीचे की ओर आने लगा, जिसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने बीच-बचाव किया और स्थिति को नियंत्रण में लाने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। विमान में सवार सभी 174 यात्री सुरक्षित बताए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पायलट की तारीफ करते हुए उन्हें ‘हीरो’ बताया था और उनकी बहादुरी और दृढ़ संकल्प की सराहना की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि मच्छर के इस कदम ने कई लोगों की जान बचाई और एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। कैप्टन मच्छार विमानन क्षेत्र में 13 साल से अधिक के अनुभव वाले पायलट हैं। फ्लाईदुबई में शामिल होने से पहले उन्होंने स्पाइसजेट में काम किया था, जहां वे लाइन ट्रेनिंग कैप्टन के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने मुख्य रूप से बोइंग 737 विमान पर लगभग 9,750 घंटे की उड़ान भरी है।

झंडेवालान मंदिर में खेत्री विसर्जन के साथ संपन्न हुए नवरात्र अनुष्ठान, ट्रस्टी रवींद्र गोयल ने लोगों से की खास अपील

नई दिल्ली। नई दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवालान मंदिर में विजयादशमी के अवसर पर नवरात्र अनुष्ठान का विधिवत समापन हुआ। मंदिर के ट्रस्टी रवींद्र गोयल ने घटस्थापना और पवित्र जौ की कोंपलों (खेत्री) के विसर्जन को लेकर लोगों से खास अपील की। रवींद्र गोयल ने कहा कि नवरात्र संपन्न हो गए हैं। आज विजयादशमी के दिन मंदिर में खेत्री पूजन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ है। इससे पहले नौ दिनों तक झंडेवालान मंदिर में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंचे। उन्होंने कहा कि कल अष्टमी-नवमी थी। मंदिर में भव्य कन्या पूजन का आयोजन किया गया। पूरे दिन से लेकर देर रात तक बड़ी संख्या में भक्तों का आना-जाना लगा रहा। मंदिर में अष्टमी की रात भव्य जागरण का भी आयोजन किया गया, जो सुबह चार बजे संपन्न हुआ। इसके बाद भी बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में रखे गए जौ के बीजों के पूजन और विसर्जन की परंपरा के बारे में उन्होंने कहा कि नौ दिनों से मंदिर में बोए गए बीजों का विधिवत पूजन कर आज उनका विसर्जन किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने घरों में उगाई गई जौ (खेत्री) को इधर-उधर न फेंके, बल्कि मंदिर में लाकर जमा करें, ताकि मंदिर प्रशासन द्वारा उसका विधिवत विसर्जन किया जा सके। अंत में देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए रवींद्र गोयल ने कहा, “सभी देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं। हमारा देश सुरक्षित और सफल रहे, सभी के घरों में सुख-समृद्धि आए। देश के सामने जो भी संकट हैं, भगवान राम उन पर विजय पाने की शक्ति दें। सभी सुखी रहें, इसी कामना के साथ मैं अपनी ओर से और झंडेवालान मंदिर की ओर से सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

अयोध्या में आरएसएस का शौर्य प्रदर्शन, शस्त्र पूजा के बाद रामलला नगर में निकला पथ संचलन

अयोध्या। अयोध्या में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने विजयादशमी का पर्व परंपरागत उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया। रामलला नगर में आयोजित कार्यक्रम में शस्त्र पूजा और पथ संचलन मुख्य आकर्षण रहा। इस अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन और नगर संघचालक जयरामदास सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज विजयादशमी का दिन है। यह हमारे संघ के प्रमुख उत्सवों में से एक है। इस वर्ष संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसी संदर्भ में यहां स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ और पथ संचलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजन और ध्वजारोहण के साथ हुई। महानगर सेवा प्रमुख बालेंद्र का उद्बोधन भी हुआ। इसके बाद सभी स्वयंसेवक पथ संचलन के लिए निकले हैं।” नगर संघचालक जयरामदास ने कहा, “आज रामलला नगर में भी विजयादशमी उत्सव मनाया गया। सबसे पहले शाखा लगाई गई और ध्वज प्रणाम किया गया। इसके बाद स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण, प्रार्थना और बौद्धिक कार्यक्रम हुआ।” उन्होंने पथ संचलन के मार्ग की जानकारी देते हुए बताया कि यह संचलन तुलसी उद्यान से शुरू होकर लता चौक, हनुमानगढ़ी और श्री राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक गया और वहां से होते हुए हनुमानगढ़ी रोड से वापस तुलसी उद्यान में आकर संपन्न होगा। परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा रही है। अत्याचारी, दुराचारी और पापाचारी रावण का अंत करने वाले भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए हर वर्ष इस तरह का आयोजन किया जाता है। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवक सफेद शर्ट, खाकी पैंट और काली टोपी की पारंपरिक वेशभूषा में लाठी के साथ अनुशासित कतार में चलते नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी साथ रहा। इसी तरह जयपुर, राजस्थान में भी आरएसएस ने झोटवाड़ा इलाके में विजयादशमी के अवसर पर रूट मार्च का आयोजन किया, जिसमें स्वयंसेवकों ने पारंपरिक जुलूस में भाग लिया।