बोकारो स्टील प्लांट में नियोजन की मांग पर विस्थापितों का आंदोलन तेज, मेन गेट छोड़ कंपनी के तमाम गेट जाम

बोकारो। झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में स्थायी नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित परिवारों का आंदोलन शुक्रवार को और तेज हो गया। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के सातवें दिन आंदोलनकारियों ने मेन गेट को छोड़कर संयंत्र के अन्य सभी प्रवेश द्वार अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए। इससे कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित हुई। ड्यूटी पर पहुंचे कुछ कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा, जबकि कई कर्मचारी मुख्य गेट से संयंत्र में प्रवेश करते दिखे। विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित परिवारों से जुड़े आंदोलनकारियों की इस कार्रवाई से नियोजन के मुद्दे पर प्रबंधन के साथ जारी गतिरोध और बढ़ गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाने और बातचीत के बावजूद नियुक्ति को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। वे अब आश्वासन के बजाय नियोजन की स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा चाहते हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक, विस्थापित परिवार के प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन करीब 16 महीने गुजरने के बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विस्थापित परिवारों ने संयंत्र की स्थापना के लिए जमीन दी और उनके युवाओं ने अप्रेंटिस का प्रशिक्षण भी पूरा किया, लेकिन स्थायी रोजगार का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी पहले की व्यवस्था के अनुरूप चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियोजन और प्रशिक्षण पूरा कर चुके विस्थापित अप्रेंटिस युवाओं की नियमित बहाली और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पहले आंदोलनकारियों ने गेट नंबर 9 और 10 बंद कर प्रबंधन को चेतावनी दी थी कि मांगों पर निर्णय नहीं होने पर आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 106 युवक टू-टैंक गार्डन के पास भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के दौरान कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया था। गेट बंद होने से संयंत्र के सामान्य संचालन पर असर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है। बीएसएल के सुरक्षा विभाग ने पहले प्रशासन को पत्र लिखकर आंदोलन से उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी। बोकारो की विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठी हैं। फिलहाल आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं और भूख हड़ताल समाप्त करने को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है।
राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप के मामले में सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वकील गौरव भाटिया ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप का मामला रखा। उन्होंने कोर्ट से इस आवेदन पर सुनवाई की तारीख तय करने और यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि मामले में नोटिस जारी किया गया है या नहीं। इस पर सीजेआई ने कहा कि कल हमारे सामने जो भी याचिकाएं रखी गई थीं, उन सभी में हम पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। हम 26 अक्टूबर को सुनवाई करेंगे। इसी से जुड़े एक अन्य मामले में वकील जय अनंत देहाद्राई की ओर से भी सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा गया। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस के दुकानदारों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे। छोटी दुकानें चलाने वाले लोग त्योहार के मौसम में कमाई करते हैं। अगर उनका कारोबार प्रभावित हुआ, तो उनके पूरे परिवार को आर्थिक परेशानी हो सकती है। जस्टिस बागची ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है। अगर प्रदर्शन के कारण दुकानदारों को आर्थिक नुकसान होता है, तो सुप्रीम कोर्ट अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है। फिलहाल, पहले देखते हैं कि आगे क्या होता है। बता दें कि दिल्ली में 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाली पत्रकार ने दावा किया है कि वह तीन महीने की गर्भवती हैं। इस मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव का बातचीत और कूटनीति ही समाधान: पी. हरीश

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पूरे खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष को तुरंत रोकने की अपील की है। भारत का कहना है कि बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों पर भी इसका असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व की स्थिति पर आयोजित तिमाही खुली बहस के दौरान कहा कि मौजूदा संघर्ष को तुरंत कम किया जाना चाहिए और इसका समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व की सुरक्षा, स्थिरता और शांति में भारत की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। इस क्षेत्र के साथ हमारे राजनीतिक, आर्थिक, निवेश, ऊर्जा और लोगों के आपसी संबंध बेहद मजबूत हैं।” हरीश ने बताया कि केवल गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के छह देशों के साथ ही भारत का सालाना व्यापार करीब 180 अरब डॉलर का है। इसके अलावा इन देशों से 31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है और वहां से भारत आने वाली सालाना रेमिटेंस (विदेश से भेजी जाने वाली रकम) 52 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा, सलामती और भलाई भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह दोनों पक्षों के रिश्तों का अहम हिस्सा है। भारत के लिए समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले सभी हमले कानूनी और नैतिक रूप से गलत हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार का सुरक्षित एवं निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। हरीश ने इस सप्ताह भारतीय ध्वज वाले जहाज एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी पर हुए हमले का जिक्र किया। इसके अलावा हाल के सप्ताहों में ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’, ‘एमटी वाल्थेरा’, ‘एमटी ऑन पीस’ और ‘एमटी काजिमाह III’ जैसे अन्य जहाजों पर हुए हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर कई भारतीय नाविक काम करते हैं। साथ ही उन्होंने ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद के लिए धन्यवाद दिया। हरीश ने बताया कि नाविकों की सुरक्षा और आपात स्थितियों में उनकी मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क (एसईएसएन) बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रखा गया था। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क विभिन्न देशों की समुद्री एजेंसियों और दूतावासों को आपस में जोड़ सकता है। इससे आपातकालीन संदेश भेजने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, परिवारों से संपर्क बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर निकासी में मदद मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि भारत और लाइबेरिया ने मिलकर हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की शुरुआत की है। इस समूह में 23 देश शामिल हैं और इसका उद्देश्य समुद्री हमलों को रोकने के लिए बेहतर समन्वय करना तथा नाविकों के अधिकारों की रक्षा करना है। होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट के कारण फिलिस्तीन की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का समर्थन करता है, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन दोनों स्वतंत्र देशों के रूप में शांति से साथ रहें। भारत फिलिस्तीनी जनता की मदद के लिए कई परियोजनाएं चला रहा है, जिनमें अस्पताल निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और छात्रवृत्ति कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक 52 मिलियन डॉलर का योगदान दिया है और वह फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए के प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल हो रहा है।
भारतीय मूल के स्टोर मालिक को गिरफ्तार कर अमेरिका भेजा गया, छह लाख डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप

वाशिंगटन। एफबीआई की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल भारतीय मूल के किराना कारोबारी मनजीत सिंह बेदी को भारत से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार उन पर अमेरिकी खाद्य सहायता कार्यक्रम में कम से कम 6 लाख डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है। अब उन्हें इन आरोपों का सामना करने के लिए अमेरिका में अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। एफबीआई निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “एफबीआई के मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स में शामिल मंजीत सिंह बेदी, जिन्हें सितंबर में भारत में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें वापस अमेरिका भेजा गया है। 64 वर्षीय मंजीत सिंह बेदी अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के केंट शहर के निवासी हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उन्हें संघीय एजेंटों के हवाले किया गया और 14 अक्टूबर की रात उन्हें अमेरिका के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ वॉशिंगटन लाया गया। उनकी शुक्रवार को टैकोमा स्थित अमेरिकी जिला अदालत में पेशी होनी है। काश पटेल ने कहा, “एफबीआई सिएटल और अमेरिका तथा भारत की हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का धन्यवाद, जिन्होंने बेदी को वापस लाने में मदद की।” उन्होंने बताया कि विदेशी एजेंसियों के सहयोग से अमेरिका ने पिछले 20 महीनों में 260 से अधिक वांछित आरोपियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है, पिछली इसी तरह की अवधि की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। पटेल ने कहा कि तीन महीने पहले एफबीआई की नई ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची जारी होने के बाद पकड़े गए छह प्रमुख आरोपियों में बेदी भी शामिल हैं। एफबीआई के अनुसार, “अप्रैल में ‘वायर फ्रॉड’ के आरोप तय होने के बाद बेदी भारत भाग गए थे।” न्याय विभाग ने बताया कि 22 अप्रैल को बेदी ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन एक सप्ताह के भीतर भारत चले गए। तीन सितंबर को उनका नाम एफबीआई की मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में जोड़ा गया, जिसके बाद भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी नील फ्लॉयड ने कहा, “मैं एफबीआई और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के काम की सराहना करता हूं, जिन्होंने बेदी को न्याय का सामना करने के लिए अमेरिका वापस लाना सुनिश्चित किया। हम अदालत से अनुरोध करेंगे कि मुकदमे तक उन्हें हिरासत में रखा जाए, क्योंकि उन्होंने पहले ही भागने की इच्छा और क्षमता दोनों दिखा दी हैं।” अभियोग के अनुसार, बेदी द एशियन ग्रोसरी स्टोर नाम की दुकान के मालिक और संचालक थे। यह दुकान फरवरी 2024 में सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (एसएनएपी) के लाभ स्वीकार करने के लिए अधिकृत हुई थी। अभियोजकों का आरोप है कि मार्च 2024 से बेदी ने एसएनएपी लाभ पाने वाले लोगों को उनके इलेक्ट्रॉनिक कार्ड पर मौजूद राशि के बदले नकद पैसे देने शुरू कर दिए। कथित तौर पर वे एक डॉलर के लाभ के बदले केवल 50 सेंट नकद देते थे और बाकी रकम खुद रख लेते थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस तरीके से उन्होंने ऐसे खाद्य उत्पादों के नाम पर कम से कम 6 लाख डॉलर हासिल कर लिए, जो वास्तव में कभी बेचे ही नहीं गए। जून 2025 में इस कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। यदि आरोप साबित होते हैं, तो वायर फ्रॉड और एसएनएपी लाभ धोखाधड़ी दोनों मामलों में अधिकतम 20 साल तक की जेल और 2.5 लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है।
लखनऊ में बाढ़ प्रभावित इलाकों का मंत्री सुरेश खन्ना और मेयर ने किया निरीक्षण, राहत कार्य तेज करने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना और लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। दोनों नेताओं ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और राहत शिविरों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह अत्यधिक बारिश के कारण उत्पन्न हुई एक प्राकृतिक आपदा है, जिसकी वजह से गोमती किनारे के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी है। सरकार ने इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और पीड़ितों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है। मंत्री खन्ना ने नगर निगम की टीम के काम की सराहना करते हुए कहा, “हमारी मेयर, नगर आयुक्त और उनकी पूरी टीम पिछले कई दिनों से लगातार यहां तैनात हैं। वे दिन-रात बाढ़ के असर को कम करने और लोगों के सामने आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने राहत कार्यों में सहयोग कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर के जरिए मदद करने वाली कंपनियों और लोगों का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सरकार इस संकट की घड़ी में प्रभावित सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं, मेयर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि नगर निगम लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय है। उन्होंने कहा, “हम लगातार इस इलाके का दौरा कर रहे हैं और नगर निगम की पूरी टीम यहां मौजूद है। लगभग 20 दिन से हमारे करीब 1,000 कर्मचारी जमीन पर काम कर रहे हैं।” मेयर ने कहा कि बाढ़ के बाद बीमारियों के फैलने का खतरा सबसे बड़ा होता है, इसलिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दवाओं का छिड़काव, कचरा निस्तारण और पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में संपर्क नंबर जारी किए गए हैं और जब भी कोई जरूरतमंद व्यक्ति किसी भी सहायता के लिए कॉल करता है, तो उसे तुरंत राहत सामग्री और जरूरी चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन राहत शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित कर रहा है।
‘खुद को मैनिपुलेट होने मत दीजिए’, ईशा कोप्पिकर ने जेन-जी को दी नसीहत

मुंबई। अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने जेन-जी के लिए एक मैसेज शेयर किया और कहा है कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई पर ध्यान देने, सच्चाई को समझने और देश की तरक्की के लिए क्या सही है, इस बारे में गंभीरता से सोचने की अपील की। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत करते हुए कहा, “‘जेन जी’ के लिए मैं बस यही कहूंगी कि अपने आपको मैनिपुलेट होने मत दीजिए, पढ़ाई में ध्यान दीजिए, फैक्ट को समझें और इस बात पर ध्यान दें कि देश के लिए क्या सही है और क्या गलत। किसी के इमोशन और बहकावे में आकर कुछ भी न करें।” अभिनेत्री ने जोर देते हुए कहा कि जेन जी अपनी शिक्षा को देश के विकास में इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, “आपके माता पिता ने बहुत सोच समझकर आपको शिक्षा दी है। उसका अच्छे से आप इस्तेमाल कीजिए और हमारे देश के विकास के लिए काम आइए, न कि किसी और की बातों में आकर कुछ ऐसा करें, कि आपको बाद में पछतावा हो।” हालांकि, इससे पहले भी अभिनेत्री ने युवाओं को किसी के बहकावे में न आने कि अपील की थी। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करने और एक मजबूत व समझदार भारत के निर्माण में रचनात्मक योगदान देने की बात कही थी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने युवाओं से अपील की थी कि वे बिना सोचे-समझे किसी भी भीड़ का हिस्सा न बनें, बल्कि जिम्मेदार नागरिक के तौर पर एक सही उदाहरण पेश करें। वीडियो में उन्होंने कहा, “मेरी सभी से गुजारिश है कि वे किसी भी विरोध प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके पीछे के पूरे तथ्यों को अच्छी तरह समझ लें। केवल सोशल मीडिया के नैरेटिव या भावनाओं में बहकर कोई फैसला न लें। खुद रिसर्च करें और सवाल पूछें।” दरअसल, मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ इंडिया ब्लॉक, आम आदमी पार्टी और सीजेपी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सीएमआरएल-एक्सलॉजिक केस में बढ़ी विजयन की मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी सबकी निगाहें

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। केरल हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और उनका परिवार शुक्रवार को शीर्ष अदालत का रुख करने जा रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई का असर न सिर्फ दिग्गज सीपीआई (एम) नेता पर, बल्कि अपनी सबसे बड़ी चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही पार्टी पर भी पड़ेगा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) दो अलग-अलग मामलों की जांच कर रहे हैं, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट विजयन के लिए अगला कानूनी मोर्चा बन गया है। जांच में कोई भी तेजी सीपीआई (एम) के राजनीतिक संकट को और गहरा कर सकती है, जो अपने गठन के बाद पहली बार हर राज्य में सत्ता से बाहर है। विजयन अपनी बेटी टी. वीणा और उनकी अब बंद हो चुकी आईटी फर्म ‘एक्सलॉजिक’ से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पहले आरोपी हैं। हवाला लेनदेन से जुड़े एक अन्य मामले में पूर्व मंत्री और सीपीआई (एम) विधायक पी. ए. मोहम्मद रियाज, जो विजयन के दामाद हैं, पहले आरोपी हैं। इस बीच, सीपीआई (एम) नेतृत्व ने विजयन के पीछे एकजुटता दिखाई है और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से उनके इस्तीफे से इनकार कर दिया है। इस फैसले से राजनीतिक नैतिकता पर पार्टी के रुख पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वह खुद दूसरी पार्टियों के नेताओं से भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही की मांग करती रही है। यह विवाद पूर्व सीपीआई (एम) महासचिव प्रकाश करात के एसएनसी-लवलिन मामले में विजयन के बचाव की याद दिलाता है। करात ने तब तर्क दिया था कि विजयन को पार्टी के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है क्योंकि तब उनके पास कोई सरकारी पद नहीं था। यह कानूनी झटका ऐसे समय आया है, जब पार्टी की जिला समितियां अप्रैल 2026 में हुई चुनावी हार के कारणों की समीक्षा कर रही हैं। वाम मोर्चे की विधानसभा में सीटें 99 से घटकर 35 रह गईं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीतीं और भाजपा को 3 सीटें मिलीं।
राम मंदिर का बचा हुआ निर्माण कार्य 15 नवंबर तक पूरा हो जाएगा: नृपेंद्र मिश्र

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने शुक्रवार को कहा कि श्रीराम मंदिर परिसर में लगभग सारा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बचा हुआ काम 15 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। पत्रकारों से बात करते हुए मिश्रा ने आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं दी और मंदिर के विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिसर के भीतर लगभग 150 निर्माण कार्यों में से 148 पूरे हो चुके हैं और उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी एल एंड टी को पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स ट्रस्ट को सौंपने थे। इसके साथ ही उन्हें संबंधित रिकॉर्ड, ड्राइंग, डिजाइन और वित्तीय दस्तावेज भी सौंपने थे। ट्रस्ट के प्रोजेक्ट इंजीनियर इन कार्यों का निरीक्षण करते हैं और उसके बाद ही उन्हें सौंपे जाने की मंजूरी देते हैं। मिश्रा ने बताया, “इन 150 कार्यों में से 148 पूरे हो चुके हैं और सौंप दिए गए हैं। अब केवल ‘परकोटा’ (मंदिर की बाहरी घेराबंदी वाली संरचना) का मुख्य निर्माण कार्य सौंपा जाना बाकी है।” देरी का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि परकोटा की छत पर ‘वाटर ट्रीटमेंट’ का काम अभी बाकी है। पिछले तीन दिनों से अयोध्या में लगातार हो रही बारिश के कारण निर्माण कार्य की गति धीमी हो गई है, जिससे काम में देरी हुई है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि बचा हुआ काम 15 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल मंदिर और परकोटा में लाइटिंग का काम चल रहा है। यह 15 नवंबर तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हाल ही में साइट पर जो काम होते दिखे हैं, वे मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य का ही हिस्सा हैं। मिश्रा ने अयोध्या की अन्य परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘शहीद स्मारक’ का काम पूरा हो चुका है और गुरुवार को उन्होंने वहां जाकर निरीक्षण भी किया। अब वहां केवल बागवानी और लैंडस्केपिंग से जुड़ा कुछ छोटा-मोटा काम ही बचा है। उन्होंने बताया कि माधवाचार्य गेट का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कुछ राजकीय निर्माण निगम के ठेकेदारों ने जिस गति से कार्य करना था, वो अभी नहीं कर पाए हैं। कुछ कठिनाइयां हैं, हम उन्हें देखने जा रहे हैं। स्तंभ के लोकापर्ण की तिथि ट्रस्ट को तय करनी है। समिति के अध्यक्ष की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में आई है, जब राम मंदिर परिसर में बाकी बचे बुनियादी ढांचे, फिनिशिंग और लाइटिंग का काम चल रहा है। इन सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए 15 नवंबर की समय-सीमा तय की गई है।
भाजपा ने नगांव लोकसभा उपचुनाव में धांधली की, असली विजेता अजमल थे : अमीनुल इस्लाम

गुवाहाटी। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के नेता अमीनुल इस्लाम ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नगांव लोकसभा उपचुनाव में अपने उम्मीदवार देवाशीष शर्मा की जीत पक्की करने के लिए वोटों में हेरफेर की। उन्होंने दावा किया कि मतदाता असल में एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को चुनना चाहते थे। इस्लाम ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय एजेंटों के साथ मिलकर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए फर्जी वोटिंग कराई। उन्होंने दावा किया कि इन गड़बड़ियों में एक ही पोलिंग स्टेशन पर 16 से 20 एजेंटों को तैनात करना और असम के बाहर काम कर रहे लोगों के नाम पर वोट डालना शामिल था। इस्लाम ने आगे आरोप लगाया कि राज्य के बाहर काम कर रहे मुसलमानों के एक से दो लाख वोट भाजपा उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी तरीके से डाले गए। इस्लाम ने आरोप लगाया, “लोगों ने मौलाना बदरुद्दीन अजमल को अपना सांसद चुना था, लेकिन भाजपा ने जबरदस्ती देवाशीष शर्मा की जीत सुनिश्चित कर दी।” एआईयूडीएफ नेता ने समागुरी में अजमल के साथ एक धन्यवाद रैली में हिस्सा लेते हुए ये आरोप लगाए, जहां नेताओं ने अपना समर्थन देने के लिए मतदाताओं का आभार जताया। हालांकि, चुनाव में हेराफेरी के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और रिपोर्ट में दिए गए बयानों में इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है। ये दावे नगांव लोकसभा उपचुनाव के नतीजों को लेकर एआईयूडीएफ और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच सामने आए हैं, जिसमें विपक्षी पार्टी ने शर्मा की जीत के हालात पर सवाल उठाए हैं। 6 अक्टूबर को हुए नगांव लोकसभा उपचुनाव में भाजपा की निर्णायक जीत हुई। भाजपा उम्मीदवार देबाशीष शर्मा ने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 1,42,224 वोटों से हराया। शर्मा को 7,14,349 वोट मिले, जबकि अजमल को 5,72,125 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस उम्मीदवार सिबमोनी बोरा 1,29,492 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह उपचुनाव तब कराना पड़ा, जब कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
पंजाब: परविंदर झोटा के अंतिम संस्कार में देरी, परिवार और प्रशासन के बीच नहीं बनी सहमति, मानसा में जारी धरना

मानसा। पंजाब के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके परिजनों और जिला प्रशासन के बीच बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बनी है। परिजन मामले की सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। मांगें नहीं माने जाने के कारण परविंदर सिंह के परिजन और उनके समर्थनों का मानसा में धरना जारी है। परविंदर सिंह के समर्थक और परिजन मानसा के सिविल अस्पताल के बाहर धरना दे रहे हैं। मानसा डिप्टी कमिश्नर की रेजिडेंसी के पास तिकोनी चौक पर भी धरना प्रदर्शन जारी है। परविंदर को इंसाफ के लिए बनाई गई कमेटी की मांग है कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और पोस्टमार्टम पीजीआई के डॉक्टरों के पैनल की टीम से करवाया जाए। इंसाफ कमेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से मांग की है कि परविंदर सिंह को शहीद का दर्जा दिया जाए। वहीं, परविंदर की ओर से बनाई गई एंटी ड्रग टास्क फोर्स टीम के सदस्यों की मांग है कि जहां पर कत्ल किया गया, वहां दुकान के पास परविंदर सिंह की प्रतिमा लगाई जाए। एक्टिविस्ट अवतार सिंह ने आईएएनएस से कहा, “चौथे दिन धरना शुरू हो चुका है। कमेटी की मांग है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन अभी तक कोई इस्तीफा नहीं हुआ है। इस्तीफा होने के बाद ही परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा।” उधर, शुक्रवार को परविंदर सिंह के समर्थन में तिकोनी चौक पर जारी धरना प्रदर्शन में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गढ़गाज शामिल हैं। उन्होंने कहा, “नशा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। जो कोई भी नशे की लत का शिकार होता है, वह प्रभावित होता है और ‘चिट्टा’ एक बहुत बड़ी समस्या है।” जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गाज ने कहा, “परविंदर सिंह की आवाज हर घर तक पहुंच रही थी, जिसमें वे लोगों से अपने बच्चों को मेडिकल और सिंथेटिक नशीले पदार्थों से बचाने की अपील कर रहे थे। उनके परिवार ने मुझे बताया कि नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दुकानदार के यहां कई बार छापेमारी हुई और नशीले पदार्थ जब्त भी किए गए, फिर भी वह उन्हें बेचना जारी रखते थे। परिवार का कहना था कि परविंदर सिंह छह-सात दिनों से इस मुद्दे को उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब परविंदर सिंह को गोली का शिकार बनाया गया।” उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा लगातार बढ़ रहा है। नौजवान नशे की वजह से अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जंग लड़ने वाले परविंदर सिंह नौजवानों को बचाते हुए शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि नशे को खत्म करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।