जेएनयू यौन उत्पीड़न मामला: एफआईआर में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम शामिल

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आने के कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार (11 अक्टूबर) को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में कांग्रेस सांसद और बर्खास्त जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम का नाम शामिल है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में कम से कम 11 महिला छात्रों ने अकोइजाम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि उन्होंने छात्रों को बैठकों या समारोहों के बहाने अपने कैंपस आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कक्षा में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां की। बताया गया है कि आरोपों और शिकायतों की जांच विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें बर्खास्त करने के फैसले से पहले की गई थी। इससे पहले रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए कांग्रेस, विशेष रूप से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सवाल किया था और पूछा था कि क्या एलओपी की ‘पितृसत्ता को नष्ट करो’ वाली टिप्पणी एक महज राजनीतिक बयानबाजी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि जब हम मां शैलपुत्री की पूजा कर रहे हैं, मैं आपके सामने इस देश की बेटियों से संबंधित एक बहुत ही गंभीर मुद्दा ला रही हूं। यौन दुर्व्यवहार के आरोप में जेएनयू ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। 2024 में, एक या दो नहीं बल्कि 11 छात्रों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी। जेएनयू ने पॉश अधिनियम के तहत एक आंतरिक समिति का गठन किया, जिसने विस्तृत जांच के बाद अकोइजाम को तुरंत बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस सांसद के खिलाफ आरोपों का हवाला देते हुए बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की पिछली ‘पितृसत्ता को तोड़ो’ टिप्पणी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि क्या ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ आपके लिए केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है? ऐसा लगता है कि यह घटना कांग्रेस के पाखंड को दर्शा रही है। उनके लिए, नारीवाद एक हैशटैग से शुरू होता है और जब जवाबदेही की बात आती है तो समाप्त हो जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस आलाकमान-चाहे वह राहुल गांधी हों, प्रियंका गांधी हों, मल्लिकार्जुन खड़गे हों या सोनिया गांधी हों, उन्होंने इस पर एक भी शब्द नहीं बोला है। इस घटना पर चुप रहने का मतलब है कि वे कहीं न कहीं कथित यौन शिकारी के आचरण का समर्थन कर रहे हैं। विपक्ष के नेता से सवाल करते हुए भाजपा सांसद ने पूछा कि क्या महिलाओं का सम्मान सिर्फ एक नारा होने तक ही सीमित है और यह कांग्रेस पार्टी की नीति नहीं है।
कई चुनावों में हुई वोट चोरी; ज्ञानेश कुमार को जितना बचाएगी सरकार, उतने बड़े होंगे सवाल : राहुल गांधी

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, क्योंकि जिन संस्थाओं पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे अपना कर्तव्य नहीं निभा रही हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘इंडी गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च’ से पहले पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और लोकसभा चुनावों में वोटों की चोरी हुई है। उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने, प्रदर्शनकारियों को राजधानी पहुंचने से रोकने और पुलिस बल की भारी तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भाग लेना उनका काम है, न कि उस व्यवस्था की रक्षा करना। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, मैं यहां जो कर रहा हूं, वह मेरा काम नहीं है। मेरा काम लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिस्सा लेना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। यह भारत की संस्थाओं का काम है लेकिन वे ऐसा नहीं कर रही हैं। इसलिए मुझे यह करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि भारत में एक के बाद एक राज्य विधानसभाओं और लोकसभा चुनावों में वोटों की चोरी हुई है। उनकी ओर से इस मामले में विस्तृत प्रस्तुति तैयार की जा रही है, जिसे पूरा होने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। प्रस्तुति सामने आने के बाद लोगों को चुनावों में अनियमितताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी। राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ पिछले चार-पांच दिनों से दिल्ली में जन-आंदोलन का माहौल बन रहा है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर पिछले 10 से 13 वर्षों से विरोध जारी है लेकिन अब यह आंदोलन ठोस रूप ले रहा है। उन्होंने सवाल किया कि देश की राजधानी दिल्ली को किले में क्यों तब्दील कर दिया गया है और लोगों को वहां पहुंचने से क्यों रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को ट्रेनों और बसों से उतारा जा रहा है तथा उन्हें दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है। राजधानी में जगह-जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 20,000 से 30,000 जवान सड़कों पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इसे शक्ति प्रदर्शन समझ सकती है लेकिन विपक्ष की रणनीति अलग है। विपक्ष चाहता है कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात रहें, ताकि देश के सामने यह सवाल उठे कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से इतना डर क्यों है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करके बड़ी राजनीतिक गलती कर रही है, क्योंकि इससे विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग को लेकर अपने सवाल देश के सामने रखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को जितनी अधिक सुरक्षा दी जाएगी, विपक्ष के लिए उनके पीछे मौजूद राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही के सवालों को उठाना उतना ही आसान होगा। उनका उद्देश्य इस मामले को जनता के सामने लाना और कथित वोट चोरी को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मियों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि युवाओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के निर्देश क्यों दिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सख्ती बरती जा रही है जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्यों को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कुछ लोग महिलाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कई जवानों से उन्हें समर्थन मिलने की जानकारी मिली है। करीब 50 प्रतिशत पुलिसकर्मी उनके आंदोलन को सही बता रहे हैं और इसे जारी रखने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और देश की जनता एक तरफ हैं जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कुछ सदस्य हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे और मैंने सीजेआई को पत्र लिखकर लोकतंत्र की हत्या और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई। सीजेआई ने हमें जवाब दिया और याचिका दायर करने का निर्देश दिया। इंडी गठबंधन के नेता और मैं साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और यह याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि लगता है कि कुछ भ्रम है जिसे शायद सरकार समझ नहीं पा रही है। यह कहा गया था कि सीजेआई विपक्ष के नेताओं से नहीं मिलेंगे। यह बात मायने नहीं रखती। सीजेआई ने जवाब दिया है और हमें याचिका दायर करने का निर्देश दिया है, साथ ही कहा है कि हम अपनी चिंताएं सुप्रीम कोर्ट के सामने रखें और कानूनी प्रक्रिया शुरू करें। सरकार का रुख चाहे जो भी हो, मैं आपको बताना चाहता हूं कि करोड़ों युवा लोकतंत्र और संविधान को बचाना चाहते हैं।
हम सीजेआई से मिलना चाहते थे, उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया: संजय राउत

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। राउत ने कहा कि अगर दरवाजे खुले हैं तो इंडिया ब्लॉक के नेताओं से मिलने से इनकार क्यों किया। एसआईआर और अन्य मुद्दों को लेकर सोमवार को इंडिया ब्लॉक के मार्च पर राउत ने कहा कि इंडी गठबंधन सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा। हम पैदल मार्च करेंगे और गठबंधन की सभी सहयोगी पार्टियां और नेता इसमें शामिल होंगे। हमने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का अनुरोध किया था। मुझे बताया गया था कि आज शाम करीब 4 या 5 बजे बैठक तय की गई थी, लेकिन उसे अचानक रद्द कर दिया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें विपक्ष के नेता या राजनीतिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अधिकार नहीं है। इस बात ने देश के लोगों को हैरान कर दिया है। हमने यह भी देखा है कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां जज पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्री हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के स्वागत में डिनर आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र, संविधान खतरे में है, जनता सड़क पर उतर रही है और लगातार वोट चोरी, इलेक्शन चोरी का मुद्दा उठा रही है। जब हमारे सामने सुनवाई के सारे दरवाजे बंद हो गए तो हम सीजेआई के दरबार में आना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने तो अपना दरवाजा ही बंद कर लिया है। इतिहास हमेशा याद किया जाएगा जब देश संकट में था, तो सुप्रीम कोर्ट ने जनता के लिए दरवाजा बंद कर लिया था। सीजेआई को हमारी बात सुननी चाहिए, हम तो 24 घंटे भी नहीं मांग रहे हैं, मुलाकात के लिए 24 मिनट ही दे दीजिए। आईएएनएस से बातचीत में राउत ने कहा कि हम लोगों ने सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। देश में जिस प्रकार से संविधान खत्म किया जा रहा है, लोकतंत्र की हत्या हो रही है, और वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम हटाए जा रहे हैं, पूरा देश इस चीज से अवगत है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सरकार के लिए काम कर रहे हैं। इसीलिए हम सीजेआई से मिलना चाहते हैं, लेकिन, वे मिलना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई के शिवाजी पार्क में भी आंदोलन शुरू हो रहा है, इसे रोक कर दिखाएं।
बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में बांग्लादेश की भागीदारी तय

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की बैठक इस सप्ताह होने जा रही है। बैठक में नेपाल की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुंग शामिल होने की खबर है, जबकि बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ सचिव मंजूर मोर्शेद चौधरी करेंगे। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, गुरुंग तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। सत्ता संभालने के बाद उनकी ये पहली विदेश यात्रा है। नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक वो 12 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे और विभिन्न मंत्री स्तरीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे। मीटिंग से जुड़े एक अधिकारी ने दैनिक को बताया कि बैठक में सदस्य देशों के बीच कई क्रॉस-कटिंग सिक्योरिटी मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि इन मुद्दों की सिफारिश बिम्सटेक के गृह सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अलग-अलग तारीखों पर हुई बैठकों में की गई थी। सिक्योरिटी कोऑपरेशन बिम्सटेक के रीजनल एजेंडा का एक जरूरी हिस्सा रहा है। अगस्त 2018 में काठमांडू में हुए चौथे शिखर सम्मेलन में, नेताओं ने लॉ एनफोर्समेंट, इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का अपना इरादा जाहिर किया था। नेताओं ने काउंटरटेररिज्म और ट्रांसनेशनल क्राइम पर सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक जारी रखने का भी फैसला किया। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, मंत्रियों की बैठक से पहले बिम्सटेक गृह सचिव की बैठक होगी। बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) की बैठक 13 अक्टूबर को भारत में आयोजित की जा रही है। सात सदस्यों वाले क्षेत्रीय समूह के गृह मंत्रियों की यह पहली बैठक है। गृह मंत्रियों की मीटिंग 1997 में रीजनल ग्रुप बनने के बाद पहली बार हो रही है, और इसका आयोजन राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में किया गया है। वहीं, बांग्लादेश की ओर से मंजूर मोर्शेद चौधरी तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी यूएनबी ने इसकी जानकारी दी। बैठक में सदस्य देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबले और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, संपर्क और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
समान वेतन और स्थायी नौकरी की मांग को लेकर एएनएम कर्मचारियों ने ब्रजेश पाठक के घर का किया घेराव

लखनऊ। एएनएम महिला कर्मचारियों ने सोमवार को उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। एएनएम कर्मचारियों की ओर से समान काम के लिए समान वेतन और पक्की नौकरी की मांग की गई। उनका आरोप है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में 10 हजार रुपए प्रति महीने की सैलरी पर काम कर रही हैं। आईएएनएस से बातचीत करते हुए एएनएम आरती वर्मा ने कहा, “इको गार्डन में जब हमारी आवाज नहीं सुनी गई तो हम लोग अपनी मांगें लेकर उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर आए हैं। हम लोगों की दो ही मांगें (समान कार्य, समान वेचन और स्थाई नौकरी) हैं। हम लोगों की ओर से धरना देते आज 22 दिन हो गए हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हम लोगों को मजबूर होकर घेराव के लिए यहां आना पड़ा है।” एएनएम आरती वर्मा ने कहा, “हम लोगों को 10 हजार रुपए प्रति महीना वेतन मिलता है। कोई बताए कि 10 हजार रुपए में क्या घर का खर्च चल सकता है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि 10 हजार में कुछ होने वाला नहीं है। हम लोगों की मांग हैं कि जितना वेतन परमानेंट वालों का है, उतना ही हमारा कर दें। परमानेंट वालों के बराबर ही हम लोग भी काम करते हैं। हम लोग अपनी जायज मांगों को लेकर यहां आए हैं। हमारी कोई सुन ही नहीं रहा है।” उन्होंने कहा, “सूबे के 75 जिलों से एएनएम कर्मचारी आई हैं। कुछ महिलाएं तो 15-20 वर्षों से काम कर रही हैं, अभी भी वे संविदा पर ही हैं। क्या उनको परमानेंट नहीं कर देना चाहिए था? एएनएम कर्मचारी मंजिला गौतम ने कहा, “हम लोगों को प्रदर्शन इसलिए करना पड़ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री पहचानते ही नहीं। एएनएम को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी बताया जाता है और उन्हीं को कह रहे हैं कि हम जानते नहीं। अगर वे स्वास्थ्य विभाग के मंत्री होकर नहीं जान रहे हैं तो हम लोगों को कौन जानेगा? हम लोगों की मांग समान काम समान वेतन और नियमितीकरण है। हम लोगों की ओर से बीते 22 दिनों से प्रदर्शन किया जा रहा है, वहां कोई मंत्री नहीं पहुंचा। हमारी आवाज उन तक पहुंचे इसलिए हम लोगों की ओर से उनके आवास का घेराव किया गया है।” एएनएम कर्मचारी रंजना राय ने कहा, “हम लोगों को समान काम का समान वेतन चाहिए और हम लोगों को स्थायी किया जाए।
किसानों का पैसा हजम कर गए सपाई, उसी का श्राप ले डूबा : मुख्यमंत्री योगी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत वितरण को लेकर पिछली सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि किसानों का पैसा हजम करने वाले सपाइयों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। वर्ष 2014 में हुदहुद चक्रवात के दौरान केंद्र सरकार ने 3200 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार किसानों को महज 800 करोड़ रुपये ही बांट सकी। शेष धनराशि किसानों तक नहीं पहुंची। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद इसकी पड़ताल कराई और अलग से धनराशि की व्यवस्था कर किसानों को बकाया मुआवजा दिलाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपाई जाति के नाम पर समाज को बांटते रहे, लेकिन किसानों के खून-पसीने की कमाई पर डकैती डालने से भी नहीं चूके। किसानों का पैसा हजम करने वालों को उन्हीं का श्राप ले डूबा। सोमवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में मुख्यमंत्री योगी ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित प्रदेश के 9,18,091 किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान हस्तांतरित किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने महज आठ से दस दिन में किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया है। इस वर्ष बरसात के दौरान आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब एक हजार करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के शासन में 100 रुपये भेजे जाते थे तो लाभार्थी तक महज 15 रुपये पहुंचते थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इसे स्वीकार किया था। बाकी पैसा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग हजम कर जाते थे। अब जिस किसान को 25 हजार रुपये स्वीकृत होते हैं, उसके खाते में पूरे 25 हजार पहुंचते हैं। न कोई बिचौलिया सेंध लगा सकता है और न किसी प्रकार की कटौती होती है। उन्होंने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर परिवार को 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपये उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। आकाशीय बिजली समेत दुर्घटना के मामलों में पात्र किसान, बटाईदार और उनके परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त आवासों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से 1.20 लाख रुपये अलग से दिए जा रहे हैं। आंशिक मकान क्षति और पशुहानि पर भी सहायता मिलेगी। पूर्व में 1,29,326 किसानों को फसल क्षति के लिए करीब 78 करोड़ रुपये तथा जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में 225.93 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से कटान रोकने के कार्य तत्काल शुरू करें। सिंचाई विभाग को पर्याप्त धनराशि दी गई है। पीडब्ल्यूडी, नगर विकास विभाग और विकास प्राधिकरण मौसम साफ होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत शुरू कराएं। आपदा राहत और आवागमन बहाल करने के लिए जितना धन चाहिए, सरकार उपलब्ध कराएगी। आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम और वर्षा मापने के लिए रेन गेज लगाए गए हैं। नागरिकों को मोबाइल पर मौसम संबंधी अलर्ट भी भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में अतिवृष्टि हुई है, वहां 15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का के क्रय केंद्र खोले जाएंगे। अन्य जिलों में सोमवार से खरीद शुरू हो रही है। किसानों की उपज खरीदने की कोई सीमा नहीं होगी। भुगतान सीधे खाते में पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि सरकार 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ कर चुकी है। 16 लाख निजी नलकूपों की बिजली निशुल्क की गई है और 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में आपदा प्रभावित लाभार्थियों को सहायता राशि के प्रतीकात्मक चेक सौंपे। इनमें सदर क्षेत्र की रेशमा देवी, चंदन कुमार पासवान, इंद्रावती, सविता देवी, चुन्नी देवी और सीमा देवी, कैंपियरगंज के बहराइची, बेचन प्रसाद, जोकखन, संपत और परमहंस शामिल रहे। इसके अलावा सदर क्षेत्र के चंद्रप्रकाश द्विवेदी और धरणीधर तथा गोला क्षेत्र के गिरजापति त्रिपाठी, कमलेश, रामदरश, जनार्दन प्रसाद और राणा प्रताप सिंह को भी चेक प्रदान किए गए। सहायता राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों को प्राथमिकता दी है। अब तक कृषि क्षेत्र में 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गन्ना मूल्य 280 से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से नौ वर्षों में 6,125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई है। सांसद रवि किशन ने कहा कि पिछली सरकारों में किसान कर्ज और आर्थिक संकट से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने कर्जमाफी, गन्ना भुगतान और आपदा राहत को प्राथमिकता दी। अब किसानों को सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ता। संकट आने पर सरकार उनके साथ खड़ी रहती है। मुख्यमंत्री योगी ने मिशन शक्ति के छठे चरण के अंतर्गत जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मियों और महिलाओं ने रैली में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
बीएलए ने पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड बोट्स पर हमले की जिम्मेदारी ली, 13 जवानों के मारे जाने का किया दावा

क्वेटा। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान स्थित ग्वादर जिले के तटीय इलाके जिवानी में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की दो नावों पर हमले की जिम्मेदारी ली है। हथियारबंद समूह ने दावा किया कि इस हमले में 13 पाकिस्तानी जवानों की हत्या की जिम्मेदारी ली है। स्थानीय मीडिया ने बीएलए प्रवक्ता जीयंद बलूच की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया कि ग्रुप की मैरीटाइम विंग, हम्माल मैरीटाइम डिफेंस फोर्स (एचएमडीएफ) ने एक साथ दो बड़ी कोस्ट गार्ड बोट पर कोऑर्डिनेटेड हमला किया, जिससे मौके पर ही 13 लोग मारे गए। ग्रुप के आधिकारिक मीडिया चैनल पर जारी दो मिनट के वीडियो में, हथियारबंद लोगों को एक बोट पर देखा जा सकता है। बीएलए ने उनकी पहचान अपनी मैरीटाइम यूनिट, एचएमडीएफ सदस्य के तौर पर की, और दावा किया कि उन्होंने जिवानी के पास पानी में पेट्रोलिंग कर रहे दो पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड वेसल पर हमला करने के लिए मॉडर्न हथियारों से लैस एक बोट का इस्तेमाल किया, द बलूचिस्तान पोस्ट ने रिपोर्ट किया। बयान के मुताबिक, एचएमडीएफ उन कोस्टलाइन की रक्षा करना चाहता है जिन्हें बीएलए ने कब्जा किया हुआ बताया है, साथ ही पाकिस्तानी फोर्स की मैरीटाइम मूवमेंट में रुकावट डालना चाहता है। एचएमडीएफ के बनने को बीएलए की बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताते हुए, जीयंद बलूच ने कहा कि ग्रुप ने बलूच इंडिपेंडेंस मूवमेंट को बढ़ाने और बलूचिस्तान के मैरीटाइम इलाके, कोस्टलाइन और रिसोर्स की रक्षा के लिए 13 अप्रैल, 2026 को ऑफिशियली यूनिट की घोषणा की थी। बीएलए ने कहा कि जिवानी ऑपरेशन पाकिस्तानी कोस्ट गार्ड के खिलाफ एचएमडीएफ का दूसरा मिशन था। अप्रैल की शुरुआत में, ग्रुप ने दावा किया था कि ग्वादर के जिवानी इलाके में अपने पहले समुद्री ऑपरेशन में तीन पाकिस्तानी नेवी के लोग मारे गए, क्योंकि उसने एक नेवल विंग बनाने की घोषणा की थी। बीएलए के मीडिया विंग, हक्कल द्वारा जारी वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुआ और उसमें चार नकाबपोश लड़ाके एक स्पीडबोट पर चढ़ने से पहले समुद्र की ओर बढ़ते हुए दिखाई दिए। वीडियो में समुद्र में लड़ाके एक जहाज की ओर बढ़ते हुए दिखाई दिए, जिसे पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की नाव बताया गया और उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। हमले से पहले लड़ाकों ने कहा, “जब तक बलूच का एक भी बेटा इस जमीन पर रहेगा, हम तुम्हें इस समुद्र या इस जमीन पर नहीं रहने देंगे। हम आज तैयार हैं, हम कल भी तैयार थे, और हम भविष्य में भी तैयार रहेंगे… तुम हर जगह मारे जाओगे।” पाकिस्तानी सेना को चेतावनी देते हुए कि उसका मिलिट्री दायरा अब सिर्फ पहाड़ों और शहरों तक सीमित नहीं है, बीएलए ने कहा, “हमने अब गहरे समुद्र में दुश्मन को निशाना बनाने की पूरी क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें उसके नौसैनिक ठिकाने और संपत्तियां भी शामिल हैं। दुश्मन को नेस्तनाबूद और एक आजाद बलूच देश की बहाली तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
मानवाधिकार संस्थाओं को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो अपनी बात सबसे कम रख पाते हैं: सीजेआई सूर्यकांत

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि मानवाधिकार संस्था की असल पहचान सिर्फ उसके द्वारा निपटाए गए मामलों की संख्या से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि क्या वह उन लोगों की बात सुन पाती है जो अपनी बात रखने में सबसे कम सक्षम हैं। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई कांत ने कहा कि आयोग एक नए विचार से आगे बढ़कर न्याय चाहने वालों के लिए एक भरोसेमंद संस्था बन गया है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरिमा, समानता, आजादी और न्याय की संवैधानिक गारंटी को रोजमर्रा की हकीकत में बदलना जरूरी है। सीजेआई ने कहा, “संस्थाओं को भी लोगों की तरह उनके जन्मदिन पर ही सबसे बेहतर समझा जा सकता है। हम पीछे मुड़कर देखते हैं कि उन्होंने कहां से शुरुआत की थी, हम आसपास देखते हैं कि वे अभी कहां खड़ी हैं और हम आगे देखते हैं कि जिन लोगों की वे सेवा करती हैं, उनके प्रति उनकी क्या जिम्मेदारियां हैं।” एनएचआरसी के पिछले 33 सालों के सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि आयोग ने 24 लाख से अधिक मामले दर्ज किए और 23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया, जिसकी निपटारा दर 98 प्रतिशत से अधिक रही। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “ये आंकड़े सिर्फ संस्था के काम को नहीं दिखाते, बल्कि उन कई मामलों को भी दर्शाते हैं जिनमें गंभीर उल्लंघन को लोगों के सामने लाया गया है।” उन्होंने कहा कि एनएचआरसी की भूमिका उन लोगों के लिए बहुत अहम है जो दूर-दराज के जिलों में रहते हैं और जिनके लिए अदालत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने आयोग को उन संस्थाओं में से एक बताया जो यह सुनिश्चित करती है कि संविधान में किए गए वादे उन लोगों तक पहुंचें जिन्हें उनकी सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने कहा, “अगर संविधान एक वादा है, तो आयोग उसके रखवालों में से एक है। यह उन लोगों की बात सुनता है जो आसानी से अपनी बात नहीं कह पाते और यह बिना किसी के कहे खुद भी कार्रवाई कर सकता है।” सीजेआई ने कहा कि मानवाधिकारों की सुरक्षा का दायरा सिर्फ उल्लंघनों की पहचान करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें जवाबदेही तय करना, प्रभावित लोगों को सार्थक राहत देना और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए बदलाव करना भी शामिल होना चाहिए। हिरासत में यातना और मौत, बंधुआ मजदूरी, सिलिकोसिस जैसी औद्योगिक बीमारियों और हाशिए पर मौजूद समुदायों के अधिकारों से जुड़े मामलों में मानवाधिकारों की शीर्ष संस्था के दखल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे काम उल्लंघनों और सिस्टम की कमियों को दूर करने में संस्थागत दखल की अहमियत को दिखाते हैं। समाज के सबसे कमजोर वर्गों पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर देते हुए सीजेआई ने कहा कि जो अधिकार ताकतवर लोगों के काम तो आता है लेकिन कमजोर लोगों के लिए बेकार साबित होता है, उसे सही मायनों में अधिकार नहीं माना जा सकता। यह बेहतर ब्रांडिंग वाली एक सुविधा है। उन्होंने ऐसे लोगों का जिक्र किया जिनके अधिकारों पर संस्थागत स्तर पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जैसे कि ऐसे विचाराधीन कैदी जो कभी अपने वकीलों से नहीं मिले, बिना दस्तावेजों वाले प्रवासी मजदूर, परिवारों द्वारा छोड़े गए बुज़ुर्ग, मुश्किलों का सामना कर रहे दिव्यांग लोग और ऐसी महिलाएं जिनकी परेशानियां उन्हें सुरक्षा देने वाले सिस्टम की नजर में नहीं आ पातीं। सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित समुदायों के करीब होने के कारण, स्थानीय स्तर पर अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को सुलझाने में राज्य मानवाधिकार आयोगों की भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश में अधिकारों का अनुभव अक्सर राजधानी में नहीं, बल्कि किसी दूरदराज के गांव, किसी खास इलाके या यहां तक कि घर के भीतर होता है।” सीजेआई ने कहा कि जहां राष्ट्रीय आयोग मानक तय कर सकता है और बड़े स्तर के पैटर्न की ओर ध्यान दिला सकता है, वहीं राज्य आयोग अक्सर स्थानीय भाषाओं में शिकायतें सुनने, प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और उन हालात को समझने के लिए बेहतर स्थिति में होते हैं जिनमें अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। सीजेआई कांत ने मानवाधिकारों की सुरक्षा में अलग-अलग संस्थाओं की एक-दूसरे की पूरक जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो तो अदालतों को दखल देना चाहिए, जबकि मानवाधिकार आयोगों को शिकायतों की जांच करनी चाहिए, सिस्टम की कमियों की पहचान करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन चिंताओं पर आम तौर पर ध्यान नहीं दिया जाता, उन पर संस्थागत स्तर पर ध्यान दिया जाए। एनएचआआरसी ने “पानी जीवन का अमृत: पानी के अधिकार के जरिए मानवीय गरिमा को बढ़ावा देना” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ अपना 33वां स्थापना दिवस मनाया। इस सम्मेलन में जल निकायों के संरक्षण और बहाली, तथा सभी के लिए पानी तक सुरक्षित और टिकाऊ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पीने के पानी के स्रोतों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। पानी पर राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ स्थापना दिवस मनाने के लिए एनएचआरसी की सराहना करते हुए सीजेआई ने कहा कि मानवाधिकार केवल अमूर्त सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “वे उतने ही ठोस हैं जितना किसी बच्चे के हाथ में साफ पानी का गिलास और उतने ही जरूरी हैं जितनी उस बच्चे को लगने वाली प्यास।” स्थापना दिवस समारोह में एनएचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन, सदस्य जस्टिस (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी, विजया भारती सयानी और प्रियंक कानूनगो, महासचिव पीयूष गोयल, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य शामिल हुए।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले की भारत ने की निंदा, दो भारतीय लापता

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर हमले की भारत ने कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर सवार 11 में से 9 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जबकि दो लापता हैं। ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार सभी 11 भारतीय सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना की जानकारी साझा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में दो जहाजों पर हमला बेहद निंदनीय है। उन्होंने बताया कि इन हमलों में दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले तुरंत बंद होने चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से समुद्री व्यापार का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने बताया कि जहाज ‘एमटी पेट्रो डॉल्फिन’ पर उस समय 11 भारतीय नाविक सवार थे, जब जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। इनमें से 9 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन दो नाविक अब भी लापता हैं। वहीं, ‘एमटी वाल्थेरा’ पर सवार 11 भारतीय सुरक्षित हैं। जहाज को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार) से निशाना बनाया गया था, लेकिन सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं। इससे पहले से ही तनावपूर्ण हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से व्यापार का सुरक्षित व बिना किसी रुकावट के जारी रहना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।