कोयला आपूर्ति में सुधार से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, 18 मिलियन टन से अधिक स्टॉक उपलब्ध

नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश के कोयला आधारित बिजलीघरों में कोयला भंडार 29 सितंबर 2026 से लगातार 18 मिलियन टन से ऊपर बना हुआ है। मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर में कोयला आपूर्ति मजबूत होने से भंडार में कमी आने की रफ्तार भी काफी धीमी पड़ गई है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, 29 सितंबर 2026 को बिजलीघरों में कोयले का भंडार 18.932 मिलियन टन था, जो 10 अक्टूबर 2026 को 18.205 मिलियन टन दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि बिजलीघरों की दैनिक खपत के मुकाबले कोयला आपूर्ति लगभग बराबर बनी हुई है। मंत्रालय ने कहा कि जिन बिजलीघरों का कोयला स्टॉक संवेदनशील स्तर पर है, उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता के अनुसार विभिन्न संयंत्रों के बीच कोयले का पुनर्वितरण भी किया जा रहा है ताकि बिजली उत्पादन बिना बाधा जारी रहे। अक्टूबर में दो अवसर ऐसे भी रहे जब कोयला भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2 अक्टूबर को स्टॉक में 0.024 मिलियन टन और 10 अक्टूबर को 0.017 मिलियन टन की वृद्धि हुई। सरकार के अनुसार, सितंबर की तुलना में अक्टूबर में भंडार घटने की गति काफी कम हुई है। सितंबर 2026 में पूरे महीने के दौरान कोयला भंडार लगभग 7.28 मिलियन टन घटा था, यानी औसतन 0.24 मिलियन टन प्रतिदिन की कमी आई थी। इसके मुकाबले अक्टूबर के पहले 10 दिनों में कुल मिलाकर केवल 0.56 मिलियन टन की कमी हुई, जो औसतन 0.06 मिलियन टन प्रतिदिन है। इस सुधार का प्रमुख कारण कोयला ढुलाई में तेजी रही है। 1 से 10 अक्टूबर 2026 के दौरान बिजली क्षेत्र के लिए औसतन 469 रेक प्रतिदिन लोड किए गए, जबकि सितंबर में यह औसत 426 रेक प्रतिदिन था। यानी इसमें लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अक्टूबर में दैनिक रेक लोडिंग 447 से 482 रेक के बीच रही। इसके परिणामस्वरूप बिजली क्षेत्र को वास्तविक कोयला आपूर्ति बढ़कर 2.49 मिलियन टन प्रतिदिन हो गई, जबकि सितंबर में यह 2.21 मिलियन टन प्रतिदिन थी। मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर के अधिकांश दिनों में वास्तविक आपूर्ति तय लक्ष्य से अधिक रही और 10 में से 9 दिनों में आपूर्ति योजना से ज्यादा कोयला पहुंचाया गया। कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), एससीसीएल, रेल मंत्रालय और बिजली क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है ताकि कोयले की ढुलाई और आपूर्ति सुचारू बनी रहे तथा ताप बिजलीघरों में पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहे। मंत्रालय ने कोयले के परिवहन में सहयोग के लिए भारतीय रेलवे के प्रयासों और पेशेवर प्रतिबद्धता की भी सराहना की है।
ऑस्ट्रेलिया: सिडनी में सामान्य से 10 डिग्री ज्यादा रहेगा तापमान, आग को लेकर अलर्ट

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और आसपास के इलाकों में भीषण गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया गया। जंगलों में आग लगने के बढ़ते खतरे को देखते हुए पूर्ण अग्नि प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को सिडनी के पश्चिमी हिस्सों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। गर्म और शुष्क मौसम के साथ गरज-चमक वाले तूफानों की आशंका ने आग का खतरा और बढ़ा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य के ग्रामीण अग्निशमन विभाग ने ग्रेटर सिडनी और ग्रेटर हंटर क्षेत्रों में पूर्ण अग्नि प्रतिबंध लागू किया है। इस दौरान खुले में आग जलाने, ठोस ईंधन से चलने वाले बारबेक्यू और ग्राइंडिंग तथा वेल्डिंग जैसी कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। मौसम विभाग के अनुसार यह कई महीनों में सबसे गर्म दिनों में से एक हो सकता है। यदि तापमान 37 डिग्री तक पहुंचता है, तो यह अक्टूबर के इस समय के औसत तापमान से 10 से 11 डिग्री अधिक होगा। सिडनी में इससे पहले फरवरी में इतना अधिक तापमान दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूकैसल के उत्तर से वोलोंगोंग तक के इलाकों में तापमान 34 से 36 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। दोपहर बाद मौसम में बदलाव के साथ तेज और नुकसान पहुंचाने वाली हवाएं चल सकती हैं। न्यू साउथ वेल्स ग्रामीण अग्निशमन सेवा के आयुक्त ट्रेंट कर्टिन ने चेतावनी दी कि राज्य के बड़े हिस्से में गंभीर गरज-चमक वाले तूफान आ सकते हैं, लेकिन इनसे पर्याप्त बारिश होने की संभावना नहीं है। ऐसे में ‘ड्राई लाइटनिंग’ (सूखी आकाशीय बिजली) गिरने से आग लगने का खतरा बना हुआ है। सूखी बिजली उस स्थिति को कहा जाता है जब गरज-चमक वाले बादलों से बिजली गिरती है, लेकिन बारिश जमीन तक नहीं पहुंच पाती है या इतनी कम होती है कि आग बुझाने में मदद नहीं कर पाती। ऐसी परिस्थितियों में बिजली गिरने से जंगलों और घास के मैदानों में आग भड़क सकती है। कर्टिन ने लोगों से खुले स्थानों पर आग या ज्वाला पैदा करने वाली गतिविधियों से बचने की अपील की। उन्होंने बताया कि अनुकूल परिस्थितियों के कारण इस साल अग्निशमन विभाग जंगलों में आग का खतरा कम करने के लिए पहले के वर्षों की तुलना में अधिक नियंत्रित आग प्रबंधन गतिविधियां कर पाया है। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया की संघीय आपातकालीन प्रबंधन मंत्री क्रिस्टी मैकबेन ने ऑसअलर्ट आपातकालीन चेतावनी प्रणाली के विस्तार पर जोर दिया। इस प्रणाली के तहत आपात स्थिति में प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद संगत मोबाइल फोन पर अलार्म बजता है और संदेश भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल विक्टोरिया और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया ने इस प्रणाली को अपनाया है। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में सितंबर के रिकॉर्ड गर्म महीनों में से एक रहने के बाद सामने आया है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में देश के सभी राज्यों का औसत तापमान अपने पांच सबसे गर्म सितंबर महीनों में शामिल रहा।
हर मिनट 4 महिलाओं को हो रहा ब्रेस्ट कैंसर, बचाव के लिए रोजमर्रा की इन आदतों में करें सुधार

नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर आज दुनियाभर में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक बड़ी चिंता बन चुका है। हर मिनट 4 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलता है जबकि हर मिनट एक महिला की इस बीमारी से मौत हो जाती है। इस बीमारी के मामले लगातार लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। यही वजह है कि अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के जोखिम, बचाव और समय पर पहचान के महत्व के बारे में बताया जा सके। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें स्तन की असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। इसकी शुरुआत आमतौर पर दूध बनाने वाले लोब्यूल्स या दूध की नलिकाओं से होती है। अगर समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज न हो, तो कैंसर आसपास के ऊतकों, लिम्फ नोड्स और शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकता है। ऐसी स्थिति में बीमारी गंभीर और जानलेवा हो सकती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अगर ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो इलाज के बेहतर नतीजे मिलने और मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में अनुमानित 24 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला और करीब 6 लाख 94 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के लगभग हर देश में महिलाओं को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करने के लिए कुछ जरूरी आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी है। सबसे पहले धूम्रपान से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। धूम्रपान सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदायक है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसलिए सिगरेट, बीड़ी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाना बेहतर है। इसके साथ ही शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। रोजाना टहलना, योग करना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। स्तन में नई गांठ, स्तन के आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या निप्पल से असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच कराना जरूरी है। किसी भी उम्र में ऐसे बदलावों को अनदेखा न करें।
बिहार: थाने में होमगार्ड जवान की गोली लगने से मौत, जांच में जुटी पुलिस

आरा। बिहार के भोजपुर जिले में संदेश थाना परिसर में रविवार रात गोली लगने से 25 वर्षीय होमगार्ड जवान की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, गोली सहकर्मी की सर्विस राइफल से चली थी। पुलिस ने राइफल बरामद कर ली है और घटना को लेकर हादसा तथा हत्या, दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है। मृतक की पहचान सहार थाना क्षेत्र के गुलजारपुर गांव निवासी मोनल कुमार राय के रूप में हुई है। बताया गया कि रविवार रात करीब 10 बजे संदेश थाना परिसर में गोली चलने की घटना हुई। गोली लगने के बाद जवान को इलाज के लिए ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने बताया कि जवान की मौत गोली लगने से हुई है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और एफएसएल की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराई गई और उसकी वीडियोग्राफी भी की गई है। एसपी ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गोली गलती से चली थी या जानबूझकर फायर किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आएगी। उन्होंने कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, जिस जवान की सर्विस राइफल से गोली चली थी, उसकी राइफल बरामद कर ली गई है। घटना के बाद वह जवान कुछ देर तक थाना परिसर में मौजूद था, लेकिन बाद में वहां से चला गया। पुलिस उसके परिजनों के संपर्क में है और उसके सामने आने के बाद उसका पक्ष भी लिया जाएगा। परिजनों की ओर से घटना को हत्या बताए जाने के सवाल पर एसपी ने कहा कि यह जांच का विषय है कि मामला हत्या का है या दुर्घटनावश गोली चलने का। एसपी ने कहा कि मृतक के परिवार को होमगार्ड के प्रावधानों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। तत्काल सहायता योजना के तहत राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा आश्रितों को दो वर्ष तक दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। ऑन-ड्यूटी मृत्यु पर मिलने वाले अन्य मुआवजे और सुविधाओं का लाभ भी नियमानुसार परिजनों को दिया जाएगा।
अराजकता से बाज आए कांग्रेस, वरना जो बचा है वह भी गंवा देगी : सीएम योगी

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उसे देश में अराजकता का पर्याय बताया है। उन्होंने चेताया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए देश में अराजकता फैलाने से बाज नहीं आई तो जनता उसका बचा-खुचा राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर देगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी गलतियों से सबक लेने के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रही है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि देश उसे बार-बार क्यों ठुकरा रहा है। भारत की जनता लोकतांत्रिक दृष्टि से जागरूक है। वह अराजक और अलोकतांत्रिक आचरण को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। सोमवार को मीडिया से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने गैर-जिम्मेदार राजनीतिक आचरण से देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया है। पहले देश के भीतर पहचान का संकट खड़ा किया और फिर अपने भ्रष्ट मंसूबों के कारण जनता का विश्वास खो दिया। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का रवैया नहीं बदला। जनता से लगातार मिल रही अस्वीकृति के कारणों पर विचार करने के बजाय कांग्रेस चुनी हुई सरकारों के खिलाफ अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय स्वयं के आचरण पर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के सिमटते जनाधार का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 41 वर्ष पहले ही कांग्रेस को सत्ता से विदा कर दिया था। वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस प्रदेश में दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। देश के अन्य राज्यों में भी एक-एक कर जनता का कांग्रेस से मोहभंग होता गया। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व यह समझने को तैयार नहीं है कि जनता उसे लगातार क्यों नकार रही है। अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ अस्थिरता का माहौल पैदा करने पर उतारू है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस लगातार अव्यवस्था पैदा कर रही है। आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। कांग्रेस का यह आचरण बताता है कि वह राजनीतिक विरोध और अराजकता के बीच का अंतर भी भूल चुकी है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का स्थान है, लेकिन उसके नाम पर जनता को परेशान करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीत जाएं तो अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हार जाएं तो ईवीएम तथा चुनाव आयोग को दोषी ठहराने लगते हैं। न्यायालय मेरिट के आधार पर फैसला दे तो न्यायपालिका को भी कटघरे में खड़ा करने और धमकाने का प्रयास किया जाता है। अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भी कांग्रेस का यही रवैया है। गाली-गलौज करना, संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और अव्यवस्था फैलाना उसकी राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति इस प्रकार का आचरण उचित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस के लोगों को अपने नेतृत्व की अकर्मण्यता और भ्रष्ट आचरण पर विचार करना चाहिए। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास नहीं रह गया है, उसे बदलने की आवश्यकता है। अपनी राजनीतिक असफलताओं का ठीकरा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोड़ने से कांग्रेस का खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। उन्होंने कांग्रेस को देश में अराजकता फैलाने और जनता तथा युवाओं को गुमराह करने से बाज आने की नसीहत दी। मुख्यमंत्री योगी ने चेताया कि कांग्रेस को देश की जनता की लोकतांत्रिक चेतना को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जनता अराजकता और असंवैधानिक कृत्यों को अधिक दिनों तक सहन नहीं करेगी। कांग्रेस ने अपना रवैया नहीं बदला और इसी प्रकार अलोकतांत्रिक तरीकों से अस्थिरता पैदा करती रही तो राजनीतिक रूप से जो कुछ बचा है, वह भी गंवाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अराजकता छोड़कर मुद्दों और मेरिट के आधार पर चर्चा करनी चाहिए। स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनना ही उसके लिए उचित होगा। यही देश के लोकतंत्र और जनता के हित में भी है।
मध्य प्रदेश के मंडला में रतनजोत के बीज खाने से 7 मासूम बीमार, जिला अस्पताल इलाज जारी

मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के सेमीकोल गांव में 3 से 6 साल की उम्र के सात मासूम बच्चे जहरीले रतनजोत के बीज खाने से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को आनन-फानन में मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। फिलहाल, सभी बच्चों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरव कुमार मरकाम ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि रविवार शाम करीब 5.30 बजे सात बच्चों को अस्पताल लाया गया था। ये सभी बच्चे ग्राम पंचायत सेमीकोल के रहने वाले हैं। परिजनों ने बताया कि बच्चों ने खेलते-खेलते रतनजोत के बीज खा लिए थे। हमने सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया है। सभी को जरूरी ट्रीटमेंट दिया गया है और फिलहाल सभी बच्चे स्टेबल हैं, उनकी स्थिति स्थिर है।” घटना के बारे में बच्चों की मां सुनीता यादव ने बताया कि उनके दो बच्चे – एक लड़का और एक लड़की – और पड़ोस के पांच बच्चे रविवार को छुट्टी होने के कारण गांव में बजरंगबली मंदिर के सामने खेल रहे थे। वहीं पास में ही रतनजोत का पेड़ लगा हुआ है। खेलने के बाद बच्चे घर आए और पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत करने लगे। सुनीता ने बताया, “बच्चे घर आकर कहने लगे कि पेट में दर्द हो रहा है। वे लगातार उल्टी कर रहे थे और दस्त भी शुरू हो गई थी। जब हमने देखा तो तुरंत समझ गए कि उन्होंने पेड़ के पास से कुछ खा लिया है। हम तुरंत सभी बच्चों को लेकर जिला अस्पताल आ गए। यहां डॉक्टरों ने बोतल चढ़ाई है और इलाज शुरू कर दिया है। डॉक्टरों ने कहा है कि बच्चे अब ठीक हैं।” वहीं, मनोज कुमार ने कहा कि रविवार को छुट्टी होने से बच्चे घर पर ही खेल रहे थे। वह खुद खेती-बाड़ी के काम से खेत में गए हुए थे, जहां धान की कटाई चल रही है। उन्हें सूचना मिली कि बच्चे उल्टी-दस्त कर रहे हैं तो वह काम छोड़कर घर पहुंचे। मनोज ने बताया, “जब बच्चे उल्टी कर रहे थे तो उल्टी में बीज के टुकड़े निकले, तब हमें पता चला कि उन्होंने रतनजोत के बीज खाए हैं। गांव में सात बच्चे एक साथ खेल रहे थे और सातों ने ही बीज खा लिए थे।
कच्छ में दुर्लभ सांपों का जोड़ा मिला, वन विभाग ने कहा-दोनों प्रजातियां बहुत कम देखी गईं

कच्छ। वन विभाग के अनुसार, सितंबर में गुजरात के कच्छ जिले में काला डूंगर इलाके में गश्त के दौरान सांपों की दो ऐसी प्रजातियां एक साथ देखी गईं जो बहुत कम दिखाई देती हैं। इनमें से ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ का दिखना राज्य में इस प्रजाति के देखे जाने का शायद दूसरा या तीसरा दर्ज मामला हो सकता है। ये सांप खावड़ा राउंड में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और स्थानीय फॉरेस्ट स्टाफ की शाम की गश्त के दौरान देखे गए। वन विभाग ने बताया कि ये दोनों प्रजातियां कच्छ में बहुत कम देखी गई हैं और कई सालों बाद एक ही जगह पर एक साथ देखी गई हैं। इनमें से एक सांप ‘ब्लैक-हेडेड रॉयल स्नेक’ (‘स्पैलेरोसोफिस एट्रिसेप्स’) था, जो जहरीला नहीं होता है। दूसरा ‘एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक’ (‘सैममोफिस शोकारी’) था, जिसे विभाग ने हल्का जहरीला बताया है। इसका जहर इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता है। सैंड स्नेक लगभग 70 सेंटीमीटर लंबा था। गुजरात में एफ्रो-एशियन सैंड स्नेक का पाया जाना बहुत दुर्लभ माना जाता है।विभाग ने सांपों के जानकार अजय देसाई की किताब ‘सर्प संदर्भ’ का जिक्र किया, जिसमें कच्छ के लोदाई में इस प्रजाति के पहले फोटोग्राफिक रिकॉर्ड का जिक्र है। हाल ही में देखा गया यह सांप गुजरात में दर्ज किया गया दूसरा या तीसरा मामला हो सकता है। हालांकि विभाग ने पक्के रिकॉर्ड की कुल संख्या नहीं बताई। 462 मीटर की ऊंचाई पर स्थित काला डूंगर, कच्छ की सबसे ऊंची चोटी है। विभाग ने इस इलाके में दुर्लभ वन्यजीवों के पाए जाने का कारण जिले के अनोखे इकोसिस्टम और शुष्क जलवायु को बताया है। यह घटना फॉरेस्ट डिवीजन द्वारा सांपों और उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बीच हुई है। कच्छ ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन हर साल 19 सितंबर को ‘विश्व सांप के काटने से जुड़ी जागरूकता दिवस’ के तौर पर मनाता है। इन गतिविधियों में जागरूकता साइनबोर्ड, वन्यजीव जागरूकता कार्यक्रम, प्रकृति शिक्षा शिविर और स्थानीय निवासियों के लिए अन्य पहल शामिल हैं। वन विभाग ने इस इलाके में आने वाले निवासियों और पर्यटकों से दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा में सहयोग करने और सांपों को नुकसान न पहुंचाने या उनके प्राकृतिक आवास को परेशान न करने की अपील की है। विभाग ने कहा कि इलाके की जैव-विविधता के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
गुजरात: थाने में हंगामे को लेकर कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

गांधीनगर। गुजरात पुलिस ने सोमवार को बताया कि गांधीनगर नगर निगम (जीएमसी) चुनाव के प्रचार के दौरान एक पुलिस इंस्पेक्टर के काम में बाधा डालने, पेथापुर पुलिस स्टेशन के अंदर हंगामा करने और समुदायों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश करने के आरोप में कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी और सात अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला रविवार रात को दर्ज किया गया, जिस दिन नगर निकाय चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। पेथापुर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर (पीएसओ) के अनुसार, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एफआईआर के अनुसार, यह घटना 8 अक्टूबर को हुई थी। उस दिन वार्ड 4 से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने और उनके साथियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रचारक को धमकी दी थी। पेथापुर पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ए.एम. देसाई की शिकायत में कहा गया है कि 8 अक्टूबर की रात करीब 10 बजे पेथापुर के संजारी पार्क में परमार और उनके साथियों ने कथित तौर पर भाजपा प्रचारक भावेश भावसार को धमकी दी थी। उन्होंने कथित तौर पर भावसार को उस इलाके में प्रचार न करने या न आने की चेतावनी दी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। एफआईआर में कहा गया है कि इसके बाद परमार और अज्ञात साथियों के खिलाफ पेथापुर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। देसाई का आरोप है कि जब वे अपनी ड्यूटी के तहत शिकायत के सिलसिले में परमार से पूछताछ कर रहे थे, तो मेवाणी और अन्य आरोपियों ने गैर-कानूनी भीड़ बनाई और पुलिस स्टेशन में पूछताछ वाले कमरे में घुस गए। आरोप है कि उन्होंने इंस्पेक्टर को ड्यूटी करने से रोका, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, हंगामा किया और जबरदस्ती परमार का बयान दर्ज होने से रोक दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में मेवाणी और अन्य आरोपी समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन के बाहर बैठ गए और ठाकोर समुदाय का नाम लेकर नारे लगाए। देसाई के अनुसार, उनकी इन हरकतों का मकसद लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काना, पुलिस बल को बदनाम करना, शांति भंग करना और समुदायों के बीच तनाव पैदा करना था। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने या उसे बढ़ावा देने के इरादे से सोशल मीडिया पर फुटेज शेयर किया। इसमें यह भी कहा गया है कि उनकी हरकतों ने गांधीनगर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिफिकेशन का उल्लंघन किया। मेवाणी और सात अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 189(2) और 191(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, उन पर धारा 221, 351(2) और 352 भी लगाई गई हैं, जो सरकारी कर्मचारी को उसके काम में बाधा डालने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करने से जुड़ी हैं। गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लागू की गई है। यह मामला तब दर्ज किया गया जब रविवार को गांधीनगर नगर निगम के 11 वार्डों में मतदान हो रहा था।
भाजपा ने पूछा-क्या रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था छात्रों का प्रदर्शन

मुंबई। भाजपा ने सोमवार को एमपीएससी छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या यह आंदोलन सचमुच छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए था या फिर एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का जरिया था। भाजपा विधायक विक्रम पचपुते ने एमपीएससी की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने छात्रों की चिंताओं को संवेदनशीलता से सुनने और समाधान खोजने के लिए चौथी बार छात्र प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने रोहित पवार को चुनौती दी कि वे स्पष्ट करें कि छात्रों को इन विरोध प्रदर्शनों से आखिरकार क्या हासिल हुआ और किसे राजनीतिक फायदा हुआ। पचपुते ने कहा कि हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने 30 सितंबर को छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली थीं लेकिन एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग सीधे तौर पर राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती थी। अगर मुख्यमंत्री के पास अध्यक्ष को हटाने का सीधा अधिकार होता, तो वे बहुत पहले ही उचित कार्रवाई कर चुके होते। संवैधानिक सीमाएं होने के बावजूद, रोहित पवार ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने मुख्य मांगें पूरी होने के बाद भी आंदोलन जारी रखने के औचित्य पर सवाल उठाया और कहा कि आखिरकार आंदोलन में शामिल असली छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया। कानूनी और संस्थागत पहलुओं का जिक्र करते हुए पचपुते ने समझाया कि राज्य सरकारों के पास एमपीएससी जैसे संवैधानिक निकाय के अध्यक्ष को हटाने की सीधी शक्ति नहीं होती है, क्योंकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एक विशिष्ट प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने संवैधानिक तरीका अपनाया। न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष छुट्टी पर चले गए। अगर 30 सितंबर को ही जांच प्रक्रिया के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया गया होता, तो बाद के टकराव से बचा जा सकता था और इतने बड़े हंगामे की जरूरत ही नहीं पड़ती। पचपुते ने कुछ राजनीतिक हस्तियों पर विरोध प्रदर्शन के मंच पर विभिन्न राजनेताओं, प्रभावशाली लोगों और कलाकारों को बुलाकर इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ध्यान छात्रों की समस्याओं को हल करने से हटकर व्यक्तिगत प्रचार और राजनीतिक लाभ हासिल करने पर केंद्रित हो गया। गलत प्राथमिकताओं के बारे में अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए पचपुते ने छात्रों को एक चेतावनीपूर्ण उदाहरण दिया और उन्हें सलाह दी कि वे अपने करियर और पढ़ाई की कीमत पर राजनीतिक एजेंडे से गुमराह न हों। उन्होंने कहा कि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अधिकारी बनने के लिए तैयारी और संघर्ष करते हैं, न कि राजनीतिक नेताओं के लिए सीढ़ी बनने के लिए। उन्होंने पूछा कि रोहित पवार को अब साफ-साफ जवाब देना चाहिए कि इस विरोध-प्रदर्शन से छात्रों को असल में क्या मिला और इसका राजनीतिक फायदा किसे हुआ। पचपुते की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब पुणे में एमपीएससी के लिए तैयारी कर रहे छात्रों ने अपना 11 दिन का विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया। उन्होंने पेपर लीक के मामले में एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग की थी। राज्य सरकार ने एमपीएससी के कामकाज में संरचनात्मक कमियों की जांच करने और दो महीने के भीतर सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमिटी बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद, सोमवार को सुबह 1.24 बजे एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने एक्स पर घोषणा की कि जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर जा रहे हैं। रोहित पवार ने कहा कि भले ही इसमें देरी हुई लेकिन सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं। हमारी मुख्य मांग इस्तीफे की थी, लेकिन छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हमने आंदोलन को रोकने का फैसला किया। यह जीत छात्रों की एकता की जीत है। रोहित पवार ने माना कि सरकार ने तुरंत इस्तीफा तो नहीं लिया, बल्कि चेयरमैन विवेक भीमन्वार को छुट्टी पर भेज दिया। छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए वे काफी हद तक पीछे हटे। छात्र एक कदम पीछे हटे, लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी। उन्होंने पुणे में तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा दिखाई गई अभूतपूर्व एकजुटता की तारीफ की, साथ ही प्रमोद पाटिल जैसे नेताओं और समर्थकों की भी सराहना की, जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुधार लागू करने के लिए एक सख्त समय-सीमा दी गई है और चेतावनी दी कि जवाबदेही प्राथमिकता बनी रहेगी।
नोएडा के सेक्टर-95 अंडरपास में चार से पांच फीट पानी में फंसी कार, शीशा तोड़कर बाहर निकले लोग

नोएडा। शहर में बारिश के बाद अंडरपास में जलभराव की समस्या एक बार फिर सामने आई है। सोमवार, 12 अक्टूबर को सेक्टर-95 स्थित अंडरपास में चार से पांच फीट तक पानी भर जाने के कारण एक रेनॉल्ट ट्राइबर कार उसमें फंस गई। कार में सवार लोग पानी के बीच फंस गए। स्थिति गंभीर होने पर कार सवारों ने शीशा तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। गनीमत रही कि इस घटना में सभी लोग सुरक्षित बच गए और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद कार को भी रस्सी की मदद से पानी से बाहर निकाला गया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार को थाना फेस-1 क्षेत्र के अंतर्गत डायल-112 के माध्यम से सूचना मिली कि सेक्टर-95 के पास स्थित अंडरपास में बारिश का पानी अधिक भरने के कारण एक कार फंस गई है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस यूनिट को मौके पर भेजा गया। जब दोनों टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, तब तक कार में सवार सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। पुलिस और फायर विभाग की टीम ने इसके बाद बचाव अभियान चलाते हुए कार को भी पानी से बाहर निकलवाया। बताया गया कि कार में सवार लोग गुरुग्राम से बुलंदशहर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सेक्टर-95 अंडरपास में पानी भरा होने के कारण उनकी कार बीच में फंस गई। पानी की गहराई अधिक होने के चलते वाहन को निकालना मुश्किल हो गया था। इसके बाद कार को रस्सी से बांधकर बाहर निकाला गया। सेक्टर-95 अंडरपास में बारिश के बाद जलभराव की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। पूर्व में भी यहां पानी भरने के कारण कई वाहन फंस चुके हैं। इसके बावजूद बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा होने की समस्या वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। इस बार भी कार के पानी में फंसने से बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई थी। अंडरपास में चार से पांच फीट तक पानी भरने की स्थिति में वाहन चालकों के लिए जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऐसे में पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन लेकर आगे बढ़ना खतरनाक साबित हो सकता है। इस घटना में कार सवारों की सूझबूझ और समय रहते बाहर निकलने के कारण सभी की जान बच गई। सेक्टर-95 अंडरपास में बार-बार जलभराव होने की घटनाओं के बाद नोएडा प्राधिकरण की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा होने से वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ सकता है। ऐसे में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।