ओडिशा राज्य निर्वाचन आयोग ने 2027 पंचायत एवं नगर निगम चुनाव की तैयारियों पर सर्वदलीय बैठक की

भुवनेश्वर। ओडिशा राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने मंगलवार को आगामी पंचायत एवं नगर निगम चुनाव-2027 के लिए पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने के संबंध में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुसूदन पाढ़ी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और आगामी चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने के संबंध में अपने विचार और सुझाव साझा किए। बैठक के दौरान, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को 26 अक्टूबर से राज्य भर में शुरू होने वाले घर-घर सर्वेक्षण के बारे में जानकारी दी गई। आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस सर्वेक्षण के माध्यम से मतदाता सूची को अधिक सटीक, अपडेट और त्रुटिरहित बनाया जाएगा। इसमें यह भी कहा गया है कि इससे सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सही ढंग से शामिल करने और अपात्र, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं से संबंधित जानकारी के सत्यापन में भी मदद मिलेगी। ओडिशा के एसईसी ने सभी राजनीतिक दलों से घर-घर सर्वेक्षण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया। विशेष रूप से, आयोग ने प्रत्येक राजनीतिक दल से राज्य भर के सभी मतदान केंद्रों पर अपने बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) तैनात करने और सर्वेक्षण के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है। राजनीतिक दलों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे 15 अक्टूबर तक अपने बीएलए का विवरण सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) को जमा करें। ग्रामीण क्षेत्रों में, विवरण संबंधित बीडीओ को, जबकि राष्ट्रीय निर्वाचन आयोगों और नगरपालिकाओं में कार्यकारी अधिकारियों को जमा करना होगा। नगर निगमों में विवरण उपायुक्तों/सहायक आयुक्तों को जमा करना होगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुसूदन पाधी ने कहा कि एक सटीक और त्रुटिरहित मतदाता सूची एक स्वस्थ और पारदर्शी चुनावी प्रणाली की नींव है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने के हर चरण में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी की भागीदारी को महत्व दिया जाएगा। पाधी ने यह भी आशा व्यक्त की कि राजनीतिक दलों के सक्रिय सहयोग से मतदाता सूची को और अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाया जा सकता है।
पंजाब में सीबीआई जांच पर सियासत तेज, भाजपा ने कहा- केंद्र ने नहीं भेजी सीबीआई, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई एफआईआर

चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी और अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज करने और छापेमारी की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा महासचिव तरुण चुघ और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने इस मामले में आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है और स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार ने पंजाब में सीबीआई नहीं भेजी है। तरुण चुघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भगवंत मान, तथ्य स्पष्ट हैं। भारत सरकार की ओर से पंजाब में सीबीआई नहीं भेजी गई है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीबीआई को मामला दर्ज करने और ईडी द्वारा उसके समक्ष रखी गई सामग्री के आधार पर आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।” चुघ ने बताया कि जांच के तहत आरोपों में आईएएस/आईपीएस पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत निर्णय, निविदा शर्तों, लाइसेंस, सीएलयू मामले, संपत्ति विवाद और राजस्व विभाग के मामलों में कथित हस्तक्षेप शामिल हैं। उन्होंने कहा, “राजनीतिक आरोपों के बजाय जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने दें। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से यह भी पता चल जाएगा। पंजाब पारदर्शिता, तथ्य और जवाबदेही का हकदार है। सबूतों को बोलने दीजिए।” वहीं, भाजपा नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला। बिट्टू ने लिखा, “पंजाब भर में खुद को ‘ईमानदार सीएम’ बताने वाले होर्डिंग लगाने वाले भगवंत मान की असलियत आज सामने आ गई है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के सीधे आदेशों और ईडी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए, सीबीआई ने पंजाब सीएम के ओएसडी और 5 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और 8 जगहों पर एक साथ छापेमारी की है।” बिट्टू ने आरोप लगाया कि ईमानदारी के इन होर्डिंग के पीछे बड़े पैमाने पर संस्थागत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप छिपे थे – जैसे आईएएस/आईपीएस अधिकारियों के तबादलों की बोली लगाना, सरकारी टेंडरों में हेरफेर करना, जमीन के सीएलयू यानी लैंड यूज बदलने की मंजूरी में गड़बड़ी करना और निजी फायदे के लिए गोपनीय पॉलिसी ड्राफ्ट लीक करना। उन्होंने आगे लिखा, “ईमानदारी सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित थी, जबकि बंद दरवाजों के पीछे सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा था। न्यायिक निगरानी में होने वाली यह निष्पक्ष जांच यह सुनिश्चित करेगी कि सच्चाई सामने आए और पंजाब की जनता के साथ धोखा करने वाले हर व्यक्ति को कानून के तहत कड़ी सजा मिले।” पंजाब में सीबीआई की कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था, जिसके जवाब में अब भाजपा नेताओं ने हाईकोर्ट के आदेश और ईडी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तथ्य स्पष्ट किए हैं।
विपक्ष को चुनाव आयोग के समक्ष चिंताएं उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए: कांग्रेस

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को संसद से निर्वाचन सदन तक इंडिया ब्लॉक के मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं की हिरासत पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष अपने विचार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। गहलोत ने कहा कि इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने और चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखने के लिए मार्च का आयोजन किया था। उनके अनुसार, विपक्षी नेताओं के निर्वाचन सदन पहुंचने से पहले ही मार्च रोक दिया गया और विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई सांसदों को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सीधे चुनाव आयोग को अपनी चिंताएं बताने का अवसर तलाश रहा था और उन्होंने सवाल उठाया कि नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने से क्यों रोका गया। गहलोत ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखना चाहता था। आयोग से मिलने से पहले ही मार्च रोकना और नेताओं को हिरासत में लेना प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग की ओर बढ़ने से रोका और राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं के साथ बातचीत करने का अवसर दिया जाना चाहिए। गहलोत ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुनना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग को हितधारकों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नों और अभ्यावेदनों का जवाब देना चाहिए। गहलोत ने कहा कि वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर से संबंधित उठाए जा रहे सवालों का समाधान पारदर्शिता, जवाब और उचित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान संवाद और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
‘चुनाव आयोग से बिना अपॉइंटमेंट मिलना चाहते थे 240 सांसद, प्रोटोकॉल के खिलाफ प्रस्ताव,’ ईसीआई ने जारी किया प्रेस नोट

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को विपक्षी सांसदों के मार्च और मुलाकात को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रेस नोट जारी किया है। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से मिलने की मांग प्रोटोकॉल के खिलाफ थी और इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आयोग ने अपने प्रेस नोट में बताया कि मंगलवार को दिन में कुछ राजनीतिक दलों के निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान मीडिया के माध्यम से पता चला कि कुछ सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलना चाहते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि आज शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से निर्वाचन आयोग से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था। प्रेस नोट के अनुसार, शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है। ईसीआई ने कहा कि वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। इसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी गई है और सभी दल इसी प्रक्रिया का पालन करते हैं। नियम के अनुसार जब भी किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल या कई दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है तो वह अपने विधिवत अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग से मिलने का समय मांगता है। इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए समय पर मुलाकात होती है। जब निर्वाचन आयोग शाम 4 बजे के बाद सांसदों के उपरोक्त मुलाकात के प्रस्ताव पर विचार कर रहा था तो उन्हें दिल्ली पुलिस के डीसीपी के द्वारा बताया गया कि जिस बैठक की मांग की जा रही थी, वह 240 सांसदों के समूह के साथ होनी थी और बैठक का प्रस्तावित स्थान संसद भवन ‘एनेक्सी’ था। निर्वाचन आयोग ने विचार किया कि यह अनुरोध असामान्य है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकात भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती है, संसद भवन एनेक्सी में नहीं। आयोग ने बताया कि गतिरोध को टालने के लिए ईसीआई ने एक अभूतपूर्व कदम का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव था कि सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है। हालांकि, इस अनुरोध को भी सांसदों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। अंत में ईसीआई ने कहा कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है और अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कोई भी राजनीतिक दल किसी भी समय चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है और आयोग समय की अनुकूलता को देखते हुए उनसे मिलने की तिथि और समय निर्धारित कर सकता है।
महाराष्ट्र में जल संकट के बीच गिरीश महाजन ने की पानी बचाने की अपील, बोले-परिस्थिति बहुत कठिन है

मुंबई। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने पानी की भारी कमी के बीच उसके सही प्रबंधन पर जोर दिया, पेयजल को प्राथमिकता दी और पानी की रीसाइक्लिंग कर दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया ब्लॉक को मिलकर विरोध करने के बजाय बातचीत के लिए एक डेलीगेशन भेजना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विरोध कर रहे आदिवासी छात्रों की 12 मांगें पहले ही मान ली गई हैं, जबकि उन्होंने मंत्री के इस्तीफे की उनकी मांग को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि यह आंदोलन स्पॉन्सर्ड है। सूखे को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा, “इस साल राज्य में बारिश कम होने की वजह से पानी की भारी कमी है। इस परिस्थिति में पानी कैसे बचाया जाए, अगले आठ महीने तक पीना के लिए या जानवरों के पीने के लिए कैसे बचाया जाए, इसे लेकर हमने सूक्ष्म नियोजक किया है।” उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि जहां भी पानी बचा है, चाहे वह नदी, तालाब या बांध में हो, वहां पानी के लाइव स्टॉक में से 10 प्रतिशत बफर स्टॉक के रूप में बचाकर रखना है। अभी पानी को लेकर इमरजेंसी जैसी बहुत कठिन परिस्थिति है और इसलिए यह 10 प्रतिशत पानी हम बचाकर रखेंगे। महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा कि इसके लिए हमने आदेश जारी कर दिया है कि पानी का पूरा उपयोग, रीसाइकिल किया जाए। शहरों से जो पानी निकलकर नदियों में जाता है और खराब हो जाता है, वह किसी काम में नहीं आता, उसका पुनः उपयोग होना चाहिए। उसमें से गार्डन और कंस्ट्रक्शन जैसे कार्यों में भी उसका इस्तेमाल होना चाहिए। करीब 30 प्रतिशत पानी का अभी उपयोग नहीं हो रहा है। इसके अलावा इंडस्ट्री का जो पानी बर्बाद जाता है, उसे भी रीसाइकिल करने के लिए हमने सभी इंडस्ट्रीज को आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह पानी फिर से इस्तेमाल होना चाहिए, रीसाइकिल होना चाहिए, इस संबंध में हमने आदेश दिए हैं। टैंक और कैनाल से पानी की चोरी भी होती है। अवैध रूप से बिना अनुमति के वहां से पानी उठाया जाता है, इसलिए हमने राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की एक संयुक्त टीम बनाई है। ये तीनों टीमें मिलकर इस पर नजर रखेंगी और जो भी पंप बिना अनुमति के चल रहे हैं, उन्हें जब्त किया जाएगा। पीने के पानी और पशुओं के पीने के लिए पानी का इंतजाम करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हालात बहुत कठिन है, अभी तो आठ महीने हमें निकालने हैं। तापमान बहुत बढ़ने वाला है, इसलिए इस भारी संकट का हमें सामना करना है। पानी का कम से कम जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कीजिए। अगर हम थोड़ा सा भी पानी बचा सकते हैं, तो हमें बचाना चाहिए।
एडीजी ने चारधाम यात्रा सुरक्षा का लिया जायजा, गंगोत्री से गौमुख ट्रैक तक किया निरीक्षण

उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा और गौमुख ट्रैक पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेशन ने गंगोत्री धाम से लेकर गौमुख ट्रैक तक का स्थलीय निरीक्षण कर पुलिस एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिस बल, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था तथा संवेदनशील स्थलों पर निगरानी प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्थाएं लगातार प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीजी ने गंगोत्री धाम स्थित पुलिस चौकी का भौतिक निरीक्षण कर अभिलेखों और साफ-सफाई की व्यवस्था देखी। उन्होंने धाम में तैनात पुलिस, फायर एवं एसडीआरएफ कर्मियों को श्रद्धालुओं को व्यवस्थित एवं कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने, भीड़ नियंत्रण तथा यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। साथ ही भागीरथी नदी घाटों पर विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया। उन्होंने धाम क्षेत्र और पार्किंग स्थलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। भीड़ बढ़ने की स्थिति में प्रभावी ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। एडीजी ने पुलिस कर्मियों को श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के साथ विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार बनाए रखने तथा उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की हिदायत दी। इसके बाद उन्होंने गौमुख ट्रैक स्थित भोजवासा पुलिस चौकी का निरीक्षण किया। यहां दुर्गम और विषम परिस्थितियों में तैनात पुलिस कर्मियों के लिए उपलब्ध आवास, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया तथा जवानों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ड्यूटी कर रहे पुलिस कर्मियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। एडीजी ने निर्देश दिए कि गौमुख ट्रैक पर आने वाले प्रत्येक ट्रैकर, पर्यटक और तीर्थयात्री का पूरा विवरण निर्धारित रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए तथा उनके आवागमन की नियमित निगरानी रखी जाए। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को देने तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। डॉ. मुरुगेशन ने कहा कि गंगोत्री धाम और गौमुख जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा, सुगम आवागमन तथा बेहतर पुलिस व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी पुलिस कर्मी पूर्ण सजगता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। निरीक्षण के दौरान पुलिस उपाधीक्षक उत्तरकाशी जनक सिंह पंवार, प्रभारी निरीक्षक हर्षिल प्रदीप तोमर, प्रभारी चौकी गंगोत्री प्रमोद उनियाल, एसडीआरएफ के वीरेन्द्र पंवार सहित पुलिस और एसडीआरएफ के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
केरल: पम्बा पुलिस की कार्रवाई, अय्यप्पा भक्तों के 70 से ज्यादा खोए हुए फोन बरामद कर लौटाए

तिरुवनंतपुरम। केरल के पथानामथिट्टा जिले की पम्पा पुलिस ने अय्यप्पा भक्तों के 70 से ज्यादा खोए/चोरी हुए फोन बरामद करके उन्हें लौटा दिए हैं, जिससे भक्तों में खुशी की लहर है। उन्होंने पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई के लिए उनकी सराहना की है। दरअसल, सबरीमाला आने वाले अय्यप्पा भक्तों के खोए हुए मोबाइल फोन बरामद करने के लिए सितंबर में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान, पम्बा पुलिस ने आठ अलग-अलग राज्यों से 70 से ज्यादा फोन बरामद किए। पुलिस ने उन लोगों से संपर्क किया जो अभी इन फोन का इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें पहले सीईआरआर पोर्टल पर रजिस्टर करने के बाद ब्लॉक कर दिया गया था और उन्हें नोटिस जारी किए। अब इन फोन को पम्बा पुलिस स्टेशन लाने और फिर पार्सल के जरिए उनके असली मालिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। अब तक 10 लाख रुपए से ज्यादा कीमत के फोन बरामद किए जा चुके हैं। यह कामयाबी जिला पुलिस प्रमुख आर. आनंद (आईपीएस) के निर्देशों पर काम करने वाले पत्तनमथिट्टा साइबर पुलिस अधिकारियों और पम्बा पुलिस इंस्पेक्टर सी.के. मनोज की अगुवाई में बीस से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम की मिली-जुली कोशिशों से यह मुमकिन हो पाई। पुलिस की ओर से इसी प्रकार की कार्रवाई का एक दूसरा मामला मंगलवार को मुंबई से सामने आया, जहां साइबर ठगी कर महंगे मोबाइल फोन खरीदने वाले गिरोह पर एलटी मार्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद और मुंबई के कुर्ला से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 19,66,075 रुपए कीमत के 25 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में पीड़ित ने केस दर्ज कराया था। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को आरबीएल क्रेडिट कार्ड का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि आपके क्रेडिट कार्ड पर चालू मेल आदेश सर्विस बंद करनी है और इसके लिए व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजी। लिंक पर क्लिक करते ही आरोपी ने पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 3 ट्रांजेक्शन में 4,48,721 रुपए की स्वीगी प्लेटफॉर्म पर खरीदारी कर ऑनलाइन ठगी कर ली। पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। जांच के आधार पर पुलिस ने अनिसबेग समीरबेग मिर्जा (23) और मोईन रहीम शेख (34) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से 2 आईफोन मोबाइल फोन और अन्य साइबर फ्रॉड के मामलों में खरीदे गए 25 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
पीआईबी का फैक्ट चेक: गृह मंत्रालय के अधिकारियों के राहुल-प्रियंका से संपर्क का दावा भ्रामक

नई दिल्ली। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने मंगलवार को एक फैक्ट चेक जारी किया और सोशल मीडिया पर उन पोस्ट को गुमराह करने वाला बताया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी से संपर्क किया था, ताकि निर्वाचन सदन के बाहर बने गतिरोध को खत्म किया जा सके। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन सरकारी सूचना एजेंसी पीआईबी ने कहा, “भ्रामक दावों और अपुष्ट जानकारी के बहकावे में न आएं। केवल सत्यापित और विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।” पीआईबी की तरफ से जारी फैक्ट चेक के साथ एक ‘पत्रकार’ और एक न्यूज चैनल की वेबसाइट के सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी दिखाए गए। ये ‘झूठे दावे’ सोशल मीडिया पर विपक्ष के सांसदों के विरोध-प्रदर्शन और धरने को लेकर किए गए थे। ये विरोध भारत के चुनाव आयोग के दफ्तर के पास हुआ था। साथ ही, राहुल गांधी की अगुवाई में सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने के लिए निर्वाचन सदन में घुसने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही। इससे पहले दिन में राहुल गांधी ने लोकसभा और राज्यसभा के 300 विपक्षी सांसदों (जिनमें बीजद के सांसद भी शामिल थे) के साथ संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च किया। यह दूरी लगभग एक किलोमीटर थी। आयोग के दफ्तर से करीब 50 गज की दूरी पर गांधी ने पत्रकारों से कहा, “हम सीईसी और चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन हमें रोक दिया गया और वहां जाने से मना कर दिया गया।” सुरक्षाकर्मियों द्वारा निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद राहुल गांधी, वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी और अन्य नेता ईसीआई दफ्तर के पास आकाशवाणी भवन के अंदर धरने पर बैठ गए। हाई-सिक्योरिटी जोन में हुए इस विरोध-प्रदर्शन की आलोचना भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने की। उन्होंने पूछा कि क्या विपक्षी पार्टियां अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं। आईएएनएस से बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “दिल्ली में बैठकर उन्होंने यहां एक संवेदनशील इलाके को घेर लिया है और कह रहे हैं कि (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (गृह मंत्री) अमित शाह के चंगुल में हैं। यह शर्मनाक है। मैं इसकी निंदा करता हूं।” भाजपा सांसद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की भी आलोचना की, जिन्होंने सभी चुनाव रद्द करने और बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके दोबारा चुनाव कराने की मांग की। यही उनका मकसद है और वे यही चाहते हैं। वे निष्पक्ष चुनाव नहीं जीत सकते। अब वे बूथों पर कब्जा करना चाहते हैं। वे दबाव डालकर चुनाव जीतना चाहते हैं। वे दलितों और गरीबों को वोट देने से रोकना चाहते हैं।
गाजियाबाद में खौफनाक वारदात: बहू को लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मार डाला, तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। गाजियाबाद में मंगलवार को एक खौफनाक हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पति, ससुर और सास ने मिलकर बहू की लोहे की रॉड से पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी। यह घटना गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के सदरपुर गांव का है, जहां पति, ससुर और सास ने मिलकर बहू की बेरहमी से हत्या कर दी। दरअसल, इन लोगों के बीच छोटी-छोटी बातों और खाना बनाने को लेकर रोजाना झगड़े होते थे। तंग आकर तीनों ने मिलकर बहू के सिर पर लोहे की रॉड से वार किए और मारपीट कर जान से मार दिया। अलीगढ़ जिले के जलालपुर गांव (थाना पिसावा) के रहने वाले राहुल राठी ने मधुबन बापूधाम थाने में पहुंचकर लिखित तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी बहन रेनू की हत्या उसके पति अरुण कुमार (उम्र 38 वर्ष), ससुर विनोद कुमार (उम्र 58 वर्ष) और सास रोहताशी (उम्र करीब 55 वर्ष) ने मिलकर की है। तीनों ने लोहे की रॉड से मारपीट कर जान से मार दिया। तहरीर के आधार पर थाने में मुकदमा संख्या 312/26, धारा 85/103(1) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया। उच्चाधिकारियों के आदेश पर विशेष टीम गठित की गई। टीम ने चेकिंग के दौरान बुनकर मार्ट पुलिस चौकी मधुबन बापूधाम क्षेत्र के पास सड़क से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में एक स्वर में बताया कि रेनू रोजाना छोटी-छोटी बातों और खाना बनाने को लेकर विवाद करती रहती थी। घर में रोज कलह होता था। तंग और परेशान होकर तीनों ने मिलकर उसके सिर पर लोहे की रॉड मारी और मारपीट कर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त एक लोहे की रॉड भी बरामद कर ली है। तीनों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर लिया।
अहमदाबाद में फुटपाथ से नवजात का अपहरण, पुलिस ने महिला समेत तीन आरोपियों को दबोचा

अहमदाबाद। अहमदाबाद पुलिस ने न्यू रानीप इलाके से एक महीने सात दिन के बच्चे के अपहरण के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक 21 साल की महिला और उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति शामिल है। जांच करने वाले अधिकारी मानव तस्करी और आपराधिक साजिश के पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं। आरोप है कि 2 अक्टूबर को तड़के करीब 3:15 बजे बच्चे का अपहरण कर लिया गया, जब वह न्यू रानीप में अहवाडिया झील के पास फुटपाथ पर अपने मजदूर माता-पिता के साथ सो रहा था। आरोप है कि 2 अक्टूबर को तड़के करीब 3:15 बजे बच्चे का अपहरण न्यू रानीप में अहवाडिया झील के पास फुटपाथ पर अपने मजदूर माता-पिता के साथ सोते समय किया गया था। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) के तहत साबरमती पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कहा कि जांच में सामने आई बातों के आधार पर मानव तस्करी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी जा रही हैं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीमों ने शिकायत मिलने के बाद साबरमती पुलिस की सर्विलांस टीम और जोन-2 व जोन-3 की लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) यूनिट्स के साथ मिलकर बच्चे और इसमें शामिल संदिग्ध लोगों की सघन तलाश शुरू की। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस इनपुट का इस्तेमाल किया, और आरोपियों को बच्चे के साथ शहर से बाहर जाने से रोकने के लिए रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और एयरपोर्ट पर निगरानी रखी। सीसीटीवी फुटेज और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर पुलिस ने अपहरणकर्ता की पहचान रानीप निवासी 21 वर्षीय जिनाल परमार के तौर पर की। उसे साबरमती रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा गया और बाद में स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया। उसे अदालत में पेश किया जाना था। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि उत्तर प्रदेश के दो नाबालिगों ने जिनाल की मदद की थी। क्राइम ब्रांच ने उसके मोबाइल फोन पर मिली तस्वीरों के जरिए उनका पता लगाया और उत्तर प्रदेश जाने से पहले ही उन्हें बस और रेलवे स्टेशनों से पकड़ लिया। बाद में उन्हें साबरमती पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने बताया कि बच्चे के अपहरण से पहले जिनाल ने न्यू रानीप इलाके और सोला सिविल अस्पताल के आस-पास रेकी की थी। जांच करने वालों के मुताबिक, बाद में उसने बच्चे को उस जगह से अगवा कर लिया जहां वह अहवाडिया झील के पास अपने माता-पिता के साथ सो रहा था। पुलिस ने बताया कि महिला को वह बच्चा किसी और व्यक्ति को सौंपना था। हालांकि, पुलिस की कड़ी चेकिंग और निगरानी की वजह से घबराकर, उसने बच्चे को न्यू रानीप इलाके में छोड़ दिया और भागने की कोशिश की। बाद में बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। जांच के दौरान, पुलिस ने बदायूं के रहने वाले भावेश्वर उर्फ भानु जाटव को भी गिरफ्तार किया, जो उत्तर प्रदेश के नोएडा में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने जिनाल को किसी दूसरे व्यक्ति के लिए एक साल से कम उम्र के बच्चे का इंतजाम करने के बदले 6 लाख रुपए देने का प्रस्ताव दिया था। जांचकर्ताओं को पता चला कि इस बड़ी साजिश में शामिल अन्य लोग उत्तर प्रदेश में हैं, जिसके बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम को वहां भेजा गया है। पुलिस भावेश्वर उर्फ भानु और दूसरे आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि कथित मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका का पता लगाया जा सके और यह तय किया जा सके कि बच्चे के अवैध ट्रांसफर की कोशिश में और लोग भी शामिल थे या नहीं।