बैंकॉक में बाढ़ से बिगड़े हालात: 8 की मौत, लाखों बेघर

बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में लगातार भारी बारिश के बाद बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। डिजास्टर प्रिवेंशन एंड मिटिगेशन डिपार्टमेंट ने सोमवार को बताया कि 16 सितंबर से थाईलैंड में आई बाढ़ की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई है। सिंहुआ समाचार एजेंसी के अनुसार बैंकॉक समेत 28 प्रांत अभी भी इस आपदा की चपेट में हैं। खासकर थाईलैंड के मध्य, उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों के हालात बेहद खराब हैं। इस बीच, थाईलैंड की कैबिनेट ने बैंकॉक और उसके आस-पास के तीन प्रांतों में सोमवार और मंगलवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। बाढ़ के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए सरकारी दफ्तर और स्कूल बंद रहेंगे। थाईलैंड के मौसम विभाग का अनुमान है कि सोमवार को उत्तरी, मध्य और पूर्वी थाईलैंड के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी। वहीं, बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन ने सोमवार को बताया कि राजधानी में आई भीषण बाढ़ से लगभग 3,29,000 परिवार और करीब 7,00,000 लोग प्रभावित हुए हैं। विभाग के अनुसार, 16 से 28 सितंबर के बीच 42 प्रांतों में बाढ़ आई, जिससे 18 लाख लोग प्रभावित हुए। शहर की डिप्टी गवर्नर ताविडा कामोलवेज ने बताया कि राजधानी के लैट क्राबांग जिले पर बाढ़ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है, यहां 30,000 से 40,000 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। सभी 50 जिलों को बाढ़-आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। रविवार देर रात तक करीब 4,900 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि लगभग 52 हजार घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गुरुवार से रविवार के बीच बैंकॉक के कुछ इलाकों में 330 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। कई प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ इलाकों में पानी कमर तक पहुंच गया। कई जगहों पर कारें और दूसरे वाहन पानी में आधे से अधिक डूब गए। बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवारों को अपना घर छोड़कर स्कूलों और अन्य अस्थायी राहत केंद्रों में जाना पड़ा। बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, हजारों लोग इन केंद्रों में रात बिताने को मजबूर हुए। कुछ स्कूलों में कक्षाओं को खाली कर वहां लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। सोमवार को शहर के सैकड़ों स्कूल बंद रखने की योजना है। बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, डिप्टी गवर्नर विसानु सबसोमपोन ने सोमवार को कहा कि पूर्वी बैंकॉक की मुख्य जलधाराओं सैन सैप और प्रावेट बुरिरोम नहरों का जलस्तर कम करने के लिए पानी निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुख्य रणनीति सैन सैप और प्रावेट बुरिरोम नहरों से पानी की निकासी है, जिससे उनसे जुड़ी छोटी नहरों का जलस्तर भी कम हो जाएगा।” डिप्टी गवर्नर ने उम्मीद आगे कहा, “आज (सोमवार) रामखमहेन्ग रोड के शुरुआती हिस्से में बाढ़ की स्थिति में सुधार होना चाहिए। ख्लोंग चान में ज्यादा समय लग सकता है क्योंकि वह दूर है। मुख्य नहरों से पानी पूरी तरह निकालने में तीन दिन लगेंगे।” विसानु ने कहा, “ओवरफ्लो हो रही नहरों से रिहायशी इलाकों का पानी निकालना इतना आसान नहीं होगा। बुरी तरह बाढ़ प्रभावित लैट क्राबांग में पानी निकालने में लगभग एक हफ्ता लगेगा।” अधिकारियों ने शहर की नहरों से पानी निकालने का काम तेज कर दिया है। बारिश कम होने के बाद रविवार को बैंकॉक के कई हिस्सों में जलस्तर घटने लगा, लेकिन कई प्रमुख नहरों में पानी अब भी काफी ऊंचा था। प्रशासन ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। इससे पहले करीब 48 घंटे में लगभग 300 मिलीमीटर बारिश के बाद बैंकॉक प्रशासन ने राजधानी को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया था। सेना ने राहत कार्यों में मदद के लिए अस्थायी शिविर और सामुदायिक रसोई तैयार कीं। प्रशासन ने लोगों से निचले इलाकों और नहरों के आसपास से सामान हटाकर ऊंचे स्थानों पर रखने को कहा था। सितंबर बैंकॉक में बारिश के मौसम का चरम महीना होता है, लेकिन इस बार कुछ इलाकों में हुई अत्यधिक बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाल दिया। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान पानी निकालने, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और संभावित नई बारिश से निपटने पर है।
सरकार 25 करोड़ लोगों को दे रही ईएसआईसी हेल्थ सिक्योरिटी : डॉ. मनसुख मंडाविया

नई दिल्ली। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कहा कि भारत ‘कर्मचारी राज्य बीमा निगम’ (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दे रहा है। उन्होंने सरकार के सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। ‘औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026’ पर सीआईआई-ईएफआई राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, मंडाविया ने कहा कि सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ किसानों को हर चार महीने में उनके बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपए मिलते हैं। मंत्री ने कहा, “आज देश में 10 ऐसे राज्य हैं जो महिलाओं के खातों में हर महीने 2,000 रुपए, 1,500 रुपए या 1,200 रुपए जैसी रकम जमा करते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने औद्योगिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय श्रम तौर-तरीकों एवं भारत की अपनी परंपराओं और प्रणालियों के बीच संतुलन पर बात करते हुए कहा, “जब हम औद्योगिक संबंधों की बात करते हैं… तो एक तरफ आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीके और अंतरराष्ट्रीय ढांचे होते हैं, और दूसरी तरफ भारत की अपनी परंपराएं और संबंध; तो मुझे यह थोड़ा अलग लगता है।” मांडविया ने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में कई मंत्रालयों में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव ने उन्हें भारत और विदेशों में विभिन्न मंचों और हितधारकों के साथ जुड़ने का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंधों के प्रति भारत के दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय ढांचे और देश के अपने सामाजिक और आर्थिक संदर्भ, दोनों को ध्यान में रखने की जरूरत है। इससे पहले सितंबर में, मंत्री ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे सेस फंड के मौजूदा इस्तेमाल का विस्तृत आकलन करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल के नए तरीके खोजें। मंत्री ने राज्यों से आगे कहा कि वे श्रम संहिताओं के लागू होने के एक साल बाद उनके असर का व्यापक आकलन करें और उन क्षेत्रों की पहचान करें जहां उन्हें और बेहतर ढंग से लागू करने की जरूरत हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बार-बार हो रहे रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का लिया स्वतः संज्ञान

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यौन अपराधों की बार-बार हो रही घटनाओं पर चिंता जताई। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज करने और सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया। जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में यौन अपराधों की हालिया रिपोर्टों के साथ इन घटनाओं को देखने पर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सम्मान के साथ और हिंसा के डर के बिना जीने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक अहम हिस्सा है। बेंच ने यह भी कहा कि अपर्याप्त रोशनी, निगरानी, गश्त या अन्य ऐसी प्रशासनिक कमियों की वजह से पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज को ‘हाई-रिस्क ज़ोन’ (खतरे वाली जगह) नहीं बनने दिया जा सकता, जिन्हें रोका जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से ठोस कार्रवाई की मांग की और उन लोगों की जवाबदेही तय करने पर ज़ोर दिया जिनकी जिम्मेदारी अपराध रोकना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और कमजोर लोगों की सुरक्षा करना है। सुप्रीम कोर्ट का यह दखल ऐसे समय में आया है, जब हाल के सप्ताह में दिल्ली और उससे सटे एनसीआर में कई यौन अपराधों की खबरें सामने आई हैं। चिंता बढ़ाने वाली हालिया घटना में दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने कथित तौर पर 17 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया। पुलिस के मुताबिक, लड़की 22 सितंबर को अपने एक पुरुष दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी और बाद में पास के एक पार्क में चली गई। तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर उनके पास आकर खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें धमकाया और उनके मोबाइल फोन छीन लिए। पीड़िता ने बाद में पुलिस को बताया कि उनमें से दो लोग उसे पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले गए, जहां उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आसिफ नाम के एक आरोपी ने उसे धमकाते हुए बंदूक दिखाई थी। पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मुठभेड़ के दौरान आसिफ को पकड़ लिया गया और उसे गोली लगी। बाकी दो आरोपियों का पता लगाने की कोशिशें जारी थीं। सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली इलाके में चलती स्लीपर बस के अंदर 16 साल की लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है। अगस्त में सामने आई इस घटना में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक लड़की शामिल थी, जो नोएडा आई थी और अपना स्टॉप छूटने के बाद एक स्लीपर बस में सवार हो गई थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पहले ही इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था और दिल्ली व गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर जांच और पीड़िता को दिए गए मुआवज़ (यदि कोई हो) के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया और फोरेंसिक जांच के लिए स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया। जांचकर्ताओं ने गाड़ी की आवाजाही और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए रास्ते के सीसीटीवी फुटेज भी इकट्ठा किए।
सहायक निर्देशक से हीरोइन बनीं शरवरी वाघ, बोलीं-बॉलीवुड के गानों ने बनाया अभिनेत्री

मुंबई। बॉलीवुड में सहायक निर्देशक से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री शरवरी वाघ पारिवारिक ड्रामा फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में नजर आएंगी। अभिनेत्री का कहना है कि बॉलीवुड के गाने और डांस ने ही उन्हें अभिनेत्री बनने के लिए प्रेरित किया। अभिनेत्री ने कहा, “बॉलीवुड के गाने और डांस ही एक बड़ी वजह है कि मैं अभिनेत्री बनना चाहती थी। साथ ही, मैं माधुरी दीक्षित को ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ में और करिश्मा मैम और सोनाली मैम को ‘मैय्या यशोदा’ में देखते हुए बड़ी हुई हूं और मैं घर आकर इन गानों पर डांस करती थी और खुद को एक दिन स्क्रीन पर उस हीरोइन के रूप में कल्पना करती थी।” अभिनेत्री ने इन पलों को बॉलीवुड से प्यार होने की वजह बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कहीं न कहीं, इन्हीं पलों ने मुझे बॉलीवुड के विचार से प्यार करना सिखाया।” अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें पर्दे पर हमेशा से ही रोमांस करना पसंद है। अभिनेत्री शरवरी वाघ ने बताया, “मुझे हमेशा से क्लासिक बॉलीवुड गानों का रोमांस, इमोशन और बड़े पर्दे वाला जादू पसंद रहा है, जिस तरह से आप एक गाने और डांस के जरिए पूरी कहानी बता सकते हैं। इसलिए सूरज बड़जात्या जी की ‘ये प्रेम मोल लिया’ के साथ इसका अनुभव करना अविश्वसनीय रूप से खास लग रहा है।” शरवरी ने कहा, “यह एक खूबसूरत पल जैसा लग रहा है, उस तरह के बॉलीवुड को जीने का, जिसे देखते हुए और जिसके सपने देखते हुए मैं बड़ी हुई हूं। मैं सच में इसके हर पल का आनंद ले रही हूं।” फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ का टाइटल ट्रैक हाल ही में रिलीज हुआ था, जिसमें फिल्म की हल्की झलक देखने को मिली। हालांकि फिल्म से जुड़ी बाकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इस फिल्म से राजश्री का आइकॉनिक किरदार ‘प्रेम’ 12 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहा है, जिसे आयुष्मान खुराना निभा रहे हैं। फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ एक पारिवारिक और रोमांटिक ड्रामा है, जिसमें पहली बार आयुष्मान और शरवरी साथ में स्क्रीन पर नजर आएंगे।
भले ही स्थिति विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाए, आक्रामकता के खिलाफ खड़ा रहेगा ईरान : अराघची

न्यूयॉर्क। अमेरिका की ओर से सात दिन के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वो प्लान को क्यों ठुकरा रहे हैं, यह एक अहम सवाल है। यह प्रस्ताव हालात सामान्य बना सकता है। तेहरान वास्तविक कूटनीति के लिए है। साथ ही, किसी भी आक्रामकता के खिलाफ दृढ़ता से खड़ा भी रहेगा, भले ही स्थिति एक विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाए। ईरान के शीर्ष राजनयिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”राष्ट्रपति पेजेश्कियन और मैं न्यूयॉर्क युद्ध की बात करने नहीं आए हैं। हम यहां शांति की राह बनाने आए हैं। इसके बावजूद, ईरान किसी भी तरह के हमले के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा, भले ही हालात एक बेहद विनाशकारी युद्ध तक क्यों न पहुंच जाएं। साथ ही, हम वास्तविक और गंभीर कूटनीतिक बातचीत के लिए भी तैयार हैं।” ‘मीट द प्रेस’ से एक बातचीत के दौरान अराघची ने कहा कि अमेरिकी राजदूत की बात सुनना काफी दिलचस्प है। सवाल सिर्फ इतना है कि वे सात दिन के प्लान को क्यों ठुकरा रहे हैं? यह सात दिन का प्लान फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में हालात को फिर से सामान्य बना सकता है। आखिर वे इसे क्यों ठुकरा रहे हैं? यह बेहद अहम सवाल है और उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर भी हैरानी है कि राजदूत सात दिन के प्लान के बारे में बात कर रहे हैं, जबकि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है। हो सकता है, शायद उन्हें इसकी कॉपी ही नहीं दी गई हो। अराघची ने कहा कि हमारा प्रस्ताव बिल्कुल साफ है। अगर अमेरिका कुछ कदम उठाता है, तो हम होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए तैयार हैं। और हम जो मांग रहे हैं, वह कोई नई बात नहीं है, न ही ये मांगें अचानक कहीं से आई हैं। ये हमारे अधिकार हैं और हम चाहते हैं कि उनका सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले, हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो, जिसे हम आक्रामक युद्ध मानते हैं। उन्होंने यह युद्ध आठ महीने पहले इस उम्मीद के साथ शुरू किया था कि वे दो-तीन दिनों में इसे जीत लेंगे। अब आठ महीने हो चुके हैं और हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। अराघची ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारा पैसा और हमारी संपत्तियां, जिन्हें गैरकानूनी तरीके से फ्रीज किया गया है, उन्हें जारी किया जाए। हम चाहते हैं कि हमें अपना तेल बेचने की इजाजत मिले। इसलिए हम ऐसी कुछ चीजों की मांग कर रहे हैं, जिनके लिए अमेरिका पहले हुए समझौतों में पहले ही प्रतिबद्धता जता चुका है।
उज्जैन में बवाल के बाद मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को खुद तैयार हुआ मुस्लिम समाज

उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को लेकर हुए बवाल के बाद मुस्लिम समाज खुद प्रस्तावित हिस्से को तोड़ने को तैयार हो गया है । पथराव करने के मामले में पुलिस ने 10 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है और हिरासत में लेने का दौर भी शुरू हो गया है। उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन किया जाने वाला है। इसके मद्देनजर सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में शाही मस्जिद का हिस्सा तोड़ने को लेकर बवाल हो गया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया तो वही पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। इस दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के हाथ में चोट भी लगी है। करीब 2 घंटे चले हंगामा के बाद स्थितियां काबू में आ गई हैं। वहीं, मस्जिद के जिस हिस्से को हटाया जाना है उसे तोड़ने के लिए मुस्लिम समाज तैयार हो गया है। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है और उन्हें हिरासत में लेना भी शुरू कर दिया है। दरअसल सिंहस्थ में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, इसको ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था को सुगम किया जा रहा है और जो मार्ग संकरे हैं उन्हें चौड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में कंठल चौराहे से गोपाल मंदिर तक की सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है जबकि इसके बीच में शाही मस्जिद आती है। मस्जिद का भी हिस्सा हटाया जाना है, जिसे हरे कपड़े से ढक दिया गया था और इसे तोड़ने की विरोध में महिलाएं सड़क पर आकर बैठ गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने महिलाओं को हटाने की कोशिश की। इसी दौरान पथराव हो गया, पुलिस को भी भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। मौके पर स्थितियां तनावपूर्ण बनी और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई, वहीं मस्जिद के आसपास बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जमा हो गए और वह मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने का विरोध करते रहे। पथराव और आंसू गैस की गोले छोड़ें के जाने के दौरान पुलिस निरीक्षक पुष्पा पंचाल के हाथ में चोट आई है। उन्होंने बताया कि महिलाएं लोहे की टीन के पीछे थी और उन्हें बचाने की कोशिश में उनके हाथ में लोहे के टीन से कट लग गया है और उपचार के बाद फिर भी अपने काम में जुटी हुई है । सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक निवास भी सड़क के किनारे है जिस पर उन्होंने स्वयं रविवार को कुदाली चलाई थी और उसे तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। उस दौरान मुख्यमंत्री भावुक भी हो गए थे। वहीं, उज्जैन के कई दूसरे इलाकों में लोगों ने स्वेच्छा से अपने मकान के हिस्सों को तोड़ा है ताकि सड़क चौड़ी हो सके।
उत्तरी आयरलैंड में 28 साल बाद ‘ऑरेंज ऑर्डर मार्च’, पोर्टाडाउन में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका

पोर्टाडाउन। उत्तरी आयरलैंड के ऐतिहासिक शहर पोर्टाडाउन में रविवार को एक प्रोटेस्टेंट मार्च को लेकर तनाव बढ़ गया। जिसका कारण इस मार्च को मिली अनुमति और इस अनुमति के खिलाफ प्रदर्शन था। करीब 28 साल बाद पहली बार ऑरेंज ऑर्डर को मुख्य रूप से राष्ट्रवादी इलाके की गारवाघी रोड से मार्च की अनुमति मिलने के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़क को जाम कर दिया। पुलिस दोनों पक्षों के बीच मौजूद रही और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करती दिखी, और देर रात प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे वहां से जाते दिखे। विवादित मार्च ड्रमक्री परेड के नाम से जाना जाता है। ऑरेंज ऑर्डर का यह मार्च 1998 के बाद से गारवाघी रोड से प्रतिबंधित था। यह इलाका मुख्य रूप से कैथोलिक और राष्ट्रवादी आबादी वाला है, जबकि पोर्टाडाउन का व्यापक क्षेत्र प्रोटेस्टेंट और यूनियनिस्ट प्रभाव वाला माना जाता है। 1990 के दशक में इसी मार्ग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों ने उत्तरी आयरलैंड के संघर्ष के दौर में तनाव बढ़ाया था। इस बार मार्च की अनुमति को लेकर कई दौर की कानूनी लड़ाई चली। शुक्रवार को परेड्स कमीशन ने कुछ शर्तों के साथ मार्च को मंजूरी दी थी। इसमें मार्च में अधिकतम 35 लोगों के शामिल होने, सुबह 8 बजे शुरू करने और बिना संगीत के शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करने जैसी शर्तें थीं। शनिवार को हाई कोर्ट की जस्टिस पेट्रीसिया स्मिथ ने इस फैसले पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा था कि लंबे समय से चला आ रहा विवाद पूरे उत्तरी आयरलैंड में तनाव बढ़ा सकता है। इसके बाद ऑरेंज ऑर्डर ने इस फैसले को चुनौती दी। रविवार तड़के अपील अदालत ने परेड्स कमीशन के मूल फैसले को बरकरार रखा, जिससे मार्च का रास्ता साफ हो गया। अदालत की सुनवाई रात करीब 2.15 बजे खत्म हुई और इसके कुछ ही घंटे बाद मार्च शुरू करने का समय निर्धारित था। सुबह गारवाघी रोड पर बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारी जमा हो गए। कई प्रदर्शनकारियों ने हाथों में हाथ डालकर सड़क को घेर लिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी दी कि अनधिकृत विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। ऑरेंज ऑर्डर के करीब 35 सदस्य ड्रमक्री चर्च के पास मौजूद रहे। वे मार्च शुरू करने की अनुमति का इंतजार करते रहे, लेकिन गारवाघी रोड पर प्रदर्शनकारियों के जमावड़े के कारण स्थिति गतिरोध में बदल गई। आयरिश समाचार एजेंसी पीए ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में सिन फेन की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड और उत्तरी आयरलैंड की प्रथम मंत्री मिशेल ओ’नील भी मौजूद थीं। मैकडोनाल्ड ने मार्च की अनुमति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलाके के लोग अतीत की ओर लौटना नहीं चाहते। ओ’नील ने कहा कि इस घटनाक्रम से उत्तरी आयरलैंड की शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) नेताओं ने प्रदर्शन को अदालत और कानून की अवहेलना बताया। तो वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने भी तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की शांति और मेल-मिलाप की प्रक्रिया के बाद स्थिति को पुराने विभाजन की ओर लौटने से रोकना जरूरी है। ड्रमक्री विवाद उत्तरी आयरलैंड के इतिहास में बेहद संवेदनशील माना जाता है। 1990 के दशक में इस मार्ग से मार्च को लेकर कई बार हिंसा हुई थी। 1998 में परेड्स कमीशन के गठन के बाद विवादित मार्चों को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनाई गई थी और ड्रमक्री मार्च को लगातार प्रतिबंधित किया जाता रहा। 2026 में अदालत के फैसलों के बाद पहली बार इसे फिर से अनुमति मिली है।
एआई को लेकर बिल गेट्स ने चेताया, खतरनाक ताकत ले सकती है एक अरब लोगों की जान

वॉशिंगटन। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की ताकत को खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कराण ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें एक अरब लोगों की जान जा सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में इस बात पर तेज बहस चल रही है कि एडवांस एआई के लिए सरकार को सख्त नियम बनाने चाहिए या ऐसे नियमों से बचना चाहिए, जो चीन के साथ एआई की दौड़ में अमेरिका की रफ्तार धीमी कर सकते हैं। एनबीसी के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में गेट्स ने कहा कि एआई पहले की तकनीकी तरक्की से अलग है और आने वाले कुछ वर्षों में यह इंसानों से कई गुना ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है। गेट्स ने कहा, “यह वास्तव में विकास की एक बहुत बड़ी घटना है। हमने एक ऐसी बुद्धिमान तकनीक बनाई है, जो कई मामलों में पहले ही हमसे ज्यादा समझदार है और अगले कुछ सालों में बहुत तेजी से आगे बढ़ते हुए हमसे कई गुना ज्यादा बुद्धिमान हो सकती है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या एआई मानवता के अंत का कारण बन सकती है, तो गेट्स ने कहा, “एआई निश्चित तौर पर इतनी ताकतवर है कि वह ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है, जिनमें एक अरब लोगों की जान जा सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि गलत इरादा रखने वाले लोगों के हाथ में सबसे नए एआई टूल्स का होना इतना ताकतवर खतरा है, जितना पहले कोई हथियार नहीं रहा। गेट्स ने कहा कि सरकारों के पास अभी इतनी विशेषज्ञता नहीं है कि वे एआई से जुड़े खतरनाक स्तर और जैविक हमलों, साइबर हमलों तथा टेक्नोलॉजी के दूसरे संभावित गलत इस्तेमाल को पूरी तरह समझ सकें। उन्होंने कंपनियों की ओर से स्वेच्छा से अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहने की बात को खारिज कर दिया। गेट्स ने कहा कि कोई भी यह नहीं मानता कि कंपनियों का खुद अपने लिए नियम बनाना काफी है। उन्होंने ऐसे कानून बनाने की मांग की, जिनके तहत एआई सिस्टम में सुरक्षा उपाय और निगरानी की व्यवस्था रखना जरूरी हो। गेट्स ने माना कि इससे एआई कंपनियों की लागत कुछ बढ़ सकती है, लेकिन इससे टेक्नोलॉजी का विकास बहुत ज्यादा धीमा नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हर एआई सिस्टम में ये सुरक्षा उपाय और निगरानी की क्षमता जरूरी न करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना होगा।” गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने अमेरिका और चीन के बीच एक ऐसे समझौते की मांग की है, जिसकी जांच और पुष्टि की जा सके और जो खुद अपनी क्षमताओं को लगातार बेहतर करने वाले एआई सिस्टम पर रोक लगाए। खन्ना ने कहा कि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और सांसद ग्रेग कैसर के समर्थन वाला प्रस्ताव ऐसे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूविंग एआई पर तब तक रोक लगाएगा, जब तक उसके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय तैयार नहीं हो जाते। खन्ना ने एनबीसी से कहा, “यह मूल रूप से ऐसा एआई है, जिसे अब इंसान ट्रेन नहीं कर रहे होते। वह खुद को ट्रेन कर सकता है। इसमें इंसानों का नियंत्रण खोने का वास्तविक खतरा है।” खन्ना ने कहा कि अमेरिका और चीन को टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का एक साझा वर्किंग ग्रुप बनाना चाहिए और दोनों देशों को मिलकर कुछ सामान्य पाबंदियों पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद को बार-बार बेहतर करने वाले एआई पर रोक लगाना कोई विवाद की बात नहीं होनी चाहिए। मेरा मानना है कि अमेरिका ऐसे समझौते की अगुवाई कर सकता है, जिसे लागू भी किया जा सके और जिसकी जांच भी हो सके। इसके तहत इस तरह के एआई पर रोक लगाई जाए और सबसे एडवांस एआई लैब्स की कुछ निगरानी भी हो।” संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद अमेरिका और चीन सुपरइंटेलिजेंस पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए हैं। वॉल्ट्ज ने सीएनएन से कहा कि इस बातचीत में विशेषज्ञों को साथ लाया जाएगा, जो जैविक हथियारों से जुड़ी रिसर्च और परमाणु सिस्टम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई के लिए सुरक्षा नियमों पर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे एडवांस एआई मॉडल के मामले में अमेरिका और चीन बाकी दुनिया से काफी आगे हैं। मुझे लगता है कि दुनिया को इस बातचीत को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने ऐसे नियमों के खिलाफ चेतावनी दी, जो एआई के क्षेत्र में अमेरिका की प्रतिस्पर्धा करने की ताकत को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने एबीसी से कहा कि अमेरिका के मौजूदा आपराधिक और सिविल कानून पहले से ही अधिकारियों को ऐसे लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की इजाजत देते हैं, जो एआई का इस्तेमाल करके अपराध करते हैं। ब्लैंच ने कहा, “हर समस्या का जवाब ज्यादा कानून, ज्यादा कानून और ज्यादा कानून बनाना नहीं होता।” जब एआई सिस्टम में कोई समस्या सामने आती है, तो कंपनियां अपने सिस्टम को रोक या उनमें बदलाव कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि समाधान यह नहीं है कि अचानक इसे इस तरह से नियंत्रित करना शुरू कर दिया जाए कि इस क्षेत्र में दुनिया की अगुवाई करने के बजाय अमेरिका दूसरे या तीसरे स्थान पर पहुंच जाए।
मान और केजरीवाल ने बदला लेने के लिए एलपीयू के छात्रों को मोहरा बनाया, गुंडे बुलाकर आंदोलन को भड़कायाः मजीठिया

चंडीगढ़। फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में विरोध-प्रदर्शन और हिंसा पर महासचिव शिरोमणि अकाली दल बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही आरोप लगाया कि आप नेताओं ने बदला लेने के लिए छात्रों को मोहरा बनाया है। बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर लिखा, “गुरु-दोखी मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने बदला लेने के लिए एलपीयू के छात्रों को मोहरा बनाया। अशोक मित्तल भाजपा में आए तो एलपीयू बंद करवाने की घिनौनी चाल चली गई। बाहर से गुंडे लाकर आंदोलन भड़काया और हिंसक बनाया क्योंकि अशोक मित्तल ने अरविंद केजरीवाल से अपनी दिल्ली स्थित कोठी को खाली करवा लिया था और मनीष सिसोदिया के बच्चों की फीस जो भरी जा रही थी, वह बंद करवा दी गई थी।” बिक्रम मजीठिया ने कहा, “आंदोलन भड़काने के वीडियो सबूत हैं, जिसमें दिख रहा है कि हाथों में वाकीटॉकी सेट, बैट-हथियार लिए उपद्रव किए जा रहे हैं। रात में दिल्ली वाले गुंडे कथित तौर पर पकड़े और छोड़े, ये कौन सी पुलिस है? पहले पुलिस की ढीली-ढाली नीति, फिर सख्त कार्रवाई से स्टूडेंट्स भड़के, उनकी आड़ में कथित बाहरी तत्वों से आग लगवाई-तोड़फोड़ करवाई और फिर उन्हीं छात्रों पर लाठीचार्ज- यही है तेरी कानून-व्यवस्था?” मजीठिया ने कहा, “हजारों का रोजगार, लाखों बच्चों की पढ़ाई दांव पर, क्या इससे पंजाब में निवेश आएगा? सिर्फ अपनी निजी खुंदक निकालने के लिए ये काम किया गया। सरकारी कोठियों वाले कांड और गायत्री बिश्नोई मामले से ध्यान भटकाना ही असली मकसद था। बता दें कि एक छात्रा से कथित दुष्कर्म की सूचना के सोशल मीडिया ग्रुप्स में वायरल होने के बाद शनिवार देर रात लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में छात्रों ने भारी हंगामा किया। गुस्साए छात्रों ने पहले गर्ल्स हॉस्टल के पास प्रदर्शन शुरू किया और फिर देखते ही देखते यह प्रदर्शन उग्र हो गया। छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर भारी तोड़फोड़ की और एक कैंपस में आग भी लगा दी। हंगामा इतना बढ़ गया कि प्रदर्शन करते हुए छात्र यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर आ गए। गेट पर भी छात्रों ने तोड़फोड़ की और उसके बाद चंडीगढ़-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना लगा दिया। छात्रों ने हाईवे को बंद कर दिया, जिससे वहां जाम लग गया और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, रविवार शाम को भी एलपीयू में हिंसा भड़क उठी। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इतना ही नहीं पत्थरबाजी के साथ कई पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई।
खेल महाकुंभ 2026: गुजरात में स्कूल से राज्य स्तर तक प्रतिभा दिखाने का मौका, 76 लाख युवाओं ने किया रजिस्ट्रेशन

गांधीनगर। गुजरात सरकार राज्य की युवा खेल प्रतिभाओं को स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हर साल की तरह इस बार भी ‘खेल महाकुंभ-2026’ का आयोजन कर रही है। इसको लेकर छात्र और युवा खासे उत्साहित हैं और बेसब्री से इस आयोजन का इंतजार कर रहे हैं। गांधीनगर की रहने वाली प्रतिभागी करिश्मा ने बताया कि उन्होंने ‘2026 खेल महाकुंभ’ में एथलेटिक्स खेल में रजिस्ट्रेशन कराया है। वह खेल महाकुंभ का बहुत उत्सुकता से इंतजार कर रही हैं। खेल महाकुंभ में उन्हें अपनी प्रतिभा और मेहनत को एक नया प्लेटफॉर्म देने का अवसर मिलेगा। प्रतिभागी ध्रुवी सोलंकी ने कहा, “मैंने 2026 खेल महाकुंभ में जूडो गेम में भाग लिया है। मैं खेल महाकुंभ के माध्यम से गुजरात का नाम रोशन करना चाहती हूं।” वहीं प्रतिभागी महिमा चौधरी ने कहा, “खेल महाकुंभ मेरे लिए केवल एक प्रतियोगिता ही नहीं है, बल्कि मेरी प्रतिभा और मेहनत को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मंच है।” राज्य के खेल विभाग ने ‘खेल महाकुंभ-2026’ के लिए 29 अगस्त को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू किया था, जो 22 सितंबर की शाम तक खुला रहा। रजिस्ट्रेशन करने वाले खिलाड़ियों ने तैयारी भी शुरू कर दी है और अपने-अपने कोच के मार्गदर्शन में खेल को निखारने में जुट गए हैं। श्री जीएम चौधरी सार्वजनिक कन्या विद्यालय के एथलेटिक कोच जीवन जी ठाकुर ने कहा कि खेल महाकुंभ को लेकर बच्चों में बहुत उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीण स्कूलों के बच्चे को मौका मिल रहा है और वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। श्री जीएम चौधरी सार्वजनिक कन्या विद्यालय के जूडो कोच हेतल ठाकुर ने कहा कि 2010 से लगातार हर साल खेल महाकुंभ का आयोजन हो रहा है और इसके माध्यम से विभिन्न गांवों के बच्चों को एक अच्छा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो रहा है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए साल 2010 में ‘खेल महाकुंभ’ की शुरुआत की थी, जो आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गया है। इसका अंदाजा इस वर्ष खेल महाकुंभ के लिए हुए रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन से समझा जा सकता है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार एथलेटिक्स, बैडमिंटन, आर्चरी, बॉक्सिंग, बास्केटवॉल, फुटबाल, जिम्नास्टिक, हॉकी, जूडो और वेटलिफ्टिंग जैसे 35 से अधिक खेल प्रतियोगिताओं के लिए कुल 76 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों और युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें 45 लाख से अधिक पुरुष और 30 लाख से ज्यादा महिला प्रतिभागी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के लिए 3 लाख 49 हजार से अधिक टीमों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें 2 लाख 21 हजार से ज्यादा पुरुष टीमें और 1 लाख 27 हजार से ज्यादा महिला टीमें शामिल हैं। जीएएस के एडिशनल डायरेक्टर अमित जी. गामित ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी ‘खेल महाकुंभ 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। तालुका, जिला और राज्य स्तर पर विजेता खिलाड़ियों को डीबीटी के जरिए आरटीजीएस से नकद पुरस्कार का भी वितरण किया जाएगा। ‘खेल महाकुंभ’ के अंतर्गत अंडर-11 अंडर-14 वर्ग में भी प्रतिभाशाली खिलाड़ों का चयन किया जाएगा। गुजरात सरकार ‘खेल महाकुंभ-जमीनी स्तर से महानता तक’ मंत्र के साथ इस खेल महोत्सव का आयोजन कर रही है। खेल महाकुंभ-2026 के लिए गुजरात के सभी जिलों से बड़ी तादाद में खिलाड़ियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। खेल महाकुंभ में राज्य के युवा खिलाड़ियों को जहां स्कूल से स्टेट लेवल पर होने वाले कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने और खुद को साबित करने का मौका मिलेगा, वहीं कॉम्पिटिटिव एक्सपीरियंस के साथ अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म भी मिलेगा।