एशियन गेम्स 2026: शूटिंग से भारत की झोली में आया एक और मेडल, ईशा ने 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में जीता सिल्वर

टोयोटा। भारत की निशानेबाज ईशा सिंह ने सोमवार को एशियाई खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। अत्यधिक दबाव के बीच ईशा ने गजब के मानसिक संतुलन का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्हें कई बार कठिन शूट-ऑफ का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी एकाग्रता नहीं खोई और दृढ़ संकल्प के साथ दूसरा स्थान हासिल कर देश को गौरवान्वित किया। एशियन गेम्स में ईशा का यह तीसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने हांग्जो 2023 में 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में सिल्वर मेडल जीता था। ईशा ने 580-22x के स्कोर के साथ आठवें स्थान पर रहते हुए मुश्किल से फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। हालांकि, मेडल राउंड शुरू होते ही भारतीय खिलाड़ी ने उस शुरुआती संघर्ष को पीछे छोड़ दिया और फाइनल की शुरुआत अपने पांच शॉट्स में पांच परफेक्ट हिट्स के साथ की। शुरुआती दौर में वह लीडर्स में बनी रहीं, लेकिन टॉप पर मुकाबला बार-बार कड़ा होता रहा। चीन की जिओ जियारुइक्सुआन लगातार परफेक्ट सीरीज के साथ आगे बढ़ गईं, जबकि उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक भी मेडल की दौड़ में मजबूती से बनी रहीं। एलिमिनेशन राउंड में और भी उतार-चढ़ाव आए। तीन हिट्स के बाद ईशा स्टैंडिंग में नीचे खिसक गईं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 5/5 का स्कोर किया और खुद को मुकाबले में बनाए रखा। जब वियतनाम की ट्रिन्ह थू विन्ह बाहर हुईं, तो भारतीय खिलाड़ी का मेडल पक्का हो गया। इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला ईशा और किम के बीच शूट-ऑफ के एक असाधारण क्रम में बदल गया, क्योंकि दोनों 34 हिट्स पर बराबरी पर थीं। दोनों शूटर्स ने शुरुआत में तीन-तीन हिट्स किए, जिससे एक और शूट-ऑफ की स्थिति बन गई। एक तकनीकी रुकावट ने तनाव और बढ़ा दिया, जिसके बाद सिंगल-शॉट की स्थिति के साथ मुकाबला फिर से शुरू हुआ। आखिरकार ईशा ने बाजी मारी और ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति पक्की की और गोल्ड के लिए जिओ से मुकाबला करने का हक हासिल किया। फाइनल मुकाबला भी उतना ही रोमांचक रहा। जिओ और ईशा के बीच सिर्फ एक हिट का अंतर था, तभी भारतीय खिलाड़ी ने चार हिट्स लगाकर एक और शूट-ऑफ की स्थिति बना दी। इसके बाद दोनों शूटर्स ने चार-चार हिट्स किए, जिससे मुकाबला एक और शूट-ऑफ में चला गया। गोल्ड मेडल बस मिलने ही वाला था कि ईशा ने दो हिट किए, जबकि शियाओ ने तीन हिट किए, जिससे भारतीय खिलाड़ी को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। उनके कुल स्कोर 38 तक पहुंचे, जो 2023 में हांग्जो एशियन गेम्स में चीन की लियू रुई द्वारा बनाए गए 38 हिट के गेम्स रिकॉर्ड के बराबर था। इस मेडल के साथ ईशा की तेजी से बढ़ती उपलब्धियों की सूची में एक और कामयाबी जुड़ गई है। भारतीय खिलाड़ी के नाम अभी महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। उन्होंने मई में म्यूनिख वर्ल्ड कप में 43 हिट किए थे और वह अभी वर्ल्ड नंबर एक भी हैं। ईशा का सिल्वर मेडल भारत के लिए शूटिंग रेंज में एक रोमांचक सुबह का समापन था, जो टीम फाइनल में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया। टीम फाइनल में एक जरूरी टारगेट चूकने के कारण भारतीय महिलाएं पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय टीम में दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर, एशियन गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट ईशा सिंह और कई बार की एशियन गेम्स की मेडलिस्ट राही सरनोबत शामिल थीं। प्रिसिजन और रैपिड इवेंट्स में उनका कुल स्कोर 1727-56x रहा और एक और मेडल हाथ से निकल गया।
‘आने वाली पीढ़ी को सही ज्ञान देना जरूरी’, सुनील लहरी ने बताई परवरिश की अहमियत

मुंबई। अभिनेता सुनील लहरी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर अपने विचार साझा करते हैं। सोमवार को उन्होंने बच्चों पर माता-पिता की परवरिश के असर को लेकर बात की और बताया कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर बनाने के लिए किस तरह के संस्कार देने चाहिए। अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने माता-पिता द्वारा दी गई अच्छी शिक्षा और गुण पर जोर दिया। वीडियो में वह कहते हैं, “सभी माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। मुझे भी मेरे मेरे पिता माता ने अच्छी शिक्षा और गुण दिए हैं। बचपन में मेरे पिता जी हमेशा कहा करते थे कि जैसा खाए अन्न वैसा करे मन, जैसा पिए पानी वैसी बोले वाणी, जैसी होए संगत वैसी होए रंगत यानी कि अगर आप अच्छा सात्विक भोजन करेंगे, तामसिक भोजन से दूर रहेंगे तो आपके विचार अच्छे रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “उसी तरह अगर आप शुद्ध पानी पिएंगे। इसका मतलब कि अगर आप शराब या नशीले पदार्थों से परहेज करेंगे तो आपकी वाणी अच्छी रहेगी और गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अगर आपकी संगत अच्छी रहेगी यानी कि विद्वानों की संगत रहेगी, तो आपके अंदर अच्छे विचार आएंगे।” अभिनेता ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, “हमें आने वाली पीढ़ी को अच्छे विचारों से लोगों को अवगत करवाना चाहिए। उनका भविष्य उज्ज्वल बनाने में मदद करनी चाहिए। आप लोग खुश रहिए, स्वस्थ रहिए जय श्री राम। अभिनेता ने वीडियो पोस्ट कर कैप्शन लिखा, “सभी माता पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और गुण देना चाहते हैं, बचपन में पापा द्वारा कहीं एक बात मैं आप लोगों से शेयर करता हूं।” अभिनेता सुनील टेलीविजन इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्होंने रामानंद सागर के ऐतिहासिक टीवी सीरियल ‘रामायण’ में ‘लक्ष्मण’ के किरदार से काफी लोकप्रियता हासिल की थी। वर्तमान समय में अभिनेता फिल्मों और टीवी से दूर हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़े रहते हैं। –आईएएनएस एनएस/एएस
शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव आयोग पर वोटिंग से वंचित करने का लगाया आरोप, ‘सामना’ में जन-आक्रोश की चेतावनी

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और राजनीतिक फायदे के लिए अहम संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह आलोचना उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई है जिनमें चुनाव आयोग के अंदर वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) को लेकर गंभीर अंदरूनी मतभेदों का खुलासा हुआ था। पार्टी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी बातों के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और राजनीतिक तनाव बढ़ा है, जिसके चलते भारत के बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित पक्षपात की कड़ी निंदा करते हुए पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट ने मौजूदा स्थिति को भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि संवैधानिक पदों का इस्तेमाल पक्षपाती तरीके से किया जा रहा है। इसमें आरोप लगाया गया कि चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की रणनीति के तहत महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे अहम राज्यों में 13 करोड़ वोटरों को सुनियोजित तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। संपादकीय में कहा गया, “मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों ने एक स्वायत्त संस्था की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाया है। लोकतंत्र के निष्पक्ष मध्यस्थ के तौर पर काम करने के बजाय, चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।” इसमें शीर्ष अधिकारियों के तुरंत इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की गई। संपादकीय में कहा गया कि इस विवाद ने लोगों में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इसमें दावा किया गया, “नई दिल्ली में वीकेंड पर हजारों प्रदर्शनकारी, छात्र समूह और राजनीतिक कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जमा हुए और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।” संपादकीय के अनुसार, भारी पुलिस और सुरक्षा बल ने विरोध स्थल और सेंट्रल दिल्ली के अहम इलाकों को घेर लिया और कई गिरफ्तारियां कीं, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशनों, रेलवे प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक जगहों पर जमा होकर कथित चुनावी गड़बड़ियों और प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। संपादकीय में कहा गया, “केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के इस खुलासे के बाद तनाव और बढ़ गया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने, जब वे एक सीनियर नौकरशाह के तौर पर काम कर रहे थे, उन्हें भाजपा में शामिल होने और केरल से पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी, और जीतने पर केंद्र में मंत्री पद का वादा किया था।” उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी ताकतों को एकजुट कर दिया है। खबरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वामपंथी दलों से संपर्क किया है। उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आग्रह किया है ताकि सरकार के खिलाफ एक मिली-जुली रणनीति बनाई जा सके और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की जा सके। वहीं, भाजपा के प्रवक्ताओं और भाजपा शासित राज्यों के नेताओं ने चुनाव आयोग का बचाव किया और इन आरोपों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनता की नाराजगी तेजी से एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि जब तक संवैधानिक गरिमा बहाल नहीं की जाती, तब तक जनता का व्यापक असंतोष सरकार की वैधता के लिए चुनौती बना रहेगा।
दिल्ली की अदालत ने यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किया। इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को महिला पहलवानों ने चुनौती दी है। राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने सोमवार को चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सेशन कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी नोटिस भेजा। इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। बृजभूषण शरण सिंह और महिला पहलवानों के बीच यह विवाद 2023 में सामने आया था। कई नामी महिला पहलवानों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच बृजभूषण शरण सिंह की ओर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, डब्ल्यूएफआई कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया गया। इस मामले में डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव विनोद तोमर को सह-आरोपी बनाया गया। महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर, पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 15 जून 2023 को पुलिस ने कई धाराओं के तहत अपराधों के लिए बृजभूषण के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 10 मई 2024 को मामले में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न व महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। 3 अगस्त को मामले में दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। चार महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर की बरी होने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है और सबूतों का गलत व चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। महिला पहलवानों का कहना है कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है। याचिका के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के समर्थन वाली पूरी तस्वीर देखने के बजाय छोटी-छोटी और गैर-जरूरी गलतियों पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हीं के आधार पर बृजभूषण सिंह के खिलाफ पूरे मामले को खारिज कर दिया।
उज्जैन में शाही मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने को लेकर बवाल; पत्थरबाजी के बीच छोड़े गए आंसू गैस के गोले

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सोमवार सुबह तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। ऐतिहासिक शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को आंशिक रूप से हटाने के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान पत्थरबाजी की गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। सिंहस्थ 2028 कार्यक्रम की तैयारियों के बीच मस्जिद परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है। यह विवाद कंथल स्क्वायर से गोपाल मंदिर तक लगभग 900 मीटर के रास्ते को चौड़ा करने के काम को लेकर है। अधिकारी इस रास्ते को 15 मीटर तक चौड़ा कर रहे हैं ताकि हिंदुओं के इस बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान आने वाले भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा सके। इस प्रोजेक्ट के रास्ते में कई धार्मिक ढांचे आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि रास्ते में पड़ने वाले लगभग 60 ऐसे ढांचों में से ज्यादातर को पहले ही हटाया जा चुका है। हालांकि, शाही मस्जिद और ‘खड़े हनुमान मंदिर’ के पास स्थित एक मजार हाल के दिनों में विरोध का केंद्र बन गए हैं। शाही मस्जिद, जिसे समुदाय के लोग सदियों पुरानी वक्फ संपत्ति बताते हैं (कुछ जानकारियों के अनुसार यह लगभग 1390 की है), के कुछ हिस्सों जैसे प्रार्थना कक्ष, एक मीनार और उससे जुड़ी संरचनाओं, को आंशिक रूप से गिराने का प्रस्ताव है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले उज्जैन नगर निगम के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें आने वाले सिंहस्थ के लिए जनहित और ट्रैफिक की जरूरतों का हवाला दिया गया था। इस मामले से जुड़ी अगली सुनवाई सोमवार को हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में होनी थी। कार्रवाई की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने भारी मशीनरी (जिसमें अर्थ-मूविंग मशीनें भी शामिल थीं) के साथ लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया। मुस्लिम समुदाय के लोग शनिवार रात से ही शाही मस्जिद परिसर और आसपास की सड़कों पर इकट्ठा होने लगे और नारेबाजी करने लगे। यह विरोध रविवार रात तक जारी रहा। आवाजाही रोकने के लिए ‘कंथल-गोपाल मंदिर’ मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियों ने मजबूत मौजूदगी बनाए रखी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार को जब हालात तनावपूर्ण बने हुए थे, तो कुछ युवाओं ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी जारी रखी जबकि पुलिसकर्मियों द्वारा बार-बार आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे। भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश में 18 से ज्यादा आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। हालात को सामान्य करने के लिए सुरक्षा बलों की कोशिशों के बीच मौके पर तनाव बना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी के दौरान एक घटना में क्राइम ब्रांच की टीआई पुष्पा पांचाल के हाथ में चोट लग गई। पुलिस के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का एक समूह आगे बढ़ रहा था। जब महिला पुलिस की टीम उन्हें सुरक्षित रूप से हटाने की कोशिश कर रही थी, तो अधिकारी उस समूह के पास पहुंचे जो खुद को छिपाने के लिए एक चादर का इस्तेमाल कर रहे थे। चादर के कोने से टीआई पांचाल का हाथ कट गया। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और उनके हाथ पर पट्टी बांधी गई। पुलिस ने पुष्टि की कि विरोध कर रही महिलाओं में से कोई भी घायल नहीं हुईं और सभी सुरक्षित रहीं। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि सड़क चौड़ी करने का काम ‘सिंहस्थ 2028’ के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे बुनियादी ढांचे के सुधार का हिस्सा है। इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। शहर भर में कई अन्य धार्मिक और गैर-धार्मिक ढांचों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है ताकि महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र जैसी अहम जगहों के पास भीड़-भाड़ कम की जा सके। समुदाय के प्रतिनिधियों ने मस्जिद को न हटाने की मांग की है जबकि अधिकारियों का कहना है कि यह काम कानूनी प्रक्रियाओं और विकास योजनाओं के तहत किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मस्जिद के आसपास सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है और हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान स्थिति को और बिगड़ने से रोकने पर ध्यान दिया जा रहा है।
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं का संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना एकमात्र एजेंडाः जेपी नड्डा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं का एकमात्र एजेंडा देश की स्वतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम और उन्हें कमजोर करना है।” केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “आज जब 140 करोड़ भारतीय अपनी कड़ी मेहनत से विकसित भारत का संकल्प पूरा कर रहे हैं और दुनियाभर में भारत का नाम हो रहा है, तो दुख की बात है कि कांग्रेस और पूरा इंडी गठबंधन देश की इस तरक्की को देखकर निराश और हताश है। विपक्ष के सभी झूठे आरोप तथ्यों की कसौटी पर बार-बार गलत साबित हुए हैं। चुनाव आयोग से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालतों तक, उनके हर झूठ की पोल खुल चुकी है। जब उनके पास कोई नीति या विजन नहीं होता, तो वे देश में भ्रम और अराजकता फैलाने के लिए नई-नई साजिशें रचते हैं। कुछ दिन पहले ही हमने देखा कि कैसे एक झूठी खबर पर पूरे देश में हंगामा खड़ा किया गया था। अब, जब चुनाव आयोग के सभी सदस्यों ने उनके लगाए हर झूठ का पर्दाफाश कर दिया है, तो वे फिर से माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।” राहुल गांधी कान खोलकर सुन लें! किसी झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता और न ही सच कभी हारता है। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का एकमात्र एजेंडा देश की स्वतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना और उन्हें कमजोर करना है।” यह वही ‘टूलकिट मानसिकता’ है जो देश के विकास को रोकने के लिए हर सुबह एक नई साजिश रचती है। नड्डा ने कहा, “आरोप लगाना, देश का माहौल खराब करना और भाग जाना, विपक्ष का काम करने का यही तरीका बन गया है। उन्हें देश की सुरक्षा, जन-कल्याण या देश के सम्मान और प्रतिष्ठा की कोई परवाह नहीं है। उनका एकमात्र मकसद सत्ता हासिल करना है, लोगों की सेवा करना नहीं बल्कि परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देना और अपना निजी फायदा उठाना है। जनता ने अतीत में देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने वाली ताकतों को करारा सबक सिखाया है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा। जनता की अदालत में उनकी हर गलतफहमी और साजिश चकनाचूर हो जाएगी।
एसआईटी से वीरमणि के पॉक्सो मामले से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर सीएम विजय और दो मंत्रियों से पूछताछ करने की मांग

चेन्नई। डीएमके ने जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि के खिलाफ यौन शोषण के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी से) से कहा है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों से उन आरोपों के बारे में पूछताछ करे, जिनमें कहा गया है कि पार्टी ने उन्हें बचाया था। डीएमके के कोषाध्यक्ष और सांसद टी.आर. बालू ने एसआईटी को एक याचिका सौंपी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय, मंत्री अधव अर्जुन और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार के बयानों के पीछे के सबूत मांगे गए। याचिका में कहा गया कि ये दावे जांच के लिए अहम हैं। नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़े एक मामले में वीरमणि को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने राजनीतिक बयानबाजी और निष्पक्ष जांच की मांग को हवा दी है। बालू की याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने 25 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके वीरमणि को बचा रही थी। याचिका में कहा गया है कि उसी दिन अधव अर्जुन ने दावा किया कि पार्टी ने वीरमणि को बचाया और उनके खिलाफ पहले से चल रहे एक मामले को गलत तरीके से बंद कर दिया। याचिका के मुताबिक, निर्मल कुमार ने 26 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके को वीरमणि को बचाने के बदले 500 करोड़ रुपये मिले थे। डीएमके ने इन दावों को मानहानिपूर्ण बताया। बालू ने कहा कि जांचकर्ताओं को इन बयानों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि हो सकता है कि इन तीनों नेताओं के पास मामले से जुड़े ऐसे सबूत हों जो उन्होंने अभी तक पुलिस को नहीं दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि उन्हें जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिली हो, जिसमें केस डायरी की सामग्री भी शामिल हो सकती है और उन्होंने उसे सार्वजनिक कर दिया हो। उन्होंने एसआईटी से यह पता लगाने को भी कहा कि क्या ये आरोप बेबुनियाद हैं। याचिका में जांचकर्ताओं से आग्रह किया गया कि वे मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों को बुलाएं, उनके बयान दर्ज करें और उनके दावों का समर्थन करने वाले कोई भी दस्तावेज या अन्य सामग्री हासिल करें। इसमें यह भी पूछा गया कि मामले से जुड़े सबूत जांच अधिकारियों को पहले क्यों नहीं सौंपे गए और क्या बिना इजाजत के गोपनीय रिकॉर्ड देखे या उजागर किए गए। बालू ने एसआईटी से कहा कि वह तुरंत सबूत इकट्ठा करे और उन्हें छिपाने या नष्ट होने से रोके। उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह पता चलता है कि जानकारी छिपाई गई थी, जांच से जुड़ी सामग्री गलत तरीके से उजागर की गई थी, या आरोप जानबूझकर झूठे थे, तो ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पोक्सो) और ‘भारतीय न्याय संहिता’ के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। डीएमके ने कहा कि कथित अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून का सामना करना चाहिए और सार्वजनिक दावों की निष्पक्ष जांच से एसआईटी की जांच पर भरोसा बढ़ेगा।