वित्त मंत्री सीतारमण ने जॉर्डन की मंत्री से की मुलाकात, कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के दोहा में एआईआईबी 2026 की सालाना बैठक के दौरान जॉर्डन की एमओपीआईसी (योजना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय) की मंत्री जेइना जैद तौकान से मुलाकात की। इस दौरान, दोनों मंत्रियों ने भारत और जॉर्डन के बीच कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कतर के दोहा में एआईआईबी 2026 की सालाना बैठक के दौरान जॉर्डन की एमओपीआईसी की मंत्री जेइना जैद तौकान से मुलाकात की।” मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने भारत और जॉर्डन के बीच कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को, मजबूत करने पर चर्चा की, खासकर खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, व्यापार और निवेश के मामलों में। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर जोर दिया। जेइना ज़ैद तौकान ने कहा कि भारत जॉर्डन के लिए एक अहम बाजार है और जॉर्डन उर्वरक, ऊर्जा, पानी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं सहित कई क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने और उसे मजबूत करने का इच्छुक है, साथ ही वे जॉर्डन में निवेश के और मौकों की उम्मीद कर रहे हैं। इससे पहले, सोमवार को एक बयान में कहा गया था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए कतर पहुंच गई हैं। वित्त मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त मंत्री अगले दो दिनों के दौरान दोहा में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की 11वीं वार्षिक बैठक और एआईआईबी इन्वेस्टर्स डायलॉग 2026 में भाग लेंगी।” वह एआईआईबी के अध्यक्ष के साथ-साथ जॉर्डन, स्विट्जरलैंड, अल्जीरिया, सऊदी अरब और नेपाल के अपने समकक्षों के साथ अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी। वित्त मंत्री एआईआईबी में भारत के गवर्नर के रूप में बैंक की वार्षिक बैठक में भाग लेंगी। आधिकारिक यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कतर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगी। इसके अलावा, वह कतर के कारोबारी नेताओं और निवेशकों के साथ भी बातचीत करेंगी। एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जो एशिया और दुनिया भर में आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए सड़कों, स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रणालियों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए वित्त पोषण करता है। बीजिंग में मुख्यालय वाले इस बैंक जनवरी 2016 में 100 अरब डॉलर की पूंजी के साथ काम शुरू किया था। बैंक के 111 स्वीकृत सदस्य देश हैं। बैंक के प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण की रक्षा करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करना, परिवहन एवं डिजिटल नेटवर्क को बेहतर बनाना और देशों के बीच जल संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है। इसके अलावा, बैंक बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी विकास परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी निवेशकों के साथ भी काम करता है। भारत और कतर के बीच मजबूत द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध हैं। भारत की पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 20 साल का एलएनजी समझौता है, जिसके तहत 2028 से 2048 तक हर साल 75 लाख टन एलएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
चुनाव आयोग में नियमित संवाद और बैठकों से सुलझते थे मतभेद : पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी

नई दिल्ली। भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों और बैठकों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान आयोग में नियमित रूप से बैठकें होती थीं और किसी भी मुद्दे पर मतभेद होने की स्थिति में उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता था। एसवाई कुरैशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जब कोई चुनाव नहीं होता था, तब भी चुनाव आयोग के सदस्य सप्ताह में कम से कम दो बार बैठक करते थे। चुनाव के दौरान बैठकों की आवृत्ति बढ़ जाती थी तथा सदस्य लगभग रोजाना मिलते थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का काम एक गंभीर संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सदस्यों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह कहती है कि उनके कार्यकाल के दौरान भी आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होते थे, तो यह बात सही हो सकती है। उन मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाती थी। यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती थी, तो बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता था। कुरैशी ने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संस्था है और तीनों सदस्यों के मतों का समान महत्व होता है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त की राय बाकी सदस्यों से अलग भी हो जाए, तो संस्थागत निर्णय तीनों सदस्यों के मतों के आधार पर लिया जाता है। अंतिम निर्णय को चुनाव आयोग का सामूहिक निर्णय माना जाता है। हाल में हुई चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसमें सामने आए नोट्स का जिक्र करते हुए कुरैशी ने सवाल उठाया कि यदि अब आयोग की ओर से नियमित बैठकें करने, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) जारी करने और अधिकारियों को सदस्यों की बात सुनने की बात कही जा रही है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पहले ऐसा नहीं होता था? उन्होंने कहा कि इन बातों से आयोग के भीतर की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। भविष्य में व्यवस्था सुधारने की बात अपनी जगह है, लेकिन यह भी बताया जाना चाहिए कि अतीत में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई या उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग में पारदर्शिता, नियमित संवाद और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में आपसी समन्वय और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
स्पेसएक्स का स्टारशिप उपग्रह कक्षा में पहुंचा, 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक उपग्रहों को किया तैनात

नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने सोमवार को अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। कंपनी का विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया और इसके साथ ही उसने 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक वी3 उपग्रहों की सफल तैनाती भी की। यह उपलब्धि चंद्रमा और मंगल ग्रह के भविष्य के अभियानों के लिए पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि मिशन पूरी तरह सहज नहीं रहा। उड़ान के दौरान वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम (आरवी) इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया, जिससे मिशन कंट्रोल टीम के सामने कुछ समय के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। लेकिन शेष इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद इंजीनियरों ने मिशन को जारी रखने का निर्णय लिया और अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक कक्षा तक पहुंचाया। स्पेसएक्स के अनुसार, स्टारशिप लगभग 10 घंटे की उड़ान के दौरान पृथ्वी की छह परिक्रमाएं पूरी करेगा और इसके बाद चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर में नियंत्रित लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) करेगा। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि “सभी 26 स्टारलिंक वी3 परिचालन उपग्रह सफलतापूर्वक तैनात कर दिए गए हैं और सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं।” इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी के स्टारलिंक वी3 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। स्पेसएक्स का कहना है कि ये उपग्रह वैश्विक इंटरनेट सेवा की गति, नेटवर्क की विश्वसनीयता और सिस्टम की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। तकनीकी रूप से स्टारलिंक वी3 उपग्रह पिछले संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हैं। कंपनी के अनुसार, प्रत्येक उपग्रह 1 टेराबिट प्रति सेकंड (टीबीपीएस) तक की डाउनलिंक क्षमता और 160 गीगाबिट प्रति सेकंड (जीबीपीएस) तक की अपलिंक क्षमता प्रदान करने में सक्षम है। यह स्टारलिंक वी2 उपग्रहों की तुलना में डाउनलिंक क्षमता में लगभग 10 गुना और अपलिंक प्रदर्शन में 22 गुना वृद्धि दर्शाता है। तैनाती के बाद उपग्रह अपने एंटेना खोलेंगे, सौर पैनलों को विस्तारित करेंगे और रेडियो फ्रीक्वेंसी तथा लेजर लिंक के माध्यम से ग्राउंड स्टेशनों और व्यापक स्टारलिंक नेटवर्क से प्रारंभिक संपर्क स्थापित करेंगे। इसके बाद वे अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स की मदद से धीरे-धीरे निर्धारित परिचालन कक्षा तक पहुंचेंगे। स्पेसएक्स ने बताया कि वी3 उपग्रहों की बेहतर क्षमता का आधार कंपनी द्वारा विकसित अगली पीढ़ी के बीमफॉर्मिंग चिप्स हैं। यह तकनीक विभिन्न डेटा बीमों के बीच ट्रैफिक को अधिक कुशलता से संचालित करने में सक्षम है और पहले के सिस्टम की तुलना में मॉडेम थ्रूपुट क्षमता को 64 गुना तक बढ़ाती है। कंपनी का कहना है कि इससे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में भी बेहतर इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। साथ ही नेटवर्क मांग के अनुसार अपनी क्षमता को गतिशील रूप से समायोजित करने में सक्षम होगा।
दिल्ली में आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों ने दर्ज कराई शिकायत

नई दिल्ली। दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल समेत तमाम आप नेता और कार्यकर्ता सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचे और भाजपा पर तीखा हमला बोला। दिल्ली में पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मिली जानकारी के मुताबिक, विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और डराने-धमकाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। एक बयान में कहा गया है कि पीडब्ल्यूडी के असिस्टेंट इंजीनियर की शिकायतों के आधार पर कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। इस घटना के संबंध में कुछ अन्य शिकायतें भी मिली हैं, जिन पर जांच के दौरान कार्रवाई की जाएगी। यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज हुई है, जब पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान हुए विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक घमासान जारी है। इससे पहले सड़क निरीक्षण के दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे प्रवेश वर्मा पर साहिब सिंह नाम के शख्स को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था। घटना के बाद साहिब सिंह ने प्रवेश वर्मा के इस्तीफे और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। उनका दावा था कि वह घटना के समय आप विधायक जरनैल सिंह के इंस्टाग्राम पेज पर लाइव वीडियो बना रहे थे। साहिब सिंह के मुताबिक, वह विधायक जरनैल सिंह के साथ वहां गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सड़क की खराब गुणवत्ता दिखाने के दौरान विवाद हुआ और प्रवेश वर्मा ने पहले उनका मोबाइल नीचे किया और फिर उन्हें थप्पड़ मार दिया। प्रवेश वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया था कि युवक ने उनके परिवार के सदस्यों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और उन्होंने उसी पर प्रतिक्रिया दी थी। युवक ने इस आरोप से इनकार किया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। आम आदमी पार्टी ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की । अब इसी घटनाक्रम के बीच पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की शिकायत पर आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।
आईएसआईएस से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल पर बड़ा फैसला, एनआईए कोर्ट ने चार दोषियों को सुनाई सजा

नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू जिला अदालत परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई। एनआईए के अनुसार, उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं अफशान परवेज जराबी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने उमर निसार पर 36 हजार रुपए, रमीज अहमद लोन पर 31 हजार रुपए, तनवीर अहमद भट पर 23 हजार रुपए और अफशान परवेज जराबी पर 9 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। चारों आरोपियों को विशेष अदालत ने इससे पहले 17 सितंबर को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अलग-अलग अपराधों का दोषी पाया था। एनआईए के मुताबिक मामला आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री के प्रसार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, उनकी भर्ती करने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ा है। एनआईए के केस के मुताबिक, साजिश का उद्देश्य भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर उनकी भर्ती करना और उन्हें भारत के खिलाफ हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना था। जांच एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग संघर्ष वाले क्षेत्रों से काम कर रहे आईएसआईएस से जुड़े लोगों ने भारत में मौजूद अपने सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी ऑनलाइन पहचान के जरिए एक नेटवर्क तैयार किया था। इसका इस्तेमाल आईएसआईएस से जुड़े प्रचार के प्रसार के लिए किया जाता था। एनआईए ने दावा किया कि ऑनलाइन गतिविधियों के साथ जमीन पर आतंकी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियां भी की जा रही थीं। एनआईए की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग भारत केंद्रित आईएसआईएस प्रचार पत्रिका ‘सौत-अल-हिंद (द वॉयस ऑफ हिंद)’ के लिए सामग्री तैयार करने, उसे संपादित करने, प्रकाशित करने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाने में शामिल थे। जांच एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क भारतीयों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान समेत आईएसआईएस से प्रभावित अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित करने और इसमें मदद करने का भी काम करता था। एनआईए ने जांच के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद करने का दावा किया। इनमें ‘वॉयस ऑफ हिंद’ की पीडीएफ, मारे गए आतंकियों के पोस्टर, कट्टरपंथ से जुड़ी सामग्री, आईएसआईएस के प्रचार से जुड़े वेब लिंक, आईएसआईएस के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार हासिल करने से संबंधित चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा आईएसआईएस के बैनर और झंडे शामिल थे। एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने चारों दोषियों की अलग-अलग भूमिकाओं को भी माना है। उमर निसार को ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री फैलाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की गतिविधियों में शामिल पाया गया। रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया। वहीं, अफशान परवेज जराबी को टेलीग्राम चैनलों के जरिए ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका के लिए लेख प्रकाशित और प्रसारित करने के साथ आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया। एनआईए ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ एक मुख्य चार्जशीट और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जांच में आरोपियों के आईएसआईएस के ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल से जुड़े होने और ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका सामने आई। मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई अभी जारी है।
बांग्लादेश: पुलिस ने राजनीतिक दल के कार्यालय पर मारा छापा, 27 को भेजा जेल

ढाका। बांग्लादेश की एक राजनीतिक पार्टी जातीय समाजतांत्रिक दल (जासद) के कार्यालय से पकड़े गए 27 लोगों को जेल भेज दिया गया है। ढाका की एक अदालत ने ये फैसला सुनाया। सभी को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से हिरासत में लिया गया था। ढाका के एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जशिता इस्लाम ने रविवार को यह आदेश तब दिया जब पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और उन्हें हिरासत में रखने की मांग की। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट बीडीन्यूज24 की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों ने जासद ऑफिस के अंदर “अस्थिर और अव्यवस्थित माहौल” बनाया और “जॉय बांग्ला” के नारे लगाए। शनिवार को, पुलिस ने ढाका के गुलिस्तान में जासद हेडक्वार्टर पर एक बड़े छापे के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस का आरोप था कि अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता वहां एक “गुप्त बैठक” के लिए जमा हुए थे, जबकि जासद ने इस दावे को खारिज कर दिया। खबरों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब बीएनपी और उसके युवा विंग ‘जुबो दल’ के कार्यकर्ताओं ने जासद हेडक्वार्टर को घेर लिया और ऑफिस में घुस गए। उनका आरोप था कि वहां एक गुप्त बैठक में अवामी लीग के सदस्य मौजूद थे। इसके बाद पुलिस ने इमारत में धावा बोला और लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। बांग्लादेशी दैनिक ‘ढाका ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, जासद ने इसे प्रतिनिधियों की पहले से तय बैठक बताया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई ने इसे राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के एक बड़े ऑपरेशन में बदल दिया। इस घटना के बाद, बांग्लादेश की अवामी लीग ने जासद के केंद्रीय कार्यालय पर हुए “शर्मनाक हमले, तोड़फोड़ और कब्जे” तथा पार्टी की प्रतिनिधि बैठक में मौजूद नेताओं के अंधाधुंध सामूहिक हिरासत की कड़ी निंदा की। गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, अवामी लीग ने आरोप लगाया कि यह हमला पुलिस की सुरक्षा में बीएनपी और जुबो दल के कार्यकर्ताओं द्वारा दिन-दहाड़े “फासीवादी तरीके” से किया गया। पार्टी ने कहा, “यह हमला बांग्लादेश के लिए एक चेतावनी का संकेत है। हमने बार-बार कहा है कि लोकतंत्र के बैनर तले काम करने के बावजूद, बीएनपी मूल रूप से एक लोकतंत्र-विरोधी ताकत है। छावनी (कैंटोनमेंट) में पैदा हुई यह पार्टी कभी भी लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास नहीं करती है। चाहे वह इसे कितना भी छिपाने की कोशिश करे, उसका फासीवादी चरित्र समय-समय पर सामने आ ही जाता है।” पार्टी ने आगे कहा, “इस हमले और गिरफ्तारी से पत्रकार भी नहीं बच पाए। इस हमले, कब्जे और गिरफ्तारी के जरिए बीएनपी का असली चेहरा एक बार फिर लोगों के सामने आ गया है।” अवामी लीग ने कहा है कि 5 अगस्त, 2024 को हुए राजनीतिक बदलाव के बाद से बांग्लादेश में “धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील लोकतांत्रिक राजनीतिक ताकतों” को खत्म करने की योजना पर काम किया जा रहा है। पार्टी ने देश भर में अवामी लीग और मुक्ति संग्राम (लिबरेशन वॉर) का समर्थन करने वाली अन्य राजनीतिक पार्टियों के दफ्तरों में तोड़-फोड़, आगजनी और उन पर कब्जा करने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा माहौल एक आजाद और लोकतांत्रिक देश की राजनीतिक संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा है और यह बहु-दलीय राजनीति के रास्ते में बाधा डालता है। पार्टी ने कहा, “फिर भी, धांधली वाले चुनाव के जरिए सत्ता में आई तथाकथित राजनीतिक पार्टी खुद को बहु-दलीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा समर्थक बताती है। असल में, उनके बहु-दलीय लोकतंत्र का मतलब है राजनीति में आजादी-विरोधी और प्रतिक्रियावादी ताकतों को फिर से स्थापित करना और यह बात अब देश की जनता को साफतौर पर समझ आ गई है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका, चुनाव आयोग के कामों को लेकर न्यायिक जांच की मांग

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक और याचिका दाखिल की गई, भारतीय निर्वाचन आयोग के कार्य करने के तरीकों और रिकॉर्ड की न्यायिक या एसआईटी जांच की मांग की गई है। राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह नाम के व्यक्ति ने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सदस्यों वाली संस्था के तौर पर पोल पैनल को मिली शक्तियों का इस्तेमाल, संविधान के आर्टिकल 324 और 2023 एक्ट के सेक्शन 18 के तहत तय सामूहिक फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। याचिका में फॉर्म-6 में जुलाई 2026 में किए गए बदलाव और कुछ दूसरी कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि अगर रिकॉर्ड में बिना इजाजत के फैसले लेने का खुलासा होता है तो न्यायिक आयोग या एसआईटी से जांच कराई जाए। याचिका में इससे संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, फॉर्म-6 में और बड़े बदलावों पर रोक लगाने,और मुख्य चुनाव आयोग (सीईसी) को कार्रवाई पेंडिंग रहने तक अपने काम करने से रोकने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के अनुसार, ईसीआई का कामकाज जहां तक संभव हो, आम सहमति से किया जाना चाहिए। और अगर किसी मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है, तो उस मामले का फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाए। याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत की गई सभी कार्रवाइयां, फैसले, निर्देश और उससे जुड़े उपाय शुरू से ही शून्य और बिना कानूनी अधिकार के माने जाएं।
अजित पवार को याद कर भावुक हुईं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा, कहा-आपको कभी न भूल पाएंगे

बारामती। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजितदादा पवार ने सोमवार सुबह बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान परिसर में दिवंगत लोकनेता अजितदादा पवार के स्मृतिस्थल पर जाकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। अजित पवार की हादसे में हुई मौत के आठ महीने बाद सुनेत्रा पवार ने स्मृतिस्थल पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और उनकी स्मृतियों को नमन किया। इसके बाद सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश भी लिखा। उन्होंने कहा, “दादा… मेरा दिल अभी भी यह मानने को तैयार नहीं है कि आप हमारे बीच नहीं रहे। आज, जब मैं विद्या प्रतिष्ठान में बने आपके स्मारक पर श्रद्धा से सिर झुका रही हूं, तो अपने दिल की गहरी भावनाएं आप तक पहुंचा रही हूं।” उन्होंने कहा, “आठ महीने बीत चुके हैं… फिर भी, हर पार्टी कार्यकर्ता और हर आम नागरिक की जुबान पर बस एक ही शब्द है – ‘दादा’! यह एक शब्द आपके प्रति उनके प्यार, भरोसे और जुड़ाव को बयां करता है। आज, मैं उन्हीं भावनाओं को अपने दिल में लिए आपके सामने खड़ी हूं।” उन्होंने कहा, “आपके जाने के बाद, आपकी जीवनसंगिनी के तौर पर इस जिम्मेदारी को संभालते हुए, मेरा एक ही संकल्प है-आपके देखे हुए सपनों को पूरा करना और इंसानियत की उस विरासत को आगे बढ़ाना जिसे आप बहुत मानते थे। आपने जो सीख दी और लोगों के साथ जो रिश्ता बनाया, उसे मैं जीवन भर पूरे दिल से संजोकर रखूंगी।” बता दें कि अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में निधन हो गया था। बारामती से पुणे आते समय उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनका असामयिक निधन हो गया था। उनके निधन से पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई थी। अजितदादा पवार को महाराष्ट्र के एक कद्दावर नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री के तौर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।
ताजमहल की सुरक्षा को लेकर बड़ी मॉक ड्रिल, आतंकी हमले की स्थिति से निपटने का हुआ अभ्यास

आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ताज महल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई एजेंसियों ने मिलकर एक बड़ी मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास ताज महल के रिवरसाइड इलाके में किया गया, जहां हथियारों से लैस आतंकी हमले की स्थिति बनाकर सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों को परखा गया। इस संबंध में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी गई। सीआईएसएफ ने लिखा, “आगरा के ताजमहल में सुरक्षा तैयारियों को मज़बूत करने के लिए कई एजेंसियों की मॉक ड्रिल की गई।” सीआईएसएफ के मुताबिक इस मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ के साथ-साथ यूपी पुलिस, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मैनेजमेंट, फायर सर्विस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीडीएस), डॉग स्क्वॉड, लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) और मेडिकल टीम ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। ड्रिल के दौरान दो आतंकवादियों द्वारा हथियारों से लैस हमले की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। हमले की सूचना मिलते ही तुरंत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किए गए और सभी एजेंसियों ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। अभ्यास के दौरान सीआईएसएफ की क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) ने सबसे पहले खतरे को रोका और मोर्चा संभाला। इसके बाद असॉल्ट पार्टी ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों आतंकवादियों को मार गिराया। इस दौरान यूपी पुलिस ने ताज महल के बाहरी इलाके की घेराबंदी कर रखी थी ताकि कोई संदिग्ध बाहर न भाग सके। आतंकियों को मार गिराने के बाद सीआईएसएफ, यूपी पुलिस, बीडीडीएस और डॉग स्क्वॉड ने मिलकर पूरे परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई विस्फोटक या अन्य खतरा तो नहीं छिपा है। सीआईएसएफ ने बताया कि यह पूरा अभ्यास आगरा में सीआईएसएफ यूनिट ताज महल के कमांडेंट ऋषि कौशिक की देखरेख में किया गया। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशनल तैयारी, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के तरीकों की जांच करना था। बता दें कि ताजमहल देश के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी स्मारकों में से एक है। यहां हर दिन हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर इस तरह की मॉक ड्रिल करती रहती हैं ताकि किसी भी आतंकी खतरे या आपात स्थिति से निपटा जा सके।
‘दृढ़ संकल्प और सादगी का संगम थे अशोक सिंहल’, जन्मशताब्दी पर पीएम मोदी ने लिखा भावुक लेख

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर एक विशेष लेख लिखा है। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस लेख का लिंक शेयर किया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “अशोक सिंहल का व्यक्तित्व दृढ़ संकल्प और सादगी का अद्भुत संगम था। संगठन के कार्यों के प्रति उनकी निष्ठा, आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक एकता के लिए समर्पण हर किसी को प्रेरित करता रहेगा। उनके जीवन और विचारों को समर्पित मेरा यह आलेख…” अपने विस्तृत आलेख में पीएम मोदी ने अशोक सिंहल को युगपुरुष बताते हुए उनके साथ जुड़े व्यक्तिगत संस्मरणों को भी साझा किया। पीएम मोदी ने अपने आलेख की शुरुआत एक सुंदर सुभाषित से की। उन्होंने लिखा, “एक बहुत सुंदर सुभाषित है, ‘वृक्ष कबहुं नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।’ इसका मतलब है कि पेड़ कभी अपने फल स्वयं नहीं खाता, नदी अपना जल अपने पास नहीं रखती। इसी तरह, संत स्वभाव के लोग भी स्वयं को प्राथमिकता न देते हुए, सदैव दूसरों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं, अपना जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। सदियों से हमारे ऋषियों ने हमें यही सिखाया है कि मानवता के कल्याण के लिए समर्पित जीवन का महत्व व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक होता है। श्रद्धेय अशोक सिंहल का जीवन इस भावना का पुण्य उदाहरण है।” पीएम ने बताया कि 27 सितंबर से हम अशोक सिंहल का जन्म-शताब्दी वर्ष मना रहे हैं। यह एक महान विभूति के सम्मान का सुअवसर है। उन्होंने आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक जागरण और दशकों तक समर्पित भाव से समाज एवं संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने अपने युवा कार्यकर्ता जीवन का एक प्रसंग याद किया। उन्होंने लिखा, “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे अशोक सिंहल जी के साथ लंबे समय तक कार्य करने, उनसे सीखने, उनसे संवाद करने और उनका स्नेह प्राप्त करने का अवसर मिला। मुझे 1981 का एक प्रसंग याद आता है। उस समय मैं एक युवा कार्यकर्ता के तौर पर संगठन की ओर से मिली जिम्मेदारियां निभा रहा था। तब मुझे अशोक जी का हाथ से लिखा एक पत्र मिला। उन्होंने पत्र में आने वाले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी और मुझे कुछ जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उस समय अशोक सिंहल से पत्र पाना, मेरे लिए बहुत विशेष और यादगार क्षण बन गया था।” पीएम मोदी ने लिखा कि उन्होंने अशोक जी को कई दशकों तक दिन-रात काम करते देखा। वे देश के दूरदराज क्षेत्रों की लंबी और कई बार कठिन यात्राएं किया करते थे। गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में जाना उन्हें विशेष रूप से प्रिय था। वे लगातार इस पर चिंतन करते थे कि समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए और क्या किया जा सकता है। जब भी देश में कहीं प्राकृतिक आपदा आती, तो अशोक सिंहल जी सबसे पहले वहां पहुंचने वालों में होते। पीएम ने 2001 के कच्छ भूकंप का जिक्र करते हुए लिखा, “वर्ष 2001 में कच्छ में आए भूकंप के बाद उनके साथ का मेरा अनुभव अविस्मरणीय बन गया।” पीएम ने अशोक सिंहल के परिवार की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि अशोक सिंहल जी अत्यंत प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार से थे। उनके पिता महावीर जी की एक प्रशासक के रूप में पहचान थी। उनके एक भाई बीपी सिंहल पुलिस अधिकारी बने और बाद में संसद सदस्य भी रहे। दूसरे भाई वी.पी. सिंहल त्रिपुरा के तब मुख्य सचिव बने, जब यह नया राज्य बना था। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कॉमर्स और कृषि के क्षेत्र में सफलता हासिल की। हालांकि शुरू से ही अशोक जी का झुकाव बिल्कुल अलग दिशा में था। बहुत कम उम्र में ही उनके व्यवहार में दूसरों के प्रति करुणा और सेवा की अद्भुत भावना दिखने लगी थी। पीएम मोदी ने लिखा, “प्रयागराज में पले-बढ़े अशोक जी कई घंटे संगम के तट पर बैठा करते थे। नदी के प्रति उनका स्वाभाविक आकर्षण था। वहां आने वाले साधु-संत और श्रद्धालुओं से भी उनकी बहुत आत्मीयता थी। इससे भारत के सांस्कृतिक लोकाचार की उनकी समझ और समृद्ध हुई। दूसरों के लिए जीने की यही ललक उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ले आई।” पीएम मोदी ने बताया कि अशोक सिंहल जी ने अपने निरंतर प्रयास और अथक परिश्रम से अनेक संस्थाओं और आंदोलनों को मजबूत किया। अपनी ओजस्वी वाणी और अभिव्यक्ति की अद्भुत शैली से वे पूरी सभा को मंत्रमुग्ध कर देते थे। संत समाज के साथ उनके संबंध बहुत प्रगाढ़ थे। देशभर के साधु-संतों के बीच भी उनका काफी सम्मान था। उन्होंने दो घटनाओं का जिक्र किया। पहली घटना 1993 की है जब विश्व हिंदू परिषद ने स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो संबोधन के 100 वर्ष पूरे होने पर अमेरिका में एक सम्मेलन आयोजित किया था। विदेश में ऐसे भव्य सम्मेलन का विजन और प्लानिंग अशोक जी के संगठनात्मक कौशल का परिचायक था। दूसरी घटना 2000 की है, जब त्रिनिदाद और टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में विश्व हिंदू सम्मेलन हुआ, जहां पीएम मोदी भी मौजूद थे। पीएम मोदी ने लिखा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंहल जी की ऐतिहासिक भूमिका का स्मरण किए बिना उनका कोई भी उल्लेख अधूरा है। वर्ष 1991 की बोट क्लब रैली में दिए गए उनके ओजस्वी संबोधन को कौन भूल सकता है? आंदोलन के चरम पर लहूलुहान और घायल अवस्था में अशोक जी की वह ऐतिहासिक तस्वीर भला किसकी स्मृति से मिट सकती है? आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर है, तो इसके पीछे अशोक सिंहल जैसी विभूतियों का निस्वार्थ समर्पण है। पीएम मोदी ने लिखा, “आज यदि अशोक जी हमारे बीच होते तो अयोध्या में राम मंदिर को देखकर वो सबसे अधिक भावुक एवं प्रसन्न होते।” पीएम मोदी ने बताया कि अशोक जी सामाजिक एकता और समानता के प्रबल समर्थक थे। उनका साफ मत था कि समाज में किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यही वजह थी कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के लिए बिहार के वीएचपी कार्यकर्ता और