प्रतीभा रांटा ने ‘द रेवोल्यूशनरीज’ में अपने किरदार को लेकर की बात, कहा- ‘जिज्ञासु थी प्रतिभा लाहिड़ी और पढ़ने की थी शौकीन’

मुंबई। ‘द रेवोल्यूशनरीज़’ में स्वतंत्रता सेनानी प्रतिभा लाहिड़ी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस प्रतिभा रांटा ने सीरीज में अपने किरदार के बारे में जानकारी दी है। अभिनेत्री ने मुंबई में शो के प्रमोशन के दौरान आईएएनएस से बातचीत की। इस दौरान उनके साथ निखिल आडवाणी, भुवन बाम, रोहित सराफ और गुरफतेह पीरजादा भी मौजूद थे। प्रतीभा रांटा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हमें सार्वजनिक तौर पर प्रतिभा लाहिड़ी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है और यही बात निखिल सर ने भी मुझसे कही थी, जब हम प्रतिभा लाहिड़ी के बारे में चर्चा किया करते थे। जब चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों से लड़ रहे थे, तब उनकी बंदूक में एक आखिरी गोली बची थी। उसी समय उन्होंने खुद को गोली मार ली, ताकि अंग्रेज उन्हें पकड़कर मुठभेड़ में न मार सकें। इसके बाद प्रतिभा लाहिड़ी ने उनके अस्थि-अवशेषों की राख युवा क्रांतिकारियों के माथे पर लगाई थी। अब आप ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचिए, जो यह समझने में सक्षम हो कि यह एक युवा पीढ़ी है।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें यह बताना जरूरी था कि देश को आजादी दिलाने के लिए किस तरह का बलिदान दिया जा रहा है। यह सुनिश्चित करना कि उस संदेश को आगे पहुंचाया जाए। तो जब वह 17 साल की रही होंगी, तब वह कैसी रही होंगी? उस समय उन्हें किन सामाजिक मानदंडों से लड़ना पड़ता होगा? वह दुनिया को किस नजरिए से देखती होंगी? मेरे लिए प्रतिभा लाहिड़ी एक जिज्ञासु लड़की थीं। वह अपने आसपास हो रही हर चीज के बारे में जानना चाहती थीं।” अभिनेत्री ने आगे बताया, “वह पढ़ने की बहुत शौकीन थीं। उनकी पढ़ाई में भी काफी दिलचस्पी थी। दरअसल, प्रतिभा और सचिंद्र नाथ सान्याल के बीच जिन पत्रों का आदान-प्रदान हुआ था, उन सभी को वह हल कर लेती थीं, क्योंकि वह बहुत होशियार और तेज-तर्रार थीं। वह कोडेड पत्रों को समझ लेती थीं। यह वाकई बिल्कुल अद्भुत था।” ‘द रेवोल्यूशनरीज’ चार स्वतंत्रता सेनानियों रास बिहारी बोस, प्रतिभा लाहिड़ी, सचिंद्र नाथ सान्याल और बाघा जतिन की कहानी है, जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ मोर्चा संभाला था। यह सीरीज सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित है। सीरीज में रोहित सराफ, प्रतीभा रांटा, गुरफतेह पीरजादा और जेसन शाह भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। यह शो उन भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी बताता है, जो मानते थे कि ब्रिटिश राज को खत्म करने के लिए सशस्त्र प्रतिरोध न केवल जरूरी था, बल्कि अपरिहार्य भी था। इन क्रांतिकारियों के लगातार प्रयासों के कारण ही ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करना पड़ा था। ‘द रेवोल्यूशनरीज’ को प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जा सकता है।
‘ सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती हैं’, एआई वीडियो वार पर बोले चंद्रशेखर

अयोध्या। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद चंद्रशेखर एक कार्यक्रम में अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी पार्टियों के बीच एआई वीडियो के जरिए चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी प्रतिक्रिया दी। दरअसल, हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एआई से बना ‘अजय सेठ’ वाला वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में महंगाई, बेरोजगारी और सरकार के दावों पर तंज कसा गया था। इसके बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एआई वीडियो के जरिए पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस एआई वीडियो को कई बार चलाकर सरकार पर हमला बोला था। इसी मुद्दे पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा, “अगर अब आरोप लग रहे हैं, तो कुछ हुआ जरूर होगा, तभी उन्होंने आरोप लगाए हैं। और इसमें कोई शक नहीं है, यह सच भी है। सत्ता में बैठी सभी राजनीतिक पार्टियां ऐसा करती हैं, वे एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती हैं। भाजपा इसमें आगे है क्योंकि वह सत्ता में है और उसके पास ज्यादा संसाधन हैं, इसलिए वे ज्यादा कर रहे हैं। वरना वे भी करते हैं, वे साजिश रचते हैं और ऐसे सभी काम करते हैं। यह सब हमारे सामने है। हमारे पास कई अन्य पार्टियों के बारे में भी जानकारी है जो इस तरह से साजिश कर रही हैं। लेकिन जब समय आएगा तो जनता उन्हें जवाब देगी।” बता दें कि अखिलेश यादव ने हाल ही में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआई द्वारा बनाया गया एक वीडियो दिखाया था। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ‘अजय सेठ’ का एआई वीडियो बताया जा रहा है। इस वीडियो में सरकार की नीतियों, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया गया है। अखिलेश के इस वीडियो को दिखाने के बाद यूपी की सियासत में एआई वीडियो वार शुरू हो गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर एआई के जरिए भ्रामक वीडियो बनाने और साजिश रचने के आरोप लगा रहे हैं।
पाकिस्तान: पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे पीटीआई सदस्यों को पकड़ा, वित्त मंत्री बोले ‘धरने से देश को नुकसान’

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं; बलूचिस्तान और पीओके जल रहा है, तो पूर्व वजीर-ए-आजम जेल में कैद हैं। अर्थव्यवस्था भी विश्व बैंक के सहारे घिसट-घिसट कर चल रही है। इस बीच प्रमुख विपक्षी पार्टी पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ और जमात-ए-इस्लामी (जेआई) ने अलग-अलग धरना प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। पीटीआई ने अपने नेता इमरान खान की रिहाई, संविधान और देश में कानून के राज को लेकर 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तो जेआई ने इससे इतर इस्लामाबाद मार्च की घोषणा की है। इस बीच, इस्लामाबाद पुलिस ने पीटीआई के चार कार्यकर्ताओं और सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ‘डॉन’ ने बताया कि एक सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर इन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि पीटीआई कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में बैठक कर रहे हैं। दावा है कि जब पुलिस ने बैठक स्थल पर छापा मारा, तो कार्यकर्ताओं ने पुलिस टीम के साथ मारपीट की, उनकी वर्दी फाड़ दी और उन्हें बंधक बना लिया। पुलिस और राजधानी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पीटीआई के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुकाबला करने की तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और विरोध प्रदर्शन को रोकने की योजना बनाने के लिए इस्लामाबाद के सेंट्रल पुलिस ऑफिस में एक बैठक हुई। पुलिस विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी भी इकट्ठा कर रही थी, जिसमें राजनीतिक पार्टी की तैयारियां और उसके नेताओं, कार्यकर्ताओं और सदस्यों की गतिविधियां शामिल थीं। गेस्ट हाउस, सराय, बस टर्मिनल और उन संभावित ठेकेदारों पर नजर रखी जा रही थी जो विरोध प्रदर्शन के लिए भोजन, पानी, रहने की जगह और परिवहन की व्यवस्था कर सकते थे। पुलिस की खुफिया शाखाएं/इकाइयां – स्पेशल ब्रांच और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट भी सतर्क हैं। वे पीटीआई के उन नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं की जानकारी भी इकट्ठा कर रहे हैं जिनका विवरण उनके पास उपलब्ध है। उन नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं के घरों और अन्य जगहों के आसपास भी निगरानी रखी जा रही है जहां वे गिरफ्तारी से बचने के लिए रह रहे हैं या ठहरे हुए हैं। दूसरी ओर देश के वित्त मंत्री औरंगजेब का तर्क है कि धरना-प्रदर्शन से देश के सरकारी खजाने को रोजाना 120 अरब रुपये का नुकसान हो सकता है। जियो न्यूज के अनुसार, रविवार को अपने संदेश में औरंगजेब ने कहा कि ऐसे विरोध-प्रदर्शनों को समझना मुश्किल है, खासकर तब जब पाकिस्तान ने आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए काफी कोशिशें की हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक गतिविधियों में रुकावट से देश की स्थिरता से आर्थिक विकास की ओर बढ़ने की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है। \
एआई के बढ़ते इस्तेमाल से चीन में युवाओं की नौकरियों पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से काम करने के तौर-तरीके बदल रहे हैं। इससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन नौकरियां जाने का डर भी बढ़ गया है, खासकर युवाओं में। क्वार्ट्ज की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में एआई को शामिल करने की कोशिश कर रहा है, इसका असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक हर क्षेत्र में कर्मचारियों पर दिखने लगा है। इनमें से एक हैं बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन, जिन्होंने अपनी नौकरी तब गंवा दी जब उनकी कंपनी ने यह देखना शुरू किया कि क्या एआई इंसानों वाले कोडिंग के काम कर सकता है। फेई उन करीब 160 कर्मचारियों में से थे जिनकी कंपनी में छंटनी के दौरान नौकरी चली गई। उन्होंने कहा कि एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और कई मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की नौकरियां अब आसानी से बदली जा सकती हैं। नौकरी जाने के बाद फेई ने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है और अब शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, साथ ही अगले करियर के बारे में सोच रहे हैं। चीन में एआई अपनाने की रफ्तार हैरान करने वाली है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म आईडीसी के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियां एआई मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया। यह दिखाता है कि कंपनियां कितनी तेजी से खर्च कम करने और काम तेज करने के लिए इस तकनीक को अपना रही हैं। इस बदलाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिख रहा है। लॉजिस्टिक्स में ह्यूमनॉइड रोबोट लगाए जा रहे हैं, जिनमें पार्सल छांटने की सुविधा भी शामिल है, जबकि स्वायत्त मशीनें ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे काम करने लगी हैं। शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी से जुड़ी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। लेबर मार्केट पर इसका असर ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन के युवाओं के लिए पहले से ही मुश्किलें हैं। देश में शहरी बेरोजगारी दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 साल के उन युवाओं में बेरोजगारी काफी ज्यादा है जो पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है। जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर नौकरी पाना और भी मुश्किल हो सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एआई के फायदे तो साफ हैं, लेकिन यह बदलाव बड़े सामाजिक परिणाम ला सकता है। ऑटोमेशन से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और आर्थिक विकास को मदद मिलेगी, लेकिन अगर नई नौकरियां जल्दी नहीं बनीं तो बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने से बेरोजगारी का दबाव और बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।
‘छात्रों की गूंज’ मिमिक्री विवाद पर भड़के केंद्रीय मंत्री रिजिजू, बोले-‘कांग्रेस कॉमेडियन और जोकरों की पार्टी बन गई है’

नई दिल्ली। इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान की गई मिमिक्री को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधा। किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस की मिमिक्री वाला क्लिप था साझा कर लिखा, “कांग्रेस पार्टी कॉमेडियन और जोकरों की पार्टी बन गई है। वे हमेशा के लिए बाहर हो गए हैं।” राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के तौर-तरीकों और सार्वजनिक रूप से उनके पेश आने वाले अंदाज की मिमिक्री की गई थी। परफॉर्मर ने पीएम मोदी की खास हंसी, हाथों के इशारों और लोगों का अभिवादन करने और गले मिलने के तरीके की नकल की। यह एक्ट राहुल गांधी के संबोधन वाले छात्रों पर केंद्रित कार्यक्रम के दौरान हुआ। मिमिक्री करने वाले कलाकार पुलकित मणि थे, जो एक भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडियन और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं। यह परफॉर्मेंस जल्द ही राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई, जिसमें भाजपा ने स्टेज एक्ट और उस पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। रिजिजू का यह पोस्ट ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस के बीच आया, जिसमें राहुल गांधी ने बेरोजगारी और परीक्षा में अनियमितताओं सहित छात्रों से जुड़े “मुद्दों” पर बात की। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, महाराष्ट्र बीजेपी विधायक राम कदम ने छात्रों और उनकी चिंताओं पर केंद्रित कार्यक्रम में मिमिक्री के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। आईएएनएस से बात करते हुए कदम ने कहा, “राहुल गांधी खुद कब इस बात पर गौर करेंगे कि मिमिक्री मनोरंजन तो दे सकती है? लेकिन अगर देश को आगे बढ़ना है और हमें छात्रों के उत्थान के बारे में बात करनी है, तो नीति, कड़ी मेहनत और अवसरों पर चर्चा करना जरूरी है।” उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वह वहां अपनी बात रख रहे थे, देश भर में घूम रहे थे और छात्रों व युवाओं को गुमराह कर रहे थे, एक बार, लोकसभा चुनाव के दौरान, उन्होंने संविधान को लेकर पूरे देश में भ्रम पैदा किया था।” इससे पहले, बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने भी गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की आलोचना की और छात्र मुद्दों को संभालने के तरीके को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद युवाओं को अपनी बात रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा है।
पत्रकार पायल मेहता की मौत पर पीएम मोदी और रक्षा मंत्री समेत कई नेताओं ने जताया शोक

नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार पायल मेहता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया है। जानकारी के अनुसार, मुंबई यात्रा के दौरान पायल मेहता को बेचैनी महसूस हुई। शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि करीब 2 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “पायल मेहता एक मेहनती पत्रकार थीं जो जमीन से जुड़ी रहीं और अपनी रिपोर्टिंग में राष्ट्रीय मुद्दों की गहरी समझ लेकर आईं। अपने काम के अलावा, उन्हें उस दयालुता और स्नेह के लिए याद किया जाएगा जिसके साथ उन्होंने इतने सारे लोगों के जीवन को प्रभावित किया। उनका अचानक और असमय निधन बेहद दुखद है। उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में हिम्मत दे। ओम शांति।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “पत्रकार पायल मेहता के असमय निधन की खबर सुनकर गहरा सदमा और दुख हुआ। वह बहुत जल्दी हमें छोड़कर चली गईं। पायल एक बेहद मेहनती और समर्पित पत्रकार थीं, जिन्होंने पूरी निष्ठा और प्रोफेशनलिज्म के साथ संसद की कार्यवाही को कवर किया। संसद सत्र के दौरान, वह सुबह से देर रात तक मौजूद रहती थीं, बिना थके कार्यवाही पर नज़र रखती थीं और अद्भुत समर्पण के साथ अपना काम करती थीं। इस मुश्किल घड़ी में उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दे। ओम शांति।” शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक्स पर पोस्ट किया, “पायल मेहता के असमय निधन से मुझे गहरा सदमा और दुख पहुंचा है। पायल को उनके शांत स्वभाव, पत्रकारिता के प्रति गहरी समझ, सोच-समझकर पूछे गए सवालों और अपने काम के प्रति उनकी ईमानदारी के लिए याद किया जाएगा। संसदीय मामलों से जुड़े मेरे कार्यकाल के समय से ही हमारी लंबी बातचीत हुआ करती थी। पत्रकारिता में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। ईश्वर उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति और साहस प्रदान करें।” रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर पोस्ट किया, “पत्रकार और प्रिय मित्र पायल मेहता के असामयिक निधन से गहरा दुख हुआ है। रिपोर्टिंग के प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय था।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, “मुंबई में पत्रकार पायल मेहता के निधन की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा और बहुत दुख हुआ। मैं उन्हें लंबे समय से जानता था। वह बहुत जिंदादिल थीं और जो भी काम करती थीं, उसमें गजब की ऊर्जा भर देती थीं। काम के प्रति उनके समर्पण के बावजूद, सबसे खास बात यह थी कि वह अपने रिश्तों को कितना महत्व देती थीं। उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं; मैं प्रार्थना करता हूं कि उन्हें इस मुश्किल घड़ी से उबरने की हिम्मत मिले। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना। ओम शांति।” आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक्स पर लिखा, “वरिष्ठ पत्रकार पायल मेहता के अचानक निधन से गहरा सदमा लगा है और बहुत दुख हुआ है। पायल एक ईमानदार और समर्पित पत्रकार थीं, जो किसी भी स्टोरी के लिए हमेशा पूरी लगन से काम करती थीं। उन्होंने कई बार आंध्र प्रदेश जाकर ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की, और जब भी हम संसद में मिलते थे, तो वह खुद आकर अपडेट्स ज़रूर शेयर करती थीं। मुझे उनकी जो बात सबसे ज़्यादा याद रहेगी, वह है उनका उत्साह, पत्रकारिता के प्रति उनका समर्पण और वह गर्मजोशी भरी मुस्कान जिसके साथ वह सबसे मिलती थीं। उनके परिवार, दोस्तों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। उनका असमय निधन बहुत दुखद है।
नई दिल्ली: सरिता विहार में डंपर के कुचलने से चार की मौत, चालक फरार

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सरिता विहार में रविवार को सड़क किनारे खड़ी एक क्रेन और ऑटो-रिक्शा से डंपर ट्रक की टक्कर हो गई। जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत और तीन अन्य लोग घायल हो गए हैं। यह घटना सुबह करीब 3:20 बजे हुई। हादसे के समय ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत खड़ी गाड़ियों के पास सीसीटीवी लगाने का काम चल रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, डंपर ट्रक उत्तर प्रदेश के नोएडा से आ रहा था, तभी वह सड़क किनारे खड़ी क्रेन और ऑटो-रिक्शा से टकरा गया। मरने वालों की पहचान 23 साल के उमेश, 35 साल के प्रवीण और 34 साल के सूरज के तौर पर हुई है। अधिकारियों ने बताया कि सूरज ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ से जुड़ी कंपनी में एचआर मैनेजर थे। घायल हुए तीन लोगों (आकाश, अनूप और खेम सिंह) का इलाज चल रहा है। जबकि सुधीर नाम का एक व्यक्ति इस घटना में बाल-बाल बच गया। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक उमेश के पिता रामदास ने आईएएनएस से कहा, “दो लोग ऊपर और दो लोग नीचे थे, ये लोग कैमरे का काम कर रहे थे। इन लोगों ने डंपर के ड्राइवर को इशारा करके रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने रोकी नहीं। सभी लोग डंपर की जद में आ गए और घसीटते हुए चले गए। उमेश डंपर के दोनों पहियों के बीच में आ गया था। ड्राइवर नींद में डंपर चला रहा था।” मृतक उमेश के भाई रतन सिंह ने आईएएनएस से कहा, “उमेश कैमरे लगाने का काम करते थे। वे ट्रैफिक पुलिस के लिए कैमरा लगा रहे थे। कुछ लोग नीचे खड़े थे तो वहीं कुछ लोग ऊपर थे। तेज गति से आ रहे ट्रक ने बगल में खड़ी ऑटो समेत चार पांच लोगों को टक्कर मार दी। एक-दो लोग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था और बाकी दो-तीन लोग हॉस्पिटल में खत्म हो गए। उन्होंने बताया, “उमेश के दो बच्चे हैं। संगम विहार में किराए के मकान में रहते थे। ट्रक ड्राइवर को सजा मिलनी चाहिए।” हादसे के बाद डंपर का ड्राइवर मौके से भाग गया और उसे खोजने की कोशिश की जा रही है। घटना की आगे की जांच चल रही है।
‘राहुल गांधी मां के महत्व को नहीं समझते,’ पीएम मोदी की मिमिक्री पर भड़की भाजपा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में तौर पर मजाक उड़ाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के अपमान से जोड़ते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। इस मामले पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “पूरे देश ने उस मिमिक्री वीडियो को देखा है। इस देश में एक राजनीतिक दल का स्तर कितना नीचे गिर सकता है कि वे सार्वजनिक मंचों पर मिमिक्री करने लगें, प्रधानमंत्री की दिवंगत मां जो अब जीवित नहीं हैं, उनके बारे में घटिया टिप्पणी कर रहे हैं? मेरा मानना है कि इस पर पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया है।” उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने इस घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी वर्तमान में छात्रों को गुमराह करने और लुभाने की कोशिश कर रहे हैं और विभिन्न प्रकार की असामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। यह भी एक बात है लेकिन एक हास्य कलाकार द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की मां, जो अब जीवित नहीं हैं, के बारे में टिप्पणी करना और राहुल गांधी द्वारा उस पर हंसना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। मुझे लगता है कि राहुल गांधी मां के महत्व को नहीं समझते हैं।” हैदराबाद में बीजेपी नेता मनमीत सिंह ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में, उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी के माध्यम से कार्यक्रम का मजाक उड़ाया। यहां तक कि स्टैंड-अप कॉमेडियन को भी यह समझ में नहीं आया कि मोदी इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री हैं और उनकी मां सम्मान की हकदार हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस नेताओं ने सम्मान की भावना पूरी तरह से खो दी है। कोई नहीं जानता कि वे क्या सोच रहे हैं।” वहीं, हैदराबाद से ही बीजेपी नेता टी.आर. श्रीनिवास ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को पूरी तरह से फ्लॉप करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी कल जिस तरह का कॉमेडी शो कर रहे थे, उससे तो ‘द कपिल शर्मा शो’ ही बंद हो जाएगा। कपिल भैया, जरा इस पर ध्यान दें, कहीं नेटफ्लिक्स पर आपकी दुकान ही बंद न हो जाए! कल उन्होंने जिस स्टैंड-अप कॉमेडियन को स्टेज पर बुलाया और राहुल गांधी के साथ कॉमेडी करवाई, वह कोई स्टूडेंट नहीं था। जैसा मुझे लगा और जो कोई भी समझदार व्यक्ति इसे देख रहा था, उसे भी यही लगा होगा कि यह बस एक कॉमेडी शो था।” उन्होंने कहा, “आम छात्रों को बुलाएं, उनकी शिकायतें सुनें और समाधान निकालें। किसी व्यक्ति को बुरा-भला कहना और यह कहना कि ‘मेरा फोन टैप हो रहा है’- राहुल गांधी, ये कैसी बचकानी हरकतें हैं? कभी तो बड़े हो जाइए! क्या आप हमेशा ‘मम्मी-मम्मी, डैडी-डैडी’ ही करते रहेंगे? आप स्टूडेंट्स को क्या रास्ता दिखा रहे हैं? इस ‘छात्रों की गूंज’ से क्या होने वाला है? कुछ नहीं होगा। बस घर पर बैठे रहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ सपा जंतर-मंतर पर करेगी धरना, राष्ट्रपति से एसआईटी जांच की मांग

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के नोटिस और मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान तथा उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सपा के राष्ट्रीय सचिव और जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मोहम्मद अरशद खान की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से केवल इमारतों का मामला नहीं जुड़ा है, बल्कि इससे विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षकों के रोजगार और शोध कार्य का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है। पार्टी ने ध्वस्तीकरण नोटिस के वैधानिक आधार की स्वतंत्र समीक्षा होने तक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र में वर्ष 2019 में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगभग 350 मुकदमे दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। सपा का आरोप है कि करीब तीन से चार महीने की अवधि में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज होना राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है। पार्टी ने राष्ट्रपति से मांग की है कि इन सभी मामलों की एक साथ और समग्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। सपा का कहना है कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्यों के आधार पर दोष और निर्दोषता निर्धारित हो सके। पत्र में संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए निष्पक्ष सुनवाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। सपा ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के लिए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा कानून के अनुसार जमानत का अधिकार सुनिश्चित किए जाने की मांग भी रखी है। इसके अलावा पार्टी ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण नोटिस को वापस लेने, अंतिम न्यायिक निर्णय तक किसी भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाने और शिक्षा संस्थानों से जुड़े विवादों का समाधान संवाद तथा कानून के माध्यम से करने की मांग की है। सपा ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि देश संविधान से चलेगा और विवादों का समाधान संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
इंदौर की छात्रा के सवाल को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं से संवाद कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी शिक्षा, हॉस्टल, रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं सुनीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि इंदौर में संवाद के दौरान एक छात्रा ने उनसे हॉस्टल और रहने की समस्या को लेकर सवाल किया। इसके बाद उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उस सवाल का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में छात्रा का सवाल लिखा कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है-हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं। राहुल गांधी ने कहा कि यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा। गांव से पढ़ने शहर आई छात्रा ने कहा कि हॉस्टल है नहीं, तो पीजी में रहना पड़ता है। सिर्फ सुरक्षित रहने में लाखों खर्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता और बेघर होने का डर इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है। कई लड़कियां इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है। आवास भत्ता महंगाई के साथ बढ़ता नहीं और ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में पीएम मोदी से इस सवाल का जवाब मांगते हुए कहा कि क्या उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है। इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी कोटा, पुणे, प्रयागराज आदि स्थानों पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह व्यवस्था क्या है, छात्र क्या होता है, और उसे व्यवस्था कैसे दबा रही है? छात्र के भविष्य को व्यवस्था चुनौती दे रही है। युवा देश के भविष्य हैं और युवा के बगैर कोई भी देश मजबूत नहीं बन सकता है। छात्र के अंदर अलग-अलग गुण होते हैं। छात्र में सबसे बड़ा गुण सवाल पूछने का होता है। छात्र प्राकृतिक तौर पर सवाल पूछते हैं और जिज्ञासु होते हैं, अलग-अलग विषयों पर सवाल पूछते हैं। छात्र मोहब्बत-पसंद होते हैं, वे नफरत नहीं करते हैं, एक-दूसरे से प्यार से बर्ताव करते हैं, और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। उनमें मानवता की भावना होती है।