‘भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाना है लक्ष्य,’ बागेश्वर धाम में बोलीं ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम इन दिनों श्रद्धालुओं के साथ-साथ फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर बागेश्वर धाम पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने धाम में चल रही विभिन्न सेवाओं और व्यवस्थाओं को देखा और आईएएनएस से बातचीत में अपनी फिल्म, गुरुजी से मिले मार्गदर्शन और भविष्य की योजनाओं के बारे में खुलकर बात की। अनुप्रिया नागर ने सबसे पहले उस चर्चा पर सफाई दी, जिसमें यह कहा जा रहा था कि वह बागेश्वर धाम या बागेश्वर महाराज पर फिल्म बनाने जा रही हैं। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा है। उनका कहना है कि उनकी बागेश्वर धाम और गुरुजी के प्रति गहरी आस्था है और यहां आने पर उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वह अपने ही परिवार के बीच आई हों। हालांकि, फिल्म बनाने को लेकर अभी कोई निश्चित घोषणा उन्होंने नहीं की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जो भी काम होगा, उसमें गुरुजी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद की उनकी इच्छा जरूर रहेगी। अपनी बागेश्वर धाम यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए अनुप्रिया ने कहा, “मैं दूसरी बार बागेश्वर धाम आई हूं और भिवंडी मठ भी एक बार गई थी। यहां की ऊर्जा और आस्था बहुत मजबूत है। मैं कुछ समय से यहां हूं और मैंने यहां की सभी व्यवस्थाएं भी देखी हैं। मुझे पता है कि यहां की ऊर्जा बहुत खास है और मैंने व्यक्तिगत रूप से इसे महसूस किया है।” अपनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के सफर को याद करते हुए अनुप्रिया ने बताया कि फिल्म को शुरुआती दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहले सप्ताह के बाद फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में तरह-तरह की बातें होने लगी थीं और उन्हें भी चिंता हुई थी। इसके बावजूद उन्होंने और उनकी पूरी टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्हें हमेशा विश्वास रहा कि नीम करौली बाबा की कृपा और आशीर्वाद उनके साथ है और फिल्म आगे जरूर जाएगी। अनुप्रिया ने यह भी बताया कि बागेश्वर धाम के गुरुजी से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आगे के काम को लेकर मार्गदर्शन मिला है। उनके मुताबिक, वह खुद को इंडस्ट्री में अभी भी सीखने की स्थिति में मानती हैं। ऐसे में गुरुजी से मिलने वाला हौसला उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वह चाहती हैं कि इसी विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ वह फिल्म इंडस्ट्री में अपना काम जारी रखें। भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए अनुप्रिया नागर ने कहा कि उनका फोकस सिर्फ फिल्में बनाने तक सीमित नहीं है। वह भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्यों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहती हैं। इस दौरान उन्होंने धाम में चल रही अन्नपूर्णा रसोई और भंडारे की व्यवस्था की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है, जो उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। इसके अलावा अनुप्रिया नागर ने बागेश्वर धाम के गुरुकुल का भी दौरा किया। उन्होंने बताया कि यहां बच्चों को सिर्फ पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें संस्कृत और अंग्रेजी के साथ-साथ घुड़सवारी और अन्य गतिविधियां भी सिखाई जा रही हैं। उन्होंने गौशाला की व्यवस्थाएं भी देखीं और धाम में बन रहे कैंसर अस्पताल के बारे में भी जानकारी ली। कैंसर अस्पताल को लेकर अनुप्रिया ने बताया कि निर्माण कार्य अभी जारी है, लेकिन वहां मौजूद लोगों से उन्हें अस्पताल की योजना और भविष्य के विजन के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए इस तरह की पहल महत्वपूर्ण है। अभी गुरुजी अपने स्तर पर लोगों की मदद करते हैं, लेकिन भविष्य में कैंसर अस्पताल के जरिए जरूरतमंद मरीजों को इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

रायचूर के किल्ले बृहन्मठ में निकली 21वीं सद्भावना पदयात्रा, जीवित हाथी की जगह रोबोटिक हाथी बना आकर्षण का केंद्र

रायचूर। कर्नाटक के रायचूर में ऐतिहासिक ‘किल्ले बृहन्मठ’ के स्वर्गीय श्री गुरुपाद शिवाचार्य स्वामीजी की याद में रविवार को 21वीं सद्भावना पदयात्रा निकाली गई। इस सद्भावना पदयात्रा की एक खास बात रोबोटिक हाथी का इस्तेमाल थी। इस रोबोटिक हाथी को बिल्कुल असली हाथी जैसा दिखने और लगने के लिए डिजाइन किया गया है। ‘पेट इंडिया’ नाम की संस्था ने मठ को यह रोबोटिक हाथी दान में दिया था। ऐसे धार्मिक आयोजनों में हजारों लोग इकट्ठा होते हैं। भीड़ और तेज आवाज वाले संगीत के बीच असली हाथी के होने से जानवर डर और बेचैनी महसूस कर सकता है, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। जानवरों के साथ क्रूरता रोकने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए रोबोटिक हाथी का इस्तेमाल किया जा रहा है। रविवार को मठ में पूरे विधि विधान के साथ इस रोबोटिक हाथी को रखा गया। मंदिर के अध्यक्ष श्री 108 साविर देवरा शांतमल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया’ (पेटा इंडिया) ने मठ को यह रोबोटिक हाथी दान किया है। इसके लिए शिवाचार्य महास्वामीजी ने पेटा इंडिया और सीयूपीए को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह मंदिर में केवल एक नई चीज का जुड़ना नहीं है। यह हमारी परंपराओं को ऐसे तरीके से मनाने की दिशा में एक कदम है जो दया और बदलते समय को दर्शाता है। रोबोटिक हाथी भक्तों को हमारे समारोहों से जुड़ी सुंदरता और गरिमा का अनुभव करने का मौका देता है, साथ ही हमें यह भरोसा भी दिलाता है कि मंदिर के उत्सवों के लिए किसी असली हाथी को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। यह रोबोटिक हाथी 3 मीटर ऊंचा और 500 किलो वजन वाला हैं। ये रबर, फाइबर, मेटल, मेश, फोम और स्टील से बना है और यह पांच मोटरों से चलता है। एक रोबोटिक हाथी असली हाथी जैसा दिखता और महसूस होता है।

एफटीए के लागू होने का असर, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में भारत के निर्यात में आई तेजी

नई दिल्ली। वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वाले साझेदार देशों को भारत के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर और श्रीलंका को निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ा है, जबकि आसियान देशों को निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि व्यापार समझौते वास्तव में परिणाम देने लगे हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। तंजानिया के समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि भारत का बढ़ता व्यापार समझौतों का नेटवर्क अब बातचीत के जरिए मिले बाजार पहुंच के लाभ को वास्तविक निर्यात वृद्धि में तेजी से बदल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात अब तक के सर्वोच्च स्तर 863.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और 421.3 अरब डॉलर का सेवा निर्यात शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एफटीए साझेदार देशों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत केवल अपने निर्यात की मात्रा नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि बाजार में अपनी मौजूदगी का विस्तार करने के लिए तरजीही व्यापार व्यवस्थाओं का भी तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के दौरान सिंगापुर को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 101.2 प्रतिशत बढ़कर 6.52 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 3.24 अरब डॉलर था। श्रीलंका को निर्यात में इससे भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यह 123.8 प्रतिशत बढ़कर 2.35 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.05 अरब डॉलर था। आसियान क्षेत्र में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का निर्यात 61.6 प्रतिशत बढ़कर 14.61 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल-जून 2025 के दौरान यह 9.04 अरब डॉलर था। मलेशिया को निर्यात 75.2 प्रतिशत बढ़कर 2.54 अरब डॉलर हो गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 25.2 प्रतिशत बढ़कर 2.68 अरब डॉलर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया को निर्यात 22.6 प्रतिशत बढ़कर 1.95 अरब डॉलर और जापान को 22.4 प्रतिशत बढ़कर 1.75 अरब डॉलर हो गया। इसी तरह, ओमान को निर्यात 26.4 प्रतिशत बढ़कर 1.39 अरब डॉलर, जबकि नेपाल को निर्यात 18.1 प्रतिशत बढ़कर 2.28 अरब डॉलर हो गया। भूटान और थाईलैंड को निर्यात में भी क्रमशः 16.1 प्रतिशत और 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। नई दिल्ली द्वारा हाल में किए गए व्यापार समझौतों में भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए और भारत-यूके सीईटीए शामिल हैं। भारत ने न्यूजीलैंड के साथ भी एफटीए संपन्न किया है, जो अभी लागू होने की प्रक्रिया में है। वहीं, यूरोपीय संघ के साथ बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हो गई थी।

पाकिस्तान की फ्यूल रिलीफ स्कीम में अहम बदलाव, सस्ता पेट्रोल लेने के लिए मिलेंगे 2000 रुपए के चार टोकन

इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई के बीच सरकार ने लोगों को बड़ी राहत देते हुए प्रधानमंत्री फ्यूल रिलीफ स्कीम में कई बदलाव क‍िए हैं। साथ ही एसएमएस शुल्‍क भी खत्‍म कर द‍िया है। प्रधानमंत्री फ्यूल रिलीफ स्कीम का उद्देश्य पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता देना है। शुरुआत में इस योजना के तहत पात्र मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी कारों के मालिकों को सीमित मात्रा में पेट्रोल पर 100 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर की राहत दी जाती है। दो और तीन पहिया वाहनों के लिए राहत की सीमा 20 लीटर प्रतिमाह है, जबकि 800 सीसी तक की कारों के लिए यह 30 लीटर प्रतिमाह है। पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र ‘डॉन’ की र‍िपोर्ट के अनुसार, सरकार ने शनिवार को इन बदलावों का ऐलान क‍िया। मीडिया ब्रीफिंग में आईटी और टेलीकम्युनिकेशन मंत्री शाजा फातिमा ख्वाजा ने बताया कि दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए प्रति टोकन 500 रुपए की राहत सीमा को समाप्त कर दिया गया है। दोपहिया और तिपहिया वाहन उपयोगकर्ता अब हर महीने चार टोकन प्राप्त कर सकेंगे। प्रत्येक टोकन पर 500 रुपए की राहत मिलेगी। उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि यदि दो लीटर पेट्रोल की कीमत 780 रुपए है, तो 500 रुपए के राहत टोकन का उपयोग करने के बाद लाभार्थी को केवल 280 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही स्कीम में एक और बड़ा बदलाव एसएमएस शुल्क पूरी तरह खत्म करना है। अब एसएमएस सभी के लिए मुफ्त होगा, चाहे किसी के पास 800 सीसी की कार हो या फिर दो या तीन पहिया वाहन। उनके अनुसार, शनिवार को दोपहर 3 बजे तक इस योजना के तहत 17.5 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण करा लिया है, जबकि करीब 15 लाख राहत टोकन जारी किए जा चुके थे। इससे पता चलता है कि योजना को लोगों से तेज प्रतिक्रिया मिल रही है और बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थी इसका फायदा उठा रहे हैं। डॉन के अनुसार, इस बीच उप प्रधानमंत्री इशाक डार की अध्यक्षता वाली नेशनल स्टीयरिंग कमेटी ऑन फ्यूल सब्सिडी ने ऐसे इलाकों के पेट्रोल पंपों पर एसएमएस के जरिए फ्यूल टोकन इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है, जहां इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कमेटी ने आजाद जम्मू-कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और सभी प्रांतों से ऐसे पेट्रोल पंपों की लिस्ट देने को कहा है, ताकि उन्हें बिना किसी देरी के इस स्कीम से जोड़ा जा सके। देशभर में 9771 पर एसएमएस भेजकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है।

नंदीग्राम कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर भड़के संजय राउत, बोले- डर गए, इसलिए पुराने केस में किया गिरफ्तार

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत और दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने पर भाजपा पर निशाना साधा। नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत पर संजय राउत ने कहा, “भाजपा क्या कहती है, इससे क्या फर्क पड़ता है? जिस तरह से नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार को गिरफ्तार किया गया है, यह कैसा न्याय है? आप डर गए, है ना? आप नंदीग्राम में डरे हुए हैं। इसीलिए आपने हमारे उम्मीदवार को 6-10 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया।” बता दें कि 19 सितंबर को नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पुलिस ने शनिवार को रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार शफीउल इस्लाम को भी एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं, दिल्ली में एसआईआर के दौरान 31 लाख वोटर्स को नोटिस जारी होने (जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार का नाम भी शामिल है) पर भी संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “जहां बड़ी पार्टियों के चुनाव चिह्न चोरी हो जाते हैं और पूरी की पूरी पार्टियां चोरी हो जाती हैं, वहां अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। यह तो होना ही है। केजरीवाल जी का नाम गायब है। महाराष्ट्र और पूरे देश में हजारों, लाखों और करोड़ों लोगों के नाम गायब हो जाते हैं। यह सरकार कुछ भी कर सकती है। वे दिखाना चाहते हैं कि केवल वही वोट करेंगे जिन्हें वे चाहते हैं, और जिन्हें वे नहीं चाहते, वे वोट नहीं करेंगे। यह सरकार की नीति है।” संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकार वोटर लिस्ट से नाम हटाकर चुनिंदा लोगों को ही वोट देने देना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव चिह्न और पार्टियां ही चोरी हो सकती हैं तो वोटर लिस्ट से नाम गायब होना कोई नई बात नहीं है।

भारतीय लड़ाकू विमान तेजस में सवार हुए भारत व जापान के एयरफोर्स चीफ

नई दिल्ली। जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी है। रविवार को दोनों देशों के वायुसेना प्रमुख तेजस विमान में सवार हुए। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस में अकेले उड़ान भरी। वहीं, जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भी जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन से तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। यह उड़ान दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और हवाई सहयोग की एक खास तस्वीर पेश करती है। दरअसल इन दिनों भारत व जापान की वायुसेनाएं संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ को अंजाम दे रही हैं। इस के तहत युद्ध जैसी परिस्थितियों में दोनों वायुसेनाएं अपनी हवाई युद्धक क्षमताओं को परख रही हैं। यह अभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े कई अभियानों का अभ्यास किया है। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों द्वारा भारतीय के तेजस लड़ाकू विमान को उड़ाना भारत व जापान के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। यह मौका इसलिए भी खास रहा क्योंकि ‘वीर गार्जियन 2026’ में पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत में इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास का हिस्सा बने हैं। अभ्यास में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस के अलावा सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों शामिल हैं । वहीं जापानी वायुसेना ने अपने एफ-2ए लड़ाकू विमान के साथ शिरकत की है। 9 सितंबर से 22 सितंबर तक जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास में दोनों वायुसेनाएं विभिन्न हवाई अभियानों और युद्धक गतिविधियों का अभ्यास कर रही हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त अभियानों के दौरान समन्वय को मजबूत करना है। जोधपुर के आसमान में तेजस की उड़ान ने इस संयुक्त अभ्यास में भारत की स्वदेशी हवाई शक्ति को खास तौर पर सामने रखा। अभी तक हुए इस अभ्यास में दोनों देशों के वायु योद्धा अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों को पूरा कर चुके हैं। दोनों देशों के वायुसेना अधिकारियों ने एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को भी समझा है। संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करना भी अभ्यास का अहम हिस्सा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ के जरिए दोनों देशों की वायुसेनाओं को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं को परखने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला है। वहीं दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की उपस्थिति ने इसके महत्व को रेखांकित किया है।

अमेरिका को दोबारा बातचीत शुरू करने से पहले माननी होंगी शर्तें, दूसरा कोई रास्‍ता नहीं: मोहसिन रेजाई

तेहरान। ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव मोहसिन रेजाई अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। उनका कहना है क‍ि अमेरिका को ईरान के साथ क‍िसी भी तरह की बातचीत शुरू करने से पहले इन शर्तों को मानना अन‍िवार्य है। मोहस‍िन रेजाई ने अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट करते हुए ल‍िखा, ”ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। तेहरान का संदेश साफ है कि अगर वॉशिंगटन अपने ही पैदा किए हुए मुश्किल हालात से बाहर निकलना चाहता है और इस मामले में और ज्यादा फंसने से बचना चाहता है, तो उसके पास ईरान के अधिकारों और उसकी शर्तों को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।” ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की र‍िपोर्ट के अनुसार, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने शनिवार को विदेशी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के मकसद से दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें मध्यस्थों तक पहुंचा दी हैं। रेजाई ने कहा, “ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का आकलन और उनकी गणना गलत थी और यह युद्ध नेतन्याहू ने शुरू करवाया। युद्ध खत्म करने के लिए हमारी शर्तें मानना वॉशिंगटन के हित में है। ट्रंप की धमकियों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।” मेहर समाचार एजेंसी अल जजीरा के हवाले से बताया, रेजाई ने कहा क‍ि हमें अमेरिकी सेना की कमजोरियों की जानकारी है और अब हम उसके हवाई हमलों का मुकाबला करने के लिए पहले से कहीं बेहतर तरीके से तैयार हैं। वॉशिंगटन के समझौते से पीछे हटने के बाद हमने यह नतीजा निकाला कि हमें अमेरिका को लेकर अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है। मेहर न्‍यूज के अनुसार, रेजाई ने कहा क‍ि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है और हमने दोबारा वार्ता शुरू करने के लिए अपनी शर्तें उन्हें बता दी हैं। हम कतर के मध्यस्थ के संपर्क में हैं। उन्होंने युद्ध रोकने के लिए हमारी शर्तें एक बार फिर वॉशिंगटन को भेजी हैं और अब हमें राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार है। हमारी शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, हमारी फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल है।

उत्तर कोरिया ने दागी संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल: जापान अलर्ट, प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी किया बयान

सोल। उत्तर कोरिया ने रविवार को एक बार फिर ईस्ट सी की ओर ‘संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल’ दागी। दक्षिण कोरिया और जापान ने इसकी पुष्टि की है। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलर्ट जारी करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया ने संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की है और इससे जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है। जापान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मिसाइल समुद्र में गिर गई। जापानी मीडिया ने बताया कि इसका संभावित गिरने का स्थान जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के बाहर था। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने भी कहा कि उत्तर कोरिया ने पूर्वी समुद्र की ओर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा। शुरुआती तौर पर मिसाइल की सटीक दूरी, ऊंचाई और उड़ान पथ की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रक्षेपण के बाद एक बयान जारी किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे साझा किया गया। बयान के अनुसार, अधिकारियों से उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित अतिरिक्त प्रक्षेपणों के लिए तैयार रहने को कहा गया। संबंधित अधिकारियों को सूचना जुटाने और उसका विश्लेषण करने के साथ-साथ विमान और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने आपात स्थिति के लिए तैयार रहने और जनता को समय पर उचित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बाद की रिपोर्टों में दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल बताया और कहा कि प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के पूर्वी तट के वॉनसान क्षेत्र से हुआ था। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव को लेकर उत्तर कोरिया लगातार अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की सैन्य गतिविधियों की आलोचना कर रहा है। इससे पहले 12 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने पूर्वी समुद्र की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। उस समय उत्तर कोरिया ने इसे विभिन्न हथियारों से जुड़े संयुक्त अग्निशक्ति अभ्यास का हिस्सा बताया था। उत्तर कोरिया ने हाल में अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य अभ्यासों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। अगस्त के अंत से सितंबर की शुरुआत तक अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने गुआम के पास पांच दिवसीय सैन्य अभ्यास किया था। प्योंगयांग ने इस तरह की सैन्य गतिविधियों को अपने खिलाफ खतरे के तौर पर पेश किया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने भी हाल में अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी थी और परमाणु हथियारों की क्षमता मजबूत करने की नीति में बदलाव से इनकार किया था। उत्तर कोरिया का हालिया मिसाइल प्रक्षेपण अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था आईएईए की उस कार्रवाई के तुरंत बाद हुआ है, जिसे प्योंगयांग ने खारिज कर दिया है। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना को अस्वीकार करते हुए कहा है कि आईएईए का प्रस्ताव उसके परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र होने के रुख को प्रभावित नहीं करता। उत्तर कोरिया के इस नए प्रक्षेपण से क्षेत्र में मिसाइल और परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रविवार को दागी गई मिसाइल का अंतिम उद्देश्य क्या था और उत्तर कोरिया ने इस प्रक्षेपण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है या नहीं।

ट्रंप का मीडिया पर बैन ‘फर्स्ट अमेंडमेंट’ का उल्लंघन : डब्ल्यूएचसीए

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (डब्ल्यूएचसीए) ने ट्रंप प्रशासन से सीएनएन, पॉलिटिको और एएम नाऊ के पत्रकारों की पहुंच तुरंत बहाल करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि इन पत्रकारों को व्हाइट हाउस से रोकने का फैसला पहले संशोधन का उल्लंघन है। डब्ल्यूएचसीए की अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने एक बयान में कहा, “आज सीएनएन, पॉलिटिको और एमएस नाऊ के पत्रकारों की पहुंच को रद्द करने की कार्रवाई पहले संशोधन का उल्लंघन करती है।” यह बयान तब आया जब इन तीन संगठनों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोक दिया गया। सीएनएन की सीनियर व्हाइट हाउस रिपोर्टर बेट्सी क्लेन और एमएस नाऊ की संवाददाता अकायला गार्डनर को उनके प्रेस बैज डीएक्टिवेट होने के बाद एंट्री नहीं दी गई। पॉलिटिको की व्हाइट हाउस रिपोर्टर शेयेन हैसलेट को भी प्रवेश से वंचित कर दिया गया और समाचार संगठनों के अनुसार उनका क्रेडेंशियल जब्त कर लिया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तीन संगठनों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की घोषणा के एक दिन बाद हुई है। ट्रंप ने उन पर ‘फर्जी खबरें’ दिखाने का आरोप लगाया था। बाद में अपने फैसले के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि इसके पीछे कोई एक घटना नहीं है और इसे ‘पिछले कुछ वर्षों की कई खबरों का नतीजा’ बताया। हेनरिक ने कहा कि इस फैसले का असर सिर्फ इन तीन संगठनों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “इसके निहितार्थ इन संगठनों से आगे तक जाते हैं। एक न्यूज आउटलेट को उसकी कवरेज के कारण बाहर करने के लिए इस्तेमाल किया गया मानक भविष्य में किसी भी आउटलेट पर लागू किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, “अमेरिकी लोगों को एक स्वतंत्र प्रेस के माध्यम से सत्ता में चुने गए लोगों की जांच करने में सक्षम होना चाहिए, चाहे सरकारी अधिकारी इसे अनुकूल रूप से देखें या नहीं।” हेनरिक ने कहा कि स्थापित कानूनी मिसाल सरकार की पहुंच वापस लेने की क्षमता पर सीमा लगाती है, जब एक बार पहुंच दे दी गई हो। उन्होंने कहा, “इसीलिए अदालतों ने बार-बार माना है कि एक बार व्हाइट हाउस पत्रकारों को पहुंच प्रदान करता है, तो वह मनमाने ढंग से या उनकी रिपोर्टिंग की सामग्री के आधार पर उस पहुंच से इनकार नहीं कर सकता। डब्ल्यूएचसीए प्रशासन से हमारे सहयोगियों की पहुंच तुरंत बहाल करने का आह्वान करता है।” तीनों समाचार संगठनों ने कहा है कि वे अपनी रिपोर्टिंग जारी रखेंगे और अपने पहले संशोधन के अधिकारों की रक्षा करेंगे। पॉलिटिको के ग्लोबल एडिटर-इन-चीफ जोनाथन ग्रीनबर्गर ने कहा कि संगठन “अपने पहले संशोधन अधिकारों की पुरजोर रक्षा करेगा।” एमएस नाऊ ने कहा कि वह अपने अधिकारों और स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का इरादा रखता है। सीएनएन ने इस प्रतिबंध को अपने संवैधानिक अधिकारों पर एक अवैध हमला बताया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भागीदारी हमारा कानूनी अधिकार, किसी का एहसान नहीं : ईरान

तेहरान। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में अपने देश की नुमांइदगी को कानूनी अधिकार बताया है। ये सत्र न्यूयॉर्क में आयोजित किया जा रहा है। आईआरआईबी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में बाघेई ने कहा, “न्यूयॉर्क जाने में ईरान के प्रतिनिधियों की कोई दिलचस्पी नहीं है। हालांकि, यह एक ऐसा अहम स्थान है जिसे छोड़ा नहीं जा सकता। यूएनजीए के सेशन में ईरान की भागीदारी उसका कानूनी अधिकार है, न कि किसी की तरफ से दिया गया कोई एहसान। ईरान यूएन के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक है।” सिंहुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “ईरान के प्रतिनिधियों के तौर पर हमारा यह कर्तव्य है कि हम इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल हों और दुनिया को ईरान का पक्ष सुनाएं।” उन्होंने “दूसरे पक्ष” पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की “रुकावटें और नकारात्मक प्रचार” ईरान को सेशन में भाग लेने और अपना पक्ष रखने के उसके जायज अधिकार से कभी पीछे नहीं हटा पाएंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के गुरुवार के बयान के अनुसार, अमेरिका ने कहा है कि वह यूएनजीए के लिए ईरान के “मुख्य प्रतिनिधिमंडल” को “मेजबान देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों के तहत” वीजा जारी करेगा। बयान में कहा गया, “प्रतिनिधिमंडल पिछले साल की तुलना में छोटा है।” इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में अपनी कूटनीति के केंद्र में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रखेंगे। खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत की योजना है और अमेरिकी अधिकारी तेहरान के साथ व्यापार करने वाली संस्थाओं को और नतीजों की चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप मंगलवार को न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा को वो संबोधित करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि ईरान चर्चा का मुख्य विषय होगा, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि राष्ट्रपति या अन्य अमेरिकी प्रतिनिधि ईरानी अधिकारियों से मिलेंगे या नहीं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि ट्रंप का भाषण इस बात पर बल देगा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए। उन्होंने कहा कि यह मांग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बार-बार पारित प्रस्तावों में भी दिखाई दी है। वाल्ट्ज ने यहां पत्रकारों को बताया कि भाषण में राजनयिक समझौतों और अनसुलझे विवादों के साथ-साथ ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना पर हुई प्रगति को भी शामिल किया जाएगा। अमेरिका-ईरान के बीच संभावित मुलाकातों के बारे में पूछे जाने पर, अधिकारी ने राष्ट्रपति या विदेश मंत्री के अंतिम कार्यक्रम से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।