बाबिल खान ने बताई गोल्फ खेलने के लिए तीन सबसे जरूरी चीजें, कहा- मानसिक दबाव को संभालने में करता है मदद

मुंबई। दिवंगत दिग्गज अभिनेता इरफान खान के बेटे और अभिनेता बाबिल खान इन दिनों पहलगाम की खूबसूरत वादियों में अपने एक प्रोजेक्ट की शूटिंग कर रहे हैं। शूटिंग के बीच बाबिल ने कुछ समय गोल्फ खेलने के लिए निकाला। इस दौरान उन्होंने बताया कि गोल्फ उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि यह उन्हें खुद को बेहतर समझने और जिंदगी में आने वाले दबाव को संभालने में भी मदद करता है। बाबिल ने कहा, ”जब जिंदगी में बहुत ज्यादा दबाव महसूस हुआ और लगा कि खुद को अगले पड़ाव के लिए तैयार करने की जरूरत है, तब मैंने ऐसे तरीकों की तलाश की, जो मेरे इस सफर में मदद कर सकें। इसी तलाश में मुझे गोल्फ मिला।” उन्होंने आगे कहा, ”गोल्फ खेलने के लिए जिस तरह के मानसिक संतुलन और सोच की जरूरत होती है, वही चीज बड़े स्तर पर किसी बड़ी विरासत को संभालने के लिए भी जरूरी होती है। जिस खानदान से मैं आते हूं, उसकी बड़ी विरासत को संभालने और एक अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने के लिए भी उसी तरह के धैर्य की जरूरत होती है।” बाबिल ने गोल्फ के लिए जरूरी तीन चीजों के बारे में भी बात की। उन्होंने लिखा, ”गोल्फ खेलने के लिए तीन चीजें सबसे जरूरी हैं- प्रैक्टिस, फोकस और सरेंडर। ये तीनों चीजें मुझे खुद को समझने और अपने भीतर लगातार सुधार करने में मदद करती हैं। गोल्फ के जरिए मैं अपने खुद के बदलाव और बेहतर बनने की प्रक्रिया को समझने की कोशिश करता हूं।” बाबिल ने बताया, ”गोल्फ अब मेरे लिए एक ऐसी एक्टिविटी बन गई है, जिसका मुझे अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स के बीच इंतजार रहता है। जो चीज शुरुआत में मेरे लिए एक नया शौक थी, वह धीरे-धीरे मेरे लिए एक खास और मायने रखने वाली आदत बन गई है।” बाबिल खान के एक्टिंग करियर की बात करें तो उन्होंने सीधे अभिनेता के तौर पर शुरुआत नहीं की थी। वह सबसे पहले फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में कैमरा असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके बाद साल 2022 में उन्होंने अन्विता दत्त की साइकोलॉजिकल ड्रामा फिल्म ‘कला’ से एक्टिंग डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ तृप्ति डिमरी नजर आई थीं और बाबिल के अभिनय को दर्शकों ने नोटिस किया। साल 2023 में बाबिल फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ में नजर आए, जिसमें उन्होंने जूही चावला के बेटे सिद्धार्थ मेनन का किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने वेब सीरीज ‘द रेलवे मेन’ में काम किया। यह सीरीज भोपाल गैस त्रासदी की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इसमें बाबिल के साथ दिव्येंदु शर्मा, के.के. मेनन और आर. माधवन जैसे कलाकार भी नजर आए।

दुनिया की आर्थिक बढ़ोतरी की अगली बड़ी लहर का नेतृत्व करने की क्षमता भारत के पास: आईएमएफ

वॉशिंगटन। भारत की पांच द‍िवसीय यात्रा पूरी करने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप-प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने भारत को लेकर बड़ी बात कही। उन्‍होंने कहा क‍ि भारत के पास दुनिया की आर्थिक बढ़ोतरी की अगली बड़ी लहर का नेतृत्व करने की क्षमता है। इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक नींव, निजी क्षेत्र की तेज प्रगति और लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमताएं हैं। भारत की यात्रा के दौरान इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। वॉशिंगटन से जारी एक बयान में क्लार्क ने कहा, “भारत दुनिया की अगली आर्थिक वृद्धि को गति देने की क्षमता रखता है और आईएमएफ इस सफर में देश का करीबी साझेदार बना रहेगा।” आईएमएफ में उप-प्रबंध निदेशक बनने के बाद यह क्लार्क की भारत की पहली यात्रा थी। उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “आईएमएफ के उप-प्रबंध निदेशक के रूप में पहली बार भारत आकर मुझे बहुत खुशी हुई। नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य लोगों से बातचीत करने का अवसर मिला।” क्लार्क ने निर्मला सीतारमण, संजय मल्होत्रा और अशोक कुमार लाहिड़ी को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत और सकारात्मक चर्चाओं के लिए धन्यवाद दिया। आईएमएफ अधिकारी ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताया और कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “मजबूत आर्थिक आधार और अच्छी नीतियों की वजह से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन है।” क्लार्क ने बताया कि भारतीय नीति-निर्माताओं के साथ उनकी बातचीत में देश की आर्थिक स्थिति, वैश्विक परिस्थितियों में हो रहे बदलाव और टिकाऊ तथा सबको साथ लेकर चलने वाली आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, “दुनिया में बढ़ती अनिश्चितताओं और बदलते जोखिमों के बीच आर्थिक स्थिरता और मजबूती बनाए रखना बेहद जरूरी है।” उन्होंने कहा क‍ि हमने इस बात पर चर्चा की कि नीतियां परिस्थितियों के अनुसार लचीली बनी रहें, महंगाई नियंत्रण में रहे और ऐसे सुधार आगे बढ़ाए जाएं जो उत्पादकता बढ़ाएं, प्रतिस्पर्धा मजबूत करें और मध्यम अवधि में तेज विकास को बनाए रखें। क्लार्क ने भारत सरकार को बहुपक्षीय सहयोग को समर्थन देने और क्षेत्र के अन्य देशों की मदद करने के लिए भी धन्यवाद दिया। यात्रा के दौरान उन्होंने कई उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से मुलाकात की और यह समझने की कोशिश की कि भारत का निजी क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति में किस तरह योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा क‍ि मुझे व्यापार जगत के नेताओं से बातचीत का अवसर मिला और मैं भारत के निजी क्षेत्र की ऊर्जा, यहां मौजूद प्रतिभाशाली लोगों और तेजी से विकसित हो रही तकनीकी तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं से काफी प्रभावित हुआ। क्लार्क के अनुसार, नवाचार (इनोवेशन), डिजिटल बदलाव, उन्नत विनिर्माण और नई तकनीकों को अपनाना ऐसे बड़े कारक हैं जो उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा क‍ि हमारी चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, उन्नत विनिर्माण और तकनीक का व्यापक उपयोग उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकते हैं और अधिक मूल्य वाले आर्थिक कार्यों को बढ़ावा दे सकते हैं।

रूस के दौरे पर जनरल धीरज सेठ, रूसी सैन्य नेतृत्व से होगी अहम वार्ता

नई दिल्ली ।भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ बुधवार 16 सितंबर से रूस की आधिकारिक यात्रा कर हैं। उनकी यह 18 सितंबर तक जारी रहेगी। सेना प्रमुख की यह रूस यात्रा भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों और सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्मी -टू-आर्मी संबंधों को आगे बढ़ाने तथा पेशेवर सैन्य सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। यात्रा के दौरान थल सेना प्रमुख रूस की थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे। दोनों सैन्य अधिकारी आपसी हित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। बातचीत में पेशेवर सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल होंगे। दोनों पक्षों के बीच सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के संभावित क्षेत्रों पर भी चर्चा होगी। जनरल धीरज सेठ मॉस्को स्थित नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान वह रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात और बातचीत करेंगे। इनमें रक्षा उद्योग और रक्षा खरीद से जुड़े उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव भी शामिल हैं। इन बैठकों के दौरान मौजूदा सैन्य घटनाक्रमों को लेकर दोनों पक्ष अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने के अवसरों पर भी चर्चा होगी। इससे दोनों देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच संवाद और आपसी समझ को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। जनरल धीरज सेठ अपनी रूस यात्रा की शुरुआत मॉस्को से करेंगे। यहां उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद वह शहीद सैनिकों के स्मारक पर जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यह कार्यक्रम उन सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर होगा, जिन्होंने अपने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। रूस यात्रा के दूसरे चरण में जनरल धीरज सेठ सेंट पीटर्सबर्ग जाएंगे। वहां वह मिखाइलोव्स्काया सैन्य आर्टिलरी एकेडमी का दौरा करेंगे। इस दौरान वह अकादमी के नेतृत्व और शिक्षकों से बातचीत करेंगे। यह दौरा सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को समझने और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संपर्क, प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग इस संबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। जनरल धीरज सेठ की वर्तमान यात्रा इसी सैन्य कूटनीति को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों से दोनों देशों के बीच सेना-से-सेना संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही, पेशेवर सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग और समकालीन सैन्य घटनाक्रमों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान दोनों पक्षों को सहयोग के नए अवसर तलाशने में मदद करेगा। थल सेना प्रमुख की रूस यात्रा इस बात को भी रेखांकित करती है कि भारत और रूस दोनों देशों के बीच निरंतर सैन्य संवाद और मजबूत रक्षा साझेदारी को महत्व देते हैं। तीन दिवसीय यात्रा के दौरान मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में होने वाले कार्यक्रम भारत-रूस सैन्य संबंधों को और गहरा करने तथा दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत बनाने पर केंद्रित रहेंगे।

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश

वॉशिंगटन। रिपब्लिकन प्रतिनिधि थॉमस मैसी ने अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने यह कदम ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध और अपने पद पर उनके कामकाज को लेकर उठाया। मंगलवार को प्रतिनिधि सभा में बोलते हुए मैसी ने हेगसेथ पर ‘गंभीर संवैधानिक और कानूनी उल्लंघन’ करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि हेगसेथ ने 1973 के वार पावर्स रेजोल्यूशन का उल्लंघन किया, ईरान संघर्ष में अमेरिकी सैन्य भागीदारी खत्म करने से जुड़े कांग्रेस के निर्देशों को नजरअंदाज किया, आम नागरिकों के हताहत होने को कम करने के लिए बनाए गए कानूनों का पालन नहीं किया और संदिग्ध ड्रग तस्करों के खिलाफ अदालत की प्रक्रिया के बिना किए गए हमलों को मंजूरी दी या उनकी निगरानी की। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मैसी ने आरोप लगाया कि हेगसेथ ने अपने पद के अधिकारों का दुरुपयोग किया। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन की आलोचना करने वाले लोगों को उनके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल करने पर निशाना बनाया गया। ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध अब सातवें महीने में पहुंच चुका है और अमेरिकी जनता के बीच यह अलोकप्रिय हो गया है। इससे रिपब्लिकन लॉमेकर्स पर भी दबाव बढ़ रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मैसी के अलावा कितने रिपब्लिकन लॉमेकर्स और डेमोक्रेट इस महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। यह कदम उसी दिन उठाया गया जब द हिल की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पेंटागन ने पिछले महीने कांग्रेस को जानकारी दी थी कि ईरान युद्ध की लागत 42 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गई है। यह रक्षा विभाग के पहले सार्वजनिक अनुमान से 4.5 अरब डॉलर ज्यादा है। उम्मीद है कि प्रतिनिधि सभा गुरुवार तक मैसी के प्रस्ताव पर कार्रवाई करेगी। इससे लॉमेकर्स के पास इस पर विचार करने के लिए बहुत कम समय होगा। सदन इस सप्ताह के अंत में नवंबर के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले होने वाले पारंपरिक शरदकालीन अवकाश के लिए स्थगित होने वाला है। हेगसेथ के खिलाफ यह दूसरा महाभियोग प्रयास है। इससे पहले अप्रैल में हाउस के डेमोक्रेट लॉमेकर्स ने छह आरोपों वाला एक महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। इस बीच, व्हाइट हाउस ने मंगलवार को रक्षा मंत्री हेगसेथ का समर्थन किया। केंटकी के रिपब्लिकन लॉमेकर थॉमस मैसी की ओर से महाभियोग प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने पत्रकारों से कहा कि हेगसेथ बेहतरीन काम कर रहे हैं।

महाराष्ट्र दौरे पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, मुंबई-पुणे के प्रसिद्ध गणेश पंडालों में करेंगे दर्शन-पूजन

मुंबई। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को एक दिवसीय महाराष्ट्र दौरे है। मुंबई पहुंचते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान मंत्री जयकुमार रावल, मुंबई भाजपा अध्यक्ष, विधायक अमित साटम और मेयर रितु तावड़े जी भी मौजूद थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास नंदनवन पहुंचे। नंदनवन में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मुंबई और पुणे में विभिन्न गणेश पंडालों एवं मंदिरों में भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। भाजपा अध्यक्ष मुंबई पहुंचने के बाद श्री सिद्धिविनायक मंदिर जाएंगे और लालबागचा राजा पंडाल में दर्शन करेंगे।इसके साथ ही पुणे में वह कसबा पेठ मंडल और शाम को श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंडल में दर्शन एवं पूजा में शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार विश्व प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल जाएंगे, जहां वे गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और त्योहार के दौरान पारंपरिक गणेश दर्शन में भाग लेंगे। वे दोपहर 2:15 बजे बांद्रा रिक्लेमेशन पहुंचेंगे, जहां वे गणेशोत्सव के दौरान श्री गणेश दर्शन में भाग लेंगे और प्रार्थना करेंगे। मुंबई में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद, वे पुणे के लिए रवाना होंगे, जहां वे प्रमुख गणेश मंडलों में जाकर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। पुणे पहुंचने पर नवीन कस्बा पेठ मंडल में जाकर गणपति बप्पा के दर्शन करेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। यह दौरा गणेशोत्सव के दौरान शहर में उनके निर्धारित धार्मिक कार्यक्रमों का हिस्सा होगा। इसके बाद, शाम 5:00 बजे, नवीन पुणे के विश्व प्रसिद्ध श्रीमंत दगडुशेठ हलवाई गणपति मंदिर जाएंगे। वे इस प्रसिद्ध गणपति मंडल में श्री गणेश के दर्शन और पूजा में भाग लेंगे, जो इस त्योहार के दौरान प्रमुख पूजा स्थलों में से एक है। शाम 5:30 बजे, भाजपा अध्यक्ष सदाशिव पेठ स्थित साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल में प्रार्थना करेंगे। इसके बाद वे कोथरूड स्थित श्री साई मित्र मंडल में श्री गणेश के दर्शन और प्रार्थना करने जाएंगे।

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

मुंबई। सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है। सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है। चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला। फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी। ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

‘शास्त्रीय संगीत का गौरव’, भारत रत्न एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी को नेताओं का नमन

नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमर साधिका और भारत रत्न से सम्मानित एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर बुधवार को देशभर के नेताओं ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी स्वर-साधना ने भारतीय संगीत और संस्कृति को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरव भारत रत्न एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमर साधिका, भारत रत्न एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में आपका अविस्मरणीय योगदान सदैव संगीत जगत के प्रशंसकों के दिलों में रहेगा।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “भारत रत्न से सम्मानित, भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान साधिका सुश्री एम. एस. सुब्बालक्ष्मी जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। अपनी दिव्य स्वर-साधना से उन्होंने भारतीय संगीत और संस्कृति को विश्वभर में गौरवान्वित किया।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमर साधिका, सुरों की साधना को समर्पित भारत रत्न एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी जी की जयंती पर सादर नमन करता हूं। उनके मधुर स्वरों में भक्ति, समर्पण और भारतीय संस्कृति की आत्मा का दिव्य स्पंदन अनुभव होता है। संगीत जगत में उनका अतुलनीय योगदान सदैव हमारी सांस्कृतिक विरासत को आलोकित करता रहेगा।” भाजपा नेता डॉ हर्षवर्धन ने कहा, “भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान साधिका, स्वर कोकिला एवं भारत रत्न से सम्मानित एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन एवं शत-शत नमन। अपने दिव्य स्वर और अद्वितीय साधना से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय एवं भक्ति संगीत को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनकी संगीत साधना और कला के प्रति समर्पण सदैव संगीत प्रेमियों एवं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

चिट फंड घोटाले के मामले में ईडी ने कोलकाता में छह जगहों पर छापेमारी की

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कोलकाता में कई करोड़ रुपये के चिट फंड मामले के सिलसिले में छह जगहों पर एक साथ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों की एक टीम, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (सीएपीएफ) के साथ सुबह करीब 7 बजे उत्तरी कोलकाता के नारकेलडांगा इलाके में एक बिजनेसमैन के घर पहुंची। पता चला है कि इस बिजनेसमैन ने अच्छा रिटर्न देने का वादा करके लोगों से पैसे जमा किए और उन्हें अलग-अलग सेक्टर में इन्वेस्ट किया। बाद में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की जांच एजेंसी ईडी की पांच और टीमों ने इसी चिट फंड मामले के सिलसिले में उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता में पांच और जगहों पर छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि लोगों से पैसे एक पोंजी कंपनी, एपीएम ग्रुप के नाम पर जमा किए गए थे। इस ग्रुप ने पैसे इकट्ठा करके अलग-अलग सेक्टर में इन्वेस्ट किए लेकिन ऐसा एक दूसरी कॉर्पोरेट कंपनी के जरिए किया गया जो असल में एक शेल कंपनी (सिर्फ कागजों पर चलने वाली कंपनी) थी। पता चला है कि चिट फंड स्कीम में जमा किए गए पैसों के गबन के आरोपों के चलते ये छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए गए। सूत्रों के मुताबिक, पोंजी कंपनी के मालिक के घर के अलावा, मालिक के करीबी लोगों के घरों पर भी इसी तरह की छापेमारी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस कंपनी की धोखाधड़ी का तरीका एक जैसा था। पहले अलग-अलग मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम के ज़रिए लोगों से भारी मात्रा में पैसे जमा किए जाते थे और निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का वादा किया जाता था, फिर जमा किए गए पैसे को एक शेल कंपनी (कागजी कंपनी) के ज़रिए अलग-अलग सेक्टर में निवेश किया जाता था। सूत्रों ने बताया कि लोगों से ये पैसे संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लिए बिना जमा किए गए थे। 2012 से पश्चिम बंगाल पोंज़ी स्कीम चलाने वाली कंपनियों का गढ़ रहा है, जिनमें सुदीप्तो सेन की शारदा ग्रुप और गौतम कुंडू की रोज वैली ग्रुप जैसी कंपनियां शामिल हैं। ईडी और सीबीआई लंबे समय से ऐसी कई कंपनियों की गतिविधियों की अलग-अलग जांच कर रहे ही और उन्होंने इनसे जुड़े होने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार भी किया है।

कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष के दौरान प्रीह विहियर मंदिर को हुआ नुकसान, संरक्षण में भारत करता रहा है मदद

प्रीह विहियर। कंबोडिया के 11वीं सदी के प्रीह विहियर मंदिर में 2025 में थाईलैंड के साथ हुई लड़ाई के दौरान हुई भारी तबाही का व्यापक असर अब सामने आया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ऐतिहासिक स्थल के परिसर में सैकड़ों स्थानों पर गोलाबारी के निशान मिले हैं। कंबोडिया-थाईलैंड की सीमा पर स्थित इस मंदिर के सरंक्षण और पुनर्निर्माण में भारत लंबे समय से मदद करता रहा है। संघर्ष के दौरान भारत ने यूनेस्को साइट को लेकर चिंता भी जताई थी। मंदिर में लड़ाई के स्पष्ट निशानों में टूटे हुए बलुआ पत्थर, क्षतिग्रस्त नक्काशी और अस्थिर हुई संरचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा बिना फटे विस्फोटक और आयुध अभी भी संरक्षण कर्मचारियों तथा आगंतुकों के लिए खतरा बने हुए हैं। क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण ने नुकसान का आकलन किया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के सलाहकार पैनल के एक मिशन से मिली तकनीकी जानकारी और सत्यापन के आधार पर प्राचीन मंदिर परिसर में सैकड़ों प्रभावित स्थानों की पहचान की गई है। इससे मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष हुई दो प्रमुख अवधि की लड़ाई के दौरान मंदिर को नुकसान पहुंचा। पहली लड़ाई 24 से 28 जुलाई के बीच हुई, जब भारी गोलाबारी में मंदिर परिसर के 142 स्थान प्रभावित हुए। इसके बाद 7 से 27 दिसंबर के बीच हुई दूसरी लड़ाई और बमबारी में 420 अन्य स्थानों को नुकसान पहुंचा। प्रीह विहियर के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के महानिदेशक कोंग पुथिकार ने पत्रकारों को बताया कि माइनिंग और तकनीकी टीमों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि 81 मिलीमीटर से 155 मिलीमीटर तक के तोप के गोले और हवाई बम मंदिर के प्रमुख मंडपों तथा मार्गों पर गिरे। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत की मदद से जिन दो हिस्सों में बहाली का काम चल रहा था, वे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। पुथिकार के मुताबिक विस्फोटों से प्राचीन बलुआ पत्थर की दीवारें टूट गईं, ऐतिहासिक शिलालेखों के हिस्से अपनी जगह से हट गए और मंदिर की आधार-उत्कीर्ण कलाकृतियों तथा पत्थर की संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। हेरिटेज इमरजेंसी फंड और एएलआईपीएच फंड की मदद से विशेषज्ञों ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त 23 स्थानों को स्थिर किया है। इसके अलावा टूटे हुए पत्थरों और कलात्मक अवशेषों के 65,738 टुकड़ों का दस्तावेजीकरण और सूचीकरण किया गया है। प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी बहाल किया गया है। अधिकारियों ने मंदिर परिसर का व्यापक त्रिआयामी डिजिटल दस्तावेजीकरण भी पूरा किया है। उनका कहना है कि यह रिकॉर्ड भविष्य में संरक्षण और पुनर्निर्माण के काम में मदद करेगा। यह कार्य अंतरराष्ट्रीय सलाहकार मिशन की सिफारिशों के अनुरूप किया गया है। 10 सितंबर को कंबोडिया और अन्य देशों के 40 से अधिक पत्रकारों को मंदिर का दौरा करने की अनुमति दी गई। पिछले साल दिसंबर में हुई दूसरी लड़ाई के बाद किसी मीडिया समूह को पहली बार मंदिर परिसर में जाने की अनुमति मिली थी। हालांकि, मंदिर अभी पर्यटकों के लिए बंद है। अधिकारियों का कहना है कि परिसर को अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया है। कंबोडियन माइन एक्शन सेंटर के विशेषज्ञों ने पत्रकारों को लड़ाई से प्रभावित इलाकों में ले जाकर उन स्थानों को दिखाया, जहां नुकसान और संघर्ष के अवशेष अभी भी दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, थाईलैंड के ज्वाइंट इंफॉर्मेशन सेंटर ने हाल में आरोप लगाया है कि कंबोडियाई बलों ने प्रीह विहियर मंदिर के आसपास के इलाकों का सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया था। 12 सितंबर को जेआईसी के निदेशक प्रापास सोर्नचाईदी ने आरोप लगाया कि थाईलैंड के पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कंबोडियाई बलों ने मंदिर के इलाके को सैन्य गढ़ के रूप में इस्तेमाल किया। हालांकि कंबोडिया ने इस आरोप को खारिज किया है। प्रीह विहियर मंदिर को 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इसे खमेर वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति और असाधारण सार्वभौमिक महत्व वाला स्थल माना गया है। मंदिर परिसर में कई धार्मिक संरचनाएं शामिल हैं, जो करीब 800 मीटर लंबे मार्ग के साथ सीढ़ियों और पक्के रास्तों से जुड़ी हैं। प्रीह विहियर को लेकर कंबोडिया और सियाम, जिसे अब थाईलैंड कहा जाता है, के बीच विवाद की जड़ें 20वीं सदी की शुरुआत में सीमा निर्धारण तक जाती हैं। यह कानूनी विवाद अंततः अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचा, जब कंबोडिया ने 1959 में थाईलैंड के खिलाफ मामला दायर किया। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला दिया कि मंदिर उस क्षेत्र में स्थित है जिस पर कंबोडिया की संप्रभुता है। अदालत ने थाईलैंड को मंदिर और कंबोडियाई क्षेत्र में उसके आसपास से अपने सैन्य, पुलिस और अन्य बलों को हटाने का भी आदेश दिया। 2008 में मंदिर को विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने के बाद प्रीह विहियर को लेकर तनाव फिर बढ़ गया। इसके बाद सीमा क्षेत्र में कंबोडियाई और थाई बलों के बीच सशस्त्र झड़पें हुईं, जिनमें मंदिर के आसपास के इलाके भी शामिल थे। दक्षिण कोरिया के बुसान में जुलाई के अंत में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित सांस्कृतिक विरासत स्थलों की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई गई। समिति ने संघर्ष के दौरान सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने और उसके विनाश को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लखनऊ: पत्नी को पिस्टल दिखाते समय युवक ने खुद को मारी गोली, इलाज के दौरान मौत

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। नशे में अवैध पिस्टल से खेल रहे 29 वर्षीय युवक की खुद को गोली मारने से मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अवैध हथियार को जब्त कर जांच शुरू कर दी है। मामला सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र के महिपाल खेड़ा चौकी सरसवां का है। मृतक की पहचान यसार्थ शरण यादव (29) पुत्र शिव शरण यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मंगलवार देर रात करीब 11 बजे थाना सुशांत गोल्फ सिटी पर सूचना मिली कि एक युवक ने अपने घर में खुद को गोली मार ली है। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मौके पर मौजूद परिजनों ने पुलिस को बताया कि यसार्थ शरण यादव कहीं से एक अवैध पिस्टल लेकर घर आया था। बताया जा रहा है कि वह शराब के नशे में था। घर आकर वह अपनी पत्नी को पिस्टल दिखा रहा था। पिस्टल दिखाने के दौरान उसकी मैगजीन नीचे गिर गई। परिजनों के मुताबिक, मैगजीन निकलने के बाद भी पिस्टल के चैंबर में एक कारतूस फंसा हुआ था, लेकिन युवक को लगा कि मैगजीन निकलने के बाद पिस्टल से फायर नहीं होगा। इसी गलतफहमी में वह पिस्टल को अपनी कनपटी पर सटाकर कहने लगा कि “मैगजीन निकल गई है, कुछ नहीं होगा” और उसने ट्रिगर दबा दिया। ट्रिगर दबाते ही चैंबर में फंसे कारतूस से गोली चल गई और सीधे उसकी कनपटी में जा लगी। गोली लगते ही युवक गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। परिजन आनन-फानन में उसे सिविल हॉस्पिटल, हजरतगंज लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने फॉरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाया। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। मौके से अवैध पिस्टल और एक खोखा कारतूस बरामद किया गया है, जिसे कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मृतक के पास अवैध पिस्टल कहां से आई थी। इसके लिए उसके संपर्कों और हाल की गतिविधियों की जांच की जा रही है।