कब है विश्वकर्मा पूजा? तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त और विधि तक जानें सब कुछ

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का खास महत्व है। इस दिन कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से काम में सफलता, तरक्की और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। अगर आप भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि विश्वकर्मा पूजा कल है या परसों, तो इस साल यह पर्व 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक शुभ समय है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें शिल्प, निर्माण और वास्तुकला का अधिष्ठाता देव माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन सिर्फ भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा नहीं होती, बल्कि काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों की भी पूजा की जाती है। फैक्ट्री में लगी मशीन हो, दुकान के उपकरण हों, वर्कशॉप के औजार हों या वाहन- उन्हें साफ करके पूजा में शामिल किया जाता है। यह पर्व मेहनत, हुनर और काम के प्रति सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। सबसे पहले पूजा स्थल और कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें। मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों को भी साफ कर लें। इसके बाद एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा में दीपक जलाएं और भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, फूल, माला, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें। गंगाजल से पूजा स्थल का शुद्धिकरण किया जा सकता है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें। औजारों और मशीनों पर भी रोली-अक्षत लगाकर फूल चढ़ाएं। अंत में भगवान की आरती करें और भोग लगाकर सभी में प्रसाद बांटें। इस दिन कुछ लोग हवन भी करते हैं।

‘थूकते होंगे भोजपुरी के लोग…’, कुकिंग विवाद को लेकर आम्रपाली दुबे पर माही विज ने निकाली भड़ास

मुंबई। ‘बिग बॉस 20’ के घर में कंटेस्टेंट्स के बीच दोस्ती और तकरार का सिलसिला लगातार देखने के लिए मिल रहा है। शो में माही विज और आम्रपाली दुबे के बीच पहले से चल रहा तनाव अब एक बार फिर खुलकर सामने आया है। इस बार दोनों के बीच विवाद की शुरुआत किचन में चिकन बनाने को लेकर हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे कमेंट करने शुरू कर दिए। बहस के दौरान माही ने आम्रपाली की भोजपुरी पहचान को लेकर भी टिप्पणी कर दी। इसके बाद घर का माहौल काफी गरमा गया और दोनों की नाराजगी साफ नजर आई। दरअसल, ‘बिग बॉस’ के घर में खाना बनाने की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर कंटेस्टेंट्स के बीच बहस देखने को मिलती है। हालिया घटना भी किचन से ही शुरू हुई। आम्रपाली दुबे कुकिंग कर रही थीं। इसी दौरान माही विज आईं और कुछ सवाल करने लगीं। खाना बनाने के दौरान माही का दखल देना आम्रपाली को पसंद नहीं आया और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। आम्रपाली का कहना था कि अगर वह किचन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं तो उन्हें अपने तरीके से खाना बनाने दिया जाना चाहिए। उन्हें यह बात भी खटकी कि माही खुद खाना नहीं बनाती, लेकिन कुकिंग के तरीके पर लगातार सवाल उठा रही हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस बढ़ती गई और बातचीत तीखे शब्दों तक पहुंच गई। विवाद के बाद माही विज काफी गुस्से में नजर आईं। वह घर के दूसरे सदस्यों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करती दिखीं और इस दौरान रो भी पड़ी। माही ने अपने घर में कुक होने की बात करते हुए कहा, ”मुझे नहीं आता खाना बनाना। मेरे घर पर कुक है। मैंने कुक रखने के लिए बहुत मेहनत की है।” इसके बाद माही ने अपने खिलाफ हो रही बातों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ”वे बहुत घटिया हैं। मेरी जूती… मैं उन्हें दो मिनट में खत्म कर दूंगी।’ मामला यहीं नहीं रुका। बहस के दौरान माही ने कहा, ”थूकते होंगे भोजपुरी के लोग इस पर।” वहीं, आम्रपाली ने भी माही को जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किचन में उन्होंने माही से खाना बनाते समय वहां से दूर रहने को कहा। इस पर माही ने जवाब दिया, ‘तुम मेरे लिए मायने ही नहीं रखतीं।’ इसके बाद आम्रपाली ने माही की कुकिंग को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब माही खाना बनाती हैं तो 16 लोगों के लिए भी खाना पूरा नहीं पड़ता।

बिग बॉस 20 में आम्रपाली दुबे ने सुनाया ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का किस्सा, कहा- 6 घंटे तक रुकी थी शूटिंग

मुंबई। भोजपुरी अभिनेत्री आम्रपाली दुबे ने ‘बिग बॉस-20’ के एक एपिसोड में भोजपुरी फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का पुराना किस्सा याद किया। इसमें उन्होंने बताया कि फिल्म के एक फाइट सीन की वजह से शूटिंग करीब 6 घंटे तक रुकी रही थी। दरअसल, शो के दौरान अभिनेत्री ने भोजपुरी फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ से जुड़ा किस्सा शेयर करते हुए बताया कि फिल्म के एक फाइट सीन के दौरान रवि किशन और मनोज तिवारी के बीच बहस हो गई थी। दोनों इस बात पर अड़ गए थे कि पहला मुक्का कौन मारेगा, और इसी वजह से शूटिंग करीब 6 घंटे तक रुकी रही थी। किस्सा शुरू करने से पहले आम्रपाली ने कहा, “मैं आपको एक कहानी सुनाती हूं। आप सब हंसते-हंसते पागल हो जाएंगे।” उन्होंने याद किया कि रवि किशन और मनोज तिवारी फिल्म में दुश्मन का रोल कर रहे थे और उन्हें एक फाइट सीक्वेंस शूट करना था। पूरे दिन की शूटिंग एक आसान से सवाल पर रुकी रही, कि पहले कौन दूसरे को मुक्का मारेगा? आम्रपाली ने आगे कहा, “मनोज भैया ने उस सीन का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस उन्हें लेने आई है। तो पुलिस पहले मारेगी और रवि भैया ने कहा कि जब पिछले डायलॉग में ही यह तय हो गया है कि यह मेरा एरिया है, तो कोई मुझे कैसे मारेगा?” आखिरकार इस रुकावट ने दिनेश लाल यादव को एक सॉल्यूशन के साथ आगे आने पर मजबूर किया। अभिनेत्री ने कहा, “फिर दिनेश जी बीच में आए और उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि दोनों मनोज और रवि, तुम दोनों एक-दूसरे को मारने के लिए मुक्का उठाओ और तब तक मैं तुम्हें बचाने के लिए बीच में आऊंगा।” आम्रपाली ने बताया कि लगभग छह घंटे की शूटिंग के बाद यह तय हुआ था कि पहला मुक्का दिनेश लाल यादव खाएंगे, उसके बाद ही फाइट सीन शुरू होगा। भोजपुरी फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का निर्देशन हैरी डब्ल्यू फर्नांडिस ने किया था। साल 2011 में रिलीज हुई एक सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर भोजपुरी फिल्म में भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज कलाकार रवि किशन, मनोज तिवारी और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके अलावा, रानी चटर्जी, पाखी हेगड़े और रिंकू घोष ने अहम रोल में थी।

राजस्थान निकाय चुनावः जयपुर के पांच बूथों पर दोबारा मतदान जारी

जयपुर। राजस्थान शहरी स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के लिए जयपुर के पांच बूथों पर दोबारा मतदान हो रहा है। वोटों की गिनती के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में तकनीकी खराबी की सूचना मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। वहीं, जोधपुर के एक बूथ पर दोबारा मतगणना हो रही है। सुमन जैन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “14 सितंबर को हम सभी जयपुर से बाहर थे। हम कल ही लौटे हैं, इसलिए आज वोट डालने आए हैं। ” अंतू जैन ने कहा, “मैंने अपनी कॉलोनी वृंदावन विहार में विकास के मुद्दे पर मतदान किया है। पिछली बार मतदान के समय मेरा परिवार यहां नहीं था। इस बार मौका मिला है तो अपने स्थानीय मुद्दे को लेकर मतदान किया है। रति तिवारी ने कहा, “यहां 14 सितंबर को भी वोटिंग हुई थी और हमने तब वोट डाला था। लेकिन, वोटिंग मशीनों में से एक में तकनीकी खराबी के कारण वोटों की गिनती पूरी नहीं हो सकी। इसलिए, आज महाप्रज्ञा स्कूल में वार्ड नंबर 34 के लिए दोबारा वोटिंग हो रही है। मैंने फिर से वोट डाला है और सभी से अपील करता हूं कि वे आगे आएं, वोट दें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना योगदान दें।” नर्सिंग कुमार गुप्ता ने कहा, “पिछली बार धार्मिक यात्रा के कारण मैं मतदान करने से वंचित रह गया था। इस बार मौका मिला है तो लोकतंत्र की मजबूती के लिए वोट डाल रहा हूं। मैं साफ-सफाई और क्षेत्र के विकास के मुद्दे पर मतदान किया है। जीएसटी लगाने के हाउस टैक्स लगाना गलत है, इसलिए मैं चाहता हूं, जो भी चुनाव जीते इस मुद्दे का समाधान कराए।” वहीं, जोधपुर नगर निगम चुनाव के वार्ड नंबर 50 के बूथ नंबर 338 पर वोटों की गिनती के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में खराबी आने के बाद दोबारा वोटिंग हो रही है। रिटर्निंग ऑफिसर राम किशोर मीणा बताया, “हमारे एक बूथ पर तय री-पोलिंग शुरू हो गई है। सब कुछ बहुत शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है। हमने कल ही सारी तैयारियां पूरी कर ली थीं। कल ही पुलिस और प्रशासन, कानून-व्यवस्था और संभावित मुद्दों की पूरी समीक्षा की गई थी। उसी के मुताबिक, आज वार्ड नंबर 50 के पोलिंग बूथ 338 पर वोटिंग बहुत शांति से हो रही है।

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री धामी ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ मनाया अपना जन्मदिन

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द विजुअली हैंडीकैप्ड’ में दृष्टिबाधित बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा और ट्रेनिंग देकर हर तरह से सशक्त बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। अपने जन्मदिन के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वैसे तो हर दिन जब कोई इंसान सुबह जागकर उठता है तो उसका जन्म ही होता है, क्योंकि वह नए दिन में आता है। उन्होंने कहा, “जन्मदिवस पर मेरा प्रयास रहता है कि मैं दिव्यांग बच्चों की बीच आऊं और उनके साथ समय बिताऊं। मेरी हमेशा से यही आदत रही है कि मैं अपने दिन की शुरुआत यहां आकर करूं और आज भी मैंने ऐसा ही किया।” मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमारे प्रधानमंत्री ने उनकी तरक्की के लिए बहुत काम किए हैं और दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। उन्हें शिक्षा और ट्रेनिंग देकर हर तरह से सशक्त बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। मेरा मानना ​​है कि उन्हें सिर्फ हमारी सहानुभूति की जरूरत नहीं है। सहानुभूति के साथ उनको सक्षम बनाना जरूरी है। इनकी भागेदारी होना जरूरी है। आज दिव्यांग बच्चों में से जिनको अवसर मिल रहे हैं और जिनकी भागेदारी है, वे हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे राज्य के युवा सेवा कार्यों के जरिए इस दिन को ‘युवा दिवस’ और ‘संकल्प दिवस’ के तौर पर मना रहे हैं। हमारा मकसद राज्य के हर उस हिस्से तक पहुंचना है जहां अभी तक सिस्टम और सुविधाएं नहीं पहुंची हैं या जहां अभी भी कमियां हैं। हम इन सभी इलाकों में सुविधाओं के विस्तार और सेवा पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले 12 सालों में, जब से पीएम मोदी ने पद संभाला है, राज्यों के बीच 10 से अधिक बड़े विवाद सुलझाए गए हैं और सभी पक्ष इससे संतुष्ट हैं। उत्तराखंड में कई लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट, जैसे लखवार, जमरानी, ​​सौंग और किशाऊ बांध प्रोजेक्ट, भी आगे बढ़े हैं।” उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को भी फायदा होगा। यह प्रोजेक्ट यमुना की सफाई की चुनौती से निपटने, साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने और बिजली पैदा करने में मदद करेगा। उधर, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिवस पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर बहुत शुभकामनाएं, अनेक बधाइयां। उत्तराखंड उनके नेतृत्व में अनेक कीर्तिमान स्थापित कर चुका है, विशेषकर समान नागरिक संहिता। हमारे देश का पहला प्रांत और प्रदेश है, जो यूसीसी या समान नागरिक संहिता बिल लाकर और उसे पास करके सबको समान अधिकार दे चुका है।” उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के तीर्थ अत्यंत विकसित हुए हैं। यहां अपराध घटा है। विशेषकर बद्री-केदार, यमुनोत्री, गंगोत्री और हरिद्वार में तीर्थों के विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। अभी कुंभ आने वाला है, कुंभ को लेकर मुख्यमंत्री जी अत्यंत उत्साहित हैं, वो कई बार हम संतों के साथ बैठ चुके हैं।

आलिया भट्ट ने पिता महेश भट्ट को बताया नाटकीय, बोलीं- उनके साथ कई मजेदार यादें जुड़ी हैं

मुंबई। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने मां सोनी राजदानी की फिल्म ‘ओम का हरी’ की स्पेशल स्क्रीनिंग में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने पिता महेश भट्ट से जुड़ा बचपन का एक किस्सा शेयर किया। अभिनेत्री ने बताया कि उनके पिता काफी मजाकिया व्यक्ति हैं, जिस वजह से उनके साथ कई मजेदार यादें जुड़ी हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने कहा, “जब मैं फर्स्ट क्लास में थी, तब मेरा स्पेलिंग टेस्ट था और मुझे डर लगता था कि मैं ‘द’ शब्द की स्पेलिंग कहीं भूल न जाऊं। पापा ने ये बात मेरे दिमाग में बैठाने के लिए बहुत बड़ा ड्रामा किया, ताकि मैं स्पेलिंग कभी न भूलूं। मुझे आज भी याद है कि वह उस समय एक बड़े भालू की तरह, बहुत ही नाटकीय और मनोरंजक लग रहे थे।” फिल्म ‘ओम का हरि’ भी पिता और बेटे के रिश्ते की उलझनों को दिखाती है। इसे कॉमेडी और ड्रामा के जरिए बताया गया है कि परिवार में कई बार ऐसी बातें होती हैं जो कह पाना मुश्किल होता है। फिल्म का निर्देशन हरीश व्यास ने किया है। इसमें ओम और हरि के मुख्य किरदारों में अंशुमान झा और रघुबीर यादव नजर आएंगे। फिल्म की कहानी का सबसे अहम हिस्सा पिता और बेटे के बीच का रिश्ता है। आमतौर पर पिता और बेटे के रिश्ते में प्यार के साथ-साथ सोच का फर्क भी देखने को मिलता है। दोनों एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार उनके बीच टकराव भी होता है। ‘ओम का हरि’ इसी रिश्ते के अलग-अलग रंगों को ड्रामा और कॉमेडी के जरिए सामने लाती है। फिल्म में अंशुमान झा और रघुबीर यादव के अलावा सोनी राजदान, आयशा कपूर और समता सुदीक्षा भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। फर्स्ट रे फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन हरीश व्यास ने किया है। ‘ओम का हरि’ हरीश व्यास और अंशुमान झा की साथ में तीसरी फिल्म है। इससे पहले दोनों ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ और ‘हम भी अकेले-तुम भी अकेले’ में साथ काम कर चुके हैं। ‘ओम का हरि’ सितंबर में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

पाकिस्तान: जेल प्रशासन ने बहनों को भाई इमरान खान से मिलने की फिर नहीं दी इजाजत

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की न्यायपालिका के फरमान को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस प्रशासन ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों को फिर नहीं मिलने दिया गया। स्थानीय मीडिया ने के अनुसार खान की बहनों को रावलपिंडी की अदियाला जेल में उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई। बुधवार को प्रकाशित, पाकिस्तानी दैनिक ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील अवैस यूनस चौधरी ने बताया कि इमरान खान की बहनें और छह वकील उनसे मिलने के लिए जेल पहुंचे, लेकिन उन्हें एक बार फिर मिलने की इजाजत नहीं दी गई। चौधरी के हवाले से ‘डॉन’ ने लिखा, “बहनें शाम 6:30 बजे के बाद भी वहां इंतजार करती रहीं, लेकिन उन्हें मुलाकात की मंजूरी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। आईएचसी (इस्लामाबाद हाई कोर्ट) ने आदेश दिया है कि इमरान खान के परिवार और वकीलों के साथ मंगलवार को और पार्टी नेताओं के साथ गुरुवार को मुलाकात कराई जाए, लेकिन कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।” मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान की बहन अलीमा खान ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से अदालतें इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर रही हैं। अलीमा खान ने कहा, “अगर अदालतों से न्याय नहीं मिलेगा, तो लोग सड़कों पर नहीं उतरेंगे तो क्या करेंगे? किसी को न्याय नहीं मिल रहा है; यह सिर्फ इमरान खान की बात नहीं है। इसका असर पाकिस्तान के हर नागरिक पर पड़ेगा। अदालतें ऊपर से आदेश मिलने के बाद फैसले सुना रही हैं। लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है… जज सरफराज डोगर 20 महीनों से अल-कादिर मामले में इमरान खान और बुशरा बीबी की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं, जबकि हर कानून कहता है कि इस पर सुनवाई होनी चाहिए और जमानत मिलनी चाहिए, और तोशाखाना मामले में भी नौ महीनों से कोई सुनवाई नहीं हुई है।” एक सवाल के जवाब में अलीमा खान ने कहा कि संवैधानिक अदालत का गठन असंवैधानिक तरीके से किया गया था और इसका मकसद सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करना और इमरान खान को जेल में रखना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के लिए अपना अस्तित्व और अखंडता बनाए रखना जरूरी है। 3 सितंबर को, इमरान खान की बहन उज्मा खान ने कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को लागू न करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना ​​की दूसरी याचिका दायर की थी। एक अन्य पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्मा खान की याचिका में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रावलपिंडी सेंट्रल जेल (अदियाला) के सुपरिटेंडेंट साजिद बेग, पंजाब के जेल महानिरीक्षक मियां सालिक जलाल, गृह मंत्रालय के सचिव अहमद सरवर रजा और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के मुख्य आयुक्त सोहेल अशरफ को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट के 18 अगस्त के आदेशों को लागू नहीं किया गया है, जिनमें इमरान खान को अपने बेटों से वर्चुअली बात करने और अपनी बहनों से हर हफ्ते मिलने की इजाजत दी गई थी। याचिका में उज्मा खान ने बताया कि मंगलवार को इमरान खान को अपनी बहनों से मिलने नहीं दिया गया और मार्च से उन्होंने अपने बेटों से बात नहीं की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इमरान खान और उनके बेटों – कासिम खान और सुलेमान खान – के बीच हफ्ते में दो बार फोन पर बातचीत की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कोर्ट से गुजारिश की गई है कि वह अपने 18 अगस्त के आदेश को लागू करने के लिए कदम उठाए या निर्देश जारी करे, खासकर इमरान खान और उनके पारिवारिक सदस्यों के बीच मुलाकात और फोन पर बातचीत से जुड़े आदेश को। पाकिस्तानी कोर्ट में उज्मा खान की यह नई याचिका, कोर्ट के 18 अगस्त के उस आदेश को सरकार द्वारा लागू न करने पर पहले हुए अवमानना ​​मामले के बाद आई है, जिसमें इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने का निर्देश दिया गया था। 18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को जांच और इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत देने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के बावजूद, अधिकारियों ने 21 अगस्त को इमरान खान को इलाज के लिए पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स) पहुंचाया और डॉक्टरों के यह कहने के बाद कि वह “मेडिकली फिट” हैं, उन्हें वापस अदियाला जेल ले आए।

अपराजिता-परांग ला 2026′ फतह : 30 दिन में 250 किमी का बर्फीला सफर तय कर लद्दाख पहुंची एनसीसी गर्ल्स

‘नई दिल्ली। ‘अपराजिता-परांग ला 2026’ अभियान के तहत देश की बेटियां हिमालय की बेहद कठिन ऊंचाइयों पर अपने साहस और हौसले का परिचय दिया है। इस मिशन का सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव परांग ला दर्रा था। यह समुद्र तल से 5,578 मीटर या 18,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे पार करने के लिए अभियान में शामिल एनसीसी की ये महिला कैडेट्स ऊंचे पहाड़ी, ग्लेशियर, बर्फीले मैदान और नदी घाटियों जैसे बेहद कठिन इलाकों से गुजरीं। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है। यह मार्ग देश के सबसे कठिन उच्च ऊंचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में माना जाता है। इस अभियान के लिए देशभर से 28 एनसीसी कैडेट चुनी गई थीं। इन कैडेट औसत उम्र करीब 19 वर्ष है। इन्होंने लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिन में तय की है। इस अभियान की सबसे कम उम्र की प्रतिभागी महज 16 वर्ष 6 महीने है। अभियान का मार्ग किब्बर, डुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक करजोंग, नोरबू सुमदो, कियांगडोम और कोरजोक से होकर गुजरा। इस पूरे अभियान की खास बात यह है कि इसका नेतृत्व थल सेना, नौसेना और वायु सेना की तीन महिला अधिकारियों ने किया। उनके साथ अधिकारी, चिकित्सा दल, प्रशिक्षक और अन्य सहायता कर्मी भी मौजूद रहे। इस दौरान देशभर से चुनी गई 20 एनसीसी महिला कैडेट्स ने साहस, आत्मविश्वास और टीम भावना की मिसाल पेश करते हुए पारंग ला दर्रा पार किया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, कठिन ऊंचाई और बदलते भूभाग के बीच कैडेटों ने पूरे अनुशासन और साहस के साथ अपनी यात्रा जारी रखी। अभियान का समापन 16 सितंबर को लद्दाख के करजोक में हुआ। राष्ट्रीय कैडेट कोर के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स और रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला ने करजोक में अभियान दल का स्वागत किया। इस दौरान कैडेटों ने हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी से लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र तक कठिन पहाड़ी रास्ते को पार किया। इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती 5,578 मीटर की ऊंचाई पर स्थित परांग ला दर्रा था। दल ने हिमाचल प्रदेश के किब्बर से अपनी यात्रा शुरू की और लद्दाख के करजोक तक पहुंचकर अभियान पूरा किया। ‘अपराजिता–परांग ला 2026’ को 18 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली से रवाना किया था। अभियान का उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें अत्यंत चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव देना था। समापन अवसर पर एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स ने कैडेटों और अभियान से जुड़े सभी कर्मियों को सफल अभियान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य विकसित करने में मदद करती हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल एक लंबी पहाड़ी यात्रा तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आई महिला कैडेटों ने एक साथ कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इससे उनके बीच सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत करने का अवसर मिला।

इंटरनेशनल टूर पर हैं अनुपम खेर, लॉस एंजिल्स वाणिज्य दूतावास में दिखा देसी अंदाज

मुंबई। अभिनेता अनुपम खेर पिछले काफी समय से अंतर्राष्ट्रीय टूर पर बने हुए हैं। बुधवार को अभिनेता ने बताया कि लॉस एंजिल्स में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. के. जे. श्रीनिवास के साथ उनकी मुलाकात हुई। अभिनेता ने इस मुलाकात के लिए भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. के. जे. श्रीनिवास का शुक्रिया अदा किया। अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर श्रीनिवास के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट कर लिखा, “इंडिया इन एलए। जाने-पहचाने अनजाने की पूरी कास्ट और क्रू के साथ लॉस एंजिल्स में भारत के महावाणिज्य दूतावास जाना मेरे लिए बहुत ही सुखद अनुभव रहा है।” अभिनेता ने लॉस एंजिल्स के अनुभवों को शेयर करते हुए लिखा, “वहां खड़े होकर अपना तिरंगा देखना और वहां के शानदार स्टाफ से मिलना, हम सभी के लिए गर्व से भर देने वाला पल था। लॉस एंजिल्स में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. केजे श्रीनिवास और उनके सहयोगियों का उनकी गर्मजोशी, शानदार मेहमाननवाजी और स्वादिष्ट लंच के लिए दिल से शुक्रिया। हमें घर से इतनी दूर भी घर जैसा एहसास हुआ। जय हिंद।” अनुपम खेर इस समय लॉस एंजिल्स (अमेरिका) में अपने चर्चित और हिट नाटक ‘जाने पहचाने अनजाने’ का मंचन करने के लिए अमेरिका और कनाडा गए हैं। इस बहुभाषी नाटक (हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी) में उनके साथ अभिनेत्री स्वरूप संपत भी मुख्य भूमिका में हैं। इस नाटक की शुरुआत ह्यूस्टन से हुई है और इसे लास एंजिल्स, कनाडा के वैंकूवर (सरे) और अन्य शहरों के दर्शकों के सामने पेश किया जा रहा है। रंगमंच के साथ-साथ अभिनेता के हाथ में काफी फिल्में भी हैं, जिनमें ‘ये प्रेम मोल लिया’, ‘श्री राम जन्मभूमि’ और ‘खोसला का घोसला 2’ शामिल है। म्यूजिकल पारिवारिक फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैं जबकि अनुपम खेर भी एक अहम किरदार निभा रहे हैं। ‘श्री राम जन्मभूमि’ अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े दशकों लंबे संघर्ष की भावनात्मक और ऐतिहासिक यात्रा को पर्दे पर दिखाएगी। इस फिल्म में अनुपम खेर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के दिवंगत नेता अशोक सिंघल की भूमिका निभा रहे हैं। ‘खोसला का घोसला 2’ साल 2006 की कल्ट क्लासिक कॉमेडी-ड्रामा ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में की गई है, जो कि पूरी हो चुकी है।

शुरुआती जीत से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है, हम खिताब का बचाव कर सकते हैं: आर्सेनल डिफेंडर बेन व्हाइट

नई दिल्ली। आर्सेनल के डिफेंडर बेन व्हाइट का मानना ​​है कि मौजूदा प्रीमियर लीग चैंपियन को 2026-27 सीजन की अपनी शानदार शुरुआत से काफी आत्मविश्वास मिला है और अपने खिताब के बचाव की ताकत मिली है। आर्सेनल ने अपने शुरुआती चारों प्रीमियर लीग मैच जीते हैं, जिसमें चेल्सी पर 2-1 की जीत भी शामिल है। टीम टेबल में टॉप पर हैं। उन्होंने अपने यूईएफए चैंपियंस लीग कैंपेन की भी जीत से शुरुआत की है, जिसमें मार्टिन ओडेगार्ड के गोल से नेपोली को घर से बाहर 1-0 से हराया। व्हाइट, जिन्होंने सभी चार लीग गेम शुरू किए हैं और एक असिस्ट भी दिया है, ने पिछले सीजन के प्रीमियर लीग टाइटल तक आर्सेनल के सफर पर बात की और कहा कि यह सफलता वर्षों की कोशिश का नतीजा है। व्हाइट ने जियो हॉटस्टार से बातचीत में कहा, “पिछला सीजन बहुत शानदार था। मैं इसका हिस्सा बनकर बहुत खुशकिस्मत महसूस करता हूं। पिछले पांच सालों में हमने जो भी कड़ी मेहनत की, उसका नतीजा आखिरकार मिला। रास्ते में मुश्किल समय भी आए, ऐसे पल भी आए जब चीजें हमारे हिसाब से नहीं हुईं, लेकिन हमने एक-दूसरे पर भरोसा बनाए रखा और आगे बढ़ते रहे।” उन्होंने आगे कहा, “यही इस सफलता को इतना खास बनाता है। यह सिर्फ एक सीजन के बारे में नहीं है। यह उस सफर के बारे में है जिस पर हम एक ग्रुप के तौर पर साथ-साथ रहे हैं। अब हम इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं और जीतते रहना चाहते हैं।” व्हाइट ने कहा, “सीजन के पहले चार गेम जीतने से, जिसमें चेल्सी पर जीत भी शामिल है, हमें बहुत कॉन्फिडेंस मिला है। ड्रेसिंग रूम में माहौल अच्छा है, और हर कोई एक-दूसरे को आगे बढ़ा रहा है। हम जानते हैं कि यह एक लंबा सीजन है। हम बहक नहीं सकते। यह इस लेवल को बनाए रखने, मोमेंटम बनाए रखने और क्रेंदित रहने के बारे में है। आगे मुश्किल पल आएंगे, और हमें उनके लिए तैयार रहना होगा। अगर हम कड़ी मेहनत करते रहेंगे और एक साथ रहेंगे, तो हम लगातार प्रीमियर लीग जीत सकते हैं।” व्हाइट ने क्लब और एमिरेट्स स्टेडियम में एक मजबूत माहौल बनाने का श्रेय मैनेजर मिकेल आर्टेटा को भी दिया और कहा कि फैंस का सपोर्ट खिलाड़ियों के लिए ऊर्जा का एक बड़ा सोर्स बन गया है। उन्होंने कहा, “बॉस ने हमारे होम ग्राउंड पर ऊर्जावान माहौल बनाने के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने इसे बिल्कुल सही किया है क्योंकि अब यह लीग में सबसे अच्छे में से एक है। फैंस ने वह सब कुछ मान लिया है जो वह बना रहे हैं।” व्हाइट ने कहा, “मैच के दिनों में, एमिरेट्स स्टेडियम पहली सीटी बजने से ही शोरगुल से भरा होता है। वह एनर्जी हमें पिच पर आगे बढ़ाती है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ा फायदा है, और इसे संभव बनाने का बहुत सारा श्रेय मैनेजर को जाता है। स्क्वॉड में जगह के लिए कॉम्पिटिशन से ट्रेनिंग का स्तर भी बेहतर हुआ है। उन्होंने कहा, “आप हर गेम खेलना चाहते हैं। आप जितना हो सके पिच पर रहना चाहते हैं। लेकिन इस स्क्वॉड में इतनी क्वालिटी है कि आपको मैनेजर के फैसले मानने पड़ते हैं। यह इस बारे में है कि जब भी आपका मौका आए तो तैयार रहें और जब आप नहीं खेल रहे हों तो अपने टीममेट्स को सपोर्ट करें। हम सभी ट्रेनिंग में एक-दूसरे को पुश करते हैं, और इससे पूरा ग्रुप मजबूत होता है।