संघ प्रचारक से 3 बार प्रधानमंत्री बनने तक का सफर, जानिए नरेंद्र मोदी के संघर्ष और सफलता की कहानी

नई दिल्ली। भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। 2014 से लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दे रहे नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर एक साधारण स्वयंसेवक से विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता तक का सफर है। नरेंद्र मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया। आठ वर्ष की आयु में वे आरएसएस से जुड़े, जिसके साथ एक लम्बे समय तक सम्बन्धित रहे। जीवन की आरंभिक कठिनाइयों ने उन्हें न सिर्फ कठोर परिश्रम के मूल्य की समझ दी बल्कि इसके साथ ही आम लोगों की पीड़ा समझने का मौका भी दिया। उन्होंने छोटी उम्र से ही देशभक्त संस्थाओं के साथ काम कर अपने आपको देश सेवा में समर्पित कर दिया। 17 वर्ष की आयु में उन्होंने संपूर्ण भारत की यात्रा करने के लिए घर छोड़ दिया। दो वर्षों तक उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों का पता लगाने के लिए भारत के विशाल भूखंड की यात्रा की। जब वे घर लौटे तब वे एक अलग ही व्यक्ति थे, जिसे यह स्पष्ट पता था कि उन्हें जीवन में कौन-सा लक्ष्य हासिल करना है। वे अहमदाबाद चले गए और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए। 1972 में अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रचारक बन गए। 1980 के दशक में संघ में अलग-अलग जिम्मेदारियां लेते हुए नरेंद्र मोदी अपने संगठन कौशल के नमूने के साथ एक संगठक के रूप में सामने आए। 1987 में नरेंद्र मोदी के जीवन का एक अलग अध्याय तब शुरु हुआ, जब उन्होंने गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य करना शुरु किया। मोदी आर्काइव के अनुसार, 1987 में 36 साल के नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों के लिए भाजपा के कैंपेन की कमान संभाली। यह एक ऐसा काम था जिसे लगभग नामुमकिन माना जा रहा था लेकिन इसने ‘केसरिया पार्टी’ (भाजपा) की किस्मत पूरी तरह बदल दी। अपनी बेहतरीन प्लानिंग और असरदार बातचीत के दम पर भाजपा दो-तिहाई सीटें और मेयर का पद जीतने में कामयाब रही। इसी के साथ नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई और गुजरात व पूरे भारत में भाजपा के लिए एक नए दौर का आगाज हुआ। उन्होंने 1990 के गुजरात विधानसभा चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनाई। 1995 के विधान सभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के संगठन कौशल के फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा और पार्टी ने 121 सीटें जीतीं। 1995 में राष्ट्रीय मंत्री के नाते नरेंद्र मोदी को पांच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन का काम दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। 1998 में नरेंद्र मोदी को पदोन्नत करके राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक काम करते रहे। 2001 में भुज में भूकम्प के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के बिगड़ते स्वास्थ्य और खराब सार्वजनिक छवि के कारण नरेंद्र मोदी को 2001 में गुजरात में सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिला। जब 7 अक्टूबर 2001 को मोदी के नेतृत्व में सरकार ने शपथ ली, तब गुजरात की अर्थव्यवस्था जनवरी 2001 में आए भीषण भूकंप सहित कई प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रही थी। दिसंबर 2002 के आम चुनावों में मोदी ने भाजपा को भारी जीत दिलाई और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटों के भारी बहुमत से सत्ता में वापस आई। इसके बाद 25 दिसंबर 2007 को तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, 2012 से 22 मई 2024 तक चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है। 2014 और 2019 के संसदीय चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और दोनों बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। इससे पहले किसी राजनीतिक दल ने ऐसा पूर्ण बहुमत 1984 के चुनावों में प्राप्त किया था। 2024 के संसदीय चुनावों में एक और निर्णायक जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
बांग्लादेश ट्रिब्यूनल ने 7 नेताओं को सुनाई सजा-ए-मौत: अवामी लीग बोला, ‘फैसला एकतरफा और मनगढ़ंत’

ढाका। अवामी लीग ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के उस फैसले को एकतरफा, पक्षपातपूर्ण और मनगढ़ंत बताया है जिसमें उसने पार्टी के सात नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौत की सजा सुनाई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईसीटी ने मंगलवार को अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और पार्टी व उससे जुड़े संगठनों के छह अन्य वरिष्ठ नेताओं को जुलाई 2024 विद्रोह से जुड़े “मानवता के खिलाफ अपराधों” का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई। अवामी लीग ने आरोप लगाया कि यह “तथाकथित फैसला” राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए “न्यायपालिका के हथियार के तौर पर इस्तेमाल” का ताजा उदाहरण है। इस बात पर जोर देते हुए कि जिन लोगों के खिलाफ फैसला सुनाया गया, उनमें से कोई भी ट्रिब्यूनल के सामने मौजूद नहीं था, पार्टी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून का एक बुनियादी नियम यह है कि आरोपी की गैर-मौजूदगी में होने वाली सुनवाई में भी कम से कम कानूनी सुरक्षा (जिसमें आरोपी को अपनी पसंद का वकील चुनने का अधिकार भी शामिल है) की गारंटी दी जानी चाहिए। हालांकि, मौजूदा ट्रिब्यूनल में इन गारंटियों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है।” पार्टी के अनुसार, पूरी न्यायिक प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून के बुनियादी और सर्वमान्य सिद्धांतों की “पूरी तरह से अनदेखी” की गई। इससे कानून के शासन के बजाय “बिना सजा के अपराध करने की छूट और राजनीतिक बदले की भावना” को बढ़ावा मिला है। पार्टी ने कहा कि न केवल फैसला, बल्कि 5 अगस्त 2024 के बाद से आईसीटी की सभी गतिविधियां अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए पार्टी ने कहा कि “अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक” अंतरिम शासन ने कानून और संवैधानिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए अध्यादेश के जरिए 1973 के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक्ट में संशोधन किया। इससे पूरी कानूनी प्रक्रिया अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ बदले की भावना से की जाने वाली “न्यायिक हत्या योजना” में बदल गई। पार्टी ने आगे कहा, “राजनीतिक बदला लेने के लिए, मोहम्मद यूनुस की गैर-कानूनी सरकार ने अभियोजन और न्यायिक पैनल बनाए, जिनमें जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे। इन पैनलों ने पूरी तरह से झूठ पर आधारित बांग्लादेश अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कई बेबुनियाद और गैर-कानूनी मामले दर्ज किए।” गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पार्टी ने कहा कि मौत की सजा से बड़े पैमाने पर हत्याओं का दो साल पुराना सिलसिला और भड़केगा, जिसमें पहले ही सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही, इससे मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेने की घटनाएं भी बढ़ेंगी, जिसके कारण पहले ही हजारों लोग जेल में हैं। पार्टी ने बांग्लादेशी अधिकारियों पर जुलाई-अगस्त 2024 के प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा और मौत के मामले में “दिखावटी मुकदमे” की आड़ में हिरासत में “लगातार हत्याओं” और अन्य बेरहम कदम उठाने का आरोप लगाया। अवामी लीग ने कहा, “यह ताजा दिखावटी फैसला देश के लोकतंत्र के लिए एक और झटका है। यह जुलाई-अगस्त की हिंसा के पीड़ितों और नागरिकों के लिए एक साफ संकेत है कि उनसे न्याय पाने का अधिकार पूरी तरह छीन लिया गया है। जमीनी स्तर पर, हजारों कार्यकर्ताओं के घरों और कारोबारों को बिना किसी रोक-टोक के लूटा और तोड़ा-फोड़ा गया है।” पार्टी ने आगे कहा, “मुकदमे की शुरुआत से पहले न्यायपालिका में बड़े पैमाने पर बदलाव, वकीलों पर लगातार भीड़ का हमला और अदालत परिसर के अंदर जारी उत्पीड़न के शिकार लोगों पर शारीरिक हमले इस दिखावटी मुकदमे के साफ सबूत हैं।” यह आरोप लगाते हुए कि आईसीटी ने इस्लामी चरमपंथियों का हौसला खतरनाक हद तक बढ़ा दिया है, पार्टी ने कहा कि बांग्लादेश में सैकड़ों दोषी और खतरनाक उग्रवादियों (जिनमें आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े लोग भी शामिल हैं) को ज़मानत दे दी गई है, और उन्होंने इस देश को “दुनिया की एक खतरनाक जगह” बना दिया है।
कबीर बेदी ने बहन गुलहिमा के जन्मदिन पर शेयर की बचपन की तस्वीर, बोले-‘तब भी प्यार करता था, आज भी करता हूं’

मुंबई। दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी इंस्टाग्राम पर अपनी निजी जिंदगी से जुड़े खास पल शेयर करते रहते हैं। वह समय-समय पर अपने पुराने दिनों और लंबे फिल्मी करियर से जुड़ी तस्वीरें भी फैंस के साथ साझा करते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने अपने परिवार से जुड़ी एक अनमोल याद को सामने रखा। अपनी छोटी बहन गुलहिमा बेदी के जन्मदिन पर उन्होंने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह काफी छोटे दिखाई दे रहे हैं और अपनी मां के बेहद करीब खड़े हैं। इस खास तस्वीर के साथ उन्होंने बताया कि गुलहिमा बचपन से ही उनकी जिंदगी की बेहद खास यादों का हिस्सा रही हैं। तस्वीर शेयर करते हुए कबीर ने अपनी और गुलहिमा की बचपन की बॉन्डिंग को याद किया। उन्होंने लिखा, ”कुछ रिश्ते तब शुरू हो जाते हैं जब हमारे पास उनके लिए शब्द भी नहीं होते। यहां मैं अपनी मां और अपनी छोटी बहन गुली के पास खड़ा हूं और पहले से ही उससे पूरी तरह जुड़ा हुआ हूं। समय के साथ जिंदगी में कई बदलाव आए, लेकिन मेरी बहन के साथ मेरी रिश्ता हमेशा खास बना रहा।” उन्होंने कहा कि गुलहिमा उनकी बचपन की सबसे पहली और प्यारी यादों में शामिल हैं। अभिनेता ने लिखा, ”जिंदगी में आए तमाम बदलावों के बाद भी वह मेरी बचपन की सबसे पहली और सबसे प्यारी यादों का हिस्सा बनी हुई है। तब भी मैं उसे बहुत प्यार करता था और आज भी करता हूं। दुनिया की सबसे अच्छी बहन! जन्मदिन मुबारक हो, मेरी प्यारी गुली।’ कबीर बेदी की बात करें तो वह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकारों में शामिल हैं। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है। उन्होंने लंबे करियर में कई यादगार फिल्में दी, जिनमें ‘खून भरी मांग’, ‘कच्चे धागे’, ‘मैं हूं ना’, ‘ऑक्टोपसी’, ‘नागिन’, ‘मोहनजोदड़ो’, ‘ताजमहल: एन इटरनल लव स्टोरी’, ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई’, ‘साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3’ और ‘दिलवाले’ जैसी फिल्में शामिल है।
यमन में एक लाख से ज्यादा लोग बेघर, यूएन ने 90 लाख डॉलर की मदद जारी की

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक टॉम फ्लेचर ने यमन में विस्थापित परिवारों और उन्हें शरण देने वाले समुदायों की मदद के लिए 90 लाख अमेरिकी डॉलर की तत्काल सहायता राशि जारी की है। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने दी। ओसीएचए ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन संघर्ष से प्रभावित परिवारों और अन्य लोगों की मदद करना जारी रखे हुए हैं। हालांकि, राहत सामग्री और मानवीय सहायता के लिए उपलब्ध संसाधन तेजी से कम हो रहे हैं। संस्था ने बताया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से राहतकर्मियों की आवाजाही और लोगों तक पहुंचना अभी भी बहुत मुश्किल बना हुआ है। कई महत्वपूर्ण रास्तों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है या पूरी तरह रोक दी गई है, जिससे जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना और कठिन हो गया है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ओसीएचए ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सम्मान करें और राहत एजेंसियों को सुरक्षित तथा बिना रुकावट काम करने दें, ताकि जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच सके। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने कहा कि यमन के पश्चिमी तटीय इलाकों में बढ़ते संघर्ष के कारण एक लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। वहीं, हजारों लोग सुरक्षा की तलाश में बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पार करके जिबूती पहुंच गए हैं। यूएनएचसीआर के अनुसार, मानवीय सहायता पहुंचाने में कई बड़ी चुनौतियां हैं। असुरक्षा, क्षतिग्रस्त सड़कें, दूरसंचार सेवाओं में बाधा और यात्रा संबंधी प्रतिबंध राहत कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा, अल-मखा बंदरगाह को हुए नुकसान ने राहत सामग्री की ढुलाई और अन्य जरूरी कामों को और कठिन बना दिया है। एजेंसी ने कहा कि कई प्रांतों में जारी लड़ाई की वजह से बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। इससे चिंता बढ़ गई है कि यदि संघर्ष और तेज होता है, तो यमन के अंदर और अधिक लोग विस्थापित हो सकते हैं और शरणार्थियों की संख्या भी बढ़ सकती है। कई परिवारों को बहुत कम समय में अपना घर छोड़ना पड़ा और वे अपने साथ केवल जरूरी सामान ही ले जा सके। यूएनएचसीआर ने कहा, “रहने की जगह, भोजन, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा संबंधी सहायता इस समय सबसे जरूरी जरूरतों में शामिल हैं। जिन समुदायों और शिविरों में विस्थापित लोगों को रखा जा रहा है, उन पर पहले से ही काफी दबाव है।” एजेंसी ने बताया कि पिछले चार दिनों में 2,400 से अधिक लोगों ने समुद्र के रास्ते यमन से जिबूती की यात्रा की है। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग थे। यूएनएचसीआर ने बताया कि वह सोमालिया की ओर संभावित आवाजाही पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वहां अतिरिक्त लोगों के पहुंचने की स्थिति के लिए तैयारी की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के 25 सालों के कामों को लोगों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी, जनसेवा में जुटेगा हर कार्यकर्ता: भाजपा नेता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के समर्पित सार्वजनिक सेवा के 25 सालों में किए गए उनके कामों को लोगों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, “पूरा देश इस समय ‘सेवा संकल्प अभियान’ के साथ जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को हम सभी सेवा के रूप में मना रहे हैं और पूरे देश में एक-एक कार्यकर्ता जन-जन की सेवा के लिए जुटेगा।” उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, “17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक हम उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा की है। उन्होंने लोगों की जिंदगी बदलने के लिए काम किया है और दुनिया भर में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। समर्पित सार्वजनिक सेवा के इन 25 सालों में किए गए उनके कामों को लोगों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।” भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने कहा, “हमारे देश के प्रधानमंत्री, भारत नहीं पूरी दुनिया में सबके फेवरेट प्रधानमंत्री का जन्मदिन है, मैं आपके माध्यम से उनको बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं। इस बार हम लोग दीया जलाने का काम कर रहे हैं, इसी के साथ-साथ एयरपोर्ट पर लाइब्रेरी बन रही है, उसमें 200 किताबें डोनेट कर रहे हैं और सरकारी स्कूल में मिठाइयां और चॉकलेट भी डिस्ट्रीब्यूट करा रहे हैं।” वहीं, दिल्ली भाजपा के सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “हमारी तैयारियों के साथ-साथ, मुझे लगता है कि पूरा देश भी तैयार है। 17 सितंबर को नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन है और इस मौके पर हम ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाएंगे। हमारे परिवार के सभी बच्चे भी दीया जलाएंगे।” मनोज तिवारी ने कहा कि मेरा मानना है कि देश का हर वो व्यक्ति जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है, जिसने जन धन योजना के तहत खाता खुलवाकर सुरक्षा पाई है, जिसे घर पर नल से पानी मिला है, जिसे आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है या जिसने सुकन्या योजना का लाभ उठाया है, वह मोदी जी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाएगा। उन्होंने कहा, “मैं अपने देश के युवा, माता-बहनें और किसानों, सभी से प्रार्थना करता हूं कि आप भी 17 सितंबर की शाम को ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाएं और प्रधानमंत्री मोदी की लंबी आयु की कामना करें।” 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर, अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं और उनके लंबे जीवन की कामना करता हूं। उनके नेतृत्व में देश तरक्की करता रहे और आगे बढ़ता रहे, और वे हमारा मार्गदर्शन करते रहें।
विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों पर स्वस्तिक बनाना क्यों है जरूरी? जानें ‘ॐ’ और ‘शुभ-लाभ’ लिखने की मान्यता

नई दिल्ली। इस साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। विश्वकर्मा पूजा के दौरान सबसे खास होता है- मशीनों पर स्वस्तिक बनाना। क्या आप जानते हैं कि मशीनों पर स्वस्तिक क्यों बनाया जाता है और इसके अलावा और क्या-क्या बनाया जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं और इसके महत्व पर भी प्रकाश डालते हैं। विश्वकर्मा पूजन के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक महत्व है। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को सबसे पवित्र और शुभ चिन्ह माना गया है। स्वस्तिक शब्द ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘शुभ होना’ या ‘कल्याण होना’। किसी भी शुभ काम की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर ही की जाती है। विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों पर रोली, कुमकुम और सिंदूर से स्वस्तिक बनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं हैं। पहला कारण यह है कि स्वस्तिक को भगवान श्री गणेश का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं और विघ्नहर्ता हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से मशीन के काम में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है और काम बिना किसी रुकावट के चलता रहता है। दूसरा कारण समृद्धि से जुड़ा है। स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जहां स्वस्तिक होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से कारोबार में वृद्धि होती है और आर्थिक समृद्धि आती है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा है। कारीगर और मजदूर दिन भर मशीनों पर काम करते हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाकर वे अपनी सुरक्षा और मशीन की लंबी उम्र की कामना करते हैं ताकि पूरे साल कोई दुर्घटना न हो। स्वस्तिक के अलावा भी विश्वकर्मा पूजा के दौरान मशीनों और औजारों पर कई तरह के शुभ चिन्ह बनाए जाते हैं। इसमें से एक ॐ का निशान है। कई जगह मशीनों पर ॐ लिखा जाता है। ॐ को ब्रह्मांड की ध्वनि और सृष्टि की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे बनाने से मशीन में दैवीय शक्ति का वास होता है। वहीं, दूसरी जगह शुभ-लाभ भी लिखा जाता है। ये मशीनों, लेथ मशीन, ड्रिल मशीन और मुख्य गेट पर शुभ और लाभ लिखा जाता है। इसका अर्थ होता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से काम शुभ हो और उसमें लाभ हो। यह व्यापार में बरकत के लिए लिखा जाता है। विश्वकर्मा पूजन के दौरान कई लोग कलावा या मौली भी बांधते है और पूजा के बाद मशीनों के हैंडल, स्विच और औजारों पर लाल रंग का कलावा या रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इसे रक्षा कवच के रूप में देखा जाता है। इसके साथ ही मान्यता है कि कलावा बांधने से मशीन बुरी नजर से बची रहती है। विश्वकर्मा पूजन के दौरान मशीनों पर तिलक और फूल-माला चढ़ाया जाता है। कारीगर सभी मशीनों को अच्छे से साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद गेंदे या अन्य के फूलों की माला पहनाई जाती है। कई फैक्ट्रियों में मशीनों को नए कपड़े की तरह सजाया भी जाता है। साथ ही कुछ जगहों पर मशीनों पर हाथ की पांचों उंगलियों से रोली और चावल के छापे भी लगाए जाते हैं, जो मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक होता है।
पीएम मोदी के जन्मदिवस पर वडनगर से वाराणसी तक निकाली जाएगी बाइक रैली, सूरत से 25 युवाओं का जत्था रवाना

सूरत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर गुजरात में उनकी जन्मभूमि वडनगर से लेकर कर्मभूमि वाराणसी तक एक भव्य बाइक रैली का आयोजन जा रहा है। इस सांस्कृतिक और सामाजिक अभियान के तहत आज सूरत शहर से 25 युवाओं की एक विशेष टीम वडनगर के लिए रवाना हुई। वडनगर पहुंचने से पहले सूरत की यह टीम उनाई माता मंदिर प्रांगण से पवित्र तापी नदी का जल एकत्र करेगी। इस जल से वडनगर स्थित ऐतिहासिक हाटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद, गुजरात के विभिन्न शहरों से एकत्रित हुए 250 युवाओं का एक विशाल दल पीएम मोदी के जन्मस्थान पर स्थित ऐतिहासिक शर्मिष्ठा तालाब से जल लेकर वाराणसी के लिए प्रस्थान करेगा। यह दल वाराणसी पहुँचकर प्रसिद्ध बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर यात्रा का समापन करेगा। लगभग 17 दिनों तक चलने वाली इस लंबी यात्रा के दौरान प्रतिभागी युवा मार्ग में आने वाले विभिन्न गांवों और शहरों में प्रवास करेंगे। इस दौरान युवाओं की टीम स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित कर भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्रसारित करेगी। भाजपा की सूरत शहर इकाई के अध्यक्ष परेश पटेल ने आईएएनएस से कहा, “ये रैली एक ऐतिहासिक रैली है जो वडनगर से विसनगर के लिए जाएगी। सूरत की टीम उनाई से निकलेगी। यहां से ये सब लोग उनाई जाएंगे और वहां से 25 युवा अपनी बाइक के साथ वडनगर पहुंचेंगे और वहां से फिर उनका वाराणसी का प्रवास शुरू होगा। करीबन 15-17 दिन का ये पूरा प्रवास है। जहां-जहां वो जाएंगे वहां-वहां सेवा कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री के 25 साल सेवा कार्य के 7 अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। उससे पहले 17 सितंबर को उनका जन्मदिन है।” बाइक रैली में शामिल विपिन तलाविया ने कहा कि हम सूरत से वडनगर जा रहे हैं। वहां से हम वाराणसी तक जाएंगे और प्रधानमंत्री मोदी की लंबी उम्र की कामना करेंगे।
भारत ने पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को किया तलब, नौसेना यूनिट्स के गैर पेशेवर आचरण पर जताया ऐतराज

नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के चार्ज डी’अफेयर्स (कार्यवाहक राजदूत) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। मामला पाकिस्तानी नौसेना के गैर पेशेवर रवैए से जुड़ा है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। एमईए के अनुसार, नई दिल्ली में पाकिस्तान के हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को आज विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। उनसे समुद्र में पाकिस्तानी नौसेना की यूनिट्स के अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर व्यवहार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। इस रवैए के कारण भारतीय नौसेना की एक यूनिट के साथ टक्कर हुई थी। इसमें आगे बताया गया कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पाकिस्तानी नौसेना का आचरण अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की अग्रिम सूचना पर हुए समझौते के अनुच्छेद 10 का सीधा उल्लंघन था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को सलाह दी गई कि वे “संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह बात पहुंचाएं कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए सभी सैन्य यूनिट्स को उचित सावधानी बरतने को कहें और दोनों पक्षों के बीच संबंधित समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करें।” साथ ही इस्लामाबाद में भारत के चार्ज डी’अफेयर्स को भी निर्देश दिया गया है कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष इसी तरह का विरोध दर्ज कराएं। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज एक नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब तेज गति से आया और इस दौरान उसने गैर-पेशेवर अंदाज अपनाया। इसी वजह से दोनों जहाजों की टक्कर हुई।
वीर सैनिकों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय का फैसला, आजीवन रेल यात्रा सुविधा

नई दिल्ली। सेना पदक, नौसेना पदक और वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित सैनिकों को भारतीय रेल में आजीवन यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी। इस सुविधा का लाभ वीरता पुरस्कार विजेताओं के जीवनसाथी को भी मिलेगा। विधवा या विधुर के मामले में यह सुविधा पुनर्विवाह तक जारी रहेगी। देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस, वीरता और बलिदान का परिचय देने वाले सैनिकों तथा उनके परिवारों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण पहल को मंजूरी दी है। सेना के मुताबिक इस पहल के दायरे में उन सैनिकों के माता-पिता को भी शामिल किया गया है, जिन्हें अविवाहित होने की स्थिति में मरणोपरांत वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया है। पात्र लाभार्थी भारतीय रेल की प्रथम श्रेणी, द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी और एसी चेयर कार में यात्रा कर सकेंगे। रक्षा मंत्रालय ने इस सुविधा को सरल और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल व कागज रहित बनाया है। पात्र लाभार्थियों को इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण भारतीय रेलवे रियायत कार्ड पोर्टल पर किया जा सकेगा। सत्यापन और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक यात्रा पास ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। इसके बाद इन इलेक्ट्रॉनिक पास के आधार पर टिकट बुक करने की सुविधा एक नवंबर 2026 से भारतीय रेलवे के आईआरसीसीपी के वेब पोर्टल के माध्यम से शुरू होगी। डिजिटल व्यवस्था से लाभार्थियों को यात्रा सुविधा प्राप्त करने के लिए कागजी प्रक्रिया और अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी। रक्षा मंत्रालय की यह पहल सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण तथा सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। दरअसल वीरता पुरस्कार पाने वाले सैनिकों ने देश की सुरक्षा के लिए असाधारण साहस का प्रदर्शन किया है। कई सैनिकों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान भी दिया। ऐसे में उनके परिवारों की भूमिका और त्याग भी महत्वपूर्ण है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुविधा केवल रेल यात्रा में मिलने वाली रियायत के रूप में नहीं देखी जा रही है। इसका उद्देश्य उन सैनिकों के साहस, बलिदान और सेवा के प्रति सम्मान व्यक्त करना है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। साथ ही, यह उन परिवारों के प्रति भी सम्मान का भाव प्रकट करती है, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में अपने सैनिकों का साथ दिया। वहीं डिजिटल व्यवस्था से पात्र वीरता पुरस्कार विजेताओं और उनके परिवारों के लिए इस सुविधा का लाभ लेना अधिक आसान होगा। ऑनलाइन पंजीकरण, सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक पास की व्यवस्था के कारण पूरी प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनेगी। रक्षा मंत्रालय की इस पहल के जरिए वीर सैनिकों और उनके परिवारों को यह संदेश भी दिया गया है कि राष्ट्र उनके साहस, सेवा और त्याग को सम्मान के साथ याद करता है। यह कदम सैनिकों के कल्याण के साथ-साथ उनके परिवारों की गरिमा और सम्मान को भी महत्व देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यूपीआई एमडीआर में ‘विदेशी हस्तक्षेप’ के दावे को वित्त मंत्रालय ने किया खारिज

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि यूपीआई में एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को पेश करने की वजह विदेशी हस्तक्षेप है। साथ ही, कहा कि भारत अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर निर्णय स्वतंत्रता के साथ लेता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंत्रालय ने कहा कि 2016 में लॉन्च के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है और यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। मंत्रालय ने आगे विदेशी हस्तक्षेप के दावों को गलत बताते हुए कहा कि भारत की यूपीआई पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, और इनका स्पष्ट मकसद एक ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है जो खुद पर निर्भर हो, सभी को शामिल करने वाला हो और किफायती हो। सरकार के अनुसार, अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए 24.5 अरब ट्रांजैक्शन हुए। इस सिस्टम को खुद-ब-खुद चलने लायक, सुरक्षित और इनोवेटिव बनाए रखने के लिए, ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक छोटी सी फीस ली जाएगी। इससे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी के लिए फंड मिलेगा और टियर तीन-चार शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए जागरूकता और इंसेंटिव देने में भी सहायता मिलेगी। वित्त मंत्रालय ने कहा, “नया यूपीआई फ्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों को सहारा देने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के लिए दोबारा किया जाए।” ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अभी भी मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना, इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। सिर्फ 2,000 रुपए से ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन पर दुकानदारों को एक छोटा सा चार्ज (0.4 प्रतिशत) देना होगा, जो क्रेडिट कार्ड या दूसरे नेटवर्क चार्ज के मुकाबले बहुत कम है। रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, बिल पेमेंट और इंश्योरेंस के मामले में 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का फ्लैट चार्ज लगता है, जबकि म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज के पेमेंट पर सिर्फ 0.02 प्रतिशत चार्ज लगता है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए है। मंत्रालय ने आगे बताया, “दुकानदार एमडीआर का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यूपीआई ऐप्स भी कोई प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं लगा सकते।