केरलः सीपीआई (एम) की बैठक में चुनाव में हार के लिए विजयन और एमवी गोविंदन पर उठे सवाल

कोझिकोड। सीपीआई (एम) के मजबूत गढ़ कन्नूर में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना हो रही है। राज्य समिति की विस्तारित बैठक में प्रतिनिधियों ने पार्टी की करारी चुनावी हार का दोष आम कार्यकर्ताओं और निचले स्तर की समितियों पर मढ़ने की कोशिश पर सवाल उठाए हैं। बातचीत के पहले दिन के आखिर में कई लोगों को हैरानी इस बात से हुई कि पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन द्वारा पेश की गई सुधार रिपोर्ट के मसौदे की सबसे तीखी आलोचना कन्नूर के प्रतिनिधियों ने की। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी की नाकामियों के लिए आम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जबकि फैसले लेने की असली ताकत राज्य के नेतृत्व और अहम फैसले लेने वालों के पास थी। इसके बाद कोल्लम के प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की आलोचना की, जिससे पता चला कि नाराजगी सिर्फ कन्नूर तक ही सीमित नहीं थी। इसलिए, इस बातचीत ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और एम.वी. गोविंदन पर परोक्ष रूप से दबाव डाला है, भले ही आलोचना को पूरी तरह से व्यक्तिगत हमलों के तौर पर पेश नहीं किया गया था। प्रतिनिधियों ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आत्मसुधार करने के लिए कहने के तर्क पर सवाल उठाए, जबकि शीर्ष पर बैठे लोग अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे। उन्होंने पार्टी के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की संसदीय महत्वाकांक्षाओं और लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान पार्टी में पनपी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की भी आलोचना की। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की खास तौर पर इसलिए आलोचना की गई, क्योंकि इसमें हार की अधिकतर जिम्मेदारी संगठन के निचले स्तरों पर डाली गई थी। प्रतिनिधियों का तर्क था कि जिन समस्याओं का समाधान राज्य नेतृत्व को करना चाहिए था, उन्हें जमा होने दिया गया, जिससे आखिरकार पार्टी का पतन हुआ। रिपोर्ट में तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन से जुड़े विवाद का जिक्र न होने पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि रिपोर्ट में उम्मीदवार चुनने में हुई गलतियों और पय्यानूर में मिली हार का जिक्र है, लेकिन प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि तालिपारम्बा में मिली हार पर वैसा ध्यान क्यों नहीं दिया गया। बातचीत के दौरान के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर भेजने के फैसले और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। कन्नूर के प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने एक ऐसा सिस्टम बना लिया है, जिसमें नेताओं और आम कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नेतृत्व के करीबी लोगों का बचाव करने और दूसरों की आलोचना करने के चलन ने पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। बैठक में संगठन के बड़े संकट पर भी खास तौर पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के घटने, सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी और जन-संगठनों से मिलने वाले समर्थन के कमजोर होने की ओर इशारा किया। पार्टी नेताओं की लोगों से सीधे जुड़ने और पार्टी के राजनीतिक रुख को असरदार ढंग से समझाने में नाकामी पर भी जोर दिया गया। ड्राफ्ट रिपोर्ट में केंद्रीय एजेंसियों और प्रवर्तन निदेशालय (विजयन और उनके परिवार के खिलाफ) की जांच को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई लेकिन इससे प्रतिनिधियों के बीच अधिक सहानुभूति नहीं बन पाई। इसके बजाय, चर्चाओं से यह संदेश मिला कि सीपीआई (एम) का मौजूदा संकट काफी हद तक अंदरूनी है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा कोई भी चुनाव नहीं जीत पाया है और हालिया विधानसभा चुनावों में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। प्रतिनिधियों का कहना था कि लगातार हार से मिली चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और मौजूदा संकट नेतृत्व की समय पर कार्रवाई न कर पाने का नतीजा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल फिलहाल भारत के लिए कोई व्यापक संकट नहीं; मजबूत फॉरेक्स रिजर्व और कम महंगाई बने सहारा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 107-108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे फिलहाल व्यापक आर्थिक संकट नहीं कहा जा सकता। बाजार विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि भारत की स्थिति इस समय अपेक्षाकृत मजबूत है। देश में महंगाई नियंत्रित स्तर पर है, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का लगभग 0.8 प्रतिशत रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो बाहरी झटकों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं या पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन में गंभीर व्यवधान आता है, तो भारत के सामने विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना कठिन हो सकता है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88.6 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए ऊंची कीमतों का सीधा असर आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई के एक अध्ययन के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होने पर खुदरा महंगाई लगभग 49 आधार अंक तक बढ़ सकती है। दूसरी ओर यदि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क घटाती है या सब्सिडी बढ़ाती है, तो राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। तेल कीमतों में वृद्धि का प्रभाव परिवहन, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की लागत पर भी पड़ता है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से घरेलू उपभोग प्रभावित हो सकता है और परिवारों की वास्तविक आय पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि सरकार कीमतों का बोझ अपने ऊपर लेती है, तो सार्वजनिक वित्त और तेल विपणन कंपनियों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि यदि औसत क्रूड ऑयल मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.9 से 2.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि पहले इसका अनुमान 0.7 से 0.8 प्रतिशत के बीच था। ऊंचे कच्चे तेल का असर विभिन्न उद्योगों पर भी अलग-अलग होगा। एयरलाइंस, पेंट, रसायन, लॉजिस्टिक्स, सीमेंट, उपभोक्ता सामान और तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ मिल सकता है। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और घरेलू गैस आधारित क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है। गौरतलब है कि सोमवार को ब्रेंट क्रूड नवंबर डिलीवरी के लिए 107.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता देखा गया। बाजार की नजर पश्चिम एशिया और लाल सागर के समुद्री मार्गों की स्थिति पर बनी हुई है, जहां बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
रश्मिका के लिए खास है ‘राणाबली’, राहुल सांकृत्यायन ने मां के नाम पर रखा किरदार का नाम ‘जयम्मा’

हैदराबाद। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी जब भी पर्दे पर साथ आती है, फैंस की एक्साइटमेंट अपने आप बढ़ जाती है। ‘गीता गोविंदम’ और ‘डियर कॉमरेड’ में दोनों की केमिस्ट्री देखने के बाद अब फैंस इस जोड़ी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। दोनों की अगली फिल्म ‘राणाबली’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म में रश्मिका का किरदार काफी खास बताया जा रहा है। अब फिल्म के लेखक और निर्देशक राहुल सांकृत्यायन ने इस किरदार से जुड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि रश्मिका के किरदार ‘जयम्मा’ का नाम उन्होंने अपनी मां के नाम पर रखा है। राहुल सांकृत्यायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रश्मिका के फिल्म वाले हिस्से की शूटिंग पूरी होने की जानकारी शेयर की। इसी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”मैं ‘राणाबली’ की कहानी लिखते समय अपनी पुरानी यादों में खो गया। जब मैंने फिल्म की महिला मुख्य किरदार को लिखना शुरू किया, तो मैंने एक बेहद निजी जुड़ाव महसूस किया। मैंने इस किरदार का नाम अपनी मां के नाम पर ‘जयम्मा’ रखा।” राहुल ने कहा, ”जयम्मा के किरदार को लिखते समय मैंने इस बात का खास ध्यान रखा कि वह भले ही एक अलग दौर की महिला हो लेकिन उसकी सोच और उसका हौसला आज की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सके। जयम्मा को सिर्फ उस समय की कहानी का हिस्सा बनाकर नहीं रखा गया है बल्कि उसके व्यक्तित्व में ऐसी खूबियां दिखाई जाएंगी, जो आज की महिलाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं।” राहुल ने कहा, ”फिल्म में जयम्मा के लुक और उसकी पूरी दुनिया को भी उस दौर के हिसाब से तैयार किया गया है। टीम ने लुक के लिए खूबसूरत सिल्क और कॉटन के कपड़े, जरी, पुराने जमाने के रंग और एंटीक गोल्ड को शामिल किया है।” रश्मिका की तारीफ करते हुए निर्देशक ने कहा, ”उन्होंने सिर्फ जयम्मा के किरदार को निभाया नहीं बल्कि उसे पर्दे पर ऐसा जीवन दिया कि वह हमेशा के लिए याद रह सके। रश्मिका के हिस्से की शूटिंग पूरी हो चुकी है, अब पूरी टीम उन्हें मिस करेगी।” ‘राणाबली’ में विजय देवरकोंडा राणाबली की भूमिका में नजर आएंगे जबकि रश्मिका मंदाना उनकी पत्नी जयम्मा का किरदार निभा रही हैं। फिल्म में हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड वोस्लू भी नजर आएंगे। ‘द ममी’ में अपने काम के लिए पहचाने जाने वाले अर्नोल्ड फिल्म में विलेन सर थियोडोर हेक्टर का रोल निभा रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन के निर्देशन में बन रही ‘राणाबली’ एक पीरियड एक्शन ड्रामा है, जिसकी कहानी ब्रिटिश दौर की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म 19वीं सदी में हुई वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। कहानी में 1854 से 1878 के बीच हुए घटनाक्रम को आधार बनाया गया है और इसे बड़े स्तर पर पैन-इंडिया फिल्म के रूप में तैयार किया जा रहा है। ‘राणाबली’ पहले 11 सितंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन अब इसकी रिलीज डेट बदल दी गई है। यह फिल्म 16 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
हिंदी किसी की प्रतिस्पर्धी नहीं, यह भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की अहम कड़ी: अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘हिंदी दिवस’ के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि की अनुपम भूमि है। सभी लोग कहते हैं कि हमारी भाषाएं अलग-अलग हैं। मैं मानता हूं कि हमारी सबसे बड़ी ताकत इतनी सारी भाषाएं होना है। अपने साथ हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन दृष्टि को लेकर चलती है, जो हमारी नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा, “यही भाषाई बहुलता भारत की विविधता में एकता की भावना को सशक्त बनाती है। भाषा सिर्फ संवाद का साधन नहीं है, बल्कि किसी भी समाज की स्मृति औरप आत्मबोध होती है। हिंदी ने इस विविधता के बीच संवाद, संपर्क और समन्वय की भाषा के रूप में देश के विभिन्न वर्गों और समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी का विकास तभी सार्थक है, जब वह सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के साथ आगे बढ़े।” अमित शाह ने कहा, “हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस सत्य का सबसे सुंदर प्रमाण हमारा अपना इतिहास है।” शाह ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी। फिर भी उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बांग्ला भाषी थे, पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की संपर्क भाषा हिंदी को बनाया और देश को ‘जय हिंद’ का नारा दिया। गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी को सभी लोगों ने जनसंवाद की भाषा बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन महापुरुषों का बहुत बड़ा योगदान हम सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जिनकी अपनी मातृभाषा हिंदी कभी नहीं थी। मेरी अपनी मातृ भाषा भी गुजराती है, पर मैं जब देश में किसी भी कोने में जाता हूं तो जो भाषा मुझे वहां के सामान्यजन से सीधा जोड़ती है, वह हिंदी है। उन्होंने कहा कि हिंदी की यात्रा को देखें तो उसमें पूरे भारत की यात्रा दिखाई देती है। आदिकाल में विद्यापति की ‘पदावली’, पृथ्वीराज रासो की वीरगाथाएं और फिर भक्ति काल का वह अद्भुत युग, जब तुलसीदास ने रामकथा को घर-घर पहुंचाया। वहीं, सूरदास ने ‘वात्सल्य’ को स्वर दिया। अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा के विचारों ने राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा दी। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भी अनुभव किया था कि स्वभाषा और स्वाभिमान के बिना स्वराज की संकल्पना अधूरी होती है। स्वतंत्रता के बाद भाषा ही राष्ट्रनिर्माण, प्रशासन और जन-जन तक विकास को पहुंचाने का माध्यम बनी। हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं ने जन-जागरण, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के विचार को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी विरासत के साथ संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसी बीच अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद एक विडंबना भी पनपी। राजनीतिक स्वाधीनता तो मिली, लेकिन स्वभाषा, स्वसंस्कृति और स्वाभिमान के विषय हांशिए में डाल दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से गुलामी की इस मानसिकता से मुक्ति का आह्वान किया और इस मुक्ति में भाषा की भूमिका केंद्रीय है। राजपथ का कर्तव्य पथ बनना सिर्फ नामकरण नहीं था। अंग्रेजों के बनाए दंड आधारित कानूनों की जगह जन केंद्रित तीन कानून बनाए। यह सिर्फ शब्दों का बदलाव नहीं था, यह आत्म-गौरव की पुनर्स्थापना है। आज नई शिक्षा नीति मात्र भाषा को शिक्षा के केंद्र में रखती है। इंजीनियरिंग और चिकित्सा की पढ़ाई भारतीय भाषाओं में हो रही है। प्रतियोगी परीक्षाएं अनेक भारतीय भाषाओं में हो रही हैं।
कुलंजन: अदरक जैसा दिखने वाला ये पौधा, आयुर्वेद में क्यों माना जाता है खास?

नई दिल्ली। आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय पौधे बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है। कुलंजन भी इन्हीं में से एक है। यह पौधा देखने में काफी हद तक अदरक जैसा दिखाई देता है और इसकी तेज सुगंध तथा तीखा स्वाद इसे दूसरी जड़ी-बूटियों से अलग पहचान देते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का इस्तेमाल कई तरह की सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है। बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि कुलंजन का वैज्ञानिक नाम अल्पिनिया कैल्केराटा है। यह मुख्य रूप से उष्ण और नम जलवायु में अच्छी तरह उगता है। इसके पौधे में लंबी, हरी पत्तियां होती हैं, जबकि जमीन के नीचे इसका सुगंधित तना विकसित होता है। इसमें छोटे और सफेद रंग के फूल भी दिखाई देते हैं। हालांकि पौधे का ऊपरी हिस्सा भी अपनी पहचान रखता है, लेकिन औषधीय उपयोग के लिए मुख्य रूप से इसकी जड़ और जमीन के अंदर मौजूद तने को महत्वपूर्ण माना जाता है। कुलंजन की सबसे खास बात इसकी गर्म तासीर और तीखी प्रकृति मानी जाती है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम और श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसकी सुगंधित प्रकृति के कारण इसे सांस से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में उपयोगी माना जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का संबंध जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं से भी बताया जाता है। इसके अलावा पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। माना जाता है कि इसकी गर्म प्रकृति पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। कुलंजन के भले ही कई पारंपरिक लाभ बताए जाते हैं, लेकिन किसी भी बीमारी में दवा के रूप में इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है। बिना सही जानकारी के इसका उपयोग करना खतरनाक हो सकता है।
तमिलनाडु के नीलगिरी और कोयंबटूर में तीन दिनों तक भारी बारिश और तेज हवाएं चलेंगी

चेन्नई। तमिलनाडु के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले तीन दिनों में नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का अनुमान लगाया है। साथ ही इस क्षेत्र में तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम में बदलाव की वजह दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश से मन्नार की खाड़ी तक फैली एक ‘ट्रफ’ (हवा का कम दबाव वाला क्षेत्र) को माना जा रहा है। इसके असर से तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, खासकर पश्चिमी घाट के इलाकों में बारिश के तेज होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने कहा है कि सोमवार से बुधवार के बीच नीलगिरि और कोयंबटूर जिलों के पहाड़ी इलाकों में कुछ जगहों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों के जोखिम भरे रास्तों से गुजरने वाले स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सोमवार और मंगलवार को पश्चिमी घाट के अन्य जिलों में भी कुछ जगहों पर तेज जमीनी हवाओं के साथ मध्यम बारिश होने की संभावना है। तिरुपत्तूर, वेल्लोर, तिरुवन्नामलाई, कृष्णगिरि, धर्मपुरी, इरोड, सलेम, नमक्कल, करूर, त्रिची, अरियालुर, पेरम्बलुर और कल्लाकुरिची जिलों के लिए भी ऐसे ही मौसम का अनुमान लगाया गया है। कुछ इलाकों में बारिश से अभी की गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, तेज हवाओं से सड़क पर सफर करने में दिक्कत हो सकती है और खुली जगहों पर कमजोर इमारतों, पेड़ों और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से कहा गया है कि वे मौसम की जानकारी पर नजर रखें, खासकर तब जब लंबे समय तक भारी बारिश होती रहे। घाट वाली सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि बारिश से विजिबिलिटी कम हो सकती है और सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। चेन्नई में आम तौर पर बादल छाए रहने की उम्मीद है और शाम या रात के समय शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। फिलहाल राजधानी में बड़े पैमाने पर भारी बारिश का अनुमान नहीं है। कई जिलों में बारिश की संभावना के बावजूद, तमिलनाडु के अंदरूनी इलाकों में दिन का तापमान अधिक रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ जगहों पर अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो सकता है। अधिक तापमान, उमस और बीच-बीच में होने वाली बारिश से मौसम असहज हो सकता है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर की धूप में ज्यादा देर तक न रहें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और सफर करते समय जरूरी सावधानी बरतें। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे नीलगिरि और कोयंबटूर की पहाड़ियों में मौसम की स्थिति पर कड़ी नजर रखेंगे, जहां कभी-कभी जोरदार बारिश से जलभराव, जमीन खिसकने की छोटी-मोटी घटनाएं और पहाड़ी सड़कों पर रुकावटें आ सकती हैं।
गणेश चतुर्थी 2026: लालबागचा राजा से सिद्धिविनायक तक, बप्पा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

मुंबई। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी के साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव की धूम शुरू हो गई है। सोमवार सुबह से ही प्रदेश के प्रमुख गणेश मंदिरों और पंडालों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया” के जयघोष से पूरा महाराष्ट्र गूंज रहा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्साह चरम पर है। गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण लालबागचा राजा के दरबार में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह से ही लंबी कतारें लगी हैं। वहीं, सिद्धिविनायक मंदिर में भी बप्पा के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। भक्त कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मुंबई पुलिस और मंदिर के स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। भक्तों की सुविधा और सुरक्षा दोनों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नागपुर में भी गणेश चतुर्थी की रौनक देखते ही बन रही है। यहां के प्रसिद्ध गणेश टेकरी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। लोग खुशी, समृद्धि और सुख-शांति के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल है और चारों तरफ गणपति के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। मंदिर में व्यवस्था संभाल रहे एक सेवादार ने बताया, “यह 10 दिन का त्योहार चल रहा है और यहां भारी भीड़ है। हमारा मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि हर भक्त को ठीक से दर्शन मिलें और हमने उसी हिसाब से इंतजाम किए हैं। हमने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई हैं। बुजुर्गों के लिए हमने ई-रिक्शा और ईवी गाड़ियों का इंतजाम किया है ताकि उन्हें आसानी से मंदिर तक लाया जा सके।” उन्होंने आगे बताया कि मंदिर में प्रसाद की व्यवस्था की गई है और बाहर प्रसाद बेचने वालों के लिए अलग ग्राउंड में व्यवस्था की गई है। मंदिर के 12 स्वयंसेवक और सुरक्षा कर्मी लगातार भीड़ को नियंत्रित कर रहे हैं। सेवादार ने भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के अंदर पूजा सामग्री न लाएं, क्योंकि इससे भीड़ बढ़ती है और दर्शन में रुकावट आती है। भक्त दोनों हाथ जोड़कर भगवान से आशीर्वाद लें। यह मंदिर भोसले काल का है और लगभग 200-300 साल पुराना बताया जाता है। समय के साथ मंदिर का धीरे-धीरे विकास हुआ है। आज जो भव्य स्वरूप दिखाई दे रहा है, वह निरंतर प्रगति का परिणाम है। मान्यता है कि यहां बड़े-बड़े अभिनेता और नेता भी दर्शन के लिए आते हैं। हर मंगलवार को यहां विशेष भीड़ रहती है। एक अन्य भक्त ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम यहां गणेश चतुर्थी के लिए आए थे और मंदिर में दर्शन किए। यहां का माहौल बहुत खुशी भरा और सुखद है। गणेश चतुर्थी का असली मतलब यही है कि भगवान गणेश हमारी परेशानियां दूर करते हैं और हमें खुशियां देते हैं। इसी तरह, हमें भी अपनी जिंदगी में दूसरों को दुख देने के बजाय खुशियां बांटने की कोशिश करनी चाहिए।” तटीय जिले सिंधुदुर्ग में भी गणेशोत्सव की शुरुआत पारंपरिक उत्साह के साथ हुई है। यहां घरों में भगवान गणेश की मूर्तियां लाई जा रही हैं। जिले में इस बार लगभग 68,800 घरों में गणेश जी की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी और 31 जगहों पर सार्वजनिक उत्सव मनाए जाएंगे। प्रशासन ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित उत्सव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूरे महाराष्ट्र में अगले 10 दिनों तक यही भक्तिमय माहौल बना रहेगा, जिसके बाद अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को अगले बरस जल्दी आने का निमंत्रण देकर विदा किया जाएगा।
स्टंट कोरियोग्राफर राम लक्ष्मण बोले- ‘द पैराडाइज’ में ‘दसरा’ से तीन गुना ज्यादा एक्शन

मुंबई । तेलुगु स्टार नानी ने अब तक कई अलग-अलग तरह के किरदार पर्दे पर निभाए हैं लेकिन उनकी अगली फिल्म ‘द पैराडाइज’ में उनका अंदाज कुछ हटकर होने वाला है। श्रीकांत ओडेला के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में एक्शन पर काम करने वाले मशहूर स्टंट कोरियोग्राफर्स राम लक्ष्मण ने बताया कि ‘द पैराडाइज’ में नानी की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दसरा’ के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा एक्शन देखने को मिलेगा। फिल्म के मेकर्स की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम लक्ष्मण ने ‘द पैराडाइज’ के एक्शन सीक्वेंस से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर कीं। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक्शन पर उन्होंने स्टंट मास्टर्स नबाकांत और रियल सतीश के साथ मिलकर काम किया है। टीम ने फिल्म के लिए दो बड़े एक्शन ब्लॉक तैयार किए हैं, जिन पर काफी समय लगाया गया है। स्टंट कोरियोग्राफर राम लक्ष्मण ने कहा, ‘द पैराडाइज’ में नानी जिस तरह का एक्शन करते नजर आएंगे, वह उनके पिछले काम से काफी अलग है। फिल्म के एक्शन सीन काफी हैवी हैं और इनमें ‘दसरा’ की तुलना में तीन गुना ज्यादा एक्शन रखा गया है। नानी ने इससे पहले इस स्तर पर एक्शन नहीं किया है। ऐसे में फिल्म में उनका एक नया अवतार देखने को मिलेगा।” नानी की तारीफ करते हुए स्टंट कोरियोग्राफर ने कहा, ”एक्टर ने फिल्म के लिए अपना 100 प्रतिशत दिया। नानी हर सीन को बेहतर तरीके से करने के लिए ज्यादा से ज्यादा टेक देने के लिए तैयार रहते थे। हमें खुद उम्मीद नहीं थी कि नानी फिल्म के लिए इतनी मेहनत करेंगे। फिल्म के कुछ एक्शन सीक्वेंस ऐसे थे, जिनके लिए नानी को एक्टिंग के साथ-साथ अपनी बॉडी पर भी काम करना पड़ा। उन्हें अपनी डाइट में बदलाव कर किरदार के हिसाब से बॉडी तैयार करनी पड़ी।” स्टंट मास्टर ने कहा, ”नानी ने निर्देशक श्रीकांत ओडेला के विजन के साथ पूरा न्याय किया है और मुझे खुशी है कि वे इस फिल्म का हिस्सा बने हैं। एक्शन ब्लॉक को पूरा करने में करीब 10 दिन का समय लगा। ‘द पैराडाइज’ की पूरी दुनिया में दर्शकों को कुछ नया देखने को मिलेगा। नानी की बॉडी लैंग्वेज अलग होगी, फिल्म में नए तरह के लोग दिखाई देंगे और एक्शन को भी एक अलग अंदाज में पेश किया जाएगा।” फाइट मास्टर्स के बीच बढ़ती प्रतियोगिता को लेकर सवाल पूछे जाने पर राम लक्ष्मण ने कहा, ”प्रतियोगिता होने से क्रिएटिविटी बढ़ती है और लोगों के अंदर कुछ नया करने की इच्छा पैदा होती है। हम अपने काम को ईमानदारी और पूरी एकाग्रता के साथ करते हैं।
बप्पा के आगमन से झूम उठी टीवी इंडस्ट्री, देबीना से दीपशिखा नागपाल तक घर लाईं गणपति

मुंबई। पूरे देशभर में गजानन के आगमन की होड़ देखने को मिल रही है। ऐसे में मनोरंजन जगत की दुनिया कैसे पीछे रह सकती है। टेलीविजन इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने अपने घर पर बप्पा का न सिर्फ आगमन बल्कि उनके प्रति अपना आभार भी व्यक्त किया। अभिनेत्री देबीना, दिव्यांका त्रिपाठी, दिपशिक्षा नागपाल, अंकिता लोखंडे समेत कई एक्टर्स बप्पा को धूमधाम और नाचते-गाते हुए बप्पा की मूर्ति को अपने घर लाते देखा गया। अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल अपने परिवार संग दुकान बाहर नजर आ रही हैं। वह और उनका पूरा परिवार बप्पा के आगमन से काफी उत्साहित नजर आ रहा था। सभी मिलकर डांस कर रहे थे। अभिनेत्री ने मीडिया संग बातचीत में बताया कि बप्पा की सेवा करते हुए उन्होंने इस बार 25 साल पूरे कर लिए हैं। अभिनेत्री ने कहा, “मैं आज कितनी खुश हूं, उसको शब्दों के जरिए बयां नहीं कर सकती। इस बार बप्पा को घर में लाते हुए हमें 25 साल हो रहे हैं। यहां पर मेरी बहनों और बच्चों समेत पूरा परिवार मौजूद है। हम सभी बप्पा का स्वागत कर रहे हैं, जिसके लिए मैं बहुत उस्ताहित हूं। बप्पा ने मुझे 25 साल सेवा का अवसर दिया है, तो मैं यही कहूंगी कि जब तक जिऊं ऐसे ही उनकी सेवा करती रहूं।” वहीं, अभिनेत्री देबीना बनर्जी बच्चों और पति व अभिनेता गुरमीत चौधरी के साथ बप्पा को लेने गई थीं, जहां उन्होंने मीडिया संग बातचीत में कहा कि बप्पा ने उन पर बहुत कृपा बरसाई है। अभिनेत्री ने कहा, “इमोशन हर बार की तरह समान है। गणपति आ रहे हैं , लेकिन इस बार ज्यादा स्पेशल है, जिसके लिए आपको थोड़ा-सा इंतजार करना पड़ेगा। बस कुछ दिनों के बाद ही आपको पता चलेगा। बप्पा ने हमेशा ही हम पर कृपा बरसाई है। मैं बंगाल से यहां आई हूं, जबकि गुरमीत बिहार से आए हैं। गणेश चतुर्थी असल में महाराष्ट्र का पर्व है और हम लोग अलग राज्यों से आकर बप्पा के रंग में रंग गए। हालांकि, बप्पा भी दिल खोलकर हमारे साथ खड़े रहे हैं। कपल ने आगे बताया कि इस बार बप्पा की मूर्ति उनके बच्चों ने चुनी है। गुरमीत ने कहा, “हमारे बच्चे पिछले दो दिन से बप्पा का इंतजार कर रहे हैं। तो यह बहुत खुशी की बात हैं क्योंकि बच्चों में इस उम्र से ही भगवान को लेकर आस्था और उत्साह है।” अभिनेत्री देबीना बनर्जी ने कहा, “हमने कभी भी बच्चों को इस तरह से सिखाया नहीं कि ऐसे पूजा करो। वे दोनों देखते ही देखते हमारे साथ भगवान के प्रति पूजा और भी कार्यक्रम में सम्मिलित होने लगी और शायद यह भी हो सकता है कि वे सुबह-शाम हम दोनों को पूजा करते हुए देखती रहती हैं, तो उसका असर भी होता होगा। जो हमें देखते हैं वही ये सब कर रही हैं।
केंद्र का समर्थन बंद हो तो एक दिन भी काम न कर पाए हिमाचल सरकार: सिकंदर कुमार

लाहौल-स्पीति। हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहायता को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने राज्य सरकार पर पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया है कि पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने हिमाचल में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार लगातार आरोप लगा रही है कि केंद्र से उसे पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है और इसे उठाए लगभग एक साल हो गया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “अगर केंद्र सरकार अपना समर्थन बंद कर दे, तो राज्य सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। ये बताइए, किस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य का साथ नहीं दिया? हर मामले में, जिसमें हमारे राज्य को प्रभावित करने वाली आपदा भी शामिल है, केंद्र ने मदद की है।” सांसद ने कहा कि पिछले 10 सालों में हुए विकास कार्यों को अगर देखा जाए तो केंद्र ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा, “पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। पिछले 10 सालों में केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में हालात और विकास की दिशा, दोनों को बदल दिया है।” केंद्र के सहयोग को गिनाते हुए सिकंदर कुमार ने कहा कि सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा, हर सेक्टर में बीते 10 सालों में अभूतपूर्व काम हुए हैं। उन्होंने कहा, “रोड इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, आप हेल्थ देखो, आप एजुकेशन देखो, हर एक सेक्टर में ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय कार्य 10 वर्षों में हुए हैं। हमें तो केंद्र सरकार का आभारी होना चाहिए।” कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि जब प्रदेश में 35 वर्ष कांग्रेस ने राज किया और केंद्र में 55 से 60 वर्ष इन्होंने राज किया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, यह मुझे एक हजार रुपये का कोई प्रोजेक्ट बता दें जो केंद्र की तत्कालीन सरकार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दिया हो।” सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि आपदा के समय भी केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल का साथ दिया है, चाहे वह आर्थिक पैकेज हो या राहत सामग्री। राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग के लिए आभार जताना चाहिए।