अरुणाचल प्रदेश पीएससी भर्ती 2026: असिस्टेंट डायरेक्टर सहित 37 पदों पर वैकेंसी का नोटिफिकेशन जारी, 21 सितंबर से करें आवेदन

ईटानगर। सरकारी नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (अरुणाचल प्रदेश पीएससी) ने विभिन्न पदों/सेवाओं में योग्य उम्मीदवारों की भर्ती के लिए ‘ग्रुप-ए और ग्रुप-बी, राजपत्रित (तकनीकी) पद-2026 (भाग-II)’ की संयुक्त भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आमंत्रित करता है। अरुणाचल प्रदेश पीएससी की ओर से जारी 37 रिक्तियों में फाइनेंस और अकाउंट्स ऑफिसर/ट्रेजरी ऑफिसर (वित्त विभाग) के 7, सब-ट्रेजरी ऑफिसर (वित्त विभाग) के 7, असिस्टेंट डायरेक्टर (गृह विभाग) के 5 और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (गृह विभाग) के 18 पद शामिल हैं। इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 21 सितंबर के शाम 10 बजे से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे एपीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित पदों के लिए आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि की शाम 5 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लें। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से पद से संबंधित विभाग के अनुसार ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, असिस्टेंट डायरेक्टर और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पोस्ट के लिए कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में 7 वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है। आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन, आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पोस्ट के अनुसार 44,900 से 1,77,500 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय सभी वर्ग के अभ्यर्थियों को निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो 200 रुपए तय किया गया है। वहीं, पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी से आने वाले उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
ब्रिक्स बैठक में विपक्षी राज्यों के सीएम को नहीं बुलाना लोकतंत्र विरोधी, कमजोर हो रही लोकतंत्र की जड़ें: अवधेश प्रसाद

अयोध्या। समाजवादी पार्टी (एसपी) के सांसद अवधेश प्रसाद ने ब्रिक्स बैठक में विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भाजपा की “लोकतंत्र-विरोधी सोच” का संकेत बताते हुए कहा कि ऐसे कदम लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करते हैं। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है, उन्हें ब्रिक्स कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और राजनीतिक दलों का लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मान होना चाहिए। विपक्षी मुख्यमंत्रियों की गैर-मौजूदगी को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। अयोध्या में राम मंदिर चंदे से जुड़े विवाद पर भी सपा सांसद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ट्रस्ट को लाखों रुपये के चंदे के साथ-साथ सोना, चांदी, नकद और जमीन भी प्राप्त होती है। अवधेश प्रसाद ने कहा यदि कोई कोषाध्यक्ष यह कहता है कि उसने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए और संबंधित स्थान का दौरा तक नहीं किया, तो यह गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना स्थिति है। उन्होंने ट्रस्ट में पदोन्नति को लेकर भी सवाल उठाए। ब्रिक्स डिनर के मेनू को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पोस्ट पर भी अवधेश प्रसाद ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग प्रकार के पहनावे और भोजन की परंपराएं हैं। उनके मुताबिक सभी तरह के भोजन का सम्मान किया जाना चाहिए, साथ ही देश की परंपराओं और मान्यताओं का संरक्षण भी जरूरी है। वहीं, सपा के चुनावी घोषणा पत्र को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि पार्टी के लिए घोषणापत्र केवल चुनावी दस्तावेज नहीं, बल्कि “पवित्र दस्तावेज” की तरह है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरी तरह लागू करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी घोषणापत्र में प्रत्येक जिले की स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास योजनाएं शामिल की जाएं, तो यह राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का विकास तभी व्यापक रूप से संभव है, जब जिलों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं।
पाकिस्तान का हाल हुआ बेहाल, क्लीन स्वीप के बाद आईसीसी ने लगाया जुर्माना, 11 डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स भी काटे

नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन में हुए तीसरे टेस्ट में धीमी ओवर गति बनाए रखने के कारण पाकिस्तान को दोहरी सजा मिली है। इसके चलते टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) की प्वाइंट्स टेबल में नुकसान हुआ है और उनका जीत प्रतिशत घटकर 10 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है। आईसीसी ने बताया कि बर्मिंघम में इंग्लैंड से 8 विकेट से हार के दौरान, समय की छूट को ध्यान में रखने के बाद भी लक्ष्य से 11 ओवर कम होने के कारण पाकिस्तान पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है और उनके 11 डब्ल्यूटीसी प्वाइंट भी काट लिए गए हैं।पाकिस्तान टीम को ऑन-फील्ड अंपायर पॉल राइफेल, क्रिस गैफनी, तीसरे अंपायर अल्लाहउद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने दोषी पाया है। एमिरेट्स आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रंजन मदुगले ने इंग्लैंड के खिलाफ 0-3 से बुरी तरह हारने के बाद बाबर आजम की टीम को यह सजा सुनाई है। इस सजा का पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है। बर्मिंघम टेस्ट में हार के बाद टीम का पहले ही डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल में जीत प्रतिशत 14.81 हो गया था और टीम सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई थी। अब 11 अंक काटे जाने के बाद पाकिस्तान का जीत प्रतिशत घटकर सिर्फ 4.63 प्रतिशत रह गया है। इस कटौती के बाद टीम के पास 9 मैचों से केवल पांच अंक बचे हैं। मौजूदा डब्ल्यूटीसी चक्र में पाकिस्तान ने दो मैच जीते हैं और सात हारे हैं लेकिन धीमी ओवर गति (स्लो ओवर रेट) के कारण उसे अपने 24 प्वाइंट्स में से 19 प्वाइंट गंवाने पड़े हैं। 11 प्वाइंट की इस कटौती से पहले, इस साल मई में बांग्लादेश के खिलाफ ढाका टेस्ट में धीमी ओवर गति के कारण पाकिस्तान के आठ प्वाइंट भी काटे गए थे। ऑस्ट्रेलिया डब्ल्यूटीसी स्टैंडिंग में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। बांग्लादेश के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ के बाद उनके पास 96 प्वाइंट हैं और उनका जीत प्रतिशत 80 है। साउथ अफ्रीका 36 प्वाइंट और 75 के जीत प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर काबिज है। 72.22 के जीत प्रतिशत के साथ न्यूजीलैंड तीसरे और बांग्लादेश 55.56 के जीत प्रतिशत के साथ चौथे नंबर पर मौजूद है।
भाजपा और कांग्रेस से परे व्यापक गठबंधन की योजना बना रही डीएमके, कनिमोझी ने इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों से मुलाकात की

मुंबई। परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिर जाने के बाद डीएमके संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत शुरू कर दी है। संपर्क बढ़ाने की कोशिश के तहत कनिमोझी ने मुंबई के बांद्रा स्थित ‘मातोश्री’ आवास पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। ठाकरे ने खुद डीएमके सांसद का स्वागत किया और उन्हें सम्मान के तौर पर सुनहरी शॉल भेंट की। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल देसाई और मिलिंद नार्वेकर भी मौजूद थे। खबरों के मुताबिक, नेताओं ने संसद में परिसीमन बिल के गिरने, भाजपा के प्रति कांग्रेस के मौजूदा रुख और इंडिया ब्लॉक की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। इस चर्चा में विपक्षी गठबंधन में क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के महत्व और उभरती राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में उनकी भूमिका पर भी बात हुई। दक्षिणी राज्यों पर परिसीमन के संभावित असर और प्रभावित राज्यों व क्षेत्रीय पार्टियों द्वारा अपनी प्रतिक्रिया में तालमेल बिठाने की जरूरत पर खास ध्यान दिया गया। ठाकरे के साथ बैठक के बाद कनिमोझी दिल्ली गईं, जहां उन्होंने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता शरद पवार और उनकी बेटी व लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले के साथ अलग-अलग बातचीत की। इन मुलाकातों से यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि डीएमके उन क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ लाने की संभावना तलाश रही है, जिनके कांग्रेस पार्टी के साथ मतभेद हैं। ऐसी पहल से आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक तीसरे राजनीतिक गठबंधन के उभरने का रास्ता बन सकता है, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र हो। खबर है कि ठाकरे के साथ बातचीत के दौरान कनिमोझी ने परिसीमन प्रस्तावों का विरोध करने वाली राज्य-स्तरीय पार्टियों के बीच बेहतर सहयोग पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय ताकतों के लिए एक बड़ा मंच बनाने की संभावना पर भी विचार-विमर्श किया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में चेन्नई में बुलाई गई परिसीमन-विरोधी बैठक से डीएमके दूर रही थी, जबकि कांग्रेस ने इसमें हिस्सा लिया था। इस घटनाक्रम ने इस मुद्दे पर अपनाई जाने वाली रणनीति को लेकर विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को उजागर किया। महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ ठाकरे के कथित मतभेदों ने भी कनिमोझी की इस यात्रा को और महत्वपूर्ण बना दिया है। उम्मीद है कि कनिमोझी पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान तथा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर अपना संपर्क अभियान जारी रखेंगी। इन प्रस्तावित बैठकों को एक समन्वित क्षेत्रीय राजनीतिक मंच के लिए समर्थन का आकलन करने की डीएमके की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बप्पा के रंग में रंगा करीना का परिवार, जेह और सैफ अली खान ने बनाए इको-फ्रेंडली गणपति

मुंबई। बॉलीवुड के गलियारों में भी गणेश चतुर्थी की धूम देखने को मिल रही है। सोमवार को अभिनेत्री करीना कपूर खान ने गणेश चतुर्थी सेलिब्रेशन की एक झलक फैंस के साथ शेयर की। एक्ट्रेस ने पति और एक्टर सैफ अली खान की तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर शेयर कीं, जिसमें वे घर पर मिट्टी से इको-फ्रेंडली भगवान गणपति की मूर्ति बनाते नजर आ रहे हैं। पहली तस्वीर में सैफ सफेद कुर्ता-पजामा पहने जमीन पर बैठे अपने हाथों से मिट्टी की मूर्ति बनाते दिख रहे हैं। करीना ने इसके बाद तैयार हुई मिट्टी की मूर्ति की तस्वीर शेयर की, जिसे लकड़ी की सतह पर रखा गया था। एक्ट्रेस ने बताया कि यह मूर्ति उनके छोटे बेटे जहांगीर अली खान ने बनाई है। तस्वीर शेयर करते हुए करीना ने लिखा, “मेरे जेह बाबा ने बनाई। सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं।” बता दें कि करीना कपूर खान और सैफ ने अपने परिवार के दोनों तरफ के त्योहारों और परंपराओं को अपनाया है। करीना पंजाबी कपूर परिवार से हैं जबकि सैफ मुस्लिम पटौदी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कपल अक्सर अपने बच्चों तैमूर और जेह के साथ अलग-अलग त्योहार मनाते हैं। करीना पहले भी बता चुकी हैं कि उनका परिवार अलग-अलग धर्मों के त्योहार कैसे मनाता है। उन्होंने कहा था कि क्रिसमस दिवाली जितना ही मनाया जाता है जबकि ईद भी उनके परिवार के सेलिब्रेशन का हिस्सा है। क्रिसमस लंच और दिवाली सेलिब्रेशन से लेकर बिरयानी और फैमिली गेट-टुगेदर वाली ईद की दावतों तक इस कपल ने घर पर परंपराओं का सुंदर संगम दिखाया है। करीना अपनी आने वाली फिल्म ‘दायरा’ के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिसमें पृथ्वीराज सुकुमारन भी हैं। मेघना गुलजार द्वारा डायरेक्ट की गई यह फिल्म 18 सितंबर को रिलीज होने वाली है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानी अपराध, सजा तथा त्वरित न्याय बनाम विलंबित न्याय के इर्द-गिर्द घूमती है। यह दिखाती है कि कैसे एक बड़े अपराध के बाद समाज में आक्रोश फैलता है और न्याय पाने के लिए कानूनी व जांच प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। फिल्म का गाना ‘सच का दायरा’ भी रिलीज हो चुका है, जिसे बी प्राक ने गाया है और इसके बोल गुलजार ने लिखे हैं।
यूसीसी लागू करने से पहले जाति व्यवस्था खत्म करने की जरूरत : उदित राज

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस ऐलान पर कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए 2029 तक 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करेगा, कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रतिक्रिया दी है। इसके साथ ही उन्होंने भारत-अफगानिस्तान टी-20आई मैच और महिला एशिया कप से जुड़े मामले पर भी अपनी राय रखी। यूसीसी को लेकर उदित राज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने से क्या फायदा होगा? इसके बजाय, जाति व्यवस्था को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए। जाति व्यवस्था के खत्म हुए बिना देश की असली तरक्की नहीं हो सकती।” उन्होंने कहा, “यूसीसी लागू करने से क्या होगा? क्या जाति व्यवस्था खत्म हो रही है? जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। जब तक भारत जाति के आधार पर बंटा रहेगा, तब तक विज्ञान और तकनीक में कोई तरक्की नहीं होगी। वे हिंदू-मुस्लिम का नैरेटिव बनाना चाहते हैं ताकि उनका वोट बैंक बना रहे।” दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने का लक्ष्य है। इस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं, भारत-अफगानिस्तान टी20आई मैच से पहले राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ गाए जाने को लेकर भी उदित राज ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “इसमें क्या बड़ी बात है? इससे कोई फालतू बात बनाने से क्या फायदा? असल बात तो यह है कि उन्होंने अच्छा खेला। वे जीते, और हम उन्हें उनकी जीत पर बधाई देते हैं।” इसके अलावा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा एसीसी चेयरमैन मोहसिन नकवी से महिला एशिया कप की ट्रॉफी न लेने के मामले पर भी उदित राज ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे ‘नाटक’ करार दिया। कांग्रेस नेता ने कहा, “फिर से वही नाटक-बेकार का नाटक, इवेंट वाला नाटक। जब पाकिस्तान की टीम आ चुकी है, पाकिस्तानी खिलाड़ी यहां आए हैं, यहीं रह रहे हैं और खेल रहे हैं, तो उनके हाथों से ट्रॉफी न लेने का यह नाटक बेतुका है।
जम्मू-कश्मीर के रियासी में गाड़ी पलटने से दो लोगों की मौत, 7 अन्य घायल

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में सोमवार को एक सड़क हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में पहुंचाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिले के बक्कल टनल इलाके के पास यात्रियों से भरी एक गाड़ी पलट गई। इसके कारण दो लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने कहा कि यह गाड़ी बक्कल से रियासी की ओर जा रही थी, तभी वह पलट गई। मृतकों की अभी पहचान नहीं हो पाई है। अधिकारियों ने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में पहुंचाया गया। फिलहाल, पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी है। इससे पहले, 7 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में दो अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि गांदरबल जिले में एक लड़के और एक लड़की ने नहर में छलांग लगा दी, जिससे वे डूब गए। लड़के की पहचान थून निवासी मोहम्मद शरीफ काही के बेटे इरशाद अहमद काही के तौर पर हुई, जबकि लड़की की पहचान उजागर नहीं की गई। वहीं, शोपियां के जैनापोरा इलाके के सुगू हंधमा में सेब के बाग में एक 28 साल के युवक का शव लटका हुआ मिला। अधिकारियों ने बताया कि उस युवक को सबसे पहले स्थानीय लोगों ने देखा और फिर पुलिस को सूचना दी। उसकी पहचान सुगू हंधमा के नजीर अहमद भट के बेटे नदीम नजीर भट के तौर पर हुई।
इन्वेस्टमेंट समिट से पहले पीएम मार्क कार्नी बोले- कनाडा अपने भविष्य की कमान खुद संभाल रहा

टोरंटो। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट से पहले कहा कि देश में अब अर्थव्यवस्था के बदलाव और भविष्य की दिशा को लेकर एक नई सहमति बन गई है। रविवार शाम को कनाडा के उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा कि यह सहमति इस बात पर है कि ‘कनाडा अपने भविष्य की कमान खुद संभाल रहा है।’ उन्होंने कहा, “हम और ज्यादा निर्माण करेंगे, आपस में ज्यादा व्यापार करेंगे, दुनिया के साथ भी ज्यादा व्यापार करेंगे और अपने देश में टिकाऊ समृद्धि पैदा करेंगे।” कार्नी ने कहा, “हम कनाडा के लिए एक नए दौर को आकार दे रहे हैं। कनाडा की सबसे बड़ी सोच यह है कि एकता जरूरी है, लेकिन सबका एक जैसा होना जरूरी नहीं है। हम मानते हैं कि हमारी अलग-अलग पहचान और विचार ही हमारी ताकत हैं और हम इसी भरोसे के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने कहा, “दुनिया को जिन चीजों की जरूरत है, वे हमारे पास हैं। हमारे पास ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन, प्रतिभा, तकनीक और पूंजी है। लेकिन हमारी सबसे बड़ी ताकत ऐसी चीज है जो किसी बैलेंस शीट में नहीं दिखती, और वह है भरोसा।” कार्नी ने आगे कहा, “अगर हम मिलकर काम करें, तो हम अपने लिए उससे कहीं ज्यादा हासिल कर सकते हैं, जितना कोई हमसे छीन सकता है।” कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 14 और 15 सितंबर को कनाडा के सबसे बड़े शहर टोरंटो में आयोजित होगा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यह सम्मेलन बड़े निवेश आकर्षित करने की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में करीब एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 720 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश को आकर्षित करना है। इस समिट में कनाडा की ‘डील बुक’ पेश की जाएगी, जिसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, उन्नत तकनीकों और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दुनिया भर के निवेशकों को कनाडा की बड़ी परियोजनाओं से जोड़ना है, ताकि देश की सप्लाई चेन मजबूत हो, उत्पादकता बढ़े और अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम की जा सके। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले कई उत्पादों, जैसे शराब, डेयरी उत्पादों और मोटरसाइकिलों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। यह कदम अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव का हिस्सा माना जा रहा है। व्हाइट हाउस की घोषणाओं के अनुसार, यह आयात प्रतिबंध 29 सितंबर को पूर्वी समयानुसार रात 12:01 बजे से लागू होंगे। हालांकि, उस तारीख से पहले कनाडा से आयात किए गए लेकिन अभी तक उपभोग के लिए मंजूरी न पाने वाले सामानों पर पहले से लागू 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) जारी रहेगा। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि इन कदमों का उद्देश्य कनाडा के जवाबी उपायों का मुकाबला करना, अमेरिकी उत्पादन की रक्षा करना और अमेरिकी सरकार के अनुसार व्यापार में ‘समान अवसर’ सुनिश्चित करना है। अधिकारी के अनुसार, इन आयात प्रतिबंधों का असर कनाडा के उन व्यापारिक सामानों पर पड़ेगा जिनकी कीमत अरबों डॉलर में है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा टैरिफ सूची में बदलाव से उन लगभग 20 अरब डॉलर के व्यापार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, जो पहले से इन शुल्कों के दायरे में आते हैं।
अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने किया बप्पा का स्वागत, बोले- ‘हर साल हमें और करीब ले आते हैं गणपति’

मुंबई। अभिनेता वर्धन पुरी ने अपने परिवार के साथ गणेश चतुर्थी मनाने की यादों और इस त्योहार से जुड़े अपने खास अनुभव साझा किए। उन्होंने बचपन के उन खूबसूरत पलों को याद किया, जब वह अपने दिवंगत दादा और दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ बप्पा का स्वागत किया करते थे। वर्धन के लिए गणेश चतुर्थी ऐसा समय है, जब पूरा परिवार एक साथ आता है और पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाता है। गणेश चतुर्थी से जुड़ी अपनी सबसे प्यारी बचपन की याद के बारे में वर्धन ने आईएएनएस से कहा, ”जब परिवार ने पहली बार बप्पा को घर लाने की परंपरा शुरू की थी, तब सभी एक साथ मिलकर बप्पा के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से बनाया करते थे। इसमें दादू, दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के बाकी सभी लोग शामिल होते थे।” उन्होंने कहा, ”यह परंपरा आज भी उसी तरह जारी है। हर साल बप्पा का घर आना हमारे परिवार के लिए ढेर सारा प्यार, खुशी और जश्न लेकर आता है। मेरे लिए यह किसी खूबसूरत आशीर्वाद जैसा है कि मेरा पूरा परिवार इस खास मौके को एक साथ मिलकर मनाता है।” अपने परिवार के गणेश उत्सव मनाने के तरीके के बारे में वर्धन ने कहा, ”गणपति के दौरान पूरा परिवार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से एक जगह इकट्ठा होता है। मैं अपने मंदिर में स्थापित उसी गणपति की मूर्ति को अपने घर के बैठक वाले कमरे में लेकर आता हूं। इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान घर में स्वादिष्ट महाराष्ट्रीयन खाना और ढेर सारे मोदक बनाए जाते हैं।” वर्धन ने कहा, ”दो दिन के उत्सव के बाद पूरे परिवार की मौजूदगी में बप्पा को प्यार से वापस मंदिर ले जाया जाता है। वहीं विसर्जन के लिए सभी नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाते हैं। बप्पा का उत्सव मनाने के साथ-साथ सबसे खूबसूरत रचना यानी धरती मां का ख्याल रखना भी जरूरी है। इस पूरे उत्सव की सबसे खास बात यही है कि हर साल बप्पा परिवार को एक-दूसरे के और करीब ले आते हैं। गणेश चतुर्थी हमारे लिए सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों को और मजबूत करने का मौका भी है।” वर्धन पुरी दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से खास पहचान बनाई थी। उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। साल 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनके किरदार का डायलॉग और अंदाज इतना मशहूर हुआ कि ‘मोगैम्बो’ हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में शामिल हो गया। अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। हालांकि, उनका काम आज भी दर्शकों के बीच जिंदा है।
‘मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेना हमारे लिए बेइज्जती होती’, ऋचा घोष के पिता ने किया भारतीय टीम के फैसले का समर्थन

नई दिल्ली। भारतीय टीम ने रविवार को फाइनल में श्रीलंका को हराकर विमेंस एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, पुरुष टीम की तरह भारतीय महिला टीम ने भी एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। भारतीय टीम के इस फैसले का ऋचा घोष के पिता मानबेंद्र घोष ने भी समर्थन किया है। मानबेंद्र घोष ने ‘आईएएनएस’ के साथ बातचीत करते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई ट्रॉफी का बहिष्कार कर रहा है। ट्रॉफी तो हमेशा हमारी ही है।ऐसी फोर्स से जुड़े होने के कारण बदनाम हुए व्यक्ति से ट्रॉफी लेना, जिन्होंने हमें कई तरह से नुकसान पहुंचाया है, जिनमें से एक पहलगाम की घटना भी है। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि इससे हमारे जख्म भर सकते हैं। ऐसे इंसान से ट्रॉफी लेना हमारे लिए बेइज्जती होती। मुझे लगता है कि भारतीय टीम का फैसला एकदम सही था।” भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज के पिता ने टीम के प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “फाइनल जीतना ही सबसे बड़ी बात होती है जिसकी हम उम्मीद कर सकते हैं। इसी वजह से जब लड़कियों ने फाइनल जीता, तो हम बहुत खुश और उत्साहित थे। नहीं, यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है। उनमें से ज्यादातर, बल्कि सभी ने अच्छा खेला। जिस खिलाड़ी को भी मौका मिला, उसने कोशिश की और अपनी भूमिका निभाई। हम बस यही तो चाहते हैं।” श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का प्रदर्शन दमदार रहा। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 183 रन स्कोबोर्ड पर लगाए। टीम की ओर से शेफाली वर्मा ने 39 गेंदों में 68 रनों की दमदार पारी खेली, जबकि स्मृति मंधाना ने 59 रनों का योगदान दिया। बल्लेबाजों के बाद दीप्ति शर्मा और श्री चरणी की स्पिन जोड़ी ने मिलकर श्रीलंका की पूरी टीम को सिर्फ 111 रनों पर ऑलआउट किया। दीप्ति ने 3 और चरणी ने 4 विकेट चटकाए। भारतीय टीम ने रिकॉर्ड 8वीं बार एशिया कप के खिताब पर कब्जा जमाया।