‘स्वयंभू’ में संयुक्ता बनीं ‘भूमि’, मेकर्स ने उनके बर्थडे पर शेयर किया खतरनाक स्टंट का बीटीएस वीडियो

चेन्नई। साउथ एक्टर निखिल सिद्धार्थ की मच अवेटेड पैन इंडिया फिल्म ‘स्वयंभू’ काफी समय से चर्चा में है। फिल्म की कहानी से लेकर इसके बड़े एक्शन सीक्वेंस तक, हर चीज को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इस कड़ी में मेकर्स ने एक्ट्रेस संयुक्ता के जन्मदिन पर एक खास बीटीएस वीडियो शेयर किया है, जिसमें उनकी फिल्म में निभाई गई भूमिका की पहली झलक देखने को मिली। फिल्म में संयुक्ता ‘भूमि’ नामक किरदार निभा रही हैं। इस किरदार को दमदार बनाने के लिए एक्ट्रेस ने एक्टिंग के साथ-साथ मुश्किल एक्शन सीक्वेंस और स्टंट के लिए कड़ी ट्रेनिंग ली। डायरेक्टर भरत कृष्णमाचारी की इस पीरियड फिल्म में संयुक्ता दो फीमेल लीड्स में से एक हैं। संयुक्ता के जन्मदिन पर प्रोडक्शन हाउस पिक्सल स्टूडियोज ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके साथ बीटीएस वीडियो जारी किया, जिसमें संयुक्ता को एक्शन की तैयारी करते और मुश्किल स्टंट की ट्रेनिंग लेते देखा जा सकता है। मेकर्स ने लिखा, ”लगातार ट्रेनिंग से लेकर निडर ‘भूमि’ बनने तक संयुक्ता ने अपना साहस, ताकत और जज्बा फिल्म की इस भव्य दुनिया में उतारा है। फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान जल्द ही होगा।” फिल्म के डायरेक्टर भरत कृष्णमाचारी ने पहले आईएएनएस से खास बातचीत में एक सीन के बारे में बात करते हुए कहा था, ”संयुक्ता बहुत बहादुर हैं। उन्होंने एक जोखिम भरा स्टंट खुद किया। इस शॉट में उन्हें नीचे बह रही नदी के ऊपर सिर्फ एक हार्नेस की मदद से पहाड़ पर चढ़ना था। हमने इसे रियल लोकेशन पर शूट किया। यह खास सीन आंध्र प्रदेश के मरदमल्ली में शूट हुआ, जिस ढलान पर उन्हें चढ़ना था, वह लगभग सीधी थी, इसलिए मुश्किल और भी ज्यादा थी।” डायरेक्टर ने आगे बताया, ”शूटिंग वाली जगह का इलाका काफी मुश्किल था। ऐसे में अगर संयुक्ता को किसी तरह की परेशानी होती, तो क्रू के लिए तुरंत उनकी मदद के लिए पहुंचना भी आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ सीन किया। इस श्रेय स्टंट कोरियोग्राफर जोशुआ मास्टर और उनकी टीम को जाता है। उन्होंने इस पूरे सीक्वेंस की सावधानी से प्लानिंग की और इसे सफलतापूर्वक शूट किया।” मेकर्स ने पिछले साल नवंबर में फिल्म की शूटिंग पूरी होने की जानकारी दी थी। करीब दो साल तक चले इस सफर में टीम ने 170 दिनों तक फिल्म की शूटिंग की। अब फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन और रिलीज से जुड़ी तैयारियां चल रही हैं। फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान जल्द किए जाने की उम्मीद है।

ईरानी राष्ट्रपति ने भारत के ल‍िए भरी उड़ान, ‘ब्रिक्स’ को बताया एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने वाला मंच

नई द‍िल्‍ली। भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स श‍िखर सम्‍मेलन 2026 में शाम‍िल होने के ल‍िए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने शुक्रवार को नई द‍िल्‍ली के ल‍िए उड़ान भरी। यात्रा पर रवाना होने से पहले पेजेश्‍क‍ियन ने कहा क‍ि ‘ब्रिक्स’ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। भारत स्‍थ‍ित ईरानी दूतावास ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन की भारत यात्रा की जानकारी साझा की। पोस्‍ट में ल‍िखा, ”इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राष्ट्रपति डॉ. पेजेश्‍क‍ियन ‘ब्रिक्स समिट 2026’ में शामिल होने के लिए भारत रवाना हुए।” ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यात्रा पर रवाना होने से पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने कहा है कि ‘ब्रिक्स’, जिसमें अब 21 सदस्य शामिल हैं, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने कहा कि ब्रिक्स के पास एकतरफावाद का मुकाबला करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ाने की बड़ी क्षमता है। पेजेश्‍क‍ियन ने कहा क‍ि ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य एकतरफावाद का मुकाबला करना है। कोशिश यह है कि देश अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय एकजुटता, टिकाऊ विकास, मजबूती और नवाचार पर आधारित है। उन्होंने कहा क‍ि हमारी कोशिश है कि देश डॉलर पर निर्भर हुए बिना आर्थिक और क्षेत्रीय विकास कर सकें तथा एकतरफावाद और बड़ी शक्तियों की अत्यधिक मांगों का सामना कर सकें। समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, इस दौरे के दौरान पेजेश्‍क‍ियन ब्रिक्स नेताओं की मुख्य बैठक, ब्रिक्स आर्थिक फोरम और वैश्विक शासन में सभी की भागीदारी तथा बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित बैठक में शामिल होंगे और वहां संबोधन भी देंगे। इसके अलावा, उनकी भारत के प्रधानमंत्री, मलेशिया के प्रधानमंत्री, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और सम्मेलन में शामिल अन्य नेताओं एवं अधिकारियों के साथ भी मुलाकात होने की संभावना है। समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, रवाना होने से पहले पेजेश्‍क‍ियन ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ब्रिक्स के कुल 21 सदस्य हैं, जिनमें 11 पूर्ण सदस्य और 10 नए सदस्य शामिल हैं, जिन्हें “ब्रिक्स प्लस” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की 45 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है और ये देश दुनिया के लगभग 35 प्रतिशत भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही इनके पास विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी क्षमता और संसाधन मौजूद हैं।

ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा और जयशंकर की बैठक, द्विपक्षीय संबंधों और भू-राजनीतिक स्थिति पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील संबंधों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (यूएन), जी20 और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) जैसे मंचों पर आपसी सहयोग पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक राजनीतिक स्थिति और संवाद तथा कूटनीति को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स 2026 की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया। एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर लिखा, “ब्रिक्स इंडिया 2026 के आज नई दिल्ली में शुरू होने के अवसर पर ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कृषि तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विषय शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र, जी20 और आईएमओ सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी बात हुई। साथ ही मौजूदा वैश्विक हालात और संवाद व कूटनीति को बढ़ावा देने में ब्रिक्स 2026 के महत्व पर विचारों का आदान-प्रदान किया।” माउरो विएरा गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। वे 12-13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। उनके स्वागत में विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर लिखा, “18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा का हार्दिक स्वागत है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से मजबूत दोस्ती रही है और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता भी मजबूत है।” ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों, साझेदार देशों और विशेष आमंत्रित देशों के नेता हिस्सा लेंगे। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता एक साथ आएंगे। ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स के सहयोगी देश हैं: बेलारूस, क्यूबा, ​​बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम। इससे पहले फरवरी में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भारत के राजकीय दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी। पीएम मोदी और लूला के बीच हुई चर्चा में व्यापार, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, निवेश, डिजिटल तकनीक, ग्लोबल साउथ और अन्य बहुपक्षीय मुद्दों पर भारत-ब्राजील साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया था।

यूपी में दूध से गांवों की अर्थव्यवस्था को मिली धार, 72,669 महिलाएं बनीं लखपति दीदी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनता जा रहा है। प्रदेश के 42 जिलों के 7,220 गांवों में 3.94 लाख महिलाएं दुग्ध उत्पादन से जुड़ी हैं और इनके जरिए प्रतिदिन करीब 10.77 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इनमें 72,669 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इस दुग्ध कारोबार का कुल कारोबार 5,839 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 133 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार को खाद्य प्रसंस्करण विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संयुक्त बैठक में दुग्ध उत्पादन को गांवों में महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों के गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दुग्ध योजना से अधिक से अधिक महिलाओं, किसानों और युवाओं को जोड़ा जाए तथा ग्राम स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पात्र लोगों को योजना की जानकारी दी जाए। उन्होंने पंजीकरण, आवेदन और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ जरूरतमंदों को विभागीय स्तर पर पूरा सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सात जिलों के 1,440 गांवों में 95,100 सदस्य जुड़े हैं और प्रतिदिन 2.50 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से 10 जिलों के 1,770 गांवों में 55,000 सदस्य जुड़े हैं तथा प्रतिदिन 1.60 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इसी तरह सामार्थ्या मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से 10 जिलों के 1,550 गांवों में एक लाख सदस्य, बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से सात जिलों के 1,160 गांवों में 73,283 सदस्य और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से आठ जिलों के 1,900 गांवों में 71,320 सदस्य जुड़े हुए हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और एक करोड़ लखपति दीदी के संकल्प को उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन महिलाओं को नियमित आय उपलब्ध कराने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है और गांवों में रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन से जुड़ी महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की बड़ी क्षमता है। सरकार इस मॉडल का विस्तार कर अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी, गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और उत्तर प्रदेश विकसित प्रदेश के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

कर्नाटक : चुनाव आयोग से एनआरआई को एसआईआर वेरिफिकेशन के लिए एक साल समय देने की अपील

बेंगलुरु। कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार विजेता 81 वर्षीय मोहम्मद मीरान साहेब ने कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत वोटर-लिस्ट वेरिफिकेशन का सामना कर रहे प्रवासी भारतीय (एनआरई) को एक साल की मोहलत दें। सीईओ को लिखे पत्र में मोहम्मद मीरान साहेब ने कहा कि कई एनआरआई, खासकर उडुपी और कारवार के रहने वाले लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कम समय में भारत लौटने में मुश्किल हो सकती है। मोहम्मद मीरान ने सीईओ को लिखे पत्र में कहा, “मैं 1974 से दुबई में रह रहा हूं। मैं मूल रूप से उडुपी जिले का रहने वाला हूं और बेंगलुरु में भी मेरा घर है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। हालांकि, समुदाय का एक सीनियर सदस्य होने के नाते, कई युवा एनआरआई खासकर उडुपी और कारवार जिलों से मुझसे संपर्क कर रहे हैं और वोटर लिस्ट से अपना नाम हटवाने के बारे में सलाह और मदद मांग रहे हैं। उनमें से कुछ लोग अपने-अपने इलाको के बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के संपर्क में भी हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें 20 सितंबर से पहले भारत आने और अपनी नागरिकता व अन्य जानकारी से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज व सबूत पेश करने की सलाह दी गई है।” उन्होंने कहा, “हालांकि हम सही वोटर लिस्ट बनाए रखने और चुनाव अधिकारियों की जरूरतों को पूरा करने के महत्व को पूरी तरह समझते हैं, लेकिन एनआरआई की स्थिति पर कुछ व्यावहारिक और मानवीय नज़रिए से विचार करने की जरूरत है। कई एनआरई कई दशकों से भारत के बाहर रह रहे हैं। इस लंबे समय के दौरान, हो सकता है कि उनके पास वे पुराने दस्तावेज़ न हों या उन्हें आसानी से न मिलें जिनकी मांग अब अधिकारी कर रहे हैं। कई मामलों में उनके रिकॉर्ड और दस्तावेज भारत और उनके रहने वाले देश के बीच बिखरे हुए हैं, जिससे तुरंत नियमों का पालन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे लोगों से बहुत कम समय में भारत आने के लिए कहना कई व्यावहारिक मुश्किलें पैदा करता है।” मोहम्मद मीरान ने कहा, “कई लोग भारत में गर्मियों की छुट्टियों के बाद हाल ही में अपने रहने वाले देशों में लौटे हैं। कम समय में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने में काफी खर्च आता है। कई एनआरई अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं और उनके बच्चे स्कूल जाते हैं, जिससे तुरंत यात्रा करना खास तौर पर मुश्किल हो जाता है। मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर अनिश्चितता और अतिरिक्त चिंताएं पैदा करती है। ऐसे में एनआरआई को एसाआईआर के लिए एक वर्ष का समय दिया जाए।

तनाव और अनिद्रा से हैं परेशान; रोज 10 मिनट करें शवासन, मिलेगा गहरा सुकून

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का प्रेशर और घंटों मोबाइल-लैपटॉप में व्यस्त रहने से शरीर और मन दोनों ही थक जाता है। ऐसे में योग एक अद्भुत और असरदार आसन है ‘शवासन’। यह सिर्फ शरीर की सारी थकान को दूर कर, नई ऊर्जा भरने का सबसे अच्छा साधन है। यह एक विश्राम की मुद्रा है, जिसमें शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दिया जाता है। ‘शव’ यानी मृत शरीर के समान लेटना। देखने में यह सबसे आसान मुद्रा लगती है, लेकिन असल में यह सबसे कठिन आसनों में से एक माना जाता है क्योंकि इस आसन को करने के दौरान शरीर को पूरी तरह ढ़ीला छोड़कर मन को शांत करना आसान नहीं है। शवासन सिर्फ आराम करने का तरीका नहीं है बल्कि यह शरीर की सारी थकान को दूर कर, नई ऊर्जा भरने का सबसे अच्छा साधन है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने शवासन के लाभ के बारे में बताया है। उनके अनुसार, यह आसन तनाव और चिंता को करने में मदद करता है। नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है और अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। साथ ही, यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। शवासन मस्तिष्क को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है। इसके नियमित अभ्यास से मांसपेशियों में तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। यह योग का सबसे सरल लेकिन प्रभावी आसन माना जाता है, जो तनाव, चिंता और थकान को कम करता है। यह शरीर की कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र को गहरी विश्रांति देकर नई ऊर्जा प्रदान करता है। शवासन का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है। शवासन भले ही सरल आसन है लेकिन, एक्सपर्ट इसके अभ्यास में भी सावधानियां बरतने की भी सलाह देते हैं। शवासन के दौरान नींद में न जाएं, क्योंकि इसका उद्देश्य सचेतन विश्राम है। गर्भवती महिलाएं या कमर दर्द से पीड़ित लोग इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

यूएस ओपन: गॉफ को हराकर रायबाकिना फाइनल में, सबालेंका से खिताबी मुकाबला

न्यूयॉर्क। कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना ने यूएस ओपन 2026 के महिला एकल फाइनल में जगह बना ली है। रायबाकिना ने अमेरिकी कोको गॉफ को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। वह पहली बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची हैं। आर्थर ऐश स्टेडियम में खेले गए एक जबरदस्त और रोमांचक मुकाबले में एक सेट से पिछड़ने के बाद एलेना रायबाकिना ने जोरदार वापसी करते हुए कोको गॉफ को 3-6, 6-4, 6-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। गॉफ ने अच्छी शुरुआत की और राइबाकिना पर शुरू में ही दबाव बना दिया, पहला सेट 6-3 से जीत लिया। दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी रायबाकिना ने जब पहला सेट गंवाया, उस समय ऐसा लग रहा था कि वह एक बार फिर से यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचने का मौका चूक जाएंगी। लेकिन 27 साल की खिलाड़ी ने अपने खेल का स्तर उठाते हुए जोरदार वापसी की और अगले दो मुश्किल सेटों में अपना धैर्य बनाए रखा और जीत हासिल की। दूसरा सेट करीबी रहा, लेकिन राइबाकिना को वह ब्रेक थ्रू मिल गया जिसकी उन्हें जरूरत थी। उन्होंने इसे 6-4 से जीतकर मैच के निर्णायक सेट में पहुंचा दिया। रायबाकिना आखिरी सेट में जीत के करीब पहुंच गईं, लेकिन फिनिश आसान नहीं था। जब राइबाकिना मैच के लिए सर्व कर रही थीं, तब गॉफ ने ब्रेक बैक किया, लेकिन दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी ने तुरंत जवाब दिया और मुकाबला अपने नाम कर लिया। मैच के बाद रायबाकिना ने कहा, “यह सिर्फ एक ब्रेक था और जाहिर है, घबराहट होती है। भले ही कभी-कभी उनकी (गॉफ) पहली सर्व अच्छी न हो, लेकिन उनकी दूसरी सर्व इतनी भारी होती है कि रैली को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। तीसरा सेट कूल था। मैं उनकी सर्व पर थोड़ी लकी रही। कुछ डीप रिटर्न, उनकी एक गलती और यह जल्दी ही मेरे पक्ष में चला गया।” यूएस ओपन 2026 का महिला एकल का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और जोरदार होने वाला है। फाइनल में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी रायबाकिना का मुकाबला दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी एरिना सबालेंका से होगा। रायबाकिना पहली बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची हैं और अपना पहला खिताब जीतने की कोशिश करेंगी। सबालेंका का लगातार यह चौथा फाइनल है। पिछला दो (2024, 2025) यूएस ओपन खिताब अपने नाम कर चुकीं सबालेंका लगातार तीसरा खिताब जीतने से एक जीत दूर हैं। साल की शुरुआत में ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने के वाली एलेना के पास अब न्यूयॉर्क में अपना पहला यूएस ओपन खिताब जीतने का मौका है।

डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने मुंबई एयरपोर्ट पर 3 करोड़ का सोना जब्त किया, चार लोग गिरफ्तार

मुंबई। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की ओर से बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का सोने का बुरादा जब्त किया है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि कीमती धातुओं की तस्करी के खिलाफ जारी अभियान के तहत दो कर्मचारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डीआरआई ने 5.5 करोड़ रुपये कीमत की 3.5 किलोग्राम सोने की धूल जब्त की है। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एयरपोर्ट के दो कर्मचारी और दो ट्रांजिट यात्री शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर मुंबई एयरपोर्ट के जरिए काम करने वाले सोने की तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे। पिछले महीने इसी तरह के एक ऑपरेशन में, डीआरआई ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक ट्रेन यात्री से तीन करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का सोना जब्त किया था। भारत-बांग्लादेश सीमा से तस्करी करके लाए गए सोने को ट्रेन से आगे ले जाए जाने की सूचना मिलने पर, डीआरआई नागपुर की टीम ने नागपुर रेलवे स्टेशन पर एक ऑपरेशन चलाया और एक यात्री को हिरासत में लिया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यात्री को 2.165 किलोग्राम सोने के साथ गिरफ्तार किया गया। जब्त किए गए सोने की अनुमानित कीमत 3.09 करोड़ रुपये बताई गई है। मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, सोना भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में तस्करी करके लाया गया था। बाद में डीआरआई अधिकारियों को पता चला कि सोना 12102 ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे एक व्यक्ति द्वारा अगली जगह तक ले जाया जाना था। इस जानकारी के आधार पर, डीआरआई नागपुर के अधिकारियों ने नागपुर रेलवे स्टेशन पर जाल बिछाया। स्टेशन पर पहुंचने पर यात्री की तलाशी ली गई, उसके पास से छिपाकर रखा गया सोना मिला। अधिकारियों ने आरोपी यात्री से सोने की 16 छड़ें जब्त कीं। डीआरआई ने हाल ही में देश भर में अलग-अलग जगहों पर छह बड़े ऑपरेशन किए, जिनमें दो तेंदुए की खाल, 180 जिंदा इंडियन स्टार कछुए, 12 जिंदा टोके गेको (एक प्रकार की छिपकली), लगभग 24 किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क और 500 ग्राम बाघ की हड्डियां जब्त की गईं। इन छह ऑपरेशनों में कम से कम 13 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। डीआरआई अधिकारियों ने ओडिशा के कोरापुट जिले के जयपुर में एक व्यक्ति को रोका और उसके पास से तेंदुए की एक खाल बरामद की। तेंदुए की खाल और पकड़े गए व्यक्ति को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए राज्य वन विभाग, कोरापुट को सौंप दिया गया।

तेजपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने केंद्र सरकार से दखल देने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की

गुवाहाटी। तेजपुर यूनिवर्सिटी के कामकाज की वैधानिक जांच के नतीजों को सार्वजनिक करने में कथित देरी को लेकर छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से दखल देने की मांग की गई है। इस मामले के पारदर्शिता और तय समय में समाधान होने के लिए छात्रों ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से अपील की है कि वे उनकी बात शिक्षा मंत्रालय के सेक्रेटरी और उच्च शिक्षा विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी तक पहुंचाएं। यह मामला तेजपुर यूनिवर्सिटी एक्ट, 1993 की धारा 9 के तहत गठित एक कानूनी जांच से जुड़ा है। इसमें पूर्व वाइस-चांसलर प्रो. शंभू नाथ सिंह के कार्यकाल से जुड़ी चिंताएं भी शामिल हैं, जिन्हें छात्रों ने ‘फरार’ बताया है। ज्ञापन के अनुसार, जांच समिति का गठन 31 दिसंबर, 2025 को किया गया था और उसे 31 मार्च 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। छात्रों का कहना है कि समिति ने अपनी कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन उसके निष्कर्षों और उसके आधार पर लिए गए फैसलों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिनमें छात्रों का कल्याण, फंड की कमी, लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अनिश्चितता और 2025 के ग्रेजुएट होने वाले बैच के दीक्षांत समारोह में देरी शामिल है। छात्रों की ओर से सवाल उठाया है कि क्या इन मुद्दों को सुलझाने में इतनी देरी उन लोगों के खिलाफ बदले की कार्रवाई है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। छात्रों ने जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक करने, पूर्व वाइस-चांसलर के खिलाफ की गई कार्रवाई पर स्पष्टता, गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने, रुके हुए फंड को जारी करने और देरी से हो रहे दीक्षांत समारोह के समाधान की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से लिखित जवाब भी मांगा है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सार्थक बातचीत नहीं हुई, तो वे अपना विरोध और तेज कर सकते हैं, जिसमें यूनिवर्सिटी का कामकाज पूरी तरह ठप करना भी शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे विभिन्न फैक्ट-फाइंडिंग और जांच समितियों के सामने पेश किए गए दस्तावेजों और सबूतों को सार्वजनिक कर सकते हैं। ज्ञापन में दिसंबर 2025 में गुवाहाटी में हुए एक नागरिक सम्मेलन का भी जिक्र है, जहां लोगों ने शिक्षाविदों, आरटीआई कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार रक्षकों, यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड फैकल्टी और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों को मिलाकर एक स्वतंत्र सार्वजनिक जांच समिति बनाने की संभावना पर चर्चा की थी। छात्रों ने कहा कि उनकी मांगों का मकसद यूनिवर्सिटी प्रशासन में पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और भरोसा बहाल करना है। यह कानूनी जांच मुख्य रूप से तेजपुर यूनिवर्सिटी में लंबे समय से चल रहे संकट और तत्कालीन वाइस-चांसलर प्रो. शंभू नाथ सिंह के खिलाफ लगे आरोपों की वजह से शुरू हुई थी। इन आरोपों में कथित वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां, प्रशासनिक कामकाज का ठप पड़ना, एकेडमिक चिंताएं और उनका लंबे समय तक कैंपस से बाहर रहना शामिल थे। सितंबर 2025 से छात्रों और फैकल्टी का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था, जिसके बाद केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा। शिक्षा मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2025 को तीन सदस्यों वाली एक जांच कमेटी बनाई और प्रो. शंभू नाथ सिंह को छुट्टी पर जाने और जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदारियों से खुद को अलग रखने का निर्देश दिया। मणिपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एन. लोकेन्द्र सिंह की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में नागालैंड यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. जगदीश कुमार पटनायक और यूजीसी सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी सदस्य थे। कमेटी को यूनिवर्सिटी में “मौजूदा हालात से जुड़े सभी मामलों” की जांच करने का काम सौंपा गया था, जिसमें प्रो. शंभू नाथ सिंह के खिलाफ लगे आरोप भी शामिल थे। यह कदम अक्टूबर 2025 में असम के गवर्नर (जो यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं) द्वारा पहले कराई गई एक तथ्यात्मक जांच (फैक्ट-फाइंडिंग एक्सरसाइज) के बाद उठाया गया था।

नोएडा : जीबीयू छात्र को पांच लाख का नोटिस देने के मामले में रिपोर्ट तैयार करने वाले एसआई निलंबित

नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस भेजे जाने के मामले में अब पुलिस विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। छात्र के खिलाफ कार्रवाई की आधार रिपोर्ट तैयार करने वाले ईकोटेक-1 थाने के सब इंस्पेक्टर शिवा पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। मामले में अन्य पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एडीसीपी स्तर पर की गई शुरुआती जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है और विभागीय जांच आगे जारी है। दरअसल, जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी को चार सितंबर को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से पांच लाख रुपये के निजी मुचलके से संबंधित नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उनसे शांति बनाए रखने के लिए छह महीने की अवधि के लिए पांच लाख रुपये का निजी बांड भरने और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं के तहत शुरू की गई प्रक्रिया के आधार पर हुई थी। पुलिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में अक्षत त्रिपाठी पर आरोप लगाया गया था कि वह विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। इसके साथ ही उन पर सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैलाने का आरोप भी लगाया गया था। पुलिस रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि उनकी गतिविधियों के कारण विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह रिपोर्ट ईकोटेक-1 थाने में तैनात एसआई शिवा पांडेय ने तैयार की थी, जिसे थाना प्रभारी के माध्यम से आगे भेजा गया था। हालांकि, अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था और जिस समय उनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की गई, उस दौरान वह विश्वविद्यालय में मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह काफी समय से विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अक्षत ने यह भी कहा कि जुलाई में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंटर्नशिप कर रहे थे। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पांच लाख रुपये के नोटिस को लेकर सवाल उठने लगे और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अदालत में इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। रिपोर्टों के अनुसार, शीर्ष अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्पष्ट निर्देश मौजूद थे, तो संबंधित अधिकारी की ओर से नोटिस कैसे जारी किया गया। विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने अक्षत को जारी पांच लाख रुपये के मुचलके वाला नोटिस वापस ले लिया। पुलिस की ओर से बताया गया कि मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और नोटिस निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच शुरू की गई। इस मामले में गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी मेधा रूपम की ओर से छात्र के खिलाफ धारा 130 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। कार्रवाई की प्रक्रिया में पुलिस की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से नोटिस जारी हुआ था। अब एसआई शिवा पांडेय के निलंबन के बाद मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और तेज हो गई है। अधिकारियों की भूमिका, रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और नोटिस जारी होने से पहले तथ्यों के सत्यापन जैसे बिंदुओं की जांच की जा रही है। पुलिस विभाग का कहना है कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।