ISIS हमले की साज़िश के आरोप में अफ़गान महिला को अमेरिका से निकाला गया

वॉशिंगटन। जस्टिस डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को बताया कि एक अफ़गान महिला को देश से निकाल दिया गया है। उसने 2024 के अमेरिकी चुनावों के दौरान ISIS से प्रेरित होकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की अपने परिवार की योजना का समर्थन किया था।जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा कि 47 वर्षीय नज़ीरा हाजी ज़ादा को अफ़गानिस्तान वापस भेज दिया गया। यह मामला ‘यूएस एलियन टेररिस्ट रिमूवल कोर्ट’ में सुना गया पहला मामला था।वह पहले टेक्सास के फोर्ट वर्थ में रहती थीं और अब उन पर अमेरिका में दोबारा आने पर हमेशा के लिए रोक लगा दी गई है।विभाग ने बताया कि ज़ादा ने माना कि वह एक “विदेशी आतंकवादी” (एलियन टेररिस्ट) हैं और उन्होंने अपील करने का अपना अधिकार छोड़ दिया।कोर्ट ने 20 अगस्त को उन्हें देश से निकालने का आदेश दिया था। अफ़गानिस्तान लौटने के बाद शुक्रवार को यह आदेश सार्वजनिक किया गया।उनके बेटे अब्दुल्ला हाजी ज़ादा और दामाद नासिर अहमद तौहीदी को 7 अक्टूबर, 2024 को गिरफ़्तार किया गया था। उन्होंने FBI के एक अंडरकवर कर्मचारी से हथियार और गोला-बारूद खरीदे थे।गिरफ़्तारी के समय 17 साल के अब्दुल्ला ने बालिग के तौर पर अपना अपराध कबूल किया और उसे 15 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई। सज़ा पूरी होने के बाद उसे अफ़गानिस्तान वापस भेजने पर सहमति बनी है।28 वर्षीय तौहीदी ने 13 जून, 2025 को आतंकवाद से जुड़े दो अपराधों के लिए अपना गुनाह कबूल किया। इन अपराधों में ISIS का समर्थन करना और हथियार व गोला-बारूद हासिल करना शामिल था। उसे सज़ा सुनाया जाना बाकी है।विभाग द्वारा बताए गए कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, तौहीदी ने दो AK-47 राइफ़ल, 500 राउंड गोला-बारूद और 10 मैगज़ीन खरीदने की साज़िश रचने की बात मानी।बड़े पैमाने पर लोगों की जान लेने वाला यह हमला 5 नवंबर, 2024 को चुनाव के दिन या उसके आसपास होना था।फ़ेडरल प्रॉसिक्यूटर ने आरोप लगाया कि परिवार ने हमले के लिए पैसे जुटाने के वास्ते अपना सामान बेचना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि ज़ादा ने परिवार का घर बेचने के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए थे।परिवार ने चुनाव के दिन से कुछ समय पहले काबुल जाने के लिए वन-वे टिकट भी खरीदे थे।इन टिकटों में ज़ादा और नाबालिग बच्चे शामिल थे, लेकिन अब्दुल्ला या तौहीदी शामिल नहीं थे।अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा, “यह एक अहम मामला है, जिसके नतीजे में इस विदेशी आतंकवादी को उसके मूल देश वापस भेजा गया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून के शासन की जीत है।” FBI डायरेक्टर काश पटेल ने कहा, “अमेरिका में हमला करने की ISIS-समर्थक परिवार के सदस्यों की साज़िश का समर्थन करने वाले एक व्यक्ति को इसकी सज़ा भुगतनी पड़ी है।अमेरिकी सरकार ने 15 जुलाई को हटाने (रिमूवल) की अर्ज़ी दायर की थी।विभाग ने बताया कि अपना केस साबित करने के लिए उसने गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल किया और ज़ादा तथा उनके दो फ़ेडरल पब्लिक डिफेंडर्स को लगभग आधा टेराबाइट सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स दिए।चीफ़ जज जोन एन. एरिक्सन ने 30 जुलाई को ज़ादा की पहली कोर्ट पेशी की अध्यक्षता की और बाद में हटाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।

9/11 की श्रद्धांजलि सभा में ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार न हासिल करने देने का संकल्प लिया

वॉशिंगटन।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकल्प लिया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। उन्होंने 11 सितंबर के हमलों के 25 साल पूरे होने पर उन हमलों में मारे गए लोगों को याद किया और वादा किया कि अमेरिका उन पीड़ितों को कभी नहीं भूलेगा।ट्रंप ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।उन्होंने विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों, सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वाले कर्मियों (फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स) और उन परिवारों को श्रद्धांजलि दी जिनके अपने लोग इन हमलों में मारे गए थे।उन्होंने कहा, “हमें मजबूत और समझदार बनना होगा।पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और “इस लड़ाई को खत्म करेगा”।उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेनाएं यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही हैं कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।पेंटागन और अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77 में मारे गए 184 लोगों के नाम पढ़कर सुनाए गए।पूल रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद गंभीर संगीत, एक पल का मौन और प्रार्थना हुई।ट्रंप ने कहा, “उस दिन हम सभी न्यूयॉर्कवासी थे।”कोई भी 9/11 जैसे दिन के लिए कभी तैयार नहीं हो सकता।उन्होंने न्यूयॉर्क के फायरफाइटर टिमी स्टैकपोल को सम्मानित किया, जो गंभीर रूप से जलने के बाद काम पर लौटे थे और फिर हमलों के दौरान बचाव कार्य करते हुए मारे गए।ट्रंप ने समारोह में उनकी पत्नी तारा और परिवार के सदस्यों का सम्मान किया।उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने सैन्य सेवा, अग्निशमन और अपने परिवार का पालन-पोषण करके अपने पिता की मिसाल को आगे बढ़ाया है।पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने माना कि जिम्मेदार लोगों ने हमलों को रोकने के लिए समय रहते खतरे को नहीं पहचाना था।उन्होंने कहा, “हमने वही किया जो हमें पता था, लेकिन असल में, वह काफी नहीं था।राइस ने कहा कि पीड़ितों के परिवारों के दर्द और देश द्वारा झेले गए सदमे के लिए उन्हें हमेशा “गहरा व्यक्तिगत पछतावा” रहेगा।उन्होंने व्हाइट हाउस के बंकर में जल्दबाजी में ले जाए जाने और पेंटागन में धुएं से भरे गड्ढे की टेलीविजन तस्वीरें देखने की घटना को याद किया।उन्होंने बचाव कर्मियों का भी जिक्र किया जो बिना किसी आराम के 24 घंटे से अधिक समय तक काम कर रहे थे।जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने उन सैनिकों और नागरिकों को याद किया जो अपने साथियों को बचाने के लिए धुएं और आग के बीच गए थे। उन्होंने यूनाइटेड एयरलाइंस की फ़्लाइट 93 के यात्रियों और क्रू का सम्मान किया, जिन्होंने ऐसे अजनबियों को बचाने के लिए कदम उठाए जिनसे वे कभी नहीं मिल पाते।केन ने कहा, “उस दिन हमसे जो कुछ भी छीना गया, हम उसे वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन हम यह पक्का वादा कर सकते हैं और उसे निभा सकते हैं कि हम इसे कभी नहीं भूलेंगे।11 सितंबर, 2001 के हमलों में 2,977 लोग मारे गए थे।हाईजैकर्स ने दो यात्री विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से और तीसरे विमान को पेंटागन से टकरा दिया। चौथा विमान यात्रियों और क्रू के विरोध के बाद पेंसिल्वेनिया में क्रैश हो गया।इन हमलों के बाद NATO ने पहली बार अपने सामूहिक बचाव के नियम, आर्टिकल 5 को लागू किया। इस नियम के तहत, किसी एक सदस्य पर हुए सशस्त्र हमले को सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है।

BRICS समिट: NDMC के वाइस चेयरमैन कुलजीत सिंह चहल कमांड सेंटर से सर्विस पर नज़र रख रहे हैं

नई दिल्ली। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) के वाइस चेयरमैन कुलजीत सिंह चहल ने BRICS समिट 2026 की तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का दौरा किया।अधिकारी ने एक बयान में कहा कि काउंसिल की ‘तीसरी आंख’ के तौर पर काम करने वाला यह कमांड सेंटर ट्रैफिक, सफाई, ड्रेनेज, सौंदरीकरण और दूसरी व्यवस्थाओं पर लगातार नज़र रखता है, ताकि किसी भी संभावित समस्या की समय रहते पहचान की जा सके और तुरंत कार्रवाई की जा सके।चहल ने कहा कि NDMC, BRICS 2026 के दौरान नई दिल्ली को साफ, सुंदर, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।NDMC का ICCC 2020 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 65 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था।ICCC में 18 स्क्रीन के ज़रिए अलग-अलग नागरिक सेवाओं की निगरानी की जाती है और यहां 50 समर्पित कर्मचारी 24×7 काम करते हैं।NDMC इलाके में लगभग 16,252 स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें ICCC से जुड़ी हुई हैं।सेंटर में उनकी स्थिति, खराब लाइटों की जानकारी और उनके चालू/बंद होने या डिम होने पर भी नज़र रखी जाती है।ICCC में GPS के ज़रिए 918 स्मार्ट बिन गाड़ियों, 16 कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन वेस्ट गाड़ियों और नौ मैकेनिकल रोड स्वीपर की लाइव ट्रैकिंग भी की जाती है।सड़क की निगरानी के लिए, ICCC अलग-अलग एजेंसियों के CCTV कैमरों पर निर्भर करता है।NDMC इलाके में 333 कैमरे, हनुमान मंदिर इलाके में 25, दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए 276 और PWD के 214 कैमरे हैं।CCTV के ज़रिए जल-जमाव की स्थिति पर भी नज़र रखता है और जल-जमाव वाले संवेदनशील इलाकों की पहचान करके उनका प्रबंधन करता है।इससे पहले, NDMC ने BRICS समिट के लिए सेंट्रल दिल्ली के इलाकों को संवारा था, जिसके तहत उसने अपने ग्रीन स्पेस के सौंदरीकरण और सुधार के लिए एक योजना लागू की थी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, NDMC ने नई दिल्ली को वर्ल्ड-क्लास राजधानी के तौर पर दिखाने और BRICS के प्रतिनिधियों व अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को शानदार नज़ारा दिखाने की तैयारियों के तहत 17 बड़े गोल-चक्करों, 11 होटलों और 10 प्रमुख NDMC इमारतों को सजावटी रोशनी से रोशन किया है।बयान में कहा गया है कि इस लाइटिंग का मकसद खास जगहों को एक अलग और शानदार लुक देना है, साथ ही समिट की भव्यता और अंतरराष्ट्रीय महत्व को भी दिखाना है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांतो ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे

नई दिल्ली। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर राज्य मंत्री (MoS) सतीश चंद्र दुबे ने उनका स्वागत किया।विदेश मंत्रालय (MEA) ने X पर कहा, “नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो का स्वागत है। हवाई अड्डे पर राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उनका स्वागत किया। हम बेहतर सहयोग, विकास और समृद्धि के अपने साझा विज़न को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिहासाक फुवांगकेटकेव भी ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली पहुंचे।MEA ने X पर कहा, “नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट में भाग लेने के लिए थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिहासाक फुवांगकेटकेव का गर्मजोशी से स्वागत है। भारत और थाईलैंड के बीच पुराने संबंधों पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। यह यात्रा इस बहुआयामी साझेदारी को और गहरा और आगे बढ़ाएगी।इससे पहले, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदायिशिमिये ब्रिक्स समिट में अफ्रीकी संघ (AU) का प्रतिनिधित्व करने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने उनका स्वागत किया।MEA ने कहा, “बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदायिशिमिये का नई दिल्ली पहुंचने पर स्वागत करते हुए खुशी हो रही है, जो 18वें ब्रिक्स समिट में अफ्रीकी संघ का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। भारत और अफ्रीकी संघ ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में गहराई से जुड़े हुए हैं।2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी करेगा, जिसमें ब्रिक्स सदस्यों, सहयोगी देशों और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता एक साथ आएंगे।ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। BRICS के सहयोगी देश हैं: बेलारूस, क्यूबा, ​​बोलिविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS समिट के लिए अगले कुछ दिनों में दुनिया भर के नेता नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस हाई-लेवल मीटिंग में दुनिया के कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।PM मोदी ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “अगले कुछ दिनों में, दुनिया भर के नेता BRICS समिट के लिए इकट्ठा होंगे। मुझे भरोसा है कि इस समिट में दुनिया के कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।

स्वनाथ सम्मेलन-2026 : आफ्टर-केयर युवाओं के सशक्तीकरण पर मंथन, संरक्षण के साथ अवसर और सम्मान देने की अपील

नई दिल्ली। नई उड़ान ट्रस्ट, विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त सहयोग से ‘स्वनाथ सम्मेलन-2026: अनाथ से स्वनाथ की ओर’ का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के ईस्ट दिल्ली कैंपस, सूरजमल विहार स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित हुआ। सम्मेलन में 2200 आफ्टर-केयर युवाओं ने सहभागिता की, जबकि दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग तथा गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से जुड़े लगभग 600 से अधिक पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों सहित कुल 2800 से अधिक लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘संरक्षण से आगे शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दिशा’ पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी बच्चे का माता-पिता के संरक्षण से वंचित होना उसके जीवन की अंतिम पहचान नहीं हो सकती। बच्चों को केवल भोजन, आवास और सुरक्षा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, संस्कार, भावनात्मक सहयोग, कौशल, रोजगार, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी केवल बच्चों को संरक्षण देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा, अवसर और सही मार्गदर्शन मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिस्थितियां उनके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। उन्होंने ‘स्वनाथ’ की अवधारणा को बच्चों को सम्मान और अवसर से जोड़ने वाली सकारात्मक पहल बताया। दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि 18 वर्ष की आयु किसी बच्चे के संरक्षण का अंत नहीं, बल्कि उसके नए जीवन की शुरुआत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आफ्टर-केयर युवाओं को बैंकिंग, वित्तीय साक्षरता, रोजगार, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, दस्तावेज प्रबंधन, जीवन कौशल और मेंटरशिप की जानकारी देना जरूरी है। बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक एवं भावनात्मक वेलनेस को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा 18 वर्ष की आयु के बाद स्वयं को अकेला महसूस न करे, इसके लिए सरकार, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाओं और समाज को मिलकर दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार करनी होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत हरतालकर ने कहा कि बच्चों का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से सुरक्षित नहीं हो सकता। समाज के सक्षम वर्ग को भी आगे आकर बच्चों की शिक्षा, संस्कार, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता में योगदान देना होगा। उन्होंने बच्चों के प्रति संवेदनशील सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने कहा कि शिक्षा बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उच्च शिक्षा संस्थानों को ऐसे युवाओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की सामाजिक जिम्मेदारी केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह ने अपने संबोधन में बाल अधिकारों, बाल संरक्षण तथा जरूरतमंद बच्चों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, भावनात्मक सहयोग और अपने व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर मिलना उसका अधिकार है। सचिव रश्मि सिंह ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल बच्चों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग देकर आत्मनिर्भर एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना होना चाहिए। इसके लिए सरकारी विभागों के साथ-साथ बाल देखभाल संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। रश्मि सिंह ने विशेष रूप से आफ्टर-केयर व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बाल देखभाल संस्थानों से बाहर आने के बाद बच्चों के सामने शिक्षा, रोजगार, आवास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास जैसी अनेक चुनौतियां होती हैं। ऐसे समय में उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय एक मजबूत सहयोगात्मक तंत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। रश्मि सिंह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए योजनाओं और सेवाओं को केवल सामान्य व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकता और परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए लागू किया जाना चाहिए। विभागीय अधिकारियों, फील्ड कार्यकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर संवाद और समन्वय से ऐसे बच्चों की पहचान और उन्हें उचित सेवाओं से जोड़ने का कार्य और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। सचिव रश्मि सिंह ने समाज से भी अपील की कि अनाथ एवं वंचित बच्चों को केवल सहानुभूति का पात्र न मानकर उन्हें सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा शिक्षा और कौशल के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ा होता है, तभी बाल संरक्षण की वास्तविक सफलता सुनिश्चित होती है। उन्होंने बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार, समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से ही ऐसा मजबूत तंत्र विकसित किया जा सकता है जिसमें कोई भी बच्चा संरक्षण, शिक्षा, अवसर और सम्मान से वंचित न रहे।

बिहार के भागलपुर में दो जगह तटबंध टूटे, कोसी के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता

पटना। बिहार के भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। कोसी नदी के तेज दबाव और भारी बारिश के बीच दो अलग-अलग जगहों पर तटबंध टूट गई है। नौगछिया के रंगरा चौक ब्लॉक के बनिया गांव में पुरानी रेलवे लाइन के तटबंध का करीब 15 मीटर हिस्सा कोसी के बाढ़ के पानी के दबाव में ढह गया। टूटे हुए हिस्से से पानी तेजी से आसपास के इलाकों की ओर बह रहा है, जिससे साधोपुर, मसुदनपुर, बैसी, भवानीपुर और बनिया के लोगों में डर बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन और लोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि बाढ़ का पानी आसपास के इलाकों पर दबाव डाल रहा है। दूसरी घटना नौगछिया के गोपालपुर में हुई, जहां ब्रह्मोत्तर तटबंध में लगभग 10 मीटर का कटाव हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार देर रात आंधी और बारिश के बाद यह हिस्सा टूट गया। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मिलकर स्थिति को काबू में करने और आगे नुकसान रोकने के लिए काम तेज कर दिया है। इस तटबंध को लेकर चिंता पहले से ही थी, क्योंकि चार दिन पहले यहां रिसाव देखा गया था। 10 मीटर हिस्से के ढहने के बाद अब डर है कि बड़ा कटाव होने पर गोपालपुर की बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। लगातार बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ा है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में 27,954 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि जो परिवार पिछले पांच दिनों से बाढ़ के कारण फंसे हुए हैं, उन्हें 7,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह मदद लंबे समय से विस्थापन झेल रहे परिवारों को तत्काल सहारा देने के लिए है। बाढ़ ने शिक्षा व्यवस्था को भी बिगाड़ दिया है। कोसी क्षेत्र के करीब 5,000 स्कूलों में पानी भर गया है, जिससे हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर स्कूल की इमारतों को राहत और बचाव कार्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पढ़ाई और ज्यादा बाधित हो गई है। सुपौल में कोसी नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है। शुक्रवार सुबह 6 बजे कोसी बराज से करीब 1.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि बराह क्षेत्र से 1.07 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर स्थिर होने के बावजूद अधिकारी नदी के जलस्तर और दबाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भागलपुर में ताजा तटबंध टूटने और बिहार के बड़े हिस्से में अभी भी बाढ़ की स्थिति बनी होने से प्रशासन और स्थानीय लोग आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका को लेकर अलर्ट पर हैं।

मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई : मोहन यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य में नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल पिछले दिनों सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक तरफ इस कांड से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए दूसरी तरफ गिरफ्तारियां का दौर जारी है, वही इस कारोबार से जुड़े लोगों के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला है। मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि सागर की घटना और कानून-व्यवस्था को लेकर हमने प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने गुरुवार को घटना से जुड़े लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करते हुए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शराब कांड के मुख्य आरोपी का शॉर्ट एनकाउंटर किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशाखोरी के खिलाफ भी अभियान चलाया जा रहा है और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद सागर पहुंचे थे और उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की थी। अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना था। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद किया था। उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश और न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। इस मामले में आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है और प्रशासनिक अधिकारियों को हटाया भी गया है।

डूसू चुनाव : एबीवीपी के यश डबास अध्यक्ष और इशू मौर्य उपाध्यक्ष पद पर लड़ेंगे चुनाव

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष पद का उम्मीदवार यश डबास को बनाया है। इशू मौर्य को उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है। सचिव पद पर विद्यार्थी परिषद की तरफ से रिया छाबड़ी चुनाव मैदान में हैं। वहीं संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह चुनाव लड़ेंगे। छात्र संगठन ने शुक्रवार को इन उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डूसू) के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा शुक्रवार को की, लेकिन नामांकन प्रक्रिया इससे एक दिन पहले ही पूरी कर ली गई थी। इस वर्ष अभाविप की ओर से आलोक अत्री, इशू मौर्य, लक्ष्य राज सिंह, नितिन तंवर, रिया छावड़ी, तान्या मावी व यश डबास ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। विद्यार्थी परिषद का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच के पश्चात इन संभावित प्रत्याशियों में से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं संयुक्त सचिव पदों के लिए अंतिम प्रत्याशियों का चयन किया गया है। चुनाव तैयारियों के मद्देनजर अभाविप द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच पीजी-टू-पीजी और क्लास-टू-क्लास अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को समझा जा रहा है। विद्यार्थी परिषद का कहना है कि सत्य निकेतन की घटना के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षित आवास व्यवस्था के मुद्दे को उन्होंने प्रमुखता से उठाया है। पीजी सर्वेक्षण के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों की समस्याओं एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी जुटाई जा रही है। छात्र संगठन की मांग है कि विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित एवं सुलभ छात्रावास उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही नए छात्रावासों का निर्माण तेज किया जाए व पीजी और किराये के भवनों में सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन हो। अभाविप का कहना है कि चुनाव प्रचार को व्यापक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए कार्यकर्ता प्रत्येक कॉलेज, पीजी एवं कक्षा में विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं। विद्यार्थियों से प्राप्त सुझावों और उनकी अपेक्षाओं को आधार बनाकर आगामी दिनों में अभाविप का घोषणापत्र भी तैयार किया जाएगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह भी कहना है कि डूसू चुनाव को लेकर अभाविप के कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ विद्यार्थियों के बीच हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब यह संवाद अभियान और व्यापक होगा। छात्र संगठन का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के इस चुनाव में भी वे विद्यार्थियों की आवाज को केंद्र में रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों से मिल रहे सुझावों को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। विद्यार्थी परिषद के मुताबिक इन्हीं के आधार पर उनकी आगामी प्राथमिकताएं तय होंगी।

‘महिलाएं स्वभाव से ही मल्टीटास्कर होती हैं’, प्रीति जिंटा ने खोला पेशेवर और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस का राज

मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने एक्टिंग के साथ-साथ अपनी जिंदगी के अलग-अलग किरदारों को भी बखूबी निभाया है। उन्होंने शादी और मां बनने के बाद फिल्मों से दूरी बनाई, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ के साथ-साथ बिजनेस पर भी ध्यान दिया। अब लंबे समय बाद फिल्मों में वापसी कर चुकीं प्रीति ने अपनी जिंदगी के इस सफर और मां होने के साथ प्रोफेशनल जिम्मेदारियां निभाने को लेकर आईएएनएस से बात की। उन्होंने कहा कि करियर और परिवार को एक साथ संभालना आसान नहीं है, लेकिन सही सपोर्ट सिस्टम और सुविधाएं हों तो यह काम काफी हद तक आसान हो जाता है। आईएएनएस से बातचीत में ‘सोल्जर’ एक्ट्रेस ने कहा कि महिलाएं स्वभाव से ही मल्टीटास्कर होती हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं के लिए घर, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां संभालना कोई नई बात नहीं है। प्रीति ने अपनी मां का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही उनकी मां नौकरी नहीं करती थीं, लेकिन घर और परिवार की देखभाल करना अपने आप में किसी फुल टाइम जॉब से कम नहीं था। आईएएनएस से बात करते हुए प्रीति ने कहा, ”महिलाएं स्वभाव से ही मल्टीटास्कर होती हैं। भले ही मेरी मां नौकरी नहीं करती थीं, लेकिन उनका काम मेरे पिता, तीन बच्चों, घर और न जाने कितनी चीजों की देखभाल करना था। अब महिलाएं सुपर वुमन बन गई हैं, क्योंकि बहुत सी महिलाएं काम करती हैं और घर आने के बाद भी बच्चों की देखभाल करती हैं।” एक्ट्रेस ने कहा, ”काम और मदरहुड को एक साथ संभालना चुनौती भरा जरूर है। मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं, क्योंकि मेरे साथ ऐसे लोगों का सपोर्ट है, जिनकी मदद से मैं अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल जिम्मेदारियों को मैनेज कर पाती हूं। अगर मुझे मदद नहीं मिलती, तो मेरे लिए अपने काम के लिए बाहर आना भी मुश्किल होता।” उन्होंने आगे कहा, ”अगर आप जिंदगी में अलग-अलग चीजें चाहते हैं, तो आपको अलग-अलग समय पर चीजों को प्राथमिकता देनी पड़ती है। जाहिर तौर पर यह आसान नहीं है, लेकिन अगर आपके पास साधन हैं तो यह इतना मुश्किल भी नहीं है।” प्रीति ने कहा, ”जो महिलाएं बिना किसी मदद के नौकरी के साथ घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालती हैं, उनके लिए मेरे दिल से बेहद सम्मान है। हर महिला की परिस्थितियां अलग होती हैं और जिन महिलाओं के पास मदद के ज्यादा साधन नहीं हैं, उनके लिए यह सफर और भी चुनौतीपूर्ण होता है। मैं इस बात के लिए भगवान की शुक्रगुजार हूं कि मेरे पास अपनी जिंदगी के बारे में कुछ विकल्प चुनने की आजादी है।

‘पीएम फसल बीमा योजना लागू करो…’ तेलंगाना विधानसभा के बाहर भाजपा का प्रदर्शन, पुलिस से नोकझोंक

हैदराबाद। तेलंगाना विधानसभा के बाहर शुक्रवार को उस समय तनाव फैल गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने ट्रैक्टर रैली निकाली और अपना ट्रैक्टर सीधे परिसर के पास रोक दिया। राज्य सरकार के खिलाफ बीजेपी नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बीच तेलंगाना विधानसभा के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों और बीजेपी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, क्योंकि पुलिस ने इलाके को खाली कराने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया। बीजेपी विधायक क्वार्टर से विधानसभा तक निकाली गई इस ट्रैक्टर रैली का नेतृत्व भाजपा विधायक दल के डिप्टी लीडर और आदिलाबाद के विधायक पायल शंकर ने किया। बीजेपी विधायक पायल शंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पूरे देश में लागू की जा रही है लेकिन तेलंगाना के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर दबाव बना रही है लेकिन सरकार अभी तक अपनी नींद से नहीं जागी है। इसलिए, आज कम से कम सरकार को अपनी नींद से जागना चाहिए। भाजपा विधायक राकेश रेड्डी ने भी किसानों के लिए तेलंगाना में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने की मांग की और कहा कि जब तक यह योजना लागू नहीं हो जाती, पार्टी अपना आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि तेलंगाना सरकार यहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करे और तेलंगाना के किसानों की सुरक्षा करे। भाजपा के राज्य प्रवक्ता अशोक मुस्तापुरे ने कहा, “आज, हमारे डिप्टी फ्लोर लीडर पायल शंकर के नेतृत्व में, हम तेलंगाना राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने की मुख्य मांग के साथ विधानसभा पहुंचे। भारत में हर जगह फसल बीमा योजनाएं लागू की जा रही हैं, लेकिन केवल तेलंगाना इससे वंचित है। यह हमारी मुख्य मांग है, और तेलंगाना में भी फसल बीमा योजना लागू की जानी चाहिए। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है, जबकि देश के अन्य सभी राज्यों में यह केंद्रीय योजना किसानों को फसल नुकसान से सुरक्षा प्रदान कर रही है।