पंजाब के पूर्व मंत्री चुन्नी लाल भगत के निधन पर नेताओं ने दुख जताया, शाम 5 बजे होगा अंतिम संस्कार

जालंधर। पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री चुन्नी लाल भगत का गुरुवार को निधन हो गया है। उनके निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने दुख व्यक्त किया। पंजाब सरकार के मंत्री और चुन्नीलाल भगत के बेटे मोहिंदर भगत ने दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “बहुत दुखद खबर, मेरे पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत अब हमारे बीच नहीं रहे हम उनके निधन से बहुत दुखी हैं। उनका जाना हमारे लिए एक ऐसी क्षति है जो कभी पूरी नहीं हो सकती। उनका अंतिम संस्कार 10 सितंबर को शाम 5:00 बजे है।” पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “पंजाब के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता चुन्नी लाल भगत के निधन से गहरा दुख हुआ है। पंजाब के लिए उनकी लंबी जनसेवा और योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके बेटे मोहिंदर भगत और शोक-संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। गुरु साहिब दिवंगत आत्मा को अनंत शांति प्रदान करें।” आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आम आदमी पार्टी के साथी एवं पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के पिता चुन्नी लाल भगत के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और मोहिंदर भगत सहित पूरे परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।” कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “पंजाब की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत के निधन की दुखद खबर से मुझे गहरा दुख हुआ है। उन्होंने अपने जीवनकाल में पंजाब के लोगों की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जाना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पंजाब की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है। दुख की इस घड़ी में, मैं उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।

ड्रग तस्करों के जहाज पर कार्रवाई से पहले होती है कानूनी समीक्षा, तस्‍करी के रास्‍ते बंद करना जरूरी : मार्को रुबियो

वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े जहाजों पर कार्रवाई करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर ऐसे अभियान की पहले कानूनी समीक्षा की जाती है और क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों के तहत ही कार्रवाई की जाती है। बुधवार को इक्वाडोर की राजधानी क्विटो स्थित अमेरिकी दूतावास में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि कार्रवाई का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि जहाज किस देश से जुड़ा है, वह कहां मौजूद है और उससे किस तरह का खतरा है। उन्होंने बताया कि हाल के कई अभियान साझेदार देशों के क्षेत्रीय जलक्षेत्रों में संयुक्त रूप से चलाए गए हैं। उन्होंने कहा क‍ि यह जहाज पर निर्भर करता है, उससे पैदा होने वाले खतरे पर निर्भर करता है और इस बात पर भी कि वह कहां स्थित है। अमेरिका जब किसी साझेदार देश के समुद्री क्षेत्र में काम करता है, तो उसे उस देश के कानूनों और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। उन्होंने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन तस्करी मार्गों को बाधित किया जा रहा है। इन रास्तों को बंद किया जा रहा है।” रुबियो के अनुसार, हर लक्ष्य की कानूनी समीक्षा युद्ध विभाग में की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभियान के संबंध में फैसला अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाता है। रुबियो ने कहा कि ये संयुक्त अभियान उन एकतरफा कार्रवाइयों से अलग हैं जो पिछले साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में की गई थीं। उनके मुताबिक, संयुक्त अभियानों में अमेरिका और उसके साझेदार देशों के बीच प्रक्रिया और नियमों पर सहमति होती है। जब एक पत्रकार ने दावा किया कि गैलापागोस द्वीपों के पास सीआईए के एक गुप्त कार्यक्रम के तहत तीन जहाजों को नष्ट किया गया था, तो रुबियो ने उस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाली नौकाओं के खिलाफ अपना अभियान कभी छिपाया नहीं है। उन्होंने कहा कि अब यह प्रयास क्षेत्र के देशों के सहयोग के साथ और व्यापक हो गया है। उन्होंने कहा, “हम यह काम एक साल से अधिक समय से कर रहे हैं। अब अंतर सिर्फ इतना है कि हम इसे क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर, उनके समुद्री क्षेत्रों में, उनके सहयोग से कर रहे हैं।” जब उनसे मछुआरों को होने वाले खतरे के बारे में पूछा गया, तो रुबियो ने कहा कि इन अभियानों का निशाना मादक पदार्थों के तस्कर, तस्करी में इस्तेमाल होने वाली नौकाएं और अवैध मछली पकड़ने वाली गतिविधियां हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य मछुआरों को निशाना बनाना नहीं है। हमारा लक्ष्य मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना है।

गणेशोत्सव से पहले पेन में बढ़ा कारोबार, 70 लाख मूर्तियां बिकीं, विदेशों में भी भारी मांग

रायगढ़। गणेशोत्सव को लेकर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के पेन शहर में इस साल रिकॉर्ड कारोबार हुआ है। इस साल पेन में अब तक 70 लाख से ज्यादा गणेश मूर्तियां बिकी हैं, जिनमें से 15 से 20 लाख मूर्तियां विदेशों में भेजी गई हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने से कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद बाजार में मांग में कोई कमी नहीं देखी गई। पेन को गणपति मूर्तियों का गढ़ माना जाता है। यहां के कुम्हारों द्वारा बनाई गई मूर्तियां न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे विदेशों में भी भेजी जाती हैं। एक मूर्ति विक्रेता ने आईएएनएस को बताया, “यहां बनी मूर्तियां देश भर में भेजी जाती हैं और अमेरिका, दुबई और वेस्टइंडीज जैसी जगहों पर भी निर्यात की जाती हैं। निर्यात का काम जनवरी में शुरू होकर जून तक चलता है, जिसके बाद स्थानीय मांग पर ध्यान दिया जाता है।” विक्रेता के अनुसार, पेन में गणेश मूर्ति बनाने का व्यवसाय सैकड़ों साल पुराना है। यहां करीब 500 से ज्यादा कारखाने हैं जहां हजारों कारीगर साल भर मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। इस साल खास बात यह रही कि कपड़े से बनी गणेश मूर्तियां लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं। डाइमंट वर्क वाली मुर्तियों की भी काफी मांग है। महिला कारीगर द्वारा ही कपड़े और स्टोन का काम किया जाता है। जैसे-जैसे गणेश चतुर्थी नजदीक आ रही है, मूर्तियों की मांग बढ़ती ही जा रही है। एक अन्य विक्रेता ने कहा कि अब मूर्तियों की मांग इतना ज्यादा बढ़ गई है कि हमें उसे पूरा भी नहीं कर पा रहे हैं। हमारे पास जितनी मुर्तियां तैयार की गई थी उसमें से 90 प्रतिशत पहले ही बिक चुकी है और अब 10 प्रतिशत ही बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि विदेशों में हमारी कपड़े और डायमंड वाली मुर्तियों की ही अधिक मांग है। वो लोग उसके लिए अच्छी-खासी कीमत भी देने को तैयार रहते हैं। इसके अलावा, तमिल नाडू, केरल, कर्नाटक जैसे जिलों में भी हमारी गणेश की मुर्तियों की काफी मांग है। महाराष्ट्र के नंदुरबार में गणेश जी की एक लाख से ज्यादा मूर्तियां तैयार हैं। यहां गणेश जी की मूर्तियों की लगभग 22 से 24 दुकानें हैं। मूर्ति खरीदने आए एक व्यक्ति ने बताया कि यहां काफी बढ़ी मूर्तियां बनती हैं इसलिए यहां से ही हम गणेश जी की मूर्ति लेकर जाते हैं। वहीं, गुजरात के साबरकांठा के कुकड़िया गांव की ग्रामीण महिलाएं प्राकृतिक मिट्टी और रंगों का इस्तेमाल करके इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियां बना रही हैं, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।

सीबीआई को मिली बड़ी सफलता, 13 साल से फरार आरोपी हरनेक सिंह का अमेरिका से कराया प्रत्यर्पण

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से सफलतापूर्वक भारत वापस लाने में कामयाबी हासिल की है। वह 2013 से जांच और मुकदमे से बच रहा था। सीबीआई ने गुरुवार को जानकारी दी कि आरोपी हरनेक सिंह के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर जारी थे। उसे अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने पर सीबीआई अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने बताया कि उसे जल्द ही हरियाणा के पंचकूला में स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई ने 2016 में आईपीसी के तहत साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया था। जांच से पता चला कि 2013 के दौरान, सिंगापुर में रहने वाले या काम करने वाले भारतीय नागरिकों से ठगों ने फर्जी फोन कॉल के जरिए संपर्क किया था। ये आरोपी सिंगापुर इमिग्रेशन अधिकारियों के तौर पर बात करते थे। सीबीआई के अनुसार, आरोपियों की तरफ से पीड़ित लोगों को गलत जानकारी दी गई थी। आरोपियों ने उनसे कहा था कि उन्होंने एयरपोर्ट पर अपने डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी भरी है। उन पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है और उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है। इसके बाद आरोपियों की ओर से लोगों को वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में तय प्राप्तकर्ताओं को कथित सेटलमेंट फीस या जुर्माना भरने के लिए कहा गया। जांच में यह बात सामने आई कि धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम हरनेक सिंह की ओर से चलाए जा रहे मनी-ट्रांसफर आउटलेट के जरिए मिली थी। इस काम में उसके साथ सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन भी शामिल थे। आरोपी हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से भाग गया और बाद में गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका चला गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक फरार रहा। जब हरनेक सिंह फरार चल रहा था, तब सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई उक्त अदालत में पूरी हुई और दोनों को 26 मई 2025 को दोषी ठहराया गया। हालांकि, समन और वारंट के बावजूद हरनेक सिंह ट्रायल कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ। नतीजतन, पंचकूला में सीबीआई के स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके बाद सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए इस मामले को आगे बढ़ाया, जिसके नतीजे में आरोपी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ और उसके पासपोर्ट के लिए लुक-आउट सर्कुलर भी जारी किया गया था।

राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा ने 7 और बागी नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी से निकाला, कुल संख्या 48 हुई

जयपुर। राजस्थान निकाय चुनावों में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा ने बड़ी कार्रवाई की है। भाजपा की ओर से 7 और बागी प्रत्याशियों को पार्टी से निकाल दिया गया है। इन नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटा दिया गया है। भाजपा की ओर से ताजा कार्रवाई में अजमेर नगर निगम के पांच बागी और जैतारण व मुंडवा नगर पालिकाओं के एक-एक बागी नेता शामिल हैं। इससे पहले भाजपा ने 7 सितंबर को 41 नेताओं को पार्टी से निकाला था, जिससे अब तक निकाले गए नेताओं की कुल संख्या 48 हो गई है। भाजपा के प्रदेश महासचिव श्रवण सिंह बगड़ी की ओर से निष्कासन का आदेश जारी करते हुए कहा गया कि ये नेता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। पार्टी ने इस कदम को अनुशासनहीनता करार दिया और कहा कि यह कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देशों पर की गई है। अजमेर नगर निगम से अरुण शर्मा (वार्ड 38), नीतू मिश्रा (वार्ड 41), सीमा गोस्वामी (वार्ड 52), रूबी जैन (वार्ड 74), और धर्मेंद्र सिंह चौहान ‘पंचम’ (वार्ड 75) को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। निष्कासित किए गए कई नेताओं ने पहले पार्टी या चुने हुए पदों पर काम किया है। सीमा गोस्वामी अजमेर शहर महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष हैं, जबकि अरुण शर्मा पूर्व मंडल अध्यक्ष हैं। जैतारण नगरपालिका के वार्ड 17 से चुनाव लड़ रहे पूर्व पार्षद राकेश सोलंकी को भी पार्टी से निकाल दिया गया है। भाजपा ने किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण मुंडेल के खिलाफ भी कार्रवाई की है; वे नागौर जिले की मुंडवा नगरपालिका के वार्ड 8 से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा का कहना है कि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ना, बागी उम्मीदवार का समर्थन करना या पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम करना संगठन-विरोधी गतिविधि और घोर अनुशासनहीनता है। इस ताजा कार्रवाई से पहले, भाजपा ने 41 पदाधिकारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को छह साल के लिए अपनी प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। पिछली सूची में सबसे ज्यादा निष्कासन जयपुर से हुए थे, जहां 26 नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से हटाया गया था। लगातार निष्कासन आदेश को पार्टी नेतृत्व की उस कोशिश के तहत देखा जा सकता है कि भाजपा राजस्थान निकाय चुनावों के दौरान अनुशासन बनाए रखना चाहती है।

‘तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और मां तारा के दर्शन के लिए की गई विशेष व्यवस्था’, सीएम सुवेंदु ने कौशिकी अमावस्या की दी बधाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में कौशिकी अमावस्या का पर्व मुख्य रूप से मनाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से एक वीडियो संदेश जारी किया गया, जिसको बंगाल भाजपा के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर साझा किया गया है। सीएम सुवेंदु की ओर से कहा गया, “पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से मैं मां तारा के सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। इस बार मैं पवित्र कौशिकी अमावस्या के अवसर पर तारापीठ में हुई तैयारी बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुआ।” उन्होंने आगे कहा, “प्रशासन के अधिकारियों, चुने हुए प्रतिनिधियों और सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। इस बार भक्तों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और मां तारा के निर्बाध दर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें वॉच टावर और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, ​​अतिरिक्त बस और ट्रेन की व्यवस्था, पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं, आग से सुरक्षा के उपाय और प्राथमिक चिकित्सा के लिए स्वास्थ्य शिविर शामिल हैं।” बता दें कि इस वर्ष कौशिकी अमावस्या का पर्व 10 सितंबर से 11 सितंबर के बीच है। माना जाता है कि इस दिन मां तारा देवी प्रकट हुई थीं। कौशिकी अमावस्या की रात्रि को शक्ति और तंत्र साधना के लिए खास महत्व माना जाता है। माना जाता है कि इस रात्र को मां तारा की आराधना करने से विशेष आध्यात्मिक उर्जा की प्राप्ति होती है। मंदिर के पास स्थित तारापीठ महाश्मशान में इस पूरी रात विशेष तांत्रिक और गुप्त पूजाएं की जाती हैं। मान्यता है कि इस रात मां तारा ने दुष्टों का नाश करने के लिए विशेष शक्ति रूप धारण किया था। कौशिकी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर तारापीठ मंदिर में मां तारा के दर्शन कर विशेष पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने से गर्भ गृह में प्रवेश और प्रतिमा को स्पर्श करने पर रोक लगाई जाती है। श्रद्धालुओं को दूर से ही मां तारा के दर्शन होते हैं। 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से अगले दिन 8:56 बजे तक कौशिक अमावस्या रहेगी। मां तारा और मां काली की पूजा 10 सितंबर की रात्रि को की जाएगी।

बिहार : नदियां उतर रही हैं, लेकिन बाढ़ का दर्द बरकरार, घर लौटकर फिर जिंदगी बसाने की चुनौती

पटना। बिहार में कई स्थानों पर अब नदियों का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग के कई परिवार तंबू-तिरपाल लगाकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। गांवों में पानी घुसने के बाद ये लोग घर का जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह की तलाश में यहां पहुंचे हैं। अब इनके सामने सबसे बड़ा सवाल है कि पानी उतरने के बाद वे घर लौटेंगे तो वहां मिलेगा क्या और जिंदगी को फिर से कैसे शुरू करेंगे। मुंगेर के जिला मुख्यालय में पार्क और कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने कई परिवार तंबू-तिरपाल लगाकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। छोटे-छोटे तंबुओं में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक दिन-रात गुजार रहे हैं। कई परिवारों के साथ उनके मवेशी भी हैं। ग्रामीणों के लिए पशु सिर्फ जानवर नहीं बल्कि उनकी रोजी-रोटी का बड़ा सहारा हैं। इसलिए घर छोड़ने की मजबूरी के बावजूद वे अपने मवेशियों को साथ लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचे हैं। यही कुछ स्थिति पटना के मरीन ड्राइव की है। जहां बाढ़ पीड़ित अपना घर छोड़कर पहुंचे हैं। मुंगेर के जिला मुख्यालय में रह रहे ग्रामीण मुनेश्वर ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि घर में पानी घुसने के बाद जरूरी सामान लेकर यहां आना पड़ा। अभी तो किसी तरह तंबू में रह रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि पानी उतरने के बाद घर लौटेंगे तो घर की क्या हालत होगी। परिवार को फिर से बसाना आसान नहीं होगा। मरीन ड्राइव पर आसरा लिए एक ग्रामीण ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई रुक गई है और घर में रखा सामान भी बर्बाद होने की चिंता है। मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल है। पानी उतरने के बाद घर की सफाई, मरम्मत और रोजी-रोटी शुरू करने के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी। तिरपाल के नीचे रहना इन परिवारों के लिए आसान नहीं है। बारिश होने पर तंबू में पानी आने का डर रहता है। तेज हवा में तिरपाल उड़ने की चिंता बनी रहती है। रात में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी लोगों को परेशान करता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए परिस्थितियां और कठिन हैं। खाने-पीने का सामान, कपड़े और बिस्तर सुरक्षित रखना भी चुनौती बना हुआ है। इन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि हमारी असली चिंता नदी का पानी उतरने के बाद शुरू होगी। जिस घर के आंगन में बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां कीचड़ जमा है। जिस कमरे में अनाज रखा था, वहां पानी और नमी ने सामान खराब कर दिया है। कई घरों की दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। फसल बर्बाद हुई है और अब तो मवेशियों के सामने चारे की समस्या है। यानी बाढ़ ने सिर्फ घर नहीं डुबोए, बल्कि परिवारों की आर्थिक रीढ़ को भी प्रभावित किया है। पानी उतरने के बाद लोगों को घरों की सफाई और मरम्मत के साथ दोबारा रोजी-रोटी शुरू करनी होगी। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनके सामने अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने की चुनौती होगी। मजदूरों के सामने रोजगार का संकट होगा। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। बाढ़ के बाद दूषित पानी और जलजमाव से डायरिया, टाइफाइड, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि नदियों का पानी उतर जाएगा, तंबू धीरे-धीरे हट जाएंगे और लोग अपने घरों की ओर लौटेंगे। लेकिन उनके लिए बाढ़ की कहानी वहीं खत्म नहीं होगी। घर दोबारा खड़ा करना, खेतों को फिर तैयार करना, मवेशियों को बचाना और बच्चों की पढ़ाई को पटरी पर लाना- यह सब उस संघर्ष का हिस्सा होगा, जो पानी उतरने के बाद शुरू होगा। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, विभिन्न नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण राज्य के 14 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया एवं अरवल के 84 प्रखण्डों में 514 ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत लगभग 40.21 लाख जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित हुई है।

गृहयुद्ध के बीच सूडान में फैला हैजा, संयुक्त राष्ट्र ने शुरू किया टीकाकरण अभियान

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहायता साझेदारों ने कहा है कि वे सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बावजूद सूडान में हैजा (कॉलेरा) से निपटने के प्रयास जारी रखे हुए हैं और जरूरतमंद लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के सहयोग से स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को उत्तरी दारफुर राज्य के ताविला क्षेत्र में 10 दिन का हैजा टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य वहां रह रहे 95,000 विस्थापित लोगों को इस बीमारी से बचाना है। डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार, जून में घोषित किए गए सूडान के हैजा प्रकोप के कारण अब तक छह राज्यों में लगभग 2900 मामले सामने आ चुके हैं और इससे जुड़ी 247 मौतें दर्ज की गई हैं। ओसीएचए ने अपनी दैनिक रिपोर्ट में बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) और उसके सहयोगियों ने हाल ही में ताविला , अल-लैत और उम हजालीज इलाकों में 12,000 लोगों को आपातकालीन आश्रय और रोजमर्रा की जरूरी घरेलू सामग्री उपलब्ध कराई है। रिपोर्ट में आईओएम के हवाले से कहा गया है कि पिछले सप्ताह उत्तरी दारफुर में लगभग 1,300 लोग बढ़ती असुरक्षा के कारण उम बारू इलाके के गांवों से अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो गए। यह इलाका सूडान-चाड सीमा के पास स्थित है। बताया गया है कि इनमें से कई लोग सुरक्षा की तलाश में राज्य के अन्य हिस्सों और पड़ोसी देश चाड चले गए। आईओएम के अनुसार, दक्षिण दारफुर राज्य में मंगलवार को ड्रोन से किए गए तीन हमलों ने न्याला शहर के कई स्थानों को निशाना बनाया। वहीं ब्लू नाइल राज्य में सोमवार को बढ़ी असुरक्षा के कारण गीसान क्षेत्र के कई गांवों से 3,300 से अधिक लोग विस्थापित हो गए। यह इलाका सूडान-इथियोपिया सीमा के पास स्थित है। ओसीएचए ने कहा कि दक्षिण और मध्य दारफुर के कुछ हिस्सों में विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है। हाल के दिनों में वहां कई घातक घटनाएं भी सामने आई हैं। कार्यालय ने एक बार फिर सभी पक्षों से अपील की कि वे आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा मानवीय सहायता संगठनों को जरूरतमंद लोगों तक तेजी से, सुरक्षित रूप से और बिना किसी रुकावट के पहुंचने दें।

दक्षिण त्रिपुरा: योगमाया काली मंदिर में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज, बंगाल के कारीगर बना रहे मूर्तियां

दक्षिण त्रिपुरा। शारदीय नवरात्रि आने में अब एक महीने का समय बचा है। ऐसे में पूरे त्रिपुरा में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया शहर में स्थित ऐतिहासिक योगमाया काली मंदिर में भी इस बार दुर्गा पूजा को लेकर खास तैयारी की जा रही है। इस मंदिर में सब-डिविजन की सबसे पुरानी दुर्गा पूजा होती है और हर साल पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ यह त्योहार मनाया जाता है। इस साल पूजा के लिए मूर्तियां बनाने का जिम्मा पश्चिम बंगाल के नबद्वीप से आए 10 कुम्हारों की टीम को दिया गया है। इस टीम की अगुवाई सीनियर कुम्हार रंजीत पाल कर रहे हैं। रंजीत पाल ने गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि वह पश्चिम बंगाल के नबद्वीप के रहने वाले हैं और पिछले 26 सालों से ज्यादा समय से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस बार त्रिपुरा में दुर्गा पूजा के लिए विशेष तौर पर खास मूर्तियां बना रहे हैं। देवी दुर्गा की मूर्तियां पारंपरिक पुरानी शैली में बनाई जाएंगी।” उन्होंने बताया कि एक मूर्ति के लिए उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं और अभी उनकी टीम 5 मूर्तियां बनाने के काम में जुटी हुई है। कुम्हारों की यह टीम पिछले कई दिनों से दिन-रात मूर्तियों को आकार देने में लगी है। बेलोनिया शहर में स्थित योगमाया काली मंदिर, जिसे योगमाया काली बाड़ी या महामाया काली बाड़ी भी कहा जाता है, क्षेत्र के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह दक्षिण त्रिपुरा के सबसे पुराने काली मंदिरों में गिना जाता है। यहां बंगाली नववर्ष, दुर्गा पूजा और विशेष रूप से दीवाली यानी काली पूजा के अवसर पर बहुत बड़ा मेला और उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। बता दें कि वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।

शेल्टन और अल्काराज का मैच देखने के लिए देर रात तक जगा रहा: अलेक्जेंडर ज्वेरेव

न्यूयॉर्क। जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने यूएस ओपन 2026 के एकल वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। अंतिम चार में पहुंचने के बाद ज्वेरेव ने कहा है कि वह बेन शेल्टन को कार्लोस अल्काराज को हराते हुए देखने के लिए जगे रहे। एटीपी के मुताबिक, बोटिक वैन डे जैंडशुल्प पर सीधे सेटों में जीत के साथ आखिरी चार में पहुंचने के बाद ज्वेरेव ने कहा, “मैंने कल रात 3:30 बजे तक शेल्टन-अल्काराज का मैच देखा। मैं सोने नहीं गया। मैं देर तक जागा था।” शेल्टन ने आखिरकार दो बार के यूएस ओपन चैंपियन अल्काराज को 6-7(5), 6-1, 6-3, 1-6, 7-6(10-7) से हराया, और घरेलू दर्शकों के सामने एक यादगार प्रदर्शन किया। इस नतीजे से फ्रांसेस टियाफो के खिलाफ एक ऑल-अमेरिकन सेमीफाइनल तय हो गया। ज्वेरेव ने कहा, “बेन को श्रेय जाता है। उसने एक जबरदस्त मैच खेला। अब दो अमेरिकियों के बीच एक मजेदार सेमीफाइनल होने वाला है।” शेल्टन और टियाफो पहले सेमीफाइनल में मुकाबला करेंगे, वहीं ज्वेरेव फाइनल में जगह बनाने के लिए कैरेन खाचानोव का सामना करेंगे। ज्वेरेव बुधवार को वैन डे जैंडशुल्प को 6-2, 7-5, 6-1 से हराकर आखिरी चार में पहुंचे। वैन डे जैंडशुल्प के खिलाफ, ज्वेरेव ने दबाव बढ़ने पर अच्छा खेला। उन्होंने दूसरे सेट में 33-शॉट की रैली के बाद 2-3 पर एक ब्रेक पॉइंट बचाया और बाद में डच खिलाड़ी की फोरहैंड की गलती का फायदा उठाया जब उन्होंने 5-4 पर सेट पॉइंट बनाए रखा। इस जीत के साथ ही वह तीसरी बार यूएस ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचे और 29 साल के इस खिलाड़ी का शानदार सीजन जारी रहा, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में रोलैंड गैरोस में अपना पहला ग्रैंड स्लैम टाइटल जीता था। जर्मन खिलाड़ी ने 2026 में एटीपी टूर के सबसे ज्यादा मैच जीतने वाले खिलाड़ी के तौर पर भी अपनी जगह बना ली है। उनके नाम 51 जीत हैं। इस सीजन में उनकी 23 ग्रैंड स्लैम मैच जीत ने बोरिस बेकर के 1989 में बनाए गए 22 के पिछले जर्मन रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।