‘कर्नाटक की कांग्रेस सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम’, डीके शिवकुमार पर बोला भाजपा ने हमला

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार के 100 दिनों के कार्यों और कांग्रेस पार्टी के जश्न पर सवाल उठाए। भाजपा नेता अशोक ने एक बयान में कहा कि उपलब्धि कहां है? सरकार किस बात का जश्न मना रही है? मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने पूछा, “ऐसे जश्न का क्या मकसद है? आप किस उपलब्धि का जश्न मना रहे हैं? जब लोगों को दिखाने के लिए एक भी बड़ी उपलब्धि नहीं है, तो क्या यह जश्न नाकामियों को उपलब्धियों के तौर पर पेश करने के लिए है?” अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार समाज के हर वर्ग के लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम रही है। महिलाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ‘गृह लक्ष्मी योजना’ की लाभार्थियों को पैसों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है और बार-बार सरकारी दफ्तरों व बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जहां नौकरी पाने के लिए मेरिट से अधिक भ्रष्टाचार और रिश्वत अहम हो गई है। शिक्षा के मुद्दे पर अशोक ने दावा किया कि छात्रों को समय पर किताबें नहीं मिल रही हैं। कई स्कूलों में क्लासरूम की छतें टपक रही हैं और वे जर्जर हालत में हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को दिए गए घटिया क्वालिटी के जूते और मोजे एक दिन में ही खराब हो रहे हैं। सूखे की स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि फसल के नुकसान का सामना कर रहे किसानों को न तो सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त मदद मिली और न ही सरकार से कोई उचित प्रतिक्रिया। अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन सहायता कम कर दी गई है, जबकि मध्यम वर्ग जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों और टैक्स के बोझ तले दबा हुआ है। राज्य की राजधानी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं और सड़कों के किनारे कचरा पड़ा है। अशोक ने कहा, “आपने ‘ब्रांड बेंगलुरु’ की बात की थी, लेकिन असल में आपने ‘ब्रोकन बेंगलुरु’ (टूटा-फूटा बेंगलुरु) दिया है।” यह सवाल उठाते हुए कि क्या इन्हें सरकार के पहले 100 दिनों की उपलब्धियां माना जा सकता है, अशोक ने कहा कि लोग अंधेरे में जी रहे हैं, जबकि सरकार के जश्न का आयोजन स्थल जगमगा रहा है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक को विकास की रोशनी चाहिए। आपने जो दिया है, वह तो सिर्फ स्टेज की चकाचौंध है।” उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को नौकरी चाहिए थी, लेकिन उन्हें सिर्फ विज्ञापन दिए गए, किसानों को मुआवजा चाहिए था लेकिन उन्हें सिर्फ सम्मेलन दिए गए और महिलाओं को समय पर आर्थिक मदद चाहिए थी लेकिन उन्हें सिर्फ पब्लिसिटी इवेंट दिए गए। अशोक ने आगे आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए शानदार लाइटिंग और पब्लिसिटी का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा, “आप अपनी उपलब्धियां नहीं दिखा पाए, इसलिए सजावट दिखा रहे हैं। आप विकास नहीं दिखा पाए, इसलिए लाइटिंग दिखा रहे हैं। आप अच्छा शासन नहीं दिखा पाए, इसलिए फिजूलखर्ची दिखा रहे हैं।” मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता अशोक ने कहा, “कर्नाटक में रोशनी नहीं आई, लेकिन आपके स्टेज पर जरूर आ गई। लोगों की जिंदगी नहीं बदली, लेकिन आपका पब्लिसिटी कैंपेन जरूर चमक उठा।

पश्चिम बंगाल: ‘एक राज्य, एक शिक्षा’ नीति लागू करने की तैयारी, विधानसभा में पेश होगा विधेयक

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को एक दिवसीय विशेष सत्र में शिक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा। पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन एवं विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026 का उद्देश्य राज्य में “एक राज्य, एक शिक्षा” नीति को लागू करना है। राज्य मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दे दी है। सदन में पेश होने और पारित होने के बाद इसे राज्यपाल आर. एन रवि के कार्यालय में सहमति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह अधिनियम बन जाएगा। विधेयक में शामिल प्रमुख प्रस्तावों की व्याख्या करते हुए राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसमें विभिन्न राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और गैर शिक्षण कर्मचारियों के तबादलों से संबंधित दिशानिर्देश निर्दिष्ट किए जाएंगे। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “विधेयक में कोलकाता या अन्य बड़े शहरों के पुराने सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों को नए विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। यह नीति विभिन्न सरकारी विश्वविद्यालयों से जुड़े शैक्षणिक कर्मचारियों पर भी लागू होती है।” राज्य के शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रस्ताव से राज्य के शैक्षणिक जगत में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालय मूलतः स्वायत्त निकाय हैं, इसलिए राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के शिक्षक, अधिकारी या शिक्षाकर्मी सीधे तौर पर राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं होते हैं। अतः स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या यह तबादला आपसी सहमति से होगा या शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों का तबादला सरकार की इच्छा पर होगा। हालांकि इन सभी बातों का स्पष्टीकरण विधेयक के विधानसभा में पेश होने और पारित होने के बाद ही मिलेगा। अधिकारी ने बताया कि विधेयक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव आलिया विश्वविद्यालय को पश्चिम बंगाल उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाना है। अब तक आलिया विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में था। आलिया विश्वविद्यालय अधिनियम पश्चिम बंगाल विधानसभा में दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में 2007 में पारित किया गया था। यह 5 अप्रैल 2008 से प्रभावी हुआ। प्रशासन ने दावा किया है कि इस विधेयक का उद्देश्य मानव संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है और इसी कारण से यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य के पुराने और पारंपरिक विश्वविद्यालयों में लंबे समय के अनुभव वाले शिक्षक और प्रशासनिक कर्मचारी हैं जिनका उपयोग किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “नए विश्वविद्यालयों में उस अनुभव का उपयोग करना आवश्यक है। यदि कुशल प्रोफेसर और कर्मचारी नए संस्थानों में जाते हैं, तो वहां शिक्षण, अनुसंधान और प्रशासनिक ढांचे की गुणवत्ता में तेजी से सुधार होगा। उच्च शिक्षा के समग्र संतुलन को बनाए रखने के लिए यह पहल की जा रही है।

33 साल बाद भी यादगार है जैकी श्रॉफ की फिल्म ‘गर्दिश’, एक्टर ने यूं मनाया जश्न

मुंबई। साल 1993 की रियलिस्टिक एक्शन ड्रामा फिल्म ‘गर्दिश’ ने रिलीज के 33 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म से जुड़ी यादों को फिर से ताजा किया। अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर फिल्म के क्लिप्स का मोंटाज वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “फिल्म गर्दिश ने अपनी रिलीज के 33 साल पूरे कर लिए हैं।” अभिनेता ने अपनी इस पोस्ट में फिल्म से जुड़े कलाकारों को टैग भी किया। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी फिल्म मलयालम सुपरहिट फिल्म ‘किरीडम’ (1989) का रीमेक थी। इसमें जैकी श्रॉफ (शिव साठे), अमरीश पुरी (हवलदार पुरुषोत्तम साठे – शिव के पिता), डिंपल कपाड़िया (शांति), ऐश्वर्या (विद्या – मुख्य अभिनेत्री, जिनका यह बॉलीवुड डेब्यू था) और शम्मी कपूर ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं थी। इसमें अभिनेता मुकेश ऋषि ने खलनायक के रूप में अपनी शुरुआत की थी। यह फिल्म अपनी यथार्थवादी कहानी और मजबूत अभिनय के लिए जानी जाती है। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन (साबु सिरिल) और सर्वश्रेष्ठ एक्शन (त्यागराजन) के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे। फिल्म की कहानी शिव साठे (जैकी श्रॉफ) और उनके पिता पुरुषोत्तम साठे (अमरीश पुरी) के इर्द-गिर्द घूमती है। पुरुषोत्तम एक ईमानदार पुलिस कांस्टेबल हैं और चाहते हैं कि उनका बेटा पुलिस ऑफिसर बनकर समाज की सेवा करे लेकिन एक दिन अपने पिता को बचाने के लिए शिव को एक स्थानीय गुंडे से भिड़ना पड़ता है, जिसके बाद उसका पूरा जीवन बदल जाता है। हालात उसे अनचाहे में ही अपराध की दुनिया में धकेल देते हैं। फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार आर.डी. बर्मन (राहुल देव बर्मन) ने दिया था और गीत जावेद अख्तर ने लिखे थे। इसके गाने काफी लोकप्रिय हुए थे। बताया जाता है कि यह फिल्म साल 1993 की नौवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी और जैकी श्रॉफ की एक बड़ी सोलो हिट फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में जैकी श्रॉफ और अमरीश पुरी के अभिनय की बहुत तारीफ हुई थी। इसके गाने भी काफी लोकप्रिय हुए थे।

‘जेन-जी का जनादेश बदलेगा उत्तर प्रदेश’, सपा मुख्यालय के बाहर लगा नया पोस्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सभी पार्टियां अभी से अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गई हैं और इस बार सबका फोकस है युवा वोटरों यानी ‘जेन-जी’ पर। इस बीच गुरुवार को समाजवादी पार्टी मुख्यालय के बाहर लगाए गए एक पोस्टर ने नई चर्चा छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगाया गया है, जिस पर लिखा है – “जेन-जी का जनादेश बदलेगा उत्तर प्रदेश।” जानकारी के अनुसार, सरोजिनी नगर विधानसभा से केशव प्रसाद रावत ने यह पोस्टर लगवाया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी की नजर अब नई पीढ़ी पर है। हाल ही में उन्होंने जेन-जी तक पहुंचने के लिए कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हॉस्टल्स में दो हफ्ते के छात्र जागरूकता अभियान की बात कही है। दरअसल, बीते मंगलवार को पार्टी ऑफिस में समाजवादी छात्र सभा के लिए नई ड्रेस भी लॉन्च की गई। इस दौरान छात्रसभा के कार्यकर्ता नीली टीशर्ट, नीली जींस और लाल टोपी में नजर आए। अब यही ड्रेस समाजवादी छात्रसभा की ऑफिशल ड्रेस होगी। इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा, “नीला रंग युवाओं का रंग है, नई पीढ़ी का रंग है, बहुजन समाज का रंग है, अन्याय के खिलाफ लड़ाई का रंग है। नीला रंग बहुजन समाज के साथ आइडियॉलजी का भी है। नई पीढ़ी की नई सोच होती है।” अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी अब नई पीढ़ी के छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत दो सप्ताह के छात्र जागरूकता अभियान की शुरुआत की जाएगी, जिसमें कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में जाकर युवाओं के मुद्दों को सुना और उठाया जाएगा। गौरतलब है कि सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं बल्कि कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी उत्तर प्रदेश के युवाओं और जेन-जी वोटरों को साधने के लिए अलग-अलग अभियान चला रही हैं।

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला: केरल सरकार का सतर्क रुख, ईडी की मांग पर पहले होगा त्वरित सत्यापन

तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मांग पर सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने का फैसला किया है। इसके साथ ही एफआईआर दर्ज करने से पहले सतर्कता विभाग द्वारा त्वरित सत्यापन किए जाने की संभावना है। केरल सरकार वर्तमान में विस्तृत कानूनी चर्चाओं में लगी हुई है और अंतिम निर्णय लेने से पहले औपचारिक कानूनी राय की उम्मीद कर रही है। ईडी ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन में अपनी जांच के निष्कर्षों के आधार पर विजयन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। एजेंसी ने सहायक दस्तावेजों सहित 25 पृष्ठों की एक रिपोर्ट राज्य पुलिस प्रमुख रावड़ा ए चंद्रशेखर को सौंप दी है। सरकार की वर्तमान सोच यह है कि सतर्कता विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच से यह पता चलेगा कि ईडी की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का पर्याप्त तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित आधार है या नहीं। इसके बाद ही एफआईआर दर्ज करने पर विचार किया जाएगा। कानूनी हलकों ने बताया है कि यदि साक्ष्य से संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो एफआईआर दर्ज करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। हालांकि, सरकार इस बात को लेकर आशंकित है कि यदि स्वतंत्र प्रारंभिक सत्यापन के बिना एफआईआर दर्ज की जाती है तो इस कदम को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत ईडी द्वारा दर्ज किए गए बयानों का साक्ष्य मूल्य एक प्रमुख मुद्दा है। ऐसा माना जा रहा है कि ईडी की वर्तमान सिफारिश काफी हद तक सीएमआरएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी और ईडी मामले में आरोपी पी. सुरेश कुमार के बयान पर आधारित है। हालांकि पीएमएलए के तहत दर्ज किए गए बयान उस कानून के तहत कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में मूल्यवान होते हैं, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या किसी आरोपी का बयान स्वयं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सतर्कता मामले का आधार बन सकता है। इसलिए स्वतंत्र पुष्टिकारक साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ईडी ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में अंतरिम निपटान बोर्ड के निष्कर्षों पर भी भरोसा किया है। बोर्ड ने पाया है कि सीएमआरएल ने टी. वीना के स्वामित्व वाली एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को इस आधार पर भुगतान किया था कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की बेटी थीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड के निष्कर्षों को अभी तक कानूनी रूप से पलटा नहीं जा सका है, यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। सीएमआरएल के शीर्ष अधिकारी ससिधरन कार्था और कथित भुगतानों में शामिल अन्य लोग भी भविष्य में होने वाली किसी भी सतर्कता जांच के दायरे में आ सकते हैं। सरकार केरल उच्च न्यायालय द्वारा कांग्रेस नेता मैथ्यू कुझलनादन की उस याचिका को खारिज करने के फैसले से भी अवगत है, जिसमें उन्होंने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक लेनदेन की सतर्कता जांच की मांग की थी।

अमेरिका में बर्थराइट सिटिजनशिप पर बहस, रिपब्लिकन ने की सीमाएं लगाने की मांग

वॉशिंगटन। अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रहने वाले लोगों के यहां पैदा हुए बच्चों की नागरिकता के अधिकार एक बार फिर बहस का विषय बन गए हैं। रिपब्लिकन सांसद इन अधिकारों पर कुछ सीमाएं लगाने की वकालत कर रहे हैं जबकि डेमोक्रेट्स का कहना है कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म लेते ही नागरिकता का अधिकार मिलता है। बर्थराइट सिटिजनशिप पर हुई प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका उपसमिति की सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर कार्रवाई करने की मांग की। वहीं डेमोक्रेट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस संवैधानिक सवाल पर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। उपसमिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष चिप रॉय ने कहा कि कांग्रेस को संशोधन में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश ‘उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन’ की स्पष्ट परिभाषा तय करनी चाहिए। रॉय ने कहा, “कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह ‘उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन’ का मतलब स्पष्ट करे, जन्म के लिए अमेरिका आने की प्रवृत्ति को रोके और अमेरिकी नागरिक होने के मायने की गरिमा को बनाए रखे।” रॉय का तर्क था कि संशोधन का उद्देश्य यह नहीं था कि अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों या अस्थायी रूप से देश में आए लोगों के बच्चों को अपने आप अमेरिकी नागरिकता मिल जाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1898 के ‘वोंग किम आर्क’ मामले के फैसले पर गलत तरीके से भरोसा किया। उनके अनुसार, वह मामला ऐसे प्रवासियों के अमेरिका में जन्मे बच्चे से जुड़ा था, जो कानूनी रूप से और स्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे थे। इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट की सह-संस्थापक और नीति निदेशक रोजमेरी जेन्क्स ने समिति को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कांग्रेस को कार्रवाई करने से नहीं रोकता। उन्होंने कहा, “बारबरा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक कार्यकारी आदेश को रद्द किया था। इससे कांग्रेस की आव्रजन और नागरिकता से जुड़े मामलों पर संवैधानिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।” जेन्क्स ने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह ‘इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट’ में संशोधन कर अवैध प्रवासियों और अस्थायी निवासियों के यहां जन्मे बच्चों के लिए कुछ अपवाद तय करे। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे अस्थायी वीजा धारकों के लिए नियम बनाए जाएं जो अपने अमेरिका में जन्मे बच्चों की ओर से सरकारी सहायता या कल्याणकारी लाभ लेना चाहते हैं। उनके अनुसार, ऐसे माता-पिता को किसी अमेरिकी नागरिक या कानूनी स्थायी निवासी को नामित करना चाहिए, जो बच्चे के लिए ये लाभ प्राप्त करे। जेन्क्स ने कहा, “अमेरिकी नागरिकता एक बेहद मूल्यवान अधिकार है। हमारी सरकार को इसकी पूरी तरह रक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकता केवल उन्हीं विदेशियों को दी जाए जिन्हें हमने कानूनी रूप से अमेरिकी समाज का स्थायी हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है।” कंसास के अटॉर्नी जनरल क्रिस कोबैक ने भी कहा कि कांग्रेस के पास इस मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार अब भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यापक कार्यकारी आदेश के खिलाफ फैसला दिया था, लेकिन उसने इस विषय पर बनने वाले हर संभावित कानून को असंवैधानिक नहीं बताया है। कोबाच का कहना था कि यदि जन्म के उद्देश्य से अमेरिका आने (बर्थ टूरिज्म) से जुड़े मामलों पर कोई सीमित और विशेष कानून बनाया जाए, तो अदालत में उसका परिणाम अलग हो सकता है। डेमोक्रेट सांसदों ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। उपसमिति की वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य मैरी गे स्कैनलोन ने कहा कि अमेरिका में जन्मे वे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध प्रवासी हैं या वीजा पर रह रहे हैं, 14वें संशोधन के तहत संरक्षण प्राप्त करते हैं। स्कैनलोन ने कहा, “अवैध प्रवासियों के अमेरिकी बच्चे और वीजा धारकों के अमेरिकी बच्चे, दोनों ही ऐसे व्यक्ति हैं जिनका जन्म अमेरिका में हुआ है।” उन्होंने कहा कि जन्म के समय से ही वे अमेरिकी कानून के अधीन होते हैं और उन्हें ‘उस पारस्परिक संबंध से जुड़े अधिकारों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा का स्पष्ट संवैधानिक दावा प्राप्त है।

दक्षिण कोरिया को उसके घर में हराना मुश्किल, हम डेविस कप चुनौती के लिए तैयार: रोहित राजपाल

नई दिल्ली। भारत के डेविस कप नॉन-प्लेइंग कप्तान रोहित राजपाल का मानना ​​है कि उनकी टीम दक्षिण कोरिया के घरेलू मैदान के फायदे का सामना करने के लिए अच्छी तरह तैयार है। दोनों टीमें 18 और 19 सितंबर को सियोल में वर्ल्ड ग्रुप क्वालीफायर राउंड 2 में भिड़ेंगी। रोहित राजपाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “एक कप्तान के तौर पर मेरी उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। मैं यह भी मानता हूं कि यह बहुत मुश्किल मुकाबला होने वाला है क्योंकि कोरियन टीम कोरिया में खेल रही है और मुझे यकीन है कि मेजबान टीम होने के नाते, वे कोर्ट को बहुत धीमा बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जो हमारे पक्ष में कम और उनके पक्ष में ज्यादा है। यह होम एडवांटेज है जो होम टीम को मिलता है। कोरियन टीम को कोरिया में हराना बहुत मुश्किल माना जाता है। इसलिए, हम उसी हिसाब से तैयारी कर रहे हैं। हम वहां जल्दी पहुंच रहे हैं और हमारे लिए तैयार किए गए स्थानीय हालात के हिसाब से जितना हो सके उतना ढलने की कोशिश कर रहे हैं।” भारत ने उस टीम के मुख्य खिलाड़ियों को बरकरार रखा है जिसने फरवरी में बेंगलुरु में नीदरलैंड्स को 3-2 से हराकर 2019 में मौजूदा कॉम्पिटिशन फॉर्मेट शुरू होने के बाद पहली बार क्वालीफायर के दूसरे राउंड में जगह बनाई थी। सियोल में पांच सदस्यों वाली टीम में सुमित नागल, दक्षिणेश्वर सुरेश और मानस धमने को पहली बार टीम में शामिल किया गया है। डबल्स की जिम्मेदारी विशेषज्ञ युकी भांबरी और एन. श्रीराम बालाजी पर है, जबकि सिद्धार्थ रावत और जूनियर ग्रैंड स्लैम कैंपेनर अर्नव पापरकर रिजर्व के तौर पर शामिल हुए हैं। धमने को शामिल करने के बारे में राजपाल ने कहा कि यह भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। मानस युवा और ऊर्जावान हैं और हम यह भी करने की कोशिश कर रहे हैं कि टीम में कोई बदलाव न हो क्योंकि दुनिया की कुछ बेहतरीन टीमें बदलाव के दौर से गुजरती हैं। उन्होंने कहा, “हम यह पक्का करना चाहते हैं कि हमारे पास युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण हो ताकि बदलाव का समय, जब भी हो, हम उससे निकल जाएं और मानस, इस नजरिए से, टीम के लिए अहम हैं। वह अच्छा खेल रहे हैं। मुझे लगता है कि वहां रहने से उसे बहुत फायदा होगा। वह पहले भी स्क्वाड में रहा है। पहली बार वह टीम में आया है। वह बहुत सुधार कर रहा है। मुझे लगता है कि इस तरह के दबाव वाले हालात में खेलना उसे बहुत अच्छा अनुभव देगा।” एक डिमांडिंग प्रोफेशनल कैलेंडर के बीच खिलाड़ियों की उपलब्धता का प्रबंधन करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन राजपाल ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारतीय अपने देश को लेकर बहुत भावनात्मक माने जाते हैं। एक कप्तान के तौर पर यह मेरा काम है कि मैं यह पक्का करूं कि टीम एकजुट रहे। राजपाल ने कहा, “एक मुश्किल मैच से ठीक पहले दबाव कम करने के लिए जो भी चीजें जरूरी होती हैं, वे होती हैं। हम हर समय ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर एक साथ करते हैं, क्योंकि वे सभी दुनिया की अलग-अलग जगहों से आ रहे हैं। इसलिए, जल्दी पहुंचने का आइडिया यह भी है कि सभी एक साथ आएं और मिलकर काम करें और एक अच्छी मशीन की तरह काम करें। हम एक-दूसरे को पुश करने की कोशिश करते हैं और पिछले कुछ वर्षों में टीम बनाने के लिए बहुत मेहनत की गई है। अब इसका फायदा मिल रहा है।” भारत ने पहले भी एकल के बजाय डबल्स में अच्छा खेला है। राजपाल ने इस पर सहमति जताते हुए कहा, “भारतीयों का इतिहास अच्छा रहा है, लिएंडर (पेस), महेश (भूपति), रोहन (बोपन्ना), ये सभी लोग सच में डबल्स में खेलते हैं और अपना करियर बनाते हैं, जो सच में शानदार है। जब आप अपने सिंगल्स खत्म कर लेते हैं, तो यह आपको टूर पर बने रहने और टिके रहने के लिए कई और साल देता है। इसलिए, उन्होंने दुनिया को दिखाया कि आप सभी डबल्स विशेषज्ञ हो सकते हैं और फिर भी टूर पर अपने लिए बहुत अच्छा कर सकते हैं।” दोनों टीमें शानदार उलटफेर वाली जीत के साथ इस मुकाबले में उतर रही हैं – जहां इंडिया ने डच टीम को चौंका दिया, वहीं दक्षिण कोरिया ने वापसी करते हुए बुसान में 2016 की चैंपियन अर्जेंटीना को 3-2 से हराया। कोरिया में सफलता के लिए सही बेंचमार्क के बारे में पूछे जाने पर, राजपाल ने कहा, “बेंचमार्क तय करना मुश्किल है। मेरा मतलब है, मैंने अपने और लड़कों के लिए बहुत ऊंचे बेंचमार्क तय किए हैं। अगर आप टॉप पर पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं, तभी आप टॉप के आस-पास पहुंचते हैं। लेकिन अगर आप टॉप पर पहुंचने का लक्ष्य नहीं रखते हैं, तो आप कहीं नहीं हैं, आप जानते हैं, क्योंकि सब कुछ टारगेट पर आधारित होता है।” उन्होंने कहा, “अगर आप कोई टारगेट तय करते हैं, तो आपका शरीर और दिमाग और बाकी सब कुछ मिलकर आपको वहां या उसके करीब पहुंचाने में मदद करते हैं। कभी-कभी आप कम पड़ जाते हैं, लेकिन आप वापसी कर सकते हैं। मैं वास्तविक रहना चाहता हूं और हम एक बार में एक मैच के बारे में सोचते हैं।” भारतीय कप्तान ने कहा, “मैं लड़कों से कहता हूं कि एक बार में एक मैच के बारे में सोचें। अगले मैच के बारे में मत सोचो और यह भी मत सोचो कि उसके बाद क्या होगा क्योंकि हमें पहले उस मुश्किल को पार करना है, फिर अगले मैच के लिए तैयारी करनी है। हमें जीतना है।” ये खेल सियोल ओलंपिक पार्क टेनिस सेंटर में होंगे और इनकी बहुत अहमियत है। जीतने वाली टीम नवंबर में इटली के बोलोग्ना में खेले जाने वाले मशहूर डेविस कप फाइनल आठ में पहुंच जाएगी। 19वीं रैंक वाली भारत की पिछली भिड़ंत 16वीं रैंक वाली दक्षिण कोरिया से दस साल पहले 2016 में हुई थी। भारत, जो दोनों देशों के बीच आमने-सामने के मुकाबले में 6-5 से पीछे है, ने भी इसी तरह नाटकीय अंदाज में नीदरलैंड्स को हराकर दक्षिणेश्वर सुरेश की शानदार वापसी से इस स्टेज पर अपनी जगह पक्की की।

प्रियंका गांधी के नाम पर पर ठगी की कोशिश, कार्यालय ने जारी किया स्कैम अलर्ट

नई दिल्ली। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम और उनके आवाज का इस्तेमाल कर साइबर ठग लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर प्रियंका गांधी के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर गुरुवार को ‘स्कैम अलर्ट’ जारी किया है। कार्यालय ने बताया कि वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रियंका गांधी की एआई से बनी फर्जी फोटो और आवाज वाले वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लोगों से पैसे निवेश करने के लिए कहा जा रहा है। कार्यालय ने साफ कहा है कि ये सभी वीडियो स्कैम हैं। लोगों से अपील की गई है कि ऐसे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और न ही निवेश करें। ऐसे पोस्ट को रिपोर्ट और ब्लॉक करें। इससे पहले अगस्त महीने में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम पर भी ऐसा ही फर्जी वीडियो सामने आया था, जिसका सरकार ने खंडन किया था। उस वीडियो में दावा किया जा रहा था कि 22 हजार रुपए के शुरुआती निवेश पर हर हफ्ते साढ़े पांच लाख रुपए की कमाई होगी। यह एक निवेश योजना का प्रचार था। पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने जांच में पाया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और एआई से तैयार किया गया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया था कि वित्त मंत्री ने ऐसी किसी भी निवेश योजना या प्लेटफॉर्म का समर्थन नहीं किया है। लोगों को ऐसे जालसाजों से सावधान रहने की अपील की गई थी जो फर्जी योजनाओं का लालच देकर लोगों का पैसा हड़पने की कोशिश करते हैं। आजकल साइबर ठग लोगों का भरोसा जीतने के लिए रोज नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। बड़े नेताओं और जानी-मानी हस्तियों की एआई से आवाज और वीडियो बनाकर लोगों को भरोसे में लिया जा रहा है और लाखों-करोड़ों की ठगी की जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई वीडियो आपको बहुत ज्यादा मुनाफे का लालच दे रहा है, तो सतर्क हो जाएं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी सच्चाई की जांच जरूर करें। सरकार या किसी नेता की तरफ से ऐसी कोई योजना आती है तो उसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर देखें।

भारत की ‘नई औद्योगिक क्रांति’ में घरेलू बाजार निभाएगा अहम भूमिका, निजी क्षेत्र की बढ़ेगी हिस्सेदारी: जेफरीज

नई दिल्ली। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने कहा कि भारत की ‘नई औद्योगिक क्रांति’ में घरेलू बाजार अहम भूमिका निभाएगा। इस दौरान स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रोनिक्स,सोलर मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर में तेज ग्रोथ और सरकारी नीतिगत समर्थन से निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में घरेलू स्तर पर बड़े मौकों, प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी और सरकार के सहयोग से नए उद्योगों का विस्तार हो रहा है, साथ ही घरेलू क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। जेफरीज की रिपोर्ट खास तौर पर इन उभरते सेक्टर में ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले कुछ अहम कदमों का जिक्र किया गया है, जिसमें प्राइवेट कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोलना, डेटा सेंटरों के लिए टैक्स में छूट, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर के लिए इंसेंटिव स्कीम, लोकलाइजेशन के उपाय और सरकार द्वारा जीपीयू की खरीद जैसे उपाय शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और क्षमताएं वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने लायक हैं। भारत का लक्ष्य अपने स्पेस सेक्टर को 2030 तक 5 गुना बढ़ाकर 40-45 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का है, जिसमें स्काईरूट, पिक्सेल और अग्निकुल जैसी निजी कंपनियां कमर्शियल कामकाज की ओर बढ़ रही हैं। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में, भारत का प्रयास अब पॉलिसी से आगे बढ़कर काम को असल रूप देने की ओर बढ़ रहा है। इसमें लगभग 20 बिलियन डॉलर का निवेश, एक चिप फैब का निर्माण और कई ओएसएटी प्रोजेक्ट्स में प्रोडक्शन शुरू होना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 बिलियन डॉलर का एक और इंसेंटिव प्लान सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा। इसके अलावा, भारत की डेटा सेंटर क्षमता पांच वर्षों में 5 गुना बढ़कर 2 गीगावाट हो गई है और अगले पांच वर्षों में इसके 10 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे पावर, कूलिंग, कंस्ट्रक्शन और नेटवर्क के क्षेत्रों में 45 बिलियन डॉलर के निवेश का मौका बनेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के मामले में, भारत अब सिर्फ असेंबली से आगे बढ़कर ज्यादा घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीद है कि अगले 6 सालों में मोबाइल कंपोनेंट्स में घरेलू वैल्यू एडिशन 20 प्रतिशत से कम से बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो जाएगा। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर पीवी मैन्युफैक्चरर बन गया है, जिसकी 35 गीगावाट सेल क्षमता चालू है और 100 गीगावाट क्षमता पर काम चल रहा है। जेफरीज का अनुमान है कि 2030 तक सोलर वैल्यू चेन का 90 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर पर बनने लगेगा। किफायती मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग टैलेंट की वजह से, ग्लोबल एयरोस्पेस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई के असंतुलन का फायदा भी भारत को मिल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि बोइंग और एयरबस पहले से ही भारत से सालाना 1.4-1.6 अरब डॉलर का सामान ले रहे हैं, जबकि भारतीय कंपनियां ग्लोबल ओईएम और टियर-1 कंपनियों को सप्लाई कर रही हैं।