प्रधानमंत्री अल्बनीज की सलाह मानकर ट्रेन से चंडीगढ़ पहुंचे ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन

नई दिल्ली। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने चंडीगढ़ तक की यात्रा ट्रेन से की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज अक्सर कहते हैं कि भारत को समझने का यह सबसे अच्छा तरीका है। उच्चायुक्त ने बताया कि इस यात्रा काका उन्होंने भरपूर आनंद लिया। उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर ट्रेन से यात्रा का एक वीडियो साझा करते हुए अपने अनुभव बताए। उच्चायुक्त ने पोस्ट में लिखा, ”मेरे प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज अक्सर कहते हैं कि भारत को सही मायनों में समझने का सबसे अच्छा तरीका इसकी ट्रेनों में सफर करना है। इसलिए चंडीगढ़ पहुंचने के लिए ट्रेन से यात्रा करना बिल्कुल उपयुक्त लगा, और मैंने इस सफर का भरपूर आनंद लिया।” फिलिप ग्रीन ने बताया कि इस यात्रा के दौरान पंजाब और हरियाणा में उन अवसरों को तलाशने के लिए उत्साहित हूं जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत के रिश्तों को और मजबूत बनाया जा सके। इससे पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, व्यापार और रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर अपनी राय रख चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ कई क्षेत्रों में गहराई से जुड़ा हुआ है, लेकिन शिक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच शिक्षा और कौशल विकास आपसी साझेदारी को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उचित लागत पर उपलब्ध कराने की काबिलियत रखती है। भारत के विकास के अगले चरण को गति देने के लिए अधिक संख्या में रोजगारपरक कौशल वाले लोगों की जरूरत होगी। ऑस्ट्रेलिया की शिक्षा व्यवस्था भारतीय छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के साथ-साथ भविष्य के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने का अवसर देती है।
एसआईआर की निगरानी करता है चुनाव आयोग, हेमंत सरकार पर भाजपा का आरोप बेबुनियाद : मनोज पांडेय

रांची। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की ओर से हेमंत सोरेन सरकार पर एसआईआर के जरिए बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के आरोप पर जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर की निगरानी चुनाव आयोग करता है और इसमें केंद्र सरकार की भी भूमिका है। ऐसे में राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना समझ से परे है। मनोज पांडेय ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दावा किया कि कई जगह उनके कार्यकर्ता लोगों के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश करते पकड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के बड़े पैमाने पर नाम हटवाने की साजिश की गई। जेपीएससी और जेएसएससी में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर एफआईआर के मुद्दे को लेकर भाजपा के प्रदर्शन पर भी जेएमएम प्रवक्ता ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद सवालों के घेरे में हैं, वे दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। छात्रों के खिलाफ राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कुछ कोचिंग संचालकों पर भी भाजपा संरक्षण और फंडिंग के आरोप लगाए और कहा कि छात्रों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। छात्र निर्दोष हैं और उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर विश्वास जताया है। भाजपा सांसद संजय सेठ द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री करने की मांग पर भी मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि पहले भाजपा शासित राज्यों में यह फिल्म टैक्स फ्री हुई है या नहीं, यह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, तो इस मुद्दे पर राजनीति क्यों की जा रही है। पांडेय ने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि पहले भाजपा को अपने शासन वाले राज्यों में फिल्म को टैक्स फ्री कराने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे राज्यों में ऐसा किया जाता है तो झारखंड सरकार भी इस मांग पर विचार कर सकती है। श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पूरा गीत बजने तक खड़े रहने के सवाल पर भी मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान सभी को करना चाहिए, लेकिन हर राजनीतिक दल और व्यक्ति की अपनी विचारधारा और राय भी होती है। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के कई नेता भी कई मौकों पर पूरा वंदे मातरम नहीं गाते दिखाई दिए हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय अलग-अलग दलों की सोच और विचारों के संदर्भ में देखने की बात कही। दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना को लेकर मनोज पांडेय ने केंद्र सरकार पर शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा सरकार के 12 वर्षों में बड़े कार्यालय बनने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं बनाए गए। उन्होंने शिक्षा बजट में कथित कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब शिक्षा और छात्रों की सुविधाओं पर पर्याप्त खर्च नहीं होगा तो ऐसे हादसों और समस्याओं से कैसे निपटा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने के लिए पैसा है, लेकिन छात्रों के लिए हॉस्टल, कॉलेज, अस्पताल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दिखाई जाती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नाराज फूफा’ वाले बयान पर भी मनोज पांडेय ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ कोई एक वर्ग या व्यक्ति नाराज नहीं है, बल्कि छात्र, किसान, दलित और आदिवासी समेत समाज के कई वर्ग सरकार से नाराज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा आलोचना करने वाले हर व्यक्ति को ‘नाराज फूफा’ बताने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मनोज पांडेय ने उन्हें “झूठ का बेताज बादशाह” कहा। उन्होंने चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से 15 लाख रुपये, स्मार्ट सिटी और बुलेट ट्रेन जैसे कई वादे किए गए, लेकिन कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए। उन्होंने महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला।
जूनियर एशिया कप हॉकी: अनमोल एक्का के छह गोल की मदद से भारतीय पुरुष टीम सेमीफाइनल में पहुंची

मोकी। डिफेंडिंग चैंपियन भारत ने बुधवार को यहां अपने आखिरी पूल ए मैच में चीनी ताइपे को 15-0 से आसानी से हराकर एएचएफ जूनियर एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली। भारत की तरफ से कप्तान कप्तान अनमोल एक्का ने छह गोल किए। एक्का ने सभी गोल पेनल्टी कॉर्नर से किए। एक्का के गोलों की वजह से हीं भारत ने बिना गोल वाले शुरुआती क्वार्टर को एकतरफा मुकाबले में बदल दिया। इस जीत से भारत तीन जीत और एक ड्रॉ से 10 पॉइंट्स के साथ पूल ए में टॉप पर पहुंच गया। मैच में भारत ने गेंद पर दबदबा बनाए रखा और शुरुआती 15 मिनट में कई मौके बनाए, लेकिन चीनी ताइपे के मजबूत डिफेंस को भेद नहीं पाया। आखिरकार 17वें मिनट में सफलता मिली जब आर्यन जेस ने पहला गोल किया, और एक मिनट बाद प्रभदीप सिंह ने बढ़त दोगुनी कर दी। 22वें मिनट में गुरसेवक सिंह ने स्कोर 3-0 कर दिया, जिसके तीन मिनट बाद एक्का ने अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर गोल में बदला। अर्जुन संतोष हरगुडे ने 28वें मिनट में एक और गोल किया, और कुछ ही देर बाद एक्का ने फिर गोल किया, जिससे भारत हाफ-टाइम में 6-0 की बढ़त के साथ गया। तीसरा क्वार्टर पूरी तरह से भारत के नाम रहा। एक्का ने अपनी हैट्रिक पूरी करने के लिए दो शुरुआती पेनल्टी कॉर्नर गोल में बदले और फिर एक और गोल करके अपनी संख्या चार कर ली। अजीत यादव ने भी 35वें मिनट में गोल किया, जिसके बाद एक्का ने 45वें मिनट में फिर से गोल करके अपना स्कोर पांच कर दिया और भारत को डबल फिगर में पहुंचा दिया। आखिरी क्वार्टर में हरपाल ने 48वें मिनट में गोल किया, जिसके तीन मिनट बाद एक्का ने एक और सफल पेनल्टी कॉर्नर के साथ अपना शानदार छह गोल का आंकड़ा पूरा किया। हरपाल ने इसके तुरंत बाद अपना दूसरा गोल किया, जबकि आर्यन जेस ने मैच का अपना दूसरा गोल करके भारत को 15-0 से जीत दिलाई। भारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज में विजयी रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई है। दक्षिण कोरिया ने जापान को 3-2 से हराकर नौ पॉइंट्स के साथ ग्रुप से दूसरा सेमीफाइनल स्थान हासिल किया। जापान, इंडोनेशिया और चीनी ताइपे खिताब की दौड़ से बाहर हो गए और अब क्लासिफिकेशन मैचों में खेलेंगे।
निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे डॉ. मनसुख मांडविया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से 11 और 12 सितंबर को मुंबई में भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों (बीओसीडब्ल्यू) पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार संबंधी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाना है। बयान में कहा गया है कि सम्मेलन में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्डों के अध्यक्ष और सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। भारत में निर्माण क्षेत्र रोजगार का एक बड़ा स्रोत है और करोड़ों श्रमिकों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने के बाद यह सम्मेलन बीओसीडब्ल्यू ढांचे की समीक्षा करने और श्रमिक कल्याण बोर्डों की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन के दौरान श्रमिकों का पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच, वैधानिक जिम्मेदारियां, कल्याण कोष के उपयोग और निगरानी व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीक-आधारित सेवाओं और विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय के जरिए श्रमिकों तक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। दो दिवसीय इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों के बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों द्वारा अपनाई गई सफल पहलों और नवाचारों को साझा करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और बेहतर मॉडलों को अपनाने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्माण श्रमिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। सम्मेलन में नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान शुरू की गई तीन प्रमुख पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, जिनमें स्टेट बीओसीडब्ल्यू डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र तथा ऑनलाइन बीओसीडब्ल्यू उपकर संग्रह पोर्टल शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य रोजगार सुविधा को मजबूत करना, श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उपकर संग्रह और निगरानी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है। इसके अलावा, सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता मार्ग, कौशल विकास, रोजगार अवसर, श्रम सांख्यिकी और लेबर स्टैक जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। मंत्रालय के अनुसार, इस आयोजन का लक्ष्य केंद्र, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, क्रियान्वयन संबंधी कमियों की पहचान करना और निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याण योजनाओं तथा रोजगार अवसरों की अधिक प्रभावी और सुलभ व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
‘भगवान न करे अगर भीषण भूकंप आ जाए’, किरण बेदी ने दिल्ली की असुरक्षित इमारतों की ओर ध्यान दिलाया

नई दिल्ली। सत्य निकेतन हादसे के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने बुधवार को स्थिति पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की, जिसमें दिल्ली के रियल एस्टेट क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और कथित भ्रष्टाचार की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डाला गया। एक्स पर अपनी पोस्ट में बेदी ने कहा, “एक प्रतिक्रिया। एक खुला दृष्टिकोण। हम सभी रोजाना समस्याओं से जूझ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि दिल्ली का विस्तार हुआ है और यह लगातार बढ़ रहा है, “दुर्भाग्य से ज्यादातर भ्रष्टाचार” और अनधिकृत निर्माण के माध्यम से। उन्होंने कहा, “मैडम, दिल्ली का विस्तार हुआ है और दुर्भाग्य से यह विस्तार और भी बढ़ रहा है। अधिकतर भ्रष्टाचार और अनधिकृत निर्माणों के माध्यम से। इसका पैमाना बहुत बड़ा है।” उन्होंने शहर भर में मौजूद बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियों और इमारतों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानूनी और योजनाबद्ध रियल एस्टेट विकास के लिए सीमित संभावनाएं हैं। बेदी ने आगे कहा, “अवैध कॉलोनियों की भारी संख्या को ही देख लीजिए, अवैध इमारतों की गिनती तो छोड़ ही दीजिए।” बेदी ने आगे कहा, “दिल्ली में अचल संपत्ति के कानूनी और सुनियोजित विकास के लिए सीमित संभावनाएं रही हैं। निहित स्वार्थों ने अब तक इसकी अनुमति नहीं दी है। अगर आप किसी भी उपयोग के लिए आवास की वास्तविक आवश्यकता को पूरा करने के लिए कानूनी और सुनियोजित तरीके से निर्माण कार्य करना चाहें, तो भ्रष्ट नियामक प्रणाली का अनुभव कर लीजिए।” उनके अनुसार, कमजोर और संरचनात्मक रूप से असुरक्षित इमारतें रियल एस्टेट बाजार में विकृतियों का परिणाम हैं। उन्होंने आगे कहा, “कमजोर और संरचनात्मक रूप से असुरक्षित इमारतें रियल एस्टेट क्षेत्र में बाजार की विकृति का परिणाम हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षित आवास की कमी केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं है, जैसा कि एक अवैध पीजी आवास के ढहने के बाद उजागर हुआ है। यह आवासीय आवास सहित भवन उपयोग के अन्य क्षेत्रों में भी है। बेदी ने लगभग दो दशक पहले ललिता पार्क में हुई इमारत के ढहने की घटना को भी याद किया, जिसमें कई लोग मारे गए थे और राष्ट्रीय राजधानी में एक बड़े भूकंप के संभावित परिणामों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर आप अपनी याददाश्त को थोड़ा जोर दें, तो आपको लगभग दो दशक पहले ललिता पार्क में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने से हुई कई मौतें याद आ जाएंगी। भगवान न करे, अगर कोई बड़ी तीव्रता का भूकंप आता है, तो यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर उजागर हो जाएगी।” उन्होंने बहुचर्चित भवन सुरक्षा ऑडिट की प्रभावशीलता पर भी संदेह व्यक्त किया और कहा कि इसके परिणामस्वरूप केवल कुछ ही भवनों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि इमारतों के जिस ऑडिट की इतनी चर्चा हो रही है, उससे कुछ खास फायदा नहीं होगा, सिवाय कुछ इमारतों पर कार्रवाई के। सिर्फ जबरन वसूली की दरें बढ़ेंगी और कुछ दिनों में इस त्रासदी की यादें धुंधली पड़ने के बाद भी जबरन वसूली जारी रहेगी, क्योंकि कोई और सनसनीखेज खबर इस खबर को दबा देगी। एमसीडी के कामकाज के बारे में जितना कम कहा जाए उतना ही अच्छा है।” पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सत्ता में बैठे लोगों की मिलीभगत से रियल एस्टेट क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की भी मांग की। उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई निष्पक्ष रूप से उन राजनेताओं, कर्मचारियों (चाहे वे नगर पालिका, पुलिस, राजस्व, जल बोर्ड, बिजली कंपनियों या न्यायिक प्रणाली के हों) द्वारा अर्जित अवैध धन और संपत्तियों (बेनामी सहित) की जांच करे, जिनका अचल संपत्ति विकास से संबंध है और उन पर नियंत्रण रखने वालों, ब्लैकमेलरों और अन्य लोगों द्वारा जो अचल संपत्ति के माध्यम से अपना धन बढ़ाते हैं, तो यह काफी खुलासा करने वाला होगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े नेताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों की अवैध कमाई व (बेनामी सहित) संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। इसके साथ ही, रियल एस्टेट की आड़ में फलने-फूलने वाले ब्लैकमेलरों और अन्य बिचौलियों की काली कमाई भी उजागर होनी चाहिए।
महिला पुलिस अधिकारियों के साथ बदसलूकी करने पर बीआरएस नेताओं के खिलाफ एक और केस दर्ज

हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस ने सोमवार को तेलंगाना विधानसभा भवन के प्रवेश द्वार पर महिला पुलिस अधिकारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने के लिए सैफाबाद पुलिस स्टेशन में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेताओं के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव, तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस के डिप्टी लीडर टी. हरीश राव और पार्टी के कई अन्य विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन पर महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और धमकाने का आरोप है। महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के. पद्मावती की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। यह मामला सोमवार को गेट नंबर 3 पर हुई घटनाओं के सिलसिले में दर्ज किया गया है, जब पुलिस ने बीआरएस विधायकों को नारे लिखी काली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा में जाने से रोक दिया था। शिकायत करने वाली महिला पुलिसकर्मी ने आरोप लगाया कि बीआरएस के विधायकों और एमएलसी ने महिला पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहीं। उन्होंने महिला पुलिस अधिकारियों के सामने आधे-नंगे होकर खड़े होने के लिए अपनी टी-शर्ट भी उतार दीं। पुलिस कॉन्स्टेबल ने आरोप लगाया कि विधायक महिला पुलिसकर्मियों के सामने करीब आधे-नंगे होकर खड़े हो गए, जिससे उन्हें बहुत असहजता और शर्मिंदगी महसूस हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नेताओं ने महिला कॉन्स्टेबल को धक्का-मुक्की करके और उनकी छाती पर धक्का देकर जबरदस्ती विधानसभा में घुसने की कोशिश की। धक्का-मुक्की से एसआई त्रिवेणी और महिला कॉन्स्टेबल रश्मि यादव व सौम्या को शारीरिक और मानसिक परेशानी हुई और उन्हें इलाज के लिए ग्लेनीगल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और वे तस्वीरों, वीडियो और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। सोमवार की घटनाओं के सिलसिले में बीआरएस नेताओं के खिलाफ दर्ज यह दूसरा मामला है। इससे पहले बीआरएस नेताओं पर पुलिस के काम में बाधा डालने और उन पर हमला करने का मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने महिला कॉन्स्टेबल के साथ बदसलूकी की, कर्मचारियों को धमकाया, पुलिसकर्मियों का कॉलर पकड़ा और क्यूआरटी कर्मियों को धक्का दिया। सैफबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में पूर्व मंत्री जगदीश रेड्डी, गंगुला कमलाकर, सबिता इंद्रा रेड्डी, सुनीता लक्ष्मा रेड्डी, विधायक पाडी कौशिक रेड्डी, शम्बीपुर राजू, संजय, विजयडु, सुधीर रेड्डी और कोवा लक्ष्मी का नाम शामिल है। वहीं, मंगलवार को पुलिस ने बीआरएस के दो एमएलसी को विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया। विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) पोलेपल्ली वेंकटेशम की शिकायत पर एमएलएसी टी. मधुसूदन उर्फ मधु और एन. नवीन कुमार रेड्डी के खिलाफ सैफाबाद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। दोनों एमएलसी को नामपल्ली कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें पर्सनल बॉन्ड और जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। मंगलवार को विधान परिषद ने दोनों एमएलसी को मानसून सत्र की बाकी अवधि के लिए निलंबित कर दिया।
पलामू में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों ने लगाया दहेज हत्या का आरोप

मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर स्थित शहर थाना क्षेत्र के रेडमा चौक पर एक नवविवाहिता वैष्णवी देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव मंगलवार देर रात उसके ससुराल के कमरे में फंदे से झूलता मिला। वैष्णवी के मायके वालों का आरोप है कि ससुराल के लोगों ने उसकी हत्या कर इस आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की रहने वाली वैष्णवी की शादी करीब 10 माह पहले मेदिनीनगर निवासी सूरज गुप्ता के साथ हुई थी। मायके वालों का कहना है कि शादी के कुछ दिनों बाद ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। घटना की जानकारी बुधवार को तब सामने आई, जब ससुराल वाले वैष्णवी को गंभीर हालत में मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि मौत की पुष्टि के बाद ससुराल पक्ष के लोग शव को अस्पताल से चुपचाप ले जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन एमएमसीएच पुलिस चौकी के सतर्क जवानों ने उन्हें मौके पर ही रोक लिया। इसके बाद घटना की जानकारी मृतका के मायके वालों को दी गई। बुधवार को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के औडिमोड थाना क्षेत्र से मेदिनीनगर पहुंचे मायके पक्ष के लोगों ने ससुराल वालों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। मृतका के मामा जीतेंद्र ने बताया कि शादी के बाद से ही दहेज के लिए वैष्णवी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि मंगलवार रात करीब 9 बजे वैष्णवी ने अपनी मां से फोन पर सामान्य बातचीत की थी और किसी भी प्रकार के तनाव का जिक्र नहीं किया था। लेकिन कुछ घंटे बाद परिजनों को उसकी मौत की सूचना दे दी गई, जिससे घटना पर गहरा संदेह पैदा होता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मायके वालों के बयानों और आरोपों के आधार पर मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किया जाना अच्छी बात : संजय राउत

नागपुर। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने तीन अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में एफआईआर, कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली पर ईडी की छापेमारी और गरबा में मुस्लिम प्रवेश पर चल रहे विवाद को लेकर बात की। हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में हल्द्वानी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने पर संजय राउत ने कहा, “यह अच्छी बात है। मैंने सुना था कि यह लोग राहुल गांधी को ही आरोपी बना रहे हैं। जनता का जो दबाव बना, तो जिसने भी यह सामाजिक विघटन का काम किया है, उसके खिलाफ अगर एफआईआर दर्ज हुई है तो यह अच्छा है।” प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली के ठिकानों पर छापेमारी पर संजय राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “राम मंदिर चढ़ावा मामले के लिए कहां है ईडी? आज भी जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, जहां कांग्रेस के नेता हैं, या हमारे जैसे लोग हैं, उनके घर तक ही ईडी पहुंचती है।” बता दें कि ईडी ने बुधवार सुबह कर्नाटक के आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में यह कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक, ईडी ने बेंगलुरु, बेलगावी और गोवा में करीब 15 जगहों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। बेंगलुरु के डॉलर्स कॉलोनी स्थित जारकीहोली के निजी आवास, बेलगावी स्थित उनके घर और बेंगलुरु में सरकार द्वारा आवंटित सरकारी आवास पर भी तलाशी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, 25 से ज्यादा ईडी अधिकारियों की टीम करीब 18 गाड़ियों में बुधवार सुबह 7 बजे पहुंची और तलाशी शुरू की। इस दौरान सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवान भी मौजूद रहे। वहीं, नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने के विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने समावेशी दृष्टिकोण का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा था कि “अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति वहां आता है और उत्सव का सही तरीके से आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती। त्योहार सभी को साथ लेकर चलने के लिए होते हैं।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा, “देश के प्रधानमंत्री विदेश में जाकर वहां के इस्लामिक राज्य प्रमुख से गले मिलते हैं, उनको माय ब्रदर बोलते हैं, तो यहां भी हमारे बिरादर हैं।
राजौरी में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं फौजिया शहनाज, केंद्र सरकार की योजना से शुरू किया जिम सेंटर

राजौरी। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां फोजिया शहनाज ने केंद्र सरकार की एक योजना का लाभ उठाकर अपना फिटनेस सेंटर शुरू किया है और रोजगार का एक स्थायी जरिया बनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत लागू एक योजना से राजौरी के फतेहपुर की फोजिया को कम ब्याज दर पर आर्थिक मदद मिली और उन्होंने ‘सांझा जिम सेंटर’ की शुरुआत की। यह सेंटर अब आसपास के इलाकों की महिलाओं और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह उन्हें अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देने की सुविधा तो देता ही है, साथ ही फोजिया को अच्छी मासिक आय कमाने में भी मदद करता है। केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग का आभार जताते हुए फोजिया ने कहा कि ऐसी योजनाएं बेरोजगार महिलाओं के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं। ये उन्हें अपना कारोबार शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैंने यहां अपना काम शुरू किया है। हमने इसका नाम ‘सांझा जिम सेंटर’ रखा है। मैं केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग की बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने हमें यहां तक पहुंचाया और हमारा काम शुरू हुआ।” फोजिया शहनाज ने बताया कि यहां अभी 40 से 45 लोग जिम करने आते हैं। सुरक्षाबल के जवान भी आते हैं। उन्होंने बताया कि अभी जिम से आमदनी सही हो रही है। इस जिम सेंटर से हम योजना के अनुसार लोन के पैसे को भी दे रहे हैं और अपना खर्चा भी चला रहे हैं। स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने भी इस पहल की तारीफ की। उनका कहना है कि इस फिटनेस सेंटर की वजह से उन्हें अपने घर के पास ही सुविधाएं मिल रही हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा, “हमें पहले राजौरी जाना पड़ता था। बच्चे भी इसी तरह दूर क्षेत्र में फिटनेस सेंटर जाते थे। फतेहपुर में बच्चे और लड़कियां भी जिम करने के लिए आ रही हैं। हम बहुत शुक्रगुजार हैं कि हमें यहां नजदीक में यह सुविधा मिल रही है। छोटे-बड़े लोग यहां आते हैं और उनकी सेहत भी अच्छी रहती है। केंद्र सरकार और एनआरएलएम विभाग का भी हम धन्यवाद करते हैं।” एक स्थानीय युवक ने कहा कि यहां पहले कोई जिम सेंटर नहीं था। दूर शहर में जिम जाने में परेशानी होती थी। फतेहपुर में जब से जिम सेंटर खुला है, लोग आ रहे हैं।
‘परिणाम मायने रखता है, लेकिन मानसिकता उससे ज्यादा अहम’: फुलहम कोच अल्वारो अर्बेलोआ

नई दिल्ली। फुलहम को प्रीमियर लीग 2026-27 सीजन में अभी एक भी पॉइंट नहीं मिला है। हेड कोच अल्वारो अर्बेलोआ ने साफ कर दिया है कि खराब नतीजों से उनके खिलाड़ियों से उम्मीद का स्तर नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा कि हम क्रेवन कॉटेज में एक अटैकिंग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। स्पेन के अर्बेलोआ का मानना है कि उनकी सोच यह तय करेगी कि वे उनके कार्यकाल की मुश्किल शुरुआत को कैसे संभालते हैं। आर्बेओला ने जियोस्टार से कहा, “मेरा हमेशा से मानना है कि परिणाम मायने रखते हैं, लेकिन दृष्टिकोण सबसे ज्यादा मायने रखता है। आप हर स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, चाहे हालात कैसे भी हों, यह आपको एक टीम के तौर पर दिखाता है। आपको फाइनल व्हिसल तक लड़ते रहना होगा। इस मानसिकता से कोई समझौता नहीं हो सकता। मैं हर मैच में अपने खिलाड़ियों से यही उम्मीद करता हूं। चाहे हम जीत रहे हों, हार रहे हों, या मुश्किलों का सामना कर रहे हों, अप्रोच वही रहना चाहिए। हम पिच पर होने वाली हर चीज को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी कोशिश और अपनी मानसिकता को कर सकते हैं। यही हमें पूरे सीजन में आगे ले जाएगा।” उन्होंने कहा, “अगर हम महत्वाकांक्षी बनना चाहते हैं, तो हमें ऐसे खिलाड़ियों को साइन करना होगा जो स्क्वॉड को बेहतर बना सकें। हमने पिछले सीजन में कुछ अच्छे खिलाड़ी खो दिए थे, इसलिए हमें उन्हें बदलना पड़ा। हमने क्वालिटी प्लेयर्स को लाकर वह लक्ष्य दिखाया जो हमारे विचार और हमारे खेलने के तरीके से फिट बैठते हैं। वे जितनी जल्दी सेट हो जाएं, उतना ही अच्छा है। हमारा फोकस इस ग्रुप से बेस्ट निकलवाने पर है। यह एक मजबूत यूनिट बनाने, एक-दूसरे के मूवमेंट को समझने और यह पक्का करने के बारे में है कि हर कोई एक ही पेज पर हो। कड़ी मेहनत अभी से शुरू होती है।” आर्बेओला ने कहा, “मुझे एक ऐसी टीम चाहिए जिसकी एक स्पष्ट पहचान हो। मैं एक ऐसी टीम देखना चाहता हूं जो हिम्मत और विशेष प्रभाव के साथ खेले। हम एक बहुत ही अटैकिंग टीम बनना चाहते हैं, गेंद के साथ बहुत बहादुर, और जब हम इसे खो दें तो आक्रामक, और अटैक करने के लिए तैयार। मुझे लगता है कि हमें हर मैच में वह पैशन, वह लक्ष्य दिखाने और अपना सब कुछ देने की जरूरत है।