सहारनपुर में कुआं मिलने पर बोले अवधेश प्रसाद, खुदाई में पुरानी चीजें निकलना कोई नई बात नहीं

अयोध्या। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सहारनपुर में कुआं मिलने, सपा के नए ड्रेस कोड और बाबा बागेश्वर की बंगाल के लोगों से मांस-मछली न खाने की अपील पर आईएएनएस से बातचीत की। आईएएनएस से बातचीत करते हुए सहारनपुर में कुआं मिलने को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा, “ये पुरानी चीजें हैं और खुदाई से क्या-क्या निकलता है, इसमें देखना क्या है। हम लोगों के यहां भी कुआं था। शुरुआती दिनों में हम लोग भी कुएं का पानी पीते थे, नहाते थे और चरखी लगाते थे। कुएं का पानी बड़ा ठंडा रहता था। आज कहीं भी कुआं नहीं है। उसका स्थान हैंडपंप ने ले लिया है। प्रधानमंत्री ने हैंडपंप को नकार दिया है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत बड़ी-बड़ी टंकियां पूरे देश में लगाई गई हैं। जो भ्रष्टाचार का केंद्र हैं।” अवधेश प्रसाद ने आगे कहा, “किसी भी गांव में जन जीवन मिशन के अंतर्गत घर-घर जल कहीं नहीं है। सड़कें खोद दी गई हैं, सड़ी-गली पाइप डाली गई है। बड़े पैमाने पर कमीशन खोरी की गई है। केंद्र में हमारी सरकार आएगी तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” अवधेश प्रसाद ने कहा कि हमारे समाज की जो परंपराएं और मान्यताएं हैं, उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। मान्यताओं और परंपराओं का आदर करना चाहिए। सीएम योगी के अयोध्या दौरे को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि महीने में चार बार मुख्यमंत्री अयोध्या आते हैं, लेकिन आज ऐसे वक्त पर आ रहे हैं जब भगवान श्री राम के चढ़ावे में चोरी की गई है। इस देश के करोड़ों लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है। महंगाई चरम सीमा पर है, चीनी का दाम 70 रुपए प्रति किलो है। वे ऐसे समय अयोध्या आ रहे हैं जब गोशालाओं में गो माता की स्थिति खराब है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यूपी में आज एक नई परिपाटी हो गई है। एसडीएम कोर्ट आदेश करेगा और पुलिस डंडा लेकर खाली कराने पर जुट जाती है। कभी आर्य समाज तो कभी हिंदू परिषद की बात की जाती है। सनातन हमेशा न्यायप्रिय होता है। आर्य समाज हमेशा न्यायप्रिय है। आर्य समाज न तो अन्याय सहता है और न तो अपने पड़ोसियों पर अन्याय करने देता है।

एसएससी-सीएचएसएल भर्ती 2026: लोअर डिविजनल क्लर्क सहित 2,536 पदों पर 7 अक्टूबर तक करें आवेदन

नई दिल्ली। आज भी देश में लाखों युवा सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। इसके लिए वे तैयारी करने के साथ-साथ वैकेंसी निकलने के इंतजार में रहते हैं। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए एक शानदार मौका सामने आया है। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (सीएचएसएल) परीक्षा 2026 के तहत भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों/विभागों/ऑफिसों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं/कानूनी संस्थाओं/ट्रिब्यूनल आदि के लिए ग्रुप-सी के कुल 2,536 पदों पर रिक्तियों की घोषणा एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। एसएससी की ओर से जारी कुल 2,536 रिक्तियों में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी)/जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट (जेएसए), डेटा एंट्री ऑपरेटर (डीईओ) और डेटा एंट्री ऑपरेटर, ग्रेड ‘ए’ के पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 सितंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि की रात 11 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। वहीं, आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर की रात 11 बजे तक तय की गई है। इसी के साथ, जिन अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र भरते समय कुछ गलती हो जाएगी, उनके लिए एप्लीकेशन फॉर्म में सुधार के लिए विंडो और सुधार शुल्क के ऑनलाइन भुगतान की तारीख 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर की रात 11 बजे तक तय की गई है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से 12वीं कक्षा या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (टियर-I), कंप्यूटर आधारित परीक्षा (टियर-II), कौशल परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन (डीवी) के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पद के अनुसार 19,900 से 92,300 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस (पुरुष) के लिए 100 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पूर्व सैनिक/विकलांग व्यक्ति और महिलाओं को रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान से छूट दी गई है।

‘यह बहुत अच्छा कदम’, सीए के बीबीएल में निजी निवेशक लाने की मंजूरी को कमिंस और मोलिनेक्स का समर्थन

नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने बिग बैश लीग (बीबीएल) में निजी निवेश को मंजूरी दे दी है। ऑस्ट्रेलिया के वनडे और टेस्ट कप्तान पैट कमिंस और ऑस्ट्रेलिया महिला टी20 टीम की कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने सीए के इस कदम का समर्थन किया है। कमिंस ने कहा, “अगर निजीकरण अच्छे से किया जाए, तो यह खेल के लिए बहुत अच्छी बात हो सकती है। बिग बैश लीग के लिए बहुत सारे फायदे हैं, लेकिन एक ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के तौर पर भी, टेस्ट क्रिकेट मेरे लिए बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि यह हमें भविष्य के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार करता है।” हालांकि, कमिंस ने इस बात को खारिज कर दिया कि न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड का निजीकरण का विरोध ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में फूट को सामने लाएगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि किसी भी चीज पर 100 प्रतिशत समर्थन मिलना बहुत मुश्किल है। मैं यह कप्तान के तौर पर जानता हूं। कभी-कभी आपको फैसला लेना पड़ता है। ऐसा लगता है कि हर क्लब का फैसला उनके अपने हाथ में है। सीए ने एक ऐसा स्ट्रक्चर बना लिया है, जहां वे उन फैसलों को अपने पास रख पाएंगे। एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के तौर पर, मुझे लगता है कि अगर इसे अच्छे से किया जाए तो यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए अच्छा है।” विमेंस बीबीएल में रेनेगेड्स की कप्तान मोलिनेक्स ने कहा, “इससे कुछ नए क्षेत्र खुल सकते हैं जिनमें हम विमेंस बिग बैश में जा सकते हैं। नए निवेशक, गेम में कुछ नया करने और उसे आगे बढ़ाने के नए मौके लाएंगे। क्वालिटी के हिसाब से, विमेंस बिग बैश अभी भी दुनिया का सबसे अच्छा कॉम्पिटिशन है। निजीकरण के साथ आने वाले इन सभी नए मौकों से उम्मीद है कि लीग और बेहतर हो जाएगी। इसका हिस्सा बनना वाकई बहुत अच्छी बात है।” मोलिनेक्स ने कहा कि रेनेगेड्स की होने वाली बिक्री 2026/27 सीजन के बाद भी कुछ नए फैन लाने का एक मौका है। सीए ने मंगलवार को घोषणा की कि वह रेनेगेड्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए निजी मालिकों से बोलियां मंगाएगा, ताकि क्लब 2027-28 विमेंस बीबीएल और बीबीएल सीजन नए मालिकाना हक में खेल सके। बिक्री प्रक्रिया से आने वाले विमेंस बीबीएल और बीबीएल सीजन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रेनेगेड्स को सीए केयरटेकर मोड में चलाएगा। होबार्ट हरिकेन्स, मेलबर्न स्टार्स और पर्थ स्कॉर्चर्स दूसरे क्लब हैं जो कथित तौर पर निजी निवेश लाने के लिए उत्सुक हैं। इस बीच, क्रिकेट न्यू साउथ वेल्स की सिडनी की दो टीमें – सिक्सर्स और थंडर – साथ ही ब्रिस्बेन हीट और एडिलेड स्ट्राइकर्स इस स्टेज पर निजी निवेश के साथ आगे बढ़ने में हिचकिचा रही हैं।

मुझे नहीं पता बागेश्वर बाबा कौन हैं, उन्हें बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं : सौगत रॉय

कोलकाता। नवरात्रि के दौरान मांसाहार न करने के बाबा बागेश्वर के बयान समेत कई मामलों पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि बागेश्वर बाबा कहां से आए हैं या वे कौन हैं। उन्हें बंगालियों के खान-पान पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। जहां तक बंगालियों की बात है, स्वामी विवेकानंद खुद मांस खाते थे। विवेकानंद से बड़ा शायद ही कोई बंगाली संत हुआ हो। इसलिए मैं बागेश्वर बाबा की टिप्पणियों की निंदा करता हूं।” सौगत रॉय ने कहा, “हम पार्टी के अंदर इस पर चर्चा कर रहे हैं। चुनाव चिह्न को लेकर एक मुद्दा है, क्योंकि चुनाव आयोग ने अभी तक कोई चिह्न आवंटित नहीं किया है। मुझे विश्वास है कि यह मुद्दा सुलझ जाएगा।” कालीघाट मंदिर को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि कालीघाट मंदिर के अध्यक्ष जिला जज हैं। इस बारे में उनको सिद्धांत देना चाहिए। अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सौगत रॉय ने कहा, “मैं हाईकोर्ट की राय की तारीफ करता हूं। राज्य सरकार की ओर से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रतिदिन एफआईआर दर्ज की जा रही है। यह अन्याय है। इसको लेकर हाईकोर्ट की ओर से साफ-साफ निर्देश दिए जाने पर मैं खुश हूं। दुर्गा पूजा को लेकर मुख्यमंत्री की बैठक पर सौगत रॉय ने कहा, “ममता बनर्जी हर साल ऐसा करती थीं, इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने पूजा कमेटियों को दी जाने वाली ग्रांट कम करने का फैसला किया है। छोटी पूजाओं के लिए एक लाख दिए जाएंगे और बड़ी पूजा के लिए कोई ग्रांट नहीं दी जाएगी। बंगाली लोग इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। ममता बनर्जी की भले निंदा करें, लेकिन वे भी ममता के रास्ते पर चले हैं। डीजे और शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मेरा समर्थन है।

पंजाब में ड्रग्स संकट पर अमित मालवीय का हमला, बोले- सवाल उठाने वालों को डराती है सरकार

चंडीगढ़। भाजपा नेता अमित मालवीय ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। यह आलोचना संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के बाद शुरू हुए राजनीतिक हंगामे के बीच की गई है। इस व्यक्ति ने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने सार्वजनिक रूप से हेरोइन की आसानी से उपलब्धता का मुद्दा उठाया था। इस घटना ने एक बार फिर ड्रग्स के संकट को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी पार्टियां मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के बहुत ज्यादा प्रचारित ड्रग विरोधी अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही हैं। संगरूर जिले के रहने वाले गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था। उन्होंने दावा किया था कि अपने गांव में चिट्टा (एक तरह का नशीला पदार्थ) के प्रसार को लेकर चीमा से सार्वजनिक रूप से सवाल पूछने के बाद उन पर दबाव डाला गया था। उनकी मौत ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्ष सरकार पर ड्रग की लत से प्रभावित परिवारों की चिंताओं को दूर करने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि इस घटना ने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ सफल लड़ाई लड़ने के सरकार के दावों के पीछे की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। उन्होंने मान सरकार पर युवाओं के बीच नशीले पदार्थों को फैलाने के लिए जिम्मेदार सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से निपटने के बजाय प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। हालांकि, आप सरकार का कहना है कि उसके ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के कारण ड्रग तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है और ड्रग नेटवर्क को तोड़ा गया है। आप सरकार ने केंद्र पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की सीमा-पार तस्करी को रोकने में विफल रहने का भी बार-बार आरोप लगाया है। मालवीय ने एक्स पर लिखा कि दिर्बा निर्वाचन क्षेत्र के टूर बंजारा गांव के निवासी गुलजार सिंह ने आप मंत्री हरपाल सिंह चीमा से उनके दौरे के दौरान ‘चिट्टा’ की बेरोकटोक बिक्री के बारे में सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि उनका अपना बेटा नशे की लत से जूझ रहा है और उसने परिवार का सामान बेच दिया है। इसके बाद आप से जुड़े स्थानीय नेताओं ने उन पर दबाव डाला और उन्हें परेशान किया। उन्होंने मांग की कि गुलजार सिंह मंत्री से सवाल पूछने के लिए माफी मांगें। उन्होंने इनकार कर दिया। जहर खाने से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में गुलजार सिंह ने अपनी दुर्दशा के लिए चार लोगों को जिम्मेदार ठहराया, जिनमें हरपाल चीमा और स्थानीय गांव के नेता शामिल थे। बाद में इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई। मालवीय ने दावा किया कि यह बेहद परेशान करने वाला है। जो सरकार ड्रग्स की समस्या पर सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकती और सवाल उठाने वाले नागरिक को डराती-धमकाती है, उसे जवाब देना होगा। पंजाब जवाबदेही का हकदार है, डराने-धमकाने का नहीं। इस बीच, संगरूर के एक व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने एक सरपंच और दो अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और परेशान करने का मामला दर्ज किया है। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (पटियाला रेंज) कुलदीप सिंह चहल ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा, हालांकि पुलिस ने परेशान करने के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं।

‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में लखनऊ नंबर-1, सुरेश खन्ना बोले-यह संयुक्त प्रयासों का प्रभाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लखनऊ ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में मध्य प्रदेश के इंदौर को भी पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे साफ हवा वाले शहर का दर्जा हासिल किया है। यह लखनऊ के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि लंबे समय तक वायु प्रदूषण की समस्या से जूझने वाले शहरों की सूची में शामिल रहने के बाद अब राजधानी ने खुद को शीर्ष पर स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में राज्य ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं और साफ हवा के मामले में देश में नंबर एक स्थान पाकर लखनऊ ने एक और नई उपलब्धि हासिल की है। मैं सभी को बधाई देता हूं। यह संयुक्त प्रयासों का प्रभाव है कि लखनऊ को आज स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में एक नंबर का स्थान मिला है।” उन्होंने कहा कि यह सफलता सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि प्रशासन, नगर निगम और आम जनता के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिसका असर अब दिखने लगा है। वहीं, लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने भी इस उपलब्धि का श्रेय शहर के नागरिकों और सफाई कर्मचारियों को दिया। उन्होंने कहा, “इसका श्रेय लखनऊ के लोगों, नगर निगम और सफाई कर्मचारियों को जाता है। इस कोशिश में सभी ने योगदान दिया है। हम कदम-दर-कदम काम कर रहे हैं, जिसमें अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर स्टेशन बनाना भी शामिल है।” उन्होंने बताया, “अगले छह महीनों में सभी ट्रांसफर स्टेशन बनकर तैयार हो जाएंगे। हमारी सड़क सफाई करने वाली गाड़ियां न सिर्फ धूल को नियंत्रित करती हैं, बल्कि हवा में धूल को फैलने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी करती हैं। सभी के सहयोग से ऐसे कई उपाय किए जा रहे हैं।

एशियन गेम्स के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम जापान रवाना हुई

बेंगलुरु। भारतीय महिला हॉकी टीम जापान के आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए रवाना हो गई है। कप्तान सलीमा टेटे और कोच शोर्ड मारिन नेतृत्व में भारतीय टीम मंगलवार को बेंगलुरु से रवाना हुई। एफआईएच के लॉस एंजिल्स 2028 क्वालिफिकेशन सिस्टम के तहत, 2026 एशियन गेम्स में महिला हॉकी कॉम्पिटिशन में सबसे ऊपर रहने वाली टीम लॉस एंजिल्स 2028 के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करेगी, बशर्ते उसने पहले किसी दूसरे रास्ते से क्वालीफाई नहीं किया हो। भारतीय टीम का मुख्य लक्ष्य स्वर्ण पदक हासिल करना और लॉस एंजिल्स में 2028 में होने वाले ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना होगा। एशियन गेम्स, मारिन के अंडर भारतीय महिलाओं के लिए एक शानदार बदलाव का नया अध्याय होगा। मारिन को जनवरी 2026 में आधिकारिक कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। भारत ने अपने 2026 कैंपेन की शुरुआत हैदराबाद में एफआईएच हॉकी विमेंस वर्ल्ड कप क्वालिफायर में रजत पदक जीतकर की और इटली पर सेमीफाइनल में 1-0 की जीत के साथ वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन पक्का किया। इसके बाद टीम ने ऑकलैंड में एफआईएच हॉकी विमेंस नेशंस कप में एक भी मैच नहीं गंवाया। इंडिया ने पूल स्टेज में यूएसए, जापान और उरुग्वे को हराया, सेमी-फाइनल में चिली को 6-0 से हराया और फिर फाइनल में मेजबान न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर खिताब जीता। इस जीत से इंडिया को अगले सीजन के लिए एफआईएच हॉकी विमेंस प्रो लीग में प्रमोशन भी मिला। यह मोमेंटम वर्ल्ड कप में भी जारी रहा, जहां इंडिया ने दशकों में अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। टीम पांचवें नंबर पर रही। 1974 में पहले संस्करण के बाद से महिला टीम का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी था। विश्व कप में भारतीय टीम ने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ खेला, जबकि दक्षिण अफ्रीका पर 6-1 और जर्मनी पर 3-1 से जीत हासिल की। एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम को पूल बी में जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान के साथ रखा गया है। टीम अपना कैंपेन 20 सितंबर को उज्बेकिस्तान के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 21 सितंबर को इंडोनेशिया, 23 सितंबर को थाईलैंड, 25 सितंबर को जापान और 27 सितंबर को सिंगापुर के खिलाफ मैच खेला जाएगा। नॉकआउट फेज 30 सितंबर को शुरू होगा। उसी दिन सेमीफाइनल होंगे। 2 अक्टूबर को फाइनल होगा। कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, “हम एशियन गेम्स में बहुत आत्मविश्वास के साथ जा रहे हैं। हम जानते हैं कि हर टूर्नामेंट एक नई चुनौती लेकर आता है। नेशंस कप और वर्ल्ड कप ने हमें भरोसा दिलाया है कि हम मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं, और अब हमारा फोकस इसे एक कदम और आगे ले जाने पर है। हमारा लक्ष्य बहुत साफ है — हम गोल्ड मेडल के लिए लड़ना चाहते हैं और लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल करना चाहते हैं।” एशियन गेम्स के लिए 20 सदस्यीय भारतीय महिला हॉकी टीम: गोलकीपर- सविता, बिचू देवी खारीबम डिफेंडर- इशिका चौधरी, सुशीला चानू पुखरामबम, लालथंतलुआंगी, ज्योति, शिल्पी डबास मिडफील्डर- निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनीता टोप्पो, सलीमा टेटे (कप्तान), नेहा, दीपिका सोरेंग फॉरवर्ड- लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसल, नवनीत कौर, दीपिका, इशिका, बलजीत कौर, ब्यूटी डुंगडुंग

यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचे, नौ में से छह कारोबारी सत्रों में दर्ज की गई गिरावट

मुंबई। देश की प्रमुख बीयर निर्माता कंपनी यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड (यूबीएल) के शेयरों में मंगलवार को लगातार दबाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी के शेयर 3.1 प्रतिशत तक टूटकर 52 हफ्ते के निचले स्तर 1,251.60 रुपए पर पहुंच गए। हालिया गिरावट के साथ शेयर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और यह पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख उपभोक्ता शेयरों में शामिल हो गया है। मंगलवार की गिरावट जनवरी 2026 के बाद कंपनी के शेयर में दर्ज सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में से एक रही। इससे पहले 20 जनवरी 2026 को शेयर में 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि 19 मई 2026 को इसमें 3.02 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई थी। हाल के कारोबार पर नजर डालें तो यूनाइटेड ब्रुअरीज के शेयर पिछले लगातार 9 कारोबारी सत्रों में से 6 सत्रों में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कंपनी अपने कारोबार में प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने और उत्पादन क्षमता विस्तार पर जोर दे रही है। यूनाइटेड ब्रुअरीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विवेक गुप्ता ने हाल ही में कहा था कि वित्त वर्ष 2030 तक कंपनी की कुल बिक्री में प्रीमियम बीयर श्रेणी का योगदान 18 से 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। फिलहाल यह हिस्सा करीब 11 प्रतिशत के आसपास है। गुप्ता के अनुसार, प्रीमियम बीयर श्रेणी सालाना 20 से 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और यह लाभप्रदता में महत्वपूर्ण योगदान देने लगी है। इसी रणनीति के तहत कंपनी अपने प्रीमियम ब्रांड पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। हाल ही में यूनाइटेड ब्रुअरीज ने अपने लोकप्रिय प्रीमियम ब्रांड हाइनेकन सिल्वर की उपलब्धता का विस्तार केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में किया है। कंपनी का मानना है कि उपभोक्ताओं के बीच प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग भविष्य में उसके राजस्व और मार्जिन को मजबूत कर सकती है। विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए भी कंपनी निवेश कर रही है। इस महीने की शुरुआत में यूनाइटेड ब्रुअरीज ने स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी थी कि वह महाराष्ट्र स्थित अपनी एलोरा ब्रेवरी में नई कैनिंग लाइन स्थापित करने के लिए 110 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। नया संयंत्र नियामकीय मंजूरियों के अधीन सितंबर 2026 में चालू होने की उम्मीद है। यह एलोरा इकाई की पहली कैनिंग लाइन होगी और इसकी उत्पादन क्षमता 40,000 कैन प्रति घंटा होगी। यह निवेश ऐसे समय में आया है जब यूनाइटेड ब्रुअरीज अपनी उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और डिब्बाबंद बीयर की बढ़ती मांग को पूरा करने की कोशिश कर रही है। कंपनी का प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान और उत्पादन क्षमता का विस्तार उसकी विकास रणनीति का मुख्य आधार बन रहने की उम्मीद है, भले ही शेयर को निकट भविष्य में बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ रहा हो।

जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, 15 सितंबर तक मांगा जवाब

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मंगलवार को आकाश गौरव सहित 99 कर्मियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई भी 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। प्रार्थियों की ओर से पूर्व महाधिवक्ता एवं वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता श्रेय मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के परिणाम के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी है। राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 18 अगस्त की देर रात कई नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर बड़े फैसले की घोषणा की थी। सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही थी, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका सामने आई थी। साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी। सरकार की घोषणा के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इससे संबंधित अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना में विभिन्न परीक्षाओं के संबंध में अलग-अलग कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा भी इसी विवाद के केंद्र में है। परीक्षा प्रक्रिया और नियुक्तियों को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों तथा सरकार के बीच विवाद रहा है। अब नियुक्त कर्मियों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद अदालत के आदेश से उन्हें तत्काल राहत मिली है। हालांकि, नियुक्तियों की वैधता और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अंतिम स्थिति अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और सरकार तथा जेएसएससी के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।

पाकिस्तान में बढ़ा असंतोष, सेना और नेताओं के बीच बन रही टकराव की स्थिति

नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन समस्याओं का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में राजनीतिक वर्ग के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है और अब नेता सेना की ओर से लिए जा रहे फैसलों पर सवाल उठाने लगे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान राजनीतिक वर्ग और सेना के बीच बड़े टकराव की स्थिति बन रही है। हालांकि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सख्त नियंत्रण के जरिए हालात पर काबू बनाए रखा है, लेकिन अब राजनीतिक वर्ग का धैर्य जवाब देता दिख रहा है। राजनीतिक नेताओं को जनता का सामना करना पड़ता है। वे बलूचिस्तान, पीओके और केपी जैसे इलाकों में हो रही हिंसा की संतोषजनक व्याख्या नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक वर्ग का कहना है कि देश के सामने आंतरिक चुनौतियां और समस्याएं हैं, जबकि सेना ज्यादातर इन हालात के लिए बाहरी खतरों को जिम्मेदार ठहराती है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को आक्रामक पक्ष बताने वाला नैरेटिव अब पहले की तरह प्रभावी नहीं रह गया है। पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन इसका एक उदाहरण हैं। अधिकारी के अनुसार, पीओके के लोग अपने क्षेत्र की तुलना सीधे जम्मू-कश्मीर से कर रहे हैं। खास तौर पर बुनियादी ढांचे और विकास के मामले में वे पाकिस्तानी प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं कि दोनों क्षेत्रों के बीच इतना अंतर क्यों है। हाल ही में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के बयान भी पाकिस्तान के मौजूदा हालात को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या देश के भीतर मौजूद आतंकवाद और आंतरिक चुनौतियां हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक वर्ग सेना की ओर से नियंत्रित किए जा रहे नैरेटिव से साफ तौर पर परेशान हो चुका है। सेना का ऐसा प्रभाव पहले भी रहा है, लेकिन आसिम मुनीर के कार्यकाल में यह और ज्यादा बढ़ गया है। उनके अनुसार, सेना अब तक विरोध की आवाजों को दबाने में सफल रही है, लेकिन अब यह तरीका पहले जैसा असरदार नहीं दिख रहा। सेना के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि राजनीतिक वर्ग और आम लोग अब हर मुद्दे पर उसकी लाइन का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं। पाकिस्तान पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जिससे खुला टकराव होने की संभावना भी पैदा हो सकती है। मरियम नवाज ने बेहतर समन्वय, नई तकनीक के इस्तेमाल और लोगों की समस्याओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बलूचिस्तान, केपी और पीओके की समस्याओं को हल करने के लिए लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना होगा। दूसरी ओर, लेख में दावा किया गया है कि सेना इन क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों को दबाने के लिए सशस्त्र समूहों का गठन कर रही है और उन्हें वित्तीय सहायता दे रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की सोच में काफी अंतर है। अधिकारी के अनुसार, सेना अपनी ओर से नैरेटिव को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर सकती है, लेकिन असहमति की आवाजें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आशंका है कि अगर हालात नहीं बदले, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है और राजनीतिक वर्ग तथा सेना के बीच खुला टकराव देखने को मिल सकता है।