कोयला गैसीकरण योजना को मिला उद्योग जगत का मजबूत समर्थन, 37,500 करोड़ रुपए की योजना के पहले चरण में आए 7 आवेदन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि योजना के पहले चरण में बड़े कॉर्पोरेट समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से कुल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश विश्वास को दर्शाते हैं। कोयला मंत्रालय के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है। वहीं गैलेंट इस्पात लिमिटेड ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) और सिंथेसिस गैस (सिंगैस) उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसके अलावा, एनटीपीसी लिमिटेड ने सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी) परियोजना के लिए आवेदन दिया है, जबकि श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड ने सिंगैस उत्पादन तथा तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) ने यूरिया उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव जमा किया है। कोयला मंत्रालय का कहना है कि यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को गति देने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जब हमने कहा था कि योजना में किसी की रुचि नहीं होने की खबरें समय से पहले थीं, तब हमें विश्वास था कि उद्योग जगत सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। पहले ही चरण में सात आवेदन प्राप्त होना, जिनमें देश के कुछ सबसे बड़े औद्योगिक समूह और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं, इस योजना और भारत के कोयला गैसीकरण मिशन में विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।” केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन में परिवर्तित करने को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में इन उत्पादों का कुल आयात मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपए रहा था। यह योजना भारत के 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के लक्ष्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें से 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के माध्यम से विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, इससे देश में 3 लाख करोड़ रुपए तक के निवेश को आकर्षित करने और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वर्तमान योजना जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना का विस्तार है। उस योजना के तहत फिलहाल 8 कोयला गैसीकरण परियोजनाएं विभिन्न चरणों में लागू की जा रही हैं। कोयला मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि योजना का दूसरा चरण मंगलवार से खोल दिया गया है। प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) के अनुसार, आवेदन जमा करने की नई अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी, जिससे पात्र कंपनियों को परियोजनाओं के लिए आवेदन करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार के अनुसार, निविदा जारी होने के बाद 7 जुलाई को पहले दौर के आवेदन जमा किए गए थे।

‘आपको न्याय मिलेगा’, गौरव गोगोई ने मणिपुर के म्यूजिशियन की हत्या पर जाहिर किया दुख

गुवाहाटी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को मणिपुर के म्यूजिशियन चोंगथम विक्रम सिंह की मृत्यु पर दुख जाहिर किया। विक्रम सिंह ने दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास के बाहर तेज आवाज में म्यूजिक चलाने पर आपत्ति जताई, तो कथित तौर उन्हें पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया गया। गोगोई ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट करके सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पूरा पूर्वोत्तर भारत दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है। सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए गोगोई ने अपने पोस्ट में लिखा, “चोंगथम विक्रम सिंह एक विनम्र व्यक्ति थे। उनमें कोई अहंकार नहीं था, उनका किसी के साथ बैर भी नहीं था। वह एक शांतिप्रिय व्यक्ति थे, जो सिर्फ संगीत से प्रेम करते थे। उन्हें हर कोई पसंद करता था।” गोगोई ने कहा, “दिवंगत आत्मा को शांति मिले। आपको न्याय मिलेगा। पूरा पूर्वोत्तर भारत आपके परिवार के लिए प्रार्थना कर रहा है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सिंह ने दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास के बाहर तेज शोर पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद बात हाथापाई तक पहुंच गई। इसके बाद उन्हें पीटा गया, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। कांग्रेस नेता की टिप्पणी ने सिंह के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए संगीत के क्षेत्र में दिए उनके योगदान को भी सराहा। गोगोई ने उन्हें एक शांतिपूर्ण व्यक्ति बताया और कहा कि वो बैर-भाव से दूर रहते थे और सिर्फ कला के लिए जीते थे। इस हादसे के बाद मणिपुर समुदाय के साथ पूरे पूर्वोत्तर भारत के लोगों में शोक है। लोग म्यूजिशियन के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की सही से जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किन परिस्थितियों में म्यूजिशियन की मौत हुई थी? पुलिस अब अपनी जांच के तहत यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हमले के पीछे पूरा घटनाक्रम क्या रहा है। इसमें सिंह के घर के बाहर संगीत को लेकर विवाद भी शामिल है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जो लोग भी इस हमले में शामिल थे, उनकी भूमिका क्या थी? इस हादसे के बाद से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ रही है। लोग सिंह के परिजनों के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए नजर आ रहे हैं और इस मामले में जवाबदेही भी तय करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, इस मामले में जांच के संबंध में अतिरिक्त जानकारियों का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना शामिल है।

‘वाह… मेरा वडोदरा’: पीएम मोदी ने शहर की स्वच्छता मुहिम की तारीफ की, बोले- इसे त्योहारों तक बनाए रखें

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा के लोगों की जमकर तारीफ की। उन्होंने शहर में चलाए गए स्वच्छता अभियान को जन-भागीदारी का उदाहरण बताया और लोगों से इसे आने वाले गणेश उत्सव, नवरात्रि और दिवाली तक बनाए रखने की अपील की। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने इस अभियान के वीडियो देखे और शहर भर में लोगों की भागीदारी देखकर प्रभावित हुए। पीए मोदी ने कहा, “मैं कल एक वीडियो देख रहा था। मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया- वाह, मेरा वडोदरा!” उन्होंने शहर में उनके आगमन से पहले ‘स्वच्छता से स्वागत’ के तहत किए गए सफाई कार्य का जिक्र करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस ‘सेवाभाव’ भरे स्वागत के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने पिछले एक हफ्ते के दौरान वडोदरा के हर परिवार में स्वच्छता का माहौल बना दिया था। उन्होंने इस पहल को शहर के त्योहारी कैलेंडर से भी जोड़ा। पीएम ने कहा कि वडोदरा जल्द ही गणेशोत्सव और नवरात्रि की तैयारी करेगा, जिसके बाद दिवाली आएगी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जब इस बार गणेश जी आएंगे तो सारे आशीर्वाद वडोदरा पर बरसेंगे।” पीएम मोदी ने बाद में लोगों से इस अस्थायी स्वच्छता अभियान को स्थायी नागरिक प्रतिबद्धता में बदलने का आह्वान किया। गुजराती में उन्होंने वडोदरा के लोगों से कहा कि उनके दौरे से पहले किए गए काम के बाद अब शहर को फिर से गंदा न होने दें। उन्होंने कहा, “अब हम संकल्प लें कि हम वडोदरा को गंदा नहीं होने देंगे।” यह अभियान 8 सितंबर को पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले चलाया गया था, जिसके दौरान उन्होंने 35,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। वडोदरा नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों, झीलों, उद्यानों, स्वास्थ्य और बाल देखभाल सुविधाओं, विरासत स्थलों और जल निकायों को कवर करते हुए शहर-व्यापी स्वच्छता और पर्यावरण अभियान चलाया था। इसमें सफाई कर्मचारियों, नागरिकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों ने भाग लिया था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि सफाई कर्मचारियों और निवासियों ने सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि “पर्यावरण गतिविधियों के तहत पौधारोपण के लिए 20 लाख पौधे वितरित किए गए थे।” पीएम मोदी ने सफाई कर्मचारियों और नागरिकों के काम को सराहा और कहा कि उनकी भागीदारी ने दिखाया है कि स्वच्छता खुद ही स्वागत का एक रूप बन सकती है। इस स्वच्छता अभियान ने बड़े बुनियादी ढांचे की घोषणाओं वाले कार्यक्रम में नागरिक भागीदारी का एक नया पहलू जोड़ दिया। इस कार्यक्रम में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के पूरा होने का उद्घाटन, नई रेल सेवाएं, रेल क्षमता विस्तार, हाईवे परियोजनाएं और आवास, जल आपूर्ति, शहरी विकास और नवीकरणीय ऊर्जा में गुजरात सरकार की पहल शामिल थी। वडोदरा के लिए, इस अभियान के साथ-साथ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए डिजिटल रूप से प्रबंधित सार्वजनिक प्रवेश प्रणाली भी शुरू की गई थी। बुकमाईशो पर मुफ्त रजिस्ट्रेशन खोला गया था और एक घंटे के भीतर सभी उपलब्ध सीटें बुक हो गईं, जिसके बाद 42,000 से अधिक आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया था।

मध्य पूर्व में तनाव का असर, भारत की क्रूड ऑयल बास्केट 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

मुंबई। मध्य पूर्व में तनाव का असर भारत की क्रूड ऑयल बास्केट पर भी देखा जा रहा है और इसकी औसत कीमत अब चार महीने के उच्चतम स्तर 100.75 डॉलर पर पहुंच गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर को भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल थी। यह दिखाता है कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ-साथ भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा होता जा रहा है। इससे पहले भारत के कच्चे तेल के बास्केट की औसत कीमत अगस्त में 90.19 डॉलर प्रति बैरल, जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल और जून में 83.22 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं, मई में अमेरिका-ईरान में युद्ध के चरम पर भारत के कच्चे तेल की बास्केट की औसत कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कच्चे तेल का दाम भी 100 डॉलर प्रति बैरल की तरफ पहुंच रहा है। दोपहर 2:20 पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.75 प्रतिशत बढ़कर 97.73 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.11 डॉलर प्रति बैरल पर था। मध्य पूर्व में लगातार तनाव के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का आवागमन होता है। अमेरिका-ईरान के युद्ध के बीच में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले करने के कारण स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है और युद्ध के बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया है। इन हमलों में अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अभा व जिजान स्थित साऊदी अरामको की तेल सुविधाएं शामिल थीं।

पश्चिम बंगाल की सीएम की अपील को मिला समर्थन, बड़ी बजट वाली पूजा समितियों ने छोड़ा सरकारी अनुदान

कोलकाता। कोलकाता की कई बड़े बजट वाली सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने समितियों से राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को स्वेच्छा से लेने से इनकार करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को इस वर्ष के लिए प्रत्येक सामुदायिक दुर्गा पूजा समिति को राज्य सरकार द्वारा 1,00,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा की थी। उन्होंने उन बड़े बजट वाली पूजा समितियों से भी अपील की, जो राज्य सरकार की सहायता के बिना भी अपने आयोजनों को सफलतापूर्वक चलाने में सक्षम हैं, वे स्वेच्छा से राज्य सरकार का अनुदान स्वीकार करने से इनकार कर दें। इस मामले में मध्य कोलकाता की संतोष मित्रा स्क्वायर समिति के प्रमुख संरक्षक और भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष ने कहा, “हमने हमेशा सरकारी सहायता लेने से इनकार किया है और सैद्धांतिक रूप से ऐसे उपायों का विरोध किया है, लेकिन इस बार अगर इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद और योग्य लोगों तक पहुंच रहा है, तो यह निश्चित रूप से एक स्वागत योग्य कदम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जानकर अच्छा लगता है कि हमें वैचारिक मतभेदों के कारण उपयोगी पहल का विरोध नहीं करना पड़ रहा है। जब सही लोगों को लाभ मिलता है, तो हमें राजनीति से परे, इस अच्छे काम की सराहना करनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में भाजपा की राज्य प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह तर्क बिल्कुल सही है कि राज्य सरकार का पूजा अनुदान कम बजट वाली पूजाओं के लिए होना चाहिए, जिनके लिए यह दान बहुत मायने रखता है। कीया घोष दक्षिण कोलकाता के कस्बा में राजडांगा नबा उदय संघ पूजा से समिति के अध्यक्ष के रूप में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री का छोटे-बड़े सभी पूजा-पाठों के प्रति समर्थन दिखाने के लिए तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूं। पूजा समितियों के बिजली बिल पर शत प्रतिशत छूट देना निसंदेह एक स्वागत योग्य कदम है। राजडांगा नबा उदय संघ में हमने इस बार कुछ अलग सोचा है। हम यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करेंगे।” कुछ अन्य मेगा-बजट पूजा समितियों ने भी मुख्यमंत्री की अपील का जवाब देते हुए स्वेच्छा से राज्य सरकार का अनुदान लेने से इनकार कर दिया, जिनमें उत्तरी कोलकाता के ताला प्रत्यय क्लब और फूलबागान सर्वजनिन और दक्षिणी कोलकाता के संतोषपुर लेक पल्ली क्लब शामिल हैं।

बिहार : रविशंकर प्रसाद ने सम्राट चौधरी से जमींदारी बांधों की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने की मांग की

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पुनपुन और दरधा नदियों से जुड़े पुराने जमींदारी बांधों की तत्काल मरम्मत और उनकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से इन बांधों की समुचित मरम्मत नहीं होने के कारण वे कमजोर हो गए हैं और बाढ़ के दौरान कई जगहों पर टूटने से गांवों में पानी फैल रहा है। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि गंगा, दरधा और अन्य सहयोगी नदियों में आई बाढ़ के कारण वह पिछले कई दिनों से अपने क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान लोगों की समस्याओं को समझने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्परता से काम कर रहा है और उसका पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने पत्र में कहा कि क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पुनपुन नदी के पुराने जमींदारी बांधों की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। ये बांध काफी कमजोर हो गए हैं और उनकी ऊंचाई भी कम है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में वृद्धि के दौरान इन बांधों पर पानी का दबाव बढ़ जाता है। कई स्थानों पर बांध टूटने से आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी फैल जाता है। भाजपा सांसद ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में राहत और बचाव कार्य जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए फतुहा और पुनपुन नदी से जुड़े क्षेत्रों में पुराने जमींदारी बांधों की मरम्मत कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बांधों की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत भी बताई। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी पत्र लिखा है। इसके अलावा उन्होंने गौरीचक से अलावलपुर और जमुनापुर जाने वाले मार्ग की समस्या भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाई। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान यह रास्ता डूब जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। उन्होंने इस सड़क की ऊंचाई बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि बाढ़ की स्थिति में भी लोगों का आवागमन सुचारू रूप से जारी रह सके।

मौलाना तौकीर की जमानत याचिका खारिज होने पर भाजपा ने कहा-देशविरोधी मानसिकता वालों के लिए कोई जगह नहीं

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज किए जाने, सहारनपुर मस्जिद विध्वंस विवाद, 2027 के यूपी चुनावों पर राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज किए जाने पर मंत्री नरेंद्र कश्यप ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “तन से सिर जुदा करने वाले बयान देने वाले अपराधी की जमानत याचिका खारिज कर हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि इस तरह की अपराधिक प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सपा सांसद इकरा हसन द्वारा सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर एकतरफा बताए जाने पर कश्यप ने कहा, “कानून प्रक्रिया के अनुसार मस्जिद पर कार्रवाई की गई है। मस्जिद के नीचे कुआं मिला है। इसका साफ मतलब है कि मस्जिद को अवैध रूप से बनाया गया था। इस कार्रवाई से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून अपना काम करेगा।” मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “किसी भी जनसभा या पीडीए की बैठक से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता 2012-17 की सरकार के दौरान राज्य में हुई उथल-पुथल को भूली नहीं है। लोग मुज्जफरनगर दंगे, रामपुर की घटनाएं और हिंदुओं पर हुए हमले, उनकी अनदेखी और अपमान को नहीं भूले हैं। जनता सड़कों पर महिलाओं और लड़कियों के साथ बदसलूकी की घटनाओं, या किसानों और आम लोगों को घर से निकलने में हुई दिक्कतों को भी नहीं भूली है।” केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ ने देश भर में पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि पर नरेंद्र कश्यप ने कहा, “यह निश्चित रूप से गर्व की बात है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के लोकसभा क्षेत्र और अटल बिहारी वाजपेयी के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ को योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में स्वच्छता के मामले में नंबर एक स्थान पाने का अवसर मिला है।” सहारनपुर में मस्जिद के नीचे कुआं मिलने पर मंत्री अनिल राजभर ने कहा, “कोर्ट के आदेश पर मस्जिद का ध्वस्तीकरण किया गया है। अगर समावादी पार्टी को सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति है, तो कोर्ट में अपील करना चाहिए, ढोंग नहीं करना चाहिए। अखिलेश यादव बेवजह जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज करने पर अनिल राजभर ने कहा, “देश विरोधी नारों और आतंकवादी मानिसकता का देश में कोई जगह नहीं है। कोर्ट के आदेश को देश और प्रदेश को आदर करना चाहिए। जो भी देश तोड़ने की कोशिश करेगा, उसके लिए भारत में कोई जगह नहीं है। हम कोर्ट के आदेश का आदर और सम्मान करते हैं।

आयुष विभाग के छात्रों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

लखनऊ। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आयुष छात्रों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के घर के बाहर पहुंचकर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की। उनका कहना है कि 2011 से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है और उन्हें एमबीबीएस व बीडीएस डॉक्टरों के बराबर स्टाइपेंड मिले। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की छात्रा मारिया ने कहा, “हम अपना स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हम लोग सरकार का विरोध करने नहीं, बल्कि आग्रह करने आए हैं। हम लोग मरीजों की उतनी ही देखभाल करते हैं, जितना एलोपैथ के डॉक्टर करते हैं। ऐसे में अगर हम बराबर काम कर रहे हैं तो पेमेंट भी समान मिलना चाहिए। हमारी सरकार से मांग है कि स्टाइपेंड में बढ़ोत्तरी करे।” जलज कुमार यादव ने कहा, “पिछले 15 सालों से हमारी स्टाइपेंड नहीं बढ़ाई गई है। अभी भी स्टाइपेंड 7500 रुपये मिलते हैं। 2011 में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष के छात्रों की स्टाइपेंड समान थी। इसके बाद एमबीबीएस और बीडीएस के छात्रों की स्टाइपेंड दो बार बढ़ चुकी है लेकिन आयुष छात्रों पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टाइपेंड बढ़ाने के नाम पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। निवेदिका सिंह ने कहा, “हमारी मांग है कि स्टाइपेंड 7500 से बढ़ाकर 25 हजार की जाए। कई साल से हमें स्टाइपेंड सिर्फ 7500 रुपये मिल रहे हैं जबकि अन्य कोर्स में स्टाइपेंड बढ़ाए जा रहे हैं। हमारी मांग है कि उत्तर प्रदेश सरकार अन्य कोर्सों के छात्रों के बराबर स्टाइपेंड दे। इस तरह की मांग पहले भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है। उपमुख्यमंत्री से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते हैं।” लव प्रभात ने कहा, “पिछले 15 सालों से हमारे स्टाइपेंड में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। इन 15 वर्षों में बीडीएस और एमबीबीएस छात्रों के स्टाइपेंड में 2 बार वृद्धि हो चुकी है। हम लोग भी ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में अन्य विभाग के छात्रों के बराबर काम करते हैं। इसलिए हमारी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़े। इसी मांग को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिलने पहुंचे हैं।

बिहार: राजनीति करने के बजाय विपक्ष बाढ़ से निपटने के लिए सुझाव दे

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकार की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों का बचाव करते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि कई इलाकों में जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है और सरकार राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तरह जुटी हुई है। संजय सरावगी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। वह राहत शिविरों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और अधिकारियों को राहत कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश दे रहे हैं। बिहार में आने वाली बाढ़ के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण भी हैं और इसे पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद सरकार प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम कर रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा प्रधानमंत्री को बाढ़ की स्थिति को लेकर पत्र लिखे जाने पर सरावगी ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सरकार को सुझाव देने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव बाढ़ और बिहार की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं हैं। तेजस्वी अपने निर्वाचन क्षेत्र में केवल फोटो खिंचवाने के लिए जाते हैं और इसके बाद वहां नहीं रहते। बाढ़ की स्थिति को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में राहत कार्यों के साथ-साथ इसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल में महाअष्टमी के दिन शराब की दुकानें बंद रखने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री का सही कदम बताते हुए कहा कि दुर्गा पूजा बंगाल की आत्मा है और त्योहार की गरिमा शराब और शोर-शराबे से नहीं बढ़ती। उन्होंने यह भी कहा कि पूजा समितियों को आर्थिक सहायता देने, बिजली बिल में राहत देने जैसे फैसले स्वागत योग्य हैं। सरावगी के मुताबिक, दुर्गा पूजा में बंगाल के साथ-साथ देशभर से लोग पहुंचते हैं, इसलिए त्योहार की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखना जरूरी है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है और कई क्षेत्रों में जलस्तर कम हो रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि प्रभावित लोगों को अभी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार, जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग, खाद्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न एजेंसियां मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। तटबंधों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रजक ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बाढ़ के कारण किसी की जान न जाए। प्रभावित क्षेत्रों में कम्युनिटी किचन, मेडिकल कैंप और पशुओं के लिए शेल्टर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मुश्किल समय है, लेकिन सरकार पूरी तरह तैयार है और मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

‘अग्निपथ’ से ‘डॉन’ तक, बॉलीवुड की इन फिल्मों में दिखा गणेश चतुर्थी का खास अंदाज

मुंबई। गणपति बप्पा के आने का इंतजार हर किसी को रहता है। बप्पा घर आते हैं तो घर का माहौल ही बदल जाता है। सुबह-शाम आरती, प्रसाद और बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है। गणेश चतुर्थी का रंग फिल्मों में भी कई बार बड़े प्यार से दिखाया गया है। इस गणेश चतुर्थी अगर आप घर पर परिवार के साथ कुछ फिल्में देखने का सोच रहे हैं, तो ये फिल्में बप्पा के उत्सव का रंग और भी खास बना देंगी। ‘माय फ्रेंड गणेशा’- गणेश चतुर्थी के मौके पर देखने के लिए ‘माय फ्रेंड गणेशा’ सबसे प्यारी फिल्मों में से एक है। साल 2007 में आई राजीव एस. रुइया की यह फिल्म एक छोटे बच्चे आशु की कहानी है, जो अपने माता-पिता की व्यस्त जिंदगी के बीच खुद को अकेला महसूस करता है। उसके जीवन में भगवान गणेश एक दोस्त के रूप में आते हैं। फिल्म में गणेश उत्सव कहानी को आगे बढ़ाने वाला अहम हिस्सा है। गणेश जी के घर आने के बाद आशु और उसके परिवार की जिंदगी में बदलाव आने लगते हैं। अहसास चन्ना, किरण जंजानी और शीतल शाह जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म बच्चों के साथ देखने के लिए शानदार है। ‘अग्निपथ’- ऋतिक रोशन की फिल्म ‘अग्निपथ’ भी गणेश उत्सव की वजह से खूब याद की जाती है। फिल्म की कहानी विजय नाम के एक ऐसे युवक की है, जिसकी जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से भरी रही। वह अपने पिता के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए बड़ा होकर अपराध की दुनिया तक पहुंच जाता है। फिल्म में ऋतिक रोशन के साथ प्रियंका चोपड़ा, संजय दत्त और ऋषि कपूर भी नजर आए थे। फिल्म में ‘देवा श्री गणेशा’ गाने के जरिए गणपति बप्पा का बड़ा उत्सव दिखाया गया है। हालांकि पूरी फिल्म गंभीर और बदले की कहानी है, लेकिन गणेश उत्सव वाले सीन में लोगों की आस्था और बप्पा के प्रति प्यार साफ झलकता है। यह फिल्म उन लोगों के लिए है, जिन्हें भक्ति के साथ एक दमदार कहानी भी देखनी हो। ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’- अजय देवगन की फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’ का रंग बिल्कुल अलग है। यह एक पारिवारिक फिल्म है, जिसमें परेश रावल एक ऐसे मेहमान बनकर आते हैं, जो घर में आते तो कुछ दिनों के लिए हैं, लेकिन जाने का नाम ही नहीं लेते। अजय देवगन और कोंकणा सेन शर्मा पति-पत्नी के किरदार में हैं, जिनकी जिंदगी इस मेहमान की वजह से बदल जाती है। फिल्म के आखिर में गणपति विसर्जन का सीन आता है। बप्पा की विदाई का यह समय फिल्म की कहानी के साथ भी जुड़ जाता है। गणेश चतुर्थी पर परिवार के साथ बैठकर देखने के लिए यह फिल्म अच्छी पसंद है। ‘शोर इन द सिटी’- फिल्म की कहानी एक नहीं, बल्कि कई लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है। हर किरदार अपनी परेशानी, अपने सपने और अपनी मुश्किलों में उलझा हुआ है। फिल्म में तुषार कपूर और राधिका आप्टे समेत कई कलाकार हैं। पूरी कहानी गणेश उत्सव के दिनों में आगे बढ़ती है। बाहर सड़कों पर लोग बप्पा के नाम पर नाच रहे होते हैं, ढोल बज रहे होते हैं और जयकारे लग रहे होते हैं, लेकिन उसी भीड़ के बीच कई लोगों की अपनी जिंदगी की लड़ाई भी चल रही होती है। गणेश उत्सव सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनकर दिखाई देता है। ‘डॉन’- फरहान अख्तर की 2006 की इस फिल्म में गणेश चतुर्थी का रंग एकदम अलग-अंदाज में दिखाई देता है। इसमें शाहरुख खान दोहरी भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में ‘मोरया मोरया’ गाने के जरिए गणपति उत्सव की भीड़ और मुंबई की सड़कों का जोश दिखाई देता है। ढोल बजाते हुए शाहरुख का अंदाज और चारों तरफ दिखाई देती गणपति की भक्ति इस सीन को यादगार बना देती है। प्रियंका चोपड़ा, करीना कपूर खान और बोमन ईरानी भी फिल्म का हिस्सा थे। आज भी गणेश उत्सव के दौरान ‘मोरया मोरया’ सुनते ही इस फिल्म का सीन याद आ जाता है।