सऊदी अरब पर हूती समूह के हमले खतरनाक रूप से तनाव बढ़ाने वाले : सैन्य गठबंधन

रियाद। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने मंगलवार को कहा कि हूती समूह की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमले ‘खतरनाक रूप से तनाव बढ़ाने वाले’ हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूती समूह की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और सऊदी अरब, उसकी राष्ट्रीय संपत्तियों, नागरिकों तथा वहां रहने वाले लोगों को निशाना बनाने की कोशिशें ‘आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये’ को दर्शाती हैं। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अल-मलिकी ने कहा कि हालिया हमलों में आभा, खमीस मुशैत, जाजान और नज्रान शहरों के नागरिक और आर्थिक महत्व वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 73 नागरिक घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये हमले सऊदी अरब की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और वहां के नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं। अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन की संयुक्त सेना कमान हूती समूह को रोकने, खतरे के स्रोतों का जवाब देने और उनके खतरे को समाप्त करने के लिए जरूरी सैन्य कदम उठाएगी। दूसरी ओर, हूती समूह ने मंगलवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब में कई ठिकानों पर हमला किया है। हूती संचालित मीडिया आउटलेट ‘अंसारुल्लाह’ के अनुसार, हमलों में अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, किंग खालिद एयर बेस और सरकारी तेल कंपनी अरामको की अभा और जजान स्थित सुविधाएं शामिल थीं। इससे एक दिन पहले, सोमवार को हूती समूह ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया था कि उसने युद्ध प्रभावित यमन के कई प्रांतों में हवाई हमले और क्रूज मिसाइल हमले किए हैं। उसी दौरान सरकारी बलों और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष कई मोर्चों पर फैलता जा रहा था। हूती समर्थित अल-मसीरा टीवी ने बताया, “सऊदी दुश्मन ने अल-जौफ, अल-बैदा, मारीब और ताइज प्रांतों को कई हवाई हमलों और क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया।” हालांकि रिपोर्ट में हताहतों या नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि समूह ने सोमवार को उत्तरी अल-जौफ प्रांत के खब और अश-शाअफ जिले के ऊपर एक सऊदी सीएच-4 निगरानी ड्रोन को मार गिराया।
आरआरबी भर्ती 2026: पैरामेडिकल के 560 पदों पर वैकेंसी का नोटिफिकेशन जारी, आवेदन 15 सितंबर से

नई दिल्ली। रेलवे में नौकरी करना आज भी हजारों-लाखों युवाओं का सपना होता है। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है। दरअसल, रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने पैरामेडिकल कैटेगरी के विभिन्न 560 पदों पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक शॉर्ट ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है। आरआरबी की ओर से पैरामेडिकल पोस्ट के लिए जारी कुल 560 रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित पोस्ट के लिए आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी), दस्तावेज सत्यापन (डीवी), चिकित्सा जांच (एमई), आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 7वें सीपीसी के अनुसार पे लेवल 3 से पे लेवल 7 के बीच प्रतिमाह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 500 रुपए और एससी/एसटी/पूर्व सैनिक/विकलांग व्यक्ति/महिला/ट्रांसजेंडर/अल्पसंख्यक/ईबीसी के लिए 250 रुपए तय किया गया है। कैंडिडेट्स ध्यान दें कि आरआरबी की ओर से पैरामेडिकल पोस्ट के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती प्रक्रिया, आयु सीमा, सैलरी, योग्यता, आदि से जुड़ी विस्तृत जानकारी का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उम्मीदवारों को सम-दर-समय ऑफिशियल पोर्टल को चेक करने की सलाह दी जाती है।
जयपुर के आमेर किले के पास चाकू मारे गए टूरिस्ट गाइड की मौत, विरोध में बाजार बंद

जयपुर। जयपुर में आमेर किले के पास मावठा इलाके में एक झगड़े के दौरान चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल हुए टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की मंगलवार को सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद आमेर शहर के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए और बाजार बंद रहे। पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार सुबह 10 बजे हुई, जब ऐतिहासिक आमेर किले के पास गाड़ियों की आवाजाही को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि मनीष सोनी गाड़ियों को किले की ओर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी एक जीप ड्राइवर आजम से बहस हो गई। यह बहस जल्द ही हिंसा में बदल गई। पुलिस का आरोप है कि आजम ने अपने साथी नाजिश के साथ मिलकर झगड़े के दौरान सोनी पर चाकू से हमला किया। सोनी के पेट में गंभीर चोट आई और वे वहीं गिर पड़े। उन्हें गंभीर हालत में एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि ज्यादा खून बहने और अंदरूनी गंभीर चोटों के कारण मंगलवार को उनकी मौत हो गई। सोनी की मौत से स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के सदस्यों में गुस्सा फैल गया। विरोध स्वरूप आमेर बाजार की दुकानें बंद रहीं जबकि प्रदर्शनकारी आमेर पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। आमेर के एसएचओ राजेंद्र गोदारा ने बताया कि दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस टीमें हमले में इस्तेमाल किए गए चाकू को बरामद करने की भी कोशिश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आजम के खिलाफ आमेर पुलिस स्टेशन में पहले से ही दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। सोनी की मौत के बाद बढ़ते तनाव को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और एहतियात के तौर पर जल महल रूट से ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे जांच के दौरान शांति बनाए रखें।
कर्नाटक में आपातकालीन सेवाओं में बाधा पहुंची तो सरकार होगी जिम्मेदार : आर अशोक

बेंगलुरु। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक ने मंगलवार को सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उनके मुताबिक, सरकार ने 108 ‘आरोग्य कवच’ मुफ्त एंबुलेंस को संकट के समय उतारने का फैसला किया है। अगर सरकार के इस फैसले की वजह से 20 सितंबर के बाद आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा पहुंचती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्वास्थ्य मंत्री यू.टी खादर की होगी। ज्ञात हो कि मुफ्त एंबुलेंस के 108 ड्राइवरों ने कर्नाटक सरकार को सीधे शब्दों में कह दिया है कि अगर 15 दिनों के अंदर उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तो वो सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी खादर ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आंदोलन से मरीजों को किसी भी प्रकार से परेशानी हुई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने ड्राइवरों से कहा कि वो सरकार से जुड़े संगठनों से इस बारे में दृढ़ता से बात करें, ताकि उनकी मांगों पर विचार किया जाए। अशोक ने कहा कि 108 एंबुलेंस से जुड़े करीब 35,00 कर्मचारियों ने 20 तारीख को सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों पर खामोश बैठी है। अशोक ने आरोप लगाया कि 20 सितंबर को 108 एंबुलेंस से जुड़े करीब 3500 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इसके बावजूद भी सरकार खामोश बैठी है। ऐसी स्थिति में कोई एक कोई गैर-जिम्मेदार सरकार के बारे में क्या ही कहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कर्मचारियों की समस्याओं को संवाद के जरिए सुलझाने की जगह उन्हें धमका रही है। सरकार कह रही है कि अगर किसी भी कर्मचारी ने हड़ताल की, तो उसका लाइसेंस निरस्त करके उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अशोक ने कहा कि कर्मचारियों ने प्रमुख रूप से कई मांगें उठाई हैं, जिसमें अतिरिक्त भुगतान में 45 फीसद की कटौती, 12 घंटे की शिफ्ट और अगर किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को 108 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाए। भाजपा नेता ने सवाल पूछा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि सरकार के पास मौजूदा समय में विज्ञापन, उपलब्धियों के लिए कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए तो भरमार पैसा है। अफसोस की बात है कि उन सभी लोगों को न्याय देने के लिए पैसा नहीं है, जो दूसरों की जान बचाने में लगे रहते हैं। अशोक ने पूछा कि यह अफसोस की बात है कि सरकार के पास विज्ञापन और अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए पैसा है। लेकिन, कर्मचारियों को न्याय देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि 20 सितंबर के बाद एंबुलेंस सेवाओं में बाधा पहुंचने की वजह से अगर मरीजों और लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी हुई, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्वास्थ्य मंत्री यू.टी खादर की होगी।
इंडोनेशिया में खुले कुछ एयरपोर्ट, ज्वालामुखी से अभी भी निकल रहा लावा

जकार्ता। अनाक क्राकाटाओ ज्वालामुखी विस्फोट के कारण प्रतिबंधित हवाई सेवाओं को कुछ हद तक शुरू कर दिया है। देश ने राजधानी जकार्ता में अपना मुख्य एयरपोर्ट और चार अन्य एयरपोर्ट फिर से खोल दिए हैं, जिन्हें ज्वालामुखी से निकलती राख के कारण बंद कर दिया गया था। अधिकारियों द्वारा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्वालामुखी की राख हटाने के बाद मंगलवार को ये पांचों एयरपोर्ट फिर से खोल दिए गए। हालांकि मंगलवार को अनाक क्राकाटाओ ज्वालामुखी से लावा निकल ही रहा है। इसके कारण अधिकारी अलर्ट पर हैं। दो एयरपोर्ट अभी भी बंद हैं और ज्वालामुखी को लेकर चेतावनी दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर बरकरार है। बता दें कि इंडोनेशिया में ज्वालामुखी को लेकर चेतावनी के कुल चार स्तर होते हैं। दूसरे सबसे ऊंचे स्तर की चेतावनी में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हवाई सेवाओं पर लगे ब्रेक का असर 3,40,000 से ज्यादा यात्रियों और लगभग 2,900 उड़ानों पर पड़ा। जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में फायरफाइटर और फायरट्रक रनवे और दूसरी जगहों से राख हटाते हुए दिखे। परिवहन मंत्री डुडी पुरवागांधी ने कहा कि फ्लाइट शेड्यूल को सामान्य होने में “थोड़ा” और समय लग सकता है। डुडी ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हम यात्रियों और आम जनता से थोड़ा धैर्य रखने की अपील करते हैं, क्योंकि हम यह पक्का करने के लिए जांच करेंगे कि ये विमान उड़ान भरने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं।” डुडी ने कहा, “उड़ान भरने वाला पहला विमान एक कार्गो प्लेन था। हम इन विमानों का संचालन करेंगे, लेकिन ऐसा करने से पहले हम उनकी उड़ान भरने की क्षमता (एयरवर्दीनेस) को पक्का करना चाहते हैं। इसलिए, इसमें थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।” अनाक क्राकाटाओ, में शनिवार को जबरदस्त विस्फोट हुआ था। ये जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच एक जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में स्थित है। नेशनल जियोलॉजी एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के अनुसार, ज्वालामुखी में मंगलवार सुबह ही करीब तीन बार विस्फोट हुआ। जियोलॉजी एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, “इसका असर पिछले विस्फोटों जितना बड़ा नहीं है, लेकिन हम निगरानी जारी रखेंगे।” अनाक क्राकाटाओ इंडोनेशिया के लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह देश “पैसिफिक रिंग ऑफ फायर” में स्थित है, जो भूकंप की दृष्टि से बहुत सक्रिय क्षेत्र है। यहां पृथ्वी के क्रस्ट की अलग-अलग प्लेटें आपस में मिलती हैं, जिससे काफी भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
एक्जिम बैंक में मैनेजर सहित कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, उम्मीदवार 15 सितंबर से करें आवेदन

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक खास मौका सामने आया है। दरअसल, इंडिया एक्जिम बैंक ने बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान (एसआरडी) के तहत मैनेजर सहित विभिन्न कई पदों पर पात्र और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करके उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। एक्जिम बैंक की ओर से जारी रिक्तियों में डिप्टी मैनेजर (ग्रेड/स्केल जेएम I) के 6 और मैनेजर (एम)-(ग्रेड/स्केल एमएम II) के 2 पद शामिल हैं। वहीं, श्रेणी के आधार पर एससी के 2, एसटी के 3 और ओबीसी के 3 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एक्जिम बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि तक उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से कम से कम 50 प्रतिशत अंक या सीजीपीए के साथ 3 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला ग्रेजुएशन की डिग्री और कम से कम 2 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला पोस्ट ग्रेजुएशन (एमबीए/पीजीडीबीए/पीजीडीबीएम/एमएमएस), जिसमें फाइनेंस/इंटरनेशनल बिजनेस/फॉरेन ट्रेड में स्पेशलाइजेशन या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हों, होना चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में पद के अनुसार निर्धारित एक से तीन वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है। आवेदकों की अधिकतम आयु श्रेणी के अनुसार डिप्टी मैनेजर पद के लिए 31 से 33 वर्ष और मैनेजर पोस्ट के लिए 33 से 35 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) के लिए अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्ष और पूर्व-सैनिकों के लिए 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, लिखित परीक्षा, पर्सनल इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी डिप्टी मैनेजर पद के लिए 48,480 से 85,920 रुपए के बीच और मैनेजर पोस्ट के लिए 64,820 से 93,960 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वहीं, लिखित परीक्षा नवंबर में आयोजित होने की संभावना है। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 600 रुपए और एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी एवं महिला उम्मीदवारों के लिए 100 रुपए तय किया गया है।
राम मंदिर की व्यवस्थाओं को नई धार देने अयोध्या पहुंचे पहले सीईओ जितेंद्र मिश्र, संभाली कमान

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली। पदभार संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और इसके बाद तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं और अधिकारियों के साथ कामकाज शुरू किया। ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्र के लिए मंदिर के समीप ही अपने एक भवन में आवास की व्यवस्था की है। अब वह अयोध्या में रहकर मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं की निगरानी करेंगे। मंगलवार को मंदिर परिसर पहुंचने के बाद वह ग्रीन हाउस गए, जहां उन्होंने मंदिर से जुड़े अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मिश्रा की नियुक्ति इसी महीने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में की गई थी। मंदिर के पहले सीईओ के चयन के लिए गठित खोज समिति की सिफारिशों के आधार पर पांच हजार से अधिक संभावित उम्मीदवारों में से उनका चयन किया गया। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना में 39 वर्षों से अधिक के उनके विशिष्ट सेवाकाल और व्यापक प्रशासनिक एवं नेतृत्व अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। मिश्रा इससे पहले नियुक्ति के बाद अयोध्या की अपनी पहली यात्रा पर आए थे। उस दौरान उन्होंने ट्रस्टियों के साथ बैठक कर सीईओ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों, कार्यक्षेत्र और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा था। इसके बाद वह दिल्ली लौट गए थे। मंगलवार को अयोध्या पहुंचने के बाद अब वह स्थायी रूप से यहीं रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। सीईओ के रूप में मिश्रा के सामने मंदिर की बढ़ती गतिविधियों और श्रद्धालुओं की संख्या के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, वित्तीय प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं और पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। मिश्रा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे की तैयारियों को लेकर भी मंदिर से जुड़े अधिकारियों के साथ समन्वय किया। मुख्यमंत्री अयोध्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद हनुमानगढ़ी और श्री राम मंदिर में दर्शन करने वाले हैं। ट्रस्ट के सीईओ के रूप में मिश्रा की नियुक्ति को मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर, व्यवस्थित और जवाबदेह स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सैन्य सेवा में लंबे प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव के बाद अब उनके सामने दुनिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो चुके राम मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की जिम्मेदारी है।
हनी-ट्रैप के लिए आईएसआई की नई चाल, अधिकारियों की फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिकों का कर रही इस्तेमाल

नई दिल्ली। भारत में पिछले कुछ सालों में हनी-ट्रैप के मामले बढ़े हैं। चेतावनियों और सलाहों के बावजूद कई अधिकारी इन नेटवर्क का शिकार बन रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान की आईएसआई, जो ये नेटवर्क चलाती है, ने ऐसे अधिकारियों की पहचान करने के लिए कई मनोवैज्ञानिकों को काम पर रखा है जिनके पास संवेदनशील जानकारी होती है। मकसद ऐसे लोगों का अध्ययन करना, उनकी निजी समस्याओं को समझना और फिर उनसे जानकारी निकलवाना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई इस काम के लिए मनोवैज्ञानिकों को नियुक्त कर रही है और उन्हें टारगेट खोजने से पहले महिलाओं के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने का निर्देश देती है। ये बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग होते हैं जो निजी समस्याओं वाले अधिकारियों को फंसाने में माहिर होते हैं। ये मनोवैज्ञानिक पहले सोशल मीडिया पर अधिकारियों की पहचान करते हैं और फिर उनके द्वारा पोस्ट किए गए संदेशों का गहराई से अध्ययन करते हैं। अधिकारी ने कहा कि चूंकि वे प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक होते हैं, इसलिए वे आसानी से ऐसे अधिकारियों की मानसिकता को समझ लेते हैं। एक बार पहचान हो जाने के बाद, आईएसआई द्वारा नियुक्त ये मनोवैज्ञानिक उन अधिकारियों से बातचीत शुरू करते हैं और उनके प्रति बहुत सहानुभूति दिखाते हैं। वे इन लोगों की कमजोरियों का पता लगाने में महीनों बिताते हैं। इन अधिकारियों का भरोसा जीतने में उन्हें लगभग दो से तीन महीने लगते हैं। जब भरोसा बन जाता है, तो इन लोगों को अपने सिस्टम पर कुछ एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। इनमें से ज्यादातर एप्लिकेशन में चुपके से काम करने वाले स्पाइवेयर और मैलवेयर होते हैं, जो चीन में बने होते हैं। अधिकारियों का कहना है कि हनी-ट्रैप नेटवर्क अब पैसे और डराने-धमकाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके बजाय कमजोरियों का फायदा उठाया जाता है, और करीबीपन व आकर्षण का इस्तेमाल करके संवेदनशील जानकारी रखने वाले अधिकारियों को फंसाया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन तरीकों का सबसे बेहतर इस्तेमाल करते हैं। फंसने वाले व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए संवेदनशील जानकारी दे बैठता है। हाल के मामलों में यह पाया गया है कि अधिकारियों की निजी समस्याओं का फायदा उठाना आईएसआई के लिए कारगर रहा है। ये अधिकारी कमजोर स्थिति में होते हैं और अपनी निराशा निकालने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि यह तरीका आईएसआई के लिए अच्छा काम कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान में मनोवैज्ञानिकों की मांग बढ़ गई है। हाल ही में हनी-ट्रैप नेटवर्क में मनोवैज्ञानिकों को शामिल करने के मामलों में हुई बढ़ोतरी ने भारतीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एक अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि नियमित रूप से एडवाइजरी जारी किए जाने के बावजूद, कई अधिकारी इस जाल में फंसते जा रहे हैं और अपने सिस्टम में डेटा लीक करने वाला या मैलवेयर साफ्टवेयर तक इंस्टॉल कर लेते हैं।
पीठ की अकड़न और कब्ज से हैं परेशान, सुप्त मत्स्येंद्रासन है रामबाण उपाय

नई दिल्ली। दफ्तर में घंटों बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से कमर दर्द, कब्ज और पीठ में अकड़न की समस्या आम हो गई हैं। इन शारीरिक समस्याओं से निजात पाने के व्यक्ति योग का सहारा ले सकता है। सही खानपान और योग से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। योग के इन्हीं आसनों में ‘सुप्त मत्स्येंद्रासन’ बेहद लाभदायक है, जो न सिर्फ कमर दर्द और जकड़न दूर करता है बल्कि मन को शांति मिलती है। सुप्त मत्येंद्रासन को अंग्रेजी में सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट या रिक्लाइंड ट्विस्ट कहा जाता है। यह आसन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है, सुप्त (लेटना), मत्स्येंद्र (पौराणिक योगी मत्स्येंद्रनाथ) और आसन (मुद्रा)। यह अर्ध मत्स्येंद्रासन का लेटा हुआ, पुनर्स्थापनात्मक रूप है, जो निष्क्रिय, गुरुत्वाकर्षण-सहायता प्राप्त स्थिति में रीढ़ की हड्डी के घुमाव के समान आवश्यक लाभ प्रदान करता है और इसके लिए किसी बल की आवश्यकता नहीं होती है। यह आसन योग की शास्त्रीय परंपरा में गहराई से जुड़ा हुआ है, जिससे विश्राम, स्थिरता और रीढ़ की हड्डी में हल्का तनाव कम होता है। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, पीठ दर्द से राहत और पाचन तंत्र को सुधारने के लिए एक उत्कृष्ट अभ्यास माना है। सुप्त मत्स्येंद्रासन, एक लेटने की मुद्रा है जिसमें एक घुटना शरीर के आर-पार मुड़ा होता है और उसी तरफ का हाथ बाहर की ओर फैला होता है। इसे करने के दौरान रीढ़ की हड्डी कमर से गर्दन तक धीरे-धीरे घूमती है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी की गतिशीलता बढ़ती है, कूल्हों का तनाव कम होता है, पाचन क्रिया बेहतर होती है और पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे यह हठ योग और पारंपरिक योग दोनों में सबसे अधिक चिकित्सकीय रूप से उपयोगी आसनों में से एक बन जाता है। यदि आप पहली बार योग कर रहे हैं या किसी चिकित्सीय स्थिति से गुजर रहे हैं, तो इसे हमेशा किसी प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में ही शुरू करें। इसके साथ ही, रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने या कंधों में हाल ही में कोई चोट लगी हो या सर्जरी हुई हो, तो इसे न करें।
भारत के बाद अफगानिस्तान मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के लिए इन दो देशों की मेजबानी करेगा

नई दिल्ली। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ नई दिल्ली में 3 टी20 मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम की मेजबानी कर रही है। इस सीरीज के बाद अफगानिस्तान यूएई में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के लिए बांग्लादेश और जिम्बाब्वे की मेजबानी करेगी। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसकी पुष्टि की है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि अफगानिस्तान क्रिकेट टीम अक्टूबर और नवंबर (9 अक्टूबर से 17 नवंबर) के दौरान यूएई में बांग्लादेश के खिलाफ एक टेस्ट खेलेगी। इसके बाद एक वनडे त्रिकोणीय सीरीज खेली जाएगी जिसकी दो अन्य टीमें बांग्लादेश और जिम्बाब्वे हैं। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ 3 टी20 मैच और 2 टेस्ट खेले जाएंगे। अफगानिस्तान सबसे पहले 9 से 13 अक्टूबर तक बांग्लादेश के साथ एक टेस्ट खेलेगा। इसके बाद 17-23 अक्टूबर तक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे के साथ वनडे त्रिकोणीय सीरीज खेलेगी। सीरीज में हर टीम एक-दूसरे से एक बार खेलेगी। टॉप दो टीमें 23 अक्टूबर को फाइनल खेलेंगी। त्रिकोणीय सीरीज के बाद अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे 27 अक्टूबर, 29 अक्टूबर और 1 नवंबर को तीन टी20 मैच खेलेंगे। इसके बाद दोनों टीमें दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेंगी। पहला टेस्ट 5 नवंबर से और दूसरा टेस्ट 13 नवंबर से खेला जाएगा। एसीबी के सीईओ नसीब खान ने कहा, “हमें अफगानिस्तान राष्ट्रीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस अहम दौर को कन्फर्म करते हुए खुशी हो रही है। अलग-अलग फॉर्मेट में बांग्लादेश और जिम्बाब्वे के साथ खेलने से हमारे खिलाड़ियों को कीमती कॉम्पिटिटिव मौके मिलेंगे और हमारे समर्थकों को इंटरनेशनल क्रिकेट का एक रोमांचक दौर मिलेगा। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड हमारी नेशनल टीम को नियमित, हाई-क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और जिम्बाब्वे क्रिकेट के साथ अपने रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं।” बीसीबी के सीईओ निजामउद्दीन चौधरी ने कहा, “टेस्ट मैच और त्रिकोणीय सीरीज बांग्लादेश और अफगानिस्तान दोनों के फैन्स के लिए क्रिकेट का एक रोमांचक दौर होने का वादा करते हैं। हम टेस्ट को बहुत महत्व देते हैं, और यह हमारे खिलाड़ियों के लिए यूएई में पहली बार रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव करने और एक मजबूत अफगानिस्तान टीम के खिलाफ खुद को चुनौती देने का एक शानदार मौका होगा, जिसने पारंपरिक रूप से इन हालातों में अच्छा प्रदर्शन किया है। हम इस टूर और ट्राई-नेशन सीरीज को आयोजित करने के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को धन्यवाद देते हैं, जिसमें जिम्बाब्वे भी शामिल है। हम इंटरनेशनल क्रिकेट के कुछ रोमांचक हफ्तों का इंतजार कर रहे हैं।” जिम्बाब्वे क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर गिवमोर माकोनी ने कहा, “यह जिम्बाब्वे के लिए एक जरूरी टूर है, जो हमारे खिलाड़ियों को तीनों फॉर्मेट में हाई-क्वालिटी कॉम्पिटिशन देगा। वनडे त्रिकोणीय सीरीज दो मजबूत टीमों के खिलाफ हमारी परीक्षा लेगी, जबकि दो टेस्ट मैच खास तौर पर कीमती हैं क्योंकि हम सबसे लंबे फॉर्मेट में और नियमित मौके ढूंढ रहे हैं। हम टूर की मेजबानी के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उनके सहयोग के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का दिल से धन्यवाद करते हैं।