एसबीआई भर्ती 2026: ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर के 35 पदों पर आवेदन जारी, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में नौकरी तलाश रहे लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है। दरअसल, देश का सबसे बड़ा और पुराना सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर की नियमित आधार पर भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। एसबीआई ने पद/ग्रेड के अनुसार विभिन्न 35 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए भर्ती निकाली है, उनमें ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर-आईबीजी (टीएफओ-आईबीजी)/जेएमजीएस I के 14 और ट्रेड फाइनेंस ऑफिसर-आईबीजी (टीएफओ-आईबीजी)/एमएमजीएस II के 21 पद शामिल हैं। इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 29 अगस्त से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 19 सितंबर तय की गई है। ऐसे में जो उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्ति के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी यूनिवर्सिटी या संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन और आईआईबीएफ से फॉरेक्स ऑपरेशन्स में सर्टिफिकेशन होना जरूरी है। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को पास पद के अनुसार किसी भी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक में ऑफिसर/ऑफिशियल की भूमिका में (खासकर ‘मेकर’ की भूमिका में) ट्रेड फाइनेंस प्रोसेसिंग और ऑपरेशन्स का कम से कम 1 से 3 वर्षों का अनुभव जरूरी एकेडमिक क्वालिफिकेशन के बाद का होना अनिवार्य है। आवेदकों की न्यूनतम आयु जेएमजीएस I के लिए 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष तय की गई है। वहीं, एमएमजीएस II के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष तय की गई है। आयु सीमा की गणना 31 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी और आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू, मेरिट सूची और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल (जेएमजीएस)-I के लिए 48,480 से 85,920 रुपए के बीच और मीडिल मैनेजमेंट ग्रेड स्केल (एमएमजीएस)-II के लिए 64,820 से 93,960 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
बसवराज के इस्लाम से जुड़े बयान को कांग्रेस नेताओं ने बताया निजी राय, परमहंस आचार्य ने की कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली। कर्नाटक के मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने हाल ही में बयान दिया है कि इस्लाम सब धर्मों में श्रेष्ठ है। सबको मस्जिद जाना चाहिए। बसवराज के इस बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस नेता उदित राज, सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा और जगत गुरु परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी। इमरान मसूद ने कहा, “भारत की संस्कृति यही है, सबका सम्मान करना। सबको प्यार की नजर से देखना। यह भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। किसी के लिए भी मन में नफरत नहीं रखनी चाहिए। धर्म यही सिखाता है। कोई भी धर्म इंसानियत का संदेश देता है। जिन लोगों को इस्लाम के बारे में गलतफहमियां हैं, उन्हें इसे पढ़ना चाहिए तो आप समझ जाएंगे।” कर्नाटक के मंत्री के बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “भारत अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है। यह उनकी पसंद और निजी राय है। कोई ईसाई धर्म को महान मान सकता है। कोई यहूदी धर्म को, कोई इस्लाम को, कोई हिंदू धर्म को या कोई बौद्ध धर्म को, यह उनका निजी मामला है। उनकी समझ उनके नजरिए पर आधारित है, इसलिए उनसे सीधे पूछा जाना चाहिए। वरना यह पूरी तरह से उनकी निजी पसंद है।” सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, “भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म और आस्था को मानने की आजादी देता है। यह उनका अधिकार है और हम किसी के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते। अगर कोई मक्का जाना चाहता है तो वह ऐसा करने के लिए आजाद है। हालांकि उन्हें वहां के सभी नियमों और कानूनों का पालन करना चाहिए। इससे किसी को कोई समस्या नहीं है।” वहीं, जगत गुरु परमहंस आचार्य ने कर्नाटक के मंत्री बसवराज रायरेड्डी की इस्लाम की प्रशंसा करने वाली टिप्पणी की आलोचना की और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। जगत गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री का यह बयान कि इस्लाम सभी धर्मों से श्रेष्ठ है, उनकी मूर्खता को दर्शाता है। मंत्री को पता होना चाहिए कि इस्लाम धर्म ही नहीं है। अगर इस्लाम धर्म होता तो उसमें कोई धर्माचार्य होता। इस्लाम में मौलवी और इमाम और पीर होते हैं। इस्लाम धर्म नहीं, मजहब है। कर्नाटक के मंत्री का बयान साजिश और मूर्खतापूर्ण है। मंत्री के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
बिश्केक में पीएम मोदी का कूटनीतिक दिन, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री पाशिनयान से की मुलाकात

बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किर्गिस्तान दौरे का आज दूसरा दिन बेहद व्यस्त और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दोपहर 2 बजे के करीब उन्होंने अपने आर्मेनियाई समकक्ष निकोल पाशिनयान से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पोस्ट के जरिए मुलाकात का अपडेट दिया। बताया कि एससीओ समिट से इतर द्विपक्षीय बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान और तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात भी शामिल हैं, पर भी अपने विचार साझा किए। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया और यूरेशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, भारत के लिए आर्मेनिया के साथ संवाद का अपना अलग महत्व है। यह बैठक भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है, जिसमें मध्य एशिया और उससे जुड़े क्षेत्रों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री का सोमवार का दिन काफी व्यस्त रहा। राजधानी बिश्केक में प्रधानमंत्री दिन की शुरुआत महात्मा गांधी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से की। प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। खास तौर पर शाम को होने वाली पीएम मोदी-पुतिन मुलाकात पर सबकी नजर रहेगी। पीएम मोदी की अगली अहम बैठक किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ तय है। यह मुलाकात दोपहर बाद तक राष्ट्रपति कार्यालय में प्रस्तावित है। भारत और किर्गिस्तान के रिश्ते पारंपरिक रूप से मैत्रीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क के साथ-साथ रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्रों में भी सहयोग है। पीएम मोदी-जापारोव वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा मध्य एशिया में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों, संपर्क एवं कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, शाम छह बजे पीएम मोदी की मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संग प्रस्तावित है। भारत-रूस संबंधों के मौजूदा दौर में इस बैठक को खास महत्व दिया जा रहा है। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी भी इनके प्रमुख स्तंभ हैं।
जज को प्रभावित करने की कोशिश मामले में सुकेश की अर्जी पर दिल्ली पुलिस ने उठाए सवाल, 3 नवंबर को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर की ओर से दायर अर्जी की मेंटेनेबिलिटी पर नोटिस जारी किया है। मामले में सुकेश पर आरोप है कि उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर निचली अदालत के जज को प्रभावित करने की कोशिश की थी। इस मामले में निचली अदालत पहले ही सुकेश को सजा सुना चुकी है। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने उसकी अर्जी पर सवाल उठाया है। हाईकोर्ट इस मुद्दे पर अगली सुनवाई 3 नवंबर को करेगा। यह मामला साल 2017 का है। उस समय सुकेश चंद्रशेखर एक भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था। इसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई कर रही विशेष जज पूनम चौधरी को फोन किया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, फोन करने वाले व्यक्ति ने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का निजी सचिव बताया। इसके बाद एक दूसरे व्यक्ति ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताते हुए जज पूनम चौधरी पर सुकेश को जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। फोन करने वाले ने उन्हें एक नंबर भी दिया और उस पर संपर्क करने को कहा। हालांकि जज पूनम चौधरी इस दबाव में नहीं आईं। उन्होंने दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट के संबंधित जज के कार्यालय से मामले की जानकारी ली। वहां से उन्हें पता चला कि संबंधित जज ने ऐसा कोई फोन नहीं किया और जिस व्यक्ति को उनका निजी सचिव बताया गया था, वह भी उनके कार्यालय में काम नहीं करता। इसके बाद पूरे मामले की शिकायत की गई और पुलिस जांच शुरू हुई। जांच के बाद सुकेश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामले में सुनवाई आगे बढ़ी और अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह पेश किए गए। जज पूनम चौधरी ने भी अदालत के सामने अपनी गवाही दी और बताया कि किस तरह उन्हें फोन करके सुकेश को जमानत देने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। बाद में निचली अदालत ने सुकेश को इस मामले में दोषी ठहराया और उसे 8 साल की सजा सुनाई। सुकेश चंद्रशेखर ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, जिसमें उसे सुप्रीम कोर्ट के फर्जी जज बनकर न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में दोषी ठहराया गया था. लेकिन हाई कोर्ट में पहुंचते ही उसकी याचिका के सामने एक कानूनी सवाल खड़ा हो गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जब निचली अदालत इस मामले में फैसला सुना चुकी है और सजा भी हो चुकी है तो ऐसे में सुकेश के लिए अर्जी दाखिल करने के बजाय अपील दायर करना सही रास्ता होगा। हाई कोर्ट ने फिलहाल इस सवाल पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने अर्जी की मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर नोटिस जारी किया है और मामले की आगे की सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख तय की है।
‘भारत हमारे लिए बड़े भाई जैसा’, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बोले किर्गिज नागरिक

बिश्केक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान के आधिकारिक दौरे पर हैं। यात्रा के दौरान उनसे देश-विदेश के लोगों ने मुलाकात की। उनसे मिलने वाले लोगों के लिए यह महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी। किसी के लिए यह “जिंदगी भर याद रहने वाला मौका” था, तो किसी के लिए वह क्षण खास था जब टीवी पर दिखाई देने वाले प्रधानमंत्री को पहली बार सामने से देखने का मौका मिला। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद किर्गिस्तान के सैन्य अधिकारियों, योग प्रशिक्षकों और भारत से जुड़े लोगों की भावनाएं जानने की कोशिश आईएएनएस ने की। किर्गिस्तान के एक सैन्य अधिकारी कैप्टन तालाइबेक ने भारत के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते को दोनों देशों के संबंधों की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने भारत की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में तीन साल और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में एक साल प्रशिक्षण लिया है। उनके लिए भारत केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि उनके सैन्य जीवन और व्यक्तिगत अनुभवों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा, “भारत के साथ मेरा रिश्ता बहुत मजबूत है। वहां मेरे दोस्त हैं, मेरे कोर्समेट हैं। आज जब हम दोनों अकादमियों से प्रशिक्षण लेकर बाहर आ चुके हैं, तो हम भारत और किर्गिस्तान के बीच एक पुल की तरह काम कर रहे हैं।” किर्गिस्तान और भारत के बीच सैन्य सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर’ का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। कैप्टन तालाइबेक के लिए प्रधानमंत्री मोदी से मिलना भी एक विशेष अनुभव रहा। किर्गिज गणराज्य की महिला कांग्रेस के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की प्रमुख गुलाइम एशबायेवा के मुताबिक पीएम मोदी से मुलाकात प्रेरणास्पद थी। उन्होंने कहा, “मैं उनसे मिली और मुझे ये पल हमेशा याद रहेंगे। उनसे मैं बहुत प्रेरित हुई।” लेफ्टिनेंट तिलेमन ने कहा, ये शानदार थी और कल्पना से परे थे। हमारे देशों के संबंध बहुत सहज हैं। हम लोग साथ मिलकर सैन्य अभियान का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने इसे “लाइफटाइम अपॉर्च्युनिटी” बताते हुए कहा कि हर किसी को किसी देश के प्रधानमंत्री से आमने-सामने मिलने का अवसर नहीं मिलता। एक अन्य सैन्य अधिकारी सीनियर लेफ्टिनेंट बैमुर मुर्जा ने हिंदी में बात की। उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को यादगार बताया। उन्होंने खुद को सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि भारत में प्रशिक्षण के दौरान बनाए गए रिश्ते आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपने भारतीय कोर्समेट्स को संदेश देते हुए कहा, “मैं अपने पुराने कोर्समेट्स और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देना चाहता हूं। सभी के लिए खुशहाल जीवन की कामना करता हूं। प्रधानमंत्री से मिलना बड़ा अवसर था, जो सबको नसीब नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा कि वह मोदी को अब तक सिर्फ टेलीविजन पर देखते थे, लेकिन पहली बार उन्हें सामने से देखने का अवसर मिला। उन्होंने इसे अपने लिए एक बड़ा मौका बताया। प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत में सिर्फ कूटनीति या राजनीति ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी सामने आए। स्नो लेपर्ड संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े कौस्तुभ शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ उनकी छोटी-सी बातचीत बेहद सार्थक रही। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास की जरूरत पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत छोटी थी, लेकिन वह “बहुत उत्पादक” रही।” भारत-किर्गिस्तान संबंधों को लेकर शर्मा ने कहा कि दोनों देश पहले से ही अच्छे मित्र हैं और दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव मौजूद है। हालांकि, उनके मुताबिक व्यापार, लोगों के बीच संपर्क, क्षमता निर्माण और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की अभी काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, “आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, संरक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाया जा सकता है।” योग साधक अरीना नियाजबेकोवा ने भारत को किर्गिस्तान का “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि भारत हमेशा किर्गिस्तान के साथ खड़ा रहा है और दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत हैं। भारत और किर्गिस्तान के रिश्तों में योग एक अलग तरह की कड़ी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान योग से जुड़े कई लोगों ने भी भारत के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त की। किर्गिस्तान की योग प्रशिक्षक लुनारा ने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के रिश्ते “बहुत गर्मजोशी भरे” हैं। उन्होंने कहा, “हम भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अवसर हमारे लिए बहुत खास है।” उन्होंने भारत में योग सिखाने के अपने अनुभव को भी साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने भारत में करीब 10 वर्षों तक योग सिखाया है और इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को योग से जोड़ने का अवसर मिला। एक अन्य योग प्रशिक्षक असिलकान ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में खुद को फिट रखने के लिए योग सीखा था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का हिस्सा बन गया और फिर उन्होंने दूसरों को भी योग सिखाना शुरू किया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह सांस लेने, चलने-फिरने और सोचने के तरीके से भी जुड़ा है। योग अब मेरी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।” किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, खासकर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में। बिश्केक में रहने वाले लोगों ने भी भारत और किर्गिस्तान के बीच बढ़ते मानवीय संपर्क को दोनों देशों के रिश्तों की महत्वपूर्ण ताकत बताया। असिलकान ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बेहद गर्मजोशी और मित्रता वाले हैं। उन्होंने भारत की यात्रा का अपना अनुभव भी साझा किया और कहा कि किर्गिस्तान में भारतीय छात्रों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में पढ़ाई कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है।
सरकार के एनएम-आईसीपीएस मिशन से साइबर-फिजिकल सिस्टम नवाचार को मिली रफ्तार, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को मिला प्रशिक्षण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार का राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (एनएम-आईसीपीएस) देश में उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास, नवाचार और कौशल निर्माण का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। एक आधिकारिक फैक्टशीट में सोमवार को कहा गया कि इस मिशन ने अब तक 1,146 प्रौद्योगिकियों के विकास को सक्षम बनाया है और कृषि, स्वास्थ्य सेवा, खनन, साइबर सुरक्षा, उन्नत संचार तथा पोजिशनिंग जैसे क्षेत्रों में 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास में योगदान दिया है। फैक्टशीट के अनुसार, इस मिशन के तहत कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें अब तक 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। एनएम-आईसीपीएस, टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) और ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क (टीटीआरपी) के माध्यम से प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और उद्यमिता को एकीकृत करते हुए एक व्यापक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। इसके साथ ही मिशन ने बौद्धिक संपदा के निर्माण और लाइसेंसिंग को भी बढ़ावा दिया है। फैक्टशीट में कहा गया है कि मानव संसाधन विकास और कौशल उन्नयन के क्षेत्र में चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो साइबर-फिजिकल सिस्टम से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इस योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोधार्थियों को अब तक 5,824 फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं। मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य अनुसंधान-आधारित नवाचारों को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना भी है। इसी दिशा में एनएम-आईसीपीएस ने अब तक 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ कंपनियों को प्रोत्साहित और इनक्यूबेट किया है। इन पहलों के माध्यम से 24,000 से अधिक रोजगार सृजन हुए हैं। सरकार ने मिशन के तहत देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए हैं। सेक्शन-8 कंपनियों के रूप में स्थापित ये हब नई तकनीकों के विकास, शोध को उत्पादों में बदलने और तकनीक-आधारित स्टार्टअप को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। फैक्टशीट के अनुसार, ये टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम करते हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन एवं कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संवर्धन, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। एनएम-आईसीपीएस देश में साइबर-फिजिकल सिस्टम-आधारित अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा उपलब्ध कराता है। यह मिशन शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाता है, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं, औद्योगिक क्षमताओं और उभरते बाजार अवसरों से जोड़ा जा सके। बयान में कहा गया है कि यह मिशन अनुसंधान एवं विकास से लेकर उत्पाद निर्माण और स्टार्टअप स्थापना तक पूरे नवाचार चक्र को कवर करता है। सरकार का मानना है कि इससे भारत को साइबर-फिजिकल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वचालन और अन्य उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।
राजनाथ सिंह करेंगे डिफेंस पीएसयू के कामकाज की वार्षिक समीक्षा

नई दिल्ली। भारत के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के प्रदर्शन की वार्षिक समीक्षा की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 1 सितंबर को नई दिल्ली में कुल 16 डिफेंस पीएसयू के प्रदर्शन की वार्षिक समीक्षा करेंगे। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और रक्षा निर्यात बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसी बैठक के दौरान 7 डिफेंस पीएसयू सरकार को लाभांश के चेक सौंपेंगे। डिफेंस पीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार के पास मौजूद इक्विटी हिस्सेदारी के लाभांश के चेक रक्षा मंत्री को देंगे। इनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, बीईएमएल और मिधानी शामिल हैं। वहीं इस अवसर पर राजनाथ सिंह डिफेंस पीएसयू से संबंधित चार पुस्तकों का भी विमोचन करेंगे। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू’, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की आत्मनिर्भरता की दिशा में यात्रा व ‘दिशा’ , छात्रों को रक्षा तकनीक और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी देने की डिफेंस पीएसयू की पहल शामिल हैं। इनके अलावा एचएएल का आधुनिकीकरण रोडमैप व एचएएल का स्वदेशीकरण रोडमैप पर भी दो अलग-अलग पुस्तकें जारी की जाएंगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को रक्षा तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमताओं को और मजबूत करना है। मंत्रालय का कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में डिफेंस पीएसयू का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। सभी 16 डिफेंस पीएसयू का कुल कारोबार 1.29 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 15.4 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, वित्त वर्ष 2025-26 में टैक्स के उपरान्त इन उपक्रमों का कुल लाभ 23,136 करोड़ रुपए रहा। इसमें पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। डिफेंस पीएसयू के प्रदर्शन में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रक्षा निर्यात में हुई भारी वृद्धि रही। वित्त वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू के रक्षा निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 151.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि भारत के रक्षा उत्पादन को घरेलू जरूरतों से आगे ले जाकर वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वार्षिक समीक्षा के दौरान डीपीएसयू के प्रदर्शन के साथ-साथ नई स्वदेशी तकनीकों के विकास, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और निर्यात विस्तार से जुड़े प्रयासों पर भी चर्चा होगी।
बादशाह ने रिलीज किया पहला मराठी हिप-हॉप गाना ‘चिमना’, बोले- ये महाराष्ट्र के नाम लव लेटर है

मुंबई। रैपर बादशाह ने अपना पहला मराठी हिप-हॉप सॉन्ग ‘चिमना’ सोमवार को रिलीज कर दिया है। इस गाने में पारंपरिक मराठी लोक संगीत को नए और मॉडर्न अंदाज में पेश किया गया है। ताकि हर उम्र के लोग इसे पसंद करें। यह गाना दरअसल आगामी मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ का एक पारंपरिक लोकगीत ‘एक चिमणा चिवचिवला’ है। बादशाह ने इस मराठी ग्रामीण लोकगीत को आधुनिक रैप और दमदार बीट्स के साथ एक ग्लोबल तड़का दिया है। गाने की शुरुआत मशहूर ग्रामीण हुकलाइन ‘एक चिमणा चिवचिवला / माझा सजण जागा झाला हो/ सूर्य उगवला’ से होती है। इसके बाद बादशाह अपने सिग्नेचर हिप-हॉप अंदाज में लोकल फ्लेवर जोड़ते हुए हिंदी-मराठी मिक्स वर्सेज (जैसे: डांस कर रही देखो मावशी मावशी) गाते हैं। अपने पहले मराठी गाने को और भी खास बनाने के लिए बादशाह ने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया है। मराठी अभिनेत्री नेहा खान भी नजर आ रही हैं। गाने में बॉलीवुड सिंगर दिव्या कुमार और मशहूर मराठी लोक गायक नागेश मोरवेकर ने आवाज दी है। म्यूजिक प्रोड्यूसर हितेन ने इसे बनाया है, जिसमें देसी लोक संगीत और बादशाह के हिट स्टाइल का शानदार मेल है। इस गाने का म्यूजिक वीडियो महाराष्ट्र के कोल्हापुर की खूबसूरत गलियों और वहां की संस्कृति को ध्यान में रखकर फिल्माया गया है, जिसमें एक स्पेशल हल्दी सेरेमनी का वाइब भी है। वीडियो में बादशाह के साथ प्रसिद्ध मराठी अभिनेत्री नेहा खान थिरकती हुई नजर आ रही हैं। इस गाने को लेकर बादशाह ने साझा किया कि भारत का क्षेत्रीय संगीत एक खजाना है और वे देश के हर कोने के संगीत का जश्न मनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “भारत का क्षेत्रीय संगीत किसी खजाने से कम नहीं है और मैं इसके हर कोने को सेलिब्रेट करना चाहता हूं। ‘चिमना’ महाराष्ट्र की शानदार संस्कृति के लिए मेरी तरफ से एक प्रेम पत्र है। मैं बहुत खुश हूं कि यह प्रोजेक्ट इतना अच्छा बना है, और यह गाना मेरे सभी मराठी फैंस के लिए है जो शुरू से मेरे साथ हैं।
मायावती ने 2027 के लिए फूंका बिगुल, बोलीं-‘रेवड़ियों’ के सहारे चुनावी छलावे से रहें सावधान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने सोमवार को सियासी मोर्चा खोलते हुए विरोधी दलों की चुनावी रणनीति पर सीधा हमला बोला। ‘रेवड़ियों’, लुभावने वादों और चुनावी घोषणाओं को लेकर मतदाताओं को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले निजी लाभ का लालच देकर वोट प्रभावित करने की कोशिशों से जनता को सावधान रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी के प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक के संगठन को चुनावी तैयारी में जुटने का निर्देश देते हुए 2027 में बीएसपी की पांचवीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य सामने रखा। मायावती ने लखनऊ में पार्टी के प्रदेश, मंडल और सभी 75 जिलों के अध्यक्षों समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में खास तौर पर पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रगति, संगठन की स्थिति और पिछले दो बैठकों के बाद बूथ स्तर तक किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों को और तेज एवं प्रभावी बनाने का आह्वान किया। मायावती ने कहा कि विरोधी दलों के साम दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का मुकाबला करते हुए उत्तर प्रदेश में बीएसपी की पांचवीं बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। मायावती ने चुनाव से पहले महिलाओं समेत मतदाताओं को निजी लाभ पहुंचाने वाली ‘रेवड़ियों’ तथा विभिन्न प्रकार के लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद सरकार बनने पर वादाखिलाफी की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश की जनता को ऐसे चुनावी छलावे से पहले ही सावधान करना जरूरी है। मायावती ने मतदाताओं से विरोधी पार्टियों के छलावे और विश्वासघात से बचने तथा अपनी मर्जी के मुताबिक स्वतंत्र और निष्पक्ष होकर मतदान करने की अपील की। बीएसपी प्रमुख ने कहा कि इसे केवल चुनावी मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि देश और जनहित के लिहाज से भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। मायावती ने विभिन्न राज्यों में चुनाव के बाद सरकारों की कथित वादाखिलाफी, विश्वासघात और जनहित एवं जनकल्याण के प्रति गैर-जिम्मेदारी को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीएसपी ऐसे जनविरोधी रवैये के खिलाफ संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के लोग भी जनविरोधी रवैये और कार्यकलापों के कारण संघर्ष के लिए उतर रहे हैं और पुलिस मुकदमों जैसे सरकारी दमन का सामना कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे जनहित और जनकल्याण को प्राथमिकता दें तथा संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत हर वर्ष जनता के हित में काम करें। उनके मुताबिक, केवल चुनाव के समय किए जाने वाले वादे और घोषणाएं जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकतीं। बीएसपी प्रमुख ने महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन को लेकर भी सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण उत्तर प्रदेश की जनता मजबूरी में लगातार दूसरे राज्यों में पलायन कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार की ओर से किए जाने वाले वादे और घोषणाएं अक्सर ‘झूठ के मुंह में जीरा’ साबित होती हैं और चुनावी छलावे से ज्यादा कुछ नहीं लगतीं। मायावती ने कहा कि सरकारों को चुनावी मौसम का इंतजार करने के बजाय पूरे कार्यकाल में जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकारों ने किसी मुहूर्त या चुनाव की प्रतीक्षा किए बिना लगातार काम किया और सामाजिक परिवर्तन तथा आर्थिक मुक्ति से जुड़े कार्यों को अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक तौर पर करके दिखाया। मायावती ने कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य देते हुए कहा कि बीएसपी को उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसी सरकार बनाने के लिए काम करेगी जिसमें ‘कानून द्वारा कानून का बेहतर राज’ हो और शोषण, अत्याचार तथा भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था कायम की जाए। बैठक में बीएसपी संस्थापक एवं जन्मदाता मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने कार्यक्रम को पूरी मिशनरी भावना के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लखनऊ में वीआईपी रोड पर बीएसपी सरकार द्वारा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित भव्य ‘बौद्ध स्मृति उपवन’ के सामने विशाल गुंबद के आकार के ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में कार्यक्रम आयोजित होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत पूरे प्रदेश से लोग यहां एकत्र होंगे और कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मायावती ने यूपी-दिल्ली सीमा पर बीएसपी सरकार द्वारा स्थापित ‘बहुजन प्रेरणा केंद्र’ में रख-रखाव का सरकारी कार्य चलने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर किसी दुर्घटना की आशंका को देखते हुए इस वर्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश, प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और राजधानी लखनऊ में रहने वाले लोग ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे। मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुई भारी जान-माल की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए तत्काल आगे आना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर पूर्वांचल की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबी, भूख और कर्ज के शोषण के कारण वहां के लोगों का जीवन और कठिन हो सकता है। उन्होंने आपदा से संबंधित योजनाओं का लाभ तत्काल जरूरतमंद लोगों और परिवारों तक पहुंचाने की मांग की।
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड को 30 हजार रुपये करने की मांग

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का लंबित स्टाइपेंड बढ़ोतरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा समय में उन्हें महज 12,300 रुपये मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो देश के कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। डॉक्टरों ने सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने और भविष्य में समय-समय पर इसका संशोधन सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर प्रशासन के सामने कई बार अपनी बात रखी और उपलब्ध कानूनी एवं प्रशासनिक माध्यमों का भी इस्तेमाल किया, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बावजूद उनकी मांग पर अंतिम फैसला नहीं हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, स्टाइपेंड बढ़ोतरी से जुड़ी फाइल और प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। एक इंटर्न डॉक्टर ने आईएएनएस को बताया कि पहले प्रस्ताव में स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर करीब 26 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को बने हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग अब केवल फाइल आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किए जाने की है। डॉ. तनिष ने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग है कि मौजूदा 12,300 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए, ताकि जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों को देश के दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समान भुगतान मिल सके। दूसरी मांग स्टाइपेंड के नियमित और समयबद्ध संशोधन की है। डॉ. तनिष के मुताबिक, महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में स्टाइपेंड में भी समय-समय पर बदलाव होना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था बना देती है तो भविष्य में आने वाले जूनियर डॉक्टरों को इसी तरह आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने पहले बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने की पूरी कोशिश की। कई अधिकारियों से मुलाकात की गई और अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आखिरी विकल्प के तौर पर चुना गया। वहीं, प्रदर्शन कर रहे डॉ. शाहनवाज ने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए चिंता की बात है कि डॉक्टरों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है। डॉ. शाहनवाज ने दूसरे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी पहले स्टाइपेंड जम्मू-कश्मीर के मुकाबले अधिक था और अब वहां इसमें और बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों को भी समान स्तर का स्टाइपेंड मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में मरीजों का दबाव काफी अधिक है और डॉक्टरों पर काम की जिम्मेदारी भी बड़ी है। इसके बावजूद इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के मुकाबले बेहद कम है। उनका कहा कि उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता पसंद नहीं है। वे मरीजों की सेवा करना चाहते हैं और अपनी ड्यूटी को गंभीरता से निभाना चाहते हैं। इस समय उन्हें वार्ड, ओपीडी और अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करनी चाहिए थी, लेकिन सरकार की ओर से मांग पर कार्रवाई नहीं होने के कारण वे अपनी ड्यूटी छोड़कर प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं।