राजस्थान: भाजपा ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, पूर्व महापौर को मिला टिकट

जयपुर। भाजपा ने सोमवार को जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी के सामने 150 से अधिक वार्डों में टिकट वितरित करने की बड़ी चुनौती थी क्योंकि असंतुष्ट उम्मीदवारों के बगावत करके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की आशंका थी। भाजपा के राज्य कार्यालय में रविवार देर रात तक बैठकों का सिलसिला जारी रहा, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्य अध्यक्ष मदन राठौर और जयपुर की देखरेख करने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। विभिन्न राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने के लिए लंबे विचार-विमर्श और प्रयासों के बाद पार्टी ने अंतिम समय में अपने चयनित उम्मीदवारों को आधिकारिक फॉर्म-बी दस्तावेज और चुनाव चिन्ह सौंपे। भाजपा ने अनुभवी पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्पित नेताओं, महिला मोर्चा की पदाधिकारियों और कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व पार्षदों को मिलाकर उम्मीदवार उतारे हैं। उम्मीदवारों की सूची में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम वार्ड स्तर के पार्षद चुनाव में पूर्व जयपुर मेयर ज्योति खंडेलवाल को उम्मीदवार बनाना है। खंडेलवाल, जो पहले जयपुर की पहली महिला महापौर रह चुकी हैं और बाद में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ीं, उन्हें अब 2026 के जयपुर नगर निगम चुनावों में पार्षद सीट के लिए भाजपा का टिकट दिया गया है। खंडेलवाल ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं। वार्ड स्तर पर पूर्व महापौर को उम्मीदवार बनाने के भाजपा के फैसले ने जयपुर के राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। उनका राजनीतिक सफर अब एक तरह से पूरा हो चुका है। खंडेलवाल ने कांग्रेस वार्ड पार्षद के रूप में अपना करियर शुरू किया, फिर जयपुर की महापौर बनीं और बाद में जयपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी रहीं। भाजपा में शामिल होने के बाद वह एक बार फिर पार्षद चुनाव लड़ेंगी, जो उनके राजनीतिक करियर में एक नए चरण की शुरुआत है। जहां कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे खंडेलवाल के लिए भाजपा में जमीनी स्तर से अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मानते हैं, वहीं उनके समर्थक इसे पार्टी और शहर की सेवा करने का एक और मौका बताते हैं। भाजपा की सूची में आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र और जयपुर के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों के उम्मीदवार शामिल हैं। नीरज अग्रवाल को वार्ड 121 से दोबारा मनोनीत किया गया है। पूर्व पार्षद अग्रवाल ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की है। भाजपा महिला मोर्चा की राज्य उपाध्यक्ष अनुराधा माहेश्वरी को भी टिकट दिया गया है और वह वार्ड 107 से चुनाव लड़ेंगी। टिकटों के बंटवारे ने भाजपा के भीतर काफी आंतरिक प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया। कई वार्डों में एक ही सीट के लिए 10 से 15 मजबूत दावेदार पार्टी टिकट पाने की होड़ में थे। भाजपा नेतृत्व की प्रमुख चिंताओं में से एक यह सुनिश्चित करना था कि जिन उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला, वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल न करें या प्रतिद्वंद्वी पार्टियों में शामिल न हो जाएं। परिणामस्वरूप पार्टी ने उम्मीदवारों की पूरी सूची पहले से सार्वजनिक रूप से जारी न करने का विकल्प चुना। इसके बजाय, फॉर्म-बी दस्तावेज और पार्टी के प्रतीक चिन्ह नामांकन की अंतिम तिथि से कुछ समय पहले ही चयनित उम्मीदवारों को सीधे सौंप दिए गए, जिसका उद्देश्य विद्रोह की संभावना को सीमित करना था। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा की चुनाव मशीनरी ने अपना ध्यान पार्टी के भीतर असंतोष को संभालने और असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपना नामांकन वापस लेने के लिए राजी करने पर केंद्रित कर दिया है। पार्टी की तात्कालिक प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बागी उम्मीदवार 2 सितंबर की समय सीमा से पहले चुनाव से हट जाएं।

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष का बड़ा फैसला, करुप्पैया की जल्लीकट्टू संबंधी टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटाईं

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के विधायक करुप्पैया द्वारा जल्लीकट्टू को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणियों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया है। करुप्पैया शोलावंदन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पिछले गुरुवार को विधानसभा में की गई करुप्पैया की टिप्पणियों की अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (एएमएमके) सहित कई राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की। एआईएडीएमके ने 3 सितंबर को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिसमें विधायक पर तमिल संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े जल्लीकट्टू का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। यह निर्णय पारंपरिक खेल से जुड़े संगठनों और व्यक्तियों के बढ़ते राजनीतिक दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। करुप्पैया ने पहले अपने बयान की व्याख्या के तरीके पर खेद व्यक्त किया था। अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए विधायक ने कहा कि उनका इरादा जल्लीकट्टू को कमतर आंकना या तमिल शौर्य के प्रतीक के रूप में इसके महत्व पर सवाल उठाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में बुलफाइटिंग से जुड़े स्थलों की तर्ज पर बने एक स्थायी स्टेडियम में नियमित रूप से पारंपरिक आयोजन करने की प्रथा पर लक्षित थीं। करुप्पैया ने कहा कि इस तरह के माहौल में जल्लीकट्टू का आयोजन करना तमिल खेल के सांस्कृतिक चरित्र और पारंपरिक भावना के अनुरूप नहीं हो सकता। विधायक ने छात्रों पर बार-बार होने वाले जल्लीकट्टू आयोजनों के प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पोंगल त्योहार के दौरान अलंगनल्लूर और पलामेडु में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध प्रतियोगिताओं के अलावा पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में बार-बार जल्लीकट्टू कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। करुप्पैया के अनुसार, इस तरह के आयोजनों ने कुछ स्कूल और कॉलेज के छात्रों को नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखने के बजाय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनका हस्तक्षेप युवाओं का मार्गदर्शन करने और उन्हें शिक्षा को अधिक महत्व देने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से था। करुप्पैया ने कहा कि वह चाहते हैं कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करें, डिग्री हासिल करें और एक बेहतर भविष्य सुरक्षित करें। उन्होंने दोहराया कि उनका भाषण युवा पीढ़ी के प्रति चिंता से प्रेरित था, न कि जल्लीकट्टू के प्रति अनादर से। हालांकि टीवीके विधायक ने कहा कि यदि उनके शब्दों से युवाओं, जल्लीकट्टू समर्थकों या व्यापक तमिल समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।

पटना में चार युवकों की संदिग्ध हालात में मौत पर तेजस्वी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा-गरीबों की जा रही जान

पटना। बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में संदिग्ध परिस्थितियों में चार युवकों की मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और इनमें गरीब तथा वंचित वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। मीडिया से बातचीत में राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कोई पहली घटना नहीं है, जिसमें जहरीली शराब से लोगों की मृत्यु हुई है। इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हुई हैं। इसमें प्रशासन को देखना चाहिए। प्रशासन पूरी तरीके से लापरवाह है और बिहार में कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।” उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। आखिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं में लगातार गरीब तबके के लोगों की जान जा रही है। उन्होंने कहा, “लगातार गरीब ही मारा जा रहा है, खासतौर पर दलित समुदाय या अति पिछड़े समाज के लोग। जेल में भी उन्हीं लोगों को भेजा जा रहा है। जो घटना हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए।” नेता प्रतिपक्ष ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि चारों युवकों की मौत किन परिस्थितियों में हुई। दरअसल, रविवार को पटना के बाढ़ अनुमंडल में संदिग्ध परिस्थितियों में चार युवकों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। घटना बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव की है। ग्रामीणों का आरोप है कि चारों युवकों ने कथित तौर पर जहरीली शराब का सेवन किया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। बताया गया कि चारों युवकों की अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने अभी तक चारों युवकों की मौत की वजह के रूप में जहरीली शराब की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

‘कोर्ट पर मेरा अनुभव बहुत बुरा था’, यूएस ओपन से पहले ही राउंड में बाहर होने पर बोले जोकोविच

न्यूयॉर्क। 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच ने सोमवार को यूएस ओपन में अर्जेंटीना के मारियानो नवोन से पहले राउंड में मिली चौंकाने वाली हार के बाद कोर्ट पर अपने समय को बहुत बुरा अनुभव बताया। सर्बिया के स्टार टेनिस खिलाड़ी ने बताया कि लगातार शारीरिक समस्याओं – जैसे उल्टी, ऐंठन और दर्द – ने मैच खत्म करने की उनकी क्षमता पर बहुत बुरा असर डाला। एटीपी के अनुसार, हार के बाद जोकोविच ने कहा, “मुझे लगता है कि यह साफ था कि कोर्ट पर मेरे लिए अनुभव बहुत बुरा था। दुर्भाग्य से, इस साल लगभग हर मैच में मुझे इस समस्या का सामना करना पड़ा है। उल्टी होना एक गंभीर समस्या है। फिर मेरा पूरा शरीर जवाब देने लगता है, खासकर ऐंठन और दर्द के कारण। हां, आखिर में मेरी पीठ और कंधे ने साथ छोड़ दिया, और मैं मैच जीत नहीं सका।” इस हार ने जोकोविच के ग्रैंड स्लैम रिकॉर्ड में एक बड़ा बदलाव ला दिया। इस मैच से पहले 39 साल के इस खिलाड़ी को 2006 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद से किसी बड़े टूर्नामेंट के शुरुआती राउंड में हार का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्हें ग्रैंड स्लैम में पहली बार हार 2005 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में मिली थी। हालांकि, शारीरिक परेशानी होने के बावजूद नोवाक जोकोविच ने मैच में वापसी करते हुए खुद को जीत की मजबूत स्थिति में पहुंचा लिया था। वे दो सेट जीत चुके थे और एक सेट से आगे थे। चौथे सेट में भी उन्होंने एक ब्रेक की बढ़त बना ली थी, लेकिन इसके बाद उनकी दिक्कतें बढ़ने लगीं और मैच का रुख बदल गया। जोकोविच ने कहा, “मैं चौथे सेट में एक ब्रेक से आगे था, लेकिन मैच के चौथे गेम से ही मुझे लगातार संघर्ष करना पड़ रहा था। फिर भी, मैं उनकी जीत का श्रेय कम नहीं करना चाहता। उन्हें बधाई। वे एक अच्छे इंसान और फाइटर हैं। हालांकि, मुझे खेलने में मजा नहीं आया।” सर्बियाई खिलाड़ी ने माना कि अपनी हालत की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मैच से हटने के बारे में भी सोचा था। हालांकि, ठीक होने के कुछ पल और हार न मानने के उनके जज्बे ने उन्हें खेलते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “हां, मैंने ऐसा किया। मैंने एक सेट जीता और फिर तीसरा भी। तब मुझे लगा, ठीक है, शायद कोई मौका है। हां, मैं चौथे या पांचवें सेट में हार नहीं मानना ​​चाहता था। मैं मैच खत्म करना चाहता था।” मैच के आखिर में इस मौके का भावनात्मक असर भी साफ दिखा। निर्णायक सेट में 1-3 से पीछे चल रहे जोकोविच को न्यूयॉर्क में दर्शकों से जबरदस्त समर्थन मिला। उन्हें प्रोत्साहित करने की भीड़ की कोशिशों ने सर्बियाई खिलाड़ी को साफतौर पर भावुक कर दिया। चार बार के यूएस ओपन चैंपियन ने कहा, “वे (दर्शक) बहुत अच्छे थे। ऐसा अनुभव पाकर मैं बहुत आभारी हूं। जहां तक मैच और मेरे शरीर व खेल के साथ मेरे अनुभव की बात है, तो यह बिल्कुल भी सुखद नहीं था। कोर्ट पर बिताए हर पल से मुझे नफरत-सी हो रही थी। हालांकि, भीड़ और समर्थन के नजरिए से देखें तो शुरुआत से ही यह अविश्वसनीय था। वे अहम पलों में मेरा हौसला बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, और मुझे बहुत अफसोस है कि मैं उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया जितना मुझे करना चाहिए था, या कर सकता था, या उनके लिए करना चाहता था। हालांकि, आखिर में उन्होंने जो प्यार और सराहना दी, उसने सच में मेरा दिल छू लिया।

भारत एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में नेपाल के साथ खड़ा हैः राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से हुई भारी जनहानि और तबाही हुई है। भारत ने एक बार फिर अपने पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भारत एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में नेपाल के साथ खड़ा है। राजनाथ सिंह सोमवार को नई दिल्ली के बाराखंभा रोड स्थित नेपाल दूतावास पहुंचे। रक्षामंत्री ने नेपाल के साथ सुख-दुख के साथी का रिश्ता दोहराया। यहां उन्होंने इस त्रासदी पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दूतावास की शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर अपनी श्रद्धांजलि दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास जाकर शोक पुस्तिका में संदेश लिखकर अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ से नेपाल में लोगों की जानें गईं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के नागरिकों के साथ-साथ कई विदेशी नागरिकों को भी प्रभावित किया है, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। रक्षा मंत्री ने भारत सरकार और देश की जनता की ओर से नेपाल की जनता और वहां की सरकार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी में जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, भारत की संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके परिवारों के साथ हैं। उन्होंने बाढ़ में घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। रक्षा मंत्री ने नेपाल के साथ भारत के रिश्तों को केवल पड़ोसी देशों के संबंधों तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे ‘सुख-दुख के साथी’ का रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि एक करीबी मित्र और साझेदार के रूप में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा रहा है। इस कठिन समय में भी भारत अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल में चल रहे खोज, बचाव और पुनर्वास के प्रयासों में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। दरअसल 26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। अचानक आई बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और व्यापक स्तर पर संपत्ति एवं बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। आपदा की चपेट में नेपाली नागरिकों के अलावा कई विदेशी नागरिक भी आए हैं। ऐसे समय में नेपाल के दूतावास पहुंचकर रक्षा मंत्री की ओर से संवेदना व्यक्त करना भारत की ओर से पड़ोसी देश के प्रति एकजुटता और मानवीय समर्थन का संदेश है। इस दौरान भारत का संदेश साफ है कि नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में अकेला नहीं है। खोज और बचाव से लेकर राहत तथा पुनर्वास तक, भारत नेपाल के साथ खड़ा है।

ओवैसी के बयान पर भाजपा का पलटवार, पीएम को मिला उज्बेकिस्तान का सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात​

नई दिल्ली। उज्बेकिस्तान द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिए जाने पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपा नेताओं ने इसे भारत के लिए गौरव का क्षण बताया है। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा इसे ‘बाबर के देश से अवार्ड’ कहने पर एनडीए नेताओं ने पलटवार भी किया है। पुणे में सांसद किरीट सोमैया ने कहा, “नरेंद्र मोदी ने हिंदुत्व को इतनी ऊंचाई पर पहुंचाया है कि पूरी दुनिया उनका सम्मान करती है।” रायपुर में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने कहा, “ओवैसी के बयान अक्सर देश के हितों के खिलाफ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को पूरी दुनिया में मान्यता मिली है। उन्हें 36 देशों सहित कई देशों से सर्वोच्च सम्मान मिले हैं, जो एक वैश्विक नेता के रूप में उनके कद को दर्शाता है।” पटना में बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा, “दुनिया के सभी देश सम्मानित नरेंद्र मोदी की विदेश नीति से प्रभावित हैं। पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, हर देश में उनका स्वागत होता है। इससे देश का गौरव बढ़ता है।” भोपाल में भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “यह सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए गर्व की बात है। मोदी जी एक विश्व नेता और भारत के प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें दुनियाभर के कई देशों ने सम्मानित किया है। हम सभी को उन पर गर्व है।” भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, “एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को प्रधानमंत्री को मिला सम्मान पसंद नहीं आ रहा है। वह कह रहे हैं कि बाबर यहीं से आया था। अगर बाबर आया था, तो वह देश अलग है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस देश का सर्वोच्च सम्मान मिला है, तो यह सिर्फ पीएम मोदी का सम्मान नहीं है, बल्कि भारत का सम्मान है। पूरी दुनिया में चाहे वह राष्ट्रमंडल देश हो या कोई इस्लामिक देश, सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है।” मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा, “असदुद्दीन ओवैसी, आपको हर चीज में बाबर ही दिखता है। यही आपकी समस्या है। उज्बेकिस्तान प्रधानमंत्री का सम्मान करता है और आपको इससे दिक्कत होती है, इसलिए आप बाबर का जिक्र ले आते हैं। शायद बाबर आपके डीएनए में है और इसीलिए आप उससे आगे सोच ही नहीं पाते। आपकी सोच वहीं से शुरू और वहीं खत्म होती है। जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रवाद और दुनिया को एक समुदाय मानने की बात करता है, तब भी आपको लगता है कि बाबर ही आपका आदर्श है।

पश्चिम बंगाल: डेंगू के मामलों को लेकर पांच संवेदनशील जिलों की पहचान, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील पांच जिलों की पहचान की गई है। अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के पांच जिलों की पहचान डेंगू के सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिलों के तौर पर की है। लगातार मौसम के बदलने और बारिश की वजह से राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कुछ जिलों में डेंगू के मामले और उससे होने वाली मौतों के मामले बढ़े हैं। पिछले महीने और मौजूदा मॉनसून के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को देखते हुए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पांच जिलों की पहचान डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों के तौर पर की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजधानी कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद की संवेदनशील इलाकों के तौर पर पहचान की गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “डेंगू के अलावा, इन जिलों से ‘प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम’ के मामले भी सामने आए हैं। यह मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप है जो किडनी पर बुरा असर डाल सकता है।” इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और डॉक्टरों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को सही-सही बताएं, न कि उसे छिपाएं या कम करके दिखाएं। पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान ऐसी शिकायतें आम थीं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ बताने की कोई जरूरत नहीं है। पिछली राज्य सरकार हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को ‘अज्ञात बुखार’ के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। छिपाने के लिए क्या है? अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों के डेंगू लिखने से डरने की कोई वजह नहीं है। अगर डेंगू है, तो वे डेंगू लिखेंगे। अगर नहीं है, तो वे नहीं लिखेंगे।

‘अर्जुन रेड्डी’ के दिनों को याद कर भावुक हुए विजय देवरकोंडा, बोले- संदीप रेड्डी वांगा और मेरा रिश्ता बेहद खास

मुंबई। विजय देवरकोंडा और संदीप रेड्डी वांगा ने अपने करियर के एक ऐसे दौर में साथ कदम रखा था, जब उनके पास न तो पहचान थी और न ही फिल्मों की दुनिया में कोई बड़ा सहारा। एक फिल्म पर दोनों ने अपना करियर और भविष्य तक दांव पर लगा दिया था। उस मुश्किल समय में जो भरोसा दोनों के बीच बना, वह आज भी कायम है। यही वजह है कि जब विजय से संदीप के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके मन में संदीप के लिए बेशुमार प्यार है और वह उसे शब्दों में नहीं बता सकते। विजय देवरकोंडा निर्देशक वेणु गोपाल रेड्डी की रोमांटिक फिल्म ‘रोमनचकम’ के प्री-रिलीज इवेंट में पहुंचे थे। इस फिल्म को संदीप रेड्डी वांगा प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी दौरान विजय ने संदीप के साथ अपने रिश्ते और फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ के दिनों को याद किया। विजय ने कहा, ”संदीप के लिए मेरे मन में जो प्यार है, उसे मैं शब्दों में नहीं बता सकता। यह सिर्फ निर्देशक और अभिनेता का रिश्ता नहीं है। यह सिर्फ भाई का रिश्ता या दोस्ती भी नहीं है। यह कुछ और है। मेरा संदीप के साथ रिश्ता करियर के शुरुआती संघर्षों से जुड़ा हुआ है।” विजय ने ‘अर्जुन रेड्डी’ के बनने के समय को याद करते हुए बताया कि उस वक्त दोनों के पास ज्यादा पैसा या किसी तरह का प्रभाव नहीं था। फिल्म बनाना उनके लिए किसी बड़ी लड़ाई से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें खुद नहीं पता था कि वे क्या कर रहे हैं। अगर फिल्म नहीं चलती तो दोनों के लिए हालात बहुत मुश्किल हो सकते थे। विजय ने कहा, ”उस वक्त हम दोनों साथ में जंग लड़ रहे थे। हमें नहीं पता था कि हम क्या कर रहे हैं। अगर फिल्म नहीं चलती तो हमारे लिए हालात बहुत मुश्किल हो सकते थे। हम दोनों के पास पैसे नहीं थे। हमारी कोई पहचान नहीं थी। हमारे कोई फैंस नहीं थे, क्योंकि तब तक फिल्म ‘पेलीचूपुलु’ रिलीज नहीं हुई थी।” अभिनेता ने कहा, ”मुझे संदीप को सिर्फ इसलिए याद नहीं करता कि ‘अर्जुन रेड्डी’ सफल रही या बाद में वह फिल्म इतनी बड़ी बन गई। मेरे लिए इस फिल्म से जुड़े असली मायने हमारे साथ बिताए हुए पल हैं। फिल्म बनाते समय हमने न सिर्फ काम किया, बल्कि अपनी जिंदगी, तनाव और मुश्किलें भी एक-दूसरे के साथ साझा कीं।” विजय ने कहा, ”फिल्म बनाने के लिए प्रणय और प्रभाकर ने अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। उन्होंने संदीप पर भरोसा करके फिल्म के लिए पैसा लगाया था और संदीप ने भी मुझ पर पूरा विश्वास रखा। इतना ही नहीं, उन्होंने उन लोगों को भी मेरी काबिलियत पर भरोसा करने के लिए तैयार किया।” अभिनेता ने कहा, ”उस फिल्म के साथ बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ था। एक फिल्म के लिए परिवार की कमाई, भविष्य और बहुत सारी उम्मीदें लगा दी गई थीं। इसी वजह से वह दौर मेरे लिए बेहद खास है। संदीप मेरे लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, और मैं भी संदीप के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूं।’ बता दें कि संदीप रेड्डी वांगा की आने वाली फिल्म ‘रोमांचकम’ दुनिया भर के सिनेमाघरों में 3 सितंबर को रिलीज होने वाली है।

एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद जोमैटो ने एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश की बिक्री पर रोक लगाई

नई दिल्ली। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने सोमवार को कहा कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट द्वारा एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश बेचने के मामले में ‘जीरो-टॉलरेंस’ पॉलिसी अपनाई है और ऐसे सभी खाद्य पदार्थों को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा कई रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई के बाद, कंपनी ने उन डिश को तुरंत हटा दिया है जिन्हें पार्टनर्स ने एनालॉग डेयरी वाली डिश बताया है। कंपनी ने कहा कि इस कदम का मकसद ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। साथ ही, कंपनी ने चेतावनी दी कि जो रेस्टोरेंट उसकी शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है। नई पॉलिसी के तहत, रेस्टोरेंट पार्टनर्स से कहा गया है कि वे प्राकृतिक डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल शुरू करें। जहां तुरंत ऐसा करना मुमकिन नहीं है, वहां उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने मेन्यू से ऐसे आइटम हटा दें जिनमें एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हुआ हो। इसके अलावा, रेस्टोरेंट से यह भी कहा गया है कि वे आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी की जांच करें, ताकि इस्तेमाल हो रही सामग्री की पुष्टि हो सके और यह पक्का किया जा सके कि जोमैटो पर लिस्ट किए गए प्रोडक्ट्स की जानकारी सही है। जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा, “जोमैटो का मुख्य मकसद अधिक से अधिक लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखने के साथ, यह पक्का करना है कि हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर जो खाना लिस्ट करते हैं और परोसते हैं, वह साफ-सुथरे और तय मानकों के मुताबिक हो।” उन्होंने आगे कहा, “यह पॉलिसी कंपनी की उस प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी हमारे जैसी है।” यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मिलावट को लेकर नियामक जांच बढ़ने के बीच लिया गया है। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन और नियमों का पालन न करने की बात सामने आने के बाद दो खाद्य संचालनकों के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई की थी। रेगुलेटर ने नियमों का पालन न करने वाले घी उत्पादों और मिलावट की चिंताओं को देखते हुए लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और रोक लगाने के आदेश जारी किए। एक और कार्रवाई में, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लोगों की सेहत से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए नकली ‘एनालॉग’ पनीर के प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी। यह कार्रवाई लैब में हुई जांच के नतीजों के बाद की गई, जिसमें राज्य में हाल ही में टेस्ट किए गए पनीर के 35 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल वेजिटेबल-फैट की मिलावट के कारण क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए थे। राज्य के रेगुलेटर के मुताबिक, होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और क्लाउड किचन्स को डेयरी उत्पादों के विकल्प का इस्तेमाल करने, उन्हें बनाने, परोसने या स्टोर करने से रोक दिया गया। जोमैटो ने कहा कि उसकी पॉलिसी लागू रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक है और यह ग्राहकों के लिए ज्यादा हेल्दी खाने के विकल्पों और ज्यादा पारदर्शिता पर उसके बड़े फोकस का हिस्सा है।

बलूचों ने ‘इंटरनेशनल इनफोर्समेंट डिसअपियरेंस डे’ पर किया पीड़ितों को याद, पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की अपील

क्वेटा। ‘इंटरनेशनल इनफोर्समेंट डिसअपियरेंस डे’ (जबरन गायब किए गए पीड़ितों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) पर बलूचिस्तान के कई मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने उन लोगों को याद किया जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने उनके घरों, सड़कों और समुदायों से जबरन गायब कर दिया था। साथ ही, उन्होंने उन परिवारों के प्रति एकजुटता भी जताई जो बरसों से अपने प्रियजनों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित जबरन गायब किए गए हजारों बलूचों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सार्थक और प्रभावी कदम उठाएं। हर साल 30 अगस्त को ‘जबरन गायब किए गए पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किया गया दिन है, जिसे 2011 में मानवाधिकारों के इस गंभीर उल्लंघन के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों व उनके परिवारों के सम्मान में शुरू किया गया था। इस मौके पर, बलूचिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने कहा कि जनवरी 2016 से जुलाई 2026 के बीच, उसके पास पूरे बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के 9,130 ​​मामलों का रिकॉर्ड है। एचआरसीबी ने कहा, “यह असल संख्या का एक छोटा सा हिस्सा है, क्योंकि कई इलाके सुरक्षा बलों के कड़े नियंत्रण में हैं, जिससे अनगिनत मामलों का रिकॉर्ड रखना मुश्किल हो जाता है। हर संख्या के पीछे एक मां अपने बेटे का इंतजार कर रही है, एक बच्चा अपने माता-पिता का इंतजार कर रहा है, एक पत्नी अपने पति का इंतजार कर रही है, और एक परिवार हर दिन अनिश्चितता के साथ जी रहा है।” बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ)-आजाद ने पाकिस्तानी बलों पर बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ “गैर-कानूनी कार्रवाई” करने का आरोप लगाया और कहा कि जबरन गायब करना इन अत्याचारों के सबसे प्रमुख रूपों में से एक है। यह आरोप लगाते हुए कि राज्य ने अब विभिन्न तरीकों और नीतियों के माध्यम से इस चलन को सामान्य बना दिया है, संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल कार्रवाई करने और इन “गंभीर अपराधों” के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की। बीएसओ ने एक्स पोस्ट में कहा, “2026 की छमाही बीत गई है। अब तक 800 से अधिक बलूच छात्र, राजनीतिक कार्यकर्ता, शिक्षक, डॉक्टर, मजदूर, दुकानदार और अन्य नागरिक पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा जबरन गायब किए जाने का शिकार हुए हैं। पीड़ितों में महिलाएं, लड़कियां, नाबालिग बच्चे, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। आठ साल से लेकर साठ साल तक के लोग इसमें शामिल हैं। यही नहीं, इसमें मस्तुंग के जाकिर नाम के डेढ़ साल के मासूम का मामला भी शामिल है।” इस बीच, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने कहा कि हालांकि यह दिन दुनिया भर में उन लोगों को याद करने के लिए मनाया जाता है जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया है, लेकिन बलूच लोगों के लिए जबरन गायब किया जाना साल में एक बार याद करने का मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सबीहा ने कहा, “बलोच परिवार हर दिन इस डर के साथ जीते हैं कि कहीं उनका कोई और अपना उठा न लिया जाए और गायब न कर दिया जाए। माताएं अपने बेटों का और बच्चे अपने पिता का इंतजार करते हैं। परिवार ऐसे जवाबों का इंतजार करते हैं जो शायद कभी न मिलें। बलोचिस्तान के लिए हर दिन जबरदस्ती गायब किए जाने की घटनाओं का दिन होता है। दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए, जबकि परिवार उम्मीद और असहनीय दर्द के बीच इंतजार कर रहे हैं।” इस दिन के मौके पर, ‘बलोच वॉयस फॉर जस्टिस’ (बीवीजे) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की रक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभाने, पाकिस्तानी अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करने और बलोचिस्तान में लोगों को जबरदस्ती गायब करने की प्रथा को खत्म करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया।